CJP नेता आशुतोष रांका और सौरव दास की बढ़ीं मुश्किलें, कोर्ट ने दो दिन बढ़ाई न्यायिक हिरासत

दिल्ली की एक अदालत ने सोमवार को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत 21 अक्टूबर तक बढ़ा दी है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 21 अक्टूबर को होगी। फिलहाल दोनों नेता फिलहाल तिहाड़ जेल में बंद हैं। इससे पहले 14 अक्टूबर को उन्हें स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) में पेश किया गया था। कोर्ट ने उन्हें पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। दोनों पर शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉन्ड की शर्तें तोड़ने और जंतर-मंतर में बिना अनुमति प्रवेश करने का आरोप है। जंतर-मंतर को पहले ही विरोध प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित सूची से हटा दिया गया था।

दो दिन तक बढ़ी न्यायिक हिरासत

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की कानूनी टीम ने जमानत से जुड़े दस्तावेज जमा करने के बाद आशुतोष रांका और सौरव दास को रिहा करने की मांग की। इससे पहले, जमानतदार नहीं मिलने के कारण दोनों नेताओं को जेल भेज दिया गया था। सोमवार को पुलिस ने उनकी हिरासत बढ़ाने की मांग की, जिसके बाद मजिस्ट्रेट ने दोनों को दो दिन और जेल में रखने का आदेश दिया।

13 अक्टूबर को लिया था हिरासत में

सौरव दास और आशुतोष रांका को मंगलवार सुबह 13 अक्टूबर 2026 को हिरासत में लिया गया था। आरोप है कि दोनों ने बैरिकेड तोड़कर बिना अनुमति जंतर-मंतर में प्रवेश किया। इस दौरान उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए नारेबाजी भी की। सूत्रों के मुताबिक, पुलिस ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ताओं के खिलाफ मामला दर्ज किया। उन पर बिना अनुमति किसी जगह में घुसने, प्रतिबंधों का उल्लंघन करने, शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉन्ड की शर्तें तोड़ने और एक सरकारी कर्मचारी को उसकी ड्यूटी करने से रोकने के आरोप लगाए गए हैं।

साइन किया था बॉन्ड

सूत्रों के अनुसार, शनिवार को प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए जाने के बाद सौरव दास और आशुतोष रांका ने एक साल तक शांति बनाए रखने का बॉन्ड भरा था। ये मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और अन्य संगठन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। इन संगठनों ने मतदाता सूची में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान कथित गड़बड़ियों का आरोप लगाया है। विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है।

‘लंदन की लाखों की कमाई और आरामदायक जिंदगी छोड़ देश के लिए लड़े आशुतोष और सौरभ…’ , CJP नेता अभिजीत दिपके ने लिखी इमोशनल पोस्ट

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फांउडर अभिजीत दिपके ने पार्टी के सदस्य आशुतोष रांका और सौरव दास के समर्थन में एक इमोशनल नोट लिखा है। आशुतोष रांका और सौरव दास सोमवार को लगातार छठे दिन न्यायिक हिरासत में रहे। सोशल मीडिया पर किए गए पोस्ट में अभिजीत दिपके ने बताया कि दोनों ही लंदन में लाखों की कमाई कर रहे थे। अभिजीत ने उनकी पुरानी जिंदगी, देश के लिए कुछ बेहतर करने के फैसले और दूसरों के हक में आवाज उठाने के जज्बे को याद किया। उन्होंने बताया कि कैसे दोनों ने अपनी आरामदायक जिंदगी छोड़कर उन लोगों के लिए लड़ने का रास्ता चुना, जिन्हें मदद की जरूरत है।

दिपके ने किया इमोशनल पोस्ट

X पर किए गए पोस्ट में अभिजीत दिपके ने लिखा, “कुछ साल पहले आशुतोष रांका लंदन में अच्छी सैलरी वाली कॉर्पोरेट नौकरी करते थे, जहां से उन्हें लाखों रुपये मिलते थे। वहीं, सौरव दास देश की कानूनी व्यवस्था पर लिख रहे थे और अपनी जिंदगी अच्छे से जी रहे थे। दोनों के पास सफल करियर, फाइनेंशियल सिक्योरिटी और अपनी बनाई हुई जिंदगी को आगे बढ़ाने के कई मौके थे।”

उन्होंने आगे लिखा, “लेकिन दोनों ने देश को बेहतर बनाने की उम्मीद में अपनी पुरानी जिंदगी छोड़ने का फैसला किया। उनके पास आरामदायक जीवन छोड़कर सड़कों पर उतरने, मुश्किलों का सामना करने और जेल जाने की कोई मजबूरी नहीं थी। इसके बावजूद, उन्होंने यह रास्ता चुना और देश के लिए कुछ बेहतर करने की कोशिश में जुट गए।”

बिता सकते थे आराम की जिंदगी

दिपके ने आगे लिखा, “इन दोनों की सबसे खास बात यह है कि अच्छी बैकग्राउंड से आने के बावजूद उन्होंने उन लोगों के हक में आवाज उठाने का फैसला किया, जिनके पास उनके जैसे मौके और सुविधाएं नहीं थीं। वे चाहते तो दूसरों की परेशानियों से दूर रहकर अपनी जिंदगी आराम से बिता सकते थे। वे उन लोगों की समस्याओं को भी नजरअंदाज कर सकते थे, जिन्हें वे जानते तक नहीं थे।”

यहीं है उनकी सबसे बड़ी खूबी

दिपके ने आगे लिखा, “उनसे किसी ने अपनी सुख-सुविधाएं छोड़ने या इतना बड़ा त्याग करने के लिए नहीं कहा था। इसके बावजूद उन्होंने ऐसा किया, क्योंकि वे सिर्फ अपनी नहीं, बल्कि दूसरों की जिंदगी की भी परवाह करते थे। मेरे हिसाब से, किसी इंसान की सबसे बड़ी खूबी यही होती है कि वह अनजान लोगों के लिए भी आवाज उठाए, ऐसी लड़ाइयां लड़े जिनका सीधा संबंध उससे न हो और दूसरों की जिंदगी बेहतर बनाने के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगाने को तैयार रहे। आशु और सौरव भी ऐसे ही इंसान हैं।” बता दें इससे पहले भी अभिजीत दिपके ने आशुतोष रांका और सौरव दास के लिए इमोशनल पोस्ट डाला था।

Ketan Murder Case: केतन अग्रवाल मर्डर केस में अब क्या होगा? पंचशील टेस्ट से जमानत तक, जानिए आगे की पूरी कहानी

पूरे देश को हिला देने वाले पुणे के केतन अग्रवाल मर्डर केस की आरोपी सिया गोयल और उसके बॉयफ्रेंड चेतन चौधरी को 16 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। दोनों की 11 दिन की पुलिस रिमांड पूरी होने के बाद अब जांच एजेंसियां उनसे पूछताछ की बजाय मामले से जुड़े सबूतों की जांच और उन्हें मजबूत करने पर ध्यान दे रही हैं।

अब आगे क्या होगा?

इस मामले में अब जांच का सबसे बड़ा फोकस डिजिटल सबूतों पर है। जांच एजेंसियां सिया गोयल के मोबाइल से मिले डेटा और कोड में लिखे गए मैसेज को समझने की कोशिश कर रही हैं। पुणे ग्रामीण पुलिस को हाल ही में स्नैपचैट की एक चैट मिली है। इसमें सिया ने कथित तौर पर अपनी एक दोस्त से आधार कार्ड की जानकारी मांगी थी ताकि टिकट बुक किया जा सके। चैट में उसने यह भी लिखा था कि यह “ऐसी शादी के लिए है जो कभी नहीं होगी।” अब जांचकर्ता दूसरे संदिग्ध कोड वाले मैसेज भी खंगाल रहे हैं। उनका पता लगाना है कि क्या इस कथित साजिश में सिया और चेतन के अलावा कोई तीसरा व्यक्ति भी शामिल था।

इन सबूतों पर टिकी जांच

इस मामले में लोहगढ़ किले से कथित तौर पर धक्का देने की घटना का कोई चश्मदीद गवाह नहीं है। इसलिए पुलिस पूरे मामले को परिस्थितिजन्य सबूतों के आधार पर मजबूत बनाने में जुटी है। कानूनी प्रक्रिया के तहत अभियोजन पक्ष को ऐसे सबूत पेश करने होंगे, जिनसे घटनाओं की पूरी कड़ी साफ तौर पर जुड़ जाए और यह साबित हो सके कि आरोपियों की भूमिका ही अपराध की ओर इशारा करती है।

जांच में पुलिस कई अहम सबूतों को जोड़कर मामला मजबूत करने की कोशिश कर रही है। इसमें घटनास्थल का पंचनामा, घटना का री-क्रिएशन (दोबारा घटनाक्रम तैयार करना) और वह जगह भी शामिल है, जहां आरोपियों ने कथित तौर पर केतन को धक्का देने की प्रैक्टिस की थी। इसके अलावा, घटना के समय पहने गए बताए जा रहे कपड़ों और केतन के जले हुए पासपोर्ट की फोरेंसिक जांच भी की जा रही है।

क्या है पंचशील टेस्ट?

पंचशील टेस्ट सुप्रीम कोर्ट का एक अहम कानूनी सिद्धांत है। इसका इस्तेमाल तब किया जाता है, जब किसी मामले में सीधे गवाह नहीं होते और फैसला परिस्थितिजन्य सबूतों के आधार पर करना होता है। साल 1984 में ‘शरद बिरधीचंद सारडा बनाम महाराष्ट्र राज्य’ मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इसके पांच मुख्य सिद्धांत बताए थे।इन पांच सिद्धांतों में यह जरूरी है कि सभी तथ्य पूरी तरह साबित हों, सबूत अपराध से साफ तौर पर जुड़े हों, उनकी विश्वसनीयता मजबूत हो, किसी दूसरी संभावना की गुंजाइश न बचे और सभी सबूत मिलकर ऐसी अटूट कड़ी बनाएं जो सीधे आरोपी की ओर इशारा करे।

शुरुआत में पुलिस दोनों आरोपियों के अलग-अलग बयानों की सच्चाई जानने के लिए उनका पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट कराना चाहती थी। लेकिन कोर्ट में पेशी के दौरान सिया गोयल और चेतन चौधरी, दोनों ने इन टेस्ट के लिए अपनी मंजूरी देने से इनकार कर दिया। भारतीय कानून के अनुसार, किसी आरोपी की सहमति के बिना पॉलीग्राफ या नार्को टेस्ट नहीं किया जा सकता। इसलिए पुलिस को इन टेस्ट की मांग वापस लेनी पड़ी और अब जांच दूसरे सबूतों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है।

कोर्ट में अब जमानत की लड़ाई शुरू

सिया गोयल और चेतन चौधरी अब पुलिस हिरासत की जगह न्यायिक हिरासत में हैं। ऐसे में दोनों की ओर से जमानत के लिए कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उनके वकीलों का कहना है कि पुलिस जरूरी डिजिटल डिवाइस पहले ही जब्त कर चुकी है, इसलिए अब उन्हें लंबे समय तक जेल में रखने की जरूरत नहीं है। वहीं, सिया गोयल की ओर से अदालत में कौन वकील पेश होगा, इसे लेकर भी नया कानूनी विवाद सामने आया है। इस मामले में एक चर्चित वकील का नाम सामने आया है और 10 करोड़ रुपये के मानहानि नोटिस की भी चर्चा हो रही है।