Gold Price Correction: सोने की कीमत इस साल 26% गिरी, अब खरीदारी का मौका? Tata MF ने बताई पूरी रणनीति

Gold Price Correction: भारत में त्योहारी और शादी का सीजन शुरू हो चुका है। ऐसे में सोने की कीमतों पर निवेशकों की नजर है। 2026 के शिखर से सोने के भाव में करीब 26% की गिरावट आ चुकी है। Tata Asset Management का मानना है कि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह गिरावट खरीदारी का बेहतर मौका दे सकती है।

हालांकि, Tata MF ने जल्दबाजी में निवेश करने से बचने को कहा है। फंड हाउस का मानना है कि सोने में आगे भी तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। इसलिए छोटी अवधि की तेजी या गिरावट देखकर फैसला लेना ठीक नहीं होगा।

2026 के शिखर से करीब 26% नीचे आया सोना

Tata MF के अक्टूबर 2026 के मार्केट आउटलुक के मुताबिक, सोना जनवरी के करीब 5,595 डॉलर प्रति औंस के शिखर से गिरकर लगभग 4,138 डॉलर पर आ गया है। यानी इसमें करीब 26% की गिरावट आई है।

फंड हाउस के मुताबिक, इस गिरावट की बड़ी वजह अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी और मजबूत अमेरिकी डॉलर है। Tata MF का कहना है कि सोने की बुनियादी कहानी में कोई बड़ी कमजोरी नहीं आई है।

सेंट्रल बैंकों की खरीद बनी बड़ी ताकत

लंबी अवधि में सोने के पक्ष में सबसे बड़ा फैक्टर सेंट्रल बैंकों की खरीद है। Tata MF के मुताबिक, 2026 की दूसरी तिमाही में सेंट्रल बैंकों ने 289 टन सोना खरीदा।

पूरे 2026 में यह खरीद 700 से 900 टन के बीच रह सकती है। 2022 से पहले इसका सालाना औसत करीब 400-500 टन था। यानी सेंट्रल बैंकों की सोने में दिलचस्पी पहले के मुकाबले काफी बढ़ी है।

Tata MF के मुताबिक, खासकर उभरते बाजारों के सेंट्रल बैंक अपने रिजर्व में अमेरिकी डॉलर वाली संपत्तियों की हिस्सेदारी घटा रहे हैं। इसके लिए वे सोने को एक विकल्प के तौर पर देख रहे हैं।

चीन से भी सोने को मिल रहा सहारा

चीन भी सोने की मांग का बड़ा जरिया बना हुआ है। Tata MF के मुताबिक, 2026 में चीन का गोल्ड इंपोर्ट 1,000 टन के पार पहुंच चुका है। यह 2025 में पूरे साल हुए आयात से भी ज्यादा है।

रिटेल मांग, गोल्ड ETF में निवेश और सेंट्रल बैंक की खरीद से चीन के फिजिकल गोल्ड मार्केट को सहारा मिल रहा है। मिडिल ईस्ट में तनाव और अमेरिका-चीन की रणनीतिक प्रतिस्पर्धा भी सोने की मांग बढ़ा सकती है।

US का बढ़ता कर्ज भी सोने के पक्ष में

Tata MF ने बढ़ते अमेरिकी कर्ज और फिस्कल डेफिसिट को भी सोने के लिए लंबी अवधि का पॉजिटिव फैक्टर बताया है। US सरकार का कर्ज 40 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंच चुका है।

वहीं, फिस्कल डेफिसिट GDP के करीब 6-7% पर है। फंड हाउस के मुताबिक, कर्ज की स्थिरता और डॉलर की खरीद क्षमता को लेकर चिंता बढ़ती है तो सोना निवेशकों के लिए वैल्यू स्टोर के तौर पर और आकर्षक हो सकता है।

एक साथ पैसा लगाने के बजाय धीरे-धीरे खरीदारी

लंबी अवधि में सोने पर Tata MF का रुख सकारात्मक है। लेकिन हाल की तेजी और गिरावट को देखते हुए फंड हाउस ने सावधानी बरतने को कहा है। सोने में आगे भी तेज कंसोलिडेशन देखने को मिल सकता है।

इसलिए Tata MF एक साथ पूरी रकम लगाने के बजाय चरणबद्ध निवेश को बेहतर मानता है। यानी बाजार का निचला स्तर पकड़ने की कोशिश करने के बजाय अलग-अलग समय पर थोड़ा-थोड़ा निवेश किया जाए।

Lumpsum SIP Calculator: ₹5 लाख निवेश करने पर 10, 15 और 20 साल में कितना पैसा बनेगा?

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold Investment: क्या अभी सोना खरीदना चाहिए? मोतीलाल ओसवाल ने निवेशकों को दी खास सलाह

Gold Investment: हाल के वर्षों में सोने ने निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है। लेकिन अब निवेश की रणनीति बदलने की जरूरत हो सकती है। ब्रोकरेज फर्म Motilal Oswal Financial Services (MOFSL) का कहना है कि तेजी के दौरान एकमुश्त निवेश करने के बजाय धीरे-धीरे निवेश करना बेहतर रहेगा।

ब्रोकरेज के मुताबिक, अब सोने की कीमतों पर सिर्फ भू-राजनीतिक तनाव का असर नहीं पड़ता। अमेरिकी महंगाई, ब्याज दरें और रियल यील्ड जैसे फैक्टर्स भी बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।

क्या अभी सोना खरीदना चाहिए?

MOFSL का कहना है कि लंबी अवधि के निवेशकों को एक बार में बड़ी रकम लगाने से बचना चाहिए। इसके बजाय अलग-अलग स्तर पर धीरे-धीरे निवेश करना बेहतर रणनीति हो सकती है।

ब्रोकरेज का अनुमान है कि मौजूदा स्तर से सोने में 6% से 8% तक की गिरावट आ सकती है। इसके बाद अगले 12 से 15 महीनों में कीमतों में फिर तेजी देखने को मिल सकती है।

भारतीय निवेशकों के लिए ब्रोकरेज ने ₹1.30 लाख से ₹1.33 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर को खरीदारी के लिए वाजिब माना है। वहीं, मीडियम टर्म में ₹1.68 लाख और उसके बाद ₹1.93 लाख प्रति 10 ग्राम का लक्ष्य दिया है।

ब्याज दरों पर क्यों रखें नजर?

सोना नियमित आय नहीं देता, जैसे फिक्स्ड डिपॉजिट या बॉन्ड देते हैं। इसलिए ब्याज दरों का सोने की कीमतों पर बड़ा असर पड़ता है।

जब रियल यील्ड बढ़ती है, तो निवेशक ब्याज देने वाले निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं। इससे सोने पर दबाव आ सकता है। वहीं, ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद सोने की मांग बढ़ा सकती है।

ब्रोकरेज का कहना है कि आने वाले महीनों में अमेरिकी महंगाई, फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों पर फैसले, ग्लोबल लिक्विडिटी, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और ETF निवेश पर नजर रखनी चाहिए।

चांदी को लेकर क्या राय है?

मोतीलाल ओसवाल का कहना है कि चांदी की चाल सोने से अलग होती है। इसकी वजह यह है कि चांदी का इस्तेमाल निवेश के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक्स, रिन्यूएबल एनर्जी और इलेक्ट्रिक सेक्टर में भी होता है।

इसी कारण चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव ज्यादा हो सकता है। इस पर औद्योगिक मांग, वैश्विक आर्थिक स्थिति, निवेशकों की खरीदारी और ब्याज दरों का असर पड़ता है।

निवेशकों के लिए क्या है सलाह?

ब्रोकरेज का मानना है कि सोना और चांदी लंबी अवधि में पोर्टफोलियो में विविधता लाने का अच्छा विकल्प बने रहेंगे। हालांकि, निवेशकों को छोटी अवधि की तेजी या गिरावट के पीछे भागने के बजाय अनुशासित तरीके से निवेश करना चाहिए। महंगाई, ब्याज दरों और केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर नजर रखना ज्यादा अहम होगा।

क्या UPI पेमेंट पर चार्ज देना होगा? आखिर पेमेंट सिस्टम का बोझ कौन उठाएगा, RBI गवर्नर ने समझाया

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।