8000 रुपये की शर्ट का ब्रांड बनाया और खुद ही बेचने निकला ये 16 साल का लड़का बना स्टार! लोग बोले-यही है भारत का असली Gen Z

बिना किसी फैमिली बैकग्राउंड, बिना किसी बड़े सपोर्ट और बिना किसी मार्केटिंग टीम के एक 16 साल के लड़के ने कुछ अपना अलग खड़ा करने का सपना देखा और उसे पूरा कर दिखाया। मध्य प्रदेश के जबलपुर के रहने वाले महेंद्र ने बेलवारो नाम से अपना एक यूनिक शर्ट ब्रांड लॉन्च किया है। सोशल मीडिया पर जब इस युवा एंटरप्रेन्योर का खुद अपनी शर्ट्स बेचने और कॉन्फिडेंस के साथ लोगों से कनेक्ट करने का वीडियो वायरल हुआ तो उसने लाखों लोगों का दिल जीत लिया।

डिजिटल क्रिएटर के पास पहुंचा 16 साल का महेंद्र

हमारी सहयोगी न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, महेंद्र की कहानी तब सामने आई जब वह एक कपड़े के ब्रांड के मालिक और डिजिटल क्रिएटर शुभम शिवहरे के स्टूडियो के बाहर पहुंचा। महेंद्र ने बेझिझक शुभम से संपर्क किया और सीधे अपनी बात रखी। उसने शुभम से कहा कि उसने अपना खुद का शर्ट ब्रांड बनाया है और वह अपनी शर्ट्स बेचना चाहता है। इसके बाद दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई।

8000 रुपये की शर्ट और ब्रांडिंग का अनोखा गणित

बातचीत के दौरान महेंद्र ने शुभम को अपने ब्रांड बेलवारो का प्रमोशन वीडियो दिखाया। खास बात यह है कि इस 16 साल के लड़के ने अपने ब्रांड का लोगो, पैकेजिंग और सोशल मीडिया अकाउंट सब कुछ खुद ही तैयार किया है। जब शुभम ने उससे एक शर्ट की कीमत पूछी तो महेंद्र ने बताया कि वह एक शर्ट 8000 रुपये में बेच रहा है।

शर्ट की इतनी ज्यादा कीमत सुनकर शुभम हैरान रह गए और उन्होंने पूछा कि यह इतनी महंगी क्यों है? इस पर महेंद्र ने बहुत ही आत्मविश्वास से जवाब दिया कि एक शर्ट को बनाने की लागत लगभग 3000 रुपये आती है जबकि बाकी का खर्च ब्रांडिंग का है। महज 16 साल की उम्र में अपने प्रोडक्ट और बिजनेस को खड़ा करने के लिए महेंद्र की लगन और उसका आत्मविश्वास अब चर्चा का विषय बना हुआ है। पर असल कहानी सिर्फ इतनी नहीं है।

पिता का साया नहीं, मां भी नहीं करतीं काम

पहले वीडियो के वायरल होने के बाद शुभम ने दोबारा महेंद्र से मुलाकात की और उसकी निजी जिंदगी की कहानी लोगों के साथ शेयर की। महेंद्र ने बताया कि उसके सिर पर पिता का साया नहीं है। वह अपनी मां, दो छोटे भाइयों और एक बहन के साथ रहता है। उसकी मां फिलहाल कोई काम नहीं करती हैं। बिना किसी आर्थिक मदद और बिना किसी बिजनेस कनेक्शन के वह अकेले ही अपने ब्रांड को प्रमोट करने की कोशिश में जुटा है।

शुभम ने इंस्टाग्राम पर उसकी कहानी शेयर करते हुए लिखा कि 16 साल की उम्र में जब ज्यादातर बच्चे अपने भविष्य के बारे में सोचना शुरू ही करते हैं तब महेंद्र अपना भविष्य खुद बनाने की कोशिश कर रहा है। उसके पास संसाधन भले कम हैं लेकिन सपने बहुत बड़े हैं।

सोशल मीडिया पर मिली तारीफ और लोगों ने बढ़ाए मदद के हाथ

सोशल मीडिया पर महेंद्र के इस जज्बे और हिम्मत की जमकर सराहना हो रही है। इंटरनेट यूज़र्स उसकी कड़ी मेहनत और लगन देखकर काफी प्रभावित है। कई लोग उसके ब्रांड की मदद के लिए भी आगे आए हैं। एक यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा कि यही असली Gen Z है जिसका भारत को इंतजार है। वहीं एक दूसरे यूजर ने कहा कि ऐसे ही बच्चे बड़े होकर बिड़ला और टाटा जैसे बड़े ब्रांड बनाते हैं।

शर्ट की क्वॉलिटी पर कमेंट करते हुए एक यूजर ने लिखा कि शर्ट देखने में काफी अच्छी लग रही है, इसकी लाइनिंग, मटीरियल और कॉलर काफी प्रीमियम दिख रहे हैं।

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टायर 2 सिटी के इस लड़के ने 25 की उम्र में बनाया ₹1.6 करोड़ का नेटवर्थ, बैंक में पड़े हैं 45 लाख रुपये! डिजिटल की ताकत से मिली ये सक्सेस

Tier 2 City Story: इंटरनेट और डिजिटल मीडिया के दौर में सही सोच और सही समय पर शुरुआत किसी की भी जिंदगी बदल सकती है। ऐसी ही एक कहानी रेडिट पर सामने आई है। भारत के एक टायर-2 शहर के रहने वाले 25 वर्षीय युवक ने महज 18 साल की उम्र में फ्रीलांसिंग से शुरुआत की और देखते ही देखते अपना खुद का डिजिटल-मीडिया बिजनेस खड़ा कर लिया। अपनी मेहनत के बल पर इस युवक ने 25 साल की उम्र में करीब ₹1.6 करोड़ का नेटवर्थ हासिल कर लिया है। रेडिट पर अपनी इस सफलता की कहानी साझा करते हुए युवक ने अपने पूरे पोर्टफोलियो का ब्योरा दिया है।

18 की उम्र में फ्रीलांसिंग, फिर खड़ा किया अपना बिजनेस

युवक ने बताया है कि उसने 18 साल की उम्र से ही फ्रीलांस काम करना शुरू कर दिया था। धीरे-धीरे अनुभव हासिल करने के बाद उसने एक डिजिटल-मीडिया कंपनी की नींव रखी। आज उसकी इनकम का मेन सोर्स उसका बिजनेस ही है। बिजनेस होने की वजह से उसकी कमाई फिक्स नहीं है बल्कि उतार-चढ़ाव भरी है। इसके बावजूद उसका पोर्टफोलियो उसकी सफलता की कहानी बयान कर रहा है।

जानिए कहां-कहां इन्वेस्ट है ₹1.6 करोड़

25 साल के इस युवा एंटरप्रेन्योर ने अपने पैसों को अलग-अलग एसेट क्लासेज में डाइवर्सिफाई किया हुआ है:-

भारतीय शेयर: ₹85 लाख

कैश/बैंक अकाउंट: ₹45 लाख

रियल एस्टेट: ₹15 लाख

यूएस स्टॉक्स: ₹7.5 लाख

म्यूचुअल फंड्स: ₹5 लाख

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड: ₹5 लाख

क्रिप्टोकरेंसी: ₹3 लाख

गोल्ड ईटीएफ: ₹2 लाख

फिक्स्ड डिपॉजिट: ₹1 लाख

बैंक में पड़े हैं ₹45 लाख, आगे की स्ट्रैटिजी पर मांगी राय

युवक के बैंक खाते में पिछले काफी समय से ₹30 से ₹45 लाख की बड़ी राशि जमा है। उसका मानना है कि बचत खाते में इतना पैसा रखना काम का सौदा नहीं है। वह पिछले 1-2 सालों से रियल एस्टेट प्रॉपर्टी तलाश रहा है, लेकिन उसे अभी तक कोई ऐसा विकल्प नहीं मिला जहां कीमत और रिस्क/रिवॉर्ड का तालमेल सही बैठता हो। सुरक्षा के लिहाज से उसके पास ₹50 लाख का टर्म इंश्योरेंस तो है, लेकिन फिलहाल उसने अपने या अपने माता-पिता के लिए हेल्थ इंश्योरेंस नहीं लिया है।

FIRE गोल हासिल करने की चाहत

युवक का मुख्य उद्देश्य अपने डिजिटल मीडिया बिजनेस को आगे बढ़ाना, फाइनेंशियल स्थिति को मजबूत करना और किसी एक बिजनेस या एसेट पर निर्भरता कम करके फाइनेंशियल फ्रीडम हासिल करना है ताकि वह जल्द से जल्द फायर (FIRE- Financial Independence, Retire Early) का टारगेट हासिल कर सके।

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उसने रेडिट कम्युनिटी से सुझाव मांगते हुए पूछा कि अगर 25 साल की उम्र में किसी के पास ₹1.5 से ₹2 करोड़ का नेटवर्थ हो और ₹40-45 लाख कैश में हो, तो उसे अपने अगले कदम के रूप में किन चीजों पर फोकस करना चाहिए?

(डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।)

2.5 साल में ₹6.5 करोड़ की बचत: कंसल्टेंट की वायरल स्टोरी पर सोशल मीडिया में मचा बवाल

Viral Story: इस कंसल्टेंट ने दावा किया कि पिछले ढाई वर्षों में उन्होंने करीब ₹6.5 करोड़ की बचत की है। इस शानदार बचत को जोड़कर उनकी कुल संपत्ति अब लगभग ₹7.5 करोड़ हो गई है।

दुनिया का सबसे ‘बदसूरत’ कुत्ता कौन? लटकी जीभ बनी खासियत, मालिक को मिले 5 लाख रुपये

दुनिया में खूबसूरती के मुकाबले तो आपने कई देखे होंगे, लेकिन अमेरिका में होने वाली एक अनोखी प्रतियोगिता का मकसद बिल्कुल अलग है। यहां खूबसूरत नहीं, बल्कि सबसे अलग और ‘बदसूरत’ दिखने वाले कुत्ते को विजेता चुना जाता है। हालांकि, इसके पीछे किसी जानवर का मजाक उड़ाना नहीं, बल्कि रेस्क्यू डॉग्स की ओर लोगों का ध्यान खींचना है। साल 2026 में इस अनोखे मुकाबले का खिताब 6 साल की पग कुतिया जिन्नी लू ने जीता है। उसकी उभरी हुई आंखें और बाहर निकली बड़ी जीभ उसकी पहचान बन गई हैं। खास बात यह है कि जिन्नी लू की कहानी सिर्फ उसके अजीबोगरीब लुक तक सीमित नहीं है।

कभी दक्षिण कोरिया में मुश्किल हालात में मिली यह कुतिया आज अमेरिका में सुरक्षित और खुशहाल जिंदगी जी रही है। उसकी जीत यह संदेश भी देती है कि किसी जानवर की खूबसूरती उसके चेहरे से नहीं, बल्कि उसके संघर्ष और जज्बे से देखी जानी चाहिए।

6 साल की जिन्नी लू बनी विजेता

2026 के World’s Ugliest Dog Contest का खिताब 6 साल की पग कुतिया जिन्नी लू ने अपने नाम किया। उसकी बड़ी-बड़ी उभरी आंखें और मुंह से बाहर निकली लंबी जीभ उसके लुक को बेहद अनोखा बनाती हैं। यही ‘परफेक्टली इंपर्फेक्ट’ अंदाज जजों को पसंद आया। जिन्नी लू को जीत के लिए 5,000 डॉलर की इनामी राशि मिली। इसके साथ उसे टीवी शो में नजर आने और एक स्पेशल एडिशन प्रोडक्ट पर अपनी तस्वीर छपने का मौका भी मिला।

कभी ठंड में लकड़ी के बक्से में मिली थी

जिन्नी लू की कहानी उसके लुक से कहीं ज्यादा भावुक है। वह दक्षिण कोरिया के एक पहाड़ी इलाके में बेहद खराब हालत में मिली थी। उसे ठंड में एक लकड़ी के बक्से में छोड़ दिया गया था। बाद में उसे रेस्क्यू किया गया और अमेरिका में एक नया परिवार मिला। आज वही कुतिया न सिर्फ सुरक्षित और खुशहाल जिंदगी जी रही है, बल्कि दुनिया का ध्यान भी अपनी ओर खींच रही है।

प्रतियोगिता का मकसद सुनकर बदल जाएगा नजरिया

इस प्रतियोगिता का उद्देश्य किसी कुत्ते का मजाक बनाना नहीं है। आयोजक ऐसे रेस्क्यू डॉग्स को पहचान दिलाना चाहते हैं, जिन्होंने बीमारी, चोट, उपेक्षा या मुश्किल परिस्थितियों का सामना किया है।जिन्नी लू की जीत भी इसी संदेश को मजबूत करती है कि किसी जानवर की कीमत उसके चेहरे से नहीं, बल्कि उसकी जिंदगी और संघर्ष से तय होनी चाहिए।

पग की शक्ल के पीछे छिपी है स्वास्थ्य की कहानी

पग कुत्तों की चपटी नाक, बड़ी आंखें और छोटी कद-काठी उन्हें अलग पहचान देती है। हालांकि, उनकी शारीरिक बनावट के कारण कुछ पग्स को सांस लेने जैसी स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। जिन्नी लू की उभरी आंखें और बाहर निकली जीभ भी उसकी अनोखी शारीरिक बनावट का हिस्सा हैं। इसके बावजूद वह एक सक्रिय और खुश कुतिया है। शायद यही वजह है कि इस बार जजों को उसमें ‘बदसूरती’ से ज्यादा संघर्ष के बाद मिली जिंदगी की खूबसूरती नजर आई।

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एक गलती…और टूट गया 10 साल पुराना रिश्ता, पत्नी से धोखा मिलने के बाद पति ने खत्म किया रिश्ता, वायरल हुई कहानी

सोशल मीडिया पर एक महिला का पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है। पोस्ट में महिला ने बताया की एक गलती की वजह से उसके पति ने 10 साल पुरानी शादी तोड़ दिया। इस मामले के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर चर्चा शुरू हो गई। लोग इस बात पर बहस कर रहे हैं कि क्या एक बार किया गया धोखा इतने सालों के रिश्ते, प्यार और साथ को खत्म करने के लिए काफी है, या फिर टूटे भरोसे के बाद रिश्ते को बचाना मुश्किल हो जाता है। जानें क्या है पूरा मामला

महिला ने पति को दिया धोखा

X यूजर SamSiff ने एक महिला से जुड़ी पोस्ट शेयर की। पोस्ट में दावा किया गया कि, महिला ने अपने पति को धोखा दिया, जिसके बाद पति ने उसे तलाक दे दिया। बताया गया कि तलाक से पहले दोनों की शादी को 10 साल हो चुके थे। कहानी शेयर करते हुए यूजर ने लिखा, “उसने सिर्फ एक बार धोखा दिया, लेकिन पति ने 10 साल पुरानी शादी खत्म करने का फैसला कर लिया। अब लोग इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि क्या सिर्फ एक गलती की वजह से किसी रिश्ते के 10 साल को खत्म कर देना सही है?”

नहीं दिया सफाई का मौका

पोस्ट के साथ एक तस्वीर भी शेयर की गई थी, जिसमें महिला ने पूरे मामले को लेकर अपनी बात रखी थी। महिला ने दावा किया कि 10 साल की शादी में उसने सिर्फ एक बार पति को धोखा दिया, लेकिन पति ने उसे सफाई या रिश्ता सुधारने का मौका दिए बिना तलाक ले लिया। महिला ने अपनी बात रखते हुए लिखा, “मैंने शादी के 10 साल में सिर्फ एक बार अपने पति को धोखा दिया। यह मेरी एक गलती थी, लेकिन इसके बाद वह मुझसे पूरी तरह दूर हो गया, जैसे मैं उसके लिए सबसे बुरी इंसान हूं। उसने न तो मुझसे बात करने की कोशिश की, न रिश्ते को बचाने का कोई मौका दिया और न ही मेरी बात सुनी। इसके बजाय उसने तलाक के कागज मेरे सामने रख दिए।”

2 साल से मांद रही मांफी

महिला ने आगे बताया, “यह घटना दो साल पहले हुई थी। तब से मैं लगातार माफी मांगती रही, रोती रही और रिश्ता बचाने की कोशिश करती रही, लेकिन उसने मेरी कोई बात नहीं सुनी। हमने साथ मिलकर 10 साल की जिंदगी बिताई और कई यादें बनाई थीं। मुझे समझ नहीं आता कि कोई इंसान इतने सालों के रिश्ते और साथ को इतनी आसानी से कैसे भुला सकता है।” महिला का पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने कहा कि, रिश्ते की लंबी अवधि से ज्यादा जरूरी भरोसा होता है और एक बार विश्वास टूट जाने के बाद शादी को पहले जैसा बनाए रखना आसान नहीं होता।

लोगों ने किया कमेंट

एक यूजर ने महिला की आलोचना करते हुए लिखा, “बड़ी मेट्रो की लड़कियां और महिलाएं आखिर क्या उम्मीद कर रही हैं? एक बार धोखा देना हो या 20 बार, इससे क्या फर्क पड़ता है? अगर स्थिति उलट होती और पति ऐसा करता, तो शायद वह भी अपनी पत्नी की जिंदगी बर्बाद कर देता। उसे इस बात की गंभीरता समझनी चाहिए।”

एक और कमेंट करने वाले ने महिला पर कहानी को मैनिपुलेट करने की कोशिश करने का आरोप लगाते हुए कहा, “एलीट लेवल की गैसलाइटिंग। जो कोई भी उसके पक्ष में बात करता है या उसका सपोर्ट करता है, वह सबसे बुरे लोग हैं।” एक यूजर ने लिखा, “कितनी ऊपरी सोच है.. यह सिर्फ एक गलती नहीं है बल्कि भरोसा टूटना है.. धोखा तो धोखा है… बस। माफ नहीं किया जा सकता।”

AI की ताकत से घर बैठे पाई 1.06 करोड़ की नौकरी! जानिए आंध्र प्रदेश के इस युवक ने कैसे हासिल किया यह मुकाम

आंध्र प्रदेश के एक दर्जी के बेटे ने कनाडा की कंपनी Fabrantic AI में AI इंजीनियर के तौर पर 1.06 करोड़ रुपये की रिमोट जॉब हासिल करके सफलता की एक प्रेरणादायक कहानी लिखी है।

अखिलेश माल्थी कौन हैं?

आदित्य कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग से B.Tech (डेटा साइंस) 2026 के ग्रेजुएट अखिलेश माल्थी ने कैंपस प्लेसमेंट के ज़रिए यह उपलब्धि हासिल की। ​​इससे साबित होता है कि दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत से सबसे मुश्किल हालात का भी सामना किया जा सकता है।

अखिलेश एक साधारण परिवार से आते हैं। उनके पिता एक दर्जी हैं जो सुन और बोल नहीं सकते, जबकि उनकी माँ सिलाई के काम में मदद करके परिवार का सहारा बनती हैं। आर्थिक तंगी के बावजूद, उनके माता-पिता ने कभी भी अपनी मुश्किलों को बेटे की पढ़ाई में बाधा नहीं बनने दिया। उन्होंने हमेशा उन्हें पढ़ाई करने और बेहतर भविष्य बनाने के लिए प्रोत्साहित किया।

उनके माता-पिता की मेहनत और त्याग का फल अब मिल गया है। अखिलेश को Fabrantic AI में रिमोट AI इंजीनियर की नौकरी मिली है, जिसका सालाना पैकेज ₹1.06 करोड़ है। यह उनके परिवार के लिए ज़िंदगी बदलने वाला पल है।

X पर किए गए पोस्ट में लिखा है, “बहुत गरीब बैकग्राउंड से आने वाले और एक दर्ज़ी के बेटे, अखिलेश को Fabrantic AI में AI इंजीनियर के तौर पर ₹1.06 करोड़ का पैकेज मिला है।” पोस्ट में आगे कहा गया है, “आज कैंपस प्लेसमेंट के ज़रिए अखिलेश को कनाडा की कंपनी Fabrantic AI में ₹1.06 करोड़ की रिमोट जॉब मिली है।”

सोशल मीडिया पर उनकी इस कामयाबी की खूब तारीफ़ हो रही है। कई लोग इसे इस बात का बेहतरीन उदाहरण मान रहे हैं कि कैसे शिक्षा, लगन और माता-पिता का साथ ज़िंदगी बदल सकता है। एक यूजर ने लिखा, “₹1.06 करोड़ और वो भी रिमोट जॉब! वाह, समय और उनकी मेहनत ने सच में उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बदल दी।”

एक और व्यक्ति ने कहा, “गरीब बैकग्राउंड से आकर 1 करोड़ का पैकेज मिलना बहुत बड़ी बात है।”तीसरे कमेंट करने वाले ने लिखा, “पैकेज से भी ज़्यादा अच्छी बात यह देखना है कि कैसे उनकी मेहनत ने उनके परिवार का भविष्य बदल दिया… आख़िरकार उनके त्याग का फल मिल ही गया।”

एक और व्यक्ति ने कहा, “B.Tech के दौरान हमारे पास काफ़ी समय होता है… अगर हम रोज़ाना कम से कम 2 घंटे नई स्किल्स सीखने में लगाएं… तो हम कुछ असाधारण हासिल कर सकते हैं।”

Viral Post: ‘सर्जरी के लिए नहीं थे पैसे… फिर मालिक ने चुकाए 4.25 लाख रुपये’ सोशल मीडिया पर छाई ये कहानी

Viral Post: सोशल मीडिया पर एक कार्डियक सर्जन की पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है। इस पोस्ट में सर्जन ने बताया कि एक कंपनी के मालिक ने अपने कई सालों से साथ काम कर रहे ड्राइवर की बाईपास सर्जरी का पूरा खर्च उठाने का फैसला किया। सोशल मीडिया पर इस इंसानियत भरे कदम की लोग जमकर तारीफ कर रहे हैं। वहीं कुछ इसे अपने कर्मचारियों के प्रति जिम्मेदारी और सम्मान की मिसाल बताया जा रहा है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर ये पोस्ट कार्डियक सर्जन डॉ. प्रशांत मिश्रा ने शेयर किया है। उन्होंने बताया कि एक मरीज के मालिक ने अपने कर्मचारी को सिर्फ काम करने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि परिवार जैसा मानते हुए उसके इलाज की जिम्मेदारी उठाई।

बाईपास सर्जरी के लिए आया ड्राइवर

डॉ. प्रशांत मिश्रा ने बताया कि उनके पास एक ड्राइवर बाईपास सर्जरी के लिए आया था। प्राइवेट हॉस्पिटल में ऑपरेशन का खर्च करीब 4.25 लाख रुपये होने की वजह से उन्होंने मरीज को सलाह दी कि अगर चाहें तो बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (BMC) के सरकारी अस्पताल में इलाज करा सकते हैं, जहां सरकारी ल्थकेयर स्कीम के तहत ये सर्जरी बिना खर्च के हो सकती है। लेकिन उसी दिन शाम को मरीज के बेटे ने डॉक्टर से दोबारा बात की और आग्रह किया कि ऑपरेशन निजी अस्पताल में ही किया जाए।

सफल रही बाईपास सर्जरी

मरीज के बेटे ने डॉक्टर से कहा, “डॉक्टर साहब, हम चाहते हैं कि पिताजी की बाईपास सर्जरी थुंगा हॉस्पिटल में ही हो। कृपया जितना हो सके खर्च कम कराने में हमारी मदद करें।” इस पर डॉ. प्रशांत मिश्रा ने परिवार को भरोसा दिलाया कि वे इलाज का खर्च कम कराने के लिए अपनी ओर से पूरी कोशिश करेंगे। अगले ही दिन मरीज के एम्प्लॉयर ने RTGS के जरिए सर्जरी के लिए जरूरी रकम सीधे अस्पताल के खाते में भेज दी, जिससे बिना किसी देरी के ऑपरेशन हो सका। सर्जरी सफल रहने के बाद डॉ. प्रशांत मिश्रा ने एम्प्लॉयर को फोन कर जानकारी दी और कहा, “आपके सहयोग के लिए धन्यवाद। मिस्टर शुक्ला की बाईपास सर्जरी सफल रही है।”

हैरान रह गए डॉक्टर

एम्प्लॉयर की बात सुनकर डॉ. प्रशांत मिश्रा हैरान रह गए। उन्होंने कहा, “मेरे कलीग की इतनी अच्छी देखभाल करने के लिए धन्यवाद, डॉक्टर।” इस पर डॉक्टर ने पूछा, “कलीग? लेकिन उन्होंने तो बताया था कि वह आपके ड्राइवर हैं।”

जवाब में एम्प्लॉयर ने कहा, “वह पिछले 15 साल से मेरे साथ काम कर रहे हैं। मैं उन्हें सिर्फ अपना ड्राइवर नहीं मानता। मैं अपना काम करता हूं और वह अपना काम करते हैं। हमारे काम अलग हो सकते हैं, लेकिन हम एक ही टीम का हिस्सा हैं, इसलिए वह मेरे सहयोगी हैं।” डॉ. मिश्रा ने कहा कि एम्प्लॉयर की यह सोच और अपने कर्मचारी के प्रति सम्मान देखकर वह काफी प्रभावित हुए।

नौकर ना समझे

इस घटना को शेयर करते हुए डॉ. प्रशांत मिश्रा ने कहा कि घरों और दफ्तरों में काम करने वाले कर्मचारियों, घरेलू सहायकों और सपोर्ट स्टाफ का हमेशा सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने लिखा, “अपने घर या कार्यस्थल पर काम करने वाले लोगों को कभी सिर्फ नौकर या कर्मचारी समझकर न देखें। वे हमारी रोजमर्रा की जिंदगी को आसान बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं और उतने ही सम्मान और आदर के हकदार हैं, जितने कोई और।”

पोस्ट पर लोगों ने किए कमेंट

ये कहानी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई और बड़ी संख्या में लोगों ने एम्प्लॉयर की सोच और अपने कर्मचारी के प्रति सम्मान की जमकर सराहना की। एक यूजर ने लिखा, “बिल्कुल सही डॉक्टर, हमारे समाज में आज भी कई लोग हर काम की बराबर इज्जत करना नहीं सीख पाए हैं।” वहीं दूसरे यूजर ने कहा, “थोड़ा सम्मान, धन्यवाद और इंसानियत किसी की जिंदगी बदल सकती है।” एक अन्य यूजर ने अपना एक्सपीरिएंस शेयर करते हुए बताया कि उन्होंने अपने घरेलू काम करने वालों के लिए SIP शुरू की है, ताकि कई साल बाद उनके काम छोड़ने पर उन्हें रिटायरमेंट की तरह एक अच्छी रकम दी जा सके।

‘काम नहीं छोड़ेंगे हम बिहारी ऐसे ही होते हैं…’, महीने की 80,000 कमाई…दिल का दौरा पड़ने के बाद भी 12 घंटे Uber चला रहा शख्स

सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक पोस्ट ने दिल्ली के एक उबर ड्राइवर की ओर लोगों का ध्यान खींचा है, जिन्होंने आराम के बजाय अपने काम को चुना। हालांकि उन्हें किराए से हर महीने ₹80,000 की कमाई होती है, फिर भी हार्ट अटैक से उबरने के बाद भी वे घंटों तक गाड़ी चलाते हैं। वे यह साबित करने के लिए ऐसा करते हैं कि सेहत से जुड़ी इस मुश्किल ने उन्हें “बेकार” नहीं बना दिया है।

इस कहानी को कंटेंट क्रिएटर आस्था सेठ ने इंस्टाग्राम पर शेयर किया। उन्होंने बताया कि राइड के दौरान हुई एक आम बातचीत उनके लिए सबसे यादगार मुलाकातों में से एक बन गई। सेठ के अनुसार, ड्राइवर बिहार के समस्तीपुर का रहने वाला है और पहले दिल्ली में अपने एक रिश्तेदार की फ़ैक्ट्री में काम करता था। हालाँकि, पिछले साल हार्ट अटैक आने के बाद उसकी ज़िंदगी ने एक अप्रत्याशित मोड़ ले लिया। उन्होंने बताया कि उसके रिश्तेदार का मानना ​​था कि वह अब शारीरिक रूप से मेहनत वाले काम करने में सक्षम नहीं है, इसलिए उन्होंने उसे फ़ैक्ट्री छोड़ने के लिए कह दिया।

उस बातचीत को याद करते हुए सेठ ने लिखा, “यह व्यक्ति बिहार के समस्तीपुर का रहने वाला है। पहले वह दिल्ली में अपने एक रिश्तेदार की फैक्ट्री में काम करता था और अच्छी कमाई करता था, लेकिन पिछले साल उसे दिल का दौरा पड़ा। इसके बाद उसके रिश्तेदार ने उससे कहा कि अब वह किसी काम का नहीं रहा क्योंकि वह ताकत वाला कोई काम नहीं कर सकता, और उसे फैक्ट्री से निकाल दिया। लेकिन वह व्यक्ति यहीं नहीं रुका।”

उन्होंने आगे बताया कि ड्राइवर के पास नोएडा इलेक्ट्रॉनिक सिटी के पास एक रेजिडेंशियल सोसाइटी में दो फ्लैट हैं, जिनकी कुल कीमत लगभग ₹80 लाख है और जिनसे हर महीने लगभग ₹80,000 का किराया मिलता है। पास काम छोड़कर आराम करने और घर पर रहने का विकल्प था और अब भी है। लेकिन उन्होंने उबर ड्राइवर के तौर पर काम करना चुना है।”

पैसिव इनकम का एक पक्का ज़रिया होने के बावजूद, ड्राइवर सुबह 10 बजे से रात 10 बजे तक काम करते हैं और हर महीने अतिरिक्त 50,000 कमाते हैं। सेठ के अनुसार, उनके काम करने की वजह सिर्फ़ पैसों की ज़रूरत से कहीं ज़्यादा है। ये सिर्फ़ उन लोगों को यह दिखाने के लिए कि हार्ट अटैक की वजह से वे बेकार या किसी काम के नहीं हो गए हैं। उनकी 2 बेटियां हैं, जिनके लिए उन्होंने ये 2 फ्लैट बचाकर रखे हैं। बिहार में उनकी पुश्तैनी संपत्ति भी है। लेकिन फिर भी वे काम कर रहे हैं।”

मुंबई में शख्स ने लाखों की सैलरी छोड़ किया 1.5 करोड़ का इन्वेस्टमेंट’, रेस्टोरेंट और निवेश से हो रही 4 लाख की कमाई

एक व्यक्ति, जिसने ऐसा रास्ता चुना जिसे कई लोग जोखिम भरा मानते थे, अब आर्थिक आजादी और काम और निजी जिंदगी के बीच बेहतर संतुलन का आनंद ले रहा है। सोशल मीडिया पर अंकित पांडे द्वारा साझा की गई उनकी कहानी ने ऑनलाइन कई लोगों को प्रेरित किया है।

पोस्ट के अनुसार, उस व्यक्ति ने मुंबई में अपनी 1.5 लाख रुपये प्रति महीने की नौकरी छोड़ दी, जबकि लोगों ने उससे कहा कि वह बहुत बड़ी गलती कर रहा है। उसने अपना फ्लैट लगभग 3 करोड़ रुपये में बेच दिया और कोई दूसरा महंगा अपार्टमेंट खरीदने के बजाय अपने होमटाउन वापस चला गया।

उसने लगभग 20 लाख रुपये में जमीन खरीदी, 50 लाख रुपये में घर बनवाया और दो रेस्टोरेंट खोलने के लिए लगभग 50 लाख रुपये का निवेश किया। आज, दोनों रेस्टोरेंट जोमैटो और स्विगी पर लिस्टेड हैं और कर्मचारी उन्हें मैनेज करते हैं। बताया जाता है कि इन बिजनेस से उसे इतना मुनाफा होता है कि वह हर महीने लगभग 3 लाख रुपये बचा लेता है।

उसने फिक्स्ड डिपॉजिट में भी 1.5 करोड़ रुपये का निवेश किया, जिससे उसे ब्याज के तौर पर हर महीने लगभग 1 लाख रुपये मिलते हैं। कुल मिलाकर, उसकी मासिक आय लगभग 4 लाख रुपये बताई जाती है। यह पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है।

एक यूजर ने लिखा, “बिना किसी विरासत, बिना किसी असली सोशल सर्कल और शहर से बिना किसी सच्चे लगाव के, मेट्रो शहर में सिर्फ एक औसत सैलरी पर गुज़ारा करना, एक दुखद जीवन जैसा लगता है।”एक दूसरे व्यक्ति ने कहा, “भले ही यह सच्ची कहानी हो, लेकिन जब वह होमटाउन गया तो उसके पास 3 करोड़ रुपये की पूंजी और पहले की बचत थी, जिससे बिजनेस और नई ज़िंदगी शुरू की जा सकती थी। हर किसी के पास, जो मेट्रो से होमटाउन जाता है, ऐसी सुविधा नहीं होती। अच्छी कहानी है, लेकिन ज़्यादातर लोगों के लिए आदर्श या उनसे जुड़ी हुई नहीं है।”

एक तीसरे व्यक्ति ने कहा, “यह इतना आसान नहीं है! रेस्टोरेंट का बिजनेस ही जोखिम भरा होता है! इतने सारे लाइसेंस और रिश्वत, लेबर की समस्याएं, सफाई के सर्टिफिकेट वगैरह, जिन्हें कॉम्पिटिटर निशाना बना सकते हैं! मैं रोज़ रेस्टोरेंट बंद होते देखता हूं!”

36 हजार रुपये कमाता है पर हर महीने 15 हजार गरीबों को खाना खिलाने में कर देता है खर्च! दिल्ली के डिलीवरी बॉय आकाश की कहानी गजब

जब बात दूसरों की मदद करने की आती है तो अक्सर लोग अपनी जेब और बैंक बैलेंस देखने लगते हैं। बहुत से लोग अपनी पूरी सैलरी खुद के घर के खर्चों और बचत में ही लगा देते हैं। लेकिन दिल्ली में रहने वाले एक डिलीवरी राइडर ने इंसानियत की एक ऐसी अनूठी मिसाल पेश की है जिसे जानकर हर कोई हैरान है। यह कहानी है आकाश सरोज की जो पेशे से एक फूड डिलीवरी बॉय हैं। वह अपनी मेहनत की कमाई का एक बहुत बड़ा हिस्सा उन अजनबी और बेघर लोगों के पेट भरने में लगा देते हैं जो सड़कों पर भूखे सोते हैं। वह हर दिन पूरी शिद्दत से अपने इस मिशन को निभा रहे हैं।

डिलीवरी के बाद शुरू होती है असली ड्यूटी

आकाश सरोज पिछले छह सालों से दिल्ली की सड़कों पर एक डिलीवरी एग्जीक्यूटिव के रूप में काम कर रहे हैं। दिनभर अपनी बाइक दौड़ाकर लोगों के घरों तक खाना पहुंचाने वाले आकाश की असली ड्यूटी तब शुरू होती है जब उनके काम की शिफ्ट खत्म होती है। काम खत्म होने के बाद वह घर जाकर आराम करने के बजाय खुद अपने हाथों से गर्म भोजन तैयार करते हैं। इसके बाद वह दिल्ली के उन इलाकों का रुख करते हैं जहां बेघर और जरूरतमंद लोग रहते हैं ताकि कोई भी इंसान भूखा न सोए।

दिल्ली के इन इलाकों में बांटते हैं खाना

आकाश मुख्य रूप से दिल्ली के इन चार बड़े इलाकों में सक्रिय रहते हैं और घूम-घूम कर भूखों को भोजन कराते हैं। इसमें पीतमपुरा, रोहिणी, जहांगीरपुरी और जीटीबी नगर शामिल हैं।

अपनी कमाई का 40% से ज्यादा हिस्सा करते हैं खर्च, नहीं लेते कोई डोनेशन

आकाश के इस नेक काम के पीछे कोई बड़ा स्पॉन्सर, एनजीओ या बाहरी डोनेशन नहीं है। वह इस पूरे अभियान का खर्च अपनी खुद की जेब से उठाते हैं। आकाश डिलीवरी के काम से प्रतिदिन औसतन करीब ₹1200 कमाते हैं। यानी उनकी मंथली इनकम करीब ₹36000 होती है। इस कमाई में से वह हर दिन लगभग 500 रुपये जरूरतमंदों के लिए भोजन तैयार करने और उनकी मदद करने में खर्च कर देते हैं। इसका मतलब यह हुआ कि आकाश अपनी मेहनत की गाढ़ी कमाई का 40 प्रतिशत से भी अधिक हिस्सा उन अनजान लोगों के लिए गर्म खाना बनाने में लगा देते हैं जिनसे उनका कोई खून का रिश्ता तक नहीं है।

सोशल मीडिया से नहीं मिलता ₹1 भी

आकाश अपनी इस फूड ड्राइव के वीडियो रिकॉर्ड करके सोशल मीडिया पर भी शेयर करते हैं। इन वीडियोज में सिर्फ खाना बांटना ही नहीं बल्कि बेघर लोगों के चेहरे की मुस्कान और उनके साथ की गई खूबसूरत बातचीत भी कैद होती है। हालांकि इंटरनेट पर अपनी बढ़ती लोकप्रियता के बावजूद आकाश ने स्पष्ट किया कि मैं इंस्टाग्राम से जीरो रुपये कमाता हूं, मेरी फूड ड्राइव का 100% खर्च मेरी डिलीवरी की कमाई से ही आता है।

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स्वर्गीय पिता के संस्कार और सीख है सबसे बड़ी प्रेरणा

जब आकाश से हिंदुस्तान टाइम्स ने पूछा कि इतनी मामूली इनकम के बावजूद उन्हें हर दिन इस काम को करने की प्रेरणा कहां से मिलती है, तो उनका जवाब बेहद भावुक करने वाला था। आकाश ने कहा कि ये मेरे पिता के मूल्य और संस्कार। मैं बस यह सुनिश्चित करना चाहता हूं कि कोई भी इंसान भूखा न सोए।

आकाश का यह काम दिखने में जितना आसान लगता है असल जिंदगी में इसे रोज करना उतना ही चुनौतीपूर्ण है। एक फुल-टाइम डिलीवरी जॉब के साथ रोज भोजन तैयार करना और उसे बांटना बेहद थका देने वाला होता है। पैसे कमाने से लेकर, खर्चों की प्लानिंग करना, खुद खाना बनाना और फिर सही समय पर उसे जरूरतमंदों तक पहुंचाने की पूरी जिम्मेदारी अकेले आकाश के कंधों पर होती है।

डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट अन्य मीडिया आउटलेट्स की रिपोर्ट पर आधारित है। इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गई है।

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