PM Modi ने दिया ‘GRWM’ चैलेंज! National Handloom Day पर युवाओं से की खास अपील

PM Modi Instagram Reel: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक नया रील वीडियो शेयर किया, जिसमें उन्होंने देश के युवाओं से राष्ट्रीय हथकरघा दिवस को खास तरीके से मनाने की अपील की। उन्होंने युवाओं से कहा कि वे ‘Get Ready With Me (GRWM)’ जैसे वीडियो बनाएं, जिसमें वे हथकरघा से बने पारंपरिक कपड़े पहनकर अपनी तस्वीरें और वीडियो साझा करें। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया का यह ट्रेंड भारत की समृद्ध बुनाई परंपरा और कारीगरों की कला को लोगों तक पहुंचाने का एक शानदार तरीका बन सकता है। इससे देश के बुनकरों और उनके परिवारों को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस से पहले शेयर किए गए इस वीडियो में प्रधानमंत्री मोदी ने इस दिन के ऐतिहासिक महत्व को भी याद किया। उन्होंने बताया कि 7 अगस्त 1905 को स्वदेशी आंदोलन की शुरुआत हुई थी, जब देशभर के लोग ब्रिटिश शासन के खिलाफ एकजुट हुए और स्वदेशी वस्तुओं को अपनाने का संकल्प लिया था।

7 अगस्त को मनाए जाने वाले राष्ट्रीय हथकरघा दिवस से पहले शेयर किए गए इस वीडियो में प्रधानमंत्री मोदी ने इस दिन के ऐतिहासिक महत्व को भी याद किया। उन्होंने बताया कि 7 अगस्त 1905 को स्वदेशी आंदोलन की शुरुआत हुई थी। उस दिन देशभर के लोगों ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ एकजुट होकर स्वदेशी वस्तुओं को अपनाने का संकल्प लिया था।

उन्होंने कहा, “पिछले हफ्ते ही आप में से कई लोगों ने फ्रेंडशिप डे मनाया। आज, मैं आपसे अपील करता हूं कि 7 अगस्त को नेशनल हैंडलूम डे भी उसी उत्साह और जोश के साथ मनाएं।”

भारत के बुनकर समुदाय के योगदान पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि नेशनल हैंडलूम डे उन परिवारों को पहचानने और उनका समर्थन करने का एक मौका है जो पारंपरिक कारीगरी से हाथ से बुने हुए कपड़े बनाते हैं।

उन्होंने कहा, “नेशनल हैंडलूम डे हमारे उन बुनकर परिवारों को पहचानने और उनका समर्थन करने के बारे में है, जो अपने हाथों से सुंदर कपड़े बनाते हैं। जरा हमारे देश में बनने वाले हैंडलूम उत्पादों की अद्भुत विविधता को तो देखिए।”

PM ने हैंडलूम को बढ़ावा देने के लिए ‘GRWM’ ट्रेंड का सुझाव दिया

सोशल मीडिया के मशहूर ट्रेंड का जिक्र करते हुए, पीएम मोदी ने लोगों से हैंडलूम के कपड़े पहनने और उन्हें ऑनलाइन शेयर करने के लिए प्रोत्साहित किया।

उन्होंने कहा, “मेरी एक छोटी सी गुजारिश है। क्यों न हैंडलूम के कपड़ों के साथ एक ‘Get Ready With Me’ (GRWM) वीडियो बनाया जाए और उसे दुनिया के साथ शेयर किया जाए? इससे दूसरों को भी हैंडलूम अपनाने और हमारे कारीगरों का समर्थन करने की प्रेरणा मिलेगी।”

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि ये पहल देश भर के बुनकर परिवारों की आजीविका को मजबूत करके ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन में योगदान दे सकती है।

उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य सबसे छोटे और सबसे गरीब बुनकर परिवारों को भी आर्थिक रूप से सशक्त बनाकर ‘आत्मनिर्भर भारत’ का निर्माण करना है। आइए, हम सभी कम से कम एक हथकरघा (हैंडलूम) उत्पाद खरीदें, उसका एक वीडियो बनाएं और उसे ज्यादा से ज्यादा शेयर करें, ताकि हमारे बुनकर भाई-बहनों की प्रतिभा और कारीगरी पूरे भारत और दुनिया के लोगों तक पहुंच सके।”

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Tarun Tejpal: यौन उत्पीड़न मामले में पत्रकार तरुण तेजपाल को 10 साल की जेल की सजा, Tehelkaके पूर्व संपादक का आया पहला बयान

Tarun Tejpal: बॉम्बे हाई कोर्ट ने ‘तहलका’ मैगजीन के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल को 2013 में अपनी एक सहकर्मी से दुष्कर्म का दोषी ठहराते हुए उसे 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने गोवा की एक सत्र अदालत द्वारा पांच साल पहले उसे बरी करने के फैसले को भी रद्द कर दिया। हाई कोर्ट की गोवा पीठ की जस्टिस नीला गोखले और जस्टिस अमित जामसांडेकर ने पहले तरुण तेजपाल को दो सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था। लेकिन उनके वकीलों के अनुरोध पर अदालत ने यह अवधि बढ़ाकर चार सप्ताह कर दी।

अदालत ने न्यूनतम सजा सुनाते हुए कहा कि यह घटना 13 वर्ष पहले हुई थी। तब से तेजपाल ने कोई अन्य अपराध नहीं किया है। अदालत ने यह भी कहा, “संभव है कि पीड़िता और तेजपाल, दोनों अब अपने-अपने जीवन में आगे बढ़ चुके हों।” हाई कोर्ट ने तेजपाल पर 10,21,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया। अदालत ने निर्देश दिया कि यह पूरी राशि पीड़िता को दी जाएगी। पीठ ने कहा, “यौन उत्पीड़न की पीड़िता को जुर्माने की पूरी राशि सौंपी जाएगी।”

तेजपाल ने खुद को बताया ‘राजनीतिक प्रताड़ना का शिकार’

सुनवाई के दौरान तरूण तेजपाल ने खुद को राजनीतिक प्रताड़ना का शिकार बताया। दो बेटियों का पिता होने का हवाला देते हुए पूर्व संपादक ने अदालत से नरमी बरतने की अपील की। वहीं, गोवा सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अधिकतम सजा की मांग करते हुए कहा कि इससे यह स्पष्ट संदेश जाएगा कि नहीं का मतलब नहीं (शारीरिक संबंध के लिए सहमति नहीं देना) होता है। पीठ ने कहा, “हम निचली अदालत के बरी करने के आदेश को निरस्त करते हैं। प्रतिवादी (तरुण तेजपाल) को दोषी करार देते हैं।” हाई कोर्ट के फैसले के बाद अदालत परिसर के बाहर पयत्रकारों से बातचीत में तेजपाल ने कहा कि वह इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे।

बेटियों का दिया हवाला

अदालत ने तेजपाल को भारतीय दंड संहिता (भादसं) की धारा 376(2)(f) (संरक्षक या विश्वास अथवा प्राधिकार की स्थिति में रहने वाले व्यक्ति द्वारा महिला से दुष्कर्म), धारा 354(a) (यौन उत्पीड़न) और धारा 354(b) (महिला को निर्वस्त्र करने के इरादे से उसके खिलाफ आपराधिक बल प्रयोग) के तहत दोषी करार दिया है। अदालत में मौजूद तेजपाल ने खुद को राजनीतिक प्रताड़ना का शिकार बताते हुए नरमी बरतने का अनुरोध किया। तेजपाल ने यह भी कहा कि वह दो बेटियों का पिता है।

उसने अदालत में कहा, “मैं 62 वर्ष का हूं। मेरी दो बेटियां हैं और मेरी पत्नी भी है। मैं राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई का शिकार हूं। मेरे वकीलों ने भी मुझसे कहा है कि मैं अदालत से नरमी बरतने की गुजारिश करूं।” तरुण तेजपाल के वकील आबाद पोंडा ने न्यूनतम सजा देने का अनुरोध करते हुए अदालत से यह भी आग्रह किया था कि सजा और दोषसिद्धि पर कम से कम 10 सप्ताह के लिए रोक लगाई जाए, ताकि सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करने का समय मिल सके।

सुप्रीम कोर्ट जाएंगे तेजपाल

बाद में पत्रकारों से बातचीत में तेजपाल ने कहा कि हम इस आदेश के खिलाफ अपील करेंगे। हमारा मानना है कि यह फैसला गलत है। हम इसके खिलाफ उच्चतम न्यायालय का रुख करेंगे। न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, तेजपाल ने कहा, “हम निश्चित रूप से सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। वे राजनीतिक बदले की भावना और ‘तहलका’ के काम की वजह से मेरे पीछे पड़े हैं। हमने ट्रायल कोर्ट में 7.5 साल तक केस लड़ा और बरी हो गए। जो लोग उनके साथ हैं, वे बरी हो जाते हैं, लेकिन वे उनके पीछे पड़ते हैं जिन्होंने उनके खिलाफ लिखा है।”

Tehelka के पूर्व एडिटर इन चीफ तेजपाल ने आगे कहा, “उमर खालिद और शरजील इमाम कई सालों से जेल में हैं। ‘तहलका’ की रिपोर्टिंग से शायद उन्हें कुछ राजनीतिक नुकसान हुआ हो या उनके निजी हितों को चोट पहुंची हो। वे पिछले 13 सालों से बदले की भावना से मेरे पीछे पड़े हैं। मुझे न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है कि ऐसे जज होंगे जो सच देखेंगे। हम सबूत सबके सामने रखेंगे।”

क्या है पूरा मामला?

यह मामला नवंबर 2013 में गोवा में आयोजित ‘थिंकफेस्ट’ कार्यक्रम के दौरान एक होटल की लिफ्ट में तेजपाल की एक पूर्व जूनियर महिला सहकर्मी के कथित यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म से संबंधित है। निचली अदालत ने 2021 में तेजपाल को इस मामले में बरी कर दिया था, जिसके खिलाफ गोवा सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट में अपील दायर की थी। तेजपाल के वकील पोंडा ने कहा, “वह मुकदमे की शुरुआत से ही जमानत पर हैं और उन्होंने कभी जमानत की किसी शर्त का उल्लंघन नहीं किया है। वह वरिष्ठ नागरिक हैं।”

हालांकि, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि पीड़िता के प्रति तेजपाल के बेहद निर्लज्ज रवैये और कथित घटना के बाद उसके सामान्य आचरण को आधार बनाकर आरोपों को कमजोर साबित करने की कोशिश को देखते हुए उन्हें आजीवन कारावास की अधिकतम सजा दी जानी चाहिए। मेहता ने कहा, “दोषी (तेजपाल) पीड़िता पर अधिकार जताने और प्रभाव रखने की स्थिति में था। पीड़िता केवल उसकी सहकर्मी ही नहीं, बल्कि उसकी बेटी की मित्र भी थी। दोषी ने अपने कृत्य पर कोई पछतावा प्रदर्शित नहीं किया है।”

उन्होंने कहा कि तेजपाल ने अगले दिन भी अपराध दोहराया और मुकदमे के दौरान तथा अब हाई कोर्ट में भी यह कहकर पीड़िता के आचरण पर सवाल उठाया कि घटना के बाद वह सामान्य व्यवहार कर रही थी। राज्य सरकार की अपील पर सुनवाई के दौरान मेहता ने दलील दी थी कि ट्रायल कोर्ट ने यह मानकर गंभीर गलती की कि यौन उत्पीड़न की पीड़िता का व्यवहार एक तय धारणा के अनुसार होना चाहिए और उसी आधार पर शिकायतकर्ता के आचरण का आकलन किया।

Arjun Bijlani: ‘हर दोस्ती को रोमांटिक एंगल देने की जरूरत नहीं होती’, मौनी रॉय को डेट करने की खबरों पर फूटा अर्जुन बिजलानी का गुस्सा

Arjun Bijlani: हाल ही में अर्जुन बिजलानी और मौनी रॉय का डिनर के बाद एक साथ बाहर निकलते हुए एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया। एक पैपराजी पेज ने एक ऐसे कैप्शन के साथ डेटिंग की अफवाहों को हवा दी जिससे लोगों को शक हुआ। जैसे ही ऑनलाइन ये अटकलें तेजी से फैलीं, अर्जुन ने अपनी चुप्पी तोड़ी और इन दावों को साफ तौर पर खारिज कर दिया। इन अफवाहों को बेबुनियाद बताते हुए, एक्टर ने सच्ची दोस्ती को व्यूज पाने के लिए ‘क्लिकबेट’ में बदलने के बढ़ते चलन की भी आलोचना की।

अफवाहें फैलने के बाद अर्जुन चुप नहीं रहे। गॉसिप पेजों पर झूठी बातें फैलाने का आरोप लगाते हुए एक्टर ने कहा कि सिर्फ एंगेजमेंट बढ़ाने के लिए सालों पुरानी दोस्ती को रोमांटिक कहानी में बदलते देखना निराशाजनक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मुश्किल समय में किसी दोस्त का साथ देने का मतलब यह नहीं होना चाहिए कि लोग अटकलें लगाने लगें।

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उन्होंने लिखा, “प्रिय क्लिकबेट पेजों, दो लोग जिनकी दोस्ती 15 साल से ज्यादा पुरानी है, वे अचानक कपल नहीं बन जाते, सिर्फ इसलिए कि किसी गॉसिप पेज को हेडलाइन चाहिए। कभी-कभी लोग बस एक-दूसरे का साथ देते हैं, खासकर तब जब कोई दोस्त मुश्किल दौर से गुजर रहा हो। हर दोस्ती में व्यूज के लिए रोमांटिक एंगल की ज़रूरत नहीं होती। कुछ भी पब्लिश करने से पहले थोड़ी सच्चाई की जांच कर लेनी चाहिए। आइए, हम जो बातें फैलाते हैं, उन्हें लेकर ज़िम्मेदार बनें।”

अर्जुन ने मीडिया पेजों से यह भी अपील की कि वे किसी की निजी जिंदगी की कीमत पर सनसनीखेज हेडलाइंस के पीछे भागने के बजाय जिम्मेदारी से रिपोर्टिंग करें। उन्होंने आगे कहा, “हम मीडिया पेजों से गुजारिश करते हैं कि वे ऐसी गुमराह करने वाली खबरें फैलाने से पहले तथ्यों की जांच कर लें, जो बिना वजह लोगों की निजी जिंदगी में दखल देती हैं और कन्फ्यूजन पैदा करती हैं। जिम्मेदार पत्रकारिता से विश्वसनीयता बनती है, क्लिकबेट से नहीं।”

क्रिस्टल डिसूज़ा ने भी इन अफवाहों को तुरंत खारिज कर दिया। जब उन्होंने पैपराजी की एक पोस्ट देखी, जिसमें अर्जुन और मौनी के बीच रोमांटिक रिश्ते का जिक्र था, तो एक्ट्रेस ने बिना झिझक के इस बेमतलब की अटकलबाजी पर अपनी बात रखी। उन्होंने कमेंट किया, “यह क्या बकवास है? सिर्फ़ व्यूज़ के लिए आप लोग कुछ भी पोस्ट कर देते हैं।”

अर्जुन और मौनी की दोस्ती 15 साल से भी ज़्यादा पुरानी है। 2015 में एकता कपूर के सुपरहिट शो ‘नागिन’ में ऋतिक और शिवन्या के तौर पर दोनों ने लोगों का दिल जीता और टेलीविजन की सबसे पसंदीदा ऑन-स्क्रीन जोड़ियों में से एक बन गए। हालांकि, असल जिंदगी में उन्होंने हमेशा अपने रिश्ते को सिर्फ एक मजबूत दोस्ती ही बताया है। वे सालों से एक-दूसरे का हौसला बढ़ाते रहे हैं, चाहे सोशल मीडिया हो या इंडस्ट्री के इवेंट्स।

2024 में, मौनी ने सेट से एक पुरानी तस्वीर शेयर करके ‘नागिन’ के दिनों की यादें ताज़ा कीं। उन्होंने एक बार यह भी माना था कि शूटिंग के दौरान वे अक्सर नोक-झोंक करते थे। उन्होंने बताया कि इसकी वजह लंबे समय तक काम करना और मुश्किल शेड्यूल था, न कि कोई आपसी मतभेद।

मौनी के अपने पति सूरज नांबियार से अलग होने की पुष्टि करने के कुछ ही समय बाद ये अफ़वाहें सामने आईं। 14 मई को एक्ट्रेस ने घोषणा की कि दोनों ने अलग होने का फैसला किया है, जिससे उनकी शादी को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लग गया। हालाँकि मौनी ने अलग होने की वजह नहीं बताई, लेकिन यह खबर जल्द ही सोशल मीडिया पर चर्चा का मुख्य विषय बन गई।

Raghav Juyal: राघव जुयाल की इस बड़ी गलती की वजह से आर्यन खान से लेकर बॉबी देओल भीड़ में फंसे, जानें पूरा मामला

Raghav Juyal: राघव जुयाल ने मुंबई में एक शानदार लेकिन प्राइवेट बर्थडे पार्टी रखी थी, जिसमें कई मेहमानों के साथ शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान भी शामिल हुए। हालांकि, जल्द ही सोशल मीडिया पर एक्टर की पार्टी में मची अफरातफरी के वीडियो सामने आए। सेल्फी के लिए आर्यन को लोगों की भीड़ से घिरने से लेकर भीड़ में फंसी शहनाज को राघव द्वारा बाहर निकालने तक, कई लोगों के लिए एक्टर की यह पार्टी बिल्कुल भी मजेदार नहीं रही। अब इस अफरातफरी के पीछे की वजहें सामने आ रही हैं।

फ्री प्रेस जर्नल के मुताबिक, राघव जुयाल ने एक शानदार लेकिन प्राइवेट बर्थडे पार्टी प्लान की थी और अपने करीबी दोस्तों को बुलाया था, जिनमें शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान और उनके को-स्टार बॉबी देओल शामिल थे। उन्होंने सेलिब्रेशन के लिए बांद्रा में एक फाइन-डाइनिंग रेस्टोरेंट बुक किया था।

सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन राघव जुयाल के एक फैसले ने कथित तौर पर सब कुछ बदल दिया और एक हाई-प्रोफाइल पार्टी को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया। वहां सेलेब्रिटीज़ को भीड़ ने घेर लिया और माहौल दमघोंटू हो गया। रिपोर्ट के मुताबिक, एक नेता के करीबी लोगों की तरफ से राघव से गुजारिश की गई कि राघव का जन्मदिन और उस नेता का जन्मदिन एक ही दिन है, इसलिए उन्हें एक साथ पार्टी करनी चाहिए। राघव इसके लिए मान गए, और कहा जाता है कि यही फैसला उनकी सबसे बड़ी गलती साबित हुआ।

खबरों के मुताबिक, अलग-अलग ग्रुप्स के मेहमानों को दो अलग-अलग तरह के इनविटेशन भेजे गए थे, जिसकी वजह से कई अजीब हालात पैदा हुए। जहां जुयाल के कुछ मेहमान – जिनमें से कई लाइमलाइट से दूर रहना पसंद करते हैं – चुपचाप पार्टी में आने की कोशिश कर रहे थे, वहीं दूसरे कई मेहमान सेलेब्रिटीज के साथ सेल्फी लेने के लिए बेताब थे।

सेलिब्रेशन शुरू होने के कुछ ही मिनटों के अंदर, आर्यन खान और बॉबी देओल एक अजीब स्थिति में फंस गए। उनके आस-पास फोटो खिंचवाने के इच्छुक फैंस और मेहमानों की भीड़ जमा हो गई। इसके बाद से हालात बिगड़ते चले गए।

जो पार्टी एक छोटी-सी और निजी महफिल होनी चाहिए थी, वह जल्द ही अफरातफरी में बदल गई। सोशल साइट्स पर एक्टिव लोग, राजनीतिक जान-पहचान वाले और यहां तक कि बिना बुलाए आए लोग भी जुयाल के सेलेब्रिटी मेहमानों की एक झलक पाने की उम्मीद में वेन्यू पर जमा हो गए। सीढ़ियों और रास्तों पर भीड़ हो गई। लोग प्रतिबंधित इलाकों में घुसने और सेल्फी के लिए लाइन लगाने की कोशिश करने लगे।

‘फ्री प्रेस जर्नल’ के अनुसार, राघव जुयाल की पार्टी में आए एक सेलेब्रिटी मेहमान ने इस पूरी घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “हमने ऐसी पार्टी की उम्मीद नहीं की थी। यार, राघव एक अच्छा इंसान है और उसके साथ समय बिताना आमतौर पर अच्छा लगता है। लेकिन, यह पार्टी बिल्कुल भी मजेदार नहीं थी।”

Priyadarshan: फिरोज नाडियाडवाला ने अपमान न किया होता तो ‘धुरंधर’ से भी…, ‘हेरा फेरी 3’ को लेकर बोले प्रियदर्शन

Priyadarshan: फिल्ममेकर प्रियदर्शन ने हाल ही में कन्फर्म किया है कि वह ‘हेरा फेरी 3’ को डायरेक्ट नहीं करेंगे, जिसका फैंस बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। डायरेक्टर ने अब प्रोड्यूसर फिरोज नाडियाडवाला पर गंभीर आरोप लगाए हैं और कहा है कि उन्होंने बार-बार उनका अपमान किया है। प्रियदर्शन ने यह भी दावा किया कि अगर वह इस फिल्म को डायरेक्ट करते, तो ‘हेरा फेरी 3’ को भारत की सबसे बड़ी फिल्म फ्रैंचाइज़ी में से एक बना सकते थे।

मिड-डे के साथ बातचीत में प्रियदर्शन ने बताया कि कई बार उनका अपमान किया गया। उन्होंने कहा, “फिरोज ने अक्षय से कहा, ‘तुम्हारे पास हेरा फेरी 3 बनाने के अधिकार हैं, लेकिन इसे कभी भी प्रियदर्शन के साथ मत बनाना। बस यही मेरी गुजारिश है।’ उन्होंने कई बार मेरा अपमान किया है। उन्होंने मुझसे कहा कि हेरा फेरी (2000) का मेरा कट किसी गरीब आदमी के वर्जन जैसा लगता था और उन्हें मेरी पांच घंटे की फिल्म को एडिट करना पड़ा था।

शुरू में मैं अक्षय के साथ तीसरा पार्ट बनाने के लिए राजी हो गया था क्योंकि मुझे लगा कि मैं देश की सबसे बड़ी फ़्रैंचाइजी में से एक बना सकता हूं। अगर मैंने इसे डायरेक्ट किया होता, तो मैं इसे ‘धुरंधर’ से भी बड़ा बना सकता था। अक्षय, सुनील और परेश ने मुझसे हेरा फेरी 3 बनाने का अनुरोध किया। जब मैंने उन्हें कहानी सुनाई, तो वे सभी उत्साहित थे।”

फिल्ममेकर ने आगे कहा, “जब ‘हेरा फेरी 3’ की घोषणा हुई, तो मुझे ‘सेवन आर्ट्स फिल्म्स’ के जीपी विजयकुमार का फोन आया। उन्होंने कहा कि अगर हम यह फिल्म बनाते हैं, तो यह नियमों का उल्लंघन होगा। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूं। इसीलिए मैंने कहा कि शायद ‘हेरा फेरी 3’ कभी उन्हीं किरदारों के साथ बड़े पर्दे पर न आ पाए। हो सकता है कि आप उन्हें फिर कभी एक साथ न देख पाएं क्योंकि इसमें बहुत सारे कानूनी मसले हैं। मेरे हिसाब से, ‘हेरा फेरी’ (2000) का जन्म हुआ, ‘फिर हेरा फेरी’ (2006) बीमार पड़ गई, और ‘हेरा फेरी 3’ खत्म हो जाएगी।”

‘हेरा फेरी’ फ्रैंचाइज़ी बॉलीवुड की सबसे मशहूर कॉमेडी सीरीज़ में से एक है। यह अपने ह्यूमर, यादगार डायलॉग्स और अक्षय कुमार (राजू), सुनील शेट्टी (श्याम) और परेश रावल (बाबूराव गणपतराव आप्टे) की यादगार तिकड़ी के लिए जानी जाती है। इस फ्रैंचाइज़ी की शुरुआत 2000 में प्रियदर्शन के निर्देशन में बनी ‘हेरा फेरी’ से हुई थी, और इसके बाद नीरज वोरा के निर्देशन में ‘फिर हेरा फेरी’ (2006) आई। दोनों फिल्में अमीर बनने की कोशिश में जुटी इस तिकड़ी के मज़ेदार कारनामों पर आधारित हैं, जो उन्हें लगातार मुश्किल और उलझी हुई स्थितियों में डाल देते हैं।

‘हेरा फेरी’ को एक ‘कल्ट क्लासिक’ माना जाता है और इसे हिंदी सिनेमा की बेहतरीन कॉमेडी फ़िल्मों में से एक माना जाता है। वहीं, इसके सीक्वल ने अपने स्लैपस्टिक ह्यूमर और यादगार डायलॉग्स से इस फ़्रैंचाइज़ी की लोकप्रियता को और मज़बूत किया। समय के साथ, टेलीविज़न पर बार-बार दिखाए जाने, मीम्स और इंटरनेट कल्चर की वजह से इन फ़िल्मों के बहुत सारे फ़ैन बन गए हैं, जिससे बाबूराव, राजू और श्याम पॉप-कल्चर के सदाबहार आइकॉन बन गए हैं।

उम्मीद थी कि ‘हेरा फेरी 3’ में अक्षय कुमार, सुनील शेट्टी और परेश रावल की ओरिजिनल तिकड़ी फिर से साथ आएगी और प्रियदर्शन डायरेक्टर के तौर पर वापसी करेंगे। हालाँकि, मई 2025 में परेश रावल के कुछ समय के लिए प्रोजेक्ट छोड़ने और फिर वापस आने के बाद फ़िल्म मुश्किलों में घिर गई। फ़िल्म को कानूनी अड़चनों का भी सामना करना पड़ रहा है, जिससे इसका भविष्य अनिश्चित हो गया है और फ़ैन्स अभी भी किसी आधिकारिक अपडेट का इंतज़ार कर रहे हैं।

सरकार जल्द नई गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम का कर सकती है ऐलान, जानिए क्या है पूरा प्लान

सरकार नई गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम का ऐलान कर सकती है। मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने यह बताया। इस बारे में आधिकारिक घोषणा दो हफ्ते के अंदर हो सकती है। सूत्रों ने बताया कि इस स्कीम के तहत 1,000 टन से ज्यादा सोना आने की उम्मीद है।

नई स्कीम में ज्वेलर्स होंगे कलेक्शन पार्टनर्स

देशभर के ज्वेलर्स को नई स्कीम में बतौर ‘कलेक्शन पार्टनर्स’ शामिल किया जा सकता है। उन्हें परिवारों से गोल्ड डिपॉजिट लेने की इजाजत होगी। पहले सिर्फ बैंकों को इसकी इजाजत थी। ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन (AIJGF) ने कहा, “प्रस्तावित फ्रेमवर्क के तहत नई गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम में बतौर कलेक्शन पार्टनर्स शामिल किया जा सकता है।”

गोल्ड के इंपोर्ट में कमी लाने में मिल सकती है मदद

देश में ज्वेलर्स से जुड़ी संस्थाओं ने सरकार से गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम में बदलाव करने की गुजारिश की है। गोल्ड का इंपोर्ट घटाने के लिए उनका जोर ऐसे सॉल्यूशंस पर है, जिसका खराब असर इस सेक्टर से जुड़े लोगों की रोजीरोटी पर नहीं पड़े। अगर देश में परिवारों में रखा 5 फीसदी सोना भी मॉनेटाइज होता है तो इससे 90 अरब डॉलर की लिक्विडिटी मुमकिन हो सकती है।

पीएम मोदी ने की थी सोना नहीं खरीदने की अपील

हाल में प्रधानमंत्री ने देश के लोगों से एक साल तक सोना नहीं खरीदने की अपील की थी। इंडिया दुनिया में सोने की सबसे ज्यादा खपत वाले देशों में शामिल है। भारत में ज्वेलरी के साथ ही सुरक्षित निवेश के लिए लोग सोना खरीदते हैं। ज्वेलरी के खरीदने से सोने का ज्यादा इस्तेमाल नहीं हो पाता है। इसलिए गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम के जरिए काफी सोना आ सकता है।

2015 में हुई थी गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम की शुरुआत

सरकार ने 2015 में गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम (GMS) की शुरुआत की थी। इसका मकसद सोने के इंपोर्ट में कमी लाकर करेंट अकाउंट डेफिसिट को घटाना था। इनवेस्टर्स को फिजिकल गोल्ड खरीदने की जगह गोल्ड स्कीम का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया गया था। इनवेस्टर्स अपना सोना बैंक लॉकर्स में डिपॉजिट कर 2.25 से 2.5 फीसदी इंटरेस्ट कमा सकते हैं। विड्रॉल के समय इनवेस्टर्स के पास फिजिकल गोल्ड या उसके बराबर पैसा वापस लेने की इजाजत थी।

पुरानी स्कीम में 10 सालों में सिर्फ 38 टन सोना आया

स्कीम की शुरुआत के 10 साल बाद तक सिर्फ 38 टन सोना ही आ सका। यह इंडिया में परिवारों के पास रखे कुल सोना का बहुत कम हिस्सा है। इंडिया में परिवारों के पास 25,000 टन सोना होने का अनुमान है। सरकार ने स्कीम में मीडियम टर्म और लॉन्ग टर्म डिपॉजिट रोक दी थी। इस स्कीम में इनवेस्टर्स को इंटरेस्ट का पेमेंट सरकार करती है। इस वजह से यह स्कीम सरकार के लिए नुकसानदेह रही।

पुरानी स्कीम में सरकार को उठाना पड़ा लॉस

ट्रेडबुल्स सिक्योरिटीज के भाविक पटेल ने कहा, “आखिर में सरकार को इस स्कीम में लॉस उठाना पड़ा। सरकार को सोने की कीमतों में आए तेजी का बोझ उठाना पड़ता था। साथ ही उसे इनवेस्टर्स को सालाना 2 फीसदी इंटरेस्ट चुकाना पड़ता था।” यह स्कीम हेज्ड (Hedged) नहीं थी, जिससे विड्रॉल के समय सरकार को सोने की कीमतों में हुई वृद्धि का बोझ उठाना पड़ता था।

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इन वजहों से असफल रही पुरानी स्कीम

इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का मानना है कि स्ट्रक्चरल वजहों से गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम विफल रही। AIJGF ने कहा कि इस स्कीम में दिलचस्पी दिखाने के लिए बैंकों को किसी तरह के इनसेंटिव की व्यवस्था नहीं थी। नई गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम से गोल्ड के इंपोर्ट पर निर्भरता में कमी आ सकीत है। साथ ही घरों में बेकार पड़े सोने का इस्तेमाल इकोनॉमी के हित में हो सकेगा।

Diljit Dosanjh: CJP प्रोटेस्ट पर दिलजीत दोसांझ का कमेंट सौरव दास को नहीं आया रास, बोले- ‘उन्हें युवाओं को प्रोत्साहित करना चाहिए न कि…’

Diljit Dosanjh: दिलजीत दोसांझ के ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के विरोध-प्रदर्शनों से खुद को अलग करने के एक दिन बाद, पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने निराशा जताई है। जब दास से हाल ही में पंजाबी सिंगर-एक्टर के कमेंट के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि वे इससे “नाराज़” हैं। उन्होंने दोसांझ से यह भी अपील की कि वे आगे आएं और भारत के युवाओं के मुद्दों पर बात करें।

दास ने कहा, “यह बहुत दुखद है। मुझे लगता है कि उन्हें कुछ कहना चाहिए। उन्हें युवाओं का हौसला बढ़ाना चाहिए। वे अपने संगीत के जरिए ऐसा करते हैं। इस आंदोलन के बारे में अपनी बात रखकर या युवाओं की समस्याओं पर बात करके भी वे ऐसा कर सकते हैं। उन्हें कुछ तो कहना चाहिए।”

हाल ही में एक इंस्टाग्राम लाइव सेशन के दौरान, दिलजीत दोसांझ से ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) की अगुवाई में जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन के बारे में पूछा गया। दिलजीत ने साफ कर दिया कि वह इस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते। उन्होंने कहा कि अपने बिजी ‘ऑरा टूर’ (Aura Tour) शेड्यूल की वजह से उन्हें इस स्थिति के बारे में जानकारी नहीं थी। उन्होंने लोगों से यह भी गुजारिश की कि उन्हें विरोध प्रदर्शनों से दूर रखा जाए, क्योंकि वह कोई राजनेता नहीं हैं और एक एंटरटेनर के तौर पर अपने काम पर ही ध्यान देना चाहते हैं।

उन्होंने कहा, “भाई, मुझे विरोध प्रदर्शनों और ऐसी चीज़ों से दूर रखो। मैं एक आर्टिस्ट हूं। मैं कोई राजनेता नहीं हूं।” दुनिया भर में मशहूर इस सिंगर ने आगे कहा कि दुनिया में हर चीज का एकदम सही या पूरी तरह से ठीक होना नामुमकिन है। उन्होंने कहा, “हर चीज़ कभी भी सही नहीं हो सकती। इस दुनिया में हर चीज़ कभी भी सही नहीं हो सकती।”

दिलजीत दोसांझ हाल ही में इम्तियाज अली के निर्देशन में बनी फ़िल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ में नजर आए थे। यह फिल्म भारत-पाकिस्तान बंटवारे की पृष्ठभूमि पर आधारित एक पीरियड ड्रामा है। नसीरुद्दीन शाह, शरवरी और वेदांग रैना जैसे कलाकारों वाली यह फिल्म 2026 की अहम सफलताओं में से एक बनकर उभरी है। इसे दर्शकों से काफी तारीफ मिली है और लोगों की अच्छी प्रतिक्रिया की वजह से बॉक्स ऑफिस पर भी लगातार अच्छी कमाई हुई है।

भाई से झगड़ा, फिर चाय का ब्रेक… बाली ट्रिप से पहले कैब ड्राइवर ने सिया को लेकर किया बड़ा खुलासा

Ketan Agrawal Murder Case: केतन अग्रवाल मर्डर केस में एक के बाद एक नए खुलासे होते जा रहे हैं। इस बार केतन और हत्या की आरोपी सिया को छोड़ने वाले कैब ड्राइवर ने बड़ा दावा किया है। ड्राइवर के मुताबिक, रास्ते में मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर सिया ने गाड़ी रुकवाई थी। इसके बाद उसने कार की डिक्की खोली और अपने पर्स से कुछ निकाला। इसके कुछ समय बाद दोनों एयरपोर्ट पहुंच गए, जहां बाद में पता चला कि केतन का पासपोर्ट गायब है।

वहीं, इस दावे को जांच में काफी अहम माना जा रहा है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बाली में होने वाले प्री-वेडिंग फोटोशूट से पहले केतन का पासपोर्ट कैसे गायब हुआ। शुरुआती जांच से यह संकेत मिल रहे हैं कि पासपोर्ट को जानबूझकर गायब किया गया था।

कैब ड्राइवर वैभव जाधव ने मीडिया के साथ खास बातचीत में इस यात्रा की जानकारी दी। जाधव ने बताया कि उन्होंने सुबह करीब 10 बजे पुणे से यात्रियों को पिक किया था। उनके मुताबिक, सिया ने पहले कैब में बैठने से मना कर दिया था, लेकिन उनके भाई साहिल ने उन्हें जबरदस्ती गाड़ी में बिठाया। इसके बाद कैब रावेत पहुंची, जहां केतन अग्रवाल उसमें सवार हुए।

कैब ड्राइवर ने दावा किया कि मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर सफर के दौरान सिया ने चाय पीने के लिए एक फूड मॉल पर गाड़ी रुकवाई। करीब 10 मिनट बाद वह वापस आई और उसने ड्राइवर से कार की डिक्की खोलने को कहा।

ड्राइवर के मुताबिक, डिक्की के पास जाकर सिया ने अपने पर्स से कुछ सामान निकाला। इसके बाद करीब 15 से 20 मिनट बाद दोनों यात्रियों ने उसे वापस गाड़ी के पास बुलाया और फिर मुंबई एयरपोर्ट के लिए सफर शुरू कर दिया।

जाधव ने बताया कि उन्होंने सभी यात्रियों को मुंबई एयरपोर्ट पर उतार दिया था। करीब दो मिनट बाद, उन्हें एक कॉल आया जिसमें बताया गया कि कैब में एक छोटा बैग छूट गया है। उन्होंने कहा कि वह उस समय लगभग 200 मीटर दूर थे और वापस आकर बैग लौटा दिया।

ड्राइवर ने आगे बताया कि 500 ​​मीटर और आगे जाने के बाद, उन्हें एक और कॉल आया जिसमें कहा गया कि केतन का पासपोर्ट कैब में ही गिर गया है। जाधव ने बताया कि उन्होंने पहले ही पूरी गाड़ी देख ली थी और पासपोर्ट नहीं मिला था। इसके बावजूद उनसे वीडियो कॉल करके कैब का अंदर का हिस्सा दिखाने को कहा गया, लेकिन तब भी पासपोर्ट नहीं मिला।

जाधव के मुताबिक, इसके बाद उन्हें एयरपोर्ट वापस लौटने के लिए कहा गया, जहां साहिल और केतन ने खुद कैब की तलाशी ली। उन्होंने दावा किया कि गाड़ी की तलाशी लेने के बावजूद पासपोर्ट नहीं मिला। तलाशी के बाद, दोनों पक्ष एयरपोर्ट से चले गए।

जाधव ने यह भी दावा किया कि पुणे से रावेत तक के सफर के दौरान सिया और उसके भाई साहिल के बीच बहस हुई थी; रावेत में ही केतन उनके साथ सफर में शामिल हुआ था। उसने फिर से कहा कि सिया ने उससे गाड़ी की डिक्की (बूट) खुलवाकर उसमें से कुछ निकाला था, लेकिन उसे यह नहीं पता था कि वह चीज क्या थी।

बिजनेसमैन केतन अग्रवाल की मौत से कुछ हफ्ते पहले बाली की प्री-वेडिंग ट्रिप (शादी से पहले की यात्रा) को रद्द करने की वजह बना एक खोया हुआ पासपोर्ट अब जांचकर्ताओं के लिए कथित हत्या की साजिश का एक अहम सुराग बन गया है; इस घटना ने पूरे महाराष्ट्र को चौंका दिया है।

पासपोर्ट का गायब होना एक बड़ी साज़िश का हिस्सा: पुलिस

इससे पहले, पुणे ग्रामीण पुलिस ने यह भी कहा था कि केतन की मंगेतर सिया गोयल ने कथित तौर पर उसका पासपोर्ट चुराकर नष्ट कर दिया था, जिससे वह विदेश नहीं जा सका। यह कोई अलग-थलग घटना नहीं थी, बल्कि एक बड़ी साजिश का हिस्सा थी, जिसका अंत आखिरकार 26 वर्षीय युवक की लोहागढ़ किले में मौत के साथ हुआ।

बता दें कि केतन और सिया की सगाई फरवरी में हुई थी और वे शादी से पहले के फोटोशूट के लिए 6 जून को बाली जाने वाले थे। चार लोग साथ यात्रा कर रहे थे, लेकिन मुंबई एयरपोर्ट पहुंचने पर जब केतन को पता चला कि उसका पासपोर्ट गायब है, तो यात्रा अचानक रद्द कर दी गई।

पासपोर्ट गायब होने के हालात संदिग्ध: केतन के पिता

केतन के पिता, विशाल अग्रवाल ने कहा कि पासपोर्ट के गायब होने के हालात संदिग्ध लग रहे हैं।

उन्होंने कहा, “उन्हें 6 जून को प्री-वेडिंग शूट के लिए मुंबई से बाली, इंडोनेशिया जाना था। घर से निकलते समय कार में सिर्फ चार लोग थे। कार में बैठे-बैठे सभी ने अपने पासपोर्ट चेक किए और सभी पासपोर्ट, करेंसी, क्रेडिट कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और दूसरी कीमती चीजें एक ही पाउच में रखी गई थीं। वह पाउच कार में ही था।”

केतन के पिता ने आगे कहा, “एयरपोर्ट पहुंचने पर केतन को छोड़कर बाकी सभी के पास अपने पासपोर्ट थे। सिर्फ केतन का पासपोर्ट चोरी हो गया था। इस वजह से वह जा नहीं सका और उसे एयरपोर्ट से ही वापस लौटना पड़ा।”

पुलिस ने केतन मर्डर सीन को फिर से बनाया

वहीं, एक अधिकारी ने बताया कि रविवार को पुलिस सिया गोयल को लोहागढ़ किले ले गई ताकि क्राइम सीन को फिर से बनाया जा सके। इसके लिए एक डमी का इस्तेमाल किया गया ताकि उस पल को दोबारा दिखाया जा सके जब उसे धक्का देकर गिराया गया था और उसकी मौत हो गई थी।

उसे सुबह 6.30 बजे वहां ले जाया गया। पुलिस के मुताबिक, इस कवायद का मकसद उन घटनाओं के क्रम को ठीक-ठीक समझना है जिनकी वजह से 18 जून को केतन की जान चली गई थी।

क्राइम सीन को दोबारा बनाने के लिए एक पुतले (मैनक्विन) का इस्तेमाल किया गया। इस प्रक्रिया के तहत, डमी को किले की दीवारों से नीचे गिराया गया।

केतन अग्रवाल के पिता की भावुक अपील

शनिवार को, केतन अग्रवाल के पिता ने अपने बेटे के लिए न्याय की मांग करते हुए कैंडललाइट मार्च में हिस्सा लिया और एक भावुक अपील की। ​​उन्होंने उन लोगों से आगे आकर जांच में मदद करने की गुजारिश की जो 18 जून को लोहगढ़ किले में मौजूद थे – उस दिन केतन को कथित तौर पर उसकी मंगेतर सिया गोयल और उसके बॉयफ्रेंड चेतन चौधरी ने पहाड़ी से नीचे धकेल दिया था।

पुणे के बाहरी इलाके गहुंजे में बेलमोंडो सोसाइटी में जमा हुए निवासियों, परिवार के सदस्यों और दोस्तों को संबोधित करते हुए विशाल अग्रवाल ने कहा कि किले में हुई इस घटना को कई लोगों ने देखा था, लेकिन वे अभी तक पुलिस के पास नहीं आए हैं।

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Cinema Ka Flashback: जब ‘गुजारिश’ के लिए ऐश्वर्या राय को मिलने वाला था बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड, सुपरस्टार के कहने पर काजोल को थमा दी गई थी ट्रॉफी

Cinema Ka Flashback: बॉलीवुड किसी के लिए किसी को पीछे खींचना….नीचा दिखाना….या आगे बढ़ाना बहुत आम बात है। इस ग्लैमर दुनिया में आप कब किसके लिए खास और किससे दुश्मन बन जाएं किसी को पता नहीं होता है। आए दिन दोस्ती से दुश्मनी…जलन से जुड़े किस्से सामने आते रहते हैं। एक ऐसा ही किस्सा जुड़ा है 2010-11 में एक अवॉर्ड शो से। इसके बाद से एक्टर्स के साथ-साथ दर्शकों का भी भरोसा इन शो से उठने लगा था।

ऐश्वर्या राय को भेजा गया इंवाइट

मीडिया रिपोर्ट और बॉलीवुड सोर्स के मुताबिक 2010 में ऐश्वर्या राय संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘गुजारिश’ में नजर आई थीं। फिल्म में उनके अपोजिट ऋतिक रोशन थे। इस मूवी को दर्शकों का मिला जुला प्यार मिला था। लेकिन फिल्म में ऐश्वर्या के काम और खूबरत लुक्स के लोग कायल हो गए थे। इसी साल एक अवॉर्ड शो हुआ, जिसमें ऐश्वर्या को ये कहकर इंवाइट किया गया था कि जूरी ने बेस्ट एक्ट्रेस के अवॉर्ड के लिए उनका नाम सजेस्ट किया है।

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लास्ट मोमेंट पर काजोल को दिया गया अवॉर्ड

ऐश्वर्या राय अवॉर्ड शो में अपना अवॉर्ड लेने पहुंची थी। लेकिन वहां जो हुआ उसने उन्हें काफी दुख और इंसल्टिंग महसूस कराया। शो में बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड ऐश को न देकर My Name Is Khan के लिए काजोल को दे दिया गया। ये सब वहां मौजूद ऐश्वर्या के सामने हो रहा था।

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फिल्ममेकर का बड़ा खुलास

हंगामा तब मचा जब इस किस्से के कुछ समय बाद एक बड़े फिल्ममेकर ने इंटरव्यू में इस बात का खुलकर जिक्र किया। उन्होंने सुपरस्टार का नाम लिए बिना कहा कि- एक्टर के कहने पर ऐश्वर्या राय की जगह काजोल को लास्ट मोमेंट पर ये अवॉर्ड दिया गया था। वहीं कुछ मीडिया रिपोर्ट में भी इस बात के कई दावे किए थे, कि लास्ट मोमेंट पर विनर का नाम एक्टर के कहने पर चेंज किया गया था। इस खुलासे के बाद से लोगों ने अवॉर्ड शो को कम आंकना शुरू कर दिया।

गुजारिश फिल्म

संजय लीला भंसाली की फिल्म गुजारिश 2010 में रिलीज हुई थी। इस फिल्म ऋतिक रोशन और ऐश्वर्या राय लीड रोल में थे। ऋतिक ने इसमें लकवा ग्रस्त जादूगर का किरदार निभाते हैं। स्टेज पर हुए एक हादसे के बाद उन्हें लकवा हो जाता है। इसके बाद वह अपने जादू को एक हिट रेडियो शो के ज़रिए लोगों तक पहुंचाता है, जिसमें उसका साथ ऐश देती हैं।

माई नेम इज खान फिल्म

यह फिल्म रिजवान खान (शाहरुख खान) की कहानी है, जो एस्पर्जर सिंड्रोम से पीड़ित एक मुस्लिम है। 11 सितंबर 2001 (9/11) के हमलों के बाद अमेरिका में इस्लामोफोबिया और नस्लीय भेदभाव काफी बढ़ जाता है, जिसके कारण उनके परिवार को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। इसके बाद रिजवान अमेरिका के राष्ट्रपति से मिलने और दुनिया को यह मैसेज देने के लिए एक जर्नी पर निकलते हैं-जिसमें वह लोगों को बताते हैं “मेरा नाम खान है, और मैं आतंकवादी नहीं हूं।”