‘लंदन की लाखों की कमाई और आरामदायक जिंदगी छोड़ देश के लिए लड़े आशुतोष और सौरभ…’ , CJP नेता अभिजीत दिपके ने लिखी इमोशनल पोस्ट

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फांउडर अभिजीत दिपके ने पार्टी के सदस्य आशुतोष रांका और सौरव दास के समर्थन में एक इमोशनल नोट लिखा है। आशुतोष रांका और सौरव दास सोमवार को लगातार छठे दिन न्यायिक हिरासत में रहे। सोशल मीडिया पर किए गए पोस्ट में अभिजीत दिपके ने बताया कि दोनों ही लंदन में लाखों की कमाई कर रहे थे। अभिजीत ने उनकी पुरानी जिंदगी, देश के लिए कुछ बेहतर करने के फैसले और दूसरों के हक में आवाज उठाने के जज्बे को याद किया। उन्होंने बताया कि कैसे दोनों ने अपनी आरामदायक जिंदगी छोड़कर उन लोगों के लिए लड़ने का रास्ता चुना, जिन्हें मदद की जरूरत है।

दिपके ने किया इमोशनल पोस्ट

X पर किए गए पोस्ट में अभिजीत दिपके ने लिखा, “कुछ साल पहले आशुतोष रांका लंदन में अच्छी सैलरी वाली कॉर्पोरेट नौकरी करते थे, जहां से उन्हें लाखों रुपये मिलते थे। वहीं, सौरव दास देश की कानूनी व्यवस्था पर लिख रहे थे और अपनी जिंदगी अच्छे से जी रहे थे। दोनों के पास सफल करियर, फाइनेंशियल सिक्योरिटी और अपनी बनाई हुई जिंदगी को आगे बढ़ाने के कई मौके थे।”

उन्होंने आगे लिखा, “लेकिन दोनों ने देश को बेहतर बनाने की उम्मीद में अपनी पुरानी जिंदगी छोड़ने का फैसला किया। उनके पास आरामदायक जीवन छोड़कर सड़कों पर उतरने, मुश्किलों का सामना करने और जेल जाने की कोई मजबूरी नहीं थी। इसके बावजूद, उन्होंने यह रास्ता चुना और देश के लिए कुछ बेहतर करने की कोशिश में जुट गए।”

बिता सकते थे आराम की जिंदगी

दिपके ने आगे लिखा, “इन दोनों की सबसे खास बात यह है कि अच्छी बैकग्राउंड से आने के बावजूद उन्होंने उन लोगों के हक में आवाज उठाने का फैसला किया, जिनके पास उनके जैसे मौके और सुविधाएं नहीं थीं। वे चाहते तो दूसरों की परेशानियों से दूर रहकर अपनी जिंदगी आराम से बिता सकते थे। वे उन लोगों की समस्याओं को भी नजरअंदाज कर सकते थे, जिन्हें वे जानते तक नहीं थे।”

यहीं है उनकी सबसे बड़ी खूबी

दिपके ने आगे लिखा, “उनसे किसी ने अपनी सुख-सुविधाएं छोड़ने या इतना बड़ा त्याग करने के लिए नहीं कहा था। इसके बावजूद उन्होंने ऐसा किया, क्योंकि वे सिर्फ अपनी नहीं, बल्कि दूसरों की जिंदगी की भी परवाह करते थे। मेरे हिसाब से, किसी इंसान की सबसे बड़ी खूबी यही होती है कि वह अनजान लोगों के लिए भी आवाज उठाए, ऐसी लड़ाइयां लड़े जिनका सीधा संबंध उससे न हो और दूसरों की जिंदगी बेहतर बनाने के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगाने को तैयार रहे। आशु और सौरव भी ऐसे ही इंसान हैं।” बता दें इससे पहले भी अभिजीत दिपके ने आशुतोष रांका और सौरव दास के लिए इमोशनल पोस्ट डाला था।

25 लाख सालाना कमाने वाला शख्स अब बेच रहा ऑनलाइन प्रोडक्ट, कमल टोलानी ने बताया बिजनेस का पहला महीने का हिसाब

₹25 लाख सालाना की नौकरी, तय सैलरी और कॉरपोरेट की सुरक्षित जिंदगी को छोड़कर अपना बिजनेस शुरू करना हर किसी के बस की बात नहीं होती। लेकिन कमल टोलानी ने नौकरी की सुरक्षा के बजाय अपने दम पर कुछ बनाने का रास्ता चुना। उन्होंने करीब एक महीने पहले अपनी कॉरपोरेट नौकरी छोड़कर ई-कॉमर्स बिजनेस की शुरुआत की। अब अपने नए सफर का पहला महीना पूरा होने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर कमाई के आंकड़े शेयर किए हैं। कमल ने बताया कि Amazon, Meesho और Flipkart जैसे बड़े ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उनके बिजनेस का प्रदर्शन कैसा रहा।

दिलचस्प बात यह है कि पहले महीने में उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा Amazon से आया, जबकि Flipkart पर उन्हें कोई कमाई नहीं हुई। उनकी कहानी इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि एक तरफ उन्होंने लाखों के पैकेज वाली नौकरी छोड़ी, वहीं दूसरी ओर अब बिजनेस की अनिश्चित दुनिया में अपने फैसले को आजमा रहे हैं।

नौकरी की फिक्स सैलरी से सीधे बिजनेस की अनिश्चितता तक

कमल ने Instagram पर बताया कि नौकरी छोड़ने के बाद उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई है। पहले हर महीने एक तय सैलरी मिलती थी और कॉरपोरेट जॉब की अपनी सुरक्षा थी। अब उनका पूरा ध्यान प्रोडक्ट, ऑर्डर, विज्ञापन, रिटर्न और ग्राहकों से जुड़ी दूसरी जिम्मेदारियों पर है। उन्होंने माना कि नए सफर में उनसे गलतियां भी हुईं, लेकिन इसी दौरान उन्हें काफी कुछ सीखने को भी मिला।

Amazon, Meesho और Flipkart पर आजमाई किस्मत

कमल ने अपने वीडियो में बताया कि ई-कॉमर्स के पहले 30 दिनों में उन्होंने Amazon, Meesho और Flipkart पर बिक्री की कोशिश की। उन्होंने यह भी बताया कि किस प्लेटफॉर्म से उन्हें कितनी कमाई हुई। उनके मुताबिक, पिछले 30 दिनों में Meesho से ₹3,200 की कमाई हुई, जबकि Flipkart से कोई कमाई नहीं हुई। दूसरी ओर, Amazon से उन्हें ₹45,382 की बिक्री हासिल हुई।इस तरह उनके साझा किए आंकड़ों के अनुसार, तीनों प्लेटफॉर्म से कुल कमाई ₹48,582 रही।

₹25 लाख की नौकरी के मुकाबले पहला महीना कैसा रहा?

कमल की पोस्ट सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने इसी सवाल को लेकर चर्चा शुरू कर दी। कुछ लोगों ने उनके नए सफर की तारीफ की और उन्हें आगे के लिए शुभकामनाएं दीं। वहीं, कुछ यूजर्स का कहना था कि ₹25 लाख सालाना नौकरी छोड़ना सही फैसला नहीं था और बिजनेस को उस स्तर की कमाई तक पहुंचने में काफी समय लग सकता है।

आखिर क्यों छोड़ दी इतनी अच्छी नौकरी?

कमल ने इससे पहले अपनी एक पोस्ट में इस फैसले की वजह बताई थी। उनके अनुसार, अच्छी सैलरी और नौकरी की सुरक्षा के बावजूद उनके मन में अपना कुछ शुरू करने का विचार लगातार चल रहा था। उन्होंने माना कि उन्हें खुद नहीं पता कि यह फैसला आगे कहां लेकर जाएगा। बिजनेस सफल होगा या नहीं, यह भी तय नहीं है। लेकिन वह इस सफर में मिलने वाली अनिश्चितता, असफलताओं, छोटी सफलताओं और रोजमर्रा के अनुभवों को लोगों के साथ साझा करना चाहते हैं।

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12 साल की कॉरपोरेट नौकरी और फिर बड़ा फैसला, गुरजोत ने बताया क्यों छोड़ दी लाखों की सैलरी वाली जॉब

कॉरपोरेट नौकरी में 12 साल बिताने के बाद गुरजोत अहलूवालिया ने एक बड़ा फैसला लिया है। Accenture Strategy & Consulting में सीनियर मैनेजर के पद पर काम कर चुके गुरजोत ने अब अपनी नौकरी छोड़ दी है। खास बात यह है कि उन्होंने यह कदम किसी मजबूरी में नहीं, बल्कि अपनी पसंद के काम को पूरा समय देने के लिए उठाया है। लंबे समय से शेयर बाजार में दिलचस्पी रखने वाले गुरजोत ने आर्थिक स्वतंत्रता हासिल करने के बाद कॉरपोरेट करियर से बाहर निकलने का फैसला किया। उनका मानना है कि आर्थिक आजादी ने उन्हें यह तय करने की स्वतंत्रता दी कि वह आगे अपना समय और करियर किस तरह बिताना चाहते हैं।

अब वह शेयर बाजार में अपनी रुचि को पूर्णकालिक तौर पर आगे बढ़ाएंगे। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि नियमित वेतन और अच्छे बोनस की निश्चितता उन्हें जरूर याद आएगी। गुरजोत के इस फैसले ने सोशल मीडिया पर आर्थिक आजादी, नौकरी और अपने जुनून को करियर बनाने को लेकर चर्चा छेड़ दी है।

40 की उम्र से पहले हासिल की Financial Independence

गुरजोत ने सोशल मीडिया पर अपनी नौकरी छोड़ने की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि Accenture में काम करते हुए उन्होंने अपने सबसे बड़े लक्ष्यों में से एक Financial Independence हासिल की।

उनके लिए आर्थिक आजादी का मतलब सिर्फ पैसा जमा करना नहीं था, बल्कि अपनी जिंदगी और समय से जुड़े फैसले खुद लेने की आजादी भी थी। इसी वजह से उन्होंने 40 साल की उम्र से पहले कॉरपोरेट की ‘रेस’ से बाहर निकलने का फैसला किया।

सैलरी और बोनस जरूर याद आएंगे

नौकरी छोड़ते समय गुरजोत ने यह भी माना कि उन्हें नियमित सैलरी और अच्छे बोनस की कमी जरूर महसूस होगी। हालांकि, इसके बदले उन्हें अपने पसंदीदा काम को पूरा समय देने की आजादी मिल गई है। अब उनका फोकस शेयर बाजार में अपनी रुचि को आगे बढ़ाने पर रहेगा।

लंबा सफर, लंबी कम्यूट से मिली राहत

गुरजोत ने अपनी पोस्ट में कॉरपोरेट नौकरी की कुछ परेशानियों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि रोजाना का लंबा काम, करीब 3 घंटे का कम्यूट, अचानक किसी ईमेल से पूरा हफ्ता तनावपूर्ण हो जाना और Performance Appraisal की चिंता जैसी चीजों से अब उन्हें राहत मिलेगी।

उन्होंने Accenture को अपने करियर और आर्थिक लक्ष्य हासिल करने में अहम भूमिका देने के लिए धन्यवाद भी कहा।

सोशल मीडिया पर लोगों ने दी बधाई

गुरजोत के इस फैसले पर सोशल मीडिया यूजर्स ने उन्हें नई शुरुआत के लिए शुभकामनाएं दीं। कई लोगों ने Financial Independence हासिल करने को बड़ी उपलब्धि बताया।

एक यूजर ने कहा कि आर्थिक आजादी सिर्फ पर्याप्त पैसा होने का नाम नहीं है, बल्कि यह तय करने की आजादी भी है कि जिंदगी में आगे क्या करना है।

अब शेयर बाजार में आजमाएंगे अपना जुनून

गुरजोत की कहानी ने सोशल मीडिया पर एक अहम सवाल भी खड़ा किया है क्या Financial Independence के बाद नौकरी छोड़कर अपने पसंदीदा काम को करियर बनाया जा सकता है?गुरजोत ने अपने मामले में इसका जवाब ‘हां’ में दिया है। हालांकि, उनकी पोस्ट के बाद लोगों की दिलचस्पी इस बात में भी बढ़ गई कि आखिर उन्होंने नौकरी छोड़ने से पहले कितनी संपत्ति जमा की और उनका FIRE नंबर कितना रहा। एक यूजर ने उनसे इसी को लेकर सवाल भी पूछा।

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12 साल की कॉरपोरेट नौकरी और फिर बड़ा फैसला, गुरजोत ने बताया क्यों छोड़ दी लाखों की सैलरी वाली जॉब

कॉरपोरेट नौकरी में 12 साल बिताने के बाद गुरजोत अहलूवालिया ने एक बड़ा फैसला लिया है। Accenture Strategy & Consulting में सीनियर मैनेजर के पद पर काम कर चुके गुरजोत ने अब अपनी नौकरी छोड़ दी है। खास बात यह है कि उन्होंने यह कदम किसी मजबूरी में नहीं, बल्कि अपनी पसंद के काम को पूरा समय देने के लिए उठाया है। लंबे समय से शेयर बाजार में दिलचस्पी रखने वाले गुरजोत ने आर्थिक स्वतंत्रता हासिल करने के बाद कॉरपोरेट करियर से बाहर निकलने का फैसला किया। उनका मानना है कि आर्थिक आजादी ने उन्हें यह तय करने की स्वतंत्रता दी कि वह आगे अपना समय और करियर किस तरह बिताना चाहते हैं।

अब वह शेयर बाजार में अपनी रुचि को पूर्णकालिक तौर पर आगे बढ़ाएंगे। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि नियमित वेतन और अच्छे बोनस की निश्चितता उन्हें जरूर याद आएगी। गुरजोत के इस फैसले ने सोशल मीडिया पर आर्थिक आजादी, नौकरी और अपने जुनून को करियर बनाने को लेकर चर्चा छेड़ दी है।

40 की उम्र से पहले हासिल की Financial Independence

गुरजोत ने सोशल मीडिया पर अपनी नौकरी छोड़ने की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि Accenture में काम करते हुए उन्होंने अपने सबसे बड़े लक्ष्यों में से एक Financial Independence हासिल की।

उनके लिए आर्थिक आजादी का मतलब सिर्फ पैसा जमा करना नहीं था, बल्कि अपनी जिंदगी और समय से जुड़े फैसले खुद लेने की आजादी भी थी। इसी वजह से उन्होंने 40 साल की उम्र से पहले कॉरपोरेट की ‘रेस’ से बाहर निकलने का फैसला किया।

सैलरी और बोनस जरूर याद आएंगे

नौकरी छोड़ते समय गुरजोत ने यह भी माना कि उन्हें नियमित सैलरी और अच्छे बोनस की कमी जरूर महसूस होगी। हालांकि, इसके बदले उन्हें अपने पसंदीदा काम को पूरा समय देने की आजादी मिल गई है। अब उनका फोकस शेयर बाजार में अपनी रुचि को आगे बढ़ाने पर रहेगा।

लंबा सफर, लंबी कम्यूट से मिली राहत

गुरजोत ने अपनी पोस्ट में कॉरपोरेट नौकरी की कुछ परेशानियों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि रोजाना का लंबा काम, करीब 3 घंटे का कम्यूट, अचानक किसी ईमेल से पूरा हफ्ता तनावपूर्ण हो जाना और Performance Appraisal की चिंता जैसी चीजों से अब उन्हें राहत मिलेगी।

उन्होंने Accenture को अपने करियर और आर्थिक लक्ष्य हासिल करने में अहम भूमिका देने के लिए धन्यवाद भी कहा।

सोशल मीडिया पर लोगों ने दी बधाई

गुरजोत के इस फैसले पर सोशल मीडिया यूजर्स ने उन्हें नई शुरुआत के लिए शुभकामनाएं दीं। कई लोगों ने Financial Independence हासिल करने को बड़ी उपलब्धि बताया।

एक यूजर ने कहा कि आर्थिक आजादी सिर्फ पर्याप्त पैसा होने का नाम नहीं है, बल्कि यह तय करने की आजादी भी है कि जिंदगी में आगे क्या करना है।

अब शेयर बाजार में आजमाएंगे अपना जुनून

गुरजोत की कहानी ने सोशल मीडिया पर एक अहम सवाल भी खड़ा किया है क्या Financial Independence के बाद नौकरी छोड़कर अपने पसंदीदा काम को करियर बनाया जा सकता है?गुरजोत ने अपने मामले में इसका जवाब ‘हां’ में दिया है। हालांकि, उनकी पोस्ट के बाद लोगों की दिलचस्पी इस बात में भी बढ़ गई कि आखिर उन्होंने नौकरी छोड़ने से पहले कितनी संपत्ति जमा की और उनका FIRE नंबर कितना रहा। एक यूजर ने उनसे इसी को लेकर सवाल भी पूछा।

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मुंबई में शख्स ने लाखों की सैलरी छोड़ किया 1.5 करोड़ का इन्वेस्टमेंट’, रेस्टोरेंट और निवेश से हो रही 4 लाख की कमाई

एक व्यक्ति, जिसने ऐसा रास्ता चुना जिसे कई लोग जोखिम भरा मानते थे, अब आर्थिक आजादी और काम और निजी जिंदगी के बीच बेहतर संतुलन का आनंद ले रहा है। सोशल मीडिया पर अंकित पांडे द्वारा साझा की गई उनकी कहानी ने ऑनलाइन कई लोगों को प्रेरित किया है।

पोस्ट के अनुसार, उस व्यक्ति ने मुंबई में अपनी 1.5 लाख रुपये प्रति महीने की नौकरी छोड़ दी, जबकि लोगों ने उससे कहा कि वह बहुत बड़ी गलती कर रहा है। उसने अपना फ्लैट लगभग 3 करोड़ रुपये में बेच दिया और कोई दूसरा महंगा अपार्टमेंट खरीदने के बजाय अपने होमटाउन वापस चला गया।

उसने लगभग 20 लाख रुपये में जमीन खरीदी, 50 लाख रुपये में घर बनवाया और दो रेस्टोरेंट खोलने के लिए लगभग 50 लाख रुपये का निवेश किया। आज, दोनों रेस्टोरेंट जोमैटो और स्विगी पर लिस्टेड हैं और कर्मचारी उन्हें मैनेज करते हैं। बताया जाता है कि इन बिजनेस से उसे इतना मुनाफा होता है कि वह हर महीने लगभग 3 लाख रुपये बचा लेता है।

उसने फिक्स्ड डिपॉजिट में भी 1.5 करोड़ रुपये का निवेश किया, जिससे उसे ब्याज के तौर पर हर महीने लगभग 1 लाख रुपये मिलते हैं। कुल मिलाकर, उसकी मासिक आय लगभग 4 लाख रुपये बताई जाती है। यह पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है।

एक यूजर ने लिखा, “बिना किसी विरासत, बिना किसी असली सोशल सर्कल और शहर से बिना किसी सच्चे लगाव के, मेट्रो शहर में सिर्फ एक औसत सैलरी पर गुज़ारा करना, एक दुखद जीवन जैसा लगता है।”एक दूसरे व्यक्ति ने कहा, “भले ही यह सच्ची कहानी हो, लेकिन जब वह होमटाउन गया तो उसके पास 3 करोड़ रुपये की पूंजी और पहले की बचत थी, जिससे बिजनेस और नई ज़िंदगी शुरू की जा सकती थी। हर किसी के पास, जो मेट्रो से होमटाउन जाता है, ऐसी सुविधा नहीं होती। अच्छी कहानी है, लेकिन ज़्यादातर लोगों के लिए आदर्श या उनसे जुड़ी हुई नहीं है।”

एक तीसरे व्यक्ति ने कहा, “यह इतना आसान नहीं है! रेस्टोरेंट का बिजनेस ही जोखिम भरा होता है! इतने सारे लाइसेंस और रिश्वत, लेबर की समस्याएं, सफाई के सर्टिफिकेट वगैरह, जिन्हें कॉम्पिटिटर निशाना बना सकते हैं! मैं रोज़ रेस्टोरेंट बंद होते देखता हूं!”

कॉर्पोरेट नौकरी से बिजनेस तक का सफर, 1.8 लाख रुपये महीना कमाने वाले प्रोफेशनल ने बताए सफलता के राज

नौकरी की सुरक्षा छोड़कर अपना बिजनेस शुरू करना हर किसी के बस की बात नहीं होती। अच्छी सैलरी, तय समय पर मिलने वाली आय और स्थिर करियर के बावजूद कई लोग अपने सपनों को सिर्फ इसलिए पीछे छोड़ देते हैं क्योंकि उन्हें असफल होने का डर रहता है। हालांकि कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो जोखिम उठाने का साहस करते हैं और अपनी मेहनत के दम पर नई पहचान बना लेते हैं। ऐसे लोगों के लिए सफलता का मतलब केवल बैंक बैलेंस बढ़ाना नहीं, बल्कि अपनी शर्तों पर जिंदगी जीना भी होता है। हाल ही में सोशल मीडिया पर एक ऐसी ही कहानी चर्चा में है, जिसने हजारों लोगों का ध्यान खींचा है।

एक मार्केटिंग प्रोफेशनल ने अपनी प्रोफेशनल जर्नी साझा करते हुए बताया कि कैसे उसने कॉर्पोरेट नौकरी छोड़कर नया रास्ता चुना। उसने अपनी सफलता को पैसों से ज्यादा आजादी, संतुलित जीवन और परिवार के साथ बिताए जाने वाले समय से जोड़ा। उसकी कहानी के साथ साझा किए गए अनुभव और सलाह अब इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहे हैं।

Reddit पर शेयर की अपनी कहानी

33 वर्षीय मार्केटिंग प्रोफेशनल ने Reddit के r/Indian_flex पर अपनी सफलता की कहानी साझा की। उसने बताया कि करीब दो साल पहले उसने अपनी फुल-टाइम कॉर्पोरेट नौकरी छोड़कर खुद का मार्केटिंग सर्विस बिजनेस शुरू किया। शुरुआत आसान नहीं थी, लेकिन आज उसकी मेहनत रंग ला रही है।

कभी 16 घंटे करता था नौकरी

यूजर ने बताया कि एक समय ऐसा था जब वह रोज 14 से 16 घंटे तक नौकरी करता था। उस दौर को याद करते हुए उसने लिखा कि अब वह जिंदगी किसी दूसरे दौर जैसी लगती है। आज वह वही काम करता है जो उसे पसंद है और परिवार के साथ ज्यादा समय भी बिता पाता है।

शुरुआत में आईं कई चुनौतियां

नौकरी छोड़ने के बाद शुरुआती महीनों में सबसे बड़ी चुनौती क्लाइंट्स ढूंढना, काम की बेहतर प्रक्रिया बनाना और ऐसा सिस्टम तैयार करना था जिससे बिजनेस लंबे समय तक चल सके। धीरे-धीरे उसकी मेहनत रंग लाई और क्लाइंट्स बढ़ने लगे।

अब कई क्लाइंट्स के साथ कर रहा काम

मार्केटिंग प्रोफेशनल ने बताया कि पिछले साल से वह दो बड़े क्लाइंट्स के साथ काम कर रहा है और हाल ही में एक नया क्लाइंट भी जुड़ा है। अब साल खत्म होने से पहले वह कुछ और बड़े प्रोजेक्ट्स हासिल करने की तैयारी में है।

9 से 5 की नौकरी से मिली आजादी

उसने बताया कि आज भी काम में मेहनत करनी पड़ती है, क्लाइंट मीटिंग्स और ट्रैवल भी होता है, लेकिन अब किसी तय ऑफिस टाइम में बंधकर काम नहीं करना पड़ता। अगर दिन में सब्जियां खरीदनी हों या बेटी को बीच घुमाने ले जाना हो, तो वह बिना किसी परेशानी के ऐसा कर सकता है। इन दिनों वह अपने गांव से बारिश का आनंद लेते हुए रिमोटली काम कर रहा है।

बिजनेस शुरू करने वालों के लिए बताए 3 जरूरी सबक

  1. बिना तैयारी नौकरी छोड़ने की गलती न करें

उसने सलाह दी कि जब तक अच्छी बचत, बैकअप प्लान या आर्थिक सहारा न हो, तब तक नौकरी छोड़ने का फैसला नहीं करना चाहिए। बिजनेस में शुरुआती समय चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

  1. सिर्फ बड़े क्लाइंट्स के पीछे न भागें

यूजर का कहना है कि छोटे क्लाइंट्स से उसे बिजनेस को बेहतर तरीके से चलाने और मजबूत सिस्टम बनाने की सबसे ज्यादा सीख मिली। बड़े क्लाइंट्स कई बार सीखने और नए प्रयोग करने की गति धीमी कर देते हैं।

  1. सिर्फ टैलेंट नहीं, मजबूत सिस्टम भी जरूरी

उसने कहा कि सफल बिजनेस केवल अच्छी स्किल से नहीं चलता। काम के लिए स्पष्ट प्रक्रिया (SOP), तय फ्रेमवर्क और ऐसे नतीजे होने चाहिए जिन्हें क्लाइंट साफ तौर पर देख सके। तभी लंबे समय तक सफलता मिलती है।

लोगों ने की जमकर तारीफ

Reddit पर इस पोस्ट को लोगों ने खूब पसंद किया। कई यूजर्स ने कहा कि यह कहानी बताती है कि असली सफलता सिर्फ ज्यादा कमाई में नहीं, बल्कि अपनी जिंदगी और समय पर खुद का नियंत्रण पाने में है।

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