Ketan Agarwal Murder Case: केतन की हत्या करने से पहले सिया ने चेतन से कर ली थी शादी! WhatsApp चैट से हुआ खुलासा

Ketan Agarwal Murder Case: लोनावला के पास ऐतिहासिक लोहागढ़ किले से कारोबारी केतन अग्रवाल को कथित तौर पर धक्का देकर नीचे गिराने और उनकी मौत के मामले ने पूरे देश को हिला दिया था। अब इस केस में एक और चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है। पुलिस जांच में पता चला है कि केतन की मंगेतर और इस मामले की मुख्य आरोपी सिया गोयल कथित तौर पर पहले से शादीशुदा थीं।

News18 की एक रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस का दावा है कि आरोपी सिया गोयल और उनके कथित प्रेमी चेतन चौधरी ने चार महीने पहले अपने परिवारों से छिपाकर गुपचुप तरीके से शादी कर ली थी।

खबरों के मुताबिक, उनके फोन से मिली WhatsApp चैट से यह बात सामने आई है। जांचकर्ताओं का कहना है कि इन चैट ने इस गुपचुप शादी का राज खोल दिया है और पूरे मामले को एक नया मोड़ दिया है।

आरोप है कि 18 जून को केतन अग्रवाल को लोहागढ़ किले से नीचे धकेलकर मार डाला गया था। फिलहाल, पुलिस ने इस मामले में सिया गोयल और चेतन चौधरी को गिरफ्तार किया है।

WhatsApp चैट और इंटरनेट हिस्ट्री से कथित तौर पर क्या पता चला?

News18 के मुताबिक, पुलिस ने आरोपियों के फोन से मिले कॉल रिकॉर्ड, लोकेशन डेटा, चैट और इंटरनेट सर्च हिस्ट्री की जांच की। पिछले छह-सात महीनों के डिजिटल डेटा की जांच के दौरान, जांच करने वालों को पता चला कि सिया और चेतन ने कथित तौर पर चार महीने पहले ही शादी कर ली थी, लेकिन परिवारों के डर से इसे छिपाकर रखा था।

पुलिस को शक है कि इसी गुपचुप शादी के बाद केतन को रास्ते से हटाने की कथित साजिश रची गई थी।

‘मुझमें हिम्मत नहीं है, तुम भी आओ’: सिया ने कथित तौर पर चेतन से क्या कहा?

पुलिस का कहना है कि केतन अग्रवाल की हत्या की पहली कोशिश कथित तौर पर 14 जून को ही की गई थी, लेकिन सिया आखिरी पल में घबरा गई और कोशिश नाकाम रही। इसके बाद, उसने कथित तौर पर चेतन को मैसेज किया, “मुझमें यह करने की हिम्मत नहीं है, तुम भी आओ – हम दोनों मिलकर उसे चट्टान से नीचे धकेल देंगे।” जांचकर्ताओं का कहना है कि दोनों ने कथित तौर पर 18 जून को मिलकर हत्या को अंजाम दिया।

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Ketan Murder Case: केतन अग्रवाल मर्डर केस में अब क्या होगा? पंचशील टेस्ट से जमानत तक, जानिए आगे की पूरी कहानी

पूरे देश को हिला देने वाले पुणे के केतन अग्रवाल मर्डर केस की आरोपी सिया गोयल और उसके बॉयफ्रेंड चेतन चौधरी को 16 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। दोनों की 11 दिन की पुलिस रिमांड पूरी होने के बाद अब जांच एजेंसियां उनसे पूछताछ की बजाय मामले से जुड़े सबूतों की जांच और उन्हें मजबूत करने पर ध्यान दे रही हैं।

अब आगे क्या होगा?

इस मामले में अब जांच का सबसे बड़ा फोकस डिजिटल सबूतों पर है। जांच एजेंसियां सिया गोयल के मोबाइल से मिले डेटा और कोड में लिखे गए मैसेज को समझने की कोशिश कर रही हैं। पुणे ग्रामीण पुलिस को हाल ही में स्नैपचैट की एक चैट मिली है। इसमें सिया ने कथित तौर पर अपनी एक दोस्त से आधार कार्ड की जानकारी मांगी थी ताकि टिकट बुक किया जा सके। चैट में उसने यह भी लिखा था कि यह “ऐसी शादी के लिए है जो कभी नहीं होगी।” अब जांचकर्ता दूसरे संदिग्ध कोड वाले मैसेज भी खंगाल रहे हैं। उनका पता लगाना है कि क्या इस कथित साजिश में सिया और चेतन के अलावा कोई तीसरा व्यक्ति भी शामिल था।

इन सबूतों पर टिकी जांच

इस मामले में लोहगढ़ किले से कथित तौर पर धक्का देने की घटना का कोई चश्मदीद गवाह नहीं है। इसलिए पुलिस पूरे मामले को परिस्थितिजन्य सबूतों के आधार पर मजबूत बनाने में जुटी है। कानूनी प्रक्रिया के तहत अभियोजन पक्ष को ऐसे सबूत पेश करने होंगे, जिनसे घटनाओं की पूरी कड़ी साफ तौर पर जुड़ जाए और यह साबित हो सके कि आरोपियों की भूमिका ही अपराध की ओर इशारा करती है।

जांच में पुलिस कई अहम सबूतों को जोड़कर मामला मजबूत करने की कोशिश कर रही है। इसमें घटनास्थल का पंचनामा, घटना का री-क्रिएशन (दोबारा घटनाक्रम तैयार करना) और वह जगह भी शामिल है, जहां आरोपियों ने कथित तौर पर केतन को धक्का देने की प्रैक्टिस की थी। इसके अलावा, घटना के समय पहने गए बताए जा रहे कपड़ों और केतन के जले हुए पासपोर्ट की फोरेंसिक जांच भी की जा रही है।

क्या है पंचशील टेस्ट?

पंचशील टेस्ट सुप्रीम कोर्ट का एक अहम कानूनी सिद्धांत है। इसका इस्तेमाल तब किया जाता है, जब किसी मामले में सीधे गवाह नहीं होते और फैसला परिस्थितिजन्य सबूतों के आधार पर करना होता है। साल 1984 में ‘शरद बिरधीचंद सारडा बनाम महाराष्ट्र राज्य’ मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इसके पांच मुख्य सिद्धांत बताए थे।इन पांच सिद्धांतों में यह जरूरी है कि सभी तथ्य पूरी तरह साबित हों, सबूत अपराध से साफ तौर पर जुड़े हों, उनकी विश्वसनीयता मजबूत हो, किसी दूसरी संभावना की गुंजाइश न बचे और सभी सबूत मिलकर ऐसी अटूट कड़ी बनाएं जो सीधे आरोपी की ओर इशारा करे।

शुरुआत में पुलिस दोनों आरोपियों के अलग-अलग बयानों की सच्चाई जानने के लिए उनका पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट कराना चाहती थी। लेकिन कोर्ट में पेशी के दौरान सिया गोयल और चेतन चौधरी, दोनों ने इन टेस्ट के लिए अपनी मंजूरी देने से इनकार कर दिया। भारतीय कानून के अनुसार, किसी आरोपी की सहमति के बिना पॉलीग्राफ या नार्को टेस्ट नहीं किया जा सकता। इसलिए पुलिस को इन टेस्ट की मांग वापस लेनी पड़ी और अब जांच दूसरे सबूतों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है।

कोर्ट में अब जमानत की लड़ाई शुरू

सिया गोयल और चेतन चौधरी अब पुलिस हिरासत की जगह न्यायिक हिरासत में हैं। ऐसे में दोनों की ओर से जमानत के लिए कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उनके वकीलों का कहना है कि पुलिस जरूरी डिजिटल डिवाइस पहले ही जब्त कर चुकी है, इसलिए अब उन्हें लंबे समय तक जेल में रखने की जरूरत नहीं है। वहीं, सिया गोयल की ओर से अदालत में कौन वकील पेश होगा, इसे लेकर भी नया कानूनी विवाद सामने आया है। इस मामले में एक चर्चित वकील का नाम सामने आया है और 10 करोड़ रुपये के मानहानि नोटिस की भी चर्चा हो रही है।

Ketan Agarwal Murder Case: कस्टडी में आरोपी सिया गोयल ने पहना ₹30 हजार का स्वेटशर्ट! सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

Ketan Agarwal Murder Case: पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल मर्डर केस के कुछ दिन बाद सोशल मीडिया पर आरोपी सिया गोयल के ड्रेस को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। कई वायरल पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि कस्टडी के दौरान सिया ने 30,000 रुपये कीमत वाली स्वेटशर्ट पहनी थी। एक यूजर्स ने आरोप लगाया कि वह “जेल में भी आलीशान जिंदगी जी रही हैं।”

वहीं, कुछ लोगों ने तो यह भी आरोप लगाया कि वह केतन अग्रवाल से लिए गए ₹1 करोड़ का इस्तेमाल कर रही हैं। एक वायरल पोस्ट में लिखा था, “कस्टडी में भी वह फैशन कर रही हैं।”

हालांकि, सोशल मीडिया पर हर कोई इन दावों से सहमत नहीं था। एक यूजर ने बताया कि जिस स्वेटशर्ट को 30,000 रुपये का बताया जा रहा है, वह कथित तौर पर Ajio पर करीब 1,600 रुपये में उपलब्ध है। उसने आरोप लगाया कि कुछ सोशल मीडिया पेज सिर्फ लोगों का ध्यान खींचने और एंगेजमेंट बढ़ाने के लिए बढ़ा-चढ़ाकर दावे कर रहे हैं।

एक व्यक्ति ने लिखा, “इतने बुरे भी मत बनो। अगर वे दोषी पाए जाते हैं तो उन्हें सजा मिलनी चाहिए, लेकिन कपड़ों और फैशन पर ध्यान देना बेतुका है।”

एक और यूजर ने कहा, “बिल्कुल, पैसे के लिए इतनी जहर उगलना बंद करो।”

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इन सबके बावजूद, सिया के खिलाफ लोगों का गुस्सा जबरदस्त बना रहा। कई यूजर्स का कहना था कि पुलिस कस्टडी में वह “तनाव-मुक्त” दिख रही थी, जबकि कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि ऑनलाइन वायरल हो रहे कुछ वीडियो में उनके हाथों में हथकड़ी क्यों नहीं थी। एक व्यक्ति ने टिप्पणी की, “उन्हें पता है कि सिस्टम कैसे काम करता है।”

वहीं, मामला तब और चर्चा में आ गया जब कोर्ट के बाहर मीडियाकर्मियों की ओर सिया ने कथित तौर पर अश्लील इशारा किया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। जिससे ऑनलाइन गुस्सा और बढ़ गया।

इस बीच, मामले की जांच तेजी से आगे बढ़ रही है। पुणे की एक अदालत ने रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की कथित हत्या के मामले में आरोपी सिया गोयल और चेतन चौधरी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। केतन अग्रवाल की 18 जून को पुणे के पास लोहागढ़ किले से गिरने के बाद मौत हो गई थी। पुलिस का दावा है कि यह मौत कोई दुर्घटना नहीं थी और उन्हें शक है कि इन दोनों ने ही उन्हें पहाड़ी से धक्का दिया था।

जांचकर्ताओं ने कोर्ट को यह भी बताया कि आरोपियों के फोन से मिली बातचीत में कथित तौर पर “कोड नेम” और एन्क्रिप्टेड-स्टाइल में बातचीत शामिल थी। पुलिस ने यह भी दावा किया कि घटना से पहले हत्या की रिहर्सल की गई हो सकती है।

वो शादी जो कभी नहीं हुई

रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की कथित हत्या की जांच में एक नया मोड़ आया है। पुलिस ने आरोपी सिया गोयल के मोबाइल फोन से डिलीट किए गए चैट्स रिकवर किए हैं, जिनकी अब गहराई से जांच की जा रही है।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, बरामद चैट्स में से एक में सिया कथित तौर पर एक दोस्त से शादी के टिकट बुक करने के लिए अपने आधार कार्ड के दोनों तरफ की तस्वीरें भेजने के लिए कह रही है। चैट्स में लिखा था: “आधार कार्ड के आगे पीछे का फोटो भेज दे। शादी के टिकट लिए जो होने वाली नहीं है, फिर भी भेज दे।”

इस मैसेज का का सीधा-सीधा अनुवाद यह है: “मुझे अपने आधार कार्ड के आगे और पीछे की तस्वीरें भेजो। ये शादी के टिकट बुक करने के लिए हैं, जो कभी होने वाली नहीं थी, लेकिन फिर भी भेज दो।”

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Ketan Agarwal Murder Case: ‘वो शादी जो होनी नहीं है…’ केतन अग्रवाल मर्डर केस में सिया गोयल और उसकी दोस्त की चैट आई सामने

Ketan Agarwal Murder Case: रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की कथित हत्या की जांच में एक नया मोड़ आया है। पुलिस ने आरोपी सिया गोयल के मोबाइल फोन से डिलीट किए गए चैट्स को रिकवर किया है, जिन्हें अब जांच में शामिल किया जा रहा है। जांचकर्ताओं के अनुसार, एक चैट में सिया ने अपनी एक दोस्त से उसके आधार कार्ड के दोनों तरफ की फोटो भेजने को कहा था, ताकि शादी के टिकट बुक किए जा सकें।

चैट में लिखा था: “आधार कार्ड का आगे और पीछे का हिस्सा भेज दो। शादी के टिकट के लिए, जो होने वाली नहीं है, फिर भी भेज दो।” बाद में दोस्त जवाब देता है कि दस्तावेज पहले ही व्हाट्सएप पर भेज दिया था।

स्क्रीनशॉट 2026-07-04 130231फिलहाल, पुलिस अब इन चैट्स की जांच कर रही है ताकि बातचीत का संदर्भ समझा जा सके और यह पता लगाया जा सके कि क्या इनसे आरोपी की कथित हत्या से पहले या बाद की योजनाओं के बारे में कोई सुराग मिलता है।

बता दें कि बरामद किए गए चैट्स उन डिलीट किए गए डेटा का हिस्सा हैं, जिन्हें जांचकर्ताओं ने हाल ही में जांच के दौरान जब्त किए गए मोबाइल फोन से रिकवर किया है।

वहीं, पुलिस ने पहले ही अदालत को सूचित किया था कि उन्हें सांकेतिक (कोड) भाषा में हुई बातचीत मिली है और वे यह पता लगाने के लिए उनकी जांच कर रहे हैं कि क्या कथित साजिश में कोई और भी शामिल था।

सिया गोयल और चेतन चौधरी को न्यायिक हिरासत में भेजा गया

दूसरी तरफ, सिया गोयल और उसके साथी चेतन चौधरी को पॉलीग्राफ टेस्ट कराने से इनकार करने के बाद 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। फिलहाल, केतन अग्रवाल की हत्या की जांच चल रही है और पुलिस आरोपियों के डिवाइस से मिले डिजिटल सबूतों की जांच कर रही है।

तीसरे व्यक्ति की भूमिका की जांच

पुणे पुलिस ने अदालत को बताया कि उन्हें आरोपियों के फोन से डिलीट किया गया डेटा मिला है, जिसमें कोड वर्ड्स, निकनेम और इमोजी में लिखी गई कथित चैट शामिल हैं। जांचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या ये बातचीत कथित साजिश में किसी तीसरे व्यक्ति की भूमिका की ओर इशारा करती हैं।

बीड के युवक से पूछताछ

पुलिस ने बीड जिले से एक युवक को हिरासत में लिया है। जांच में सामने आया है कि सिया गोयल और चेतन चौधरी ने कथित तौर पर उसे हत्या की योजना के बारे में बताया था। अब पुलिस यह पता लगा रही है कि क्या इस कथित साजिश में उसकी कोई भूमिका थी। हालांकि, युवक ने पुलिस को बताया कि उसने दोनों को ऐसा कदम न उठाने की सलाह दी थी।

दूसरा मोबाइल फोन बरामद

जांच के दौरान पुलिस ने सिया गोयल का एक दूसरा मोबाइल फोन भी बरामद किया है, जिसे कथित तौर पर छिपाकर रखा गया था। फिलहाल, पुलिस डिजिटल सबूतों की जांच कर रही है और उम्मीद है कि इस फोन का फोरेंसिक विश्लेषण भी किया जाएगा।

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Ketan Agarwal Murder Case: पुणे पुलिस को शक! केतन मर्डर केस में आ सकता है ‘सोनम रघुवंशी जैसा मोड़’

Ketan Agarwal Murder Case: मेघालय हनीमून मर्डर केस में सोनम रघुवंशी को जमानत दिलाने वाली कानूनी खामियों से सबक लेते हुए, पुणे ग्रामीण पुलिस अब पुणे के बिजनेसमैन केतन अग्रवाल की लोणावला (लोहगढ़ किले) में हुई हत्या के मामले में एक “पूरी तरह मजबूत और बिना गलती वाली” चार्जशीट तैयार करने में जुटी है। यह जानकारी महाराष्ट्र पुलिस के शीर्ष सूत्रों ने न्यूज18 को दी है।

जांच अधिकारी केतन की मंगेतर और मुख्य आरोपी सिया गोयल का पॉलीग्राफ (झूठ पकड़ने वाला) टेस्ट कराने पर जोर दे रहे हैं। हालांकि, यह टेस्ट कोर्ट में सीधे सबूत के तौर पर मान्य नहीं होता, लेकिन पुलिस का मानना है कि इससे कुछ अहम सुराग मिल सकते हैं, जिन्हें बाद में डिजिटल या फॉरेंसिक सबूतों से जांचकर पक्का किया जा सकता है।

यह सावधानी हाल ही में हुए सोनम रघुवंशी मामले को देखते हुए बरती जा रही है, जिसमें गिरफ्तारी की प्रक्रिया में हुई तकनीकी खामियों के कारण आरोपी को जमानत मिल गई थी और बाद में हाई कोर्ट ने भी उस जमानत को बरकरार रखा था। पुलिस सूत्रों का कहना है कि वे यह सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं कि सिया के खिलाफ उनके मुकदमे को किसी भी तरह की ऐसी तकनीकी चूक से कमजोर न होने दिया जाए।

पुलिस पॉलीग्राफ टेस्ट क्यों करवाना चाहती है?

भारतीय कानून के तहत, पॉलीग्राफ टेस्ट के नतीजे अदालत में मुख्य सबूत के तौर पर स्वीकार्य नहीं होते हैं। हालांकि, जांचकर्ताओं का कहना है कि यह टेस्ट जांच के दौरान नई जानकारियां या सुराग हासिल करने के लिए एक टूल के तौर पर काम आ सकता है।

महाराष्ट्र पुलिस के सूत्रों के अनुसार, अधिकारियों को उम्मीद है कि पूछताछ से ऐसी जानकारी मिल सकती है जो पहले पता नहीं थी। उदाहरण के लिए, अगर सिया अनजाने में यह बता देती है कि उसने लोहागढ़ किले की चट्टान की ऊंचाई के बारे में जानकारी जुटाई थी, या ऐसी किसी डिजिटल गतिविधि का जिक्र करती है जिसके बारे में जांचकर्ताओं को पहले पता नहीं था, तो पुलिस उस डिजिटल सबूत को स्वतंत्र रूप से हासिल कर सकती है।

पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान ब्राउजर हिस्ट्री, लोकेशन डेटा या डिलीट की गई सर्च जैसी जानकारी, अगर सही कानूनी प्रक्रियाओं से हासिल की जाए, तो कोर्ट में सबूत के तौर पर मानी जा सकती है, भले ही पॉलीग्राफ टेस्ट के जवाब खुद सबूत के तौर पर मान्य न हों।

पुलिस के एक सीनियर अधिकारी ने कहा, “मकसद पॉलीग्राफ रिपोर्ट को सबूत के तौर पर इस्तेमाल करना नहीं है। इसका मकसद छिपे हुए तथ्यों का पता लगाना है, जिनकी बाद में कानूनी रूप से मान्य डिजिटल और फोरेंसिक सबूतों से पुष्टि की जा सके।”

प्रत्यक्ष सबूत नहीं, केवल परिस्थिति पर टिका पूरा मामला

जांच करने वाले मानते हैं कि उन्हें सबूत जुटाने में बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसा कोई चश्मदीद गवाह नहीं है जिसने केतन को चट्टान से धक्का देते हुए देखा हो। न ही इस कथित घटना का कोई CCTV फुटेज मौजूद है।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, उपलब्ध CCTV फुटेज में सह-आरोपी और सिया के प्रेमी चेतन चौधरी को हुडी पहने हुए घटना वाली जगह के पास ही देखा गया है, लेकिन इससे हत्या साबित नहीं होती।

पुलिस ने डमी का इस्तेमाल करके कथित अपराध वाली जगह का सीन भी दोबारा बनाया है, लेकिन अधिकारी निजी तौर पर मानते हैं कि ऐसे प्रदर्शनों का सबूत के तौर पर बहुत कम महत्व होता है। एक सूत्र ने कहा, “डमी किस तरह गिरती है, यह उसके वजन के बंटवारे, कोण और गति पर निर्भर करता है। इससे वैज्ञानिक रूप से यह साबित नहीं किया जा सकता कि पीड़ित को जान-बूझकर धक्का दिया गया था या वह गलती से फिसल गया था।”

इन्हीं सब वजह से, जांचकर्ता इस मामले को पूरी तरह से परिस्थितिजन्य सबूतों पर आधारित मानते हैं, जिसमें अपराध साबित करने के लिए हर सबूत का आपस में सही ढंग से जुड़ना जरूरी है ताकि कोई शक न रहे।

अभियोजन पक्ष मकसद और डिजिटल सबूतों पर भरोसा कर रहा है

जांचकर्ताओं के मुताबिक, प्रॉसिक्यूशन की मुख्य थ्योरी यह है कि सिया और चेतन ने केतन को रास्ते से हटाने की साजिश रची थी, क्योंकि सिया कथित तौर पर उससे शादी नहीं करना चाहती थी।

इसलिए, चार्जशीट दाखिल करने से पहले पुलिस डिजिटल, फोरेंसिक और हालात से जुड़े सबूत इकट्ठा करने पर ध्यान दे रही है, जो इस कथित साजिश को पुख्ता कर सकें।

जांचकर्ता डिजिटल सर्च हिस्ट्री, मोबाइल फोन डेटा और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की भी जांच कर रहे हैं, जिनसे साजिश या पहले से योजना बनाने की बात साबित हो सके। सूत्रों का कहना है कि ऐसे डिजिटल सबूत हासिल करना, जिनकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि की जा सके, जांच की सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गई है।

‘एक कमजोर कड़ी पूरे केस को गिरा सकती है’

पुलिस सूत्रों का मानना ​​है कि केस का नतीजा काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि क्या वे घटनाओं की एक अटूट कड़ी बना पाते हैं या नहीं।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “अगर बचाव पक्ष उस कड़ी की एक भी अहम कड़ी को तोड़ने में कामयाब हो जाता है, तो अभियोजन पक्ष का केस काफी कमजोर पड़ सकता है।” उन्होंने ऐसे हाई-प्रोफाइल मामलों का जिक्र किया जिनमें सबूतों की कमी के कारण कोर्ट में मुश्किलें आईं।

यही एक वजह है कि जांच करने वाले अधिकारी फाइनल चार्जशीट दाखिल करने से पहले बहुत सावधानी बरत रहे हैं।

सोनम रघुवंशी का मामला एक सबक क्यों बन गया है?

पुलिस सूत्रों के अनुसार, हाल ही का सोनम रघुवंशी मामला-जिसमें उन पर अपने पति राजा रघुवंशी की हत्या का आरोप है-अब पुलिस के लिए एक चेतावनी बन गया है। यह केस भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत जांच प्रक्रिया के कड़ाई से पालन करने के महत्व को और पुख्ता करता है।

सोनम के मामले में, कोर्ट में प्रक्रिया से जुड़ी कमियां सामने आने के बाद अभियोजन पक्ष को मुश्किलों का सामना करना पड़ा। जमानत के आदेश के मुताबिक, पुलिस आरोपी को हिरासत में लेते समय गिरफ्तारी के असल कारणों के बारे में साफ तौर पर नहीं बता पाई। गिरफ्तारी मेमो और उससे जुड़े दस्तावेजों में BNS की धारा 403(1) का जिक्र किया गया था, जो संपत्ति के बेईमानी से गबन से जुड़ी है, जबकि हत्या के मामले में उसकी जांच धारा 103(1) के तहत हो रही थी।

कोर्ट ने माना कि ऐसी गलतियों की वजह से आरोपी के संवैधानिक अधिकारों पर असर पड़ा, जिससे उसे शुरुआती जांच चरण में अपना बचाव ठीक से करने का मौका नहीं मिला। इसी आधार पर कोर्ट ने उसे जमानत दे दी, जिसे बाद में हाई कोर्ट ने भी बरकरार रखा।

पुलिस सूत्रों का कहना है कि यह मामला इस बात की याद दिलाता है कि मजबूत जनमत या मीडिया की कड़ी नजर भी अदालत में हुई प्रक्रियात्मक गलतियों की भरपाई नहीं कर सकती। महाराष्ट्र पुलिस के एक वरिष्ठ सूत्र ने News18 को बताया, “अदालतें सबूतों और कानूनी वैधता के आधार पर मामले तय करती हैं। यहां तक ​​कि क्लर्क की कोई छोटी सी गलती या तय कानूनी प्रक्रिया का पालन न करना भी बचाव पक्ष के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है।”

चूंकि कोई चश्मदीद गवाह या सीधा वीडियो सबूत नहीं है, इसलिए पुणे ग्रामीण पुलिस अब इस बात पर ध्यान दे रही है कि प्रक्रिया का हर कदम कानूनी रूप से सही हो। साथ ही, वे डिजिटल और फोरेंसिक सबूतों को भी मजबूत कर रहे हैं, जिनके बारे में उनका मानना ​​है कि ये सिया के खिलाफ उनके मामले का मुख्य आधार बनेंगे।

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Ketan Agarwal Murder Case: केतन अग्रवाल मर्डर केस में बड़ा अपडेट, आरोपी सिया और चेतन ने पॉलीग्राफ टेस्ट के लिए दी सहमति

Ketan Agarwal Murder Case: पुणे के रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्या की जांच में एक बड़ा अपडेट सामने आया है। इस मामले की मुख्य आरोपी सिया गोयल ने पॉलीग्राफ टेस्ट कराने के लिए अपनी सहमति दे दी है।जिसके बाद पुलिस अब सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी, दोनों का लाइ डिटेक्टर टेस्ट कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है। इसके लिए जरूरी कानूनी प्रक्रियाएं शुरू कर दी गई है और सरकारी वकील ने भी इसकी पुष्टि की है।

सिया गोयल का होगा पॉलीग्राफ टेस्ट

गोयल के वकील विपुल डुसिंग ने बताया कि 20 साल की सिया ने गुरुवार को लोनावाला ग्रामीण पुलिस को पॉलीग्राफ टेस्ट के लिए अपनी सहमति दे दी है। बता दें कि ऐसे टेस्ट के लिए आरोपी की सहमति कानूनी तौर पर जरूरी होती है।

वहीं, जांचकर्ताओं का मानना है कि इस टेस्ट से मामले से जुड़े कई अहम राज सामने आ सकते हैं, क्योंकि अब तक जांच मुख्य रूप से परिस्थितिजन्य और तकनीकी सबूतों पर आधारित रही है।

18 जून को हुई केतन की हत्या

पुलिस के अनुसार, 26 वर्षीय केतन अग्रवाल की 18 जून को पुणे के पास स्थित लोहागढ़ किले की करीब 400 मीटर गहरी खाई में धक्का देकर हत्या कर दी गई थी। जांच में पुलिस का दावा है कि सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी 22 वर्षीय चेतन चौधरी ने मिलकर इस हत्या की साजिश रची थी।

पुलिस का कहना है कि सिया गोयल की इसी साल नवंबर में केतन अग्रवाल से शादी होने वाली थी। दोनों की सगाई फरवरी में हुई थी। आरोप है कि शादी से बचने के लिए सिया और चेतन ने मिलकर केतन की हत्या की योजना बनाई। फिलहाल दोनों आरोपी 3 जुलाई तक पुलिस हिरासत में हैं।

केतन अग्रवाल मर्डर केस में पुलिस पॉलीग्राफ टेस्ट क्यों करवाना चाहती है?

इस केस में कई चुनौतियां हैं क्योंकि पुलिस को कोई चश्मदीद गवाह नहीं मिला है और न ही कोई ऐसा CCTV फुटेज मिला है जिसमें उस जगह को दिखाया गया हो जहां से केतन अग्रवाल के कथित तौर पर चट्टान से गिरने की बात कही जा रही है। पुलिस का यह भी दावा है कि आरोपियों ने घटना से पहले और बाद में अपने मोबाइल फोन से कॉल रिकॉर्ड और डेटा (रीसायकल बिन की फाइलों सहित) डिलीट कर दिए थे, ताकि सबूत मिटाए जा सकें।

इसके अलावा, शादी की तैयारियों को लेकर परिवार के सदस्यों और आरोपियों के अलग-अलग बयानों ने कथित मकसद का पता लगाने की कोशिशों को और मुश्किल बना दिया है। ऐसे में पुलिस का मानना है कि पॉलीग्राफ (लाइ डिटेक्टर) टेस्ट से आरोपियों के बयानों की सच्चाई जांचने, विरोधाभासों का पता लगाने और जांच में नए सुराग मिलने में मदद मिल सकती है।

लाइ डिटेक्टर टेस्ट से क्या पता चल सकता है?

हालांकि, पॉलीग्राफ के नतीजों को कोर्ट में सीधे सबूत के तौर पर नहीं माना जाता, लेकिन जांच करने वाले अक्सर इनका इस्तेमाल जांच के एक टूल के तौर पर करते हैं। इस टेस्ट में व्यक्ति के सवालों के जवाब देने के दौरान उसके शरीर की प्रतिक्रियाओं, जैसे सांस लेने का तरीका, दिल की धड़कन, ब्लड प्रेशर और त्वचा की कंडक्टिविटी को रिकॉर्ड किया जाता है। इसके बाद जांच करने वाले इन प्रतिक्रियाओं में आए बदलावों का विश्लेषण करते हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि जरूरी सवालों के जवाब सामान्य प्रतिक्रियाओं (बेसलाइन रिस्पॉन्स) से काफी अलग हैं या नहीं।

लाइ डिटेक्टर टेस्ट के बारे में कानून क्या कहता है?

सुप्रीम कोर्ट ने 2010 में ‘सेल्वी बनाम कर्नाटक राज्य’ मामले में एक अहम फैसला सुनाया था। इसमें कहा गया था कि पॉलीग्राफ टेस्ट, नार्को-एनालिसिस और ब्रेन-मैपिंग टेस्ट संबंधित व्यक्ति की सहमति के बिना नहीं किए जा सकते। कोर्ट ने माना कि ऐसे टेस्ट जबरदस्ती करने से संविधान के आर्टिकल 20(3) के तहत खुद के खिलाफ गवाही न देने के अधिकार और आर्टिकल 21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन होता है। इसलिए, पॉलीग्राफ टेस्ट करने से पहले आरोपी की अपनी मर्जी से सहमति लेना जरूरी है।

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भाई से झगड़ा, फिर चाय का ब्रेक… बाली ट्रिप से पहले कैब ड्राइवर ने सिया को लेकर किया बड़ा खुलासा

Ketan Agrawal Murder Case: केतन अग्रवाल मर्डर केस में एक के बाद एक नए खुलासे होते जा रहे हैं। इस बार केतन और हत्या की आरोपी सिया को छोड़ने वाले कैब ड्राइवर ने बड़ा दावा किया है। ड्राइवर के मुताबिक, रास्ते में मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर सिया ने गाड़ी रुकवाई थी। इसके बाद उसने कार की डिक्की खोली और अपने पर्स से कुछ निकाला। इसके कुछ समय बाद दोनों एयरपोर्ट पहुंच गए, जहां बाद में पता चला कि केतन का पासपोर्ट गायब है।

वहीं, इस दावे को जांच में काफी अहम माना जा रहा है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बाली में होने वाले प्री-वेडिंग फोटोशूट से पहले केतन का पासपोर्ट कैसे गायब हुआ। शुरुआती जांच से यह संकेत मिल रहे हैं कि पासपोर्ट को जानबूझकर गायब किया गया था।

कैब ड्राइवर वैभव जाधव ने मीडिया के साथ खास बातचीत में इस यात्रा की जानकारी दी। जाधव ने बताया कि उन्होंने सुबह करीब 10 बजे पुणे से यात्रियों को पिक किया था। उनके मुताबिक, सिया ने पहले कैब में बैठने से मना कर दिया था, लेकिन उनके भाई साहिल ने उन्हें जबरदस्ती गाड़ी में बिठाया। इसके बाद कैब रावेत पहुंची, जहां केतन अग्रवाल उसमें सवार हुए।

कैब ड्राइवर ने दावा किया कि मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर सफर के दौरान सिया ने चाय पीने के लिए एक फूड मॉल पर गाड़ी रुकवाई। करीब 10 मिनट बाद वह वापस आई और उसने ड्राइवर से कार की डिक्की खोलने को कहा।

ड्राइवर के मुताबिक, डिक्की के पास जाकर सिया ने अपने पर्स से कुछ सामान निकाला। इसके बाद करीब 15 से 20 मिनट बाद दोनों यात्रियों ने उसे वापस गाड़ी के पास बुलाया और फिर मुंबई एयरपोर्ट के लिए सफर शुरू कर दिया।

जाधव ने बताया कि उन्होंने सभी यात्रियों को मुंबई एयरपोर्ट पर उतार दिया था। करीब दो मिनट बाद, उन्हें एक कॉल आया जिसमें बताया गया कि कैब में एक छोटा बैग छूट गया है। उन्होंने कहा कि वह उस समय लगभग 200 मीटर दूर थे और वापस आकर बैग लौटा दिया।

ड्राइवर ने आगे बताया कि 500 ​​मीटर और आगे जाने के बाद, उन्हें एक और कॉल आया जिसमें कहा गया कि केतन का पासपोर्ट कैब में ही गिर गया है। जाधव ने बताया कि उन्होंने पहले ही पूरी गाड़ी देख ली थी और पासपोर्ट नहीं मिला था। इसके बावजूद उनसे वीडियो कॉल करके कैब का अंदर का हिस्सा दिखाने को कहा गया, लेकिन तब भी पासपोर्ट नहीं मिला।

जाधव के मुताबिक, इसके बाद उन्हें एयरपोर्ट वापस लौटने के लिए कहा गया, जहां साहिल और केतन ने खुद कैब की तलाशी ली। उन्होंने दावा किया कि गाड़ी की तलाशी लेने के बावजूद पासपोर्ट नहीं मिला। तलाशी के बाद, दोनों पक्ष एयरपोर्ट से चले गए।

जाधव ने यह भी दावा किया कि पुणे से रावेत तक के सफर के दौरान सिया और उसके भाई साहिल के बीच बहस हुई थी; रावेत में ही केतन उनके साथ सफर में शामिल हुआ था। उसने फिर से कहा कि सिया ने उससे गाड़ी की डिक्की (बूट) खुलवाकर उसमें से कुछ निकाला था, लेकिन उसे यह नहीं पता था कि वह चीज क्या थी।

बिजनेसमैन केतन अग्रवाल की मौत से कुछ हफ्ते पहले बाली की प्री-वेडिंग ट्रिप (शादी से पहले की यात्रा) को रद्द करने की वजह बना एक खोया हुआ पासपोर्ट अब जांचकर्ताओं के लिए कथित हत्या की साजिश का एक अहम सुराग बन गया है; इस घटना ने पूरे महाराष्ट्र को चौंका दिया है।

पासपोर्ट का गायब होना एक बड़ी साज़िश का हिस्सा: पुलिस

इससे पहले, पुणे ग्रामीण पुलिस ने यह भी कहा था कि केतन की मंगेतर सिया गोयल ने कथित तौर पर उसका पासपोर्ट चुराकर नष्ट कर दिया था, जिससे वह विदेश नहीं जा सका। यह कोई अलग-थलग घटना नहीं थी, बल्कि एक बड़ी साजिश का हिस्सा थी, जिसका अंत आखिरकार 26 वर्षीय युवक की लोहागढ़ किले में मौत के साथ हुआ।

बता दें कि केतन और सिया की सगाई फरवरी में हुई थी और वे शादी से पहले के फोटोशूट के लिए 6 जून को बाली जाने वाले थे। चार लोग साथ यात्रा कर रहे थे, लेकिन मुंबई एयरपोर्ट पहुंचने पर जब केतन को पता चला कि उसका पासपोर्ट गायब है, तो यात्रा अचानक रद्द कर दी गई।

पासपोर्ट गायब होने के हालात संदिग्ध: केतन के पिता

केतन के पिता, विशाल अग्रवाल ने कहा कि पासपोर्ट के गायब होने के हालात संदिग्ध लग रहे हैं।

उन्होंने कहा, “उन्हें 6 जून को प्री-वेडिंग शूट के लिए मुंबई से बाली, इंडोनेशिया जाना था। घर से निकलते समय कार में सिर्फ चार लोग थे। कार में बैठे-बैठे सभी ने अपने पासपोर्ट चेक किए और सभी पासपोर्ट, करेंसी, क्रेडिट कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और दूसरी कीमती चीजें एक ही पाउच में रखी गई थीं। वह पाउच कार में ही था।”

केतन के पिता ने आगे कहा, “एयरपोर्ट पहुंचने पर केतन को छोड़कर बाकी सभी के पास अपने पासपोर्ट थे। सिर्फ केतन का पासपोर्ट चोरी हो गया था। इस वजह से वह जा नहीं सका और उसे एयरपोर्ट से ही वापस लौटना पड़ा।”

पुलिस ने केतन मर्डर सीन को फिर से बनाया

वहीं, एक अधिकारी ने बताया कि रविवार को पुलिस सिया गोयल को लोहागढ़ किले ले गई ताकि क्राइम सीन को फिर से बनाया जा सके। इसके लिए एक डमी का इस्तेमाल किया गया ताकि उस पल को दोबारा दिखाया जा सके जब उसे धक्का देकर गिराया गया था और उसकी मौत हो गई थी।

उसे सुबह 6.30 बजे वहां ले जाया गया। पुलिस के मुताबिक, इस कवायद का मकसद उन घटनाओं के क्रम को ठीक-ठीक समझना है जिनकी वजह से 18 जून को केतन की जान चली गई थी।

क्राइम सीन को दोबारा बनाने के लिए एक पुतले (मैनक्विन) का इस्तेमाल किया गया। इस प्रक्रिया के तहत, डमी को किले की दीवारों से नीचे गिराया गया।

केतन अग्रवाल के पिता की भावुक अपील

शनिवार को, केतन अग्रवाल के पिता ने अपने बेटे के लिए न्याय की मांग करते हुए कैंडललाइट मार्च में हिस्सा लिया और एक भावुक अपील की। ​​उन्होंने उन लोगों से आगे आकर जांच में मदद करने की गुजारिश की जो 18 जून को लोहगढ़ किले में मौजूद थे – उस दिन केतन को कथित तौर पर उसकी मंगेतर सिया गोयल और उसके बॉयफ्रेंड चेतन चौधरी ने पहाड़ी से नीचे धकेल दिया था।

पुणे के बाहरी इलाके गहुंजे में बेलमोंडो सोसाइटी में जमा हुए निवासियों, परिवार के सदस्यों और दोस्तों को संबोधित करते हुए विशाल अग्रवाल ने कहा कि किले में हुई इस घटना को कई लोगों ने देखा था, लेकिन वे अभी तक पुलिस के पास नहीं आए हैं।

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Ketan Murder Case: केतन हत्याकांड में ये लाल इलेक्ट्रिक कार बनी सबसे बड़ा सुराग, वायरल वीडियो से खुल रहे नए राज

Ketan Murder Case: पूरे देश को झकझोर कर रख देने वाले पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड में रोज नए खुलासे हो रहे हैं। केतन अग्रवाल हत्याकांड में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है,उसमें नई बातें सामने आ रही हैं। वहीं हत्या के मामले में जांच अब उस लाल इलेक्ट्रिक कार पर केंद्रित हो गई है, जिसका इस्तेमाल घटना वाले दिन लोहगढ़ किले जाने के लिए किया गया था। पुलिस इस कार की गहन जांच कर रही है ताकि घटना से जुड़े अहम सुराग मिल सकें। 25 वर्षीय केतन अग्रवाल की 18 जून को लोहगढ़ किले की यात्रा के दौरान कथित तौर पर हत्या कर दी गई थी।

जांच में अब तक सामने आया है कि केतन अपनी मंगेतर सिया गोयल के साथ लोहगढ़ किले गए थे। पुलिस का आरोप है कि सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी ने मिलकर केतन को किले पर एक चट्टान से नीचे धक्का दे दिया, जिससे उसकी मौत हो गई।

जांच में शामिल लाल इलेक्ट्रिक कार वही है, जो घटना से पहले सोशल मीडिया पर वायरल हुए कई वीडियो में दिखाई दी थी। एक वीडियो में केतन अग्रवाल और सिया गोयल कार का सनरूफ खोलकर सफर करते नजर आए थे। वहीं, दूसरे वीडियो में केतन अपनी जन्मदिन की पार्टी के दौरान सिया को फूल देते हुए दिखाई दे रहे थे। पुलिस इस मामले में सिया गोयल और चेतन चौधरी को मुख्य आरोपी मान रही है। जांच के तहत शुक्रवार को सिया के भाई साहिल गोयल से भी पूछताछ की गई। पूछताछ शुरू होने से पहले सिया के माता-पिता पूजा गोयल और प्रवीण गोयल भी लोनावला ग्रामीण पुलिस थाने पहुंचे थे।

फास्ट-ट्रैक कोर्ट में चलेगा मामला

केतन अग्रवाल हत्याकांड में महाराष्ट्र सरकार ने भी बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अगुवाई वाली सरकार ने इस मामले की सुनवाई फास्ट-ट्रैक कोर्ट में कराने की मंजूरी दे दी है। साथ ही वरिष्ठ वकील और राज्यसभा सांसद उज्ज्वल निकम को इस मामले का विशेष लोक अभियोजक नियुक्त किया गया है। यह फैसला केतन अग्रवाल के परिवार की मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात के बाद लिया गया। परिवार ने मामले में जल्द न्याय और त्वरित कार्रवाई की मांग की थी। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और मामले की सुनवाई फास्ट-ट्रैक कोर्ट में तेजी से पूरी कराई जाएगी। फिलहाल पुलिस की जांच जारी है।

UCC Bill West Bengal: पश्चिम बंगाल में सोमवार को UCC बिल होगा पेश, जानें इसमें क्या है खास?

UCC Bill West Bengal: पश्चिम बंगाल अब समान नागरिक संहिता (UCC) की दिशा में कदम बढ़ाने वाला अगला भाजपा शासित राज्य बनने जा रहा है। इस सोमवार को राज्य विधानसभा में UCC बिल पेश किया जाएगा। गौरतलब है कि भाजपा ने अपने चुनावी घोषणापत्र में UCC लागू करने का वादा किया था और इसे नई सरकार की प्राथमिक प्राथमिकताओं में शामिल किया था।

बता दें कि पश्चिम बंगाल उन BJP-शासित राज्यों की बढ़ती सूची में शामिल हो गया है जिन्होंने UCC की दिशा में कदम उठाए हैं। जबकि उत्तराखंड ने इसे सबसे पहले लागू किया था, जिसके बाद असम, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात ने भी ऐसा किया।

यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) क्या है?

UCC का मकसद धर्म-आधारित पर्सनल कानूनों की जगह एक ऐसा एकसमान कानूनी ढांचा लाना है जो सभी नागरिकों के लिए – चाहे उनका धर्म कोई भी हो – शादी, तलाक, विरासत, संपत्ति के बंटवारे और गोद लेने जैसे सिविल मामलों को नियंत्रित करे।

इसके समर्थकों का तर्क है कि यह कानून के सामने समानता सुनिश्चित करता है और धर्म-आधारित पर्सनल कानूनों से होने वाले भेदभाव को खत्म करता है।

पश्चिम बंगाल के UCC में क्या-क्या शामिल होगा?

भाजपा द्वारा प्रस्तावित ढांचे के आधार पर, इस विधेयक में निम्नलिखित मुद्दों को संबोधित किए जाने की उम्मीद है:

क्षेत्रक्या बदलाव होंगे
विवाह (Marriage)सभी समुदायों के लिए विवाह की समान न्यूनतम कानूनी उम्र; सभी शादियों का अनिवार्य पंजीकरण
लैंगिक समानता (Gender Equality)बहुविवाह पर प्रतिबंध; महिलाओं को संपत्ति और उत्तराधिकार में समान अधिकार; धर्म की परवाह किए बिना समान कानूनी सुरक्षा
लिव-इन संबंध (Live-in Relationships)लिव-इन संबंधों का शुरुआत और अंत दोनों समय अनिवार्य पंजीकरण, निर्धारित प्राधिकरण के पास
तलाक (Divorce)तलाक की प्रक्रिया के लिए एक समान कानूनी ढांचा, जो धर्म-आधारित या पारंपरिक तरीकों की जगह लेगा; दोनों पक्षों को समान कानूनी अधिकार और राहत

पश्चिम बंगाल में यह बात खास तौर पर क्यों अहम है?

राजनीतिक नेताओं ने बताया है कि अल्पसंख्यक बहुल जिलों – मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तरी दिनाजपुर के कुछ हिस्सों में इसका बड़ा राजनीतिक और सामाजिक असर हो सकता है। पार्टी सूत्रों का दावा है कि अल्पसंख्यक समुदायों की महिलाओं का एक वर्ग UCC प्रस्ताव का स्वागत कर रहा है। उनका कहना है कि इससे शादी, तलाक और विरासत से जुड़े उनके कानूनी अधिकार मजबूत हो सकते हैं। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

भाजपा के लिए UCC एक लंबे समय से चला आ रहा वैचारिक और नीतिगत संकल्प है। अगर यह विधेयक पारित हो जाता है, तो इसे पश्चिम बंगाल की पहली भाजपा सरकार के सबसे महत्वपूर्ण विधायी सुधारों में से एक माना जाएगा।

इस पर राजनीतिक बहस कैसी हो सकती है?

समर्थक UCC को कानूनी एकरूपता और लैंगिक समानता की दिशा में एक कदम के तौर पर देखते हैं। आलोचकों के धर्म-आधारित पर्सनल लॉ और सांस्कृतिक रीति-रिवाजों पर इसके संभावित असर को लेकर चिंता जताने की उम्मीद है। यह बहस पश्चिम बंगाल जैसे विविध जनसंख्या और राजनीतिक संरचना वाले राज्य में काफी तीखी हो सकती है।

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Ketan Agarwal Murder Case: ‘अगर उसने हमें बताया होता…’: केतन अग्रवाल मर्डर केस में सिया के भाई ने किया सनसनीखेज दावा

Ketan Agarwal Murder Case: केतन अग्रवाल की हत्या की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इस मामले में नए खुलासे सामने आ रहे हैं। अब पीड़ित और आरोपी सिया गोयल के परिवार के बयानों ने इस केस को नया मोड़ दे दिया है। पुलिस पूछताछ के दौरान सिया के बड़े भाई साहिल गोयल ने बताया कि परिवार को कभी यह नहीं बताया गया था कि सिया अपनी शादी से खुश नहीं थी। CNN-News18 के सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान पुलिस ने साहिल से पूछा कि क्या परिवार को पता था कि सिया इस शादी से खुश नहीं थी या उसने इस रिश्ते पर कोई आपत्ति जताई थी।

इसके जवाब में, साहिल ने कथित तौर पर पुलिस को बताया कि सिया ने केतन से शादी करने को लेकर कभी कोई नाराजगी या आपत्ति नहीं जताई थी। उसने यह भी दावा किया कि अगर सिया ने अपनी चिंताएं बताई होतीं, तो परिवार उसकी शादी सह-आरोपी चेतन चौधरी से कराने के लिए मान जाता।

साहिल ने जांचकर्ताओं को बताया, “परिवार को चेतन से क्या दिक्कत होगी? वह भी उसी समुदाय से है, एक कारोबारी परिवार से आता है और हमारी तरह ही अच्छी-खासी आर्थिक स्थिति वाला है।”

केतन अग्रवाल के परिवार ने भी ऐसी ही बातें कही हैं। उनके पिता ने जांच करने वालों को बताया कि उन्हें भी इस बात की जानकारी नहीं थी कि सिया कथित तौर पर उनके बेटे से शादी नहीं करना चाहती थी।

खबरों के मुताबिक, केतन के पिता ने कहा, “हम एक अच्छे-खासे परिवार से हैं। हम अपने बेटे के लिए कई दूसरी लड़कियां ढूंढ सकते थे।” उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि कभी ऐसा कोई संकेत नहीं मिला जिससे पता चले कि सिया शादी के खिलाफ थी।

‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सिया गोयल ने कथित तौर पर जांच करने वालों को बताया था कि अपने मंगेतर केतन अग्रवाल को “मार डालना”, परिवार को यह बताने से “आसान” था कि वह उससे शादी नहीं करना चाहती।

पुलिस कस्टडी में पूछताछ के दौरान, सिया ने कथित तौर पर कहा कि उसने शादी न करने की अपनी इच्छा के बारे में परिवार को इसलिए नहीं बताया क्योंकि वह उन्हें दुख नहीं पहुंचाना चाहती थी।

डिलीट चैट और 17 जून की कैफे मीटिंग भी जांच के दायरे में

जांचकर्ताओं ने डिजिटल सबूतों को भी जांच में शामिल किया है, क्योंकि कथित तौर पर पता चला है कि दोनों आरोपियों ने अपने मोबाइल फोन से बातचीत और ऑनलाइन एक्टिविटी के रिकॉर्ड हटा दिए थे।

फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स अभी डिवाइस से मिले डिलीट किए गए WhatsApp मैसेज, Instagram पर हुई बातचीत और दूसरे डेटा की जांच कर रहे हैं। पुलिस को शक है कि लोहगढ़ की घटना से पहले और बाद में, दोनों ही समय कुछ बातचीत मिटाई गई थी।

सूत्रों के मुताबिक, आरोपियों ने अपनी बातचीत छिपाने के लिए रीसायकल बिन खाली करने और डिलीट की गई फ़ाइलों के निशान मिटाने जैसे अतिरिक्त कदम उठाए थे। इस वजह से जांचकर्ताओं को बातचीत की कड़ियों को जोड़ने के लिए फ़ोरेंसिक तकनीकों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

इस बीच, पुलिस सिया गोयल और चेतन चौधरी के बीच हुई उस मुलाकात की भी जांच कर रही है जो केतन अग्रवाल की मौत से एक दिन पहले हुई थी। जांच करने वालों ने बताया कि दोनों 17 जून को पुणे के लुल्ला नगर इलाके के एक कैफे में मिले थे और वहां शाम 4.30 बजे से 5.30 बजे के बीच लगभग एक घंटा बिताया था। अधिकारी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या उस मुलाकात के दौरान कथित अपराध के बारे में कोई बातचीत हुई थी।

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