सिर्फ 50 हजार में शुरू कर सकते हैं अपना मेडिकल स्टोर का बिजनेस! जानिए लाइसेंस और जरूरी नियमों की पूरी प्रक्रिया

कुछ लोगों को किसी और की नौकरी करने के बजाए अपना खुद का छोटा-मोटा कारोबार करना ज्यादा रास आता है। लेकिन इसके लिए सिर्फ इच्छा होना काफी नहीं है, कुछ बेसिक सवाल हैं जिनके जवाब अंतिम फैसला लेने के लिए बहुत जरूरी हैं। इनमें सबसे पहला सवाल है छोटा-मोटा कारोबार, मगर क्या? इसके बाद पूंजी, जगह और जरूरी कागजी कार्रवाई। ऐसे में, अगर आप भी छोटी पूंजी से बड़े और लंबे समय के लिए टिकाऊ बिजनेस आइडिया तलाश रहे हैं, तो मेडिकल स्टोर अच्छा विकल्प हो सकता है।

कभी न कभी छोटे-बड़े सभी को दवाओं की जरूरत जरूर पड़ती है। इसलिए मेडिकल स्टोर को ऐसे व्यवसाय के रूप में देखा जाता है, जो हफ्ते के 7 दिन और 12 महीने कमाई सकता है। देवघर के घोरलास निवासी गुंजन कुमार ने लोकल 18 इसमें बहुत ज्यादा पूंजी लगाने की जरूरत नहीं होती है। खास बात यह है कि इसे अपनी क्षमता के अनुसार छोटे स्तर से शुरू करके आगे बढ़ाया जा सकता है। उसे धीरे-धीरे बड़ा भी किया जा सकता है।

मेडिकल खोलने के लिए क्या है प्रक्रिया?

मेडिकल स्टोर खोलने के लिए सबसे पहले कुछ जरूरी नियम और प्रक्रिया पूरी करनी होती है। दवा की दुकान या मेडिकल स्टोर शुरू करने के इच्छुक युवाओं के लिए सबसे पहले दुकान के नाम से जरूरी लाइसेंस बनवाना आवश्यक होता है। इसके लिए फार्मासिस्ट की योग्यता होना जरूरी है। यानी दवा की दुकान के लाइसेंस के लिए फार्मासिस्ट की डिग्री या डिप्लोमा होना चाहिए। इसके बाद दुकान से जुड़े जरूरी मापदंड भी पूरे करने होते हैं।

मेडिकल स्टोर के लिए जरूरी जगह

गुंजन राय के अनुसार मेडिकल स्टोर के लिए कम से कम 150 स्क्वायर फीट जगह का होना जरूरी है। इसलिए दुकान शुरू करने से पहले जगह और लाइसेंस से जुड़ी सभी आवश्यकताओं को समझ लेना जरूरी है।

लाइसेंस प्रक्रिया में चालान जमा करना है जरूरी

लाइसेंस की प्रक्रिया में चालान भी जमा करना होता है। इसके लिए करीब 3 हजार रुपये का चालान कटता है और यह लाइसेंस पांच साल तक वैध रहता है। पांच साल पूरा होने के बाद इसे दोबारा रिन्यू कराना पड़ता है। यानी सिर्फ दुकान खोल लेना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि दवा बेचने के लिए जरूरी लाइसेंस और नियमों का पालन करना भी जरूरी है।

कितनी पूंजी के साथ खोल सकते हैं मेडिकल स्टोर?

मेडिकल स्टोर खोलने के इच्छुक लोगों के पास शुरुआती पूंजी होनी भी बेहद जरूरी है। मेडिकल स्टोर का काम करीब 50 हजार रुपये से भी शुरू किया जा सकता है। हालांकि दुकान की व्यवस्था और दवाइयों का अच्छा स्टॉक रखने के लिए करीब एक लाख रुपये का निवेश किया जाए तो शुरुआत बेहतर तरीके से की जा सकती है।

मेडिकल स्टोर में है छोटी शुरुआत से आगे बढ़ने की गुंजाइश

मेडिकल स्टोर एक ऐसा क्षेत्र हो सकता है, जिसमें शुरुआत छोटी रखकर धीरे-धीरे कारोबार को आगे बढ़ाने की गुंजाइश रहती है। हालांकि दवा का व्यवसाय सीधे लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ा है, इसलिए इसमें लाइसेंस, फार्मासिस्ट और दवाइयों की बिक्री से जुड़े सभी सरकारी नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है।

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कोडिंग छोड़कर जंगलों में रहकर, जानवरों से सीखा बिजनेस और खड़ा कर दिया करोड़ों का स्टार्टअप!

13 साल तक टेक्नोलॉजी की दुनिया में काम करने के बाद हैदराबाद के एक इंजीनियर ने अपना करियर बदलने का फैसला किया। उन्होंने IT की नौकरी छोड़कर वाइल्डलाइफ के अपने पुराने शौक को ही बिजनेस का रूप दे दिया। इस तरह ‘वाइल्डलाइफ व्हिस्परर्स’ की शुरुआत हुई, जो जानवरों और नेचर से मिलने वाली सीख को कॉर्पोरेट ट्रेनिंग से जोड़ती है। बिना किसी बाहरी फंडिंग के शुरू हुई इस कंपनी ने पहले ही साल करीब 80 लाख रुपये का रेवेन्यू कमाया।

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टेक से वाइल्डलाइफ तक

2010 में इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने हैदराबाद, चेन्नई और मुंबई में काम किया। इसके बाद 2014 में डेटा साइंस में मास्टर्स करने के लिए अमेरिका चले गए। IT में काम करते हुए भी उनका नेचर और जानवरों से प्यार कम नहीं हुआ। वीकेंड पर वह DSLR कैमरा लेकर जंगल और नेशनल पार्क घूमने निकल जाते थे। धीरे-धीरे भारत, अमेरिका और अफ्रीका के कई नेशनल पार्कों में ट्रैवल ने उनकी इस दिलचस्पी को और बढ़ा दिया।

 

 

फोटोग्राफी से मिला नया बिजनेस विजन

शुरुआत में वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी उनके लिए जानवरों की फोटो लेने का एक शौक था। लेकिन बाद में उन्हें समझ आया कि जंगल सिर्फ खूबसूरत तस्वीरों के लिए नहीं, बल्कि जानवरों का व्यवहार, उनका एक-दूसरे के साथ जुड़ाव और मुश्किल कंडीशन में उनका सर्वाइव करना इंसानों को भी बहुत कुछ सिखा सकता है। इसी सोच ने आगे चलकर उनके बिजनेस आइडिया की नींव रखी।

 

 

जंगली जानवरों ने सिखाया कॉर्पोरेट मैनेजमेंट

‘वाइल्डलाइफ व्हिस्परर्स’ में जंगल और जानवरों के उदाहरणों के जरिए कॉर्पोरेट टीमों को कई जरूरी बातें सिखाई जाती हैं। जैसे, शेरों से टीमवर्क, चींटियों से काम बांटने यानी डेलिगेशन और मधुमक्खियों से खतरे के समय मिलकर काम करने की सीख ली जाती है। इन उदाहरणों को लीडरशिप, टीमवर्क, मुश्किल समय में मजबूती से टिके रहने और माइंडफुलनेस जैसे सब्जेक्ट से जोड़ा जाता है।

 

 

जंगल बना ट्रेनिंग क्लासरूम

यह बिजनेस सिर्फ ऑफिस में बैठकर होने वाली सामान्य ट्रेनिंग तक सीमित नहीं है। कंपनी कॉर्पोरेट वर्कशॉप के साथ-साथ कई दिनों तक चलने वाले जंगल के एक्सपीरियंस भी कराती है। इन प्रोग्राम्स में टीम के लोगों को नेचर के पास ले जाकर ऐसी एक्टिविटी कराई जाती हैं, जिनसे वे लीडरशिप और मुश्किल हालात में सही फैसला लेने जैसी चीजें सीख सकें। इस तरह जंगल एक तरह से उनका अलग और अनोखा ट्रेनिंग क्लासरूम बन जाता है।

 

लाखों के आइडिया का हिट फॉर्मूला

इस अनोखे बिजनेस आइडिया को कॉर्पोरेट कंपनियों से अच्छा रिस्पॉन्स मिला। रिपोर्ट के मुताबिक, बिना इन्वेस्टमेंट के शुरू हुई ‘वाइल्डलाइफ व्हिस्परर्स’ ने अपने पहले साल में करीब 80 लाख रुपये का रेवेन्यू कमाया। कंपनी ने परफेटी वैन मेले और सीमेंस डिजिटल जैसी कंपनियों के साथ काम किया है। इस बिजनेस में टेक्नोलॉजी और कॉर्पोरेट एक्सपेरिएंस को नेचर और वाइल्डलाइफ के जुनून के साथ जोड़कर एक बिल्कुल अलग तरह का मॉडल तैयार किया गया है।

 

यह कहानी बताती है कि करियर शिफ्ट करने के साथ अपने जुनून पर भरोसा करना भी जरूरी है। सही सोच और मेहनत के साथ पसंद के काम को भी एक सफल बिजनेस बनाया जा सकता है। नेचर से सीख लेकर शुरू किया गया यह अनोखा सफर दूसरों को भी अपनी स्किल और इंटरेस्ट को नए तरीके से देखने के लिए इंस्पिरेशन देता है।