Gold Outlook: क्या सोना और चांदी खरीदने का यह सही समय है? जानिए एक्सपर्ट्स की राय

Gold Outlook: सोने की कीमत में $4,600 प्रति औंस से ऊपर की तेजी ने निवेशकों के मन में फिर से यह सवाल खड़ा कर दिया है। क्या हालिया गिरावट (करेक्शन) के बाद सोना और चांदी में दोबारा निवेश करने का यह सही समय है? ऐसा करने के पक्ष में राय मजबूत हो रही है। वैलम कैपिटल की अगस्त मैक्रो ग्रिड चार्टबुक के अनुसार, अगस्त में सोने से 9% रिटर्न मिला, जो व्यापक इक्विटी मार्केट के रिटर्न का लगभग 5 गुना है, जबकि गोल्ड माइनर्स (सोना निकालने वाली कंपनियों) को 21% का फ़ायदा हुआ। वैलम कैपिटल ने अपनी हालिया रिपोर्ट में निवेशकों को सोना और चांदी “फिर से खरीदने” (reload) का सुझाव दिया है। उनका तर्क है कि कीमतों में आई गिरावट से कीमती धातुओं के प्रति सकारात्मक नजरिए (थीसिस) पर कोई असर नहीं पड़ा है।

इस हालिया तेजी में US ट्रेज़री यील्ड में गिरावट और डॉलर के कमजोर होने से मदद मिली है। ऐसा तब हुआ जब US ट्रेज़री ने लंबी अवधि के सरकारी बॉन्ड की ज़्यादा खरीद की घोषणा की। कम यील्ड से सोना रखने की ‘अपॉर्च्यूनिटी कॉस्ट’ (वैकल्पिक लागत) कम हो जाती है, जबकि राजकोषीय चिंताओं के कारण करेंसी की वैल्यू घटने (करेंसी-डिबेसमेंट) की बहस फिर से शुरू हो गई है।

वैलम कैपिटल का नजरिया सकारात्मक क्यों है?

फर्म ने अपनी हालिया रिपोर्ट में सेंट्रल बैंकों की मांग में भारी बढ़ोतरी की ओर इशारा किया है। सेंट्रल बैंकों ने 2026 की दूसरी तिमाही में 288.9 टन सोना खरीदा, जो तिमाही-दर-तिमाही आधार पर 411% ज़्यादा है। यह तब हुआ जब वेस्टर्न ETF से 44.8 टन सोने की निकासी हुई और ज्वेलरी की मांग में 17% की गिरावट आई।

वहीं, कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद सप्लाई में कोई खास बदलाव नहीं दिखा। वैलम के अनुसार, माइन प्रोडक्शन (खदानों से उत्पादन) में सिर्फ़ 2% की बढ़ोतरी हुई, रीसाइकल किए गए सोने में 6% की गिरावट आई और कुल सप्लाई स्थिर रही।

फर्म का यह भी तर्क है कि जैसे-जैसे ग्लोबल डेट (वैश्विक कर्ज) बढ़ रहा है, करेंसी की वैल्यू घटने के खिलाफ बचाव (हेज) के तौर पर सोने की भूमिका और महत्वपूर्ण होती जा रही है। उनका अनुमान है कि जमीन के ऊपर मौजूद सोने की कुल कीमत लगभग $31 ट्रिलियन है, जबकि प्रमुख सेंट्रल बैंकों की मनी सप्लाई $102 ट्रिलियन और ग्लोबल डेट लगभग $350 ट्रिलियन है।

फर्म का कहना है कि चांदी भी इस सकारात्मक नजरिए को और मजबूत करती है। 2021 से 2026 के बीच, चांदी में 263% और सोने में 164% की की बढ़ोतरी हुई। फिर भी, गोल्ड-सिल्वर रेश्यो लगभग 69 गुना बना हुआ है, जो इसके लंबे समय के औसत (मीडियन) 45-50 गुना से ज़्यादा है।

सोने-चांदी के तेजी के पीछे आंख बंद कर ना करें भरोसा

लेकिन हर कोई इस स्थिति को एक ही नजरिए से नहीं देखता। YES सिक्योरिटीज में इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज़ रिसर्च के स्ट्रैटेजिस्ट हितेश जैन ने हाल ही में एक रिपोर्ट में कहा है कि वे इस नए कदम को अलग नजरिए से देखते हैं। वे इसे सोने के लिए स्ट्रक्चरल बदलाव के बजाय एक टैक्टिकल राहत मानते हैं।

US ट्रेजरी के लॉन्ग-एंड बायबैक को प्रति ऑपरेशन कम से कम दोगुना करके $4 बिलियन करने के फैसले से लॉन्ग-टर्म यील्ड कम हुई है, जिससे सोने को थोड़े समय के लिए बढ़ावा मिला है। लेकिन जैन का तर्क है कि इस दखल से US की मूल फिस्कल समस्या हल नहीं होती क्योंकि बायबैक की गई सिक्योरिटीज की जगह नए इश्यू ले लेंगे।

उनकी बड़ी चिंता ग्लोबल कैपेक्स (कैपिटल एक्सपेंडिचर) साइकिल है। सरकारें और कंपनियां AI इंफ्रास्ट्रक्चर, डिफेंस, सेमीकंडक्टर, एनर्जी और रीशोरिंग के लिए कैपिटल जुटाने की होड़ में हैं, जिससे कैपिटल की लागत स्ट्रक्चरल रूप से ज़्यादा बनी रह सकती है। जैन ने कहा, “अगले तीन से पांच वर्षों में , हमें उम्मीद है कि सोना इक्विटी और इंडस्ट्रियल मेटल्स के मुकाबले कमजोर प्रदर्शन करेगा।”

सतर्क हैं भारतीय निवेशक

घरेलू निवेश का ट्रेंड भी बताता है कि निवेशक आंख बंद करके सोने की तेजी के पीछे नहीं भाग रहे हैं। वैलम (Vallum) के अनुसार, जुलाई में प्रेशियस-मेटल फंड में निवेश घटकर ₹4,084 करोड़ रह गया, जो जून में ₹8,680 करोड़ था। वहीं, जून में ₹65,530 करोड़ की निकासी के बाद जुलाई में मनी-मार्केट फंड में ₹1.40 लाख करोड़ का निवेश हुआ। जनवरी 2025 और जनवरी 2026 के बीच, भारतीय रिटेल निवेशकों ने गोल्ड फंड और ETF में लगभग ₹93,000 करोड़ का निवेश किया, जिसमें अकेले जनवरी में रिकॉर्ड ₹33,837 करोड़ का निवेश हुआ।

जो निवेशक फिर से निवेश करना चाहते हैं। उनके लिए एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि रियल यील्ड, डॉलर, फिस्कल पॉलिसी और सेंट्रल बैंक की खरीदारी मुख्य संकेतक बने रहेंगे।

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MPPSC Manoj Pal success story: 12वीं में 50% और 40 प्रतियोगी परीक्षाओं की असफलता भी नहीं तोड़ पाई मनोज का हौसला, आखिर फतह किया एमपीपीएससी

MPPSC Manoj Pal success story: मध्य प्रदेश में असिस्टेंट डायरेक्टर (फाइनेंस) बनने तक मनोज पाल का सफर ऐसी झकझोर देने वाली कहानी है, जो सिर्फ प्रेरणा नहीं देती। यह कहानी उनके दर्द और अथक परिश्रम को भी बयां करती है। नर्मदापुरम जिले के खपरिया गांव के रहने वाले मनोज ने लगभग 12 साल प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की। इस दौरान उन्हें बार-बार मुश्किलों का सामना करना पड़ा। लेकिन 2024 वो सुनहरा साल था, जब उन्हें अपनी बरसों की मेहनत का फल मिला, जब उन्होंने मध्य प्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन (MPPSC) का स्टेट सर्विस एग्जाम पास कर लिया। उनके सफर में आर्थिक तंगी, परिवार का दबाव और कई नाकाम कोशिशें शामिल थीं। फिर भी, उन्होंने कभी अपनी किताबों का साथ नहीं छोड़ा।

12वीं कक्षा में 50% से असिस्टेंट डायरेक्ट (वित्त) तक

मनोज ने अपनी स्कूल की पढ़ाई अपने गांव में पूरी की और कक्षा 12 में लगभग 50% अंकों से पास हुए। घर में आर्थिक तंगी की वजह से उच्च शिक्षा हासिल करना मुश्किल था। वह कॉलेज के लिए नर्मदापुरम चले गए और सरकारी परीक्षा की तैयारी करने के साथ ही बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर अपना गुजारा किया।

कोविड 19 महामारी के दौरान उनके जीवन का सबसे मुश्किल दौर आया, जब हालात की वजह से उनकी आय रुक गई। वह अपने गांव लौट आए और पढ़ाई जारी रखने के लिए मजदूरी करते हुए पैसों की कमी को पूरा किया। बाद में वे इंदौर चले गए और एक कोचिंग सेंटर में काम करते हुए अपनी तैयारी जारी रखी।

40 असफलताओं की लंबी लिस्ट

इन सालों में, मनोज ने लगभग 40 प्रतियोगी परीक्षाएं दीं, जिनमें पुलिस कांस्टेबल, फॉरेस्ट गार्ड, पटवारी, ऑडिटर और एडमिनिस्ट्रेटर के पद शामिल थे। उन्होंने कई एमपीपीएससी भर्ती के अलावा एसएससी के एमटीएस, सीएचएसएल और सीजीएल परीक्षाएं भी दीं। इनमें से कई परीक्षाओं में उन्हें आंशिक सफलता मिली, लेकिन अंतिम चयन से दूर रहे।

मुश्किल रहा एमपीपीएससी का सफर

उनका एमपीपीएससी का सफर खास तौर पर मुश्किल था। वह 9 बार परीक्षा में बैठे, हर बार प्रीलिम्स पास किया और आठ बार मेन्स स्टेज तक पहुंचे। वे सात इंटरव्यू के लिए बैठे लेकिन फाइनल लिस्ट में जगह नहीं बना सके।

डिसिप्लिन के आस-पास बना रूटीन

बार-बार फेल होने के बावजूद, पाल ने पढ़ाई का एक सख्त रूटीन बनाए रखा। वे सुबह 6 बजे लाइब्रेरी पहुंचते और घंटों पढ़ते, दिन में घर लौटकर खाना बनाते, खाते और फिर वापस चले जाते। वे अक्सर आधी रात या 1 बजे तक पढ़ते थे। उनकी तैयारी में रोजाना छह से आठ घंटे पढ़ाई, रेगुलर मॉक टेस्ट और अपनी गलतियों का डिटेल्ड एनालिसिस शामिल था। इसके अलावा, दोस्तों के साथ मुश्किल टॉपिक पर चर्चा और अपनी परीक्षा की रणनीति बनाने के लिए पिछले सालों के प्रश्नपत्र भी हल किए।

खुद पर भरोसा

मनोज का परिवार एक निम्न मध्यम वर्गीय किसान परिवार है। हालांकि उनके परिवार ने उनकी तैयारी में काफी मदद की, लेकिन लंबे समय तक बिना नौकरी के रहना एक बड़ी चिंता थी। उनका परिवार उनकी उम्र और जिम्मेदारियों को लेकर भी परेशान था, जिसमें उनकी बहनों की शादियां भी शामिल थीं। उन्होंने कहा कि गडरिया (गड़रिया) कम्युनिटी से होने का मतलब यह भी था कि उनके आस-पास के लोग उनसे ज्यादा उम्मीद नहीं करते थे। फिर भी, उन्होंने तैयारी जारी रखी।

वह चयन जिसने खत्म किया 12 साल का इंतजार

राज्य सेवा परीक्षा 2024 में उनके चयन से आखिरकार सालों की अनिश्चितता खत्म हुई। उनके परिवार के लिए, यह पल बहुत इमोशनल था। पाल ने अपनी सफलता का क्रेडिट अपने माता-पिता के आशीर्वाद, अपने परिवार के सपोर्ट और मां नर्मदा की कृपा को दिया। उनके परिवार का रिएक्शन उनके प्रयासों में उनके भरोसे को दिखाता है: “भगवान का न्याय देर से मिल सकता है, लेकिन उसे कभी नकारा नहीं जा सकता।”

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Dog Mask Video: कुत्ते का मास्क पहनकर खंडवा कलेक्ट्रेट पहुंचा फरियादी! कुत्तों की नसबंदी में भ्रष्टाचार का संगीन आरोप, अनोखे प्रोटेस्ट का वीडियो वायरल

Dog Mask Video: मध्य प्रदेश के खंडवा में एक अनोखे विरोध प्रदर्शन में नगर निगम में विपक्ष के नेता दीपक मुल्लू राठौर मंगलवार (18 अगस्त) को जनसुनवाई में एक ऐसे व्यक्ति को लेकर पहुंचे। खास बात यह है कि उस शख्स ने कुत्ते का मुखौटा पहन रखा था। उन्होंने आवारा कुत्तों की नसबंदी प्रक्रिया में कथित भ्रष्टाचार एवं अनियमितताओं को लेकर शिकायत दर्ज कराई। नगर निगम कार्यालय में हुए इस प्रदर्शन के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद इसकी चर्चा शुरू हो गई है।

शहर में आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या के विरोध में सख्स कुत्ते का मास्क पहनकर कलेक्ट्रेट पहुंच गया। सुरक्षाकर्मियों ने शुरू में उनके अजीब पहनावे के कारण उन्हें अंदर जाने से रोका। लेकिन विपक्ष के नेताओं के दखल देने के बाद उन्हें अंदर जाने दिया गया

राठौर ने नगर निगम पर कुत्तों की नसबंदी के नाम पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए निगम के कोष और आवारा कुत्तों की नसबंदी की प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रतीकात्मक प्रदर्शन के जरिए प्रशासन का ध्यान नसबंदी अभियान में कथित लापरवाही की ओर आकर्षित किया गया है। इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। प्रदर्शन देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग आ गए।

आवारा कुत्तों के नाम पर खर्च पर उठाए सवाल

दीपक राठौर ने आरोप लगाया कि नगर निगम की ओर से आवारा कुत्तों की नसबंदी के नाम पर पिछले चार सालों में करीब 40 लाख रुपये खर्च किए गए। लेकिन इसके बावजूद शहर में आवारा कुत्तों की संख्या कम होने के बजाय लगातार बढ़ती जा रही है।

राठौर ने नगर निगम की ओर से आवारा कुत्तों के नसबंदी अभियान में कथित वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए कहा कि अगर लाखों रुपये वास्तव में कुत्तों की नसबंदी पर खर्च किए गए हैं, तो फिर आवारा कुत्तों की संख्या कम क्यों नहीं हुई? उन्होंने यह भी दावा किया कि पिछले चार वर्षों में खंडवा में 13,225 कुत्ते के काटने के मामले सामने आए हैं। इन आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने नसबंदी अभियान की प्रभावशीलता और पारदर्शिता पर सवाल उठाए।

‘मामला सिर्फ प्रशासनिक नहीं, लोगों की सुरक्षा से जुड़ा’

राठौर ने कहा कि आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या सिर्फ एक प्रशासनिक मुद्दा नहीं है। बल्कि सीधे तौर पर लोगों की सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी हुई है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर नसबंदी अभियान पर बड़ी रकम खर्च की गई है, तो फिर आवारा कुत्तों की संख्या और डॉग बाइट के मामले लगातार बढ़ने की वजह क्या है?

ADM को सौंपा ज्ञापन, जांच की मांग

नगर निगम नेता प्रतिपक्ष दीपक राठौर ने इस मामले को लेकर अपर जिला मजिस्ट्रेट (ADM) काशीराम बड़ोले को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में आवारा कुत्तों की नसबंदी अभियान की वित्तीय और तकनीकी जांच कराने की मांग की गई है। शिकायत में नसबंदी अभियान से जुड़े कई बिंदुओं की जांच की मांग की गई है।

इनमें टेंडर आवंटन प्रक्रिया, नियुक्त एजेंसी की पात्रता, भुगतान संबंधी रिकॉर्ड और जमीन पर नसबंदी किए गए कुत्तों का भौतिक सत्यापन शामिल है। राठौर ने यह भी मांग की है कि यदि जांच में फर्जी बिलिंग या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों या ठेकेदारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए।

‘नसबंदी के नाम पर सरकारी फंड का दुरुपयोग’

राठौर ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से कहा, “अगर नसबंदी के नाम पर सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ है तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।” अतिरिक्त कलेक्टर काशीराम बडोले ने पत्रकारों को बताया कि कुछ लोग कुत्ते के मुखौटे पहनकर जनसुनवाई में पहुंचे। इस दौरान आवारा कुत्तों की नसबंदी के लिए जारी धन के कथित दुरुपयोग को लेकर आवेदन दिए।

उन्होंने बताया कि इस संबंध में नगर निगम आयुक्त से जानकारी मांगी गई है। बडोले ने कहा कि मामले की जांच के लिए एक समिति गठित की जाएगी और तथ्यों का पता लगाया जाएगा। राठौर ने कहा, इस विरोध का मकसद नगर निगम के आवारा कुत्तों के मैनेजमेंट के प्रयासों में कथित वित्तीय गड़बड़ियों को उजागर करना था।”

उन्होंने दावा किया कि पिछले चार वर्षों में कुत्तों की नसबंदी (स्टेरिलाइज़ेशन) के लिए नगर निगम द्वारा लगभग 40 लाख रुपये खर्च करने के बावजूद, आवारा कुत्तों की आबादी लगातार बढ़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले चार वर्षों में खंडवा में कुत्ते के काटने के 13,225 मामले दर्ज किए गए हैं, जिससे नसबंदी अभियान की प्रभावशीलता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठते हैं।

ADM ने दिया जांच का भरोसा

मामले पर ADM काशीराम बड़ोले ने शिकायत की जांच कराने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि जनसुनवाई के दौरान जो मामला सामने रखा गया है। उसकी पूरी जांच की जाएगी। ADM के मुताबिक, अगर जांच में किसी तरह की अनियमितता सामने आती है तो नियमों के तहत जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस पूरे घटनाक्रम में कुत्ते का मुखौटा पहनकर किया गया विरोध लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।

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Small Cap Stocks: क्या अब स्मॉलकैप स्टॉक्स में निवेश का सही मौका है? Ambit ने बताए अच्छे रिटर्न के 5 बड़े संकेत

Small Cap Stocks: साल 2025 की शुरुआत से आई गिरावट के बाद अब स्मॉलकैप शेयरों में जोखिम और रिटर्न का संतुलन पहले से बेहतर दिख रहा है। Ambit Asset Management का कहना है कि अब कमाई, वैल्यूएशन, कैपेक्स, घरेलू निवेश और ग्लोबल माहौल जैसे कई बड़े फैक्टर स्मॉलकैप शेयरों के पक्ष में नजर आ रहे हैं।

कंपनी का मानना है कि इस बार की गिरावट पहले जैसी नहीं थी। यह ज्यादातर वैल्यूएशन करेक्शन था, न कि क्रेडिट संकट या अर्थव्यवस्था में बड़ी कमजोरी की वजह से। आइए जानते हैं कि Ambit किन 5 कारणों से स्मॉल कैप स्टॉक्स पर दांव लगाने का सुझाव दे रहा है।

1. कमाई में फिर आई तेजी

Ambit के मुताबिक, जून 2026 तक Nifty Smallcap 250 कंपनियों का PAT सालाना आधार पर करीब 27% बढ़ा है। यह ग्रोथ लार्जकैप कंपनियों से भी बेहतर रही।

पिछली दो तिमाहियों में रेवेन्यू और EBITDA दोनों में सुधार आया है। साथ ही FY27 के लिए कमाई के अनुमान भी बढ़ाए गए हैं।

2. वैल्यूएशन पहले से ज्यादा आकर्षक

स्मॉलकैप शेयरों में सबसे बड़ा वैल्यूएशन रीसेट देखने को मिला है। जुलाई 2026 तक करीब 47% स्मॉलकैप शेयर अपने 10 साल के औसत वैल्यूएशन से नीचे ट्रेड कर रहे थे।

तुलना करें तो मिडकैप में यह आंकड़ा 31% और लार्जकैप में 27% था। 18 में से 12 स्मॉलकैप सेक्टर अब अपने लंबे समय के औसत वैल्यूएशन से नीचे आ चुके हैं।

3. कैपेक्स मजबूत बना हुआ है

FY26 में लिस्टेड कंपनियों का कुल कैपिटल एक्सपेंडिचर 9% बढ़कर ₹11.5 लाख करोड़ पहुंच गया। इसमें मिडकैप कंपनियों का कैपेक्स 16% और स्मॉलकैप कंपनियों का 13% बढ़ा।

Ambit का अनुमान है कि अगले चार साल में पावर, डेटा सेंटर और सेमीकंडक्टर जैसे सेक्टरों में ₹20-25 लाख करोड़ का अतिरिक्त निवेश हो सकता है।

4. घरेलू निवेशकों का बढ़ा भरोसा

स्मॉलकैप म्यूचुअल फंड में निवेश तेजी से बढ़ा है। FY22 में जहां नेट इनफ्लो ₹10,145 करोड़ था, वहीं FY26 में यह बढ़कर ₹51,872 करोड़ पहुंच गया।

साथ ही Nifty Smallcap 250 में ट्रेडिंग एक्टिविटी भी फरवरी 2025 के मुकाबले जून 2026 तक काफी बढ़ गई है, जिससे बाजार में लिक्विडिटी बेहतर हुई है।

5. ट्रेड डील से मिल सकता है फायदा

Ambit का कहना है कि भारत के नए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का सबसे ज्यादा फायदा स्मॉलकैप कंपनियों को मिल सकता है। खासकर कैपिटल गुड्स, ऑटो कंपोनेंट, केमिकल, टेक्सटाइल, पावर और मेटल सेक्टर की कंपनियां इससे लाभ उठा सकती हैं।

इसके अलावा अमेरिका-ईरान संघर्ष के बाद बने सीजफायर माहौल और भारत-अमेरिका ट्रेड वार्ता में प्रगति से भी निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है।

निवेशकों के लिए क्या मतलब है?

Ambit Asset Management का मानना है कि स्मॉलकैप शेयरों में फिर से तेजी के लिए जरूरी कई हालात बनते दिख रहे हैं। हालांकि, हर स्मॉलकैप शेयर एक जैसा नहीं होता। इसलिए मजबूत बैलेंस शीट, बेहतर कमाई और उचित वैल्यूएशन वाली कंपनियों का चयन करना ज्यादा अहम रहेगा।

Amber Enterprises: ओप्पो, वनप्लस और रियलमी के फोन बनाएगी कंपनी, अगले साल से प्रोडक्शन शुरू होगा

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एक गलती…और टूट गया 10 साल पुराना रिश्ता, पत्नी से धोखा मिलने के बाद पति ने खत्म किया रिश्ता, वायरल हुई कहानी

सोशल मीडिया पर एक महिला का पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है। पोस्ट में महिला ने बताया की एक गलती की वजह से उसके पति ने 10 साल पुरानी शादी तोड़ दिया। इस मामले के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर चर्चा शुरू हो गई। लोग इस बात पर बहस कर रहे हैं कि क्या एक बार किया गया धोखा इतने सालों के रिश्ते, प्यार और साथ को खत्म करने के लिए काफी है, या फिर टूटे भरोसे के बाद रिश्ते को बचाना मुश्किल हो जाता है। जानें क्या है पूरा मामला

महिला ने पति को दिया धोखा

X यूजर SamSiff ने एक महिला से जुड़ी पोस्ट शेयर की। पोस्ट में दावा किया गया कि, महिला ने अपने पति को धोखा दिया, जिसके बाद पति ने उसे तलाक दे दिया। बताया गया कि तलाक से पहले दोनों की शादी को 10 साल हो चुके थे। कहानी शेयर करते हुए यूजर ने लिखा, “उसने सिर्फ एक बार धोखा दिया, लेकिन पति ने 10 साल पुरानी शादी खत्म करने का फैसला कर लिया। अब लोग इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि क्या सिर्फ एक गलती की वजह से किसी रिश्ते के 10 साल को खत्म कर देना सही है?”

नहीं दिया सफाई का मौका

पोस्ट के साथ एक तस्वीर भी शेयर की गई थी, जिसमें महिला ने पूरे मामले को लेकर अपनी बात रखी थी। महिला ने दावा किया कि 10 साल की शादी में उसने सिर्फ एक बार पति को धोखा दिया, लेकिन पति ने उसे सफाई या रिश्ता सुधारने का मौका दिए बिना तलाक ले लिया। महिला ने अपनी बात रखते हुए लिखा, “मैंने शादी के 10 साल में सिर्फ एक बार अपने पति को धोखा दिया। यह मेरी एक गलती थी, लेकिन इसके बाद वह मुझसे पूरी तरह दूर हो गया, जैसे मैं उसके लिए सबसे बुरी इंसान हूं। उसने न तो मुझसे बात करने की कोशिश की, न रिश्ते को बचाने का कोई मौका दिया और न ही मेरी बात सुनी। इसके बजाय उसने तलाक के कागज मेरे सामने रख दिए।”

2 साल से मांद रही मांफी

महिला ने आगे बताया, “यह घटना दो साल पहले हुई थी। तब से मैं लगातार माफी मांगती रही, रोती रही और रिश्ता बचाने की कोशिश करती रही, लेकिन उसने मेरी कोई बात नहीं सुनी। हमने साथ मिलकर 10 साल की जिंदगी बिताई और कई यादें बनाई थीं। मुझे समझ नहीं आता कि कोई इंसान इतने सालों के रिश्ते और साथ को इतनी आसानी से कैसे भुला सकता है।” महिला का पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने कहा कि, रिश्ते की लंबी अवधि से ज्यादा जरूरी भरोसा होता है और एक बार विश्वास टूट जाने के बाद शादी को पहले जैसा बनाए रखना आसान नहीं होता।

लोगों ने किया कमेंट

एक यूजर ने महिला की आलोचना करते हुए लिखा, “बड़ी मेट्रो की लड़कियां और महिलाएं आखिर क्या उम्मीद कर रही हैं? एक बार धोखा देना हो या 20 बार, इससे क्या फर्क पड़ता है? अगर स्थिति उलट होती और पति ऐसा करता, तो शायद वह भी अपनी पत्नी की जिंदगी बर्बाद कर देता। उसे इस बात की गंभीरता समझनी चाहिए।”

एक और कमेंट करने वाले ने महिला पर कहानी को मैनिपुलेट करने की कोशिश करने का आरोप लगाते हुए कहा, “एलीट लेवल की गैसलाइटिंग। जो कोई भी उसके पक्ष में बात करता है या उसका सपोर्ट करता है, वह सबसे बुरे लोग हैं।” एक यूजर ने लिखा, “कितनी ऊपरी सोच है.. यह सिर्फ एक गलती नहीं है बल्कि भरोसा टूटना है.. धोखा तो धोखा है… बस। माफ नहीं किया जा सकता।”