6 दिन के मेगा हेल्थ कैंप से गाजीपुर पहुंचीं सुपर स्पेशलिटी सेवाएं, डॉक्टरों की 35000 मरीजों की जांच और 346 सर्जरियां की गईं

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के ग्रामीणों को हाल ही में स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी सुपर स्पेशलिटी सेवाओं का अनुभव प्राप्त हुआ। इससे पहले इन्हें अव्वल दर्जे की स्पेशलिस्ट हेल्थकेयर सेवाएं पाने के लिए वाराणसी या लखनऊ जैसे शहरों का रुख करना पड़ता था। लेकिन छह दिनों तक ऐसी कई सेवाओं का लाभ उन्हें अपने ही जिले में पाने का मौका मिला। यह अवसर उन्हें जिले में सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित एक मेगा हेल्थ कैंप के जरिए मिला।

यह 6 दिनों का था, जिसका उद्घाटन 26 सितंबर को राज्य के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने किया। इस कैंप में 35,200 मरीजों ने चेकअप कराया और 346 सर्जरी की गईं। इसमें ऐसे मुश्किल प्रोसीजर भी शामिल थे जिनके लिए आम तौर पर मरीजों को जिले से बाहर जाना पड़ता है। युवा बीजेपी नेता अभिनव सिन्हा के नेतृत्व में इस कैंप का आयोजन किया गया था। इसमें ओपीडी सेवा 28 सितंबर तक चलीं, जिसके बाद 28 सितंबर से 1 अक्टूबर तक सर्जरी हुईं।

इस पहल की खास बात यह थी कि एक ही जगह पर इतनी बड़ी मात्रा में स्पेशलिस्ट केयर उपलब्ध थी। इसमें 498 डॉक्टरों और हेल्थकेयर वर्कर्स की टीम ने हिस्सा लिया, जिसमें AIIMS दिल्ली, जसलोक हॉस्पिटल मुंबई, अपोलो हॉस्पिटल दिल्ली और हेरिटेज हॉस्पिटल वाराणसी से जुड़े स्पेशलिस्ट शामिल थे। मरीजों को कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी और गैस्ट्रोएंटरोलॉजी से लेकर ऑर्थोपेडिक्स, ऑप्थल्मोलॉजी, गायनेकोलॉजी, पीडियाट्रिक्स, डर्मेटोलॉजी, यूरोलॉजी और प्लास्टिक सर्जरी तक 15 विशेषज्ञ सेवाएं मिलीं। तीन दिन के ओपीडी फेज के दौरान, 35,828 लैब टेस्ट भी किए गए। कैंप में 346 सर्जरी हुईं, जिसमें 140 आंखों की सर्जरी और 206 दूसरे प्रोसीजर शामिल थे। इनमें ऑर्थोपेडिक्स, जनरल सर्जरी और प्लास्टिक सर्जरी से जुड़े 22 बड़े मुश्किल केस थे।

जनरल मेडिसिन, ऑर्थोपेडिक्स, ऑप्थल्मोलॉजी और न्यूरोलॉजी में कुल मिलाकर 21,120 मरीज आए – जो OPD में आने वालों का 60% है। बाकी 11 स्पेशलिटी OPD में और 14,080 मरीजों का इलाज किया गया। इस बड़े मेडिकल ऑपरेशन में 350 से ज्यादा वॉलंटियर्स ने मदद की, जिन्हें “गाजीपुर के स्वस्थ योद्धा” कहा गया, जिन्होंने मरीजों को रजिस्ट्रेशन, नेविगेशन और जगह पर देखभाल में मदद की। मेडिकल टीम में फैकल्टी और कंसल्टेंट, रेजिडेंट, इंटर्न, नर्स, पैरामेडिक्स और फार्मासिस्ट शामिल थे।

आयोजनकर्ता अभिनव सिन्हा ने कहा कि इस कैंप का मकसद अच्छी हेल्थकेयर ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों में लोगों तक, बिना उन्हें लंबी दूरी तय किए पहुंचाना था। इस पहल को 2026 में उत्तर प्रदेश में आयोजित सबसे बड़ा हेल्थ कैंप बताया, और कहा कि इस मॉडल को राज्य में कहीं और भी दोहराया जा सकता है। गाजीपुर से बड़ी बात यह है कि सिर्फ छह दिनों में, एक अस्थायी हेल्थकेयर इकोसिस्टम ने कंसल्टेशन, डायग्नोस्टिक्स, स्पेशलिस्ट ट्रीटमेंट और सर्जरी को एक ही जगह पर ला दिया — जिससे हेल्थकेयर को मरीजों तक पहुंचाने पर ध्यान दिया गया, न कि मरीज़ों को हेल्थकेयर सेंटर जाने पर।

Business Idea: बिना दुकान खोले घर से शुरू करें कैटरिंग का बिजनेस! एक्सपर्ट से समझिए सिर्फ 50000 के बजट से कैसे होगी कमाई

Business Idea: बिना दुकान खोले घर से शुरू करें कैटरिंग का बिजनेस! एक्सपर्ट से समझिए सिर्फ 50000 के बजट से कैसे होगी कमाई

Business Idea: बहुत से लोगों को लगता है कि खाना बनाने जैसे बेसिक काम से बड़ा व्यवसाय शुरू नहीं किया जा सकता है। लेकिन यह काम जरूरत या शौक से आगे बढ़कर एक फायदेमंद बिजनेस भी बन सकता है। केटरिंग एक ऐसा बिजनेस है, जिसे छोटे स्तर पर छोटे से ऑर्डर के साथ शुरू किया जा सकता है। केटरिंग के काम को शुरू करने के लिए किसी बड़े रेस्तरां या फैंसी सेटअप की जरूरत नहीं होती। कस्टमर और ऑर्डर बढ़ने के साथ कारोबार रफ्तार पकड़ लेता है। दिल्ली के शेफ अजय भल्ला लंबे समय से केटरिंग बिजनेस में काम कर रहे हैं। उनके अनुसार, केटरिंग बिजनेस शुरू करते समय सबसे जरूरी बात यह है कि खर्चों और ऑर्डर का हिसाब-किताब पहले से समझ लें।

शुरुआत में पैसा कहां लगेगा

कैटरिंग शुरू करने पर आपका पैसा मुख्य रूप से किचन के सामान, गैस, बर्तन, कच्चे माल, पैकेजिंग और जरूरी स्टाफ पर लगेगा। लेकिन शुरुआत में हर सामान खरीदने की बजाय कुछ बर्तन और सर्विंग का सामान किराये पर भी लिया जा सकता है। यह फैसला बड़ी रकम लगाने से बचाता है और आगे के लिए रास्ता भी बनाता है। मान लीजिए शुरुआत में आपको 30-50 लोगों का छोटा ऑर्डर मिलता है। यह ऑर्डर महंगे इक्विपमेंट खरीदे बिना जरूरी सामान से काम शुरू किया जा सकता है। जैसे-जैसे ऑर्डर बढ़ें, वैसे-वैसे किचन और सर्विंग का सेटअप बढ़ाया जा सकता है। तो अगर आप घर से या छोटे किचन सेटअप से 30-50 लोगों के ऑर्डर लेकर शुरुआत करते हैं, तो करीब ₹50,000 से ₹1 लाख का शुरुआती बजट मानकर चल सकते हैं।

सबसे बड़ा खर्च कच्चे माल का

केटरिंग बिजनेस में असली हिसाब सिर्फ यह नहीं है कि एक प्लेट कितने में बिकती है। सबसे पहले उस प्लेट को बनाने की लागत पर ध्यान देना जरूरी है। सब्ज़ियां, दालें, चावल, आटा, मसाले, तेल, दूध, दही, चीज, मीट, या दूसरी चीजों की लागत इन सभी को जोड़ना होगा। इसके अलावा, पैकेजिंग, गैस, डिलीवरी, स्टाफ, बर्तनों, या परोसने के बर्तनों की लागत को भी ध्यान में रखना होगा। उसके बाद ही आपको हर प्लेट का रेट तय करना चाहिए। नहीं तो, आपको ऑर्डर तो मिलेंगे, लेकिन लागत निकालने के बाद मुनाफा बहुत कम हो सकता है।

शुरुआत में मेन्यू छोटा रखें

अजय भल्ला ने बताया कि नए बिजनेस में 20-30 अलग-अलग आइटम रखने की जरूरत नहीं है। शुरू में, एक छोटा मेन्यू रखें जिसमें कुछ ऐसे आइटम हों जिन्हें आप अच्छी क्वालिटी के साथ ज्यादा क्वांटिटी में बना सकें। इससे रॉ मटेरियल खरीदना आसान हो जाएगा और खाने की बर्बादी कम होगी। एक छोटे ऑर्डर में दो सब्जियां, दाल, चावल, रोटी और एक डेजर्ट जैसे सीमित विकल्प हो सकते हैं। बाद में, ग्राहक की मांग के हिसाब से स्टार्टर्स, चाट या लाइव काउंटर जैसे आइटम जोड़े जा सकते हैं।

ग्राहक कैसे मिलेंगे

सबसे बड़ी चुनौती है शुरू में ग्राहक का मिलना। आज सोशल मीडिया का दौर है, यह ग्राहक लाने में मददगार हो सकता है। अपनी सोसाइटी, आस-पास के ऑफिस और जान-पहचान वालों से छोटे ऑर्डर ले सकते हैं। आपका पहला मकसद शादी के बड़े ऑर्डर पाना नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसे क्लाइंट बनाना होना चाहिए जो आपके खाने और सर्विस से खुश हों और दोबारा ऑर्डर करें। केटरिंग में साख बहुत जरूरी है। समय पर खाना पहुंचाना, सही क्वांटिटी में खाना रखना और साफ-सफाई बनाए रखना, आने वाले ऑर्डर के लिए उतना ही जरूरी है जितना कि खाने को स्वादिष्ट बनाना।

दिल्ली से शुभांगी तिवारी की रिपोर्ट

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Jitiya 2026 Date: 3 या 4 अक्टूबर, कब है जितिया व्रत? संतान की अच्छी सेहत और खुशहाली के लिए माताएं इस दिन करेंगी निर्जला उपवास, जानें मुहूर्त और पारण समय

Jitiya 2026 Date: हिंदू धर्म में जितिया या जिउतिया व्रत को सबसे कठिन उपवासों में से एक माना जाता है। यह व्रत माताएं अपनी संतान को हर मुसीबत से रक्षा करने, लंबी उम्र, अच्छी सेहत और उसकी खुशहाली के लिए करती हैं। इस व्रत को करने वाली माताएं 24 घंटे से अधिक समय तक निर्जला उपवास करती हैं और अपनी संतान की सलामती की प्रार्थना करती हैं। जितिया व्रत हर साल आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को किया जाता है। जितिया को जिउतिया और जीवित्पुत्रिका व्रत भी कहते हैं। इस साल इस व्रत की तारीख को लेकर भक्तों में कुछ कंफ्यूजन की स्थिति है, क्योंकि आश्विन कृष्ण अष्टमी तिथि 3 और 4 अक्टूबर को दोनों ही दिन प्राप्त हो रही है। आइए जानें पंचांग से इस साल ये व्रत किस दिन किया जाएगा?

जितिया व्रत 2026 सही तारीख

पंचांग के अनुसार, आश्विन कृष्ण अष्टमी तिथि 3 अक्टूबर को सुबह 7 बजकर 59 मिनट पर प्रारंभ हो रही है। लेकिन उस दिन उदयातिथि नहीं होगी क्योंकि सूर्योदय के बाद ही अष्टमी तिथि शुरू हो रही है। अष्टमी तिथि का समापन 4 अक्टूबर को सुबह 5 बजकर 51 मिनट पर होगा। अब समस्या यह है कि 4 अक्टूबर को सूर्योदय से पहले ही अष्टमी तिथि खत्म हो जा रही है।

प्रदोष काल मुहूर्त के आधार पर तय होगी जितिया व्रत की तारीख

जितिया व्रत की तारीख का निर्धारण प्रदोष पूजा मुहूर्त के आधार पर करते हैं, क्योंकि इस व्रत में पूजा सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में होती है। इस आधार पर देखा जाए तो जितिया व्रत के लिए प्रदोष काल 3 अक्टूबर को प्राप्त होगा, न कि 4 अक्टूबर को। ऐसे में इस साल जितिया व्रत 3 अक्टूबर, दिन शनिवार को रखा जाएगा। प्रदोष मुहूर्त के अलावा सुबह में 7:59 बजे से अष्टमी तिथि रहेगी।

जितिया व्रत 2026 पूजा मुहूर्त

जितिया के लिए पूजा का प्रदोष मुहूर्त शाम 6:05 बजे से प्रारंभ है। इस मुहूर्त से माताएं गंधर्व राजा जीमूतवाहन की पूजा करेंगी। जितिया के दिन ब्रह्म मुहूर्त 04:38 ए एम से 05:26 ए एम तक रहेगा, वहीं अभिजीत मुहूर्तत्र 11:46 ए एम से दोपहर 12:34 पी एम तक है।

जितिया व्रत का पारण समय

जितिया का निर्जला व्रत करने वाली व्रती माताएं, 4 अक्टूबर को सूर्योदय के बाद यानि सुबह 06:15 ए एम के बाद इस व्रत का पारण करेंगी।

Business Idea Under 50k: सिर्फ 50000 में शुरू करें चूड़ी-कंगन का बिजनेस, त्योहारों पर होगी डबल कमाई! जानिए इसका सीक्रेट

Business Idea Under 50k: सिर्फ 50000 में शुरू करें चूड़ी-कंगन का बिजनेस, त्योहारों पर होगी डबल कमाई! जानिए इसका सीक्रेट

Business Idea Under 50k: अपना बिजनेस शुरू करना कोई छोटी बात नहीं है। लेकिन ज्यादातर लोग मानते हैं कि इसके लिए बहुत बड़ी पूंजी लगानी पड़ती है। यही सोचकर वे अपने सपने को मारकर नौकरी की राह में आगे बढ़ जाते हैं। लेकिन कई एक छोटे व्यवसाय हैं, जिन्हें 50,000 जैसी छोटी पूंजी से भी शुरू किया जा सकता है। इनमें से एक है फिरोजाबाद में तैयार होने वाले चूड़ियों और कंगनों का बिजनेस। इस बिजनेस में लागत भी बेहद कम आती है और इससे डबल मुनाफा होता है।

चूड़ियों और कंगनों के कारोबार को खड़ा करने के लिए 50000 जितनी छोटी रकम भी काफी होती है। ये ऐसा व्यवसाय है जिसमें आप बाजार में मिलने वाले नए-नए डिजाइन और रंगों की चूड़ी-कंगन की मदद से खुद के सेट बनाकर मुनाफा कमा सकते हैं। खास बात ये है कि इस कारोबार में कोई परमिट या योग्यता नहीं चाहिए और अलग से कुछ सीखना भी जरूरी नहीं है। सभी तरह की डिजाइन का माल फिरोजाबाद की चूड़ी मार्केट में मिलता है। य़हां से सस्ते दर में सामान लेकर ऊंची कीमत पर बेचकर पैसा कमा सकते हैं।

होलसेल मार्केट से सस्ते दरों पर खरीदें सामान

चूड़ियों का ये कारोबार 50 हजार जैसी छोटी राशी के साथ शुरू किया जा सकता है। इसके लिए सामान आप होलसेल मार्केट से सस्ते दरों में खरीद सकते हैं। बाद में लोकल मार्केट में उसे ऊंचे दामों में बेचकर आसानी से मुनाफा कमा सकते हैं। फिरोजाबाद के गली बोहरान में चूडियों और कंगनों के हॉलसेल व्यापारी जाकिर खान ने लोकल 18 से बातचीत करते हुए कहा कि अगर कोई व्यक्ति नया बिजनेस शुरू करना चाहता है तो उसके लिए ये बहुत अच्छा बिजनेस है।

5 हजार से 50 हजार में शुरू हो जाएगा अपना कारोबार

इस बिजनेस को शुरू करने के लिए ज्यादा पैसों की जरूरत नहीं होती है। पांच हजार से लेकर पचास हजार रुपए तक में इस बिजनेस को शुरू कर सकते हैं। होलसेल कारोबारी जाकिर खान ने रिपोर्टर धीर सेन को बताया कि फिरोजाबाद में चूड़ियों और कंगनों का होलसेल में माल मिलता है। कांच की चूड़ियों से लेकर मैटल के कंगन तक उनके पास कम रेट में मिलते हैं। देश भर से व्यापारी उनके पास से माल को खरीदकर ले जाते हैं और बेचते हैं। इससे उनकी अच्छी कमाई होती है।

शुरू में जरूरी है नए डिजाइन की जानकारी रखना

खान कहते हैं कि शुरुआत में माल को बेचने से लेकर नई डिजाइनों की जानकारी रखना जरूरी होता है। फिर यह कारोबार धीरे-धीरे चलने लगता है। इस बिजनेस से कुछ ही महीनों में कमाई शुरू हो जाती है।

नया कारोबार शुरू करने का अच्छा मौका है करवा चौथ

अभी करवाचौथ का सीजन शुरू होने वाला है। अगर कोई नया बिजनेस शुरू करना चाहता है तो उनके पास से माल को खरीदकर ले जा सकता है। उनके यहां 80 रुपये से कंगनों के सेट की शुरुआत होती है।

माल का नहीं होता कोई नुकसान

अगर आपने नया बिजनेस शुरू किया है तो आप फिरोजाबाद की गली बोहरान से माल को खरीदें। इस बिजनेस में नुकसान होने की कोई संभावना नहीं है। अगर आपने पचास हजार का माल खरीदा है तो इसमें दोगुनी रेट से बेचने पर एक लाख की कमाई है। अगर आपका माल रखा रह जाता है, तो आप दस डिब्बे वापिस कर नई डिजाइन लेकर जा सकते हैं।

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सिर्फ 50 हजार में शुरू कर सकते हैं अपना मेडिकल स्टोर का बिजनेस! जानिए लाइसेंस और जरूरी नियमों की पूरी प्रक्रिया

कुछ लोगों को किसी और की नौकरी करने के बजाए अपना खुद का छोटा-मोटा कारोबार करना ज्यादा रास आता है। लेकिन इसके लिए सिर्फ इच्छा होना काफी नहीं है, कुछ बेसिक सवाल हैं जिनके जवाब अंतिम फैसला लेने के लिए बहुत जरूरी हैं। इनमें सबसे पहला सवाल है छोटा-मोटा कारोबार, मगर क्या? इसके बाद पूंजी, जगह और जरूरी कागजी कार्रवाई। ऐसे में, अगर आप भी छोटी पूंजी से बड़े और लंबे समय के लिए टिकाऊ बिजनेस आइडिया तलाश रहे हैं, तो मेडिकल स्टोर अच्छा विकल्प हो सकता है।

कभी न कभी छोटे-बड़े सभी को दवाओं की जरूरत जरूर पड़ती है। इसलिए मेडिकल स्टोर को ऐसे व्यवसाय के रूप में देखा जाता है, जो हफ्ते के 7 दिन और 12 महीने कमाई सकता है। देवघर के घोरलास निवासी गुंजन कुमार ने लोकल 18 इसमें बहुत ज्यादा पूंजी लगाने की जरूरत नहीं होती है। खास बात यह है कि इसे अपनी क्षमता के अनुसार छोटे स्तर से शुरू करके आगे बढ़ाया जा सकता है। उसे धीरे-धीरे बड़ा भी किया जा सकता है।

मेडिकल खोलने के लिए क्या है प्रक्रिया?

मेडिकल स्टोर खोलने के लिए सबसे पहले कुछ जरूरी नियम और प्रक्रिया पूरी करनी होती है। दवा की दुकान या मेडिकल स्टोर शुरू करने के इच्छुक युवाओं के लिए सबसे पहले दुकान के नाम से जरूरी लाइसेंस बनवाना आवश्यक होता है। इसके लिए फार्मासिस्ट की योग्यता होना जरूरी है। यानी दवा की दुकान के लाइसेंस के लिए फार्मासिस्ट की डिग्री या डिप्लोमा होना चाहिए। इसके बाद दुकान से जुड़े जरूरी मापदंड भी पूरे करने होते हैं।

मेडिकल स्टोर के लिए जरूरी जगह

गुंजन राय के अनुसार मेडिकल स्टोर के लिए कम से कम 150 स्क्वायर फीट जगह का होना जरूरी है। इसलिए दुकान शुरू करने से पहले जगह और लाइसेंस से जुड़ी सभी आवश्यकताओं को समझ लेना जरूरी है।

लाइसेंस प्रक्रिया में चालान जमा करना है जरूरी

लाइसेंस की प्रक्रिया में चालान भी जमा करना होता है। इसके लिए करीब 3 हजार रुपये का चालान कटता है और यह लाइसेंस पांच साल तक वैध रहता है। पांच साल पूरा होने के बाद इसे दोबारा रिन्यू कराना पड़ता है। यानी सिर्फ दुकान खोल लेना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि दवा बेचने के लिए जरूरी लाइसेंस और नियमों का पालन करना भी जरूरी है।

कितनी पूंजी के साथ खोल सकते हैं मेडिकल स्टोर?

मेडिकल स्टोर खोलने के इच्छुक लोगों के पास शुरुआती पूंजी होनी भी बेहद जरूरी है। मेडिकल स्टोर का काम करीब 50 हजार रुपये से भी शुरू किया जा सकता है। हालांकि दुकान की व्यवस्था और दवाइयों का अच्छा स्टॉक रखने के लिए करीब एक लाख रुपये का निवेश किया जाए तो शुरुआत बेहतर तरीके से की जा सकती है।

मेडिकल स्टोर में है छोटी शुरुआत से आगे बढ़ने की गुंजाइश

मेडिकल स्टोर एक ऐसा क्षेत्र हो सकता है, जिसमें शुरुआत छोटी रखकर धीरे-धीरे कारोबार को आगे बढ़ाने की गुंजाइश रहती है। हालांकि दवा का व्यवसाय सीधे लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ा है, इसलिए इसमें लाइसेंस, फार्मासिस्ट और दवाइयों की बिक्री से जुड़े सभी सरकारी नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है।

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कल का मौसम: 11 सितंबर को इन 3 राज्यों में बहुत भारी बारिश का अलर्ट, यूपी से लेकर बिहार-बंगाल तक आंधी-तूफान का खतरा

IMD rain alert for September 11: देशभर में अलग अलग मानसूनी प्रणालियों के असर से मौसम का मिजाज बदला हुआ है। इस बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 11 सितंबर के लिए मौसम की विस्तृत रिपोर्ट जारी करते हुए देश के तीन प्रमुख राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की गंभीर चेतावनी जारी की है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में आंधी-तूफान, गरज-चमक और झोंकेदार हवाओं के असर की आशंका भी जताई गई है।

ओडिशा, छत्तीसगढ़ और तटीय आंध्र प्रदेश में बहुत भारी बारिश का अलर्ट

मौसम विभाग के ताजा बुलेटिन के मुताबिक 11 सितंबर को छत्तीसगढ़, ओडिशा और तटीय आंध्र प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में मुसलाधार से लेकर बहुत भारी बारिश होने की प्रबल संभावना है। बंगाल की खाड़ी से आ रही नम हवाओं और मौसमी दबाव की वजह से इन तीनों राज्यों के कई क्षेत्रों में भारी जलभराव, नदियों का जलस्तर बढ़ने का खतरा बना हुआ है।

यूपी, बिहार, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड समेत कई राज्यों में तेज बारिश

बहुत भारी बारिश वाले इन 3 प्रमुख राज्यों के अलावा देश के एक बड़े हिस्से में झमाझम बारिश की स्थिति बनी रहेगी। IMD ने उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, विदर्भ, झारखंड, पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भारी बारिश का अनुमान जताया है। इसके अलावा दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत के राज्यों केरल (माहे सहित), तेलंगाना, अरुणाचल प्रदेश औरर असम और मेघालय में भी अलग-अलग जगहों पर तेज बारिश का दौर देखने को मिलेगा।

तटीय आंध्र प्रदेश में थंडरस्क्वाल, 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेंगी हवाएं

11 सितंबर को कई राज्यों में बारिश के साथ-साथ तूफानी हवाओं का भयंकर तांडव देखने को मिल सकता है। तटीय आंध्र प्रदेश में मौसम विभाग ने थंडरस्क्वाल की चेतावनी जारी की है। यहां 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और धूलभरी आंधी आने की आशंका है। इसके अलावा पूरे आंध्र प्रदेश के मैदानी इलाकों में दिन के समय तेज सतही हवाएं चलेंगी। इसी तरह विदर्भ, मराठवाड़ा, ओडिशा, रायलसीमा और तमिलनाडु (पुडुचेरी और कराईकल सहित) में गरज-चमक और बिजली कड़कने के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से हवाएं चल सकती हैं।

यूपी, बिहार, झारखंड और बंगाल में बिजली गिरने और आंधी की आशंका

उत्तर और पूर्वी भारत के मैदानी इलाकों में भी 11 सितंबर को मौसम गड़बड़ हो सकता है। बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, पूर्वी राजस्थान, तेलंगाना और अंडमान व निकोबार द्वीप समूह में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने, बिजली चमकने की संभावना जताई गई है।

उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भी गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने इन क्षेत्रों के लोगों को बिजली चमकने के दौरान खुले खेतों, पेड़ों या बिजली के खंभों के पास न रुकने की सलाह दी है।

बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में स्थिति खराब, मछुआरों को चेतावनी

समुद्री क्षेत्रों में चक्रवाती और मानसूनी हवाओं की तीव्रता काफी अधिक रहने वाली है। उत्तर-पश्चिम और मध्य बंगाल की खाड़ी के साथ-साथ पश्चिम बंगाल, बांग्लादेश, ओडिशा और उत्तरी आंध्र प्रदेश के तटों पर 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी जो बढ़कर 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती हैं।

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उधर अरब सागर में सोमालिया तट और उससे सटे दक्षिण-पश्चिम अरब सागर के इलाकों में 45 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान है. इसकी स्पीड 65 किलोमीटर प्रति घंटे के स्तर को छू सकती हैं। समुद्र में उठने वाली ऊंची लहरों और खराब स्थिति को देखते हुए मछुआरों को इन तटीय इलाकों और गहरे समुद्र में न जाने की सख्त हिदायत दी गई है।

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Business idea: अमेरिका में करोड़ों की सैलरी वाली नौकरी छोड़कर भारत लौटने वाले भारतीयों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बेहतर पारिवारिक जीवन, भारत में बढ़ते स्टार्टअप अवसर और कुछ नया करने की चाह लोगों को वापस देश आने के लिए प्रेरित कर रही है। इसी कड़ी में चेन्नई के युवा उद्यमी विवेक तिरुवेंगडम (Vivek Thiruvengadam) की कहानी इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है।

Qubit Fitness के संस्थापक और CEO विवेक तिरुवेंगदम ने बताया कि उन्होंने अमेरिका में करीब 1 करोड़ रुपये सालाना की नौकरी छोड़ दी और परिवार के साथ चेन्नई लौट आए। उस समय उनके पास सिर्फ 90 हजार रुपये की बचत थी। लेकिन उन्होंने इसी रकम से अपना बिजनेस शुरू करने का फैसला किया।

विवेक ने इंस्टाग्राम पर अपनी छह साल की यात्रा साझा करते हुए लिखा कि यह फैसला अचानक नहीं था। उनका मकसद सिर्फ ज्यादा पैसा कमाना नहीं। बल्कि परिवार के करीब रहना और ऐसा काम करना था, जिसका समाज पर सकारात्मक प्रभाव पड़े।

उन्होंने बताया कि अमेरिका में 14 साल बिताने के बाद उन्होंने और उनकी पत्नी ने अपनी 11 महीने की बेटी के साथ भारत लौटने का निर्णय लिया। उनका मानना था कि परिवार के साथ रहकर कुछ नया और सार्थक बनाना किसी बड़ी नौकरी से ज्यादा महत्वपूर्ण है।

Qubit Fitness की कैसे हुई शुरुआत?

जनवरी 2021 में विवेक ने बिना किसी ऑफिस, निवेशक या टीम के Qubit Fitness की शुरुआत की। उनके पास सिर्फ एक लैपटॉप, अपना समय और 90 हजार रुपये की बचत थी। शुरुआती दौर आसान नहीं था। पहले साल कंपनी का कारोबार करीब 20 लाख रुपये तक ही पहुंच पाया, जो अमेरिका में उनकी सालाना आय की तुलना में काफी कम था।

हालांकि, उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार मेहनत करते रहे। समय के साथ कंपनी का विस्तार हुआ। नए ग्राहक जुड़े, कामकाज बेहतर हुआ और कारोबार बढ़ता गया। भारत लौटने के छह साल बाद विवेक ने वह वित्तीय लक्ष्य हासिल कर लिया, जिसके लिए उन्होंने यह बड़ा फैसला लिया था।

अपने अनुभव शेयर करते हुए विवेक ने कहा कि उद्यमिता ने उन्हें सिखाया कि लगातार मेहनत, प्रतिभा से भी ज्यादा महत्वपूर्ण होती है। धैर्य का फल देर से मिलता है। लेकिन मिलता जरूर है। उन्होंने यह भी कहा कि उद्देश्य के साथ काम करके कमाया गया पैसा अलग तरह की संतुष्टि देता है।

सफलता का श्रेय परिवार को दिया

विवेक ने अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार, ग्राहकों और शुरुआती दिनों में उनका साथ देने वाले लोगों को दिया। उन्होंने कहा कि इन्हीं लोगों के भरोसे और सहयोग की वजह से वह अपने सपने को हकीकत में बदल पाए। सोशल मीडिया पर उनकी कहानी को लोगों ने खूब सराहा। एक यूजर ने लिखा कि आपकी सफलता के पीछे आपकी अच्छाई और सोच सबसे बड़ी ताकत है।

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वहीं, दूसरे यूजर ने कहा कि आपका ब्रांड और सोच लोगों के लिए प्रेरणा है। परिवार के साथ रहकर आगे बढ़ने का आपका फैसला शानदार है। कई अन्य लोगों ने भी विवेक की यात्रा को प्रेरणादायक बताते हुए उन्हें बधाई दी। विवेक का कहना है कि कभी-कभी विश्वास ही आपका इकलौता बिजनेस प्लान होता है। इस यात्रा ने उन्हें सिखाया कि प्रतिभा से ज्यादा निरंतरता मायने रखती है। उद्देश्यपूर्ण काम से मिलने वाली संतुष्टि अलग ही होती है।

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3500 रुपये के इन्वेस्टमेंट से खड़ा कर लिया 1.5 करोड़ का मिलेट बिजनेस! नासिक के इंजीनियर तुषार ने किया कमाल

Business idea: जीवन में कभी-कभी बड़ी कठिनाइयों के दौरान ही बड़े अवसर क्रिएट करने का मौका मिलता है। ऐसा ही कुछ हुआ नासिक के एक मैकेनिकल इंजीनियरिंग ग्रैजुएट के साथ। भारत समेत पूरी दुनिया जब कोरोना की महामारी से जूझ रही थी तो उसी समय इस इंजीनियर ने एक शानदार बिजनेस की शुरुआत के लिए कदम बढ़ा दिया। ये कहानी है तुषार तलवारे की जिन्होंने कोरोना लॉकडाउन के दौरान महज 3500 रुपये के शुरुआती निवेश से अपने घर से मिलेट (बाजरा/मोटा अनाज) बेचने का एक छोटा सा प्रयोग शुरू किया था।

आज उनका यह स्टार्टअप फूडोनिक नाम के एक बड़े ब्रांड में बदल चुका है। इसका सालाना रेवेन्यू 1.5 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह कंपनी आज पूरे भारत में मिलेट खाखरा, आटा, पास्ता, नूडल्स और कई तरह के हेल्दी स्नैक्स बेच रही है।

कॉलेज के रूममेट और IIT बॉम्बे के सेमिनार से मिला आइडिया

तुषार की इस एंटरप्रेन्योरशिप जर्नी की शुरुआत बेहद दिलचस्प रही। 30Stades के साथ एक इंटरव्यू में तुषार ने बताया कि जब वह नवी मुंबई में पढ़ाई कर रहे थे तब उनके एक कॉलेज रूममेट ने उन्हें उनकी फिटनेस और वेलनेस के प्रति रुचि को देखते हुए हेल्दी फूड सेक्टर में करियर तलाशने की सलाह दी थी।

तुषार की यह रुचि तब एक ठोस बिजनेस आइडिया में बदल गई जब उन्होंने पवई स्थित IIT बॉम्बे में प्रसिद्ध मिलेट रिसर्चर डॉ खादर वली के एक सेमिनार में हिस्सा लिया। इस सेशन से उन्हें मिलेट्स की न्यूट्रिशनल वैल्यू का पता चला और उन्होंने महसूस किया कि उस समय बाजार में मिलेट-आधारित प्रोडक्ट्स बहुत ही कम उपलब्ध थे।

इस सेक्टर को बेहतर ढंग से समझने के लिए तुषार ने कई दूसरे सेमिनार्स में हिस्सा लिया और मिलेट की खेती, इसके स्वास्थ्य लाभ व सप्लाई चेन को समझने के लिए ऑनलाइन कोर्सेज भी पूरे किए।

₹3500 का पहला ऑर्डर और लॉकडाउन में डिलीवरी की चुनौती

बड़ा निवेश करने के बजाय तुषार ने पहले इस आइडिया को छोटे स्तर पर टेस्ट करने का फैसला किया। साल 2020 में कोरोना लॉकडाउन के दौरान नासिक में अपने घर पर रहते हुए तुषार ने मात्र 3500 रुपये निवेश किए। उन्होंने डॉ खादर वली के नेटवर्क के जरिए तमिलनाडु के एक किसान से 5 अलग-अलग किस्मों के 5-5 किलो मिलेट्स खरीदे।

परिवार, दोस्तों और शुरुआती ग्राहकों से मिले सकारात्मक फीडबैक से उत्साहित होकर उन्होंने अपने अगले ऑर्डर को बढ़ाकर हर किस्म का 20-20 किलो कर दिया। लॉकडाउन के कारण जब लॉजिस्टिक्स सेवाएं पूरी तरह प्रभावित थीं तब तुषार ने ऑर्डर हासिल करने के लिए व्हाट्सएप ग्रुप्स और लोगों की सिफारिशों का सहारा लिया। उस समय सिर्फ इंडिया पोस्ट की सेवाएं चालू थीं, इसलिए वे घर पर ही अपने हाथों से एक-एक किलो के पाउच पैक करते थे और डाक के जरिए पूरे देश में ग्राहकों को भेजते थे।

किफायती कीमत की वो रणनीति जो कर गई काम

मार्केट रिसर्च के दौरान तुषार ने देखा कि कई विक्रेता 5 किलो मिलेट्स के लिए करीब 1200 रुपये तक चार्ज कर रहे थे। चूंकि उनकी खरीद लागत काफी कम थी, इसलिए उन्होंने अपने प्रोडक्ट्स की कीमत को किफायती रखने का फैसला किया। तुषार बताते हैं कि उतनी ही मात्रा के लिए उनकी खरीद लागत सिर्फ 400 रुपये के आसपास थी।

इसलिए उन्हें अपने पैक्स की कीमत पोस्टल चार्ज और प्रॉफिट मार्जिन मिलाकर 700 रुपये रखी। इससे ग्राहकों को काफी किफायती दाम में हेल्दी फूड मिलने लगा और तुषार को भी एक बेहतर मार्जिन मिला। यह प्राइसिंग स्ट्रेटजी पूरी तरह सफल रही और देश के अलग अलग हिस्सों से ताबड़तोड़ ऑर्डर आने शुरू हो गए।

₹1.5 लाख से ₹1.5 करोड़ तक का सफर

जैसे-जैसे मांग बढ़ी तुषार ने नासिक में ही 2000 रुपये महीने के किराए पर एक कमरा लिया और अपने काम को वहां शिफ्ट कर दिया। रेडी-टू-ईट मिलेट प्रोडक्ट्स की मांग को देखते हुए उन्होंने कांट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स के साथ पार्टनरशिप की और आटा, पास्ता व नूडल्स जैसे प्रोडक्ट तैयार करवाने लगे जबकि उनका खुद का ध्यान ब्रांडिंग, सेल्स और डिस्ट्रीब्यूशन पर रहा।

कंपनी ने भी फिर रफ्तार पकड़ी। साल 2020 में 1.5 लाख का टर्नओवर, साल 2021 में 12 लाख के टर्नओवर में बदल गया। साल 2023 में उन्होंने अपने पोर्टफोलियो में मिलेट चिवड़ा, फ्लेक्स और दूसरे स्नैक्स शामिल किए।

कारोबार के विस्तार के साथ तुषार को केंद्र सरकार की PMFME योजना (PM Formalisation of Micro Food Processing Enterprises Scheme) के तहत 10 लाख रुपये की सब्सिडी मिली। इस मदद से उन्होंने 15 अलग-अलग वैरायटी के मिलेट खाखरा बनाने के लिए अपनी खुद की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित की।

हीरो हैं ये 8 महिलाएं: बिना किसी केमिकल के तैयार होता है खाखरा

फैक्ट्री स्थापित करना तो केवल शुरुआत थी, मिलेट खाखरा को बड़े पैमाने पर बनाना बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हुआ। शुरुआत में आटा मशीनों से चिपक जाता था और सही खाखरा नहीं बन पाता था। फूड कंसल्टेंट्स ने इसमें बाइंडर्स और एडिटिव्स मिलाने की सलाह दी लेकिन तुषार इसे 100% नेचुरल रखना चाहते थे।

महीनों की कड़ी मेहनत और 2000 किलो से अधिक मिलेट आटा इस्तेमाल करने के बाद उनकी टीम ने परफेक्ट रेसिपी तैयार की। ये खाखरे बिना किसी प्रिजर्वेटिव, एडिटिव्स या सिंथेटिक बाइंडर्स के बनाए जाते हैं और स्वाद को बरकरार रखने के लिए कंपनी अपने खुद के मसालों का मिश्रण तैयार करती है।

वर्तमान में नासिक स्थित Fudonik की इस मैन्युफैक्चरिंग यूनिट को 8 महिलाएं संभाल रही हैं। बाजार में खाखरा लॉन्च करने से पहले कंपनी ने 6 महीने तक ग्राहकों का फीडबैक लिया और लैबोरेटरी टेस्ट भी पूरे किए।

भविष्य की योजनाएं

आज यह कंपनी इन-हाउस खाखरा और चिवड़ा बनाती है जिसके पास 2500 से अधिक रिटेल ग्राहक हैं और यह अपने B2B बिजनेस का भी तेजी से विस्तार कर रही है। अपनी आगे की योजनाओं को लेकर तुषार बताते हैं कि वे अगले साल मिलेट कुकीज भी लॉन्च करने की तैयारी कर रहे हैं।

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Disclaimer: यह रिपोर्ट पूरी तरह से थर्ड पार्टी मीडिया आउटलेट्स की रिपोर्ट पर आधारित है। मनीकंट्रोल ने इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है और न ही वह इनका समर्थन करता है।