Ketan Agarwal Murder Case: पुणे पुलिस को शक! केतन मर्डर केस में आ सकता है ‘सोनम रघुवंशी जैसा मोड़’

Ketan Agarwal Murder Case: मेघालय हनीमून मर्डर केस में सोनम रघुवंशी को जमानत दिलाने वाली कानूनी खामियों से सबक लेते हुए, पुणे ग्रामीण पुलिस अब पुणे के बिजनेसमैन केतन अग्रवाल की लोणावला (लोहगढ़ किले) में हुई हत्या के मामले में एक “पूरी तरह मजबूत और बिना गलती वाली” चार्जशीट तैयार करने में जुटी है। यह जानकारी महाराष्ट्र पुलिस के शीर्ष सूत्रों ने न्यूज18 को दी है।

जांच अधिकारी केतन की मंगेतर और मुख्य आरोपी सिया गोयल का पॉलीग्राफ (झूठ पकड़ने वाला) टेस्ट कराने पर जोर दे रहे हैं। हालांकि, यह टेस्ट कोर्ट में सीधे सबूत के तौर पर मान्य नहीं होता, लेकिन पुलिस का मानना है कि इससे कुछ अहम सुराग मिल सकते हैं, जिन्हें बाद में डिजिटल या फॉरेंसिक सबूतों से जांचकर पक्का किया जा सकता है।

यह सावधानी हाल ही में हुए सोनम रघुवंशी मामले को देखते हुए बरती जा रही है, जिसमें गिरफ्तारी की प्रक्रिया में हुई तकनीकी खामियों के कारण आरोपी को जमानत मिल गई थी और बाद में हाई कोर्ट ने भी उस जमानत को बरकरार रखा था। पुलिस सूत्रों का कहना है कि वे यह सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं कि सिया के खिलाफ उनके मुकदमे को किसी भी तरह की ऐसी तकनीकी चूक से कमजोर न होने दिया जाए।

पुलिस पॉलीग्राफ टेस्ट क्यों करवाना चाहती है?

भारतीय कानून के तहत, पॉलीग्राफ टेस्ट के नतीजे अदालत में मुख्य सबूत के तौर पर स्वीकार्य नहीं होते हैं। हालांकि, जांचकर्ताओं का कहना है कि यह टेस्ट जांच के दौरान नई जानकारियां या सुराग हासिल करने के लिए एक टूल के तौर पर काम आ सकता है।

महाराष्ट्र पुलिस के सूत्रों के अनुसार, अधिकारियों को उम्मीद है कि पूछताछ से ऐसी जानकारी मिल सकती है जो पहले पता नहीं थी। उदाहरण के लिए, अगर सिया अनजाने में यह बता देती है कि उसने लोहागढ़ किले की चट्टान की ऊंचाई के बारे में जानकारी जुटाई थी, या ऐसी किसी डिजिटल गतिविधि का जिक्र करती है जिसके बारे में जांचकर्ताओं को पहले पता नहीं था, तो पुलिस उस डिजिटल सबूत को स्वतंत्र रूप से हासिल कर सकती है।

पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान ब्राउजर हिस्ट्री, लोकेशन डेटा या डिलीट की गई सर्च जैसी जानकारी, अगर सही कानूनी प्रक्रियाओं से हासिल की जाए, तो कोर्ट में सबूत के तौर पर मानी जा सकती है, भले ही पॉलीग्राफ टेस्ट के जवाब खुद सबूत के तौर पर मान्य न हों।

पुलिस के एक सीनियर अधिकारी ने कहा, “मकसद पॉलीग्राफ रिपोर्ट को सबूत के तौर पर इस्तेमाल करना नहीं है। इसका मकसद छिपे हुए तथ्यों का पता लगाना है, जिनकी बाद में कानूनी रूप से मान्य डिजिटल और फोरेंसिक सबूतों से पुष्टि की जा सके।”

प्रत्यक्ष सबूत नहीं, केवल परिस्थिति पर टिका पूरा मामला

जांच करने वाले मानते हैं कि उन्हें सबूत जुटाने में बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसा कोई चश्मदीद गवाह नहीं है जिसने केतन को चट्टान से धक्का देते हुए देखा हो। न ही इस कथित घटना का कोई CCTV फुटेज मौजूद है।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, उपलब्ध CCTV फुटेज में सह-आरोपी और सिया के प्रेमी चेतन चौधरी को हुडी पहने हुए घटना वाली जगह के पास ही देखा गया है, लेकिन इससे हत्या साबित नहीं होती।

पुलिस ने डमी का इस्तेमाल करके कथित अपराध वाली जगह का सीन भी दोबारा बनाया है, लेकिन अधिकारी निजी तौर पर मानते हैं कि ऐसे प्रदर्शनों का सबूत के तौर पर बहुत कम महत्व होता है। एक सूत्र ने कहा, “डमी किस तरह गिरती है, यह उसके वजन के बंटवारे, कोण और गति पर निर्भर करता है। इससे वैज्ञानिक रूप से यह साबित नहीं किया जा सकता कि पीड़ित को जान-बूझकर धक्का दिया गया था या वह गलती से फिसल गया था।”

इन्हीं सब वजह से, जांचकर्ता इस मामले को पूरी तरह से परिस्थितिजन्य सबूतों पर आधारित मानते हैं, जिसमें अपराध साबित करने के लिए हर सबूत का आपस में सही ढंग से जुड़ना जरूरी है ताकि कोई शक न रहे।

अभियोजन पक्ष मकसद और डिजिटल सबूतों पर भरोसा कर रहा है

जांचकर्ताओं के मुताबिक, प्रॉसिक्यूशन की मुख्य थ्योरी यह है कि सिया और चेतन ने केतन को रास्ते से हटाने की साजिश रची थी, क्योंकि सिया कथित तौर पर उससे शादी नहीं करना चाहती थी।

इसलिए, चार्जशीट दाखिल करने से पहले पुलिस डिजिटल, फोरेंसिक और हालात से जुड़े सबूत इकट्ठा करने पर ध्यान दे रही है, जो इस कथित साजिश को पुख्ता कर सकें।

जांचकर्ता डिजिटल सर्च हिस्ट्री, मोबाइल फोन डेटा और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की भी जांच कर रहे हैं, जिनसे साजिश या पहले से योजना बनाने की बात साबित हो सके। सूत्रों का कहना है कि ऐसे डिजिटल सबूत हासिल करना, जिनकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि की जा सके, जांच की सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गई है।

‘एक कमजोर कड़ी पूरे केस को गिरा सकती है’

पुलिस सूत्रों का मानना ​​है कि केस का नतीजा काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि क्या वे घटनाओं की एक अटूट कड़ी बना पाते हैं या नहीं।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “अगर बचाव पक्ष उस कड़ी की एक भी अहम कड़ी को तोड़ने में कामयाब हो जाता है, तो अभियोजन पक्ष का केस काफी कमजोर पड़ सकता है।” उन्होंने ऐसे हाई-प्रोफाइल मामलों का जिक्र किया जिनमें सबूतों की कमी के कारण कोर्ट में मुश्किलें आईं।

यही एक वजह है कि जांच करने वाले अधिकारी फाइनल चार्जशीट दाखिल करने से पहले बहुत सावधानी बरत रहे हैं।

सोनम रघुवंशी का मामला एक सबक क्यों बन गया है?

पुलिस सूत्रों के अनुसार, हाल ही का सोनम रघुवंशी मामला-जिसमें उन पर अपने पति राजा रघुवंशी की हत्या का आरोप है-अब पुलिस के लिए एक चेतावनी बन गया है। यह केस भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत जांच प्रक्रिया के कड़ाई से पालन करने के महत्व को और पुख्ता करता है।

सोनम के मामले में, कोर्ट में प्रक्रिया से जुड़ी कमियां सामने आने के बाद अभियोजन पक्ष को मुश्किलों का सामना करना पड़ा। जमानत के आदेश के मुताबिक, पुलिस आरोपी को हिरासत में लेते समय गिरफ्तारी के असल कारणों के बारे में साफ तौर पर नहीं बता पाई। गिरफ्तारी मेमो और उससे जुड़े दस्तावेजों में BNS की धारा 403(1) का जिक्र किया गया था, जो संपत्ति के बेईमानी से गबन से जुड़ी है, जबकि हत्या के मामले में उसकी जांच धारा 103(1) के तहत हो रही थी।

कोर्ट ने माना कि ऐसी गलतियों की वजह से आरोपी के संवैधानिक अधिकारों पर असर पड़ा, जिससे उसे शुरुआती जांच चरण में अपना बचाव ठीक से करने का मौका नहीं मिला। इसी आधार पर कोर्ट ने उसे जमानत दे दी, जिसे बाद में हाई कोर्ट ने भी बरकरार रखा।

पुलिस सूत्रों का कहना है कि यह मामला इस बात की याद दिलाता है कि मजबूत जनमत या मीडिया की कड़ी नजर भी अदालत में हुई प्रक्रियात्मक गलतियों की भरपाई नहीं कर सकती। महाराष्ट्र पुलिस के एक वरिष्ठ सूत्र ने News18 को बताया, “अदालतें सबूतों और कानूनी वैधता के आधार पर मामले तय करती हैं। यहां तक ​​कि क्लर्क की कोई छोटी सी गलती या तय कानूनी प्रक्रिया का पालन न करना भी बचाव पक्ष के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है।”

चूंकि कोई चश्मदीद गवाह या सीधा वीडियो सबूत नहीं है, इसलिए पुणे ग्रामीण पुलिस अब इस बात पर ध्यान दे रही है कि प्रक्रिया का हर कदम कानूनी रूप से सही हो। साथ ही, वे डिजिटल और फोरेंसिक सबूतों को भी मजबूत कर रहे हैं, जिनके बारे में उनका मानना ​​है कि ये सिया के खिलाफ उनके मामले का मुख्य आधार बनेंगे।

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Ketan Agarwal Murder Case: सिया गोयल का पब में पार्टी करते वीडियो वायरल, शराब पीते देखी गईं

Ketan Agarwal Murder Case: पुणे के रियल एस्टेट कारोबारी और अपने मंगेतर केतन अग्रवाल की कथित हत्या की आरोपी सिया गोयल एक बार फिर चर्चा में आ गई हैं। उनका एक नया वीडियो सामने आया है जिसमें वह एक नाइटक्लब में पार्टी करती और शराब पीती हुई दिख रही हैं। वीडियो में सिया गोयल भीड़-भाड़ वाले पब में फोन पर बात करते हुए और हाथ में एक बोतल जैसी चीज पकड़े हुए नजर आ रही हैं। यह क्लिप सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिससे इस हाई-प्रोफाइल मामले की चल रही जांच पर फिर से लोगों का ध्यान गया है।

वहीं, वीडियो सामने आने के बाद, अग्रवाल परिवार ने आरोप लगाया है कि रिश्ते के आगे बढ़ने से पहले उन्हें जान-बूझकर सिया की जीवनशैली से जुड़ी यह बात और कई अन्य जानकारी नहीं बताई गई थी। उन्होंने एक बार फिर इस मामले की सभी पहलुओं से निष्पक्ष और पूरी जांच करने की मांग दोहराई है।

हालांकि, यह वीडियो कब का है इसकी पुष्टि अभी तक नहीं है, लेकिन यह क्लिप तेजी से वायरल हो रही है, जिससे जांच को लेकर बहस और तेज हो गई है। साथ ही यह मर्डर केस तब से ही देश भर में चर्चा का विषय बना हुआ है, जब से यह मामला सामने आया है।

बता दें कि पुणे के रहने वाले रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल को कथित तौर पर 18 जून को पुणे जिले के लोहागढ़ किले में एक चट्टान से धक्का देकर मार डाला गया था। बताया जाता है कि केतन और उनकी मंगेतर की सगाई हो चुकी थी और इस साल नवंबर में उनकी शादी होने वाली थी।

वहीं, इस मामले में केतन की मंगेतर सिया गोयल (20) और उनके कथित साथी चेतन चौधरी (22) को आरोपी बनाया गया है, और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है।

कथित हत्या के बाद, दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया और जांच जारी रहने तक उन्हें 3 जुलाई तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस कई पहलुओं से मामले की जांच कर रही है, जबकि यह मामला पूरे देश में काफी चर्चा का विषय बना हुआ है।

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Ketan Murder Case: 640 मिनट तक इंटरनेट बंद! केतन अग्रवाल हत्याकांड में आरोपी की ‘ऑफलाइन’ चाल ने खोले कई राज

पुणे के रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्या के मामले में आरोपी चेतन चौधरी का करीब 10 घंटे तक इंटरनेट बंद रखना पुलिस जांच का अहम हिस्सा बन गया है। पुलिस का मानना है कि 18 जून को चेतन ने जानबूझकर लगभग 640 मिनट तक अपना मोबाइल इंटरनेट बंद रखा, ताकि उसकी गतिविधियों का डिजिटल रिकॉर्ड सामने न आए। हालांकि, जांच अधिकारियों का कहना है कि इसी असामान्य हरकत से उन्हें पूरे घटनाक्रम की कड़ी जोड़ने में मदद मिली।

जांच के अनुसार, चेतन ने सुबह करीब 7 बजे अपना मोबाइल इंटरनेट बंद कर दिया था। पुलिस का कहना है कि उसने अपनी लोकेशन और ऑनलाइन गतिविधियों को छिपाने की कोशिश की। रिपोर्ट के मुताबिक, दिन में लोहगढ़ किले की ओर जाते समय उसने बातचीत करने के लिए बीच-बीच में अपने एक कर्मचारी का मोबाइल फोन भी इस्तेमाल किया।

पहचान छिपाने के लिए पहनी मोटी हुडी

पुलिस के अनुसार, आरोपी चेतन चौधरी ने अपनी पहचान छिपाने के लिए भीषण गर्मी के बावजूद मोटी हुडी पहन रखी थी। पुलिस का दावा है कि उस समय तापमान करीब 33 डिग्री सेल्सियस था, फिर भी वह ट्रेकिंग रास्ते पर केतन अग्रवाल और उनकी मंगेतर सिया गोयल का पीछा कर रहा था। जांच अधिकारियों के मुताबिक, दोपहर करीब 2:30 बजे सिया गोयल ने पहले से तय योजना के तहत विंचू काटा रिज के पास एक सुनसान जगह पर बैठकर इशारा किया। पुलिस का आरोप है कि इसके बाद चेतन चौधरी अपनी छिपी हुई जगह से बाहर आया और उसने केतन अग्रवाल को पहाड़ी से नीचे धक्का दे दिया, जिससे उनकी मौत हो गई।

चेतन की ‘ऑफलाइन’ चाल नहीं आई काम

पुलिस जांच के मुताबिक, कई घंटे तक इंटरनेट बंद रखने के बाद आरोपी चेतन चौधरी ने शाम करीब 5:40 बजे दोबारा अपना मोबाइल इंटरनेट चालू किया। जांच अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल जांच के दौरान इंटरनेट कनेक्टिविटी में आया यह अचानक बदलाव उनके लिए एक अहम सुराग बना। इससे पूरे घटनाक्रम की समय-सीमा समझने में काफी मदद मिली।

मामले की जांच के तहत रविवार को पुलिस ने मुख्य आरोपी सिया गोयल की मौजूदगी में लोहगढ़ किले पर घटनास्थल का दोबारा निरीक्षण किया और पूरी घटना को दोहराकर देखा। पुणे ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक संदीप सिंह गिल ने बताया कि पुलिस ने आरोपियों के आने-जाने का रास्ता, घटनास्थल पर उनकी स्थिति, कथित तौर पर की गई हरकतों और पूरी घटना के क्रम को फिर से तैयार कर उसकी जांच की।