IIT कानपुर की ग्रेजुएट ने बताया, आखिर क्यों दोस्त ने वर्क फ्रॉम होम की नौकरी छोड़ दी? 10 से 6 की शर्त बनी वजह

वर्क फ्रॉम होम को अक्सर आजादी और सुविधा से जोड़कर देखा जाता है। लोगों को लगता है कि घर से काम करने पर वे अपने समय के हिसाब से जिंदगी और नौकरी के बीच संतुलन बना सकते हैं। लेकिन क्या सच में ऐसा है? एक महिला ने इसी सवाल के बीच अपनी पूरी तरह रिमोट नौकरी छोड़ने का फैसला किया। वजह थी कंपनी की यह शर्त कि उन्हें सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक लगातार ऑनलाइन और उपलब्ध रहना होगा। इस घटना ने काम के घंटों, कर्मचारियों की आजादी और कंपनियों के भरोसे को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

ऑफिस से बचने के लिए चुना वर्क फ्रॉम होम

इस मामले को IIT कानपुर की पूर्व छात्रा और McKinsey में काम कर चुकीं कनक अग्रवाल ने LinkedIn पर साझा किया। उन्होंने अपनी एक दोस्त का अनुभव बताते हुए सवाल उठाया कि अगर कर्मचारी को घर से काम करते हुए भी ऑफिस जैसी समय-सारणी का पालन करना पड़े, तो रिमोट वर्क का असली फायदा क्या है? कनक के मुताबिक, उनकी दोस्त ने इसी वजह से नौकरी छोड़ दी। वह घर से काम तो कर रही थीं, लेकिन कंपनी चाहती थी कि वह तय समय के दौरान लगातार ऑनलाइन रहें और अपनी उपलब्धता दिखाती रहें। कनक ने इस स्थिति को केवल ऑफिस बनाम घर से काम करने का मामला नहीं, बल्कि अपने समय पर नियंत्रण रखने की आजादी से जुड़ा मुद्दा बताया।

काम पूरा करना जरूरी या पूरे दिन ऑनलाइन दिखना?

कनक का कहना है कि रिमोट वर्क की असली ताकत सिर्फ काम करने की जगह बदलने में नहीं, बल्कि काम करने के समय पर कुछ हद तक नियंत्रण मिलने में है। कर्मचारी अपनी ऊर्जा, उत्पादकता और निजी जरूरतों के अनुसार दिन की योजना बना सकें, तो उनके लिए काम और जिंदगी के बीच संतुलन बनाना आसान हो सकता है।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि कई कंपनियां कर्मचारियों के काम के नतीजों के बजाय उनकी ऑनलाइन मौजूदगी को प्रतिबद्धता का पैमाना क्यों मानती हैं। उनके अनुसार, जब कर्मचारी अपने समय को खुद व्यवस्थित करने लगते हैं, तो कुछ संगठनों को नियंत्रण कम होने का डर सताने लगता है।

क्या हर नौकरी में मिल सकती है समय की पूरी आजादी?

LinkedIn पर इस पोस्ट के बाद लोगों की अलग-अलग राय सामने आई। कुछ यूजर्स ने माना कि अपने समय पर नियंत्रण मिलने के बाद उसे छोड़ना मुश्किल होता है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि रिमोट वर्क और फ्लेक्सिबल वर्किंग आवर्स दोनों अलग-अलग चीजें हैं। कुछ लोगों ने टीमवर्क की व्यावहारिक चुनौतियों की ओर ध्यान दिलाया। उनके मुताबिक, अगर हर कर्मचारी अपनी सुविधानुसार अलग-अलग समय पर काम करेगा, तो मीटिंग, बातचीत और जरूरी कामों में तालमेल बिठाना मुश्किल हो सकता है। एक यूजर ने तो यह भी कहा कि कंपनी की 10 में से 9 भूमिकाओं में पूरी तरह लचीले समय की व्यवस्था लागू करना संभव नहीं होगा।

आखिर कर्मचारी चाहते क्या हैं?

यह बहस बताती है कि आज कर्मचारियों के लिए केवल घर से काम करना ही पर्याप्त नहीं है। वे चाहते हैं कि उनके काम की गुणवत्ता और परिणामों को महत्व मिले, साथ ही उन्हें अपनी निजी जिंदगी के लिए भी समय मिल सके। हालांकि, हर नौकरी में एक जैसी आजादी संभव नहीं है। कंपनियों को टीम की जरूरतों और कर्मचारियों की स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाना होगा। आखिरकार, सवाल सिर्फ यह नहीं है कि कर्मचारी कहां से काम करते हैं, बल्कि यह भी है कि उन्हें अपने काम और समय को व्यवस्थित करने की कितनी आजादी मिलती है।

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IIT रुड़की के हरकिरत सिंह की अनोखी करियर जर्नी, पहले फ्रीलांसिंग से ₹80 लाख कमाए, अब ₹4 करोड़ का पैकेज

हर कोई लाखों के पैकेज वाली नौकरी पाने का सपना देखता है, लेकिन IIT रुड़की के हरकिरत सिंह ने नौकरी मिलने के बाद ही अपना रास्ता बदलने का फैसला किया। Goldman Sachs जैसी बड़ी कंपनी छोड़कर उन्होंने फ्रीलांसिंग में हाथ आजमाया और रिपोर्ट्स के मुताबिक, सालाना 80 लाख रुपये तक कमाए। अब Gather में उनकी रिमोट सॉफ्टवेयर डेवलपर की नौकरी का पैकेज करीब 4 करोड़ रुपये बताया जा रहा है। उनकी कहानी सिर्फ मोटी सैलरी तक पहुंचने की नहीं, बल्कि करियर में अलग रास्ता चुनने के फैसले की भी है। हालांकि, इतनी बड़ी कमाई की खबर के बीच यह समझना भी जरूरी है कि हर किसी के लिए ऐसा सफर एक जैसा नहीं होता।

IIT रुड़की से पढ़ाई, Google के प्रोग्राम में भी लिया हिस्सा

हरकिरत सिंह ने 2018 में IIT रुड़की से कंप्यूटर साइंस में बीटेक किया था। उनकी प्रोफेशनल यात्रा में Google Summer of Code में दो बार हिस्सा लेना भी शामिल रहा। इसके अलावा, उन्होंने FAANG कंपनियों, फाइनेंस सेक्टर और स्टार्टअप्स के साथ काम करके अपना अनुभव बढ़ाया। इस तरह उनका करियर सिर्फ एक कंपनी या एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा।

Goldman Sachs छोड़ी, फ्रीलांसिंग को बनाया कमाई का जरिया

आमतौर पर बड़ी वित्तीय कंपनी में नौकरी मिलना युवाओं के लिए बड़ी उपलब्धि माना जाता है। लेकिन हरकिरत ने महामारी से ठीक पहले इस नौकरी को छोड़कर दूसरे अवसर तलाशने का फैसला किया। इसके बाद उन्होंने फ्रीलांसिंग के जरिए काम करना शुरू किया।

बताया जाता है कि इस दौरान उनकी सालाना कमाई करीब 80 लाख रुपये तक पहुंच गई। अलग-अलग प्रोजेक्ट्स पर काम करने और तकनीकी कौशल का इस्तेमाल करने से उन्हें वैश्विक बाजार में अवसर तलाशने का मौका मिला।

अब ₹4 करोड़ के रिमोट पैकेज की चर्चा

हरकिरत सिंह को लेकर साझा की जा रही जानकारी के मुताबिक, उन्हें Gather में रिमोट सॉफ्टवेयर डेवलपर की भूमिका मिली, जिसके लिए सालाना पैकेज करीब 4 करोड़ रुपये बताया जा रहा है। हालांकि, इस रकम और नौकरी की शर्तों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती।

सोशल मीडिया पर छिड़ी नौकरी को लेकर बहस

उनकी कहानी पर कुछ यूजर्स ने तकनीकी कौशल और लगातार सीखते रहने की अहमियत बताई। वहीं, एक यूजर ने कहा कि फ्रेशर्स और जूनियर कर्मचारियों के लिए रिमोट नौकरी पाना आज भी मुश्किल है, जबकि अनुभवी लोगों को अपेक्षाकृत ज्यादा अवसर मिलते हैं।

हरकिरत की यात्रा यही दिखाती है कि करियर में नए रास्ते तलाशना फायदेमंद हो सकता है, लेकिन इसके लिए कौशल, अनुभव और जोखिम उठाने की तैयारी भी जरूरी है।

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127% सैलरी हाइक का ऑफर ठुकराए या नई नौकरी जॉइन करे? कर्मचारी की दुविधा पर Reddit यूजर्स ने दी सलाह

नौकरी बदलने का फैसला आसान नहीं होता, खासकर तब जब नई कंपनी पहले से कहीं ज्यादा सैलरी देने को तैयार हो और मौजूदा कंपनी भी आपको रोकने के लिए वेतन बढ़ाने का प्रस्ताव दे। बेंगलुरु में काम करने वाले एक क्लिनिकल डेटा स्पेशलिस्ट के सामने ऐसी ही स्थिति आ गई है। उन्हें नई नौकरी में 127 फीसदी सैलरी हाइक का ऑफर मिला है। अब उनकी मौजूदा कंपनी भी वेतन बढ़ाकर उन्हें अपने साथ बनाए रखना चाहती है।

कर्मचारी ने Reddit पर अपनी परेशानी साझा करते हुए बताया कि नई नौकरी में पूरी तरह वर्क फ्रॉम होम की सुविधा और घर से काम करने के लिए जरूरी सामान खरीदने हेतु जॉइनिंग बोनस भी दिया जा रहा है। हालांकि, नई जगह काम का दबाव कितना होगा और वर्क-लाइफ बैलेंस कैसा रहेगा, इसे लेकर वह असमंजस में हैं।

पुरानी कंपनी में सुकून, लेकिन भविष्य को लेकर चिंता

कर्मचारी की मौजूदा कंपनी क्लिनिकल रिसर्च इंडस्ट्री में फंक्शनल सर्विस प्रोवाइडर (FSP) मॉडल के तहत काम करती है। उनके मुताबिक, पुरानी नौकरी में टीम और काम करने का तरीका जाना-पहचाना है। काम भी फिलहाल संभालने लायक है, इसलिए वहां बने रहने का मन था।

लेकिन मौजूदा प्रोजेक्ट या FSP एंगेजमेंट को लेकर अनिश्चितता और मैनेजर के कंपनी छोड़ने से उनकी चिंता बढ़ गई है। कंपनी ने नई नौकरी के ऑफर के जवाब में सैलरी मैच करने की संभावना जताई है, मगर अभी तक कोई आधिकारिक फैसला नहीं आया है।

कर्मचारी के सामने सवाल है कि अगर पुरानी कंपनी भी उतनी ही सैलरी देने लगे, तो क्या सिर्फ नए अवसर के लिए नौकरी बदलना सही होगा? या फिर परिचित माहौल में बने रहना ही बेहतर फैसला है?

Reddit यूजर्स ने दी सलाह, काउंटर ऑफर स्वीकार करने से पहले सोचें

कर्मचारी की पोस्ट पर कई Reddit यूजर्स ने उन्हें नई नौकरी चुनने की सलाह दी। कुछ लोगों का मानना था कि इस्तीफे की बात सामने आने के बाद कंपनी का व्यवहार बदल सकता है और भविष्य में कर्मचारी पर ज्यादा काम का दबाव डाला जा सकता है।

एक यूजर ने सलाह दी कि काउंटर ऑफर मिलने के बावजूद नई नौकरी के फायदे और जोखिमों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। दूसरे यूजर ने आशंका जताई कि कंपनी कर्मचारी को रोकने के साथ-साथ कम वेतन पर किसी दूसरे व्यक्ति को नियुक्त करने की योजना भी बना सकती है। हालांकि, इन टिप्पणियों में बताई गई आशंकाओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

127% hike with a new company vs retention offer from my current employer

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नौकरी बदलने से पहले किन बातों पर दें ध्यान?

यह मामला केवल ज्यादा सैलरी पाने का नहीं, बल्कि लंबे समय के करियर और निजी जिंदगी के बीच संतुलन बनाने का भी है। नौकरी बदलने से पहले वेतन के साथ काम के घंटे, जिम्मेदारियां, नौकरी की स्थिरता, मैनेजर और टीम का माहौल तथा भविष्य में तरक्की की संभावनाएं देखना जरूरी है।

साथ ही, अगर मौजूदा कंपनी वेतन बढ़ाने की पेशकश करती है, तो यह जानना भी अहम है कि वह प्रस्ताव लिखित और स्पष्ट है या नहीं। आखिरकार, 127 फीसदी की सैलरी हाइक आकर्षक जरूर है, लेकिन सही फैसला वही होगा जो आर्थिक फायदे के साथ करियर और जीवनशैली के लिए भी बेहतर साबित हो।

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न नौकरी की तलाश, न कोई पहचान… फिर CMO को भेजा एक मैसेज और मिल गया ₹17 लाख का ऑफर

कभी-कभी करियर का बड़ा बदलाव किसी नौकरी के आवेदन से नहीं, बल्कि एक छोटे से मैसेज से शुरू होता है। कारोबारी विशाल ठाकुर के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उन्होंने एक कंपनी के CMO को LinkedIn पर बिना किसी जान-पहचान के मैसेज किया, ताकि यह पता चल सके कि बाजार में उनकी स्किल्स की असली कीमत कितनी है। उस समय विशाल नौकरी बदलने की तलाश में भी नहीं थे। लेकिन कुछ ही दिनों में CMO का जवाब आया और बातचीत आगे बढ़ते-बढ़ते इंटरव्यू तक पहुंच गई। इसके बाद जो हुआ, उसने विशाल को भी हैरान कर दिया। उन्हें ऐसी नौकरी का ऑफर मिला, जिसकी सैलरी उनकी मौजूदा कमाई से करीब तीन गुना थी।

नौकरी बदलने का इरादा नहीं था, बस खुद को परखना चाहते थे

यह कहानी 2021 की है। उस वक्त विशाल की सालाना कमाई करीब ₹6 लाख थी। खास बात यह थी कि वह सक्रिय रूप से नई नौकरी की तलाश भी नहीं कर रहे थे। उनके मन में बस एक सवाल था क्या उनकी स्किल्स की मार्केट वैल्यू उनकी मौजूदा सैलरी से कहीं ज्यादा हो सकती है? इसी सवाल का जवाब पाने के लिए उन्होंने सामान्य नौकरी तलाशने के बजाय एक अलग रास्ता चुना।

सीधे कंपनी के CMO को भेज दिया मैसेज

विशाल ने एक B2B कंपनी के CMO को LinkedIn पर Cold Message और ईमेल भेजा। मकसद नौकरी मांगना नहीं, बल्कि बातचीत शुरू करना था। कुछ दिनों के भीतर ही उन्हें जवाब मिल गया। इसके बाद बातचीत आगे बढ़ी और मामला कई राउंड के इंटरव्यू तक पहुंच गया। हालांकि, इंटरव्यू का अनुभव विशाल के लिए बिल्कुल आसान नहीं था।

फाइनल इंटरव्यू के बाद लगा था शायद मौका हाथ से गया

अंतिम बातचीत कंपनी के CMO के साथ हुई। विशाल के मुताबिक, इस दौरान कई सवालों के जवाब वह ठीक तरह से नहीं दे पाए। इंटरव्यू खत्म होने के बाद उन्हें खुद भी लगा कि शायद उन्होंने अच्छा प्रदर्शन नहीं किया। लेकिन कहानी में असली ट्विस्ट अभी बाकी था।

जिस ऑफर की उम्मीद नहीं थी, वही सामने आ गया

इंटरव्यू के बाद कंपनी ने विशाल को ₹17 लाख सालाना के पैकेज का ऑफर दिया। यानी उनकी उस समय की ₹6 लाख सालाना कमाई के मुकाबले करीब तीन गुना। विशाल के लिए यह फैसला चौंकाने वाला था। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि इंटरव्यू में कुछ सवालों के जवाब न दे पाने के बावजूद कंपनी ने उन्हें क्यों चुना।

CMO ने बताया आखिर उनमें क्या खास दिखा

इस सवाल का जवाब उन्हें बाद में खुद CMO से मिला। कंपनी के अधिकारी ने बताया कि उन्हें विशाल की सीखने की इच्छा, उत्साह और जिज्ञासा प्रभावित कर गई थी। उनका मानना था कि अगर किसी व्यक्ति में सीखने और समस्याओं को हल करने का सही रवैया है, तो वह कुछ महीनों में अपनी जानकारी की कमियों को दूर कर सकता है। यानी इस बार नौकरी सिर्फ इस आधार पर नहीं मिली कि उम्मीदवार पहले से कितना जानता था, बल्कि इस बात पर भी मिली कि वह कितना सीखने को तैयार था।

₹17 लाख का ऑफर मिला, फिर भी नहीं की नौकरी

दिलचस्प बात यह है कि विशाल ने आखिरकार ₹17 लाख का ऑफर स्वीकार नहीं किया। उन्होंने एक दूसरी opportunity चुनी, जिसमें Remote Work और ज्यादा flexibility मिल रही थी। फिर भी यह इंटरव्यू उनके करियर में एक बड़ा मोड़ बन गया।

एक इंटरव्यू ने बदल दी खुद को देखने की नजर

विशाल के मुताबिक, इस अनुभव ने उन्हें यह भरोसा दिया कि वह अपनी कल्पना से कहीं बड़े अवसरों के लिए तैयार हो सकते हैं। इसी आत्मविश्वास ने बाद में उन्हें करियर में बड़े जोखिम लेने के लिए प्रेरित किया। आज वह एक मार्केटिंग एजेंसी और AI स्टार्टअप चला रहे हैं। उनका मानना है कि अगर उस समय CMO ने उनकी क्षमता पर भरोसा नहीं जताया होता, तो शायद आगे की उनकी पेशेवर यात्रा भी अलग होती।

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वर्क फ्रॉम होम या हर वक्त निगरानी? कैमरा मॉनिटरिंग के बाद 23 कर्मचारियों ने दिया इस्तीफा

वर्क फ्रॉम होम ने कर्मचारियों को सुविधा और आजादी जरूर दी, लेकिन अब यही व्यवस्था निगरानी और प्राइवेसी को लेकर नई बहस खड़ी कर रही है। अमेरिकी अरबपति वकील जॉन मॉर्गन के एक बयान ने इस बहस को और गर्म कर दिया है। उनका दावा है कि कंपनी ने कर्मचारियों के लैपटॉप में कैमरा मॉनिटरिंग शुरू की तो महज सात दिनों में 23 कर्मचारियों ने नौकरी छोड़ दी।

मॉर्गन ने यह बात ‘The Iced Coffee Hour’ पॉडकास्ट में कही, जहां उन्होंने रिमोट वर्क, कर्मचारियों की जवाबदेही और ऑफिस लौटने को लेकर अपने अनुभव साझा किए।

ऑफिस आने से इनकार किया तो मिला दूसरा विकल्प

मॉर्गन के मुताबिक, कोरोना महामारी के बाद जब कर्मचारियों को वापस ऑफिस बुलाने की कोशिश की गई, तो कई लोगों ने इसका विरोध किया। ऐसे कर्मचारियों को घर से काम जारी रखने का विकल्प दिया गया। लेकिन इस सुविधा के साथ एक शर्त भी रखी गई कर्मचारियों के काम की कड़ी निगरानी की जाएगी। मॉर्गन ने दावा किया कि इसके लिए कर्मचारियों के वर्क लैपटॉप में कैमरे लगाए गए थे। उनका कहना था कि कंपनी कर्मचारियों को घर से काम करने की अनुमति दे रही थी, लेकिन साथ ही यह भी सुनिश्चित करना चाहती थी कि काम के दौरान कर्मचारी वास्तव में अपने काम पर ध्यान दे रहे हैं।

7 दिन में 23 इस्तीफे, मालिक ने निकाला अलग मतलब

मॉर्गन ने दावा किया कि निगरानी की व्यवस्था लागू होने के बाद पहले ही हफ्ते में 23 कर्मचारियों ने इस्तीफा दे दिया। उनके मुताबिक, इन इस्तीफों को सिर्फ वर्क फ्रॉम होम की इच्छा के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने इसे कर्मचारियों की निगरानी और जवाबदेही से बचने की इच्छा से जोड़ते हुए कहा कि कुछ लोग घर से काम नहीं, बल्कि बिना निगरानी के काम करना चाहते थे। यहीं से उनकी टिप्पणी पर विवाद शुरू हो गया।

क्या कर्मचारी को हर वक्त निगरानी में रखना सही है?

मॉर्गन के बयान ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है अगर कोई कर्मचारी घर से अपना काम समय पर और अच्छी तरह पूरा कर रहा है, तो क्या कंपनी को उसके लैपटॉप कैमरे के जरिए उस पर नजर रखने का अधिकार होना चाहिए?कर्मचारियों के लिए मामला सिर्फ काम का नहीं, बल्कि निजी जिंदगी और व्यक्तिगत स्पेस का भी है। घर में काम करने वाला व्यक्ति यह नहीं चाहेगा कि ऑफिस की निगरानी उसके निजी जीवन की सीमा तक पहुंच जाए।

सोशल मीडिया पर लोगों ने लगाई क्लास

मॉर्गन की बात सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने जमकर प्रतिक्रिया दी। एक यूजर ने कहा कि अगर किसी को यह डर हो कि कंपनी काम के घंटों के बाद भी कैमरे के जरिए उसे देख सकती है, तो वह ऐसी नौकरी छोड़ना पसंद करेगा। एक अन्य यूजर ने कॉरपोरेट अधिकारियों पर तंज कसते हुए कहा कि वह बोर्ड और सी-सूट अधिकारियों के साथ काम करता है और उन्हें कई बार ‘ना’ कहना पड़ता है। वहीं एक यूजर ने सवाल किया कि अगर अरबपति को भी उसी तरह कैमरे के सामने रखा जाए और हर वक्त मॉनिटर किया जाए, तो उन्हें कैसा लगेगा?

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14 महीने तक किसी को नहीं हुआ शक, दो कंपनियों में चुपचाप करता रहा नौकरी; लेकिन मर्जर ने ऐसा फंसाया कि अब समझ नहीं आ रहा क्या करे!

एक टेक प्रोफेशनल करीब 14 महीने से दो कंपनियों में एक साथ रिमोट जॉब कर रहा था और अब तक उसकी यह ‘डबल जॉब’ वाली व्यवस्था बिना किसी बड़ी परेशानी के चल रही थी। दोनों कंपनियां अलग थीं, काम का तरीका और टेक्नोलॉजी स्टैक भी अलग था, इसलिए उसे लगता था कि दोनों नौकरियों का राज आसानी से छिपा रहेगा। लेकिन अचानक एक ऐसा मोड़ आया, जिसने उसकी पूरी प्लानिंग हिला दी। उसे पता चला कि उसकी दोनों कंपनियां अब मर्ज होने जा रही हैं।

इसके बाद सबसे बड़ा डर यह है कि कंपनियों के सिस्टम और कर्मचारी रिकॉर्ड आपस में जुड़ते ही उसकी पहचान दोनों जगह सामने आ सकती है। खास बात यह है कि वह दोनों संस्थानों के कर्मचारियों के संपर्क में भी रहता है और दोनों कंपनियों की Slack डायरेक्टरी में उसका नाम मौजूद है। अब वह सोच रहा है कि नौकरी छोड़े या जोखिम लेकर इंतजार करे।

14 महीने तक आराम से चल रही थी दोहरी नौकरी

रेडिट पर शेयर की गई पोस्ट के मुताबिक, टेक कर्मचारी करीब 14 महीने से दो कंपनियों में एक साथ काम कर रहा था। दोनों नौकरियां पूरी तरह रिमोट थीं और दोनों में अलग-अलग टेक्नोलॉजी स्टैक इस्तेमाल होते थे।

उसका मानना था कि दोनों कंपनियों के कामकाज और टीमों के बीच इतना अंतर है कि किसी को उसके दूसरे रोजगार के बारे में पता चलने की संभावना बेहद कम है। इसी भरोसे के साथ वह दोनों नौकरियां संभालता रहा।

छोटी कंपनी को चुना था, ताकि न हो कोई टकराव

कर्मचारी के मुताबिक, उसकी एक कंपनी मिड-साइज SaaS कंपनी थी, जबकि दूसरी उसी सेक्टर में काम करने वाली अपेक्षाकृत छोटी कंपनी थी। उसने दूसरी कंपनी को इसलिए चुना था क्योंकि उसे लगता था कि छोटी कंपनी होने के कारण दोनों संस्थानों के बीच भविष्य में किसी तरह का कारोबारी संपर्क होने की संभावना काफी कम है। लेकिन जिस चीज को उसने सबसे कम संभावित माना था, वही आखिरकार उसके सामने आ गई।

CEO का एक ईमेल और बदल गया पूरा खेल

मुश्किल तब शुरू हुई जब उसे पहली कंपनी के CEO की ओर से ईमेल मिला। ईमेल में बताया गया था कि उसकी कंपनी दूसरी कंपनी का अधिग्रहण करने जा रही है। यानी जिस कंपनी में वह दूसरी नौकरी कर रहा था, अब वही उसकी पहली कंपनी के कॉरपोरेट दायरे में आने वाली थी। इसके बाद कर्मचारी को सबसे बड़ा डर अपने दोनों रोजगार रिकॉर्ड के आपस में जुड़ने का सताने लगा।

Slack डायरेक्टरी बनी सबसे बड़ी चिंता

टेक प्रोफेशनल ने बताया कि वह दोनों कंपनियों के कर्मचारियों के साथ नियमित रूप से बातचीत करता है। ऐसे में मर्जर के बाद उसके लिए छिपे रहना और मुश्किल हो सकता है। दोनों कंपनियों की Slack डायरेक्टरी में उसका नाम मौजूद है। हालांकि दूसरी कंपनी में उसने अपने नाम का थोड़ा अलग फॉर्मेट इस्तेमाल किया था, लेकिन उसे खुद भी शक है कि सिस्टम और कर्मचारी डेटाबेस के एकीकरण के बाद यह अंतर उसे बचाने के लिए काफी नहीं होगा।

असली डर

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि दोनों कंपनियों का इंटीग्रेशन कितनी जल्दी शुरू होगा। कर्मचारी को अंदाजा नहीं था कि पूरी प्रक्रिया में कई महीने लगेंगे या सिस्टम और कर्मचारी रिकॉर्ड का एकीकरण शुरुआत में ही शुरू हो जाएगा। अगर दोनों कंपनियों के HR सिस्टम, डायरेक्टरी और डेटाबेस जल्दी आपस में जुड़ गए, तो एक ही व्यक्ति का दो जगह कर्मचारी के तौर पर मौजूद होना आसानी से सामने आ सकता है।

नौकरी छोड़ दे या जोखिम लेकर इंतजार करे?

यहीं से कर्मचारी की सबसे बड़ी दुविधा शुरू हुई। उसके सामने दो रास्ते थे दूसरी नौकरी से खुद इस्तीफा दे दे या फिर कुछ समय तक दोनों नौकरियां जारी रखकर हालात पर नजर रखे। पहला विकल्प उसे तुरंत संभावित जोखिम से बाहर निकाल सकता था। वहीं दूसरा विकल्प ज्यादा अनिश्चित था, लेकिन इसमें वह मर्जर की दिशा देखकर आगे फैसला लेने की उम्मीद कर रहा था।

Layoff हुआ तो Severance का भी सवाल

कर्मचारी के दिमाग में एक और संभावना आई। मर्जर के दौरान कंपनियां अक्सर restructuring करती हैं और कुछ पदों को खत्म भी किया जा सकते हैं। ऐसे में उसे लगा कि अगर वह इंतजार करता है और उसकी नौकरी restructuring में चली जाती है, तो शायद उसे severance मिल सके। हालांकि वह यह भी समझ रहा था कि इस रणनीति में बड़ा जोखिम है। अगर उससे पहले ही दोनों कंपनियों को उसके डबल एम्प्लॉयमेंट का पता चल गया, तो स्थिति उसके खिलाफ जा सकती है।

तनाव इतना बढ़ा कि सुबह 10 बजे ही खाने लगा Goldfish

अपनी पोस्ट के आखिर में टेक कर्मचारी ने अपनी स्थिति को मजाकिया अंदाज में बताते हुए कहा कि वह सुबह 10 बजे ही अपनी डेस्क पर बैठकर “stress eating goldfish” कर रहा था। उसने Reddit यूजर्स से पूछा कि ऐसी स्थिति में उसे क्या करना चाहिए। पोस्ट सामने आते ही लोगों ने इसे गंभीर सलाह के साथ-साथ मजाकिया नजरिए से भी लेना शुरू कर दिया।

इंटरनेट ने कहा

पोस्ट पर कई यूजर्स ने उसकी स्थिति पर मजेदार प्रतिक्रियाएं दीं। एक यूजर ने इसे “suffering from success” वाला मामला बताया। दूसरे ने मजाक करते हुए कहा कि वह दोनों कंपनियों की टीमों का परिचय कराने वाला व्यक्ति बन सकता है। किसी ने तो यहां तक सुझाव दे दिया कि वह अपना कानूनी नाम ही बदल ले। एक अन्य यूजर ने बेहद सीधे अंदाज में सलाह दी दूसरी नौकरी से इस्तीफा देकर भगवान से प्रार्थना करो। वहीं कुछ लोगों ने कहा कि वे भी ऐसी ही “समस्या” झेलना चाहेंगे।

मर्जर ने खोल दिया Overemployment का सबसे बड़ा जोखिम

इस पूरे मामले की दिलचस्प बात यही है कि करीब 14 महीने तक दो रिमोट नौकरियां करने वाले इस कर्मचारी के लिए सबसे बड़ा खतरा काम का दबाव नहीं, बल्कि कंपनियों का आपस में जुड़ना बन गया। जब तक दोनों संस्थान अलग थे, अलग टेक स्टैक, अलग टीम और अलग सिस्टम ने उसकी दोहरी नौकरी को छिपाए रखा। लेकिन मर्जर के बाद वही अलग-अलग सिस्टम एक-दूसरे से जुड़ सकते हैं। अब उसकी पूरी चिंता इसी बात पर टिकी है कि यह इंटीग्रेशन कितनी जल्दी होता है और दोनों कंपनियों के रिकॉर्ड कब एक-दूसरे के सामने आते हैं।

‘मुसाफिर कैफे’ जैसा जीवन चाहते हैं! नौकरी छोड़ने से पहले इन 5 बातों को न करें नजरअंदाज

आपने भी कभी सोचा है कि शहर की भागदौड़ छोड़कर पहाड़ों में सुकून से जिंदगी बिताई जाए! सुबह उठते ही सामने खूबसूरत पहाड़ हों, हाथ में गर्म कॉफी हो और न ट्रैफिक की टेंशन, न ऑफिस की मीटिंग। नेटफ्लिक्स की मुसाफिर कैफे देखने के बाद यह सपना कई लोगों का अपना सपना भी बन गया है। लेकिन पहाड़ों की जिंदगी सिर्फ खूबसूरत नजारों तक नहीं होती। वहां नई शुरुआत करने से पहले कुछ जरूरी बातें जान लेना बहुत जरूरी है, ताकि बाद में आपका सपना मुश्किल में न बदल जाए:

 

असलियत को समझें (Reality Check)

4,400+ Woman Using A Laptop In The Mountain Stock Photos, Pictures & Royalty-Free Images - iStock

पहाड़ों में रहना बहुत अच्छा लगता है, लेकिन वहां रोजमर्रा की जिंदगी भी होती है। अगर आप कैफे, होमस्टे (homestay) या कोई छोटा बिजनेस शुरू करना चाहते हैं, तो उसमें भी खूब मेहनत करनी पड़ती है। छुट्टियां (vacation) मनाने और हमेशा वहीं रहने में बहुत फर्क होता है। इसलिए फैसला लेने से पहले कुछ दिन वहां रहकर माहौल को जरूर समझें।

 

 

पैसों की सही योजना बनाएं (Financial Planning)

Swiss Traditional House In Rural Switzerland Stock Photo, Picture and Royalty Free Image. Image 12060831.नौकरी छोड़ने से पहले अपनी बचत जरूर देखें। नया काम शुरू होने में समय लग सकता है और शुरुआत में कमाई भी कम हो सकती है। ऐसे में किराया, बिजली, स्टाफ, सामान और दूसरे खर्च चलते रहते हैं। इसलिए कम से कम 6 महीने से 1 साल तक का खर्च पहले से बचाकर रखें।

लोगों से अपनापन बनाएं (Local Community)

Inside a legacy mountain house with snowy views of Wyoming's Grand Tetons

अगर पहाड़ों में बसना चाहते हैं, तो सिर्फ घर लेना काफी नहीं है। वहां रहने वाले लोगों से अच्छे रिश्ते बनाना भी जरूरी है। उनकी संस्कृति को समझें, लोकल लोगों के साथ काम करें। इससे नई जगह पर बसना आसान हो जाता है।

पहाड़ों की जिंदगी को अपनाएं (Mountain Lifestyle)

पहाड़ों में हर सुविधा शहर जैसी नहीं मिलती। कई जगह इंटरनेट धीमा हो सकता है, अस्पताल दूर हो सकते हैं और बारिश या बर्फबारी में आने-जाने में भी दिक्कत हो सकती है। इसलिए वहां की लाइफस्टाइल को अपनाने के लिए पहले से तैयार रहें।

 

अपनी स्किल्स का इस्तेमाल करें (Keep Your Skills)

नौकरी छोड़ने का मतलब यह नहीं कि पुरानी स्किल्स बेकार हो जाएंगी। अगर आप राइटिंग, डिजाइनिंग, आईटी, डिजिटल मार्केटिंग या किसी और फील्ड में काम करते हैं, तो पहाड़ों से भी ऑनलाइन काम कर सकते हैं। इससे नई शुरुआत के दौरान आपकी कमाई भी बनी रहेगी और स्ट्रेस भी कम होगा।

 

4 लाख रुपये महीना कमाता है युवक, फिर भी छोड़ना चाहता है भारत! बताई चौंकाने वाली वजह

अच्छी नौकरी, शानदार कमाई और बड़ी बचत के बावजूद कई युवा बेहतर भविष्य की तलाश में विदेश जाने का सपना देखते हैं। ऐसा ही मामला सामने आया है एक 26 वर्षीय रिमोट कर्मचारी डैनियल का, जो हर महीने करीब 4 लाख रुपये कमाता है। आर्थिक रूप से मजबूत होने के बाद भी वह भारत छोड़कर ऑस्ट्रेलिया में बसने की योजना बना रहा है।

डैनियल का कहना है कि उसका फैसला पैसों से ज्यादा जीवन की गुणवत्ता और भविष्य को लेकर है। उसकी सोच पर सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।

4 लाख की सैलरी, फिर भी विदेश जाने की तैयारी

डैनियल ने पर्सनल फाइनेंस कोच अंशुमान शर्मा के शो में बताया कि वह एक विदेशी कंपनी के लिए रिमोट काम करता है और उसकी सैलरी यूरो में आती है। उसकी मासिक आय करीब 4 लाख रुपये है, जबकि खर्च लगभग 1.20 लाख रुपये तक सीमित है।

अच्छी बचत होने के कारण वह अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा भविष्य की योजना के लिए जमा कर रहा है। उसका लक्ष्य साल के अंत तक ऑस्ट्रेलिया के लिए आवेदन करना है।

विदेश जाने की वजह सिर्फ पैसा नहीं

जब उनसे पूछा गया कि अगर ऑस्ट्रेलिया जाकर भी वही रिमोट नौकरी करनी है तो देश बदलने की जरूरत क्यों महसूस हो रही है, तो डैनियल ने कहा कि उसका फैसला बेहतर जीवन और आने वाली पीढ़ी के भविष्य को लेकर है।

उसका कहना है कि वह अपने बच्चों के लिए ऐसा माहौल चाहता है, जहां उन्हें बेहतर अवसर मिल सकें।

फाइनेंस एक्सपर्ट ने दी बचत की सलाह

अंशुमान शर्मा ने डैनियल को सलाह दी कि वह हर महीने करीब 1.5 लाख रुपये की रिकरिंग डिपॉजिट शुरू करे। उनके अनुसार, इससे कुछ महीनों में विदेश जाने की प्रक्रिया और PR आवेदन के लिए जरूरी फंड तैयार किया जा सकता है।

देश छोड़ने की सोच पर हुई चर्चा

डैनियल ने भारत में बढ़ते खर्च, टैक्स और कुछ व्यवस्थाओं को लेकर अपनी चिंता जाहिर की। उसने कहा कि उसकी पीढ़ी के कई युवा बेहतर अवसरों और भविष्य की तलाश में विदेश जाने के बारे में सोच रहे हैं। हालांकि, इस मुद्दे पर लोगों की राय बंटी हुई नजर आई।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

डैनियल की बात वायरल होने के बाद इंटरनेट पर लोगों ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं। कुछ यूजर्स ने उसकी सोच को समझने की कोशिश की और बेहतर लाइफस्टाइल की तलाश को सही बताया।

वहीं, कुछ लोगों ने विदेश में रहने की वास्तविक लागत और चुनौतियों का हवाला देते हुए कहा कि वहां ज्यादा कमाई के बावजूद खर्च भी काफी बढ़ जाता है।

एक यूजर ने लिखा कि विदेश में रहने के बाद कई लोग वापस भारत आने के बारे में भी सोचते हैं, जबकि कुछ ने डैनियल की योजना को लेकर सवाल उठाए।

कमाई से ज्यादा मायने रखती है जिंदगी की प्राथमिकता

डैनियल की कहानी ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या बेहतर भविष्य के लिए देश बदलना सही फैसला है या नहीं। जहां कुछ लोग इसे नए अवसरों की तलाश मानते हैं, वहीं कुछ के लिए अपने देश में रहकर आगे बढ़ना बेहतर विकल्प है।

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ऑफिस भी, ट्रैवल भी! बिना ज्यादा छुट्टियों के ऐसे बनाएं घूमने का प्लान

क्या 9 से 5 की जॉब करते हुए भी बार-बार घूमा जा सकता है? इसका जवाब है—हां। सही प्लानिंग, छुट्टियों का समझदारी से इस्तेमाल और बजट मैनेजमेंट (budget management) के साथ नौकरी छोड़े बिना भी ट्रैवल का सपना पूरा किया जा सकता है। आइए जानते हैं कुछ आसान टिप्स, जिनकी मदद से आप काम और घूमने के बीच बेहतरीन बैलेंस बना सकते हैं:

 

ट्रिप (trip) की प्लानिंग पहले से करें

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अगर आप नौकरी के साथ घूमना चाहते हैं, तो पहले से प्लान बनाना सबसे जरूरी है। ट्रैवल की तारीख, बजट, होटल और फ्लाइट (flights) की बुकिंग समय रहते कर लें। इससे खर्च कम होता है और ऑफिस से छुट्टी लेने में भी आसानी रहती है।

 

 

छुट्टियों (holidays) और वीकेंड (weekends) का सही इस्तेमाल करें

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सिर्फ लंबी छुट्टियों का इंतजार करने की बजाय, सरकारी छुट्टियों और वीकेंड को जोड़कर ट्रिप प्लान करें। इससे कम छुट्टियों में भी 4 से 10 दिन तक का अच्छा ब्रेक मिल सकता है और नई जगहों को आराम से घूमने का मौका मिलता है।

 

 

हर महीने ट्रैवल फंड (travel fund) बनाएं

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ट्रैवल के लिए अलग से बचत करना अच्छी आदत है। हर महीने अपनी सैलरी का थोड़ा हिस्सा ट्रैवल फंड में रखें और गैर-जरूरी खर्चों को कम करें। इससे ट्रिप का खर्च एक साथ उठाने का दबाव नहीं पड़ता और बिना स्ट्रेस के ट्रैवलिंग की जा सकती है।

 

 

 

रिमोट वर्क (remote work) का फायदा उठाएं

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अगर आपकी कंपनी वर्क फ्रॉम होम (work-from-home) या वर्क फ्रॉम एनीवेयर (work from anywhere) की सुविधा देती है, तो इसका पूरा लाभ लें। कुछ दिन किसी नई जगह से काम करते हुए बाकी समय वहां घूम सकते हैं। इससे काम और ट्रैवल दोनों साथ-साथ चलते हैं।

 

 

 

एक्स्ट्रा इनकम (extra income) और स्मार्ट बजटिंग अपनाएं

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अगर पॉसिबल हो, तो फ्रीलांसिंग (freelancing), कंटेंट क्रिएशन (content creation) या किसी दूसरे पार्ट-टाइम काम से एक्स्ट्रा कमाई करें। यह पैसा ट्रैवल के खर्च में मदद कर सकता है। हालांकि, एक्स्ट्रा कमाई जरूरी नहीं है—सही बजट प्लानिंग और रेगुलर सेविंग से भी साल में एक या दो अच्छी ट्रिप आसानी से की जा सकती हैं।

45000 की नौकरी छोड़ दिल्ली की स्नेहा ने सीखी स्पेनिश, एक लैंग्वेज ने ऐसी बदली जिंदगी कि अब बिना जॉब भी स्विट्जरलैंड में बिता रहीं लाइफ!

बहुत से लोग मानते हैं कि फाइनेंशियल सिक्योरिटी पाने का एकमात्र तरीका एक स्टेबल नौकरी है। लेकिन एक भारतीय कंटेंट क्रिएटर का कहना है कि वह बिना किसी रेगुलर कॉर्पोरेट नौकरी के, दुनिया के सबसे महंगे देशों में से एक, स्विट्जरलैंड में छह महीने बिता पाईं।

एक इंस्टाग्राम वीडियो में, स्नेह गौर ने बताया कि कैसे उन्होंने फिक्स्ड सैलरी वाली नौकरी छोड़कर कमाई के अलग-अलग जरीये बनाए, जिससे उन्हें अपनी शर्तों पर जीने और काम करने की आजादी मिली। उनकी कहानी ने अब ऑनलाइन चर्चा छेड़ दी है।

गौर ने बताया कि उनके सफर की शुरुआत तब हुई जब वह एक कॉर्पोरेट नौकरी कर रही थीं और महीने के लगभग 45,000 रुपये कमा रही थीं। उस समय, उनका मानना ​​था कि सफलता का मतलब है डिग्री हासिल करना, अच्छी नौकरी पाना और प्रमोशन पाना।

उन्होंने कहा, “मुझे लगता था कि सफलता का मतलब यही है – डिग्री लेना, सैलरी पाना, नौकरी करना और अगला प्रमोशन पाना।” लेकिन समय के साथ उन्हें एहसास हुआ कि वह कुछ अलग करना चाहती थीं। अपनी मर्जी से रहने की जगह चुनने, घूमने-फिरने और उन चीजों पर काम करने की आजादी जो मुझे सच में पसंद थीं।” एक ही रास्ते पर चलने के बजाय, उन्होंने स्पैनिश सीखने का फैसला किया।

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गौर के मुताबिक, उस एक स्किल ने नए मौके खोले। इससे उन्हें स्पेन जाने, अलग-अलग देशों के लोगों से मिलने और इंटरनेशनल अनुभव पाने में मदद मिली। बाद में, उन्होंने उस जानकारी को एक बिजनेस में बदल दिया। उन्होंने बताया कि सबसे पहले उन्होंने स्पैनिश सिखाना शुरू किया, और फिर स्पेन ट्रैवल गाइड, डिजिटल प्रोडक्ट्स, ऑनलाइन एंटरप्रेन्योर और कंटेंट क्रिएटर्स के लिए मेंटरशिप प्रोग्राम और ब्रांड कोलैबोरेशन जैसे काम शुरू किए।

गौर ने बताया कि कमाई के कई जरिया होने का मतलब था कि अब उन्हें कंपनी की सैलरी पर निर्भर नहीं रहना पड़ता था। उन्होंने कहा, “जब मैं स्विट्ज़रलैंड गई, तो मैं कंपनी की सैलरी पर निर्भर नहीं थी क्योंकि मेरा लैपटॉप और मेरी रिमोट टीम ही काफी थी।”

स्नेहा ने बताया कि “कभी-कभी आपकी जिंदगी बदलने वाली चीज सिर्फ प्रमोशन नहीं, बल्कि कोई स्किल होती है।” अपनी पोस्ट के कैप्शन में गौर ने लिखा, “कोई नौकरी नहीं। कंपनी से कोई सैलरी नहीं। फिर भी हर सुबह स्विट्जरलैंड में आंख खुली। सच तो यह है कि स्पेन में रहते हुए ही मैंने कुछ ऐसा बनाया जिससे मुझे जहां चाहूं वहां रहने की आजादी मिली। न कोई ऑफिस, न कोई बॉस, न किसी की इजाजत की जरूरत। आजादी का यही वो रूप है जिसे पाने की कोशिश करना सही है।”

इस पोस्ट पर लोगों ने खूब प्रतिक्रिया दी और कई यूजर्स उनकी यात्रा के बारे में और जानना चाहते थे। एक यूजर ने लिखा, “कृपया मुझे बताएं।” एक और ने पूछा, “एक सीधा सा सवाल है कि आप किस वीजा पर 6 महीने तक रहीं? स्पेन का सामान्य रेजिडेंट परमिट तो सिर्फ 3 महीने की इजाजत देता है, या फिर आपने स्पेन की नागरिकता ले ली थी?” एक व्यक्ति ने कमेंट किया, “इसके लिए कैसे अप्लाई करें?” वहीं कई अन्य लोगों ने हार्ट और फायर इमोजी के साथ प्रतिक्रिया दी।