ChatGPT से लेकर फेक Insta अकाउंट तक… पुलिस के 5053 पेज की चार्जशीट से खुले केतन हत्याकांड के कई अनसुलझे राज

पुणे के ऐतिहासिक लोहागढ़ किले में 18 जून को युवा बिजनेसमैन केतन अग्रवाल की सनसनीखेज हत्या ने पूरे देश को हिला कर रख दिया था। केतन की हत्या के आरोप में पुलिस ने केतन की मंगेतर सिया गोयल, उसके प्रेमी चेतन चौधरी और उनके साथी रितेश हांगे को गिरफ्तार किया है। वहीं अब पुणे पुलिस ने इस हत्याकांड का पूरा ब्यौरा अदालत में दिया है। पुणे की अदालत में 5,053 पेज की चार्जशीट में पुलिस ने 26 साल के कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्या की कथित साजिश का पूरा ब्यौरा दिया है। पुलिस के मुताबिक, केतन की 18 जून को लोहागढ़ किले से धक्का दिए जाने के बाद मौत हो गई थी। चार्जशीट में पुलिस ने इस मामले से जुड़ी घटनाओं और कथित साजिश की जानकारी दी है।

बता दें, केतन अग्रवाल की मौत के बाद पुलिस ने उसकी मंगेतर सिया गोयल, उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी और रितेश हांगे को गिरफ्तार किया है। केतन और सिया दोनों पुणे के रहने वाले थे। दोनों की फरवरी में सगाई हुई थी और नवंबर में जयपुर में एक बड़े समारोह में उनकी शादी होने वाली थी।

मारने के लिए किया रिसर्च

पुलिस की चार्जशीट में खुलासा हुआ है कि केतन अग्रवाल की हत्या के लिए तीनों आरोपियों ने महीनों तक बाकायदा रिसर्च और प्लानिंग की थी। चार्जशीट के मुताबिक, केतन अग्रवाल की हत्या की कथित साजिश कई चरणों में बनी। शुरुआत में आरोपियों के बीच उसे गंभीर रूप से घायल करने की बात हुई। इसके बाद उन्होंने हमला करने के लिए महाराष्ट्र के बाहर से किसी व्यक्ति को बुलाने पर भी विचार किया। लेकिन, बाद में आरोपियों ने कथित तौर पर यह काम खुद करने का फैसला किया। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने बाहरी व्यक्ति को प्लान में शामिल करने का विचार इसलिए छोड़ दिया, क्योंकि उन्हें डर था कि वह राज खोल सकता है। बाद में वह व्यक्ति इस मामले में गवाह बन गया।

चैटजीपीटी और पॉडकास्ट सुने

चार्जशीट के मुताबिक, इसके बाद सिया गोयल और चेतन चौधरी ने खुद केतन अग्रवाल को मारने की तैयारी शुरू कर दी। चार्जशीट में कहा गया कि दोनों ने हत्या से जुड़ी फिल्में देखीं, चैटजीपीटी का इस्तेमाल किया और पुलिस से बचने के तरीकों से जुड़े पॉडकास्ट सुने। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने मेघालय के चर्चित हनीमून हत्या मामले के बारे में भी जानकारी जुटाई थी, जिसमें इंदौर के रहने वाले राजा रघुवंशी की मई 2025 में मेघालय में हनीमून के दौरान कथित तौर पर हत्या कर दी गई थी। इसके बाद पुलिस का दावा कि सिया गोयल और चेतन चौधरी ने लोनावाला के आसपास कई जगहों की रेकी की और एक सुनसान जगह की तलाश की। दोनों कथित तौर पर टाइगर पॉइंट समेत कई जगहों पर गए और आखिर में लोहागढ़ किले को चुना।

क्यों चुना गया लोहागढ़

चार्जशीट के मुताबिक, आरोपियों ने आखिर में लोहागढ़ किले को इसलिए चुना क्योंकि पिछले साल मार्च में वहां एक महिला की मौत हो चुकी थी। जांचकर्ताओं का आरोप है कि आरोपियों को लगा कि केतन अग्रवाल की मौत को सेल्फी लेते समय अचानक गिरने की घटना बताया जा सकता है। चार्जशीट के मुताबिक, 14 जून को सिया गोयल और केतन अग्रवाल लोहागढ़ गए थे। पुलिस का आरोप है कि सिया ने केतन को चट्टान से धक्का देने की कोशिश की, लेकिन केतन ने पेड़ पकड़कर खुद को बचा लिया। पूछने पर सिया ने कथित तौर पर कहा कि उसने सांप देखा था और केतन को बचाने की कोशिश की थी।

पासपोर्ट फाड़ कर फेंक दिया

जांचकर्ताओं के मुताबिक, सिया गोयल 4 जून को लोहागढ़ किला जाना चाहती थी, क्योंकि आरोपियों की कथित योजना बाली जाने से पहले ही केतन अग्रवाल को मारने की थी। चार्जशीट के अनुसार, 6 जून को प्री-वेडिंग फोटोशूट के लिए जाते समय सिया ने कथित तौर पर केतन का पासपोर्ट फाड़ दिया और उसे एक कैफे के वॉशरूम में फेंक दिया। पुलिस का दावा है कि पासपोर्ट खराब होने की वजह से दोनों की बाली यात्रा रद्द हो गई।

नकली इंस्टा अंकाउट भी बनाया

पुलिस का आरोप है कि रितेश हांगे ने आरोपियों की एक जान-पहचान वाली महिला की तस्वीर का इस्तेमाल कर ‘माही’ नाम से एक नकली इंस्टाग्राम अकाउंट बनाया था। पुलिस के मुताबिक, इस अकाउंट से केतन अग्रवाल को मैसेज भेजे गए और उसे 18 जून को लोहागढ़ जाने के लिए तैयार किया गया। उसे बताया गया था कि यह सिया गोयल से जुड़ा सरप्राइज बर्थडे प्लान है।

चार्जशीट के मुताबिक, केतन अग्रवाल की मौत के बाद नकली इंस्टाग्राम अकाउंट डिलीट कर दिया गया था। पुलिस का आरोप है कि 18 जून को चेतन चौधरी किले के एक दूसरे रास्ते से अंदर गया और बाद में सिया गोयल के इशारे पर उसके साथ शामिल हो गया।

सिया ने केतन को दिया धक्का

पुलिस के मुताबिक, सिया ने केतन का ध्यान भटकने पर उसे पीछे से धक्का दिया, जिसके बाद चेतन ने उसे लात मारी और वह किले से नीचे गिर गया। पुलिस ने बताया कि चार्जशीट में पांच चश्मदीदों समेत 100 से ज्यादा लोगों के बयान शामिल हैं। इसके अलावा जांच में मोबाइल डेटा, व्हाट्सऐप चैट, तस्वीरें, कॉल रिकॉर्ड और दूसरी तकनीकी जानकारी को भी सबूत के तौर पर शामिल किया गया है।

Viral Video: ‘वह बहुत केयरिंग हैं…’ केतन अग्रवाल की सगाई का पुराना वीडियो वायरल, सिया का बयान बना चर्चा का विषय

Viral Video: पुणे के कारोबारी केतन अग्रवाल की कथित हत्याकांड ने पूरे देश को हिला कर रख दिया। इसी बीच केतन की सगाई का एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। इस वीडियो को सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर किया जा रहा है। इस वीडियो में उनकी मंगेतर सिया गोयल, केतन की तारीफ करते हुए उन्हें बेहद ख्याल रखने वाला और अच्छा इंसान बताती नजर आती हैं। घटना के बाद यह वीडियो दोबारा वायरल होने से लोगों के बीच इसकी काफी चर्चा हो रही है।

बता दें 18 जून को केतन अग्रवाल की पुणे के लोहगढ़ किले में मौत हो गई थी। वहीं केतन की हत्या का आरोप उनकी मंगेतर सिया गोयल और उसके बॉयफ्रेंड चेतन पर है। आरोप है कि सिया और चेतन ने मिलकर केतन को लोहगढ़ किले से 400 फीट गहरी खाई में धक्का दे दिया था। केतन की मौके पर ही मौत हो गई थी।

वायरल हो रहा वीडियो

वायरल हो रहे इस पुराने वीडियो में केतन अग्रवाल और सिया गोयल अपनी सगाई के समारोह में मंच पर साथ नजर आते हैं। कार्यक्रम के दौरान एंकर दोनों से बातचीत करती है और सिया से पूछती है कि उन्हें केतन की कौन-सी बात सबसे ज्यादा पसंद है और आखिर वह उनके लिए इतने खास क्यों हैं। कार्यक्रम के दौरान एंकर ने सिया से पूछा, “एक होने वाले पति के तौर पर केतन की ऐसी कौन-सी बात है, जिसकी वजह से वह आपके लिए ‘हीरो नंबर 1’ हैं?”

इस पर सिया ने बिना झिझक मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “वह बहुत केयरिंग और दयालु हैं।” सिया की यह बात सुनकर केतन भी मुस्कुराते नजर आए। इसके बाद होस्ट ने इसे “ओह मोमेंट” बताया, जिस पर समारोह में मौजूद लोगों ने तालियां बजाकर दोनों का अभिवादन किया।

लोगों ने किया कमेंट

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। एक यूजर ने लिखा, “और बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड जाता है… सिया गोयल को। क्या एक्सप्रेशन्स, क्या मुस्कान। इस वीडियो को देखकर कोई यकीन नहीं करेगा कि वह केतन अग्रवाल से सगाई या शादी नहीं करना चाहती थीं। केतन और उनके परिवार के लिए दुख है।” एक अन्य यूजर ने कमेंट किया, “इसने तो एक्टिंग के मामले में बॉलीवुड की अभिनेत्रियों को भी पीछे छोड़ दिया।” एक और यूजर ने लिखा, “मुझे लगता है कि सब कुछ पहले से इस तरह प्लान किया गया था कि केतन की मौत एक हादसा लगे और किसी को शक न हो।” लोगों ने इस वीडियो पर अपने रिएक्शन दे रहे हैं।

Ketan Agarwal Murder Case: केतन की हत्या करने से पहले सिया ने चेतन से कर ली थी शादी! WhatsApp चैट से हुआ खुलासा

Ketan Agarwal Murder Case: लोनावला के पास ऐतिहासिक लोहागढ़ किले से कारोबारी केतन अग्रवाल को कथित तौर पर धक्का देकर नीचे गिराने और उनकी मौत के मामले ने पूरे देश को हिला दिया था। अब इस केस में एक और चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है। पुलिस जांच में पता चला है कि केतन की मंगेतर और इस मामले की मुख्य आरोपी सिया गोयल कथित तौर पर पहले से शादीशुदा थीं।

News18 की एक रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस का दावा है कि आरोपी सिया गोयल और उनके कथित प्रेमी चेतन चौधरी ने चार महीने पहले अपने परिवारों से छिपाकर गुपचुप तरीके से शादी कर ली थी।

खबरों के मुताबिक, उनके फोन से मिली WhatsApp चैट से यह बात सामने आई है। जांचकर्ताओं का कहना है कि इन चैट ने इस गुपचुप शादी का राज खोल दिया है और पूरे मामले को एक नया मोड़ दिया है।

आरोप है कि 18 जून को केतन अग्रवाल को लोहागढ़ किले से नीचे धकेलकर मार डाला गया था। फिलहाल, पुलिस ने इस मामले में सिया गोयल और चेतन चौधरी को गिरफ्तार किया है।

WhatsApp चैट और इंटरनेट हिस्ट्री से कथित तौर पर क्या पता चला?

News18 के मुताबिक, पुलिस ने आरोपियों के फोन से मिले कॉल रिकॉर्ड, लोकेशन डेटा, चैट और इंटरनेट सर्च हिस्ट्री की जांच की। पिछले छह-सात महीनों के डिजिटल डेटा की जांच के दौरान, जांच करने वालों को पता चला कि सिया और चेतन ने कथित तौर पर चार महीने पहले ही शादी कर ली थी, लेकिन परिवारों के डर से इसे छिपाकर रखा था।

पुलिस को शक है कि इसी गुपचुप शादी के बाद केतन को रास्ते से हटाने की कथित साजिश रची गई थी।

‘मुझमें हिम्मत नहीं है, तुम भी आओ’: सिया ने कथित तौर पर चेतन से क्या कहा?

पुलिस का कहना है कि केतन अग्रवाल की हत्या की पहली कोशिश कथित तौर पर 14 जून को ही की गई थी, लेकिन सिया आखिरी पल में घबरा गई और कोशिश नाकाम रही। इसके बाद, उसने कथित तौर पर चेतन को मैसेज किया, “मुझमें यह करने की हिम्मत नहीं है, तुम भी आओ – हम दोनों मिलकर उसे चट्टान से नीचे धकेल देंगे।” जांचकर्ताओं का कहना है कि दोनों ने कथित तौर पर 18 जून को मिलकर हत्या को अंजाम दिया।

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Ketan Murder Case: केतन अग्रवाल मर्डर केस में अब क्या होगा? पंचशील टेस्ट से जमानत तक, जानिए आगे की पूरी कहानी

पूरे देश को हिला देने वाले पुणे के केतन अग्रवाल मर्डर केस की आरोपी सिया गोयल और उसके बॉयफ्रेंड चेतन चौधरी को 16 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। दोनों की 11 दिन की पुलिस रिमांड पूरी होने के बाद अब जांच एजेंसियां उनसे पूछताछ की बजाय मामले से जुड़े सबूतों की जांच और उन्हें मजबूत करने पर ध्यान दे रही हैं।

अब आगे क्या होगा?

इस मामले में अब जांच का सबसे बड़ा फोकस डिजिटल सबूतों पर है। जांच एजेंसियां सिया गोयल के मोबाइल से मिले डेटा और कोड में लिखे गए मैसेज को समझने की कोशिश कर रही हैं। पुणे ग्रामीण पुलिस को हाल ही में स्नैपचैट की एक चैट मिली है। इसमें सिया ने कथित तौर पर अपनी एक दोस्त से आधार कार्ड की जानकारी मांगी थी ताकि टिकट बुक किया जा सके। चैट में उसने यह भी लिखा था कि यह “ऐसी शादी के लिए है जो कभी नहीं होगी।” अब जांचकर्ता दूसरे संदिग्ध कोड वाले मैसेज भी खंगाल रहे हैं। उनका पता लगाना है कि क्या इस कथित साजिश में सिया और चेतन के अलावा कोई तीसरा व्यक्ति भी शामिल था।

इन सबूतों पर टिकी जांच

इस मामले में लोहगढ़ किले से कथित तौर पर धक्का देने की घटना का कोई चश्मदीद गवाह नहीं है। इसलिए पुलिस पूरे मामले को परिस्थितिजन्य सबूतों के आधार पर मजबूत बनाने में जुटी है। कानूनी प्रक्रिया के तहत अभियोजन पक्ष को ऐसे सबूत पेश करने होंगे, जिनसे घटनाओं की पूरी कड़ी साफ तौर पर जुड़ जाए और यह साबित हो सके कि आरोपियों की भूमिका ही अपराध की ओर इशारा करती है।

जांच में पुलिस कई अहम सबूतों को जोड़कर मामला मजबूत करने की कोशिश कर रही है। इसमें घटनास्थल का पंचनामा, घटना का री-क्रिएशन (दोबारा घटनाक्रम तैयार करना) और वह जगह भी शामिल है, जहां आरोपियों ने कथित तौर पर केतन को धक्का देने की प्रैक्टिस की थी। इसके अलावा, घटना के समय पहने गए बताए जा रहे कपड़ों और केतन के जले हुए पासपोर्ट की फोरेंसिक जांच भी की जा रही है।

क्या है पंचशील टेस्ट?

पंचशील टेस्ट सुप्रीम कोर्ट का एक अहम कानूनी सिद्धांत है। इसका इस्तेमाल तब किया जाता है, जब किसी मामले में सीधे गवाह नहीं होते और फैसला परिस्थितिजन्य सबूतों के आधार पर करना होता है। साल 1984 में ‘शरद बिरधीचंद सारडा बनाम महाराष्ट्र राज्य’ मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इसके पांच मुख्य सिद्धांत बताए थे।इन पांच सिद्धांतों में यह जरूरी है कि सभी तथ्य पूरी तरह साबित हों, सबूत अपराध से साफ तौर पर जुड़े हों, उनकी विश्वसनीयता मजबूत हो, किसी दूसरी संभावना की गुंजाइश न बचे और सभी सबूत मिलकर ऐसी अटूट कड़ी बनाएं जो सीधे आरोपी की ओर इशारा करे।

शुरुआत में पुलिस दोनों आरोपियों के अलग-अलग बयानों की सच्चाई जानने के लिए उनका पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट कराना चाहती थी। लेकिन कोर्ट में पेशी के दौरान सिया गोयल और चेतन चौधरी, दोनों ने इन टेस्ट के लिए अपनी मंजूरी देने से इनकार कर दिया। भारतीय कानून के अनुसार, किसी आरोपी की सहमति के बिना पॉलीग्राफ या नार्को टेस्ट नहीं किया जा सकता। इसलिए पुलिस को इन टेस्ट की मांग वापस लेनी पड़ी और अब जांच दूसरे सबूतों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है।

कोर्ट में अब जमानत की लड़ाई शुरू

सिया गोयल और चेतन चौधरी अब पुलिस हिरासत की जगह न्यायिक हिरासत में हैं। ऐसे में दोनों की ओर से जमानत के लिए कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उनके वकीलों का कहना है कि पुलिस जरूरी डिजिटल डिवाइस पहले ही जब्त कर चुकी है, इसलिए अब उन्हें लंबे समय तक जेल में रखने की जरूरत नहीं है। वहीं, सिया गोयल की ओर से अदालत में कौन वकील पेश होगा, इसे लेकर भी नया कानूनी विवाद सामने आया है। इस मामले में एक चर्चित वकील का नाम सामने आया है और 10 करोड़ रुपये के मानहानि नोटिस की भी चर्चा हो रही है।

Ketan Agarwal Murder Case: कस्टडी में आरोपी सिया गोयल ने पहना ₹30 हजार का स्वेटशर्ट! सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

Ketan Agarwal Murder Case: पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल मर्डर केस के कुछ दिन बाद सोशल मीडिया पर आरोपी सिया गोयल के ड्रेस को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। कई वायरल पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि कस्टडी के दौरान सिया ने 30,000 रुपये कीमत वाली स्वेटशर्ट पहनी थी। एक यूजर्स ने आरोप लगाया कि वह “जेल में भी आलीशान जिंदगी जी रही हैं।”

वहीं, कुछ लोगों ने तो यह भी आरोप लगाया कि वह केतन अग्रवाल से लिए गए ₹1 करोड़ का इस्तेमाल कर रही हैं। एक वायरल पोस्ट में लिखा था, “कस्टडी में भी वह फैशन कर रही हैं।”

हालांकि, सोशल मीडिया पर हर कोई इन दावों से सहमत नहीं था। एक यूजर ने बताया कि जिस स्वेटशर्ट को 30,000 रुपये का बताया जा रहा है, वह कथित तौर पर Ajio पर करीब 1,600 रुपये में उपलब्ध है। उसने आरोप लगाया कि कुछ सोशल मीडिया पेज सिर्फ लोगों का ध्यान खींचने और एंगेजमेंट बढ़ाने के लिए बढ़ा-चढ़ाकर दावे कर रहे हैं।

एक व्यक्ति ने लिखा, “इतने बुरे भी मत बनो। अगर वे दोषी पाए जाते हैं तो उन्हें सजा मिलनी चाहिए, लेकिन कपड़ों और फैशन पर ध्यान देना बेतुका है।”

एक और यूजर ने कहा, “बिल्कुल, पैसे के लिए इतनी जहर उगलना बंद करो।”

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इन सबके बावजूद, सिया के खिलाफ लोगों का गुस्सा जबरदस्त बना रहा। कई यूजर्स का कहना था कि पुलिस कस्टडी में वह “तनाव-मुक्त” दिख रही थी, जबकि कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि ऑनलाइन वायरल हो रहे कुछ वीडियो में उनके हाथों में हथकड़ी क्यों नहीं थी। एक व्यक्ति ने टिप्पणी की, “उन्हें पता है कि सिस्टम कैसे काम करता है।”

वहीं, मामला तब और चर्चा में आ गया जब कोर्ट के बाहर मीडियाकर्मियों की ओर सिया ने कथित तौर पर अश्लील इशारा किया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। जिससे ऑनलाइन गुस्सा और बढ़ गया।

इस बीच, मामले की जांच तेजी से आगे बढ़ रही है। पुणे की एक अदालत ने रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की कथित हत्या के मामले में आरोपी सिया गोयल और चेतन चौधरी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। केतन अग्रवाल की 18 जून को पुणे के पास लोहागढ़ किले से गिरने के बाद मौत हो गई थी। पुलिस का दावा है कि यह मौत कोई दुर्घटना नहीं थी और उन्हें शक है कि इन दोनों ने ही उन्हें पहाड़ी से धक्का दिया था।

जांचकर्ताओं ने कोर्ट को यह भी बताया कि आरोपियों के फोन से मिली बातचीत में कथित तौर पर “कोड नेम” और एन्क्रिप्टेड-स्टाइल में बातचीत शामिल थी। पुलिस ने यह भी दावा किया कि घटना से पहले हत्या की रिहर्सल की गई हो सकती है।

वो शादी जो कभी नहीं हुई

रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की कथित हत्या की जांच में एक नया मोड़ आया है। पुलिस ने आरोपी सिया गोयल के मोबाइल फोन से डिलीट किए गए चैट्स रिकवर किए हैं, जिनकी अब गहराई से जांच की जा रही है।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, बरामद चैट्स में से एक में सिया कथित तौर पर एक दोस्त से शादी के टिकट बुक करने के लिए अपने आधार कार्ड के दोनों तरफ की तस्वीरें भेजने के लिए कह रही है। चैट्स में लिखा था: “आधार कार्ड के आगे पीछे का फोटो भेज दे। शादी के टिकट लिए जो होने वाली नहीं है, फिर भी भेज दे।”

इस मैसेज का का सीधा-सीधा अनुवाद यह है: “मुझे अपने आधार कार्ड के आगे और पीछे की तस्वीरें भेजो। ये शादी के टिकट बुक करने के लिए हैं, जो कभी होने वाली नहीं थी, लेकिन फिर भी भेज दो।”

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Ketan Agarwal Murder Case: ‘वो शादी जो होनी नहीं है…’ केतन अग्रवाल मर्डर केस में सिया गोयल और उसकी दोस्त की चैट आई सामने

Ketan Agarwal Murder Case: रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की कथित हत्या की जांच में एक नया मोड़ आया है। पुलिस ने आरोपी सिया गोयल के मोबाइल फोन से डिलीट किए गए चैट्स को रिकवर किया है, जिन्हें अब जांच में शामिल किया जा रहा है। जांचकर्ताओं के अनुसार, एक चैट में सिया ने अपनी एक दोस्त से उसके आधार कार्ड के दोनों तरफ की फोटो भेजने को कहा था, ताकि शादी के टिकट बुक किए जा सकें।

चैट में लिखा था: “आधार कार्ड का आगे और पीछे का हिस्सा भेज दो। शादी के टिकट के लिए, जो होने वाली नहीं है, फिर भी भेज दो।” बाद में दोस्त जवाब देता है कि दस्तावेज पहले ही व्हाट्सएप पर भेज दिया था।

स्क्रीनशॉट 2026-07-04 130231फिलहाल, पुलिस अब इन चैट्स की जांच कर रही है ताकि बातचीत का संदर्भ समझा जा सके और यह पता लगाया जा सके कि क्या इनसे आरोपी की कथित हत्या से पहले या बाद की योजनाओं के बारे में कोई सुराग मिलता है।

बता दें कि बरामद किए गए चैट्स उन डिलीट किए गए डेटा का हिस्सा हैं, जिन्हें जांचकर्ताओं ने हाल ही में जांच के दौरान जब्त किए गए मोबाइल फोन से रिकवर किया है।

वहीं, पुलिस ने पहले ही अदालत को सूचित किया था कि उन्हें सांकेतिक (कोड) भाषा में हुई बातचीत मिली है और वे यह पता लगाने के लिए उनकी जांच कर रहे हैं कि क्या कथित साजिश में कोई और भी शामिल था।

सिया गोयल और चेतन चौधरी को न्यायिक हिरासत में भेजा गया

दूसरी तरफ, सिया गोयल और उसके साथी चेतन चौधरी को पॉलीग्राफ टेस्ट कराने से इनकार करने के बाद 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। फिलहाल, केतन अग्रवाल की हत्या की जांच चल रही है और पुलिस आरोपियों के डिवाइस से मिले डिजिटल सबूतों की जांच कर रही है।

तीसरे व्यक्ति की भूमिका की जांच

पुणे पुलिस ने अदालत को बताया कि उन्हें आरोपियों के फोन से डिलीट किया गया डेटा मिला है, जिसमें कोड वर्ड्स, निकनेम और इमोजी में लिखी गई कथित चैट शामिल हैं। जांचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या ये बातचीत कथित साजिश में किसी तीसरे व्यक्ति की भूमिका की ओर इशारा करती हैं।

बीड के युवक से पूछताछ

पुलिस ने बीड जिले से एक युवक को हिरासत में लिया है। जांच में सामने आया है कि सिया गोयल और चेतन चौधरी ने कथित तौर पर उसे हत्या की योजना के बारे में बताया था। अब पुलिस यह पता लगा रही है कि क्या इस कथित साजिश में उसकी कोई भूमिका थी। हालांकि, युवक ने पुलिस को बताया कि उसने दोनों को ऐसा कदम न उठाने की सलाह दी थी।

दूसरा मोबाइल फोन बरामद

जांच के दौरान पुलिस ने सिया गोयल का एक दूसरा मोबाइल फोन भी बरामद किया है, जिसे कथित तौर पर छिपाकर रखा गया था। फिलहाल, पुलिस डिजिटल सबूतों की जांच कर रही है और उम्मीद है कि इस फोन का फोरेंसिक विश्लेषण भी किया जाएगा।

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Ketan Agarwal Murder Case: पुणे पुलिस को शक! केतन मर्डर केस में आ सकता है ‘सोनम रघुवंशी जैसा मोड़’

Ketan Agarwal Murder Case: मेघालय हनीमून मर्डर केस में सोनम रघुवंशी को जमानत दिलाने वाली कानूनी खामियों से सबक लेते हुए, पुणे ग्रामीण पुलिस अब पुणे के बिजनेसमैन केतन अग्रवाल की लोणावला (लोहगढ़ किले) में हुई हत्या के मामले में एक “पूरी तरह मजबूत और बिना गलती वाली” चार्जशीट तैयार करने में जुटी है। यह जानकारी महाराष्ट्र पुलिस के शीर्ष सूत्रों ने न्यूज18 को दी है।

जांच अधिकारी केतन की मंगेतर और मुख्य आरोपी सिया गोयल का पॉलीग्राफ (झूठ पकड़ने वाला) टेस्ट कराने पर जोर दे रहे हैं। हालांकि, यह टेस्ट कोर्ट में सीधे सबूत के तौर पर मान्य नहीं होता, लेकिन पुलिस का मानना है कि इससे कुछ अहम सुराग मिल सकते हैं, जिन्हें बाद में डिजिटल या फॉरेंसिक सबूतों से जांचकर पक्का किया जा सकता है।

यह सावधानी हाल ही में हुए सोनम रघुवंशी मामले को देखते हुए बरती जा रही है, जिसमें गिरफ्तारी की प्रक्रिया में हुई तकनीकी खामियों के कारण आरोपी को जमानत मिल गई थी और बाद में हाई कोर्ट ने भी उस जमानत को बरकरार रखा था। पुलिस सूत्रों का कहना है कि वे यह सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं कि सिया के खिलाफ उनके मुकदमे को किसी भी तरह की ऐसी तकनीकी चूक से कमजोर न होने दिया जाए।

पुलिस पॉलीग्राफ टेस्ट क्यों करवाना चाहती है?

भारतीय कानून के तहत, पॉलीग्राफ टेस्ट के नतीजे अदालत में मुख्य सबूत के तौर पर स्वीकार्य नहीं होते हैं। हालांकि, जांचकर्ताओं का कहना है कि यह टेस्ट जांच के दौरान नई जानकारियां या सुराग हासिल करने के लिए एक टूल के तौर पर काम आ सकता है।

महाराष्ट्र पुलिस के सूत्रों के अनुसार, अधिकारियों को उम्मीद है कि पूछताछ से ऐसी जानकारी मिल सकती है जो पहले पता नहीं थी। उदाहरण के लिए, अगर सिया अनजाने में यह बता देती है कि उसने लोहागढ़ किले की चट्टान की ऊंचाई के बारे में जानकारी जुटाई थी, या ऐसी किसी डिजिटल गतिविधि का जिक्र करती है जिसके बारे में जांचकर्ताओं को पहले पता नहीं था, तो पुलिस उस डिजिटल सबूत को स्वतंत्र रूप से हासिल कर सकती है।

पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान ब्राउजर हिस्ट्री, लोकेशन डेटा या डिलीट की गई सर्च जैसी जानकारी, अगर सही कानूनी प्रक्रियाओं से हासिल की जाए, तो कोर्ट में सबूत के तौर पर मानी जा सकती है, भले ही पॉलीग्राफ टेस्ट के जवाब खुद सबूत के तौर पर मान्य न हों।

पुलिस के एक सीनियर अधिकारी ने कहा, “मकसद पॉलीग्राफ रिपोर्ट को सबूत के तौर पर इस्तेमाल करना नहीं है। इसका मकसद छिपे हुए तथ्यों का पता लगाना है, जिनकी बाद में कानूनी रूप से मान्य डिजिटल और फोरेंसिक सबूतों से पुष्टि की जा सके।”

प्रत्यक्ष सबूत नहीं, केवल परिस्थिति पर टिका पूरा मामला

जांच करने वाले मानते हैं कि उन्हें सबूत जुटाने में बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसा कोई चश्मदीद गवाह नहीं है जिसने केतन को चट्टान से धक्का देते हुए देखा हो। न ही इस कथित घटना का कोई CCTV फुटेज मौजूद है।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, उपलब्ध CCTV फुटेज में सह-आरोपी और सिया के प्रेमी चेतन चौधरी को हुडी पहने हुए घटना वाली जगह के पास ही देखा गया है, लेकिन इससे हत्या साबित नहीं होती।

पुलिस ने डमी का इस्तेमाल करके कथित अपराध वाली जगह का सीन भी दोबारा बनाया है, लेकिन अधिकारी निजी तौर पर मानते हैं कि ऐसे प्रदर्शनों का सबूत के तौर पर बहुत कम महत्व होता है। एक सूत्र ने कहा, “डमी किस तरह गिरती है, यह उसके वजन के बंटवारे, कोण और गति पर निर्भर करता है। इससे वैज्ञानिक रूप से यह साबित नहीं किया जा सकता कि पीड़ित को जान-बूझकर धक्का दिया गया था या वह गलती से फिसल गया था।”

इन्हीं सब वजह से, जांचकर्ता इस मामले को पूरी तरह से परिस्थितिजन्य सबूतों पर आधारित मानते हैं, जिसमें अपराध साबित करने के लिए हर सबूत का आपस में सही ढंग से जुड़ना जरूरी है ताकि कोई शक न रहे।

अभियोजन पक्ष मकसद और डिजिटल सबूतों पर भरोसा कर रहा है

जांचकर्ताओं के मुताबिक, प्रॉसिक्यूशन की मुख्य थ्योरी यह है कि सिया और चेतन ने केतन को रास्ते से हटाने की साजिश रची थी, क्योंकि सिया कथित तौर पर उससे शादी नहीं करना चाहती थी।

इसलिए, चार्जशीट दाखिल करने से पहले पुलिस डिजिटल, फोरेंसिक और हालात से जुड़े सबूत इकट्ठा करने पर ध्यान दे रही है, जो इस कथित साजिश को पुख्ता कर सकें।

जांचकर्ता डिजिटल सर्च हिस्ट्री, मोबाइल फोन डेटा और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की भी जांच कर रहे हैं, जिनसे साजिश या पहले से योजना बनाने की बात साबित हो सके। सूत्रों का कहना है कि ऐसे डिजिटल सबूत हासिल करना, जिनकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि की जा सके, जांच की सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गई है।

‘एक कमजोर कड़ी पूरे केस को गिरा सकती है’

पुलिस सूत्रों का मानना ​​है कि केस का नतीजा काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि क्या वे घटनाओं की एक अटूट कड़ी बना पाते हैं या नहीं।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “अगर बचाव पक्ष उस कड़ी की एक भी अहम कड़ी को तोड़ने में कामयाब हो जाता है, तो अभियोजन पक्ष का केस काफी कमजोर पड़ सकता है।” उन्होंने ऐसे हाई-प्रोफाइल मामलों का जिक्र किया जिनमें सबूतों की कमी के कारण कोर्ट में मुश्किलें आईं।

यही एक वजह है कि जांच करने वाले अधिकारी फाइनल चार्जशीट दाखिल करने से पहले बहुत सावधानी बरत रहे हैं।

सोनम रघुवंशी का मामला एक सबक क्यों बन गया है?

पुलिस सूत्रों के अनुसार, हाल ही का सोनम रघुवंशी मामला-जिसमें उन पर अपने पति राजा रघुवंशी की हत्या का आरोप है-अब पुलिस के लिए एक चेतावनी बन गया है। यह केस भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत जांच प्रक्रिया के कड़ाई से पालन करने के महत्व को और पुख्ता करता है।

सोनम के मामले में, कोर्ट में प्रक्रिया से जुड़ी कमियां सामने आने के बाद अभियोजन पक्ष को मुश्किलों का सामना करना पड़ा। जमानत के आदेश के मुताबिक, पुलिस आरोपी को हिरासत में लेते समय गिरफ्तारी के असल कारणों के बारे में साफ तौर पर नहीं बता पाई। गिरफ्तारी मेमो और उससे जुड़े दस्तावेजों में BNS की धारा 403(1) का जिक्र किया गया था, जो संपत्ति के बेईमानी से गबन से जुड़ी है, जबकि हत्या के मामले में उसकी जांच धारा 103(1) के तहत हो रही थी।

कोर्ट ने माना कि ऐसी गलतियों की वजह से आरोपी के संवैधानिक अधिकारों पर असर पड़ा, जिससे उसे शुरुआती जांच चरण में अपना बचाव ठीक से करने का मौका नहीं मिला। इसी आधार पर कोर्ट ने उसे जमानत दे दी, जिसे बाद में हाई कोर्ट ने भी बरकरार रखा।

पुलिस सूत्रों का कहना है कि यह मामला इस बात की याद दिलाता है कि मजबूत जनमत या मीडिया की कड़ी नजर भी अदालत में हुई प्रक्रियात्मक गलतियों की भरपाई नहीं कर सकती। महाराष्ट्र पुलिस के एक वरिष्ठ सूत्र ने News18 को बताया, “अदालतें सबूतों और कानूनी वैधता के आधार पर मामले तय करती हैं। यहां तक ​​कि क्लर्क की कोई छोटी सी गलती या तय कानूनी प्रक्रिया का पालन न करना भी बचाव पक्ष के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है।”

चूंकि कोई चश्मदीद गवाह या सीधा वीडियो सबूत नहीं है, इसलिए पुणे ग्रामीण पुलिस अब इस बात पर ध्यान दे रही है कि प्रक्रिया का हर कदम कानूनी रूप से सही हो। साथ ही, वे डिजिटल और फोरेंसिक सबूतों को भी मजबूत कर रहे हैं, जिनके बारे में उनका मानना ​​है कि ये सिया के खिलाफ उनके मामले का मुख्य आधार बनेंगे।

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Ketan Agarwal Murder Case: केतन हत्याकांड की आरोपी सिया गोयल का 17 सेकंड का वीडियो वायरल, मीडिया को दिखाई मिडिल फिंगर

अपने मंगेतर केतन अग्रवाल की हत्या के मामले में मुख्य आरोपी सिया गोयल एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार वजह पुलिस जांच नहीं, बल्कि उनका एक वायरल वीडियो है। 17 सेकंड की इस क्लिप में सिया पुलिस के साथ घर से बाहर निकलती दिखाई देती हैं। इसी दौरान वह बाहर मौजूद मीडिया कर्मियों की ओर देखकर कथित तौर पर मिडिल फिंगर दिखाती नजर आती हैं। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

पुलिस जांच के लिए घर पहुंची थी टीम

यह घटना पुणे के मार्केट यार्ड इलाके की है। पुलिस जांच के सिलसिले में सिया गोयल को उनके घर ले जाया गया था। जांच पूरी होने के बाद जब पुलिस उन्हें वापस लेकर बाहर निकली, तभी कैमरों के सामने उन्होंने कथित तौर पर आपत्तिजनक इशारा किया। यह पूरा घटनाक्रम कैमरे में रिकॉर्ड हो गया। इस वीडियो को न्यूज एजेंसी IANS ने अपने X (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर शेयर किया है।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला 18 जून का है, जब केतन अग्रवाल की मौत पुणे के पास स्थित लोहगढ़ किले की खाई में गिरने से हुई थी। शुरुआत में सिया ने पुलिस को बताया था कि केतन का पैर फिसल गया था और यह एक हादसा था। इसी आधार पर पहले दुर्घटना का मामला दर्ज किया गया।

पुलिस को कैसे हुआ शक?

जांच के दौरान पुलिस को सिया के व्यवहार पर शक हुआ। अधिकारियों के मुताबिक, केतन की मौत के बाद सिया के चेहरे पर दुख के कोई खास भाव नहीं दिखे। इसके बाद पुलिस ने मामले की गहराई से जांच शुरू की, जिसमें कई नए तथ्य सामने आए और सिया गोयल व चेतन चौधरी को गिरफ्तार कर लिया गया।

मंगेतर की हत्या की रची गई थी साजिश?

पुलिस का दावा है कि सिया और केतन की शादी इसी साल नवंबर में होने वाली थी। लेकिन सिया के कथित प्रेमी चेतन चौधरी को यह रिश्ता पसंद नहीं था। जांच में सामने आया कि दोनों ने मिलकर केतन को रास्ते से हटाने की योजना बनाई।

पहली कोशिश नाकाम रही

पुलिस के अनुसार, 14 जून को भी केतन को मारने की कोशिश की गई थी। आरोप है कि सिया ने उन्हें किले के पास धक्का दिया, लेकिन वह झाड़ियों का सहारा लेकर बच गए। इसके बाद सिया ने सांप देखने का बहाना बनाकर पूरा मामला सामान्य दिखाने की कोशिश की और बाद में केतन को भरोसे में लिया।

दूसरी बार बुलाकर खाई में धक्का देने का आरोप

जांच एजेंसियों का आरोप है कि कुछ दिनों बाद सिया ने केतन को दोबारा लोहगढ़ किले पर बुलाया, जहां चेतन चौधरी पहले से मौजूद था। पुलिस का कहना है कि दोनों ने पीछे से धक्का देकर केतन को खाई में गिरा दिया, जिससे उसकी मौत हो गई।

आज कोर्ट में होगी पेशी

पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। सिया गोयल और चेतन चौधरी को शुक्रवार दोपहर 2:30 बजे वडगांव कोर्ट में पेश किया जाना है। मामले की जांच अभी जारी है और पुलिस सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है।

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Ketan Agarwal Murder Case: केतन अग्रवाल मर्डर केस में बड़ा अपडेट, आरोपी सिया और चेतन ने पॉलीग्राफ टेस्ट के लिए दी सहमति

Ketan Agarwal Murder Case: पुणे के रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्या की जांच में एक बड़ा अपडेट सामने आया है। इस मामले की मुख्य आरोपी सिया गोयल ने पॉलीग्राफ टेस्ट कराने के लिए अपनी सहमति दे दी है।जिसके बाद पुलिस अब सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी, दोनों का लाइ डिटेक्टर टेस्ट कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है। इसके लिए जरूरी कानूनी प्रक्रियाएं शुरू कर दी गई है और सरकारी वकील ने भी इसकी पुष्टि की है।

सिया गोयल का होगा पॉलीग्राफ टेस्ट

गोयल के वकील विपुल डुसिंग ने बताया कि 20 साल की सिया ने गुरुवार को लोनावाला ग्रामीण पुलिस को पॉलीग्राफ टेस्ट के लिए अपनी सहमति दे दी है। बता दें कि ऐसे टेस्ट के लिए आरोपी की सहमति कानूनी तौर पर जरूरी होती है।

वहीं, जांचकर्ताओं का मानना है कि इस टेस्ट से मामले से जुड़े कई अहम राज सामने आ सकते हैं, क्योंकि अब तक जांच मुख्य रूप से परिस्थितिजन्य और तकनीकी सबूतों पर आधारित रही है।

18 जून को हुई केतन की हत्या

पुलिस के अनुसार, 26 वर्षीय केतन अग्रवाल की 18 जून को पुणे के पास स्थित लोहागढ़ किले की करीब 400 मीटर गहरी खाई में धक्का देकर हत्या कर दी गई थी। जांच में पुलिस का दावा है कि सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी 22 वर्षीय चेतन चौधरी ने मिलकर इस हत्या की साजिश रची थी।

पुलिस का कहना है कि सिया गोयल की इसी साल नवंबर में केतन अग्रवाल से शादी होने वाली थी। दोनों की सगाई फरवरी में हुई थी। आरोप है कि शादी से बचने के लिए सिया और चेतन ने मिलकर केतन की हत्या की योजना बनाई। फिलहाल दोनों आरोपी 3 जुलाई तक पुलिस हिरासत में हैं।

केतन अग्रवाल मर्डर केस में पुलिस पॉलीग्राफ टेस्ट क्यों करवाना चाहती है?

इस केस में कई चुनौतियां हैं क्योंकि पुलिस को कोई चश्मदीद गवाह नहीं मिला है और न ही कोई ऐसा CCTV फुटेज मिला है जिसमें उस जगह को दिखाया गया हो जहां से केतन अग्रवाल के कथित तौर पर चट्टान से गिरने की बात कही जा रही है। पुलिस का यह भी दावा है कि आरोपियों ने घटना से पहले और बाद में अपने मोबाइल फोन से कॉल रिकॉर्ड और डेटा (रीसायकल बिन की फाइलों सहित) डिलीट कर दिए थे, ताकि सबूत मिटाए जा सकें।

इसके अलावा, शादी की तैयारियों को लेकर परिवार के सदस्यों और आरोपियों के अलग-अलग बयानों ने कथित मकसद का पता लगाने की कोशिशों को और मुश्किल बना दिया है। ऐसे में पुलिस का मानना है कि पॉलीग्राफ (लाइ डिटेक्टर) टेस्ट से आरोपियों के बयानों की सच्चाई जांचने, विरोधाभासों का पता लगाने और जांच में नए सुराग मिलने में मदद मिल सकती है।

लाइ डिटेक्टर टेस्ट से क्या पता चल सकता है?

हालांकि, पॉलीग्राफ के नतीजों को कोर्ट में सीधे सबूत के तौर पर नहीं माना जाता, लेकिन जांच करने वाले अक्सर इनका इस्तेमाल जांच के एक टूल के तौर पर करते हैं। इस टेस्ट में व्यक्ति के सवालों के जवाब देने के दौरान उसके शरीर की प्रतिक्रियाओं, जैसे सांस लेने का तरीका, दिल की धड़कन, ब्लड प्रेशर और त्वचा की कंडक्टिविटी को रिकॉर्ड किया जाता है। इसके बाद जांच करने वाले इन प्रतिक्रियाओं में आए बदलावों का विश्लेषण करते हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि जरूरी सवालों के जवाब सामान्य प्रतिक्रियाओं (बेसलाइन रिस्पॉन्स) से काफी अलग हैं या नहीं।

लाइ डिटेक्टर टेस्ट के बारे में कानून क्या कहता है?

सुप्रीम कोर्ट ने 2010 में ‘सेल्वी बनाम कर्नाटक राज्य’ मामले में एक अहम फैसला सुनाया था। इसमें कहा गया था कि पॉलीग्राफ टेस्ट, नार्को-एनालिसिस और ब्रेन-मैपिंग टेस्ट संबंधित व्यक्ति की सहमति के बिना नहीं किए जा सकते। कोर्ट ने माना कि ऐसे टेस्ट जबरदस्ती करने से संविधान के आर्टिकल 20(3) के तहत खुद के खिलाफ गवाही न देने के अधिकार और आर्टिकल 21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन होता है। इसलिए, पॉलीग्राफ टेस्ट करने से पहले आरोपी की अपनी मर्जी से सहमति लेना जरूरी है।

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