अपनी Pocket Money से बेजुबानों का पेट भरता है ये 10वीं का छात्र | Young Boy feeding birds

राजस्थान के भीलवाड़ा के हिमांशु अपनी पॉकेट मनी से हर दिन पक्षियों के लिए दाना, फल और पानी की व्यवस्था करते हैं। 30 दिनों के एक छोटे से चैलेंज से शुरू हुई उनकी पहल आज 100 दिनों के सफ़र में बदल चुकी है। शुरुआत में लोगों ने उनका विरोध किया, लेकिन आज उनकी कहानी कई लोगों को बेजुबान पक्षियों की मदद करने के लिए प्रेरित कर रही है।
अगर आपको भी यह कहानी पसंद आए, तो अपने घर की छत या बालकनी में पक्षियों के लिए थोड़ा-सा दाना और एक कटोरी पानी ज़रूर रखें।

@himanshu_sahu_7773

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36 हजार रुपये कमाता है पर हर महीने 15 हजार गरीबों को खाना खिलाने में कर देता है खर्च! दिल्ली के डिलीवरी बॉय आकाश की कहानी गजब

जब बात दूसरों की मदद करने की आती है तो अक्सर लोग अपनी जेब और बैंक बैलेंस देखने लगते हैं। बहुत से लोग अपनी पूरी सैलरी खुद के घर के खर्चों और बचत में ही लगा देते हैं। लेकिन दिल्ली में रहने वाले एक डिलीवरी राइडर ने इंसानियत की एक ऐसी अनूठी मिसाल पेश की है जिसे जानकर हर कोई हैरान है। यह कहानी है आकाश सरोज की जो पेशे से एक फूड डिलीवरी बॉय हैं। वह अपनी मेहनत की कमाई का एक बहुत बड़ा हिस्सा उन अजनबी और बेघर लोगों के पेट भरने में लगा देते हैं जो सड़कों पर भूखे सोते हैं। वह हर दिन पूरी शिद्दत से अपने इस मिशन को निभा रहे हैं।

डिलीवरी के बाद शुरू होती है असली ड्यूटी

आकाश सरोज पिछले छह सालों से दिल्ली की सड़कों पर एक डिलीवरी एग्जीक्यूटिव के रूप में काम कर रहे हैं। दिनभर अपनी बाइक दौड़ाकर लोगों के घरों तक खाना पहुंचाने वाले आकाश की असली ड्यूटी तब शुरू होती है जब उनके काम की शिफ्ट खत्म होती है। काम खत्म होने के बाद वह घर जाकर आराम करने के बजाय खुद अपने हाथों से गर्म भोजन तैयार करते हैं। इसके बाद वह दिल्ली के उन इलाकों का रुख करते हैं जहां बेघर और जरूरतमंद लोग रहते हैं ताकि कोई भी इंसान भूखा न सोए।

दिल्ली के इन इलाकों में बांटते हैं खाना

आकाश मुख्य रूप से दिल्ली के इन चार बड़े इलाकों में सक्रिय रहते हैं और घूम-घूम कर भूखों को भोजन कराते हैं। इसमें पीतमपुरा, रोहिणी, जहांगीरपुरी और जीटीबी नगर शामिल हैं।

अपनी कमाई का 40% से ज्यादा हिस्सा करते हैं खर्च, नहीं लेते कोई डोनेशन

आकाश के इस नेक काम के पीछे कोई बड़ा स्पॉन्सर, एनजीओ या बाहरी डोनेशन नहीं है। वह इस पूरे अभियान का खर्च अपनी खुद की जेब से उठाते हैं। आकाश डिलीवरी के काम से प्रतिदिन औसतन करीब ₹1200 कमाते हैं। यानी उनकी मंथली इनकम करीब ₹36000 होती है। इस कमाई में से वह हर दिन लगभग 500 रुपये जरूरतमंदों के लिए भोजन तैयार करने और उनकी मदद करने में खर्च कर देते हैं। इसका मतलब यह हुआ कि आकाश अपनी मेहनत की गाढ़ी कमाई का 40 प्रतिशत से भी अधिक हिस्सा उन अनजान लोगों के लिए गर्म खाना बनाने में लगा देते हैं जिनसे उनका कोई खून का रिश्ता तक नहीं है।

सोशल मीडिया से नहीं मिलता ₹1 भी

आकाश अपनी इस फूड ड्राइव के वीडियो रिकॉर्ड करके सोशल मीडिया पर भी शेयर करते हैं। इन वीडियोज में सिर्फ खाना बांटना ही नहीं बल्कि बेघर लोगों के चेहरे की मुस्कान और उनके साथ की गई खूबसूरत बातचीत भी कैद होती है। हालांकि इंटरनेट पर अपनी बढ़ती लोकप्रियता के बावजूद आकाश ने स्पष्ट किया कि मैं इंस्टाग्राम से जीरो रुपये कमाता हूं, मेरी फूड ड्राइव का 100% खर्च मेरी डिलीवरी की कमाई से ही आता है।

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स्वर्गीय पिता के संस्कार और सीख है सबसे बड़ी प्रेरणा

जब आकाश से हिंदुस्तान टाइम्स ने पूछा कि इतनी मामूली इनकम के बावजूद उन्हें हर दिन इस काम को करने की प्रेरणा कहां से मिलती है, तो उनका जवाब बेहद भावुक करने वाला था। आकाश ने कहा कि ये मेरे पिता के मूल्य और संस्कार। मैं बस यह सुनिश्चित करना चाहता हूं कि कोई भी इंसान भूखा न सोए।

आकाश का यह काम दिखने में जितना आसान लगता है असल जिंदगी में इसे रोज करना उतना ही चुनौतीपूर्ण है। एक फुल-टाइम डिलीवरी जॉब के साथ रोज भोजन तैयार करना और उसे बांटना बेहद थका देने वाला होता है। पैसे कमाने से लेकर, खर्चों की प्लानिंग करना, खुद खाना बनाना और फिर सही समय पर उसे जरूरतमंदों तक पहुंचाने की पूरी जिम्मेदारी अकेले आकाश के कंधों पर होती है।

डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट अन्य मीडिया आउटलेट्स की रिपोर्ट पर आधारित है। इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गई है।

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जोमैटो डिलीवरी बॉय की आंखों में थे आंसू फिर अंकित पांडेय नाम के इस शख्स ने किया दिल जीतने वाला काम

कभी-कभी इंसानियत का एक छोटा सा कदम किसी के लिए बड़ी उम्मीद बन जाता है। सोशल मीडिया पर इन दिनों एक ऐसी ही भावुक कहानी चर्चा में है, जहां एक ग्राहक ने सिर्फ अपना खाना ऑर्डर नहीं लिया, बल्कि डिलीवरी करने आए शख्स की परेशानी को भी समझा। एक सामान्य सी डिलीवरी के दौरान हुई बातचीत ने ऐसा मोड़ लिया, जिसने दोनों की जिंदगी में एक यादगार पल जोड़ दिया। ग्राहक ने जब डिलीवरी पार्टनर की आंखों में छिपी चिंता को महसूस किया, तो उसने उसकी मदद करने का फैसला किया। उसकी ये पहल अब इंटरनेट पर लोगों का दिल जीत रही है।

यूजर्स इस घटना को इंसानियत, संवेदनशीलता और सही समय पर की गई मदद की मिसाल बता रहे हैं। यह कहानी याद दिलाती है कि कई बार छोटी सी मदद भी किसी के लिए बहुत बड़ी राहत बन सकती है।

डिलीवरी देने आया शख्स, लेकिन चेहरे पर दिखा दर्द

X यूजर अंकित पांडे ने अपनी पोस्ट में इस भावुक घटना को साझा किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने Zomato से खाना ऑर्डर किया था। डिलीवरी लेकर पहुंचा व्यक्ति उनके घर पहले भी कई बार आ चुका था।

खाना देने के बाद डिलीवरी पार्टनर ने झिझकते हुए पूछा, “भैया, क्या एक गिलास पानी मिल सकता है?” अंकित ने उसे अंदर बुलाया और पानी दिया। बातचीत के दौरान उनकी नजर उसकी लाल आंखों पर पड़ी, जैसे वह काफी देर से रो रहा हो।

मां ICU में थीं, घर पहुंचने की थी चिंता

जब अंकित ने उसकी परेशानी पूछी तो उसने बताया कि उसकी मां सुबह सीढ़ियों से गिर गई थीं और गंभीर हालत में ICU में भर्ती हैं। वह अपने गांव जाना चाहता था, लेकिन ट्रेन रात 11 बजे थी और सफर में करीब 30 घंटे लगने वाले थे।

डिलीवरी पार्टनर ने चिंता जताई कि कहीं ऐसा न हो कि वह समय पर अपनी मां से मिल ही न पाए।

ग्राहक ने खाना भी दिया और फ्लाइट टिकट भी बुक कर दी

अंकित ने पहले उससे पूछा कि क्या उसने कुछ खाया है। इसके बाद उन्होंने वही खाना उसे खाने के लिए दिया, जो वह डिलीवरी करने आया था। इसके बाद उन्होंने बिना देर किए करीब 4 हजार रुपये की फ्लाइट टिकट उसके लिए बुक कर दी, ताकि वह जल्द से जल्द अपनी मां के पास पहुंच सके।

पहली बार हवाई सफर का डर

डिलीवरी पार्टनर ने बताया कि वह पहली बार फ्लाइट में बैठने वाला है और उसे एयरपोर्ट की प्रक्रिया को लेकर डर लग रहा है। अंकित ने उसे भरोसा दिलाया कि वहां उनका दोस्त उसकी मदद करेगा। कुछ घंटों बाद वह अपनी मां के पास पहुंच गया।

मां की हालत सुधरी

बाद में डिलीवरी पार्टनर ने फोन कर बताया कि उसकी मां की हालत अब बेहतर है और डॉक्टरों के मुताबिक कुछ दिनों में उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल सकती है।

उसने फ्लाइट टिकट के 4 हजार रुपये वापस करने की कोशिश की, लेकिन अंकित ने पैसे लेने से इनकार कर दिया और कहा कि वह रकम अपनी मां के इलाज और जरूरतों में इस्तेमाल करे।

कभी-कभी मदद दिल में मिलती है’

अंकित ने अपनी पोस्ट में लिखा कि किसी की जिंदगी बदलने के लिए हमेशा बड़ी रकम की जरूरत नहीं होती। कई बार एक गिलास पानी, थोड़ा खाना और समय पर मिली मदद किसी के लिए सबसे बड़ी उम्मीद बन जाती है।

सोशल मीडिया पर लोगों ने की जमकर तारीफ

यह कहानी वायरल होने के बाद इंटरनेट पर लोगों ने अंकित की जमकर सराहना की। यूजर्स ने कहा कि मुश्किल समय में की गई छोटी मदद भी किसी के लिए बहुत बड़ी साबित हो सकती है।

कई लोगों ने इसे इंसानियत और संवेदनशीलता की मिसाल बताया और कहा कि ऐसी कहानियां लोगों को दूसरों की मदद करने की प्रेरणा देती हैं।

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