भागवत न्यूयॉर्क में दुनिया के पहले इस्कॉन मंदिर पहुंचे:बोले- विश्व में कई तरह के संघर्ष, कृष्ण चेतना से ही शांति आ सकती है

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने शुक्रवार को न्यूयॉर्क में दुनिया के पहले इस्कॉन सेंटर का दौरा किया। मंदिर में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आज दुनिया में कई तरह के संघर्ष हैं। ऐसे समय में ‘कृष्ण चेतना’ शांति ला सकती है। उन्होंने कहा कि दुनिया में भले ही अलग-अलग तरह की विविधताएं, मतभेद और संघर्ष हों, लेकिन अगर लोगों को यह समझ आने लगे कि सब कुछ कृष्ण का ही हिस्सा है, तो दुनिया में बेहतर और शांतिपूर्ण माहौल बनाया जा सकता है। भागवत 26 सेकंड एवेन्यू स्थित उस जगह पर भी पहुंचे, जहां स्वामी प्रभुपाद ने जुलाई 1966 में इस्कॉन की स्थापना की थी। इसे मैचलैस गिफ्ट्स भी कहा जाता है। इस्कॉन इस साल अपनी स्थापना की 60वीं वर्षगांठ मना रहा है। इस्कॉन के 120 देशों में 1,300 मंदिर हैं। 29 अगस्त को मैडिसन स्क्वायर में भागवत का कार्यक्रम RSS प्रमुख 25 अगस्त को न्यूयॉर्क पहुंचे थे। वे RSS के 100 साल पूरे होने के मौके पर तीन देशों, अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन दौरे पर हैं। इस दौरान वे भारतीय समुदाय और अलग-अलग संगठनों के कार्यक्रमों में हिस्सा लेने वाले हैं। भागवत 29 अगस्त को न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। यह कार्यक्रम RSS के 100 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित किए जा रहे कार्यक्रमों का हिस्सा है। यह कार्यक्रम रक्षाबंधन के मौके पर आयोजित किया जा रहा है। अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग (AHEAD) फोरम आयोजक है। कार्यक्रम में भागवत का संबोधन भी होगा। कार्यक्रम से पहले विवाद, न्यूयॉर्क मेयर विरोध कर चुके न्यूयॉर्क में भागवत के कार्यक्रम को लेकर विरोध भी हुआ है। मेयर जोहरान ममदानी ने कहा कि वह RSS के इस कार्यक्रम का समर्थन नहीं करते। हालांकि, उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं पता कि निजी तौर पर आयोजित कार्यक्रम को रद्द करने का अधिकार शहर प्रशासन के पास है या नहीं। हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन ने जारी की सुरक्षा सलाह कार्यक्रम से पहले हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन ने सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है। संगठन ने लोगों से सतर्क रहने, आसपास की गतिविधियों पर नजर रखने और किसी भी विवाद से बचने की अपील की है। फाउंडेशन ने कार्यक्रम में आने वालों से दूसरों के साथ शांतिपूर्ण तरीके से बातचीत करने को कहा है। कार्यक्रम में शामिल होने वाले आचार्य महामंडलेश्वर श्री स्वामी अवधेशानंद गिरि जी महाराज ने कहा कि विरोध करने वालों को अपनी राय रखने और आलोचना करने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम दुनिया को भाईचारे और शांति का संदेश देगा। RSS के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने इसे अंतरधार्मिक कार्यक्रम बताया। उनके मुताबिक, इसमें अलग-अलग संस्कृतियों और धर्मों को मानने वाले लोग शामिल होंगे। अमेरिकी आयोग ने RSS पर बैन की मांग की थी भागवत के अमेरिका दौरे से पहले अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) ने RSS पर बैन लगाने की मांग की है। आयोग ने 19 अगस्त को अमेरिकी सरकार से RSS नेताओं को हाई लेवल राजनयिक सुविधाएं नहीं देने और उनसे आधिकारिक मुलाकात नहीं करने की अपील भी की। भारत ने USCIRF की इन टिप्पणियों पर आपत्ति जताई। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 20 अगस्त को आयोग को ‘पक्षपाती संस्था’ बताया था। उन्होंने कहा कि USCIRF लंबे समय से भारत को लेकर गलत और भड़काऊ बयान देता रहा है, इसलिए उसकी बातों को गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है। मार्च की रिपोर्ट में RSS और RAW पर कार्रवाई की सिफारिश USCIRF ने मार्च में अपनी सालाना रिपोर्ट में भारत में धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर भी चिंता जताई थी। रिपोर्ट में RSS और RAW समेत कुछ संगठनों और लोगों पर बैन लगाने की सिफारिश की गई थी। भारत ने रिपोर्ट को ‘विकृत और चुनिंदा’ बताते हुए खारिज कर दिया था। सरकार ने कहा था कि रिपोर्ट में ऐसे स्रोतों का इस्तेमाल किया गया है जिनकी विश्वसनीयता पर सवाल हैं और इसमें भारत की स्थिति की एकतरफा तस्वीर पेश की गई है। 2018 में भी अमेरिका गए थे भागवत मोहन भागवत इससे पहले सितंबर 2018 में अमेरिका गए थे। उन्होंने शिकागो में 7 से 9 सितंबर 2018 तक आयोजित दूसरे वर्ल्ड हिंदू कांग्रेस में हिस्सा लिया था। इस कार्यक्रम में 60 देशों से करीब 2,500 प्रतिनिधि शामिल हुए थे। भागवत ने कांग्रेस के उद्घाटन सत्र में मुख्य भाषण दिया था। 2018 के इस दौरे की उपलब्ध रिपोर्टों में भागवत की किसी अमेरिकी राजनयिक से मुलाकात या उन्हें किसी औपचारिक राजनयिक सम्मान दिए जाने का जिक्र नहीं मिलता। उनका दौरा मुख्य रूप से वर्ल्ड हिंदू कांग्रेस और उससे जुड़े कार्यक्रमों पर केंद्रित था।

Jagannath Rath Yatra 2026: 16 जुलाई को दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरू और हैदराबाद में भी निकलेगी जगन्नाथ की सवारी, जानें ये शहर कैसे मनाएंगे जगन्नाथ रथयात्रा

Jagannath Rath Yatra 2026: भारत में ओडिश राज्य के पुरी शहर में हर साल भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा निकाली जाती है। इसे देखने के लिए पूरी दुनिया से श्रद्धालु जुटते हैं, तीनों लोकों के नाथ की विशाल शोभायात्रा का आनंद लेते हैं। साल 2026 में विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा की शुरुआत 16 जुलाई 2026, गुरुवार से होगी। यह पावन पर्व 24 जुलाई 2026 तक चलेगा, जिस दिन बहुड़ा यात्रा यानी वापसी यात्रा के साथ इसका समापन होगा।

पुरी की जगन्नाथ रथयात्रा के तर्ज पर देश कई शहरों में भी इसी समय या इसके आसपास भव्य आयोजन किए जाते हैं। हर बार की तरह इस साल भी दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरू और हैदराबाद में जगन्नाथ रथयात्रा का आयोजन किया जाएगा। इसके लिए बड़े पैमाने पर तैयारियां की गई हैं और अब इन्हें अंतिम रूप दिया जा रहा है। इस दौरान, रथयात्रा के अलावा श्रद्धालुओं की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और सामुहिक भोज भी आयोजित किए जाते हैं।

दिल्ली का त्यागराज जगन्नाथ मंदिर 59वीं रथयात्रा निकालेगा

दिल्ली में सबसे बड़ी रथयात्रा त्यागराज जगन्नाथ मंदिर की ओर से निकाली जाती है। न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल जगन्नाथ रथयात्रा का 59वां संस्करण 16 जुलाई से 27 जुलाई तक चलेगा। इस त्योहार का मुख्य आकर्षण भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा का खूबसूरती से सजे हुए रथों पर जुलूस होता है। रिपोर्ट के मुताबिक, पहली बार देवताओं के लिए तीन अलग-अलग रथों पर शोभायात्रा निकालने की तैयारी है।

इस्कॉन और हौज खास मंदिर में खास जश्न होंगे

ईस्ट ऑफ कैलाश में इस्कॉन मंदिर खास दर्शन, भजन, कीर्तन, आध्यात्मिक प्रवचन और एक रथ यात्रा का आयोजन करेगा। इस बीच, दिल्ली के ओडिया समुदाय द्वारा बनाया गया हौज खास का ऐतिहासिक श्री जगन्नाथ मंदिर भी अपनी सालाना रथ यात्रा आयोजित करेगा।

न्यू लिंक रोड से मुंबई में शुरू होगी रथयात्रा

मुंबई में 16 जुलाई को सालाना जगन्नाथ रथयात्रा का आयोजन किया जाएगा। इसके लिए हजारों की संख्या में भक्तों के इकट्ठा होने की उम्मीद है। यह रथयात्रा अंधेरी वेस्ट में न्यू लिंक रोड से शुरू होगी और इस्कॉन जुहू तक जाएगी।

हैदराबाद में 47वीं सालाना इस्कॉन रथयात्रा होगी

इस्कॉन एबिड्स की हैदराबाद ब्रांच 16 जुलाई को 47वीं सालाना श्री जगन्नाथ रथयात्रा आयोजित करेगी। 1979 से हर साल मनाए जाने वाले इस उत्सव में एक लाख से ज्यादा भक्तों के आने की उम्मीद है। रथ यात्रा सुबह 11 बजे एनटीआर स्टेडियम से शुरू होगी और आरटीसीएक्स रोड्स, हिमायत नगर, लिबर्टी, बशीरबाग, एबिड्स, MJ मार्केट और गांधी भवन मेट्रो स्टेशन से होते हुए 8 km का रास्ता तय करेगी, और शाम करीब 6 बजे एग्जीबिशन ग्राउंड पर खत्म होगी।

इस्कॉन बेंगलुरु अपने सभी केंद्रों पर रथ यात्रा निकालेगा

बेंगलुरु में श्रील प्रभुपाद के इस्कॉन ने घोषणा की है कि वह श्री जगन्नाथ मंदिर एडमिनिस्ट्रेशन (SJTA), पुरी द्वारा तय नौ दिन के त्योहार के दौरान, धार्मिक परंपराओं के अनुसार, अपने सभी सेंटर्स पर जगन्नाथ रथ यात्रा मनाएगा। इस उत्सव में रथयात्रा, भक्ति कार्यक्रम, भजन, कीर्तन और प्रसाद वितरण शामिल होगा।

आस्था और संस्कृति का उत्सव

रथ यात्रा के सबसे महत्वपूर्ण रीति-रिवाजों में से एक भगवान जगन्नाथ का रथ खींचना है। भक्तों का मानना है कि इस परंपरा में हिस्सा लेने से आशीर्वाद, समृद्धि और आध्यात्मिक पुण्य मिलता है। यह उत्सव “जय जगन्नाथ” के नारों, भक्ति संगीत, ढोल और रथों के साथ नाच-गाने से भरा होता है।

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दिल्ली-एनसीआर में भारी बारिश का कहर! सड़कें बनीं नदियां, जलभराव और ट्रैफिक जाम से लोग बेहाल, देखें वीडियो

Delhi Rain: गुरुवार सुबह दिल्ली और पूरे एनसीआर में हुई मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया। तेज बारिश के कारण कई इलाकों की सड़कें डूब गईं, लंबा ट्रैफिक जाम लग गया और रोजाना आने-जाने वालों की भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। सामने आए एक वीडियो में दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और बुलंदशहर की सड़कें पूरी तरह जलमग्न दिखाई दीं। पानी से लबालब सड़कों पर वाहन रेंगते नजर आए, जबकि लोगों को आने-जाने में काफी दिक्कत हुई।

वहीं, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने दिल्ली के लिए रेड अलर्ट जारी किया है और चेतावनी दी है कि राष्ट्रीय राजधानी में दिन के ज्यादातर समय में भारी बारिश हो सकती है। मौसम विभाग के मुताबिक, दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 10 जुलाई तक काफी ज्यादा से लेकर व्यापक बारिश की संभावना है, जबकि अधिकारी बारिश से जुड़ी दिक्कतों से निपटने के लिए हाई अलर्ट पर हैं।

दिल्ली-एनसीआर में जलभराव, कई जगहों से सामने आए वीडियो

रातभर हुई तेज बारिश के बाद दिल्ली-एनसीआर के कई इलाकों से जलभराव की तस्वीरें और वीडियो सामने आए हैं। इन वीडियो में लगातार बारिश का असर साफ देखा जा सकता है।

दिल्ली के बुराड़ी, सदर बाजार, संगम विहार और मेहरौली-बदरपुर रोड समेत कई इलाकों में सड़कों पर पानी भर गया। कई घंटे तक हुई बारिश के कारण जगह-जगह जलभराव की स्थिति बन गई।

पानी से भरी सड़कों पर गाड़ियाँ सावधानी से चलती दिखीं, जबकि कई इलाकों में ट्रैफिक की रफ्तार काफी धीमी हो गई।

एक वीडियो में अक्षरधाम मंदिर के पास NH-24 पर गाड़ियों की लंबी कतारें दिखीं, जहां सुबह के व्यस्त समय में भारी बारिश के कारण ट्रैफिक धीमा हो गया था।

पड़ोसी शहर नोएडा में भी भारी जलभराव देखा गया। सेक्टर-75 से सामने आए वीडियो में तेज बारिश के बाद सड़कें पानी में डूबी हुई दिखाई दीं।

गाजियाबाद में भी भारी बारिश का असर साफ देखने को मिला। इंदिरापुरम और अभय खंड इलाके से सामने आए वीडियो में रिहायशी सड़कों पर बारिश का पानी भर गया।

शास्त्रीनगर और कौशांबी से भी ऐसी ही तस्वीरें सामने आईं, जहां सड़कों पर पानी जमा होने के कारण आने-जाने वालों को देरी हुई और ट्रैफिक की रफ्तार धीमी रही।

बुलंदशहर में भी भारी बारिश का असर दिखा। सामने आए वीडियो में रात भर हुई बारिश के बाद सड़कों पर पानी जमा हुआ नजर आया।

दिल्ली-गुरुग्राम बॉर्डर पर भी ट्रैफिक जाम की खबर मिली, जहां बारिश और जलभराव के कारण ऑफिस जाने के व्यस्त समय में गाड़ियों की आवाजाही धीमी हो गई।

उमस से राहत, लेकिन आने-जाने वालों को परेशानी

लगातार हो रही बारिश से दिल्ली-एनसीआर के लोगों को कई दिनों से पड़ रही उमस और गर्मी से राहत जरूर मिली है। हालांकि, तेज बारिश ने आम जिंदगी पर भी असर डाला है। दिल्ली-NCR के कई निचले इलाकों में पानी भरने की खबर है। IMD ने बताया कि बारिश तेज होने से पहले, रात 2.30 बजे तापमान 25.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया और हवाएं शांत थीं।

मौसम विभाग ने अनुमान जताया है कि दिल्ली के कई इलाकों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं, जबकि कुछ जगहों पर हवा की रफ्तार 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना है।

जलभराव से निपटने के लिए सभी सरकारी एजेंसियां अलर्ट पर

दिल्ली में लगातार हो रही बारिश और जलभराव की स्थिति को देखते हुए दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने हालात का जायजा लिया और सभी सरकारी एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रहने का निर्देश दिया।

मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के अनुसार, “दिल्ली सरकार जलभराव की स्थिति से निपटने के लिए युद्धस्तर पर काम कर रही है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के आदेशों के बाद सभी सरकारी एजेंसियां ​​हाई अलर्ट पर हैं।”

मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से आगे कहा गया कि जलभराव वाले इलाकों से पानी निकालने और राजधानी में ट्रैफिक की आवाजाही सुचारू बनाए रखने के लिए पीडब्ल्यूडी (PWD), दिल्ली जल बोर्ड (DJB) और नगर निगम (MCD) की टीमों को तैनात किया गया है।

वहीं, मानसून से पहले नरेला और द्वारका समेत कई बड़े स्टॉर्म वॉटर ड्रेनों की समय रहते सफाई (डी-सिल्टिंग) किए जाने का भी फायदा देखने को मिला। इसकी वजह से कई प्रमुख स्थानों पर बड़े स्तर पर जलभराव नहीं हुआ और NHPC चौक जैसे अंडरपास भारी बारिश के बावजूद ज्यादातर समय चालू रहे।

रात भर हुई बारिश से उखड़े पेड़

PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के ईस्ट ऑफ कैलाश इलाके में राजा धीर सिंह मार्ग पर दो पेड़ उखड़ गए, जिससे कुछ समय के लिए ट्रैफिक बाधित हुआ।

दिल्ली फायर सर्विस (DFS) के अनुसार, एक पेड़ इस्कॉन मंदिर के पास गिरा, जबकि दूसरा नेशनल हार्ट इंस्टीट्यूट के बाहर गिरा। दोनों ही घटनाओं में किसी के घायल होने की खबर नहीं है।

इस बीच, IMD ने दिन भर और बारिश होने का अनुमान जताया है, इसलिए अधिकारी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं क्योंकि दिल्ली और NCR के कई इलाकों में जलभराव और ट्रैफिक जाम की समस्या बनी हुई है।

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बंगाल में मिड-डे मील से अंडा हटने के शोर के बीच जानिए दिल्ली, यूपी, तमिलनाडु, तेलंगना समेत देश के दूसरे राज्यों में क्या मिलता है, फुल लिस्ट

भारतीय स्कूलों में मिड-डे मील योजना (PM POSHAN) के तहत बच्चों को अंडा दिए जाने पर बहस कोई नई नहीं है। अब यह विवाद पश्चिम बंगाल में एक बार फिर गरमा गया है। यहां के सरकारी स्कूलों के मेनू से अंडे को हटा दिया गया है। सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार ने कोलकाता नगर निगम क्षेत्र के स्कूलों में मिड-डे मील तैयार करने की जिम्मेदारी इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस (ISKCON) को सौंपने का फैसला किया है। इस्कॉन सिर्फ शाकाहारी भोजन ही परोसता है इसलिए अब बच्चों के मेनू में अंडे की जगह पनीर, सोया, राजमा और दालों जैसे विकल्पों को शामिल करने की चर्चा है। इस फैसले ने एक बड़े राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है। वैसे राज्य सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि वह छात्रों तक अंडे की पहुंच बनाए रखने के लिए ओडिशा मॉडल को अपना सकती है।

क्या है ओडिशा मॉडल और पीएम पोषण (PM POSHAN) योजना?

ओडिशा मॉडल: इस मॉडल के तहत मिड-डे मील तैयार करने वाली मुख्य एजेंसी भोजन में अंडा नहीं देती है। इसके बजाय स्कूलों को अलग से अतिरिक्त फंड दिया जाता है। इससे वे खुद अंडे खरीदकर छात्रों को अलग से परोस सकें।

पीएम पोषण: मिड-डे मील कार्यक्रम को अब पीएम पोषण के नाम से जाना जाता है। ये दुनिया की सबसे बड़ी स्कूल फीडिंग योजनाओं में से एक है। केंद्र सरकार इसके लिए कैलोरी और प्रोटीन आवश्यकताओं सहित पोषण संबंधी मानक तय करती है लेकिन मेनू चुनने की आजादी पूरी तरह राज्यों के पास होती है। यही वजह है कि देश के अलग-अलग राज्यों में बच्चों को अलग-अलग भोजन मिलता है।

अंडा परोसने वाले राज्यों में आई कमी

पिछले एक दशक में पीएम पोषण योजना के तहत अंडा परोसने वाले राज्यों की संख्या में लगातार गिरावट आई है। साल 2015-16 में देश के 16 राज्यों में मिड-डे मील के मेनू में अंडा शामिल था। यह साल 2025-26 में घटकर सिर्फ 13 राज्य तक रह गया है। इसका मतलब है कि अब भारत के केवल एक-तिहाई राज्यों में ही स्कूली बच्चों को अंडा दिया जा रहा है।

देश के प्रमुख राज्यों का मिड-डे मील मेनू: कहां क्या मिलता है?

तमिलनाडु: यह स्कूल के भोजन में अंडा शामिल करने वाला अग्रणी राज्य रहा है। यहां चावल, सांभर, सब्जियों और अन्य पौष्टिक चीजों के साथ सप्ताह में कई बार बच्चों को अंडा परोसा जाता है। स्कूल न्यूट्रिशन के मामले में अक्सर इस राज्य को एक मॉडल के रूप में देखा जाता है।

आंध्र प्रदेश: यहां साप्ताहिक मेनू में नियमित रूप से अंडा शामिल होता है। इसके साथ ही बच्चों को चावल, दाल, सब्जियां और कुछ क्षेत्रों में दूध भी दिया जाता है।

तेलंगाना: तेलंगाना के सरकारी स्कूलों में बच्चों को सप्ताह में कई बार अंडा दिया जाता है। इसके अलावा चावल, दाल और सब्जियों की करी यहां के मुख्य भोजन का हिस्सा हैं।

ओडिशा: विशेष रूप से आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों में व्यापक रूप से अंडा परोसा जाता है। पश्चिम बंगाल के लिए भी यह एक संभावित मॉडल के रूप में उभरा है ताकि केंद्रीय रसोई के शाकाहारी होने के बावजूद बच्चों को अंडा मिलता रहे।

बिहार: बिहार के सरकारी स्कूलों में पीएम पोषण मेनू के तहत चावल, दाल और सब्जियों के साथ बच्चों को अंडा दिया जाता है।

असम: सरकारी स्कूलों के मिड-डे मील मेनू में अंडा शामिल है।

त्रिपुरा: इस योजना के तहत प्रोटीन सप्लीमेंट के रूप में बच्चों को अंडा दिया जाता है।

उत्तराखंड: इस पहाड़ी राज्य में भी स्कूल के भोजन के हिस्से के रूप में अंडा परोसा जाता है।

मुख्य रूप से शाकाहारी मेनू वाले राज्य

देश के कई राज्य ऐसे हैं जहां मिड-डे मील का मेनू पूरी तरह या मुख्य रूप से शाकाहारी है और वहां अंडा नहीं दिया जाता:

दिल्ली: दिल्ली के सरकारी स्कूलों में पीएम पोषण योजना के तहत मुख्य रूप से शाकाहारी भोजन ही प्रदान किया जाता है।

उत्तर प्रदेश: यूपी के स्कूलों में बड़े पैमाने पर शाकाहारी भोजन ही परोसा जाता है, जिसमें बिना अंडे के चावल, दाल, रोटी और मौसमी सब्जियां शामिल हैं।

गुजरात: यहां का मिड-डे मील पूरी तरह शाकाहारी है, जिसमें आमतौर पर चावल या खिचड़ी, दाल, सब्जियां और कभी-कभी दूध शामिल होता है।

मध्य प्रदेश: यहां का मेनू मुख्य रूप से शाकाहारी है, जो अनाज, दालों और सब्जियों पर केंद्रित है।

राजस्थान: सरकारी स्कूलों में शाकाहारी भोजन मिलता है, जिसके मुख्य मेनू में दाल, रोटी, चावल और सब्जियां शामिल हैं।

हरियाणा: यहां भी मिड-डे मील शाकाहारी है और इसमें अंडे शामिल नहीं हैं।

छत्तीसगढ़ और गोवा: छत्तीसगढ़ में मुख्य रूप से चावल, दाल और सब्जियों पर आधारित शाकाहारी भोजन मिलता है, जबकि गोवा का आधिकारिक मिड-डे मील मेनू भी शाकाहारी है।

महाराष्ट्र का विशेष मामला

महाराष्ट्र सरकार ने वित्तीय दिक्कतों का हवाला देते हुए पीएम पोषण योजना के तहत दिए जाने वाले अंडे और चीनी के लिए राज्य की फंडिंग को वापस ले लिया है। हालांकि स्कूलों को अंडा परोसने से रोका नहीं गया है लेकिन अगर वे इसे जारी रखना चाहते हैं तो उन्हें सार्वजनिक योगदान (जनसहयोग) या अन्य स्थानीय स्रोतों के माध्यम से खुद फंड की व्यवस्था करनी होगी।

बंगाल में फैसले को लेकर छिड़ा सियासी और पोषण संबंधी विवाद

पश्चिम बंगाल में इस फैसले के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। टीएमसी सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने मेनू से अंडा हटाने के फैसले की आलोचना की है। उनका कहना है कि बड़ा सवाल यह है कि क्या धार्मिक खान-पान की मान्यताओं को एक सरकार द्वारा वित्तपोषित पोषण कार्यक्रम का रूप तय करना चाहिए, जो लाखों स्कूली बच्चों के लिए बनाया गया है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने विधानसभा में इस फैसले का बचाव किया। उन्होंने कहा कि हम मिड-डे मील पकाने की जिम्मेदारी इस्कॉन को दे रहे हैं। अगर आपको कोई आपत्ति है तो हरे कृष्णा न कहें, कोई आपको मजबूर नहीं करेगा। आपको खाने के लिए अच्छा और शुद्ध भोजन मिलेगा, चिंता की कोई बात नहीं है।

पोषण के नजरिए से कितना जरूरी है अंडा?

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रिशन (NIN) के मुताबिक अंडे को आहार प्रोटीन का सबसे कुशल और बेहतरीन स्रोत माना जाता है। इसकी प्रोटीन बायोअवेलेबिलिटीलगभग 94% होती है। इसके उलट चने की प्रोटीन बायोअवेलेबिलिटी लगभग 76% और सोयाबीन की करीब 54% होती है। अंडे जरूरी अमीनो एसिड, विटामिन और सूक्ष्म पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। ये तत्व बच्चों के शारीरिक विकास, संज्ञानात्मक विकास और समग्र स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

पश्चिम बंगाल में अब अंडों को लेकर बवाल, मिड डे मील से इसके हटने की सुगबुगाहट और इस्कॉन से जोड़ा जा रहा पूरा विवाद क्या है? समझिए

पश्चिम बंगाल मिड-डे मील विवाद (West Bengal Mid-Day Meal Controversy): पश्चिम बंगाल में स्कूलों के मिड-डे मील (स्कूली भोजन) के मेनू से अंडों को हटाए जाने की सुगबुगाहट को लेकर एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। इस पूरे मामले को धार्मिक संस्था इस्कॉन (ISKCON) और राज्य की नई भाजपा सरकार से जोड़कर देखा जा रहा है। तृणमूल कांग्रेस ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए आरोप लगाया है कि राज्य में शाकाहार थोपने की कोशिश की जा रही है और इससे बच्चों के पोषण पर असर पड़ेगा। आइए समझते हैं कि आखिर यह पूरा विवाद क्या है और इस पर अलग-अलग पक्षों का क्या कहना है।

विवाद की शुरुआत: बजट में इस्कॉन को शामिल करने का प्रस्ताव

इस पूरे विवाद की जड़ पश्चिम बंगाल सरकार के नए बजट से जुड़ी है। सोमवार को राज्य का पहला बजट पेश करते हुए पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री स्वप्न दासगुप्ता ने घोषणा की थी कि मिड-डे मील योजना के तहत भोजन तैयार करने और उसके वितरण में इस्कॉन की सहायता लेने की उम्मीद है। इसके बाद ऐसी खबरें और सोशल मीडिया पर दावे सामने आने लगे कि कोलकाता नगर निगम क्षेत्र के तहत आने वाले स्कूलों में जहां राज्य सरकार पके हुए भोजन की जिम्मेदारी इस्कॉन को सौंपने पर विचार कर रही है, वहां के मेनू से अंडों को पूरी तरह हटा दिया जाएगा। चर्चा यह भी चली कि इस्कॉन के नए मेनू में अंडों की जगह पौधों से मिलने वाले प्रोटीन जैसे कि पनीर और सोयाबीन को शामिल किया जा सकता है।

टीएमसी विधायक कुणाल घोष ने जताई चिंता, सरकार से पुनर्विचार की मांग की

तृणमूल कांग्रेस के विधायक कुणाल घोष ने सरकार के इन संकेतों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा कि वर्तमान में अंडे मिड-डे मील योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और बच्चों के पोषण में इनका बड़ा योगदान है। उन्होंने राज्य सरकार से ऐसे किसी भी कदम पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है जिससे अंडे मेनू से बाहर हो जाएं।

कुणाल घोष ने कहा कि, ‘इस्कॉन एक बेहद सम्मानित धार्मिक संस्था है, लेकिन समस्या यह है कि बच्चों को खाना खिलाना एक बड़ी चुनौती है। अंडा एक ऐसी चीज है जिसे बच्चे बहुत पसंद करते हैं। यह न केवल उनके पोषण और स्वास्थ्य के लिए अच्छा है, बल्कि बच्चों को काफी आकर्षित भी करता है। चूंकि इस्कॉन एक धार्मिक संगठन है, इसलिए यदि वे मिड-डे मील तैयार करेंगे तो उन्हें भोजन को पूरी तरह से शाकाहारी रखना होगा। ऐसे में बच्चों का मेनू नॉन-वेजिटेरियन से वेजिटेरियन हो जाएगा और अंडे पूरी तरह से खत्म हो जाएंगे। इसलिए हम सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध करते हैं।’

डेरेक ओ’ब्रायन का भाजपा सरकार पर तीखा हमला, ‘बंगाल में शाकाहार थोपने की कोशिश’

तृणमूल कांग्रेस के संयुक्त सचिव और राज्यसभा सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने भी इस मुद्दे को लेकर भाजपा पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल की नई भाजपा सरकार बच्चों को पोषण से वंचित कर रही है और राज्य में जबरन शाकाहार थोपने की कोशिश कर रही है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में ओ’ब्रायन ने इस विवाद को चुनाव प्रचार के दौरान खान-पान की आदतों पर हुई राजनीतिक बहस से जोड़ते हुए लिखा कि चुनाव अभियान के दौरान ‘मछली खाने’ के तमाशे के बाद, आखिरकार गुजरात जिमखाना का असली रूप सामने आ गया है। बंगाल में नई भाजपा सरकार काम पर लग गई है। विरोधियों पर अंडे फेंको, लेकिन मिड-डे मील से अंडे हटाकर बच्चों को पोषण से वंचित कर दो। शाकाहार थोपा जा रहा है। बंगाल इसे खारिज करता है।’

अफवाहों पर इस्कॉन का स्पष्टीकरण- अभी कोई मेनू फाइनल नहीं हुआ

विवाद और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दावों के बीच इस्कॉन कोलकाता के उपाध्यक्ष राधारमण दास ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने वायरल हो रहे कथित मेनू को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि अभी भोजन सूची को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। राधारमण दास ने X पर पोस्ट में कहा कि, ‘मेरे संज्ञान में आया है कि कुछ लोग कोलकाता में मिड-डे मील के लिए एक प्रस्तावित मेनू साझा कर रहे हैं। हालांकि, मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि ऐसा कोई भी मेनू अभी फाइनल नहीं किया गया है और न ही यह सूची हमारी ओर से जारी की गई है। एक बार मेनू फाइनल हो जाने के बाद, हम इसकी आधिकारिक घोषणा करेंगे। कृपया इस तरह की गलत जानकारी साझा करने से बचें।’

क्या हैं मिड-डे मील (PM POSHAN) के नियम?

शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, ‘पीएम पोषण’ (प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण) योजना के तहत सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में बालवाटिका और कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों को गर्म पका हुआ भोजन दिया जाता है। इस योजना के नियम कुछ इस तरह हैं-

स्थानीय मेनू की छूट: केंद्र सरकार के नियमों के तहत, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह छूट दी गई है कि वे निर्धारित पोषण मानकों का पालन करते हुए स्थानीय परिस्थितियों और प्राथमिकताओं के अनुरूप अपना मेनू खुद तय कर सकते हैं।

गुणवत्ता और स्वच्छता गाइडलाइंस: केंद्र सरकार ने भोजन की गुणवत्ता, सुरक्षा और स्वच्छता को लेकर कड़े दिशानिर्देश जारी किए हैं। इसमें प्रमाणित सामग्री का उपयोग, रसोइयों का प्रशिक्षण और बच्चों को परोसे जाने से पहले स्कूल प्रबंधन समिति के सदस्यों व शिक्षकों द्वारा भोजन को अनिवार्य रूप से चखना शामिल है।

मुख्य जिम्मेदारी: इस योजना को जमीनी स्तर पर लागू करने और बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने की पूरी जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन की होती है।

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