रील बनाने जूते पहनकर ‘रथ’ पर चढ़ा मुस्लिम युवक, कोर्ट ने दी रोजाना मंदिर सफाई की सजा

Ulto rath yatra

Ulto Rath Yatra controversy: सोशल मीडिया पर व्यूज और लाइक्स हासिल करने का भूत किस तरह कानूनी मुसीबत बन सकता है, इसका ताजा उदाहरण पूर्व बर्धमान जिले के कालना से सामने आया है। 'उल्टो रथ यात्रा' के दो दिन बाद, एक मुस्लिम युवक द्वारा जूते पहनकर रथ पर चढ़कर रील (Reel) बनाने और उसे फेसबुक पर अपलोड करने के मामले में अदालत ने एक ऐतिहासिक और सुधारात्मक रुख अपनाया है।

 

धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोपी युवक को अदालत ने जमानत तो दे दी, लेकिन इसके साथ ही एक ऐसी शर्त रखी है जो समाज में मिसाल और चर्चा का विषय बन गई है।

क्या है पूरा मामला?

यह घटना पूर्व बर्धमान जिले के समुद्रगढ़ निवासी बाबूलाल शेख से जुड़ी है। 'उल्टो रथ यात्रा' के समापन के बाद कालना क्षेत्र में खड़े एक धार्मिक रथ की सीढ़ियों पर आरोपी जूते पहनकर चढ़ गया और वहां डांस करते हुए वीडियो बना लिया। वीडियो वायरल होते ही स्थानीय श्रद्धालुओं और निवासियों में भारी रोष फैल गया। 

  • धार्मिक समिति की शिकायत : 'पश्चिम नसरतपुर हरेकृष्ण नामहट्ट संघ' के सचिव जितेन मोंडल के नेतृत्व में समिति ने नदानघाट पुलिस थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई।
  • पुलिस कार्रवाई : एफआईआर के आधार पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बाबूलाल शेख को गिरफ्तार कर लिया।
  • लागू कानूनी धाराएं : आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत विभिन्न समूहों के बीच वैमनस्य/दुश्मनी फैलाने और जानबूझकर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने से संबंधित गंभीर प्रावधानों में मामला दर्ज किया गया।

कोर्ट का फैसला : सख्त कानूनी धाराओं के बीच सुधारात्मक न्याय

आरोपी बाबूलाल शेख को कालना के अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया। सुनवाई के दौरान अभियुक्त की ओर से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने, पश्चाताप व्यक्त करने (कान पकड़कर माफी मांगने) और जांच में सहयोग करने की दलीलें दी गईं। अदालत ने मामले की संवेदनशीलता और सामाजिक सौहार्द को ध्यान में रखते हुए आरोपी को सशर्त जमानत दे दी।

कोर्ट द्वारा तय की गई मुख्य शर्तें

  • मंदिर एवं सड़क की रोजाना सफाई : जांच पूरी होने तक आरोपी को रोजाना मंदिर परिसर और उससे सटी मुख्य सड़क की सफाई करनी होगी।
  • रथ की सीढ़ियों की धुलाई : रिपोर्ट्स के अनुसार, आरोपी को पुलिस बल की मौजूदगी में रथ की सीढ़ियों को पानी से धोकर साफ करने का आदेश दिया गया।
  • जांच अधिकारी के समक्ष हाजिरी : आरोपी को हफ्ते में कम से कम एक बार जांच अधिकारी के समक्ष पेश होना होगा और विवेचना में पूर्ण सहयोग करना होगा।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय दंड प्रक्रिया (और अब BNS प्रक्रिया) में ऐसे कई अवसर आए हैं जहां अदालतों ने केवल जेल भेजने के बजाय 'सुधारात्मक न्याय' (Restorative Justice) का मॉडल अपनाया है। कोर्ट के इस फैसले से समाज में यह संदेश जाता है कि कानून का उद्देश्य केवल सजा देना ही नहीं, बल्कि गलती का अहसास कराना और सामाजिक समरसता को दोबारा कायम करना भी है।

रील संस्कृति पर सबक

सोशल मीडिया के लिए धार्मिक स्थलों की पवित्रता या सांस्कृतिक प्रतीकों का अनादर करने वालों के लिए यह एक सख्त चेतावनी है। सोशल मीडिया की क्षणिक प्रसिद्धि के लिए कानून और धार्मिक आस्था से खिलवाड़ भारी पड़ सकता है। हालांकि, कोर्ट के इस विवेकपूर्ण फैसले ने जहां एक तरफ सख्त संदेश दिया है, वहीं दूसरी तरफ पश्चाताप कर रहे युवक को समाज में सुधार का अवसर भी प्रदान किया है।

असम बाढ़ : 10 हजार परिवारों तक राहत पहुंचाएगा रिलायंस फाउंडेशन, 4 हजार मवेशियों की भी होगी देखभाल

Reliance Foundation has launched relief operation to assist flood-affected people in Assam

– वनतारा, रिलायंस रिटेल और जियो भी इस अभियान में सहयोग कर रहे

– शिवसागर और चराइदेव जिलों में 5 लाख से अधिक लोग प्रभावित

– पशुधन की सहायता के लिए वनतारा की 39 सदस्यीय टीम तैनात

ऊपरी असम में भारी बारिश और अचानक आई बाढ़ से प्रभावित लोगों की सहायता के लिए रिलायंस फाउंडेशन ने राहत अभियान शुरू किया है। अभियान के तहत शिवसागर और चराइदेव जिलों के कम से कम 10 हजार परिवारों तक भोजन, सुरक्षित पेयजल, राशन, स्वास्थ्य और अस्थाई आश्रय से जुड़ी सहायता पहुंचाई जाएगी। दोनों जिलों में पांच लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। 

 

रिलायंस फाउंडेशन की आपदा प्रबंधन टीम ने जिला प्रशासन और स्थानीय संगठनों के साथ प्रभावित इलाकों का आकलन करने के बाद राहत कार्य शुरू किए हैं। वनतारा, रिलायंस रिटेल और जियो भी इस अभियान में सहयोग कर रहे हैं। 

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जिन परिवारों के पास भोजन या राशन की व्यवस्था नहीं है, उनके लिए सामुदायिक रसोई चलाई जा रही हैं। इसके साथ ही सूखे राशन के पैकेट भी बांटे जाएंगे। विस्थापित परिवारों के लिए तिरपाल, ग्राउंडशीट, मच्छरदानी, रस्सी और बिस्तर वाले आपातकालीन आश्रय किट की व्यवस्था की जा रही है। 

 

बाढ़ के कारण स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुई हैं। स्वास्थ्य सेवाएं जल्द बहाल करने के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की सफाई और मरम्मत शुरू की गई है। प्रभावित परिवारों को स्वच्छ पेयजल तथा साफ-सफाई से जुड़ी जरूरी किट्स भी उपलब्ध कराई जा रही है।

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पालतू पशुओं को हुए नुकसान को देखते हुए वनतारा की 39 सदस्यीय टीम भी मौके पर तैनात की गई है। टीम पशुओं के इलाज और देखभाल के साथ स्थानीय समुदाय के दूसरे जानवरों की भी सहायता करेगी। रिलायंस फाउंडेशन ने करीब 4 हजार प्रभावित मवेशियों के लिए चारा उपलब्ध कराने की योजना बनाई है। 

 

राहत सामग्री जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचे, इसके लिए फाउंडेशन की टीमें जिला प्रशासन, सरकारी विभागों, स्थानीय संस्थाओं और सहयोगी संगठनों के साथ मिलकर काम कर रही हैं।

जगन्नाथ के रथ बदल रहे हैं बच्चों की ज़िंदगी|Young Artist Is Funding Education Through Jagannath Rath

ओडिशा के 20 वर्षीय सुमित कुमार दास आर्ट कॉलेज में पढ़ाई के साथ भगवान जगन्नाथ के रथ बनाते हैं। वह गरीब बच्चों को मुफ्त में रथ बनाना सिखाते हैं और रथ बेचकर होने वाले मुनाफे का एक हिस्सा भी उन्हें देते हैं, ताकि वे ट्यूशन फीस भर सकें, किताबें खरीद सकें और अपने परिवार की मदद कर सकें।
आज उनके हाथों से बने रथ देश के कई शहरों तक पहुंचते हैं और उनकी कमाई कई बच्चों के सपनों को नई उड़ान दे रही है।
सुमित ने साबित कर दिया कि सबसे खूबसूरत सफलता वही है, जो अपने साथ-साथ दूसरों का भविष्य भी संवार दे। :heart:

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3500 रुपये के इन्वेस्टमेंट से खड़ा कर लिया 1.5 करोड़ का मिलेट बिजनेस! नासिक के इंजीनियर तुषार ने किया कमाल

Business idea: जीवन में कभी-कभी बड़ी कठिनाइयों के दौरान ही बड़े अवसर क्रिएट करने का मौका मिलता है। ऐसा ही कुछ हुआ नासिक के एक मैकेनिकल इंजीनियरिंग ग्रैजुएट के साथ। भारत समेत पूरी दुनिया जब कोरोना की महामारी से जूझ रही थी तो उसी समय इस इंजीनियर ने एक शानदार बिजनेस की शुरुआत के लिए कदम बढ़ा दिया। ये कहानी है तुषार तलवारे की जिन्होंने कोरोना लॉकडाउन के दौरान महज 3500 रुपये के शुरुआती निवेश से अपने घर से मिलेट (बाजरा/मोटा अनाज) बेचने का एक छोटा सा प्रयोग शुरू किया था।

आज उनका यह स्टार्टअप फूडोनिक नाम के एक बड़े ब्रांड में बदल चुका है। इसका सालाना रेवेन्यू 1.5 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह कंपनी आज पूरे भारत में मिलेट खाखरा, आटा, पास्ता, नूडल्स और कई तरह के हेल्दी स्नैक्स बेच रही है।

कॉलेज के रूममेट और IIT बॉम्बे के सेमिनार से मिला आइडिया

तुषार की इस एंटरप्रेन्योरशिप जर्नी की शुरुआत बेहद दिलचस्प रही। 30Stades के साथ एक इंटरव्यू में तुषार ने बताया कि जब वह नवी मुंबई में पढ़ाई कर रहे थे तब उनके एक कॉलेज रूममेट ने उन्हें उनकी फिटनेस और वेलनेस के प्रति रुचि को देखते हुए हेल्दी फूड सेक्टर में करियर तलाशने की सलाह दी थी।

तुषार की यह रुचि तब एक ठोस बिजनेस आइडिया में बदल गई जब उन्होंने पवई स्थित IIT बॉम्बे में प्रसिद्ध मिलेट रिसर्चर डॉ खादर वली के एक सेमिनार में हिस्सा लिया। इस सेशन से उन्हें मिलेट्स की न्यूट्रिशनल वैल्यू का पता चला और उन्होंने महसूस किया कि उस समय बाजार में मिलेट-आधारित प्रोडक्ट्स बहुत ही कम उपलब्ध थे।

इस सेक्टर को बेहतर ढंग से समझने के लिए तुषार ने कई दूसरे सेमिनार्स में हिस्सा लिया और मिलेट की खेती, इसके स्वास्थ्य लाभ व सप्लाई चेन को समझने के लिए ऑनलाइन कोर्सेज भी पूरे किए।

₹3500 का पहला ऑर्डर और लॉकडाउन में डिलीवरी की चुनौती

बड़ा निवेश करने के बजाय तुषार ने पहले इस आइडिया को छोटे स्तर पर टेस्ट करने का फैसला किया। साल 2020 में कोरोना लॉकडाउन के दौरान नासिक में अपने घर पर रहते हुए तुषार ने मात्र 3500 रुपये निवेश किए। उन्होंने डॉ खादर वली के नेटवर्क के जरिए तमिलनाडु के एक किसान से 5 अलग-अलग किस्मों के 5-5 किलो मिलेट्स खरीदे।

परिवार, दोस्तों और शुरुआती ग्राहकों से मिले सकारात्मक फीडबैक से उत्साहित होकर उन्होंने अपने अगले ऑर्डर को बढ़ाकर हर किस्म का 20-20 किलो कर दिया। लॉकडाउन के कारण जब लॉजिस्टिक्स सेवाएं पूरी तरह प्रभावित थीं तब तुषार ने ऑर्डर हासिल करने के लिए व्हाट्सएप ग्रुप्स और लोगों की सिफारिशों का सहारा लिया। उस समय सिर्फ इंडिया पोस्ट की सेवाएं चालू थीं, इसलिए वे घर पर ही अपने हाथों से एक-एक किलो के पाउच पैक करते थे और डाक के जरिए पूरे देश में ग्राहकों को भेजते थे।

किफायती कीमत की वो रणनीति जो कर गई काम

मार्केट रिसर्च के दौरान तुषार ने देखा कि कई विक्रेता 5 किलो मिलेट्स के लिए करीब 1200 रुपये तक चार्ज कर रहे थे। चूंकि उनकी खरीद लागत काफी कम थी, इसलिए उन्होंने अपने प्रोडक्ट्स की कीमत को किफायती रखने का फैसला किया। तुषार बताते हैं कि उतनी ही मात्रा के लिए उनकी खरीद लागत सिर्फ 400 रुपये के आसपास थी।

इसलिए उन्हें अपने पैक्स की कीमत पोस्टल चार्ज और प्रॉफिट मार्जिन मिलाकर 700 रुपये रखी। इससे ग्राहकों को काफी किफायती दाम में हेल्दी फूड मिलने लगा और तुषार को भी एक बेहतर मार्जिन मिला। यह प्राइसिंग स्ट्रेटजी पूरी तरह सफल रही और देश के अलग अलग हिस्सों से ताबड़तोड़ ऑर्डर आने शुरू हो गए।

₹1.5 लाख से ₹1.5 करोड़ तक का सफर

जैसे-जैसे मांग बढ़ी तुषार ने नासिक में ही 2000 रुपये महीने के किराए पर एक कमरा लिया और अपने काम को वहां शिफ्ट कर दिया। रेडी-टू-ईट मिलेट प्रोडक्ट्स की मांग को देखते हुए उन्होंने कांट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स के साथ पार्टनरशिप की और आटा, पास्ता व नूडल्स जैसे प्रोडक्ट तैयार करवाने लगे जबकि उनका खुद का ध्यान ब्रांडिंग, सेल्स और डिस्ट्रीब्यूशन पर रहा।

कंपनी ने भी फिर रफ्तार पकड़ी। साल 2020 में 1.5 लाख का टर्नओवर, साल 2021 में 12 लाख के टर्नओवर में बदल गया। साल 2023 में उन्होंने अपने पोर्टफोलियो में मिलेट चिवड़ा, फ्लेक्स और दूसरे स्नैक्स शामिल किए।

कारोबार के विस्तार के साथ तुषार को केंद्र सरकार की PMFME योजना (PM Formalisation of Micro Food Processing Enterprises Scheme) के तहत 10 लाख रुपये की सब्सिडी मिली। इस मदद से उन्होंने 15 अलग-अलग वैरायटी के मिलेट खाखरा बनाने के लिए अपनी खुद की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित की।

हीरो हैं ये 8 महिलाएं: बिना किसी केमिकल के तैयार होता है खाखरा

फैक्ट्री स्थापित करना तो केवल शुरुआत थी, मिलेट खाखरा को बड़े पैमाने पर बनाना बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हुआ। शुरुआत में आटा मशीनों से चिपक जाता था और सही खाखरा नहीं बन पाता था। फूड कंसल्टेंट्स ने इसमें बाइंडर्स और एडिटिव्स मिलाने की सलाह दी लेकिन तुषार इसे 100% नेचुरल रखना चाहते थे।

महीनों की कड़ी मेहनत और 2000 किलो से अधिक मिलेट आटा इस्तेमाल करने के बाद उनकी टीम ने परफेक्ट रेसिपी तैयार की। ये खाखरे बिना किसी प्रिजर्वेटिव, एडिटिव्स या सिंथेटिक बाइंडर्स के बनाए जाते हैं और स्वाद को बरकरार रखने के लिए कंपनी अपने खुद के मसालों का मिश्रण तैयार करती है।

वर्तमान में नासिक स्थित Fudonik की इस मैन्युफैक्चरिंग यूनिट को 8 महिलाएं संभाल रही हैं। बाजार में खाखरा लॉन्च करने से पहले कंपनी ने 6 महीने तक ग्राहकों का फीडबैक लिया और लैबोरेटरी टेस्ट भी पूरे किए।

भविष्य की योजनाएं

आज यह कंपनी इन-हाउस खाखरा और चिवड़ा बनाती है जिसके पास 2500 से अधिक रिटेल ग्राहक हैं और यह अपने B2B बिजनेस का भी तेजी से विस्तार कर रही है। अपनी आगे की योजनाओं को लेकर तुषार बताते हैं कि वे अगले साल मिलेट कुकीज भी लॉन्च करने की तैयारी कर रहे हैं।

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Disclaimer: यह रिपोर्ट पूरी तरह से थर्ड पार्टी मीडिया आउटलेट्स की रिपोर्ट पर आधारित है। मनीकंट्रोल ने इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है और न ही वह इनका समर्थन करता है।

Jagannath Rath Yatra: पुरी में भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा के दौरान भगदड़ जैसे हालात, 200 श्रद्धालु अस्पताल पहुंचे, एक की मौत की भी खबर

Jagannath Rath Yatra in Puri: ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा के दौरान गुरुवार (16 जुलाई) को भारी भीड़ के बीच भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई। इस घटना में करीब 200 श्रद्धालुओं की तबीयत बिगड़ गई, जिन्हें इलाज के लिए पुरी मेडिकल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, भारी भीड़ की वजह से करीब 200 श्रद्धालुओं को सांस लेने में दिक्कत हुई। News18 की रिपोर्ट के मुताबिक, अब उनका इलाज पुरी मेडिकल अस्पताल में चल रहा है।

Odisha TV की रिपोर्ट के मुताबिक, ‘बड़ा डंडा’ पर रथ खिंचते हुए देखने का इंतजार कर रहे एक श्रद्धालु की दम घुटने से मौत हो गई। जबकि कई अन्य लोगों के घायल होने की आशंका है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, रथ खींचने के दौरान बड़ा डांडा (ग्रैंड रोड) पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने से कई लोगों को सांस लेने में दिक्कत होने लगी। भीड़ के दबाव और उमस के कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु अस्वस्थ हो गए, जिसके बाद उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया।

शुरुआती जानकारी के मुताबिक, यह घटना ‘पहांडी’ रस्म के दौरान बाहरी सुरक्षा घेरे से करीब 500 मीटर की दूरी पर हुई। भारी भीड़ के कारण अफरातफरी मच गई, जिसमें 200 से ज्यादा लोग घायल हो गए। घायलों में बड़ी संख्या में महिलाएं और बुजुर्ग श्रद्धालु शामिल हैं। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया और स्थिति को संभालने के लिए बचाव दलों को तैनात किया गया।

एक श्रद्धालु की मौत होने की भी खबर

सूत्रों ने बताया कि इस घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दम घुटने से एक श्रद्धालु की मौत होने की भी खबर है। हालांकि, इस संबंध में प्रशासन की ओर से आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है। घटना के बाद मौके पर मौजूद पुलिस, प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। एंबुलेंस की मदद से प्रभावित श्रद्धालुओं को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है।

पुरी की जगन्नाथ रथ यात्रा में हर साल देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं। इस बार भी रथ खींचने के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे, जिसके चलते भीड़ को नियंत्रित करने में प्रशासन को काफी मशक्कत करनी पड़ी। फिलहाल प्रशासन पूरे मामले की जांच कर रहा है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि भगदड़ जैसी स्थिति किन कारणों से पैदा हुई।

‘पहंडी’ अनुष्ठान संपन्न

ओडिशा के पुरी में नौ दिनों तक चलने वाली वार्षिक रथ यात्रा की शुरुआत लागातार बारिश और लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में ‘पहंडी’ की रस्म के साथ हुई। ‘पहंडी’ की रस्म में महाप्रभु भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई भगवान बलभद्र और उनकी बहन देवी सुभद्रा के विग्रहों को 12वीं सदी के पुरी मंदिर से रथों तक ले जाया जाता है।

घंटियों, शंख और झांझ की ध्वनि के बीच, चक्रराज सुदर्शन को सबसे पहले मुख्य मंदिर से बाहर लाया गया और देवी सुभद्रा के ‘दर्पदलन’ रथ पर विराजमान किया गया। पंडित सूर्यनारायण रथशर्मा ने बताया कि श्री सुदर्शन भगवान विष्णु का अस्त्र है, जिनकी पूजा पुरी में भगवान जगन्नाथ के रूप में की जाती है।

उन्होंने बताया कि भगवान जगन्नाथ के बड़े भाई भगवान बलभद्र के विग्रह को भी उनके ‘तालध्वज’ रथ पर स्थापित किया गया। सेवादारों द्वारा ‘शून्य पहंडी’ (रथ तक ले जाते समय देवी सुभद्रा के विग्रह का मुख आकाश की ओर होता है) शैली में भगवान जगन्नाथ और भगवान बलभद्र की बहन देवी सुभद्रा के विग्रह को उनके रथ तक ले लाया गया।

अंत में महाप्रभु भगवान जगन्नाथ के विग्रह को मंदिर से बाहर लाया गया, तो ‘बड़ा डंडा’ (रथमार्ग) पर भक्तों की भावनाएं उमड़ पड़ीं। उन्होंने अपने हाथ उठाकर और ‘जय जगन्नाथ’ का जयघोष कर महाप्रभु के रथ पर विराजमान होने का जश्न मनाया। ओडिसी नर्तकों, लोक कलाकारों और सांस्कृतिक दलों ने ‘कालिया ठाकुर’ के सामने प्रस्तुति दी।

‘पहंडी’ अनुष्ठान में तीनों देव विग्रहों को एक औपचारिक जुलूस के साथ उनके संबंधित रथों तक लाया जाता है। ये रथ मंदिर के ‘सिंह द्वार’ के सामने खड़े किए जाते हैं, ताकि उन्हें श्री गुंडिचा मंदिर ले जाया जा सके। इस 12वीं सदी के मंदिर से लगभग 2.6 किलोमीटर दूर स्थित श्री गुंडिचा मंदिर को इन देवी-देवताओं का जन्मस्थान माना जाता है।

बारिश के बीच भारी भीड़

पुरी में हो रही भारी बारिश के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं आई। वे ‘बड़ा डंडा’ पर नृत्य करते और रथ यात्रा का जश्न मनाते हुए देखे गए। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के एक अधिकारी के अनुसार, पुरी में पिछले 48 घंटों में 233 मिमी बारिश हुई है। समुद्र के किनारे बसे इस शहर में दिन के दौरान हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है।

इससे पहले दिन में, मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने तैयारियों का जायजा लिया और श्रद्धालुओं की सुरक्षा व सुविधा पर ज़ोर दिया। बारिश की वजह से जल-जमाव एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा, इसलिए उन्होंने पुरी जिला प्रशासन, नगरपालिका अधिकारियों और संबंधित विभागों को हाई अलर्ट पर रहने और पानी निकालने के लिए तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

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Ashadha Gupt Navratri 2026: आज से शुरू हुई आषाढ़ गुप्त नवरात्रि, 10 महाविद्याओं की कृपा पाने के लिए राशि अनुसार करें ये उपाय

Ashadha Gupt Navratri 2026: हिंदू धर्म मां दुर्गा की पूजा और साधना का अवसर चैत्र और शारदीय नवरात्रि समेत साल में चार बार मिलता है। इनमें दो गुप्त नवरात्रि पर्व होते हैं, आषाढ़ गुप्त नवरात्रि और माघ गुप्त नवरात्रि। 9 दिनों की इस अवधि में शक्ति के उपासक मां दुर्गा के नौ रूपों के साथ ही 10 महाविद्याओं की भी साधना करते हैं, जो तंत्र शास्त्र में वर्णित देवी माँ के शक्तिशाली रूप हैं। इस साल आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का पर्व आज 15 जुलाई से शुरू हो चुका है।

भक्तों का मानना है कि इन नौ दिनों के दौरान की गई सच्ची प्रार्थना, मंत्र जाप और पारंपरिक उपाय सेहत, करियर, कारोबार, परिवार और निजी जीवन से जुड़ी मुश्किलों को दूर करने में मदद कर सकते हैं, साथ ही खुशहाली और ईश्वरीय कृपा भी दिला सकते हैं। कई भक्त इस दौरान राशि के हिसाब से खास उपाय भी करते हैं, उनका मानना है कि इससे पॉजिटिव एनर्जी बढ़ती है और देवी मां का आशीर्वाद मिलता है।

क्यों करते हैं गुप्त नवरात्रि के दौरान 10 महाविद्याओं की पूजा?

गुप्त नवरात्रि के दौरान, भक्त आमतौर पर देवी दुर्गा की पूजा करते हैं और साथ ही खास मंत्रों और प्रसाद के जरिए 10 महाविद्याओं की पूजा भी करते हैं। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, इन आध्यात्मिक तरीकों से दुश्मनों, बीमारी, बुरी नजर, प्रोफेशनल रुकावटों और घरेलू चुनौतियों से होने वाली मुश्किलों को दूर करने में मदद मिलती है।

गुप्त नवरात्रि 2026: राशि के हिसाब से उपाय

मेष : देवी काली को लाल फूल चढ़ाएं और उनका आशीर्वाद पाने के लिए “ॐ क्रीं कालिकायै नमः” का जाप करें।

वृष : देवी को नारियल चढ़ाएं और “ॐ ह्रीं छिन्नमस्तयै नमः” का जाप करें और श्रद्धा से प्रार्थना करें।

मिथुन : “ॐ धूम धूमावत्यै स्वाहा” का जाप करें और देवी को लाल चुनरी चढ़ाएं।

कर्क : “ॐ श्रीं कमलयै नमः” का जाप करें और देवी को सूखे मेवे, बताशा या मखाना खीर चढ़ाएं।

सिंह : देवी को सिंदूर और चुनरी चढ़ाएं और “ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं त्रिपुरसुंदर्यै नमः” का जाप करें।

कन्या : देवी को हरी चुनरी चढ़ाएं और “ॐ ह्रीं स्त्रीं हुं फट्” का जाप करें। माना जाता है कि इससे किस्मत अच्छी रहती है।

तुला : मिश्री का भोग लगाएं और “ॐ ह्रीं भुवनेश्वर्यै नमः” का जाप करें।

वृश्चिक : सूखे मेवे और नारियल के साथ लाल चुनरी चढ़ाएं और “ॐ ह्रीं भैरव्यै नमः” का जाप करें।

धनु : देवी को पीले फूल और बेसन के लड्डू चढ़ाएं और “ॐ ह्रीं श्रीं मातंग्यै नमः” का जाप करें।

मकर : “ॐ ह्लीं बगलामुख्यै नमः” का जाप करें, देवी को खुशबूदार फूल और चूड़ियां चढ़ाएं।

कुंभ : गुप्त नवरात्रि के सभी नौ दिनों तक दुर्गा चालीसा का पाठ करें और पूरे व्रत के दौरान अपने घर में साफ-सफाई बनाए रखें।

मीन : गुप्त नवरात्रि के दौरान अखंड दीप जलाएं और रोज मां दुर्गा के मंत्रों का जाप करें। अपनी मनोकामना मां दुर्गा को बताएं और हल्दी की गांठ अर्पित करें, फिर इसे अपने लॉकर या कीमती सामान रखने की जगह पर सुरक्षित रखें।

Jagannath Rath Yatra 2026: 16 जुलाई को दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरू और हैदराबाद में भी निकलेगी जगन्नाथ की सवारी, जानें ये शहर कैसे मनाएंगे जगन्नाथ रथयात्रा

Jagannath Rath Yatra 2026: 16 जुलाई को दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरू और हैदराबाद में भी निकलेगी जगन्नाथ की सवारी, जानें ये शहर कैसे मनाएंगे जगन्नाथ रथयात्रा

Jagannath Rath Yatra 2026: भारत में ओडिश राज्य के पुरी शहर में हर साल भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा निकाली जाती है। इसे देखने के लिए पूरी दुनिया से श्रद्धालु जुटते हैं, तीनों लोकों के नाथ की विशाल शोभायात्रा का आनंद लेते हैं। साल 2026 में विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा की शुरुआत 16 जुलाई 2026, गुरुवार से होगी। यह पावन पर्व 24 जुलाई 2026 तक चलेगा, जिस दिन बहुड़ा यात्रा यानी वापसी यात्रा के साथ इसका समापन होगा।

पुरी की जगन्नाथ रथयात्रा के तर्ज पर देश कई शहरों में भी इसी समय या इसके आसपास भव्य आयोजन किए जाते हैं। हर बार की तरह इस साल भी दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरू और हैदराबाद में जगन्नाथ रथयात्रा का आयोजन किया जाएगा। इसके लिए बड़े पैमाने पर तैयारियां की गई हैं और अब इन्हें अंतिम रूप दिया जा रहा है। इस दौरान, रथयात्रा के अलावा श्रद्धालुओं की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और सामुहिक भोज भी आयोजित किए जाते हैं।

दिल्ली का त्यागराज जगन्नाथ मंदिर 59वीं रथयात्रा निकालेगा

दिल्ली में सबसे बड़ी रथयात्रा त्यागराज जगन्नाथ मंदिर की ओर से निकाली जाती है। न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल जगन्नाथ रथयात्रा का 59वां संस्करण 16 जुलाई से 27 जुलाई तक चलेगा। इस त्योहार का मुख्य आकर्षण भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा का खूबसूरती से सजे हुए रथों पर जुलूस होता है। रिपोर्ट के मुताबिक, पहली बार देवताओं के लिए तीन अलग-अलग रथों पर शोभायात्रा निकालने की तैयारी है।

इस्कॉन और हौज खास मंदिर में खास जश्न होंगे

ईस्ट ऑफ कैलाश में इस्कॉन मंदिर खास दर्शन, भजन, कीर्तन, आध्यात्मिक प्रवचन और एक रथ यात्रा का आयोजन करेगा। इस बीच, दिल्ली के ओडिया समुदाय द्वारा बनाया गया हौज खास का ऐतिहासिक श्री जगन्नाथ मंदिर भी अपनी सालाना रथ यात्रा आयोजित करेगा।

न्यू लिंक रोड से मुंबई में शुरू होगी रथयात्रा

मुंबई में 16 जुलाई को सालाना जगन्नाथ रथयात्रा का आयोजन किया जाएगा। इसके लिए हजारों की संख्या में भक्तों के इकट्ठा होने की उम्मीद है। यह रथयात्रा अंधेरी वेस्ट में न्यू लिंक रोड से शुरू होगी और इस्कॉन जुहू तक जाएगी।

हैदराबाद में 47वीं सालाना इस्कॉन रथयात्रा होगी

इस्कॉन एबिड्स की हैदराबाद ब्रांच 16 जुलाई को 47वीं सालाना श्री जगन्नाथ रथयात्रा आयोजित करेगी। 1979 से हर साल मनाए जाने वाले इस उत्सव में एक लाख से ज्यादा भक्तों के आने की उम्मीद है। रथ यात्रा सुबह 11 बजे एनटीआर स्टेडियम से शुरू होगी और आरटीसीएक्स रोड्स, हिमायत नगर, लिबर्टी, बशीरबाग, एबिड्स, MJ मार्केट और गांधी भवन मेट्रो स्टेशन से होते हुए 8 km का रास्ता तय करेगी, और शाम करीब 6 बजे एग्जीबिशन ग्राउंड पर खत्म होगी।

इस्कॉन बेंगलुरु अपने सभी केंद्रों पर रथ यात्रा निकालेगा

बेंगलुरु में श्रील प्रभुपाद के इस्कॉन ने घोषणा की है कि वह श्री जगन्नाथ मंदिर एडमिनिस्ट्रेशन (SJTA), पुरी द्वारा तय नौ दिन के त्योहार के दौरान, धार्मिक परंपराओं के अनुसार, अपने सभी सेंटर्स पर जगन्नाथ रथ यात्रा मनाएगा। इस उत्सव में रथयात्रा, भक्ति कार्यक्रम, भजन, कीर्तन और प्रसाद वितरण शामिल होगा।

आस्था और संस्कृति का उत्सव

रथ यात्रा के सबसे महत्वपूर्ण रीति-रिवाजों में से एक भगवान जगन्नाथ का रथ खींचना है। भक्तों का मानना है कि इस परंपरा में हिस्सा लेने से आशीर्वाद, समृद्धि और आध्यात्मिक पुण्य मिलता है। यह उत्सव “जय जगन्नाथ” के नारों, भक्ति संगीत, ढोल और रथों के साथ नाच-गाने से भरा होता है।

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महाराष्ट्र, यूपी और उत्तराखंड को रेलवे ने दिया बड़ा तोहफा, शुरू की ये नई ट्रेनें…जानें पूरी डिटेल्स

भारतीय रेलवे ने यात्रियों को बड़ी सौगात देते हुए कई नई ट्रेन सेवाएं शुरू की और कुछ ट्रेनों के रूट बढ़ाने का ऐलान किया है। इससे महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के यात्रियों को बेहतर रेल सुविधा मिलेगी। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोमवार को कई नई ट्रेन सेवाओं की शुरुआत की और महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड में कुछ मौजूदा रेल मार्गों का विस्तार करने का ऐलान किया। केंद्रीय रेल मंत्री ने भुवनेश्वर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इन सेवाओं को हरी झंडी दिखाई। अश्विनी वैष्णव पुरी की रथ यात्रा के लिए रेलवे की तैयारियों का जायजा लेने के लिए ओडिशा दौरे पर थे।

इन जगहों को जोड़ेगी

TOI की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बड़ी घोषणाओं में नांदेड़ से मुंबई के बीच एक नई एक्सप्रेस ट्रेन भी शामिल है। ये ट्रेन वाशिम और हिंगोली के रास्ते चलेगी, जिससे महाराष्ट्र के विदर्भ और मराठवाड़ा क्षेत्र के कई जिलों में रेल संपर्क बेहतर होगा और यात्रियों को आने-जाने में सुविधा मिलेगी। रेलवे ने टनकपुर से नांदेड़ के बीच नई एक्सप्रेस ट्रेन की भी शुरुआत की है। इससे उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के तराई क्षेत्र सहित दोनों इलाकों के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों, खासकर सिख समुदाय को काफी सुविधा मिलने की उम्मीद है।

इसके साथ ही टनकपुर-पीलीभीत ट्रेन का विस्तार अब शाहजहांपुर तक कर दिया गया है, जबकि टनकपुर-आगरा स्पेशल ट्रेन को नियमित ट्रेन सेवा के रूप में चलाने का फैसला लिया गया है।

इन जगहों पर भी रुकेगी ट्रेन

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि, नई ट्रेन सेवाएं लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांग को ध्यान में रखकर शुरू की गई हैं। उन्होंने कहा कि इससे क्षेत्रीय रेल संपर्क और बेहतर होगा। साथ ही उन्होंने भरोसा दिलाया कि खटीमा और बनबसा में ट्रेन के ठहराव की मांग पर भी रेलवे विचार करेगा। मंत्री ने कहा, “अगर यह संभव हुआ, तो हम खटीमा और बनबसा में इस ट्रेन का स्टॉपेज जरूर देंगे।”

देश भर में बिछाए गए 37 हजार किलोमीटर ट्रैक

केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में देशभर में करीब 37 हजार किलोमीटर नए रेलवे ट्रैक बिछाए गए हैं और लगभग 99.6 प्रतिशत रेल नेटवर्क का इलेक्ट्रिफाइड पूरा हो चुका है। उन्होंने ये भी बताया कि ओणम के दौरान केरल के लिए 100 विशेष ट्रेनें चलाई जाएंगी, जबकि पुरी की रथ यात्रा में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 300 से अधिक स्पेशल ट्रेनें संचालित की जाएंगी। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि, ओडिशा में रेलवे ढांचे को मजबूत बनाने के लिए बड़े स्तर पर काम किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि, राज्य में 90 हजार करोड़ रुपये से अधिक की रेल परियोजनाएं चल रही हैं, जिनका उद्देश्य रेल नेटवर्क का विस्तार करना और यात्रियों के लिए बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है।