‘5 साल बाद क्या करूंगी, पता नहीं’ कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ कंटेंट क्रिएशन में आईं महिला, अब टीवी और वेब सीरीज में मिल रही मौके!

आज के समय में ज्यादातर युवा कंटेंट क्रिएशन की दुनिया में करियर बनाने का सपना देख रहे हैं। वहीं हाल में नौकरी छोड़कर कंटेंट क्रिएशन शुरू करने वाली महिला की कहानी सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रही है। डेलॉइट की एक पूर्व कर्मचारी ने कॉर्पोरेट नौकरी छोड़कर कंटेंट क्रिएशन को अपना करियर चुना। उनके इस फैसले ने एक भारतीय फाउंडर को 5 और 10 साल के करियर प्लान की सोच पर सवाल उठाने के लिए मजबूर कर दिया। लिंक्डइन पर ये कहानी जया शक्ति कन्नन ने शेयर की है।

सोशल मीडिया पर किया पोस्ट

डेलॉइट की नौकरी छोड़कर कंटेंट क्रिएशन शुरू करने वाली ऐश्वर्या जीपी की कहानी चर्चा में है। चेन्नई की फाउंडर जया शक्ति कन्नन ने बताया कि ईश्वर्या 5 साल का प्लान बनाने के बजाय अगले 6 महीनों पर फोकस कर रही हैं। लिंक्डइन पर ऐश्वर्या की शेयर की गई कहानी में उन्होंने बताया कि, एक बातचीत के दौरान उन्होंने ऐश्वर्या से पूछा था कि वह अगले पांच सालों में क्या करना चाहती हैं। ऐश्वर्या का जवाब उम्मीद से अलग था। उन्होंने कॉर्पोरेट करियर की तय राह पर आगे बढ़ने के बजाय कंटेंट क्रिएशन को अपना करियर बनाने का फैसला किया था।

अगले 5 साल का प्लान किसे पता

कन्नन ने बताया कि ऐश्वर्या ने कंटेंट क्रिएटर बनने के लिए डेलॉइट की नौकरी छोड़ दी थी। इस पर उन्होंने ऐश्वर्या से पूछा, “अगले 5 सालों के लिए आपका क्या प्लान है?” ऐश्वर्या ने जवाब दिया, “मुझे कोई आइडिया नहीं है।” उन्होंने कहा कि आज वह जिस रास्ते पर हैं, उसके बारे में उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था। कन्नन ने ईश्वर्या के हवाले से बताया, “एक साल पहले मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं कंटेंट क्रिएटर बनूंगी। ऐसे में मैं कैसे बता सकती हूं कि पांच साल बाद मैं क्या कर रही होऊंगी।” पांच साल का कोई तय करियर प्लान बनाने के बजाय ईश्वर्या फिलहाल अगले छह महीनों पर ध्यान दे रही हैं।

कितने महीने का हैं प्लान

कन्नन के मुताबिक, ईश्वर्या के इस तरीके से उन्हें कंटेंट क्रिएशन के अलावा भी कई नए मौके मिले हैं। इनमें फिल्मों, होस्टिंग, टीवी और वेब सीरीज से जुड़े काम शामिल हैं। ईश्वर्या पांच साल का लंबा और तय करियर प्लान बनाने के बजाय अगले छह महीनों पर ध्यान दे रही हैं। कन्नन ने कहा कि ईश्वर्या के नजरिए ने उन्हें करियर प्लानिंग की आम सोच पर दोबारा विचार करने पर मजबूर किया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या करियर के लिए पहले से लंबा प्लान बनाना जरूरी है। उन्होंने लिखा, “इसके बजाय, ईश्वर्या अगले छह महीनों पर ध्यान दे रही हैं। वह अपना बेस्ट देना चाहती हैं, नई चीजें सीखना चाहती हैं, अलग-अलग चीजों को आजमाना चाहती हैं और जब भी कोई मौका मिले, उसे अपनाना चाहती हैं।”

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हम 5-10 साल का क्यों करते हैं प्लान

कन्नन ने आगे कहा, “हम अक्सर 5 या 10 साल का एक तय प्लान बना लेते हैं और बिना दूसरी तरफ देखे उसी रास्ते पर चलते रहते हैं। लेकिन क्या हो अगर आगे बढ़ने का कोई आसान और छोटा रास्ता मौजूद हो?” उन्होंने कहा, “जैक मा, अर्नोल्ड श्वार्ज़नेगर, विजय और रीड हेस्टिंग्स जैसे लोगों को देखिए। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक काम से की, लेकिन आगे चलकर कुछ और किया और आखिर में उस क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल की, जिसके बारे में उन्होंने शुरुआत में शायद सोचा भी नहीं था।”

किसे पता कौन कहां जाएगा

कन्नन ने कहा कि, करियर की प्लानिंग करते समय यह जरूरी नहीं है कि किसी व्यक्ति को पहले से पता हो कि वह कई साल बाद ठीक कहां पहुंचेगा। उन्होंने कहा, “शायद हमें यह जानने की जरूरत नहीं है कि हम 5 साल बाद बिल्कुल कहां होंगे।” उन्होंने कहा, “एक दिशा तय करें। अगले 6 महीनों की योजना बनाएं। अपनी आंखें खुली रखें। सही मौकों का फायदा उठाएं और आगे बढ़ते रहें।”

उन्होंने आखिर में कहा, “आपने करियर की शुरुआत जिस कदम से की है, जरूरी नहीं कि वही आपकी आखिरी मंजिल तय करे। कई बार अनचाहा रास्ता ही आपको किसी ऐसी जगह पहुंचा देता है, जिसके बारे में आपने कभी सोचा भी नहीं होता।” कन्नन ने अपनी पोस्ट के अंत में ईश्वर्या जीपी को उनके आगे के सफर के लिए शुभकामनाएं भी दीं। उन्होंने लिखा, “आगे के सफर के लिए ईश्वर्या जीपी को मेरी शुभकामनाएं!”

सोशल मीडिया यूजर ने दिया रिएक्शन

इस पोस्ट पर सोशल मीडिया पर लोगों ने तरह-तरह के रिएक्शन दे रहे हैं। एक यूजर ने कहा, “यह बात सच में समझ में आती है। कई बार हम अगले 5 साल को लेकर खुद पर इतना दबाव बना लेते हैं कि आज क्या अच्छा किया जा सकता है, इस पर ध्यान देना भूल जाते हैं।” वहीं, एक अन्य यूजर ने लिखा, “6 महीने का माइंडसेट काफी मायने रखता है। आप आने वाले हर मौके का पहले से अंदाजा नहीं लगा सकते, लेकिन आप यह जरूर तय कर सकते हैं कि अभी क्या सीखना है, क्या बनाना है और अपना काम कितनी अच्छी तरह करना है। कई बार यही चीज आपके करियर का अगला रास्ता तय करती है।” उन्होंने ईश्वर्या के आगे के सफर के लिए शुभकामनाएं भी दीं।

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12th Fail से भारत के Top Content Creator तक | Khushaal Pawaar Story | Mumbai| The Better India Hindi

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12th में दो बार फेल हुए, Theatre किया, Radio में काम किया, 8 साल Casting में बिताए फिर Bajrangi Bhaijaan फ़िल्म में अभिनय करने का मौका मिला… लेकिन उसके बाद भी अच्छे किरदार नहीं मिले।
Lockdown में इंतज़ार करने के बजाय Kushal Pawar ने खुद किरदार बनाने शुरू कर दिए,आज उनके बनाए किरदारों को लाखों लोग देखते हैं और उनमें खुद को पहचानते हैं। क्योंकि कभी-कभी मौका मिलने का इंतज़ार करने से बेहतर होता है खुद अपना मौका बनाना।
@khushaal_pawaar

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Video: नदी में जहरीले सांपों, टूटे कांच…फिर भी नहीं मानी हार, 21 साल के युवक की अकेले गंगा की सफाई करने की कहानी वायरल

प्रयागराज के एक कंटेंट क्रिएटर और व्लॉगर का वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। इस वीडियो में युवक बिना किसी डर के गंगा नदी में उतरकर घंटों कचरा साफ करते हैं। इस दौरान उन्हें कई बार मुश्किल और खतरनाक हालात का सामना भी करना पड़ता है, लेकिन इसके बावजूद वह अपना काम जारी रखते हैं। ये कहानी है प्रयागराज के रहने वाले 21 वर्षीय शिवम कुमार की। शिवम कुमार अपने गंगा सफाई अभियान की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर लगातार शेयर करते हैं। उनके पोस्ट में वह नदी के पानी और किनारों से कचरा निकालते नजर आते हैं। शिवम के मुताबिक, उन्होंने पिछले साल से गंगा की सफाई का काम शुरू किया था और अब इसे अपने जीवन का एक जरूरी मिशन मानते हैं।

इसी दौरान उन्होंने एक महिला को नदी में कचरे से भरा बैग फेंकते हुए भी रिकॉर्ड किया, जिससे पता चलता है कि लोगों के लगातार कचरा डालने के कारण सफाई का

नदी में दिखा था सांप

शिवम कुमार गंगा को साफ रखने के लिए नदी में जमा अलग-अलग तरह का कचरा निकालते हैं। वह अब तक कांच की टूटी बोतलें, कपड़े, गत्ते, खाने-पीने का बचा सामान और कई दूसरी चीजें नदी से बाहर निकाल चुके हैं। एक वीडियो में वह बड़ी मात्रा में कचरा साफ करते नजर आए। गंगा की सफाई करते समय शिवम को कई बार मुश्किल और खतरनाक हालात का सामना करना पड़ा है। कई जगहों पर उन्हें टूटे कांच के बीच से गुजरकर कचरा निकालना पड़ा, जबकि उनके पैरों में सिर्फ चप्पल थी। एक बार सफाई के दौरान नदी के पास उन्हें जहरीले सांप भी दिखाई दिए। इसके बावजूद शिवम ने अपना सफाई अभियान नहीं रोका और लगातार नदी से कचरा निकालते रहे।

 

खोज रहे है काम

गंगा की सफाई के साथ शिवम को पैसों की परेशानी भी झेलनी पड़ रही है। अपनी जरूरतें पूरी करने और सफाई का काम जारी रखने के लिए वह नौकरी की तलाश कर रहे हैं। एक वीडियो में वह अलग-अलग दुकानों पर काम पूछते नजर आए। शिवम के लिए गंगा की सफाई सिर्फ सोशल मीडिया पर वीडियो बनाने का काम नहीं है, बल्कि वह इसे अपने दिल के करीब मानते हैं। मुश्किलों के बावजूद वह लगातार नदी की सफाई करते हैं और अपने काम के वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर करते हैं। उनकी मेहनत को देखकर कई लोग उनकी तारीफ कर रहे हैं और उनका हौसला बढ़ा रहे हैं।

लोगों ने की तारीफ

शिवम के काम को देखकर सोशल मीडिया पर कई लोगों ने उनकी तारीफ की। एक यूजर ने लिखा, “हमें स्वच्छ भारत अभियान को फिर से शुरू करने की जरूरत है। गड्ढों और बाकी चीजों को छोड़कर पहले अपने आसपास और अपने अंदर की गंदगी को साफ करना जरूरी है।” वहीं, दूसरे यूजर ने कहा, “Gen Z आगे आकर एक साफ, स्वस्थ और बेहतर पर्यावरण बनाने में योगदान दे रहा है।”

2 साल में 513 वीडियो बनाए और खर्च किए 9.76 लाख पर कमाई हुई सिर्फ 1 लाख की! एंफ्लूएंसर ने बताया कंटेंट क्रिएशन का कड़वा सच

सोशल मीडिया पर कंटेंट बनाकर कमाई करना आज काफी लोगों को पसंद आ रहा है। लेकिन एक कंटेट बनाने के बीच काफी मेहनत और पैसे भी लगते हैं। हाल ही में एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर की पोस्ट सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रही है। पोस्ट में इन्फ्लुएंसर ने दो साल की कमाई और खर्च की जानकारी दी है। शेयर किए गए पोस्ट के मुताबिक, इन्फ्लुएंसर ने कंटेंट तैयार करने में लाखों रुपये खर्च किए, लेकिन इसके बदले खास कमाई नहीं हो सकी। इस पूरे खर्च में सबसे ज्यादा पैसा वीडियो एडिटिंग पर खर्च हुआ। सोशल मीडिया पर ये पोस्ट काफी वायरल हो रहा है।

कंटेंट के लिए खर्च किए 9.76 लाख

नेहा गुप्ता ने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर एक पोस्ट शेयर किया है। पोस्ट में शेयर किए गए आंकड़ों के मुताबिक, कंटेंट की एडिटिंग पर उन्होंने बड़ी रकम खर्च की। लंबे वीडियो की एडिटिंग में करीब 84 हजार रुपये लगे, जबकि शॉर्ट वीडियो और रील्स के लिए करीब 7.28 लाख रुपये खर्च हुए। इस तरह सिर्फ एडिटिंग का कुल खर्च करीब 8.11 लाख रुपये रहा। गुप्ता ने कंटेंट तैयार करने के लिए जरूरी उपकरणों पर भी करीब 1.65 लाख रुपये खर्च किए। इसमें लगभग 1 लाख रुपये का iPhone भी शामिल है। एडिटिंग और उपकरणों को मिलाकर देखा जाए तो दो साल में उनका कंटेंट बनाने का कुल खर्च करीब 9.76 लाख रुपये पहुंच गया।

अब तक हुई 1 लाख की कमाई

बताया जा रहा कि, गुप्ता ने करीब चार-पांच महीने पहले पेड कोलेबोरेशन शुरू किए थे और अब तक लगभग 1 लाख रुपये की कमाई की है। वहीं, कंटेंट बनाने में उनका खर्च करीब 9.76 लाख रुपये रहा। इस तरह खर्च और कमाई के बीच करीब 8.76 लाख रुपये का अंतर है। इन आंकड़ों के सामने आने के बाद कंटेंट क्रिएटर के तौर पर करियर बनाने की चुनौतियों को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हो गई। 2 साल के दौरान नेहा ने कुल 513 रील बनाई।

लोगों ने किया कमेंट

एक यूजर ने कहा कि गुप्ता पेड कोलेबोरेशन से कमाई शुरू कर चुकी हैं, इसलिए आगे वह अपना खर्च निकाल सकती हैं। वहीं, दूसरे यूजर ने माना कि ये निवेश भविष्य में फायदेमंद हो सकता है, लेकिन सफलता आसान नहीं है। एक यूजर ने कमेंट किया, “मेरा यकीन करो, यह उतना आसान नहीं है जितना दिखता है।” उन्होंने कहा कि किसी क्रिएटर की सफलता इस बात पर भी निर्भर करती है कि वह अपनी स्ट्रैटेजी को कितनी अच्छी तरह लागू करता है।

एक अन्य यूजर ने कहा, “क्रिएटर इकॉनमी बाहर से भले ही ग्लैमरस लगती हो, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि कंटेंट क्रिएशन को एक फायदे वाले बिजनेस में बदलना कितना मुश्किल है।”

सोशल मीडिया पर अक्सर क्रिएटर्स की चमकदार जिंदगी, शानदार वीडियो, ब्रांड डील और बढ़ते फॉलोअर्स ही नजर आते हैं। लेकिन इसके पीछे कंटेंट तैयार करने में होने वाला खर्च दिखाई नहीं देता। कमाई शुरू होने से पहले वीडियो बनाने, एडिटिंग और दूसरे जरूरी सामान पर काफी पैसा खर्च हो सकता है।

स्वीडन में अचानक चली गई नौकरी, फिर ज्योति ने उठाया ऐसा कदम, आज हर महीने कमा रही हैं 1 लाख रुपये

विदेश में जाकर करियर और नई पहचान बनाना हर किसी के लिए आसान नहीं होता। नए माहौल में खुद को ढालने के साथ नौकरी, आर्थिक स्थिरता और सामाजिक पहचान बनाने की चुनौती भी रहती है। मुंबई की ज्योति वाकचौरे के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ, जब वह पति के साथ स्वीडन पहुंचीं। शुरुआत में उन्होंने वहां नौकरी की, लेकिन अचानक नौकरी चले जाने से उनके सामने मुश्किल खड़ी हो गई। इस झटके के बाद उन्होंने पीछे हटने के बजाय खुद के लिए एक नई राह तलाशने का फैसला किया। धीरे-धीरे उन्होंने कंटेंट क्रिएशन शुरू किया और फिर इसी अनुभव को अपने बिजनेस में बदल दिया।

आज उनकी कहानी सोशल मीडिया, उद्यमिता और आत्मनिर्भरता की मिसाल बन गई है। विदेश में शुरू हुआ यह सफर कैसे एक नई पहचान और कमाई के रास्ते में बदला, यही उनकी कहानी को खास बनाता है।

पति की नौकरी के चलते पहुंचीं स्वीडन

ज्योति 2016 में अपने पति के साथ स्वीडन के गोथेनबर्ग चली गई थीं। उनके पति को वहां नौकरी मिली थी और ज्योति डिपेंडेंट वीजा पर स्वीडन पहुंचीं। नए देश में शुरुआत करना उनके लिए आसान नहीं था, क्योंकि उन्हें वहां अपना करियर और पहचान दोनों नए सिरे से बनानी थी।

अचानक चली गई नौकरी

स्वीडन में रहते हुए ज्योति ने नौकरी शुरू की, लेकिन एक दिन उन्हें बिना किसी पूर्व सूचना के नौकरी से निकाल दिया गया। उनके लिए यह अनुभव काफी परेशान करने वाला था। उन्होंने इस घटना को अचानक, चौंकाने वाला और अनुचित बताया। हालांकि, उन्होंने इस झटके को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। धीरे-धीरे उन्होंने इसी मुश्किल को अपने लिए नई राह बनाने की प्रेरणा में बदल दिया।

YouTube से शुरू हुआ नया सफर

नौकरी के साथ ज्योति ने कंटेंट बनाना शुरू किया। उन्होंने 2018 में अपना YouTube चैनल लॉन्च किया। शुरुआत भले ही साइड हसल के तौर पर हुई, लेकिन धीरे-धीरे उनकी ऑनलाइन पहचान बढ़ने लगी। कंटेंट के जरिए उन्हें स्वीडन में नए लोगों से जुड़ने और अपना नेटवर्क बनाने का मौका मिला। यही नेटवर्क आगे चलकर उनके बिजनेस के लिए भी काफी काम आया।

महामारी में शुरू की अपनी कंपनी

साल 2020 में जब कोरोना महामारी के कारण दुनिया भर में कारोबार प्रभावित हो रहे थे, उसी दौरान ज्योति ने अपनी सोशल मीडिया मार्केटिंग कंपनी शुरू कर दी। शुरुआत में उन्होंने छोटे स्थानीय कारोबारों के साथ काम किया। समय के साथ उनका नेटवर्क बढ़ा और उन्हें स्वीडन के स्थानीय ग्राहकों से भी काम मिलने लगा।

अब हर महीने करीब ₹1 लाख की कमाई

कंटेंट क्रिएशन और सोशल मीडिया मार्केटिंग के सफर ने ज्योति को आर्थिक रूप से भी मजबूत बनाया। मौजूदा समय में उनके बिजनेस से औसतन करीब 1 लाख रुपये प्रति महीने की कमाई होने की बात सामने आई है। उनकी कहानी खास इसलिए भी है क्योंकि उन्होंने किसी बड़े ऑफिस या भारी निवेश के बिना अपना काम खड़ा किया।

कम खर्च में चल रहा है बिजनेस

ज्योति ने अपने बिजनेस के खर्चों को काफी सीमित रखा है। उनके मुताबिक, हर महीने करीब 15 हजार रुपये मुख्य रूप से ऐप्स और वीडियो एडिटिंग जैसे सॉफ्टवेयर पर खर्च होते हैं। वह ज्यादातर काम घर से करती हैं, इसलिए ऑफिस का किराया और उससे जुड़े दूसरे खर्च नहीं हैं। कम ऑपरेशनल कॉस्ट उनके बिजनेस को चलाने में मदद करती है।

भारत में निवेश, अब स्वीडन में भी कदम

ज्योति ने बताया कि उनके ज्यादातर निवेश अभी भारत में हैं और खासतौर पर प्रॉपर्टी में निवेश किया गया है। हालांकि, अब उन्होंने स्वीडन में भी निवेश करना शुरू कर दिया है। यानी विदेश में रहते हुए भी उन्होंने भारत से अपना आर्थिक जुड़ाव बनाए रखा है और धीरे-धीरे स्वीडन में भी अपनी वित्तीय मौजूदगी बढ़ा रही हैं।

स्वीडन ने बदली उनकी सोच और जिंदगी

ज्योति के मुताबिक, स्वीडन में रहने का असर सिर्फ उनके करियर पर नहीं पड़ा, बल्कि उनके व्यक्तित्व में भी बदलाव आया। वह खुद को अब पहले से ज्यादा शांत, दयालु, समय की पाबंद और आत्मनिर्भर मानती हैं। लंबे समय तक स्वीडन में रहने के बाद वह वहां के जीवन और संस्कृति के साथ काफी सहज हो चुकी हैं।

बेटी का जन्म बनी सबसे खूबसूरत याद

स्वीडन में बिताए समय की उनकी सबसे खास यादों में बेटी का जन्म शामिल है। उन्होंने इसे अपनी जिंदगी के बेहद खूबसूरत और यादगार पलों में से एक बताया। यह व्यक्तिगत अनुभव उनके लिए स्वीडन को सिर्फ एक रहने की जगह से कहीं ज्यादा खास बनाता है।

नौकरी छूटने से मिली नई पहचान

ज्योति की कहानी इस बात की मिसाल है कि जिंदगी में आया कोई बड़ा झटका हमेशा अंत नहीं होता। नौकरी जाने के बाद उन्होंने हार मानने के बजाय कंटेंट क्रिएशन और उद्यमिता की राह चुनी। पति की नौकरी के लिए विदेश पहुंची ज्योति ने धीरे-धीरे वहां अपनी खुद की पहचान बनाई। आज उनका सफर नौकरी छूटने से लेकर अपना बिजनेस खड़ा करने और आत्मनिर्भर बनने तक पहुंच चुका है।

8000 की नौकरी से 14 लाख followers तक | Inspiring Comeback Story | Isa Khan || The Better India Hindi

8000 रुपये की नौकरी करने वाला एक टीचर Covid में सब कुछ खो बैठा। Coaching Centre बंद, सिर्फ 4 student बचे। लेकिन जब लगा कि सब खत्म हो गया है तभी उसने अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा फैसला लिया।
आज वही इंसान 14 लाख लोगों को Inspire कर रहा है और पूरी दुनिया घूम रहा है।

ये सिर्फ एक कहानी नहीं, ये Proof है कि अंत के बाद भी एक नई शुरुआत होती है।

@khan.isa

Teacher turned Content Creator Life Changing Story, Failure to Success

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Apoorva Makhija: ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ के विवादित एपिसोड के बाद सुसाइड करना चाहती थीं अपूर्वा मखीजा

Apoorva Makhija: कंटेंट क्रिएटर अपूर्वा मखीजा ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ विवाद के नतीजों को याद करते हुए भावुक हो गईं। इन्फ्लुएंसर ने बताया कि उस मुश्किल दौर में उन्हें सुसाइड के विचार आए थे और उन्होंने साथी कंटेंट क्रिएटर सूफी मोतीवाला का शुक्रिया अदा किया, जिन्होंने उस समय उनका साथ दिया जब उन्हें सबसे ज़्यादा सहारे की जरूरत थी।

रियलिटी शो ‘लॉक अप सीजन 2’ में सूफी मोतीवाला के साथ खुलकर बातचीत के दौरान, अपूर्वा ने माना कि अगर सूफी उनके साथ नहीं होते, तो वह उस विवाद का सामना नहीं कर पातीं। लंबे समय बाद सूफी से मिलकर अपनी भावनाएं जाहिर करते हुए अपूर्वा ने कहा, “मैंने तुम्हें सच में बहुत याद किया। ऐसा दोबारा मत करना। मुझे रोना आ रहा है। जब भी कोई मुझसे तुम्हारे बारे में पूछता है और कहता है, ‘तुम उसकी दोस्त कैसे बनी थीं? वह तो बहुत मतलबी है,’ तो मैं उनसे कहती हूं… अगर ‘लेटेंट फियास्को’ (विवाद) के समय सूफी मेरे साथ नहीं होते, तो मैं सुसाइड कर लेती।”

सूफी मोतीवाला ने अपूर्वा की बात सुनकर जवाब दिया, “ऐसा मत कहो। अपूर्वा ने फिर से कहा कि उस समय उनका साथ कितना जरूरी था। उन्होंने कहा, “मैं उस दौर से गुजर नहीं पाती। तुम ही अकेले इंसान थे जो मेरे साथ थे। मैं किसी को डेट नहीं कर रही थी। पर्सनल तौर पर, मेरी जिंदगी में, एक दोस्त के तौर पर।”

अपनी दोस्ती को याद करते हुए, सूफी मोतीवाला ने माना कि साथ बिताया गया वह समय उनकी ज़िंदगी के सबसे खुशनुमा दौर में से एक था। उन्होंने कहा, “सच कहूं तो भाई, वह एक साल मेरी ज़िंदगी का सबसे पसंदीदा साल था, जब हम दोस्त थे। मुझे आखिरकार लगा कि बॉम्बे में मेरा भी एक सोशल सर्कल है। मुझे लगा कि कोई है, जिसके पास मैं जब चाहूं जा सकता हूं। सच कहूं तो मुझे तुम्हारी बहुत याद आई।”

इसके बाद दोनों ने एक-दूसरे से माफी मांगी और बातचीत खत्म हुई। अपूर्वा ने कहा कि मुझे भी सच में बहुत अफसोस है। मुझे पता है कि छोटी-छोटी बातें भी बहुत दुख पहुंचा सकती हैं। जब तुम्हें सबसे ज्यादा जरूरत थी, तब मैं तुम्हारे लिए वह सुरक्षित माहौल नहीं बना पाई, इसके लिए मुझे माफ करना।

45000 की नौकरी छोड़ दिल्ली की स्नेहा ने सीखी स्पेनिश, एक लैंग्वेज ने ऐसी बदली जिंदगी कि अब बिना जॉब भी स्विट्जरलैंड में बिता रहीं लाइफ!

बहुत से लोग मानते हैं कि फाइनेंशियल सिक्योरिटी पाने का एकमात्र तरीका एक स्टेबल नौकरी है। लेकिन एक भारतीय कंटेंट क्रिएटर का कहना है कि वह बिना किसी रेगुलर कॉर्पोरेट नौकरी के, दुनिया के सबसे महंगे देशों में से एक, स्विट्जरलैंड में छह महीने बिता पाईं।

एक इंस्टाग्राम वीडियो में, स्नेह गौर ने बताया कि कैसे उन्होंने फिक्स्ड सैलरी वाली नौकरी छोड़कर कमाई के अलग-अलग जरीये बनाए, जिससे उन्हें अपनी शर्तों पर जीने और काम करने की आजादी मिली। उनकी कहानी ने अब ऑनलाइन चर्चा छेड़ दी है।

गौर ने बताया कि उनके सफर की शुरुआत तब हुई जब वह एक कॉर्पोरेट नौकरी कर रही थीं और महीने के लगभग 45,000 रुपये कमा रही थीं। उस समय, उनका मानना ​​था कि सफलता का मतलब है डिग्री हासिल करना, अच्छी नौकरी पाना और प्रमोशन पाना।

उन्होंने कहा, “मुझे लगता था कि सफलता का मतलब यही है – डिग्री लेना, सैलरी पाना, नौकरी करना और अगला प्रमोशन पाना।” लेकिन समय के साथ उन्हें एहसास हुआ कि वह कुछ अलग करना चाहती थीं। अपनी मर्जी से रहने की जगह चुनने, घूमने-फिरने और उन चीजों पर काम करने की आजादी जो मुझे सच में पसंद थीं।” एक ही रास्ते पर चलने के बजाय, उन्होंने स्पैनिश सीखने का फैसला किया।

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गौर के मुताबिक, उस एक स्किल ने नए मौके खोले। इससे उन्हें स्पेन जाने, अलग-अलग देशों के लोगों से मिलने और इंटरनेशनल अनुभव पाने में मदद मिली। बाद में, उन्होंने उस जानकारी को एक बिजनेस में बदल दिया। उन्होंने बताया कि सबसे पहले उन्होंने स्पैनिश सिखाना शुरू किया, और फिर स्पेन ट्रैवल गाइड, डिजिटल प्रोडक्ट्स, ऑनलाइन एंटरप्रेन्योर और कंटेंट क्रिएटर्स के लिए मेंटरशिप प्रोग्राम और ब्रांड कोलैबोरेशन जैसे काम शुरू किए।

गौर ने बताया कि कमाई के कई जरिया होने का मतलब था कि अब उन्हें कंपनी की सैलरी पर निर्भर नहीं रहना पड़ता था। उन्होंने कहा, “जब मैं स्विट्ज़रलैंड गई, तो मैं कंपनी की सैलरी पर निर्भर नहीं थी क्योंकि मेरा लैपटॉप और मेरी रिमोट टीम ही काफी थी।”

स्नेहा ने बताया कि “कभी-कभी आपकी जिंदगी बदलने वाली चीज सिर्फ प्रमोशन नहीं, बल्कि कोई स्किल होती है।” अपनी पोस्ट के कैप्शन में गौर ने लिखा, “कोई नौकरी नहीं। कंपनी से कोई सैलरी नहीं। फिर भी हर सुबह स्विट्जरलैंड में आंख खुली। सच तो यह है कि स्पेन में रहते हुए ही मैंने कुछ ऐसा बनाया जिससे मुझे जहां चाहूं वहां रहने की आजादी मिली। न कोई ऑफिस, न कोई बॉस, न किसी की इजाजत की जरूरत। आजादी का यही वो रूप है जिसे पाने की कोशिश करना सही है।”

इस पोस्ट पर लोगों ने खूब प्रतिक्रिया दी और कई यूजर्स उनकी यात्रा के बारे में और जानना चाहते थे। एक यूजर ने लिखा, “कृपया मुझे बताएं।” एक और ने पूछा, “एक सीधा सा सवाल है कि आप किस वीजा पर 6 महीने तक रहीं? स्पेन का सामान्य रेजिडेंट परमिट तो सिर्फ 3 महीने की इजाजत देता है, या फिर आपने स्पेन की नागरिकता ले ली थी?” एक व्यक्ति ने कमेंट किया, “इसके लिए कैसे अप्लाई करें?” वहीं कई अन्य लोगों ने हार्ट और फायर इमोजी के साथ प्रतिक्रिया दी।