25 लाख सालाना कमाने वाला शख्स अब बेच रहा ऑनलाइन प्रोडक्ट, कमल टोलानी ने बताया बिजनेस का पहला महीने का हिसाब

₹25 लाख सालाना की नौकरी, तय सैलरी और कॉरपोरेट की सुरक्षित जिंदगी को छोड़कर अपना बिजनेस शुरू करना हर किसी के बस की बात नहीं होती। लेकिन कमल टोलानी ने नौकरी की सुरक्षा के बजाय अपने दम पर कुछ बनाने का रास्ता चुना। उन्होंने करीब एक महीने पहले अपनी कॉरपोरेट नौकरी छोड़कर ई-कॉमर्स बिजनेस की शुरुआत की। अब अपने नए सफर का पहला महीना पूरा होने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर कमाई के आंकड़े शेयर किए हैं। कमल ने बताया कि Amazon, Meesho और Flipkart जैसे बड़े ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उनके बिजनेस का प्रदर्शन कैसा रहा।

दिलचस्प बात यह है कि पहले महीने में उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा Amazon से आया, जबकि Flipkart पर उन्हें कोई कमाई नहीं हुई। उनकी कहानी इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि एक तरफ उन्होंने लाखों के पैकेज वाली नौकरी छोड़ी, वहीं दूसरी ओर अब बिजनेस की अनिश्चित दुनिया में अपने फैसले को आजमा रहे हैं।

नौकरी की फिक्स सैलरी से सीधे बिजनेस की अनिश्चितता तक

कमल ने Instagram पर बताया कि नौकरी छोड़ने के बाद उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई है। पहले हर महीने एक तय सैलरी मिलती थी और कॉरपोरेट जॉब की अपनी सुरक्षा थी। अब उनका पूरा ध्यान प्रोडक्ट, ऑर्डर, विज्ञापन, रिटर्न और ग्राहकों से जुड़ी दूसरी जिम्मेदारियों पर है। उन्होंने माना कि नए सफर में उनसे गलतियां भी हुईं, लेकिन इसी दौरान उन्हें काफी कुछ सीखने को भी मिला।

Amazon, Meesho और Flipkart पर आजमाई किस्मत

कमल ने अपने वीडियो में बताया कि ई-कॉमर्स के पहले 30 दिनों में उन्होंने Amazon, Meesho और Flipkart पर बिक्री की कोशिश की। उन्होंने यह भी बताया कि किस प्लेटफॉर्म से उन्हें कितनी कमाई हुई। उनके मुताबिक, पिछले 30 दिनों में Meesho से ₹3,200 की कमाई हुई, जबकि Flipkart से कोई कमाई नहीं हुई। दूसरी ओर, Amazon से उन्हें ₹45,382 की बिक्री हासिल हुई।इस तरह उनके साझा किए आंकड़ों के अनुसार, तीनों प्लेटफॉर्म से कुल कमाई ₹48,582 रही।

₹25 लाख की नौकरी के मुकाबले पहला महीना कैसा रहा?

कमल की पोस्ट सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने इसी सवाल को लेकर चर्चा शुरू कर दी। कुछ लोगों ने उनके नए सफर की तारीफ की और उन्हें आगे के लिए शुभकामनाएं दीं। वहीं, कुछ यूजर्स का कहना था कि ₹25 लाख सालाना नौकरी छोड़ना सही फैसला नहीं था और बिजनेस को उस स्तर की कमाई तक पहुंचने में काफी समय लग सकता है।

आखिर क्यों छोड़ दी इतनी अच्छी नौकरी?

कमल ने इससे पहले अपनी एक पोस्ट में इस फैसले की वजह बताई थी। उनके अनुसार, अच्छी सैलरी और नौकरी की सुरक्षा के बावजूद उनके मन में अपना कुछ शुरू करने का विचार लगातार चल रहा था। उन्होंने माना कि उन्हें खुद नहीं पता कि यह फैसला आगे कहां लेकर जाएगा। बिजनेस सफल होगा या नहीं, यह भी तय नहीं है। लेकिन वह इस सफर में मिलने वाली अनिश्चितता, असफलताओं, छोटी सफलताओं और रोजमर्रा के अनुभवों को लोगों के साथ साझा करना चाहते हैं।

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8 साल की IPS सेवा के बाद कॉर्पोरेट की दुनिया में कदम, राजन सिंह ने ऐसे रची सफलता की नई कहानी!

एक नौकरी से शुरू हुआ सफर, जिसने राजन सिंह को पहुंचाया अलग-अलग करियर तक

राजन सिंह का करियर किसी एक तय रास्ते पर नहीं चला। IIT कानपुर से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग करने के बाद उन्होंने सिविल सर्विस का रास्ता चुना और IPS में शामिल हुए। करीब आठ साल पुलिस सेवा में रहने के बाद उन्होंने MBA के लिए अमेरिका का रुख किया। इसके बाद कंसल्टिंग, प्राइवेट इक्विटी और फिर अपना बिजनेस शुरू करने तक उनका सफर पहुंचा। इस दौरान उन्होंने कई बार अपना करियर बदला और हर नए पड़ाव पर एक अलग तरह का अनुभव हासिल किया।

IIT के बाद चुनी पुलिस की राह

इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद राजन सिंह ने सामान्य इंजीनियरिंग करियर में जाने के बजाय सिविल सेवा परीक्षा दी। सितंबर 1997 में उन्होंने IPS जॉइन किया और केरल के करुणागप्पल्ली में ASP के तौर पर पहली पोस्टिंग मिली। कुछ ही सालों में उनकी जिम्मेदारियां बढ़ीं और 2001 तक वह तिरुवनंतपुरम के पुलिस कमिश्नर बन गए। उस समय वह इस पद पर पहुंचने वाले कम उम्र के अधिकारियों में शामिल थे।

पुलिस सेवा छोड़कर पहुंचे Wharton

2004 में पुलिस कमिश्नर रहते हुए उनके करियर ने एक नया मोड़ लिया। एक पुलिस ऑपरेशन के दौरान उन्हें अपने साथी IPS अधिकारी के Wharton MBA में एडमिशन की जानकारी मिली। इस घटना ने उन्हें अपने आगे के करियर के बारे में सोचने पर मजबूर किया। करीब आठ साल पुलिस सेवा में बिताने के बाद उन्होंने जुलाई 2005 में IPS छोड़ दिया और Wharton के MBA प्रोग्राम में दाखिला लिया। 2007 में MBA पूरा करने के बाद उन्होंने न्यूयॉर्क में McKinsey & Company के साथ कंसल्टेंट के तौर पर काम शुरू किया।

कंसल्टिंग के बाद इन्वेस्टमेंट की दुनिया

McKinsey में काम करते हुए राजन ने इंश्योरेंस, फार्मा, बायोटेक्नोलॉजी और बैंकिंग जैसे अलग-अलग सेक्टर की कंपनियों के साथ काम किया। इसके बाद उन्होंने प्राइवेट इक्विटी फर्म New Silk Route का रुख किया। यहां उन्हें कंपनियों और कारोबार को एक इन्वेस्टर की नजर से समझने का मौका मिला। इसी दौरान उन्होंने यह भी करीब से देखा कि कोई व्यक्ति सुरक्षित प्रोफेशनल करियर चुनने के बजाय अपना नया बिजनेस शुरू करने का जोखिम क्यों लेता है।

पहला स्टार्टअप नहीं चला, फिर भी नहीं रुके

2012 में राजन ने Course Brew नाम से ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफॉर्म शुरू किया। यह उनका एंटरप्रेन्योर के तौर पर शुरुआती बड़ा प्रयोग था, लेकिन यह बिजनेस ज्यादा समय तक नहीं चल पाया। इसके बाद उन्होंने दोबारा कोशिश की और ConceptOwl शुरू किया। इसका मकसद छोटे शहरों के छात्रों को अच्छी साइंस और मैथ्स की पढ़ाई उनके अपने शहरों के करीब उपलब्ध कराना था। कंपनी ने ऑनलाइन पढ़ाई के साथ क्लासरूम प्रोग्राम पर भी काम किया। एक समय शिक्षकों की कमी हुई तो राजन ने खुद फिजिक्स पढ़ाना शुरू कर दिया। कंपनी ने आगे चलकर निवेश भी जुटाया और एजुकेशन सेक्टर में अपना मॉडल आगे बढ़ाया।

ConceptOwl से HabitStrong तक पहुंचा सफर

कोरोना महामारी के दौरान राजन और उनकी टीम ने रूटीन, आदतों और प्रोडक्टिविटी से जुड़े कार्यक्रमों पर काम करना शुरू किया। इसी प्रयोग से HabitStrong का आइडिया सामने आया। शुरुआत सुबह जल्दी उठने वाले एक साधारण YouTube प्रोग्राम से हुई, जिसे करीब 100 दिनों तक आजमाया गया। लोगों से मिले अनुभवों के बाद इसे एक स्ट्रक्चर्ड प्रोग्राम का रूप दिया गया। 2020 में शुरू हुए HabitStrong का फोकस बेहतर रूटीन बनाने, कंसंट्रेशन बढ़ाने और डिजिटल डिस्ट्रक्शन कम करने जैसी चीजों पर रहा। इस तरह उनका सफर शिक्षा से आगे बढ़कर हैबिट्स और प्रोडक्टिविटी के क्षेत्र तक पहुंच गया।

राजन सिंह की कहानी की खास बात सिर्फ यह नहीं है कि उन्होंने कई अलग-अलग क्षेत्रों में काम किया, बल्कि यह है कि हर बदलाव के बाद उन्होंने खुद को नए काम के लिए तैयार किया। इंजीनियरिंग से पुलिस सेवा, फिर MBA, कंसल्टिंग, निवेश और आखिर में स्टार्टअप तक का यह सफर दिखाता है कि करियर हमेशा एक ही दिशा में आगे बढ़े, यह जरूरी नहीं। कई बार अलग-अलग अनुभव मिलकर आगे के काम के लिए नई सोच और नए मौके तैयार करते हैं।

कोडिंग छोड़कर जंगलों में रहकर, जानवरों से सीखा बिजनेस और खड़ा कर दिया करोड़ों का स्टार्टअप!

13 साल तक टेक्नोलॉजी की दुनिया में काम करने के बाद हैदराबाद के एक इंजीनियर ने अपना करियर बदलने का फैसला किया। उन्होंने IT की नौकरी छोड़कर वाइल्डलाइफ के अपने पुराने शौक को ही बिजनेस का रूप दे दिया। इस तरह ‘वाइल्डलाइफ व्हिस्परर्स’ की शुरुआत हुई, जो जानवरों और नेचर से मिलने वाली सीख को कॉर्पोरेट ट्रेनिंग से जोड़ती है। बिना किसी बाहरी फंडिंग के शुरू हुई इस कंपनी ने पहले ही साल करीब 80 लाख रुपये का रेवेन्यू कमाया।

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टेक से वाइल्डलाइफ तक

2010 में इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने हैदराबाद, चेन्नई और मुंबई में काम किया। इसके बाद 2014 में डेटा साइंस में मास्टर्स करने के लिए अमेरिका चले गए। IT में काम करते हुए भी उनका नेचर और जानवरों से प्यार कम नहीं हुआ। वीकेंड पर वह DSLR कैमरा लेकर जंगल और नेशनल पार्क घूमने निकल जाते थे। धीरे-धीरे भारत, अमेरिका और अफ्रीका के कई नेशनल पार्कों में ट्रैवल ने उनकी इस दिलचस्पी को और बढ़ा दिया।

 

 

फोटोग्राफी से मिला नया बिजनेस विजन

शुरुआत में वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी उनके लिए जानवरों की फोटो लेने का एक शौक था। लेकिन बाद में उन्हें समझ आया कि जंगल सिर्फ खूबसूरत तस्वीरों के लिए नहीं, बल्कि जानवरों का व्यवहार, उनका एक-दूसरे के साथ जुड़ाव और मुश्किल कंडीशन में उनका सर्वाइव करना इंसानों को भी बहुत कुछ सिखा सकता है। इसी सोच ने आगे चलकर उनके बिजनेस आइडिया की नींव रखी।

 

 

जंगली जानवरों ने सिखाया कॉर्पोरेट मैनेजमेंट

‘वाइल्डलाइफ व्हिस्परर्स’ में जंगल और जानवरों के उदाहरणों के जरिए कॉर्पोरेट टीमों को कई जरूरी बातें सिखाई जाती हैं। जैसे, शेरों से टीमवर्क, चींटियों से काम बांटने यानी डेलिगेशन और मधुमक्खियों से खतरे के समय मिलकर काम करने की सीख ली जाती है। इन उदाहरणों को लीडरशिप, टीमवर्क, मुश्किल समय में मजबूती से टिके रहने और माइंडफुलनेस जैसे सब्जेक्ट से जोड़ा जाता है।

 

 

जंगल बना ट्रेनिंग क्लासरूम

यह बिजनेस सिर्फ ऑफिस में बैठकर होने वाली सामान्य ट्रेनिंग तक सीमित नहीं है। कंपनी कॉर्पोरेट वर्कशॉप के साथ-साथ कई दिनों तक चलने वाले जंगल के एक्सपीरियंस भी कराती है। इन प्रोग्राम्स में टीम के लोगों को नेचर के पास ले जाकर ऐसी एक्टिविटी कराई जाती हैं, जिनसे वे लीडरशिप और मुश्किल हालात में सही फैसला लेने जैसी चीजें सीख सकें। इस तरह जंगल एक तरह से उनका अलग और अनोखा ट्रेनिंग क्लासरूम बन जाता है।

 

लाखों के आइडिया का हिट फॉर्मूला

इस अनोखे बिजनेस आइडिया को कॉर्पोरेट कंपनियों से अच्छा रिस्पॉन्स मिला। रिपोर्ट के मुताबिक, बिना इन्वेस्टमेंट के शुरू हुई ‘वाइल्डलाइफ व्हिस्परर्स’ ने अपने पहले साल में करीब 80 लाख रुपये का रेवेन्यू कमाया। कंपनी ने परफेटी वैन मेले और सीमेंस डिजिटल जैसी कंपनियों के साथ काम किया है। इस बिजनेस में टेक्नोलॉजी और कॉर्पोरेट एक्सपेरिएंस को नेचर और वाइल्डलाइफ के जुनून के साथ जोड़कर एक बिल्कुल अलग तरह का मॉडल तैयार किया गया है।

 

यह कहानी बताती है कि करियर शिफ्ट करने के साथ अपने जुनून पर भरोसा करना भी जरूरी है। सही सोच और मेहनत के साथ पसंद के काम को भी एक सफल बिजनेस बनाया जा सकता है। नेचर से सीख लेकर शुरू किया गया यह अनोखा सफर दूसरों को भी अपनी स्किल और इंटरेस्ट को नए तरीके से देखने के लिए इंस्पिरेशन देता है।

₹15 लाख की नौकरी छोड़ शुरू किया बिजनेस, अब महीने की कमाई सिर्फ ₹12000, इस शख्स ने बताया अपना दर्द

अच्छी सैलरी वाली नौकरी छोड़कर बिजनेस शुरू करने को अक्सर आर्थिक आजादी की दिशा में एक साहसी कदम माना जाता है। हालांकि, पहली बार बिजनेस शुरू करने वाले कई लोगों के लिए, असलियत सोशल मीडिया पर दिखने वाली सफलता की कहानियों से कहीं ज्यादा मुश्किल होती है।

X पर हाल ही में एक पोस्ट ने चर्चा छेड़ दी है, जिसमें एक एंटरप्रेन्योर ने सालाना 15 लाख रुपये की नौकरी छोड़ने के बाद बिजनेस खड़ा करने में आने वाली आर्थिक मुश्किलों के बारे में बताया। इस पोस्ट ने कई यूजर्स का ध्यान खींचा, जिन्होंने एक पक्की सैलरी की सुरक्षा के बजाय एंटरप्रेन्योरशिप चुनने से जुड़े जोखिमों, ज़िम्मेदारियों और त्याग पर अपनी राय रखी।

यह पोस्ट X यूजर किरणजीत दास ने शेयर किया था, जिन्होंने बिजनेस जमाने की कोशिश के दौरान बहुत कम कमाई होने की मुश्किलों के बारे में खुलकर बात की। कैप्शन में लिखा था, “सालाना 15 लाख रुपये की नौकरी छोड़ने के बाद बिज़नेस से महीने में ₹12,000 कमाना शायद आपको व्यक्तिगत रूप से परेशान न करे। चुनौतियां तब बढ़ती हैं जब आपके पास परिवार की देखभाल, फीस भरना, दवाइयां खरीदना और कई अन्य ज़िम्मेदारियां हों। ‘एम्प्लॉई नहीं, एंटरप्रेन्योर बनो’ कहना आसान है। इसे करना नहीं।”

एक और व्यक्ति ने लिखा, “जो लोग पहले से ही किसी कंपनी/ऑर्गनाइज़ेशन में बहुत अच्छी सैलरी पर काम कर रहे हैं, उन्हें सिर्फ डे ट्रेडिंग के लिए अपनी नौकरी कभी नहीं छोड़नी चाहिए। नौकरी के साथ-साथ, कोई भी छोटे स्तर पर पोजीशनल ट्रेडिंग, इन्वेस्टिंग और म्यूचुअल फंड में शामिल हो सकता है।

मुझे याद है कि 2017 और 2020 के बीच, 2 या 3 ‘तथाकथित’ मशहूर ट्रेडर्स-कम-यूट्यूबर्स से प्रेरित होकर, कई लोगों ने फुल-टाइम ट्रेडिंग को अपना पेशा बनाने के लिए अपनी पक्की नौकरियां छोड़ दी थीं।”एक तीसरे व्यक्ति ने कहा, “पूरी तरह सहमत हूं, लेकिन किसी को अपने परिवार की आर्थिक तंगी को बदलने के लिए जोखिम उठाना चाहिए, जिसका सामना वे पुश्तैनी तौर पर कर रहे हैं।”

कॉर्पोरेट नौकरी से बिजनेस तक का सफर, 1.8 लाख रुपये महीना कमाने वाले प्रोफेशनल ने बताए सफलता के राज

नौकरी की सुरक्षा छोड़कर अपना बिजनेस शुरू करना हर किसी के बस की बात नहीं होती। अच्छी सैलरी, तय समय पर मिलने वाली आय और स्थिर करियर के बावजूद कई लोग अपने सपनों को सिर्फ इसलिए पीछे छोड़ देते हैं क्योंकि उन्हें असफल होने का डर रहता है। हालांकि कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो जोखिम उठाने का साहस करते हैं और अपनी मेहनत के दम पर नई पहचान बना लेते हैं। ऐसे लोगों के लिए सफलता का मतलब केवल बैंक बैलेंस बढ़ाना नहीं, बल्कि अपनी शर्तों पर जिंदगी जीना भी होता है। हाल ही में सोशल मीडिया पर एक ऐसी ही कहानी चर्चा में है, जिसने हजारों लोगों का ध्यान खींचा है।

एक मार्केटिंग प्रोफेशनल ने अपनी प्रोफेशनल जर्नी साझा करते हुए बताया कि कैसे उसने कॉर्पोरेट नौकरी छोड़कर नया रास्ता चुना। उसने अपनी सफलता को पैसों से ज्यादा आजादी, संतुलित जीवन और परिवार के साथ बिताए जाने वाले समय से जोड़ा। उसकी कहानी के साथ साझा किए गए अनुभव और सलाह अब इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहे हैं।

Reddit पर शेयर की अपनी कहानी

33 वर्षीय मार्केटिंग प्रोफेशनल ने Reddit के r/Indian_flex पर अपनी सफलता की कहानी साझा की। उसने बताया कि करीब दो साल पहले उसने अपनी फुल-टाइम कॉर्पोरेट नौकरी छोड़कर खुद का मार्केटिंग सर्विस बिजनेस शुरू किया। शुरुआत आसान नहीं थी, लेकिन आज उसकी मेहनत रंग ला रही है।

कभी 16 घंटे करता था नौकरी

यूजर ने बताया कि एक समय ऐसा था जब वह रोज 14 से 16 घंटे तक नौकरी करता था। उस दौर को याद करते हुए उसने लिखा कि अब वह जिंदगी किसी दूसरे दौर जैसी लगती है। आज वह वही काम करता है जो उसे पसंद है और परिवार के साथ ज्यादा समय भी बिता पाता है।

शुरुआत में आईं कई चुनौतियां

नौकरी छोड़ने के बाद शुरुआती महीनों में सबसे बड़ी चुनौती क्लाइंट्स ढूंढना, काम की बेहतर प्रक्रिया बनाना और ऐसा सिस्टम तैयार करना था जिससे बिजनेस लंबे समय तक चल सके। धीरे-धीरे उसकी मेहनत रंग लाई और क्लाइंट्स बढ़ने लगे।

अब कई क्लाइंट्स के साथ कर रहा काम

मार्केटिंग प्रोफेशनल ने बताया कि पिछले साल से वह दो बड़े क्लाइंट्स के साथ काम कर रहा है और हाल ही में एक नया क्लाइंट भी जुड़ा है। अब साल खत्म होने से पहले वह कुछ और बड़े प्रोजेक्ट्स हासिल करने की तैयारी में है।

9 से 5 की नौकरी से मिली आजादी

उसने बताया कि आज भी काम में मेहनत करनी पड़ती है, क्लाइंट मीटिंग्स और ट्रैवल भी होता है, लेकिन अब किसी तय ऑफिस टाइम में बंधकर काम नहीं करना पड़ता। अगर दिन में सब्जियां खरीदनी हों या बेटी को बीच घुमाने ले जाना हो, तो वह बिना किसी परेशानी के ऐसा कर सकता है। इन दिनों वह अपने गांव से बारिश का आनंद लेते हुए रिमोटली काम कर रहा है।

बिजनेस शुरू करने वालों के लिए बताए 3 जरूरी सबक

  1. बिना तैयारी नौकरी छोड़ने की गलती न करें

उसने सलाह दी कि जब तक अच्छी बचत, बैकअप प्लान या आर्थिक सहारा न हो, तब तक नौकरी छोड़ने का फैसला नहीं करना चाहिए। बिजनेस में शुरुआती समय चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

  1. सिर्फ बड़े क्लाइंट्स के पीछे न भागें

यूजर का कहना है कि छोटे क्लाइंट्स से उसे बिजनेस को बेहतर तरीके से चलाने और मजबूत सिस्टम बनाने की सबसे ज्यादा सीख मिली। बड़े क्लाइंट्स कई बार सीखने और नए प्रयोग करने की गति धीमी कर देते हैं।

  1. सिर्फ टैलेंट नहीं, मजबूत सिस्टम भी जरूरी

उसने कहा कि सफल बिजनेस केवल अच्छी स्किल से नहीं चलता। काम के लिए स्पष्ट प्रक्रिया (SOP), तय फ्रेमवर्क और ऐसे नतीजे होने चाहिए जिन्हें क्लाइंट साफ तौर पर देख सके। तभी लंबे समय तक सफलता मिलती है।

लोगों ने की जमकर तारीफ

Reddit पर इस पोस्ट को लोगों ने खूब पसंद किया। कई यूजर्स ने कहा कि यह कहानी बताती है कि असली सफलता सिर्फ ज्यादा कमाई में नहीं, बल्कि अपनी जिंदगी और समय पर खुद का नियंत्रण पाने में है।

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