Ravi Pradosh Vrat 2026 Date: आषाढ़ का अंतिम प्रदोष व्रत भी होगा रविवार को, इस दिन बन रहा सर्वार्थ सिद्धि और इंद्र योग का दुर्लभ संयोग

Ravi Pradosh Vrat 2026 Date: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का महत्वपूर्ण स्थान है। यह व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है और इसमें प्रदोष काल में पूजा का विधान है। माना जाता है कि सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में महादेव अपने निवास स्थान कैलाश पर प्रसन्न मुद्रा में विराजमान होते हैं। इस समय मां पार्वती संग शिव परिवार का पूजन विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।

प्रदोष व्रत हर हिंदू माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को किया जाता है। इस समय आषाढ़ माह का शुक्ल पक्ष चल रहा है। इस माह का अंतिम प्रदोष व्रत रविवार के दिन रखा जाएगा, क्योंकि आषाढ़ शुक्ल त्रयोदशी तिथि रविवार के दिन पड़ रही है। खास बात यह है कि इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और इंद्र योग बन रहा है। साथ ही इस दिन ज्येष्ठा नक्षत्र लगने से इसका महत्व और बढ़ गया है। आइए जानें आषाढ़ माह का अंतिम प्रदोष व्रत किस दिन किया जाएगा?

जुलाई का अंतिम प्रदोष 2026 तारीख

वैदिक पंचांग के अनुसार, 26 जुलाई को आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि दोपहर में 1 बजकर 57 मिनट पर शुरू होगी। इस तिथि की समाप्ति 27 जुलाई को शाम 4 बजकर 14 मिनट पर होगी। इस व्रत में उदयातिथि की गणना नहीं होती है, प्रदोष काल का महत्व होता है। इस आधार पर जुलाई का अंतिम प्रदोष व्रत 26 जुलाई दिन रविवार को है। रविवार को होने वाले प्रदोष की वजह से यह रवि प्रदोष व्रत होगा।

रवि प्रदोष व्रत 2026 मुहूर्त

आषाढ़ माह के अंतिम प्रदोष व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम को 7 बजकर 16 मिनट पर शुरू होगा। यह मुहूर्त रात को 9 बजकर 21 मिनट पर खत्म होगा। प्रदोष के दिन ब्रह्म मुहूर्त 04:16 ए एम से लेकर 04:58 ए एम तक है, वहीं अभिजित मुहूर्त ठीक दोपहर 12:00 बजे से लेकर दोपहर 12 बजकर 55 मिनट तक रहेगा। निशिता मुहूर्त देर रात 12:07 ए एम से लेकर 12:49 ए एम तक है।

रवि प्रदोष व्रत में रहेगा सर्वार्थ सिद्धि और इंद्र योग का संयोग

रवि प्रदोष व्रत के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है। सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह में 07 बजकर 34 मिनट पर बनेगा और अगले दिन 27 जुलाई को सुबह में 05 बजकर 40 मिनट तक है। इस योग में प्रदोष व्रत की पूजा सभी मनोकामनाएं पूरी करने वाली होगी। इसके अलावा प्रदोष पर इंद्र योग प्रात:काल से लेकर रात 10 बजकर 05 मिनट तक रहेगा। उसके बाद से वैधृति योग बनेगा। उस दिन ज्येष्ठा नक्षत्र प्रात:काल से लेकर सुबह 07 बजकर 34 मिनट तक है, उसके बाद मूल नक्षत्र होगा।

Aashadh Gupt Navratri 2026: बस 3 उपायों से प्रसन्न होंगी मां काली, मां बगलामुखी और मां मातंगी, 23 जुलाई तक चलेगा गुप्त नवरात्रि पर्व

Aashadh Gupt Navratri 2026: बस 3 उपायों से प्रसन्न होंगी मां काली, मां बगलामुखी और मां मातंगी तक, 23 जुलाई तक चलेगा गुप्त नवरात्रि पर्व

Aashadh Gupt Navratri 2026: चैत्र माह से शुरू होने वाले हिंदू वर्ष में गुप्त नवरात्रि का पर्व 4 बार आता है। चैत्र, आषाढ़, आश्विन और माघ माह में नवरात्रि पर्व मनाया जाता है। इनमें से चैत्र और आश्विन माह के नवरात्रि पर्व गृहस्थ श्रद्धालु बहुत धूमधाम से मनाते हैं, लेकिन आषाढ़ और माघ माह में गुप्त नवरात्रि मनाई जाती है। गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों के साथ ही 10 महाविद्याओं की भी उपासना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह गुप्त नवरात्रि का पर्व मुख्य रूप से तंत्र साधना और सिद्धयां प्राप्त करने का असवर होता है। हालांकि, गृहस्थ श्रद्धालु अपनी क्षमता और श्रद्धानुसार पूजा और उपाय करते हैं।

इस समय आषाढ़ माह की गुप्त नवरात्रि चल रही है। इसकी शुरुआत 15 जुलाई 2026 से हुई थी और समापन 23 जुलाई को होगा। इस अवधि में भक्त शक्ति की उपासना करते हैं, नौ दिनों का उपवास करते हैं और मां दुर्गा का ध्यान करते हैं। इस पर्व में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है। इसलिए गुप्त नवरात्रि का पर्व तंत्र साधकों और शक्ति के साधकों के लिए बहुत अहम स्थान रखता है। आइए जानें क्या उपाय करने से मां काली, मां बगलामुखी और मातंगी माता को प्रसन्न कर सकते हैं?

गुप्त नवरात्रि में करें ये 3 आसान उपाय

घर की पूर्व दिशा में मां मातंगी की तस्वीर रखें : मां मातंगी की तस्वीर में अक्सर उनके हाथ में तोता दिखाया जाता है। गुप्त नवरात्रि के दौरान उनकी तस्वीर घर की पूर्व दिशा में लगाने से व्यक्ति की छिपी हुई प्रतिभा निखरती है, आत्मविश्वास बढ़ता है और आध्यात्मिक व व्यक्तिगत विकास में मदद मिलती है।

मां बगलामुखी को हल्दी अर्पित करें : मां बगलामुखी को रक्षा करने वाली देवी माना जाता है। उनकी पूजा से नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा मिलती है। मां बगलामुखी को हल्दी बेहद प्रिय मानी जाती है। उन्हें हल्दी अर्पित करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और बुरी नजर या विरोधियों से सुरक्षा मिलने की मान्यता है।

मां काली को नारियल अर्पित करें : मां काली परिवर्तन और नई शुरुआत की देवी मानी जाती हैं। गुप्त नवरात्रि के दौरान मां काली को नारियल चढ़ाने से मन की उलझनें दूर होती हैं, नकारात्मक विचार कम होते हैं और मानसिक शक्ति बढ़ती है। माना जाता है कि वे जीवन की बाधाओं को दूर करने में भी मदद करती हैं।

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Devshayani Ekadashi Vrat 2026: देवशयनी एकादशी व्रत 24 या 25 जुलाई 2026 कब किया जाएगा? जानें तारीख, पूजा विधि और मुहूर्त

Devshayani Ekadashi Vrat 2026: देवशनी एकादशी का व्रत हर साल आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के आनुसार, इस दिन से सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु चाह माह की योगनिद्र में पाताल लोक चले जाते हैं और चतुर्मास आरंभ हो जाता है। इस अवधि में विवाह, मुंडन, जनेऊ, गृह प्रवेश आदि शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। श्री हरि सावन, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक मास की देवउठनी एकादशी तक योग निद्रा में लीन रहते हैं। इस दौरान सृष्टि का कामकाज भगवान शिव के पास रहता है।

हिंदू धर्म में देवशयनी एकादशी का विशेष स्थान है। इसे साल की कुछ अत्यंत महत्वपूर्ण एकादशी तिथियों में से एक माना जाता है। श्रद्धालु इस दिन को बड़ी श्रद्धा और विधि-विधान से मनाते हैं। आइए जानें इस साल देव शयनी एकादशी तिथि का व्रत किस दिन किया जाएगा।

कब है हरिशयनी एकादशी?

साल 2026 में आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी या हरिशयनी एकादशी का व्रत 25 जुलाई 2026, शनिवार को किया जाएगा। चूंकि उदयातिथि 25 जुलाई को मिल रही है, इसलिए वैष्णव और सामान्य श्रद्धालु दोनों ही इस दिन व्रत रखेंगे। इसी दिन से चातुर्मास की शुरुआत होगी और अगले 4 महीनों के लिए सभी मांगलिक कार्य बंद हो जाएंगे।

देवशयनी एकादशी 2026 तिथि और शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि की शुरुआत और समाप्ति का समय इस प्रकार है :

एकादशी तिथि प्रारंभ : 24 जुलाई 2026 को सुबह 09:12 बजे से

एकादशी तिथि समाप्त : 25 जुलाई 2026 को सुबह 11:34 बजे तक

उदयातिथि के अनुसार व्रत की तारीख : 25 जुलाई 2026 (शनिवार)

अभिजीत मुहूर्त (पूजा के लिए श्रेष्ठ): दोपहर 12:19 PM से 01:11 PM तक

व्रत पारण का समय : 26 जुलाई 2026 (रविवार) को सुबह 05:39 AM से 08:22 AM के बीच।

देवशयनी एकादशी 2026 पूजा विधि

देवशयनी एकादशी के दिन भगवान श्री हरि विष्णु योग निद्रा में जाते हैं। इस दिन उनकी विशेष पूजा की जाती है :

सुबह की तैयारी : एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ या पीले रंग के वस्त्र धारण करें।

व्रत का संकल्प : मंदिर के सामने हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें।

पूजा स्थापना : भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर को चौकी पर स्थापित करें। उन्हें गंगाजल से स्नान कराएं।

सामग्री अर्पित करें : भगवान को पीले फूल, पीला चंदन, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।

तुलसी दल : भगवान विष्णु को तुलसी दल अत्यंत प्रिय हैं, उन्हें भोग में तुलसी जरूर शामिल करें। लेकिन ध्यान रखें, एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़े जाते, इसलिए इन्हें एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें।

मंत्र और कथा : भगवान विष्णु के मंत्र “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का जाप करें और देवशयनी एकादशी की व्रत कथा पढ़ें या सुनें।

शयन कराना : पूजा के अंत में भगवान विष्णु को एक सुंदर छोटे गद्दे और तकिये वाले बिस्तर पर प्रतीकात्मक रूप से सुलाया जाता है यानी योग निद्रा में भेजा जाता है।

Ashadha Gupt Navratri 2026: आज से शुरू हुई आषाढ़ गुप्त नवरात्रि, 10 महाविद्याओं की कृपा पाने के लिए राशि अनुसार करें ये उपाय

Ashadha Gupt Navratri 2026: आज से शुरू हुई आषाढ़ गुप्त नवरात्रि, 10 महाविद्याओं की कृपा पाने के लिए राशि अनुसार करें ये उपाय

Ashadha Gupt Navratri 2026: हिंदू धर्म मां दुर्गा की पूजा और साधना का अवसर चैत्र और शारदीय नवरात्रि समेत साल में चार बार मिलता है। इनमें दो गुप्त नवरात्रि पर्व होते हैं, आषाढ़ गुप्त नवरात्रि और माघ गुप्त नवरात्रि। 9 दिनों की इस अवधि में शक्ति के उपासक मां दुर्गा के नौ रूपों के साथ ही 10 महाविद्याओं की भी साधना करते हैं, जो तंत्र शास्त्र में वर्णित देवी माँ के शक्तिशाली रूप हैं। इस साल आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का पर्व आज 15 जुलाई से शुरू हो चुका है।

भक्तों का मानना है कि इन नौ दिनों के दौरान की गई सच्ची प्रार्थना, मंत्र जाप और पारंपरिक उपाय सेहत, करियर, कारोबार, परिवार और निजी जीवन से जुड़ी मुश्किलों को दूर करने में मदद कर सकते हैं, साथ ही खुशहाली और ईश्वरीय कृपा भी दिला सकते हैं। कई भक्त इस दौरान राशि के हिसाब से खास उपाय भी करते हैं, उनका मानना है कि इससे पॉजिटिव एनर्जी बढ़ती है और देवी मां का आशीर्वाद मिलता है।

क्यों करते हैं गुप्त नवरात्रि के दौरान 10 महाविद्याओं की पूजा?

गुप्त नवरात्रि के दौरान, भक्त आमतौर पर देवी दुर्गा की पूजा करते हैं और साथ ही खास मंत्रों और प्रसाद के जरिए 10 महाविद्याओं की पूजा भी करते हैं। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, इन आध्यात्मिक तरीकों से दुश्मनों, बीमारी, बुरी नजर, प्रोफेशनल रुकावटों और घरेलू चुनौतियों से होने वाली मुश्किलों को दूर करने में मदद मिलती है।

गुप्त नवरात्रि 2026: राशि के हिसाब से उपाय

मेष : देवी काली को लाल फूल चढ़ाएं और उनका आशीर्वाद पाने के लिए “ॐ क्रीं कालिकायै नमः” का जाप करें।

वृष : देवी को नारियल चढ़ाएं और “ॐ ह्रीं छिन्नमस्तयै नमः” का जाप करें और श्रद्धा से प्रार्थना करें।

मिथुन : “ॐ धूम धूमावत्यै स्वाहा” का जाप करें और देवी को लाल चुनरी चढ़ाएं।

कर्क : “ॐ श्रीं कमलयै नमः” का जाप करें और देवी को सूखे मेवे, बताशा या मखाना खीर चढ़ाएं।

सिंह : देवी को सिंदूर और चुनरी चढ़ाएं और “ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं त्रिपुरसुंदर्यै नमः” का जाप करें।

कन्या : देवी को हरी चुनरी चढ़ाएं और “ॐ ह्रीं स्त्रीं हुं फट्” का जाप करें। माना जाता है कि इससे किस्मत अच्छी रहती है।

तुला : मिश्री का भोग लगाएं और “ॐ ह्रीं भुवनेश्वर्यै नमः” का जाप करें।

वृश्चिक : सूखे मेवे और नारियल के साथ लाल चुनरी चढ़ाएं और “ॐ ह्रीं भैरव्यै नमः” का जाप करें।

धनु : देवी को पीले फूल और बेसन के लड्डू चढ़ाएं और “ॐ ह्रीं श्रीं मातंग्यै नमः” का जाप करें।

मकर : “ॐ ह्लीं बगलामुख्यै नमः” का जाप करें, देवी को खुशबूदार फूल और चूड़ियां चढ़ाएं।

कुंभ : गुप्त नवरात्रि के सभी नौ दिनों तक दुर्गा चालीसा का पाठ करें और पूरे व्रत के दौरान अपने घर में साफ-सफाई बनाए रखें।

मीन : गुप्त नवरात्रि के दौरान अखंड दीप जलाएं और रोज मां दुर्गा के मंत्रों का जाप करें। अपनी मनोकामना मां दुर्गा को बताएं और हल्दी की गांठ अर्पित करें, फिर इसे अपने लॉकर या कीमती सामान रखने की जगह पर सुरक्षित रखें।

Jagannath Rath Yatra 2026: 16 जुलाई को दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरू और हैदराबाद में भी निकलेगी जगन्नाथ की सवारी, जानें ये शहर कैसे मनाएंगे जगन्नाथ रथयात्रा

Jagannath Rath Yatra 2026: 16 जुलाई को दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरू और हैदराबाद में भी निकलेगी जगन्नाथ की सवारी, जानें ये शहर कैसे मनाएंगे जगन्नाथ रथयात्रा

Jagannath Rath Yatra 2026: भारत में ओडिश राज्य के पुरी शहर में हर साल भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा निकाली जाती है। इसे देखने के लिए पूरी दुनिया से श्रद्धालु जुटते हैं, तीनों लोकों के नाथ की विशाल शोभायात्रा का आनंद लेते हैं। साल 2026 में विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा की शुरुआत 16 जुलाई 2026, गुरुवार से होगी। यह पावन पर्व 24 जुलाई 2026 तक चलेगा, जिस दिन बहुड़ा यात्रा यानी वापसी यात्रा के साथ इसका समापन होगा।

पुरी की जगन्नाथ रथयात्रा के तर्ज पर देश कई शहरों में भी इसी समय या इसके आसपास भव्य आयोजन किए जाते हैं। हर बार की तरह इस साल भी दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरू और हैदराबाद में जगन्नाथ रथयात्रा का आयोजन किया जाएगा। इसके लिए बड़े पैमाने पर तैयारियां की गई हैं और अब इन्हें अंतिम रूप दिया जा रहा है। इस दौरान, रथयात्रा के अलावा श्रद्धालुओं की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और सामुहिक भोज भी आयोजित किए जाते हैं।

दिल्ली का त्यागराज जगन्नाथ मंदिर 59वीं रथयात्रा निकालेगा

दिल्ली में सबसे बड़ी रथयात्रा त्यागराज जगन्नाथ मंदिर की ओर से निकाली जाती है। न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल जगन्नाथ रथयात्रा का 59वां संस्करण 16 जुलाई से 27 जुलाई तक चलेगा। इस त्योहार का मुख्य आकर्षण भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा का खूबसूरती से सजे हुए रथों पर जुलूस होता है। रिपोर्ट के मुताबिक, पहली बार देवताओं के लिए तीन अलग-अलग रथों पर शोभायात्रा निकालने की तैयारी है।

इस्कॉन और हौज खास मंदिर में खास जश्न होंगे

ईस्ट ऑफ कैलाश में इस्कॉन मंदिर खास दर्शन, भजन, कीर्तन, आध्यात्मिक प्रवचन और एक रथ यात्रा का आयोजन करेगा। इस बीच, दिल्ली के ओडिया समुदाय द्वारा बनाया गया हौज खास का ऐतिहासिक श्री जगन्नाथ मंदिर भी अपनी सालाना रथ यात्रा आयोजित करेगा।

न्यू लिंक रोड से मुंबई में शुरू होगी रथयात्रा

मुंबई में 16 जुलाई को सालाना जगन्नाथ रथयात्रा का आयोजन किया जाएगा। इसके लिए हजारों की संख्या में भक्तों के इकट्ठा होने की उम्मीद है। यह रथयात्रा अंधेरी वेस्ट में न्यू लिंक रोड से शुरू होगी और इस्कॉन जुहू तक जाएगी।

हैदराबाद में 47वीं सालाना इस्कॉन रथयात्रा होगी

इस्कॉन एबिड्स की हैदराबाद ब्रांच 16 जुलाई को 47वीं सालाना श्री जगन्नाथ रथयात्रा आयोजित करेगी। 1979 से हर साल मनाए जाने वाले इस उत्सव में एक लाख से ज्यादा भक्तों के आने की उम्मीद है। रथ यात्रा सुबह 11 बजे एनटीआर स्टेडियम से शुरू होगी और आरटीसीएक्स रोड्स, हिमायत नगर, लिबर्टी, बशीरबाग, एबिड्स, MJ मार्केट और गांधी भवन मेट्रो स्टेशन से होते हुए 8 km का रास्ता तय करेगी, और शाम करीब 6 बजे एग्जीबिशन ग्राउंड पर खत्म होगी।

इस्कॉन बेंगलुरु अपने सभी केंद्रों पर रथ यात्रा निकालेगा

बेंगलुरु में श्रील प्रभुपाद के इस्कॉन ने घोषणा की है कि वह श्री जगन्नाथ मंदिर एडमिनिस्ट्रेशन (SJTA), पुरी द्वारा तय नौ दिन के त्योहार के दौरान, धार्मिक परंपराओं के अनुसार, अपने सभी सेंटर्स पर जगन्नाथ रथ यात्रा मनाएगा। इस उत्सव में रथयात्रा, भक्ति कार्यक्रम, भजन, कीर्तन और प्रसाद वितरण शामिल होगा।

आस्था और संस्कृति का उत्सव

रथ यात्रा के सबसे महत्वपूर्ण रीति-रिवाजों में से एक भगवान जगन्नाथ का रथ खींचना है। भक्तों का मानना है कि इस परंपरा में हिस्सा लेने से आशीर्वाद, समृद्धि और आध्यात्मिक पुण्य मिलता है। यह उत्सव “जय जगन्नाथ” के नारों, भक्ति संगीत, ढोल और रथों के साथ नाच-गाने से भरा होता है।

Ashadha Gupt Navratri 2026: आज से शुरू हो रही आषाढ़ गुप्त नवरात्रि, जानें कलश स्थापना का मुहूर्त और गृहस्थों के लिए सरल पूजा विधि

Ashadha Gupt Navratri 2026: आज से शुरू हो रही आषाढ़ गुप्त नवरात्रि, जानें कलश स्थापना का मुहूर्त और गृहस्थों के लिए सरल पूजा विधि

Ashadha Gupt Navratri 2026: आषाढ़ गुप्त नवरात्रि हिंदू धर्म में मनाई जाने वाली दो गुप्त नवरात्रियों में से एक है। दूसरी गुप्त नवरात्रि माघ महीने में आती है। आषाढ़ गुप्त नवरात्रि आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवमी तिथि तक मनाई जाती है। गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों के साथ-साथ 10 महाविद्याओं, मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी, और कमला देवी की विशेष आराधना की जाती है।

मान्यता है कि इस दौरान की जाने वाली गुप्त साधनाएं बहुत जल्दी फलदायी होती हैं और साधक को विशेष सिद्धियां प्राप्त होती हैं। इसमें सांसारिक इच्छाओं की पूर्ति के साथ-साथ आध्यात्मिक उन्नति के लिए पूजा की जाती है। ये 9 दिन साधना, मंत्र जाप, तंत्र-मंत्र और आध्यात्मिक सिद्धियों की प्राप्ति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 15 जुलाई 2026, बुधवार से शुरू होकर 23 जुलाई 2026 तक मनाई जाएगी।

घटस्थापना मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 14 जुलाई 2026 को सुबह 11 बजकर 42 मिनट पर शुरू होगी और प्रतिपदा तिथि का समापन 15 जुलाई 2026 को सुबह 08 बजकर 20 मिनट पर होगा। घटस्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 06 बजकर 03 मिनट से सुबह 08 बजकर 20 मिनट तक रहेगा। कलश स्थापना के मुहूर्त की कुल अवधि 2 घंटे 17 मिनट है।

कलश स्थापना विधि

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि में घटस्थापना के लिए पूजा स्थल की साफ-सफाई करें और गंगाजल से छिड़काव करें। इसके बाद एक चौकी पर लाल या पीले रंग का साफ वस्त्र बिछाएं और मां दुर्गा के दस महाविद्याओं की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। मिट्टी या तांबे के कलश में साफ जल भरकर आम के पत्ते और उसके ऊपर नारियल रखें। मां दुर्गा का ध्यान लगाएं। कलश स्थापना के बाद अखंड दीप लगाएं। दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। अंत में मां दुर्गा की आरती करें और पूजा के दौरान हुई भूलचूक के लिए क्षमा मांगे।

गुप्त नवरात्रि में गृहस्थ श्रद्धालु इस विधि से करें पूजा 

गुप्त नवरात्रि केवल तांत्रिक साधना तक सीमित नहीं है। गृहस्थ श्रद्धालु भी पूरी श्रद्धा के साथ मां दुर्गा की पूजा कर सकते हैं। इसके लिए प्रातः स्नान कर घर के ईशान कोण को साफ कर एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और मां दुर्गा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। इसके बाद एक पात्र में मिट्टी डालकर उसमें जौ बो दें। मिट्टी या तांबे के कलश में अक्षत, सुपारी, जल और सिक्का डाल दें। कलश के मुख पर आम के पत्ते लगा दें और ऊपर नारियल रखकर स्थापित करें। फिर दीपक जलाकर देवी को लाल पुष्प, रोली, अक्षत, चुनरी, फल तथा नैवेद्य अर्पित करें। पूजा के दौरान दुर्गा सप्तशती, दुर्गा चालीसा, अर्गला स्तोत्र, कवच या देवी के बीज मंत्रों का श्रद्धापूर्वक जाप किया जा सकता है। अगर संभव हो तो नौ दिनों तक सात्विक भोजन करें, ब्रह्मचर्य का पालन करें और क्रोध, असत्य तथा नकारात्मक विचारों से दूर रहें।

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Sawan 2026: इस साल सावन में सोमवार और मंगला गौरी व्रत कितने होंगे? सही तारीखों के साथ देखें पूरा कैलेंडर

Sawan 2026: हिंदी कैलेंडर में सावन पांचवां महीना होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। चारों ओर फैली हरियाली और ‘बोल बम’ की गूंज इस माह की पहचान माने जाते हैं। देश ही नहीं पूरी दुनिया के शिव भक्त इस माह में भगवान शिव की भक्ति में लीन होते हैं। यूं तो पूरे साल में आने वाले सभी सोमवार भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित माने जाते हैं, लेकिन सावन के महीने में सोमवार का दिन विशेष स्थान रखता है।

इस दिन सुबह से ही छोटे-बड़े हर शिवालय में भक्त अपने आराध्य का अभिषेक और उपवास करते हैं। सावन के महीने में ही भक्त कांवड़ा भरकर लाते हैं और अपने आराध्य शिव का जलाभिषेक करते हैं। माना जाता है कि इस अवधि में माता पार्वती और भगवान शिव की श्रद्धा और विधि विधान से की गई पूजा बहुत लाभकारी होती है। गौरी शंकर अपने भक्तों की दु:ख-तकलीफें दूर करते हैं और उन्हें सुखी जीवन का आशीर्वाद देते हैं। हर साल की तरह इस साल भी सावन के सोमवार को व्रत करेंगे और मंगलवार को मंगला गौरी का व्रत किया जाएगा। आइए जानें इस साल सावन में कितने सोमवार और मंगला गौरी व्रत का संयोग बन रहा है?

कब से कब तक रहेगा सावन?

सावन का महीना 30 जुलाई गुरुवार से प्रारंभ होगा और 28 अगस्त, शुक्रवार को श्रावण पूर्णिमा के साथ ही यह महीना समाप्त हो जाएगी।

सावन में कितने सोमवार?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन में सोमवार के दिन भगवान शिव का व्रत और पूजन करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि आती है। साल 2026 में सावन में कुल चार सोमवार व्रत रखे जाएंगे।

सावन सोमवार व्रत

पहला सावन सोमवार- 03 अगस्त 2026

दूसरा सावन सोमवार- 10 अगस्त 2026

तीसरा सावन सोमवार- 17 अगस्त 2026

चौथा सावन सोमवार- 24 अगस्त 2026

सावन में 4 मंगला गौरी व्रत का संयोग

सावन का महीना केवल भगवान शिव ही नहीं, बल्कि माता पार्वती की आराधना के लिए भी अत्यंत शुभ माना जाता है। इस माह में सोमवार की तरह मंगलवार का भी विशेष महत्व है। इस दिन मंगला गौरी का व्रत रखने की परंपरा है। इस माह में पड़ने वाले हर मंगलवार को मंगला गौरी व्रत किया जाता है।

पहला मंगला गौरी व्रत- 4 अगस्त

दूसरा मंगला गौरी व्रत- 11 अगस्त

तीसरा मंगला गौरी व्रत- 18 अगस्त

चौथा मंगला गौरी व्रत- 25 अगस्त

सावन 2026 के अन्य प्रमुख त्योहार और तिथियां

सावन शिवरात्रि : 11 अगस्त 2026

हरियाली अमावस्या : 12 अगस्त 2026

हरियाली तीज : 15 अगस्त 2026

नाग पंचमी : 17 अगस्त 2026

रक्षाबंधन / सावन पूर्णिमा : 28 अगस्त 2026

कैसे करें भोलेनाथ की पूजा?

  • सावन के सोमवार को सुबह जल्दी उठकर नहा लें और साफ कपड़े पहनें।
  • इसके बाद पास के शिव मंदिर जाएं। सबसे पहले शिवलिंग पर गंगाजल चढ़ाएं।
  • फिर दूध, दही, घी, शहद और गन्ने के रस से बना ‘पंचामृत’ अर्पित करें।
  • भोलेनाथ को सफेद चंदन लगाएं और सफेद फूल, भांग, धतूरा और फल चढ़ाएं।
  • शिव जी के साथ पूरे शिव परिवार की भी पूजा करें।
  • अंत में आरती करें और सच्चे मन से “ॐ नमः शिवाय” या “श्री शिवाय नमस्तुभ्यं” मंत्र का जाप करें।

Ashadha Gupt Navratri 2026: आषाढ़ की गुप्त नवरात्रि इस दिन से होगी शुरू, आइए जानें घटस्थापना के लिए मिलेगा कितनी देर का मुहूर्त

Ashadha Gupt Navratri 2026: आषाढ़ की गुप्त नवरात्रि इस दिन से होगी शुरू, आइए जानें घटस्थापना के लिए मिलेगा कितनी देर का मुहूर्त

Ashadha Gupt Navratri 2026: हिंदी कैलेंडर में पूरे वर्ष में चार नवरात्रि पर्व आते हैं। हिंदू वर्ष की शुरुआत चैत्र नवरात्रि से होती है। इसके अलावा शारदीय नवरात्रि का पर्व बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। इनके अलावा आषाढ़ और माघ मास में भी नवरात्रि का पर्व मनाया जाता है, जिसे गुप्त नवरात्रि कहते हैं। इस दौरान मां दुर्गा के नौ रूपों के साथ ही देवी की दस महाविद्याओं की साधना की जाती है।

मान्यता है कि इन नौ दिनों में देवी की दस महाविद्याओं की साधना करने से अत्यंत शुभ फल की प्राप्ति होती है। मां दुर्गा के भक्त नौ दिनों की इस अवधि में विधि-विधान से उनकी पूजा करते हैं। वहीं अघोरी, तांत्रिक तंत्र मंत्र और सिद्धि प्राप्त करते हैं। आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की शुरुआत शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होती है। आइए जानें इस साल आषाढ़ गुप्त नवरात्रि कब से शुरू हो रही है, घटस्थापना का मुहूर्त कितनी देर का है और इसका क्या महत्व है।

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की तारीख और समय

इस साल आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का आरंभ 15 जुलाई, बुधवार से हो रहा है। 14 जुलाई, मंगलवार के दिन दोपहर के 3 बजकर 14 मिनट पर आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा तिथि का आरंभ होगा, जो अलगे दिन यानी 15 जुलाई को सुबह 11 बजकर 52 मिनट कर व्याप्त रहेगी। उदया तिथि के अनुसार, 15 जुलाई से ही आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की शुरुआत होगी। वहीं, 22 जुलाई, बुधवार के दिन नवमी तिथि रहेगी जिसके साथ ही आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का समापन होगा।

घटस्थापना का शुभ मुहूर्त

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि में घटस्थापना 15, जुलाई को ही की जाएगी। इस दिन पुष्य नक्षत्र का शुभ संयोग बन रहा है। इस दिन सुबह 8 बजकर 2 मिनट पर हर्षण योग का संयोग बन रहा है, इसलिए ये समय घट स्थापना के लिए सर्वोत्तम होगा। इसके उपरांत वज्र योग लग जाएगा। वैसे इस दिन घटस्थापना सुबह 06:01 बजे से सुबह 10:17 बजे के बीच कर सकते हैं। इसके लिए लगभग 4 घंटे 16 मिनट की अवधि मिल रही है।

गुप्त नवरात्रि का धार्मिक महत्व

गुप्त नवरात्रि में भी मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। लेकिन गुप्त नवरात्रि विशेष रूप से तांत्रिक साधना, मंत्र सिद्धि और दस महाविद्याओं की गुप्त रूप से साधना करने के लिए अत्यंत फलदायी मानी जाती है।

देवी की दस महाविद्याएं 

  • कमलात्मिका
  • तारा
  • बगलामुखी
  • काली
  • त्रिपुर सुंदरी
  • धूमावती
  • भैरवी
  • भुवनेश्वरी
  • मातंगी
  • छिन्नमस्ता

Sawan 2026: 30 जुलाई से शुरू होगा भगवान शिव का प्रिय महीना सावन, मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए इस माह में जरूर करें तुलसी की मंजरी का उपाय

Sawan 2026: 30 जुलाई से शुरू होगा सावन का महीना, इन तिथियों पर जलाभिषेक दिलाएगा भगवान शिव का आशीर्वाद

Sawan 2026: सावन का महीना भगवान शिव को अति प्रिय है। इस माह में शिव भक्त अपने आराध्य की पूजा, उपवास और जलाभिषे या रुद्राभिषेक करते हैं। माना जाता है कि इस माह में माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा करने वाले भक्तों के सभी दुख-दर्द दूर होते हैं और जीवन में खुशहाली आती है। इस माह में बड़ी संख्या में श्रद्धालु कांवड़ा लाते हैं अपने भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं। इस साल सावन का महीना गुरुवार, 30 जुलाई 2026 से शुरू हो रहा है। वहीं, इस पावन माह का समापन शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन के पर्व के साथ होगा।

आमतौर से जलाभिषेक सावन की शिवरात्रि को किया जाता है। लेकिन इसके अलावा इस माह में पड़ने वाली विशेष तिथियों पर जलाभिषेक विशेष रूप से फलदायी माना जाता है। इनमें सावन की शिवरात्रि के अलावा सावन के सभी सोमवार, दोनों प्रदोष व्रत, नाग पंचमी, हरियाली तीज और श्रावणी पूर्णिमा भी जलाभिषेक शुभ माना जाता है। आइए जानें साल 2026 में सावन (श्रावण) महीने में जलाभिषेक और पूजा-अर्चना के लिए सबसे महत्वपूर्ण तिथियां इस प्रकार हैं:

सावन शिवरात्रि : कावड़ यात्रा और सामान्य भक्तों के लिए सावन महीने में जलाभिषेक का सबसे मुख्य दिन सावन शिवरात्रि माना जाता है। इस साल यह 11 अगस्त 2026 को होगी। इस दिन कावड़िए और भक्त भगवान शिव को जलाभिषेक करते हैं।

हरियाली तीज : सावन में शिव जी की पूजा के लिए हरियाली तीज 15 अगस्त 2026 को रहेगी। इस दिन महादेव पर जल चढ़ाने वालों को सुयोग्य जीवनसाथी पाने में मदद मिलती है।

सावन पूर्णिमा : सावन पूर्णिमा 28 अगस्त 2026 को है। इस दिन रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाता है। सावन पूर्णिमा पर जलाभिषेक कर शिव जी की साधना करने वालों को मां लक्ष्मी का आशीर्वाद भी मिलता है।

सावन सोमवार की तिथियां : सावन के सभी सोमवार जलाभिषेक के लिए अत्यंत शुभ माने जाते हैं। उत्तर भारत (उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान आदि) के पंचांग के अनुसार तिथियां निम्न हैं:

पहला सोमवार: 03 अगस्त 2026

दूसरा सोमवार: 10 अगस्त 2026

तीसरा सोमवार : तीसरा सोमवार 17 अगस्त 2026 को होगा। इस दिन नाग पंचमी भी है, जिससे इस सोमवार का महत्व और बढ़ गया है।

चौथा सोमवार : 24 अगस्त 2026

Ashadha Gupt Navratri 2026: कब से शुरू होगी आषाढ़ गुप्त नवरात्रि? आइए जानें सही तारीख, घटस्थापना का मुहूर्त और पूजा विधि

Ashadha Gupt Navratri 2026: कब से शुरू होगी आषाढ़ गुप्त नवरात्रि? आइए जानें सही तारीख, घटस्थापना का मुहूर्त और पूजा विधि

Ashadha Gupt Navratri 2026: आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। चैत्र और शारदीय नवरात्रि की तरह इसमें भी मां दुर्गा के 9 रूपों की पूजा की जाती है और यह पर्व भी 9 दिनों तक चलता है। हिंदू धर्म में वर्ष में कुल चार नवरात्रि आती हैं, जिनमें से दो प्रत्यक्ष (चैत्र और शारदीय) और दो गुप्त (माघ और आषाढ़) होती हैं। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तिथि तक मनाई जाने वाली नवरात्रि को ही आषाढ़ गुप्त नवरात्रि कहा जाता है।

प्रत्यक्ष नवरात्रि में जहां सांसारिक सुख, शांति और गृहस्थ जीवन की खुशहाली के लिए माता की पूजा की जाती है, वहीं गुप्त नवरात्रि मुख्य रूप से साधकों, तांत्रिकों और अघोरियों के लिए विशेष महत्व रखती है। गुप्त नवरात्रि में माता दुर्गा के 9 रूपों के साथ-साथ मुख्य रूप से दस महाविद्याओं की साधना की जाती है। इनमें शामिल हैं

मां काली

मां तारा

मां त्रिपुर सुंदरी

मां भुवनेश्वरी

मां छिन्नमस्ता

मां भैरवी

मां धूमावती

मां बगलामुखी

मां मातंगी

मां कमला

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि तिथि

आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि आरंभ : 14 जुलाई, दोपहर 3:12 बजे से

आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि समाप्त : 15 जुलाई को प्रातः 11:50 बजे तक

उदयातिथि के अनुसार आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 15 जुलाई से शुरू होगी और 23 जुलाई को इसका समापन होगा।

घटस्थापना का शुभ मुहूर्त

प्रतिपदा तिथि पर ही घटस्थापना की जाती है, इसलिए इस बार 15 जुलाई को कलश स्थापना करनी होगी।

घटस्थापना मुहूर्त : प्रातः 6:01 से 10:17 बजे तक

ब्रह्म मुहूर्त : प्रातः 4:11 से 4:52 बजे तक

अभिजीत मुहूर्त : इस दिन उपलब्ध नहीं

विजय मुहूर्त : दोपहर 2:45 से 3:40 बजे तक

गोधूलि मुहूर्त : सायं 7:20 से 7:40 बजे तक

अमृत काल : दोपहर से सायं 5:27 बजे तक

पूजा की सामान्य विधि

कलश स्थापना : प्रतिपदा तिथि को सुबह शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना की जाती है।

अखंड ज्योति : नौ दिनों तक मां के सामने घी या तिल के तेल की अखंड ज्योति जलाई जाती है।

मंत्र जाप : इस दौरान दुर्गा सप्तशती का पाठ या “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” मंत्र का मानसिक जाप करना अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है।

सात्विकता : इन नौ दिनों में पूरी तरह सात्विक भोजन करना चाहिए और ब्रह्मचर्य का पालन करना अनिवार्य होता है।

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