Gold ETF FoF में अब नहीं डाल सकेंगे पैसे! आज से बदल गई ये चीजें

Gold Investment: कुछ म्यूचुअल फंड हाउसेज ने अस्थायी तौर पर गोल्ड ईटीएफ फंड ऑफ फंड्स (FoFs) में नए निवेश पर अस्थायी तौर पर रोक लगा दी है। यह रोक आज 16 अक्टूबर से ही लागू हो चुकी है। आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड, एचडीएफसी म्यूचुअल फंड, आदित्य बिड़ला सन लाइफ म्यूचुअल फंड, इनवेस्को इंडिया म्यूचुअल फंड, डीएसपी म्यूचुअल फंड, टाटा म्यूचुअल फंड और श्रीराम म्यूचुअल फंड जैसे कई फंड हाउसों ने निवेशकों को नोटिस जारी कर के इसकी जानकारी भेज दी है। इस पाबंदी के बाद अब ये इन म्यूचुअल फंड्स के पास गोल्ड ईटीएफ FoF में नया एकमुश्त निवेश नहीं कर सकेंगे, नई एसआईपी नहीं शुरू कर सकेंगे और न ही मौजूदा एसआईपी में टॉप अप कर सकेंगे। कुछ में तो स्विच-इन ट्रांजैक्शन और नए सिस्टेमैटिक ट्रांसफर प्लान (STP) रजिस्ट्रेशन पर भी रोक लगाई गई है।

क्या है इन नोटिसों में

श्रीराम म्यूचुअल फंड ने नोटिस में कहा कि यह रोक सेबी के के निर्देशों के तहत लगाई गई हैं, जिसे AMFI (एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया) के जरिए सूचित किया गया है। हालांकि कोई वजह नहीं बताई गई है। फंड हाउस का कहना है कि 16 अक्टूबर से नए एकमुश्त निवेश, नए एसआईपी रजिस्ट्रेशन और मौजूदा एसआईपी में निवेश की राशि बढ़ाने यानी स्टेप-अप की मंजूरी नहीं होगी।

डीएसपी म्यूचुअल फंड ने 15 अक्टूबर के अपने नोटिस में कहा है कि 15 अक्टूबर को दोपहर 3 बजे के कट-ऑफ समय के बाद के सभी एप्लीकेशन खारिज हो सकते हैं और पैसा निवेशकों को वापस कर दिया जाएगा।

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की 15 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक कोटक महिंद्रा म्यूचुअल फंड, यूटीआई म्यूचुअल फंड और एचडीएफसी म्यूचुअल फंड समेत कई बड़े भारतीय म्यूचुअल फंडों ने गोल्ड ईडीएफ में बल्क सब्सक्रिप्शन यानी एक साथ भारी निवेश रोकने के लिए नोटिस जारी किए हैं।

दशहरा-दिवाली से ठीक पहले रोक

गोल्ड ईटीएफ एफओएफ में निवेश पर रोक दशहरा और दिवाली से ठीक पहले लगाई गई हैं, जब आमतौर पर सोने की मांग बढ़ जाती है। गोल्ड ईटीएफ एफओएफ म्यूचुअल फंड की वह स्कीम है, जिसका पैसा गोल्ड ईटीएफ में लगाया जाता है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल त्योहारी सीजन के दौरान गोल्ड और सिल्वर ETF में निवेश बढ़ा था, क्योंकि स्टॉक मार्केट से कमजोर रिटर्न मिलने के कारण सोने-चांदी का क्रेज बढ़ गया। वहीं इस साल मांग थोड़ी सुस्त पड़ी और भारत में सोने का आयात अगस्त के $230 करोड़ से घटकर सितंबर में $180 करोड़ रह गया।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Gold Silver Prices Today: दिल्ली में सोने की कीमत लगातार दूसरे दिन गिरी, चांदी के भाव में कोई बदलाव नहीं

Gold Silver Prices Today: घरेलू बाजार में सोने की कीमत में लगातार दूसरे दिन गिरावट आई। बुधवार को दिल्ली में सोना 700 रुपये सस्ता हुआ। इसका भाव 1,48,900 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा। मंगलवार को यह 1,49,600 रुपये पर था।

24 कैरेट वाला सोना भी एक हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंच गया। 29 सितंबर को इसका भाव 1,48,600 रुपये प्रति 10 ग्राम था।

कमजोर मांग का असर

HDFC सिक्योरिटीज के सीनियर एनालिस्ट सौमिल गांधी के मुताबिक, घरेलू बाजार में सोने की मांग कमजोर रही। ऊपर से ग्लोबल मार्केट में भी संकेत अच्छे नहीं थे। इसका सीधा असर सोने की कीमत पर पड़ा।

पश्चिम एशिया में तनाव के चलते कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है। इसके कारण क्रूड की कीमत फिर चढ़ी। इसका भी सोने पर दबाव पड़ा।

रुपये की कमजोरी ने संभाला

हालांकि, रुपये की कमजोरी ने सोने की कीमत को ज्यादा गिरने से रोक दिया। बुधवार को रुपया डॉलर के मुकाबले 43 पैसे टूटकर 96.78 के स्तर पर बंद हुआ।

कमजोर रुपया आमतौर पर भारत में आयात होने वाले सोने को महंगा करता है। इसलिए घरेलू बाजार में सोने की गिरावट कुछ सीमित रही।

चांदी 2.27 लाख रुपये पर स्थिर

चांदी की कीमत में बुधवार को कोई बदलाव नहीं हुआ। यह लगातार तीसरा कारोबारी सत्र है, जब चांदी 2.27 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर बनी हुई है।

हालांकि, ग्लोबल मार्केट में चांदी की हालत कमजोर रही। इसकी कीमत 2.26% गिरकर 59.97 डॉलर प्रति औंस पर आ गई। यह करीब तीन महीने का निचला स्तर है। चांदी इससे पहले 9 जुलाई को इस स्तर के आसपास थी।

ग्लोबल मार्केट में सोना भी दबाव में

अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड 47.42 डॉलर यानी 1.14% गिरकर 4,116.55 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। ग्लोबल ट्रेड में सोना करीब 4,120 डॉलर के आसपास बना हुआ है।

मुद्रेक्स के लीड क्वांट एनालिस्ट अक्षत सिद्धांत के मुताबिक, अब बाजार की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक के मिनट्स पर है। इससे आगे ब्याज दरों को लेकर तस्वीर साफ हो सकती है।

मजबूत डॉलर भी बना दबाव

डॉलर इस समय करीब 18 महीने के उच्च स्तर पर है। मजबूत डॉलर से सोने की कीमत पर दबाव बढ़ता है। दिसंबर में अमेरिकी ब्याज दर बढ़ने की संभावना करीब 70% मानी जा रही है।

यानी फिलहाल सोने के लिए माहौल बहुत मजबूत नहीं दिख रहा। ग्लोबल ब्याज दरों और डॉलर की चाल आगे भी इसकी कीमत तय करने में अहम रहेगी।

RBI की दर बढ़ोतरी से भी बदला माहौल

इधर, भारतीय रिजर्व बैंक ने भी बुधवार को बड़ा फैसला लिया। RBI ने रेपो रेट 25 बेसिस प्वाइंट बढ़ाकर 5.50% कर दिया। करीब चार साल में यह पहली बढ़ोतरी है।

RBI ने यह कदम बढ़ती महंगाई और कमजोर रुपये के बीच उठाया है। केंद्रीय बैंक ने आगे भी दरें बढ़ाने के संकेत दिए हैं।

आगे 75 बेसिस प्वाइंट बढ़ोतरी की उम्मीद

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज की चीफ इकोनॉमिस्ट राधिका पिपलानी के मुताबिक, RBI ने अपना रुख न्यूट्रल से बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ कर दिया है।

उनका मानना है कि इस साइकिल में RBI कुल 75 बेसिस प्वाइंट तक दरें बढ़ा सकता है। इससे रेपो रेट 6.25% तक पहुंच सकता है। इसमें दिसंबर में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी भी शामिल है। बाजार इस बढ़ोतरी की काफी हद तक उम्मीद पहले से कर रहा है।

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Gold Price Correction: सोने की कीमत इस साल 26% गिरी, अब खरीदारी का मौका? Tata MF ने बताई पूरी रणनीति

Gold Price Correction: भारत में त्योहारी और शादी का सीजन शुरू हो चुका है। ऐसे में सोने की कीमतों पर निवेशकों की नजर है। 2026 के शिखर से सोने के भाव में करीब 26% की गिरावट आ चुकी है। Tata Asset Management का मानना है कि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह गिरावट खरीदारी का बेहतर मौका दे सकती है।

हालांकि, Tata MF ने जल्दबाजी में निवेश करने से बचने को कहा है। फंड हाउस का मानना है कि सोने में आगे भी तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। इसलिए छोटी अवधि की तेजी या गिरावट देखकर फैसला लेना ठीक नहीं होगा।

2026 के शिखर से करीब 26% नीचे आया सोना

Tata MF के अक्टूबर 2026 के मार्केट आउटलुक के मुताबिक, सोना जनवरी के करीब 5,595 डॉलर प्रति औंस के शिखर से गिरकर लगभग 4,138 डॉलर पर आ गया है। यानी इसमें करीब 26% की गिरावट आई है।

फंड हाउस के मुताबिक, इस गिरावट की बड़ी वजह अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी और मजबूत अमेरिकी डॉलर है। Tata MF का कहना है कि सोने की बुनियादी कहानी में कोई बड़ी कमजोरी नहीं आई है।

सेंट्रल बैंकों की खरीद बनी बड़ी ताकत

लंबी अवधि में सोने के पक्ष में सबसे बड़ा फैक्टर सेंट्रल बैंकों की खरीद है। Tata MF के मुताबिक, 2026 की दूसरी तिमाही में सेंट्रल बैंकों ने 289 टन सोना खरीदा।

पूरे 2026 में यह खरीद 700 से 900 टन के बीच रह सकती है। 2022 से पहले इसका सालाना औसत करीब 400-500 टन था। यानी सेंट्रल बैंकों की सोने में दिलचस्पी पहले के मुकाबले काफी बढ़ी है।

Tata MF के मुताबिक, खासकर उभरते बाजारों के सेंट्रल बैंक अपने रिजर्व में अमेरिकी डॉलर वाली संपत्तियों की हिस्सेदारी घटा रहे हैं। इसके लिए वे सोने को एक विकल्प के तौर पर देख रहे हैं।

चीन से भी सोने को मिल रहा सहारा

चीन भी सोने की मांग का बड़ा जरिया बना हुआ है। Tata MF के मुताबिक, 2026 में चीन का गोल्ड इंपोर्ट 1,000 टन के पार पहुंच चुका है। यह 2025 में पूरे साल हुए आयात से भी ज्यादा है।

रिटेल मांग, गोल्ड ETF में निवेश और सेंट्रल बैंक की खरीद से चीन के फिजिकल गोल्ड मार्केट को सहारा मिल रहा है। मिडिल ईस्ट में तनाव और अमेरिका-चीन की रणनीतिक प्रतिस्पर्धा भी सोने की मांग बढ़ा सकती है।

US का बढ़ता कर्ज भी सोने के पक्ष में

Tata MF ने बढ़ते अमेरिकी कर्ज और फिस्कल डेफिसिट को भी सोने के लिए लंबी अवधि का पॉजिटिव फैक्टर बताया है। US सरकार का कर्ज 40 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंच चुका है।

वहीं, फिस्कल डेफिसिट GDP के करीब 6-7% पर है। फंड हाउस के मुताबिक, कर्ज की स्थिरता और डॉलर की खरीद क्षमता को लेकर चिंता बढ़ती है तो सोना निवेशकों के लिए वैल्यू स्टोर के तौर पर और आकर्षक हो सकता है।

एक साथ पैसा लगाने के बजाय धीरे-धीरे खरीदारी

लंबी अवधि में सोने पर Tata MF का रुख सकारात्मक है। लेकिन हाल की तेजी और गिरावट को देखते हुए फंड हाउस ने सावधानी बरतने को कहा है। सोने में आगे भी तेज कंसोलिडेशन देखने को मिल सकता है।

इसलिए Tata MF एक साथ पूरी रकम लगाने के बजाय चरणबद्ध निवेश को बेहतर मानता है। यानी बाजार का निचला स्तर पकड़ने की कोशिश करने के बजाय अलग-अलग समय पर थोड़ा-थोड़ा निवेश किया जाए।

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बाजार में गिरावट से एसेट एलोकशन नहीं करने वाले इनवेस्टर्स को तगड़ी चोट, जानिए पूरा मामला

शेयर बाजारों में गिरावट थमने का नाम नहीं ले रही। 29 सितंबर को भी बाजार के प्रमुख सूचकांक गिरकर बंद हुए। इससे लंबी अवधि के लिए शेयरों में निवेश करने वाले लोग चिंतित हैं। खासकर ऐसे लोग ज्यादा चिंतित हैं, जिन्हें अभी पैसे की जरूरत है। अगर अभी वे शेयर या म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम से पैसे निकालते हैं तो उन्हें बड़ा नुकसान उठाना होगा।

पूरा पैसा शेयरों में निवेश करना ठीक नहीं

एक्सपर्ट्स का कहना है कि बाजार की गिरावट ने उन लोगों को बड़ी चोट पहुंचाई है, जो अपना ज्यादातर पैसा शेयरों या म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम में निवेश कर रहे थे। अब उन्हें एसेट एसेट ऐलोकेशन का मतलब समझ में आ रहा है। इनवेस्टमेंट एडवाइजर्स हमेशा निवेशकों को एसेट ऐलोकशन का खास ख्याल रखने की सलाह देते हैं। यह बाजार में ज्यादा गिरावट की स्थिति में इनवेस्टर के पोर्टफोलियो को सुरक्षा देता है।

पोर्टफोलियो में डेट और गोल्ड भी होने चाहिए

प्रूडेंट इनवेस्टमेंट मैनेजर्स के सीईओ प्रशांत सेठ ने कहा, “इनवेस्टर्स को करीब 65-75 फीसदी पैसा शेयरों में रखना चाहिए। 15-25 फीसदी पैसा डेट में रखा जा सकता है। 5-10 फीसदी गोल्ड में रखा जा सकता है।” उन्होंने कहा कि हालांकि यह इनवेस्टर के रिस्क लेने की कपैसिटी और इनवेस्टमेंट के गोल पर निर्भर करता है। इसका मतलब है कि अगर किसी को एक लाख रुपये का निवेश करना है तो वह 65-75 हजार शेयरों में लगा सकता है। 15-25 फीसदी डेट में लगा सकता है। बाकी गोल्ड में।

शेयरों में ज्यादा निवेश करने में खराबी नहीं 

शेयर बाजार की स्थिति बीते दो साल से डांवाडोल बनी हुई है। इस दौरान बाजार ने निवेशकों को निराश किया है। लेकिन, यह सिर्फ दो साल की बात है। लंबी अवधि में मार्केट का रिटर्न दूसरे एसेट क्लास से ज्यादा रहता है। इसलिए पोर्टफोलियो का बड़ा हिस्सा शेयरों में निवेश करने में कोई खराबी नहीं है। लेकिन, शेयरों में 100 फीसदी निवेश ठीक नहीं है। इसका मतलब है कि आपको अपना पूरा पैसा सिर्फ शेयरों या म्चूअल फंड की इक्विटी स्कीम में नहीं लगाना चाहिए।

लार्जकैप शेयरों में ज्यादा निवेश सुरक्षित

सेठ ने कहा कि इनवेस्टर 60-70 फीसदी लार्जकैप शेयरों में निवेश कर सकता है। बाकी मिडकैप और स्मॉलकैप में निवेश किया जाल सकता है। लार्जकैप शेयरों में ज्यादा निवेश से पोर्टफोलियो को सुरक्षा मिलती है। स्मॉलकैप और मिडकैप शेयरों के मुकाबले लार्जकैप शेयरों पर गिरावट का असर कम पड़ता है। इनवेस्टर रिस्क लेने की अपनी क्षमता के हिसाब से निवेश में संतुलन बना सकता है।

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आगे पैसे की जरूरत पड़ने वाली है तो डेट में करें निवेश

सेठ ने कहा कि अगर किसी इनवेस्टर को अगले अगले कुछ सालों के बाद पैसे की जरूरत पड़ने वाली है तो उसे ज्यादा पैसा मार्केट से जुड़े ऑप्शंस में निवेश नहीं करना चाहिए। वह डेट में अपना निवेश बढ़ा सकता है। इससे पैसे की जरूरत पड़ने पर उसे कम भाव पर अपने शेयर बेचने को मजबूर नहीं होना पड़ेगा। जहां तक गोल्ड की बात है तो यह पोर्टफोलियो के डायवर्सिफिकेशन के लिए जरूरी है। गोल्ड को दुनिया में निवेश का सबसे सुरक्षित विकल्प माना जाता है।

Gold Price Outlook: 2026 के अंत में ₹1.75 लाख तक जा सकता है सोना, त्योहारी सीजन में बढ़ेगी मांग : मेटल फोकस

Gold Price Outlook: सोने की कीमत को लेकर एक बड़ा अनुमान सामने आया है। Metals Focus के मैनेजिंग डायरेक्टर फिलिप न्यूमैन के मुताबिक, 2026 के अंत तक सोने की कीमत $5,000 प्रति औंस तक पहुंच सकती है। यानी मौजूदा स्तर से 16% के इजाफे का अनुमान है। सेंट्रल बैंकों की लगातार खरीदारी सोने की कीमत को मजबूत सपोर्ट दे रही है।

न्यूमैन का कहना है कि अमेरिका में हाल की ब्याज दर बढ़ोतरी और इस साल एक और बढ़ोतरी की उम्मीद से सोने पर बहुत ज्यादा दबाव नहीं पड़ेगा। बाजार इस असर को पहले ही काफी हद तक कीमत में शामिल कर चुका है। उनके मुताबिक, $4,300 प्रति औंस सोने के लिए मजबूत सपोर्ट लेवल है।

सेंट्रल बैंक लगातार खरीद रहे सोना

सोने की तेजी में सेंट्रल बैंकों की खरीदारी बड़ी भूमिका निभा रही है। न्यूमैन के मुताबिक, दूसरी तिमाही में सेंट्रल बैंकों ने अच्छी खरीदारी की है। तीसरी तिमाही में भी खरीदारी मजबूत रहने की उम्मीद है।

उनका कहना है कि पिछले कुछ महीनों में सेंट्रल बैंक सोने की कीमत के लिए मजबूत सपोर्ट बने हुए हैं। इससे सोने की कीमत को एक मजबूत आधार मिला है।

अमेरिका का बढ़ता कर्ज भी बड़ा फैक्टर

न्यूमैन के मुताबिक, अमेरिका में बढ़ते कर्ज को लेकर चिंता भी निवेशकों के लिए अहम होती जा रही है। ऐसे माहौल में सोने की मांग को सपोर्ट मिल सकता है।

अमेरिका में ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी की उम्मीद के बावजूद उनका मानना है कि इससे सोने की कीमत पर बड़ा दबाव नहीं आएगा। बाजार इस संभावित कदम को पहले ही काफी हद तक पचा चुका है।

भारत में कितना बढ़ सकता है सोने का भाव?

भारत में भी सोने की कीमत पहले से काफी ऊंचे स्तर पर है। MCX पर गोल्ड करीब ₹1.51 लाख प्रति 10 ग्राम है। वहीं, इंटरनेशनल मार्केट में सोना करीब $4,311 प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है।

अगर इंटरनेशनल गोल्ड $5,000 प्रति औंस तक पहुंचता है, तो मौजूदा कीमतों के अनुपात से भारत में सोने का भाव करीब ₹1.75 लाख प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकता है। यानी मौजूदा स्तर से करीब ₹24,000 की तेजी हो सकती है।

भारत में त्योहारी सीजन से बढ़ेगी मांग

भारत में त्योहार और शादी का सीजन शुरू होने के साथ सोने की मांग बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि, ऊंची कीमतों के कारण खरीदार फिलहाल थोड़ा संभलकर खरीदारी कर रहे हैं।

न्यूमैन के मुताबिक, ग्राहक सोने के ऑर्डर रद्द नहीं कर रहे हैं। वे सिर्फ खरीदारी को कुछ समय के लिए टाल रहे हैं। इसे भविष्य की मांग के लिए अच्छा संकेत माना जा रहा है।

सोने के साथ चांदी में भी तेजी की उम्मीद

सोने की कीमत में तेजी का असर चांदी पर भी पड़ सकता है। न्यूमैन के मुताबिक, अगर सोना $5,000 प्रति औंस तक पहुंचता है, तो चांदी $80 प्रति औंस तक जा सकती है।

उन्होंने 2027 में चांदी में और तेजी की गुंजाइश भी जताई है। ऐसे में आने वाले समय में सोने के साथ चांदी पर भी निवेशकों की नजर रह सकती है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

शेयर, सोना और बैंक एफडी, इनमें निवेश का इनवेस्टर्स का आखिरी मकसद क्या है?

बीते कुछ सालों में शेयरों और गोल्ड में निवेश में लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है। इनवेस्टर्स के बीच बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट का भी अट्रैक्शन बना हुआ है। सवाल है कि क्या इसका मतलब है कि प्रॉपर्टी  इनवेस्टर्स की अब पसंद नहीं रह गई है? एनारॉक के रियल एस्टेट होमबायर सर्वे से इस सवाल का जवाब मिला है। यह सर्वे इस साल जनवरी से जून के बीच हुआ। इसमें 14 शहरों के करीब 8,320 लोगों ने हिस्सा लिया, जिनकी उम्र 23 से 77 के बीच थी।

घर खरीदना वित्तीय लक्ष्य में सबसे ऊपर

सर्वे के नतीजे बताते हैं कि घर खरीदना इनवेस्टर्स के फाइनेंशियल गोल यानी वित्तीय लक्ष्य में सबसे ऊपर था। इसके बाद बिजनेस शुरू करना, इमर्जेंसी फंड बनाना या रिटायरमेंट का नंबर था। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि 45 फीसदी इनवेस्टर्स या गोल्ड या शेयर में 45 फीसदी इनवेस्ट करने वाले घर के लिए निवेश कर रहे हैं। सर्वे में शामिल 40 फीसदी लोगों ने रियल एसेट्स को छोड़कर दूसरे एसेट्स को सेलेक्ट किया।

45% लोगों ने घर खरीदने में दिखाई दिलचस्पी

इन लोगों से जब यह पूछा गया कि वे निवेश से तैयार अपने फंड का कहां इस्तेमाल करेंगे, तो घर खरीदना उनका सबसे बड़ा लक्ष्य था। 45 फीसदी लोगों ने घर खरीदने को अपना पहला गोल बताया। 25 फीसदी लोगों ने कहा कि वे निवेश से तैयार फंड का इस्तेमाल बिजनेस शुरू करने के लिए करेंगे। 17 फीसदी लोगों ने कहा कि वे इस पैसे से इमर्जेंसी फंड बनाएंगे। 11 फीसदी लोगों ने रिटायरमेंट को अपनी पहली प्राथमिकता बताई। सिर्फ 2 फीसदी ने कहा कि वे इस पैसा का इस्तेमाल सैर-सपाटे के लिए करेंगे।

निवेश के एसेट्स और निवेश के लक्ष्य में हो सकता है फर्क

इस सर्वे के नतीजों से यह भी पता चलता है कि किसी इनवेस्टर के निवेश के एसेट्स और निवेश के लक्ष्य के बीच फर्क हो सकता है। नॉन-रियल एसेट्स में निवेश का मतलब यह नहीं की घरों की डिमांड कमजोर पड़ रही है। हालांकि, अलग-अलग उम्र के लोगों के निवेश के मकसद में फर्क देखने को मिला।

घर खरीदने में सबसे ज्यादा दिलचस्पी मिलेनियल्स की

मिलेनियल्स यानी 1981 से 1996 के बीच जन्म लेने वाले लोगों में से 71 फीसदी का कहना था कि वे निवेश से तैयार अपने फंड का इस्तेमाल भविष्य में घर खरीदने के लिए करना चाहते हैं। जेनरेशन एक्स यानी 1965 से 1980 के बीच जन्म लेने वाले लोगों में से 44 फीसदी का कहना था कि वे निवेश के पैसे का इस्तेमाल घर खरीदने के लिए करेंगे।

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रियल एसेट्स अब भी निवेश के लिहाज से पहली पसंद 

इस सर्वे के नतीजे बताते हैं कि ज्यादातर लोगों के लिए अभी भी रियल एस्टेट सबसे पसंदीदा एसेट क्लास है। यह पूछने पर कि मौजूदा माहौल में कौन सा एसेट क्लास निवेश के लिए सबसे अच्छा है, 60 फीसदी लोगों का जवाब रियल एस्टेट था। 20 फीसदी के साथ स्टॉक मार्केट दूसरे नंबर पर था। 11 फीसदी के साथ सोना तीसरे नंबर पर था। इसके बाद बैंक एफडी का नंबर था।

Gold Price Outlook: इस हफ्ते कैसी रहेगी सोने-चांदी की चाल, एक्सपर्ट्स से जानिए

Gold Price Outlook: सोमवार 21 सितंबर से शुरू हो रहे नए हफ्ते सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। हालांकि, इसके एक सीमित दायरे में रहने की संभावना है। एनालिस्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड में हलचल पर बाजार की नजर रहेगी। इसके अलावा पश्चिम एशिया के तनाव और कच्चे तेल की कीमतों की दिशा भी सोने को प्रभावित करेगी।

मौद्रिक नीति और जियोपॉलिटिकल घटनाक्रम से भरे पिछले हफ्ते के बाद अब निवेशकों की नजर नए आर्थिक आंकड़ों पर रहेगी। प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स यानी PMI के आंकड़े जारी होंगे।

हफ्ते के आखिर में अमेरिका के हाउसिंग डेटा, ड्यूरेबल गुड्स ऑर्डर और कंज्यूमर सेंटीमेंट के आंकड़े भी आएंगे। इनसे मौद्रिक नीति और सोने की मांग को लेकर बाजार को संकेत मिल सकते हैं।

MCX पर सोने-चांदी में तेजी

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर अक्टूबर डिलीवरी वाला सोना पिछले हफ्ते ₹1,597 यानी 1.04 फीसदी बढ़कर ₹1.54 लाख प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। वहीं, चांदी का भाव ₹6,629 यानी करीब 3 फीसदी बढ़कर ₹2.41 लाख प्रति किलो हो गया।

LKP Securities के वाइस प्रेसिडेंट और रिसर्च एनालिस्ट जतिन त्रिवेदी ने कहा कि MCX पर सोने की शुरुआत पिछले हफ्ते करीब ₹1.50 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कमजोर रही। हालांकि, निचले स्तरों पर खरीदारी आने से कीमतों में मजबूत रिकवरी हुई और सोना ₹1.54 लाख तक पहुंच गया।

उन्होंने कहा कि बाजार में बड़े आर्थिक और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों को लेकर काफी उतार-चढ़ाव रहा। अब कई अहम घटनाक्रम पीछे छूट चुके हैं। ऐसे में बाजार की नजर मौद्रिक नीति और भू-राजनीतिक जोखिमों के अगले दौर पर रहेगी।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोना मजबूत

अंतरराष्ट्रीय बाजार में दिसंबर डिलीवरी वाला कॉमेक्स गोल्ड मामूली बढ़त के साथ 4,424.9 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ। वहीं, चांदी करीब 3 फीसदी बढ़कर 67.15 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।

JM Financial Services के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट प्रणव मेर ने कहा कि सोने की कीमतों में लगातार तीसरे हफ्ते सीमित दायरे में कारोबार हुआ। हालांकि, पिछले कुछ कारोबारी सत्रों में गिरावट के दौरान निचले स्तरों पर खरीदारी देखने को मिली। इससे सोना हफ्ते के अंत में बढ़त के साथ बंद हुआ।

मेर के मुताबिक, अमेरिकी डॉलर इंडेक्स और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में कुछ बढ़त कम हुई। इसी दौरान हफ्ते के बीच तेल की कीमतों में भी बदलाव देखने को मिला। उन्होंने कहा कि पिछले 7-8 कारोबारी हफ्तों से निवेशकों की सोने में दिलचस्पी मजबूत बनी हुई है। दुनियाभर के गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड यानी गोल्ड ETF में लगातार निवेश इसका संकेत है।

चीन के फैसले पर भी नजर

चांदी की कीमतों ने भी इंडस्ट्रियल मेटल्स की चाल को फॉलो किया। शुरुआती गिरावट के बाद चांदी में रिकवरी हुई और हफ्ते का अंत मजबूत बढ़त के साथ हुआ।

मेर ने कहा कि प्रमुख केंद्रीय बैंकों की अहम बैठकें अब खत्म हो चुकी हैं। ऐसे में बाजार की नजर चीन के केंद्रीय बैंक पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना पर रहेगी। बैंक सोमवार को अपनी मौद्रिक नीति का ऐलान कर सकता है। बाजार को फिलहाल ब्याज दरों में बदलाव की उम्मीद नहीं है।

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सोने में निवेश रोकने की नहीं करें भूल, कोटक म्यूचुअल फंड ने बताई इसकी वजह

सोने ने 2026 में निवेशकों को 63 फीसदी रिटर्न दिया था। लेकिन, इस साल सोने की चाल सुस्त पड़ गई है। इस साल अगस्त तक सोने का रिटर्न सिर्फ 2 फीसदी है। इससे इनवेस्टर्स निराश हैं। लेकिन, कोटक महिंद्रा म्यूचुअल फंड का कहना है कि इसके बावजूद पोर्टफोलियो में गोल्ड को शामिल करना जरूरी है। उसने सितंबर 2026 एसेट ऐलोकेशन आउटलुक में इस बारे में बताया है।

कोटक का इक्विटी पर न्यूट्रल रुख

कोटक ने शेयरों पर अपना रुख न्यूट्रल रखा है। म्यूचुअल फंड हाउस का यह भी मानना है कि आगे सोने में 2026 जैसी तेजी लौटने को लेकर संशय है। जहां तक निवेशकों की बात है तो कोटक की रिपोर्ट का मतलब यह नहीं है कि सोना शेयर की जगह ले लेगा। इसका मतलब सिर्फ यह है कि एसेट ऐलोकेशन में इक्विटी और डेट के साथ सोने की भी जगह है।

मल्टी एसेट पोर्टफोलियो का फायदा

कोटक ने एक ऐसे पोर्टफोलियो के बारे में बताया है, जिसमें निफ्टी टीआरआई 55 फीसदी, निफ्टी शॉर्ट ड्यूरेशन डेट इंडेक्स 30 फीसदी और डोमेस्टिक गोल्ड 15 फीसदी है। इस पोर्टफोलियो ने पांच सालों के दौरान 12.23 फीसदी रिटर्न दिया है। इस दौरान निफ्टी 50 टीआरआई का रिटर्न 10.93 फीसदी रहा है।

डायवर्सिफिकेशन के लिए सोने में निवेश

अगर तीन सालों की बात की जाए तो इस पोर्टफोलियो ने 11.20 फीसदी रिटर्न दिया है, जबकि निफ्टी 50 टीआरआई का रिटर्न 7.33 फीसदी रहा है। 7 साल में दोनों का रिटर्न 13.50 फीसदी रहा है। 10 साल में पोर्टफोलियो का रिटर्न 11.96 रहा है, जबकि निफ्टी 50 टीआरआई का रिटर्न 11.95 फीसदी रहा है।

सिर्फ इक्विटी में निवेश में ज्यादा रिस्क

इससे डायवर्सिफायड पोर्टफोलियो और सिर्फ इक्विटी वाले पोर्टफोलियो के रिटर्न के बीच फर्क का पता चलता है। मंथली 10,000 रुपये SIP की हिस्सेदारी 55 फीसदी, शॉर्ट ड्यूरेशन डेट की हिस्सेदारी 30 फीसदी और सोने की हिस्सेदारी 15 फीसदी वाले पोर्टफोलियो ने एक साल में 3.98 फीसदी रिटर्न दिया है, जबकि निफ्टी 50 टीआरआई का रिटर्न इस दौरान मानइस 3.01 फीसदी है।

बैलेंस्ड पोर्टफोलियो में सोने की भी जगह

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं निकाला जाना चाहिए कि सिर्फ गोल्ड का प्रदर्शन शेयरों से अच्छा रहा है। पोर्टफोलियो में 30 फीसदी हिस्सेदारी शॉर्ट ड्यूरेशन डेट की भी है। पोर्टफोलियो तीनों एसेट क्लास का प्रदर्शन दिखाता है। कोटक के आउटलुक में सोने से जुड़ी कुछ खास बातों के बारे में बताया गया है।

सोने में इन वजहों से जारी रहेगी तेजी 

पहला, कई देशों के केंद्रीय बैंकों ने सोने की खरीदारी बढ़ाई है। दूसरा, चीन भी गोल्ड में काफी निवेश कर रहा है। लेकिन, इसका मतलब यह नहीं है कि इनवेस्टर्स को शेयरों की जगह सोने में निवेश शुरू कर देना चाहिए। सोने का रिटर्न 2025 में 63 फीसदी रहने का मतलब यह नहीं है कि आगे भी उसका रिटर्न इतना रहेगा। इसका मतलब सिर्फ यह है कि पोर्टफोलियो में शेयर और डेट के साथ गोल्ड को भी शामिल करना जरूरी है।

Gold Investment: आज सोने में लगाए ₹50,000 तो 2036 में कितने हो जाएंगे? समझिए 10 साल के रिटर्न का पूरा गणित

Gold Price Return Projection 2026 to 2036: भारतीय परिवारों में सोना हमेशा से सिर्फ गहने के तौर पर ही नहीं, बल्कि सबसे भरोसेमंद वेल्थ के रूप में पसंद किया जाता रहा है। रिकॉर्ड ऊंचाइयों को छूने के बाद आज हर निवेशक के मन में एक ही सवाल है अगर आज सोने में ₹50,000 लगाए जाएं, तो अगले 10 साल में यानी 2036 तक इसकी वैल्यू कितनी हो सकती है?

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों और ऐतिहासिक रिटर्न को आधार बनाकर आइए आसान भाषा में समझते हैं कि अलग-अलग सालाना रिटर्न (CAGR) के हिसाब से आपका ₹50,000 का निवेश 2036 तक कितना बन सकता है।

पिछले 10 सालों में सोने ने दिया बंपर रिटर्न

भविष्य के अनुमान से पहले यह देखना जरूरी है कि पिछले एक दशक में सोने की कीमतें कितनी तेजी से बढ़ी हैं। साल 2016 में कीमत 10 ग्राम (24 कैरेट) सोने का औसत भाव करीब ₹28,623 था। 2026 में यह बढ़कर लगभग ₹1,53,250 प्रति 10 ग्राम हो चुका है।

पिछले 10 सालों में सोने की कीमतें करीब 5.35 गुना बढ़ी हैं, यानी लगभग 18.6% का सालाना रिटर्न दर्ज किया गया है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक अकेले 2025 में ही सोने ने 60% से ज्यादा का रिटर्न दिया था। आपको बता दें कि मौजूदा दरों पर ₹50,000 में करीब 3.26 ग्राम सोना मिलेगा।

आज सोने में लगाया गया ₹50,000 साल 2036 में कितने का होगा?

वैसे इतिहास का 18.6% वाला रिटर्न हर साल मिले, यह जरूरी नहीं है। इसलिए अलग-अलग सालाना रिटर्न के हिसाब से 2036 की संभावित वैल्यू नीचे दी गई है:

2036 में कितना होगा ₹50,000? अलग-अलग सिनेरियो का गणित

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के GLTER मॉडल के मुताबिक 2025 से 2040 के बीच सोने का औसत अनुमानित रिटर्न 5.2% प्रति वर्ष रहने का अनुमान है।

किन वजहों से घटती-बढ़ती हैं सोने की कीमतें?

सोने के दाम कभी भी एक सीधी रेखा में नहीं बढ़ते। इसमें उतार-चढ़ाव बना रहता है। सोने की चाल को मुख्य रूप से ये कारक तय करते हैं:

  • अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Fed) के ब्याज दर संबंधी फैसले।
  • अमेरिकी डॉलर (USD) की मजबूती या कमजोरी।
  • वैश्विक स्तर पर महंगाई और जियोपॉलिटिकल तनाव (युद्ध/विवाद)।
  • दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की खरीदारी।

फिजिकल गोल्ड खरीदने से पहले रखें इन खर्चों का ध्यान

अगर आप केवल निवेश के मकसद से फिजिकल सोना (गहने या सिक्के) खरीद रहे हैं, तो वास्तविक रिटर्न कम हो सकता है। क्योंकि इसमें:

  • 3% GST लागू होता है।
  • मेकिंग चार्ज और वेस्टेज का खर्च जुड़ता है।
  • बाय-सेल स्प्रेड यानी खरीदते और बेचते वक्त की कीमतों में अंतर होता है।

स्मार्ट इनवेस्टमेंट टिप: अगर आपका उद्देश्य केवल निवेश से रिटर्न कमाना है, तो फिजिकल गोल्ड के बजाय Gold ETF, डिजिटल गोल्ड या गोल्ड म्युचुअल फंड्स जैसे पेपर/डिजिटल विकल्पों पर विचार करना अधिक फायदेमंद हो सकता है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Gold Price Today: त्योहारी सीजन से पहले सोना ₹650 सस्ता हुआ, चांदी सपाट रही

Gold Price Today: नए हफ्ते के पहले दिन सोने की कीमतों में गिरावट रही। दिल्ली में सोमवार को सोना 650 रुपये सस्ता हो गया। इसकी कीमत 1,60,250 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गई। कमजोर वैश्विक रुख का असर घरेलू बाजार पर भी दिखा।

स्थानीय कारोबारियों के मुताबिक, 24 कैरेट वाला सोना शुक्रवार को 1,60,900 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। वहीं, चांदी की कीमत में कोई बदलाव नहीं हुआ। यह लगातार दूसरे सत्र में 2,40,500 रुपये प्रति किलोग्राम पर बनी रही।

अमेरिकी रोजगार आंकड़ों से सोने पर दबाव

ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म Lemonn के हेड ऑफ रिसर्च गौरव गर्ग ने कहा कि सोने पर दबाव बना हुआ है। अमेरिका के रोजगार के आंकड़े उम्मीद से बेहतर रहे हैं। इससे सितंबर में Federal Reserve की ओर से ब्याज दर बढ़ाने की उम्मीद बढ़ी है।

अब बाजार की नजर इस हफ्ते आने वाले Producer Price Index यानी PPI और Consumer Price Index यानी CPI के आंकड़ों पर है। इन आंकड़ों से अमेरिकी केंद्रीय बैंक की आगे की ब्याज दर नीति को लेकर नए संकेत मिल सकते हैं।

महंगाई के आंकड़ों पर टिकी नजर

इस हफ्ते अमेरिका के महंगाई से जुड़े अहम आंकड़े आने हैं। इन पर बाजार की नजर रहेगी। इनसे Federal Reserve की ब्याज दरों को लेकर आगे का रुख साफ हो सकता है।

इसका सीधा असर सोने की कीमतों पर भी पड़ सकता है। ब्याज दरों को लेकर उम्मीदों में बदलाव से बुलियन बाजार का रुख बदल सकता है।

विदेशी बाजार में भी सोना गिरा

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने की कीमत में गिरावट रही। स्पॉट गोल्ड 35.03 डॉलर यानी करीब 1 फीसदी गिरकर 4,395.30 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। चांदी की कीमत भी 1 फीसदी गिरकर 65.64 डॉलर प्रति औंस रह गई।

HDFC Securities के सीनियर एनालिस्ट-कमोडिटीज सौमिल गांधी ने कहा कि सोमवार को कमजोर विदेशी संकेतों के चलते सोने की कीमत में गिरावट आई। स्पॉट गोल्ड करीब 4,400 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर कारोबार कर रहा था।

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