3 करोड़ की नौकरी छोड़ दुनिया घूमने निकल पड़ा शख्स, फिर बना डाली करोड़ों की कंपनी

सोशल मीडिया पर अंडर नीट शेपवियर ब्रांड्स के को-फाउंडर और सीईओ विमर्श राजदान का पोस्ट काफी वायरल हो रहा है। पोस्ट में विमर्श राजदान ने बताया कि उन्होंने करोड़ों रुपये के पैकेज वाली कॉर्पोरेट नौकरी छोड़कर अपना बिजनेस शुरू करने का फैसला क्यों लिया। उन्होंने कहा कि, करीब 10 साल तक रोज 18 से 20 घंटे काम करने के बाद उन्हें ऐसा लगा कि अब अपने सपनों पर काम करने का समय आ गया है। इसी सोच की वजह से उन्होंने ऊंची सैलरी वाली नौकरी छोड़कर एंटरप्रेन्योरशिप का रास्ता चुना। सोशल मीडिया पर ये पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है।

शेयर किया पोस्ट

विमर्श राजदान ने लिंक्डइन पर शेयर की गई एक पोस्ट में बताया कि जब उन्होंने एक साल का ब्रेक लेकर दुनिया घूमने का फैसला किया था, तब कई लोगों ने उनकी आलोचना की थी। लेकिन उनका कहना है कि यही फैसला उनकी जिंदगी का बड़ा मोड़ साबित हुआ। इस अनुभव ने काम करने के तरीके, नेतृत्व और बिजनेस को लेकर उनकी सोच पूरी तरह बदल दी।

3 करोड़ को नौकरी छोड़ दी

राजदान ने अपनी पोस्ट में लिखा, “मैंने 3 करोड़ रुपये की CTC वाली नौकरी छोड़ दी और एक साल तक पूरी दुनिया घूमने निकल गया।” उन्होंने आगे बताया कि, “पिछले 13 सालों तक मेरी जिंदगी सिर्फ काम के इर्द-गिर्द ही घूमती रही। मैं घर केवल सोने के लिए जाता था। रोज 18 से 20 घंटे काम करना मेरी दिनचर्या बन गई थी और धीरे-धीरे यही मेरे लिए नॉर्मल बात हो गई थी।”

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आखिरकार, राजदान ने अपनी लाइफस्टाइल को पूरी तरह से बदलने का फैसला किया। नई नौकरी शुरू करने की बजाय उन्होंने एक साल का ब्रेक लिया और आइसलैंड, क्रोएशिया व पेरिस जैसे कई देशों की यात्रा की। उनके मुताबिक, ये सफर उनकी जिंदगी का अहम मोड़ साबित हुआ और इसी अनुभव ने उनकी सोच और आगे का रास्ता बदल दिया। राजदान ने माना कि करियर बनाने में कई साल लगाने के बाद करोड़ों रुपये की सैलरी वाली नौकरी छोड़ने के उनके फैसले को ज्यादातर लोग समझ नहीं पाए। उन्होंने लिखा, “लोगों ने कहा कि मैं पागल हो गया हूं। उन्होंने कहा कि तुम अपना मोमेंटम खो रहे हो।”

नौकरी छोड़े महीनों बीते, लेकिन अटका रहा वेतन; कोलकाता प्रोफेशनल ने साझा किया दर्द

कोलकाता के एक प्रोफेशनल की LinkedIn पोस्ट ने इन दिनों नौकरी, वेतन भुगतान और कर्मचारी अधिकारों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। पूर्व कर्मचारी ने दावा किया है कि संगठन छोड़ने के लगभग एक साल बाद भी उसकी करीब ₹10,000 की बकाया सैलरी का भुगतान नहीं किया गया। उनका कहना है कि यह मुद्दा सिर्फ एक छोटी रकम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस सम्मान और भरोसे से जुड़ा है, जिसकी उम्मीद हर कर्मचारी अपने काम के बदले करता है। पोस्ट में उन्होंने बताया कि कई बार संपर्क करने और इंतजार करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ।

इसके बाद उन्होंने अपनी बात सार्वजनिक रूप से साझा करने का फैसला किया। इस मामले ने सोशल मीडिया पर कर्मचारियों के अधिकारों, कंपनियों की जिम्मेदारी और बेहतर वर्क कल्चर को लेकर चर्चा तेज कर दी है।

अक्टूबर 2025 में छोड़ी थी नौकरी

पूर्व कर्मचारी के मुताबिक, उसने Go Future Digital Team में अप्रैल 2025 से अक्टूबर 2025 तक काम किया था। उसने 13 अक्टूबर 2025 को इस्तीफा दिया और 15 अक्टूबर उसका आखिरी कार्यदिवस था। उसका दावा है कि अक्टूबर के बाकी दिनों की सैलरी को लेकर उसने ज्यादा उम्मीद नहीं रखी, लेकिन करीब ₹10,000 की राशि अब तक लंबित है।

बार-बार संपर्क के बावजूद नहीं हुआ भुगतान

LinkedIn पोस्ट में कर्मचारी ने आरोप लगाया कि उसने कंपनी के मालिक Ayon Chatterjjee से कई बार संपर्क कर बकाया राशि का भुगतान करने की कोशिश की। उसके अनुसार, हर बार उसे कुछ और समय इंतजार करने को कहा गया और जल्द भुगतान का भरोसा दिलाया गया, लेकिन रकम कभी जारी नहीं हुई।

एक हफ्ते चुप रहो, पेमेंट हो जाएगा’ वाले मैसेज का दावा

कर्मचारी ने अपनी पोस्ट के साथ कुछ बातचीत के स्क्रीनशॉट भी साझा किए, जिनमें उसने कंपनी प्रतिनिधि के साथ भुगतान को लेकर हुई बातचीत का दावा किया। एक स्क्रीनशॉट में कथित तौर पर जवाब दिया गया कि सात दिन तक कॉल और मैसेज न करने पर भुगतान कर दिया जाएगा। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

पब्लिक पोस्ट करने की बताई वजह

पूर्व कर्मचारी ने कहा कि शुरुआत के करियर में ऐसा अनुभव काफी निराशाजनक रहा। उसने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य किसी व्यक्ति को निशाना बनाना नहीं, बल्कि अन्य नौकरी तलाशने वालों को सतर्क करना है। उसने कर्मचारियों को सलाह दी कि वे जॉइन करने से पहले कंपनी की भुगतान व्यवस्था समझें और सभी जरूरी दस्तावेज व रिकॉर्ड सुरक्षित रखें।

सोशल मीडिया पर लोगों ने जताया समर्थन

पोस्ट वायरल होने के बाद कई LinkedIn यूजर्स ने कर्मचारी के समर्थन में प्रतिक्रियाएं दीं। कुछ लोगों ने कहा कि किसी भी कर्मचारी की मेहनत की कमाई समय पर मिलनी चाहिए। वहीं कुछ यूजर्स ने अपने अनुभव भी साझा किए और दावा किया कि उन्हें भी वेतन भुगतान से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ा है।

वर्क कल्चर और कर्मचारियों के अधिकारों पर फिर चर्चा

इस मामले ने एक बार फिर नौकरी की दुनिया में वेतन भुगतान, कर्मचारियों के सम्मान और कंपनियों की जिम्मेदारी जैसे मुद्दों को सामने ला दिया है। हालांकि, LinkedIn पोस्ट में किए गए आरोपों और कमेंट्स की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

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100 रुपये लेने से मना किया, Blinkit राइडर ने जो कहा उसे सुन MBA मैनेजर भी रह गईं दंग

कभी-कभी जिंदगी की बड़ी सीख किसी खास मौके या बड़ी जगह से नहीं, बल्कि रोजमर्रा की छोटी घटनाओं से मिलती है। ऐसा ही एक अनुभव एक प्रोडक्ट मैनेजर के साथ हुआ, जब एक Blinkit डिलीवरी पार्टनर की सोच ने उन्हें हैरान कर दिया। एक सामान्य-सी डिलीवरी के दौरान हुई बातचीत ने मेहनत, जिम्मेदारी और सफलता को देखने का नजरिया बदल दिया। इस घटना ने यह दिखाया कि काम में बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा हर व्यक्ति के लिए अलग हो सकती है।

जहां कॉर्पोरेट दुनिया में अप्रेजल और लक्ष्य अहम माने जाते हैं, वहीं एक डिलीवरी पार्टनर ने अपनी रेटिंग को ही अपनी मेहनत का पैमाना बना लिया। उनकी बातों ने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींचा और कई यूजर्स को सोचने पर मजबूर कर दिया कि असली प्रोफेशनलिज्म आखिर होता क्या है।

गलत पते पर पहुंचा ऑर्डर, फिर भी नहीं बदला रवैया

यह कहानी प्रोडक्ट मैनेजर मानसी शर्मा ने LinkedIn पर शेयर की। उन्होंने बताया कि एक दिन Blinkit से सामान मंगाते समय गलती से पुराना सेव किया हुआ पता चुन लिया। डिलीवरी पार्टनर ने कॉल कर बताया कि दिए गए पते पर कोई गेट नहीं खोल रहा है। गलती का पता चलने पर मानसी ने माफी मांगी और पूछा कि क्या डिलीवरी पार्टनर उनका सही पता ढूंढकर वहां सामान पहुंचा सकता है। नया पता करीब 3 किलोमीटर दूर था।

जब डिलीवरी बॉय ने दिखाई ‘एक्स्ट्रा माइल’ वाली सोच

आम तौर पर ऐसी स्थिति में कोई भी डिलीवरी रोक सकता था या नया ऑर्डर करने को कह सकता था। लेकिन इस डिलीवरी पार्टनर ने बिना किसी शिकायत के हां कर दी। वह 3 किलोमीटर दूर गया, सामान पहुंचाया और चेहरे पर मुस्कान के साथ डिलीवरी पूरी की।

100 रुपये का ऑफर भी ठुकराया

मानसी को लगा कि डिलीवरी पार्टनर को हुई परेशानी के लिए कुछ अतिरिक्त देना चाहिए। उन्होंने उसे 100 रुपये देने चाहे, लेकिन उसने विनम्रता से पैसे वापस कर दिए। इसके बाद उसने जो बात कही, उसने पूरी कहानी का नजरिया बदल दिया।

रेटिंग ही मेरी अप्रेजल है’

डिलीवरी पार्टनर ने कहा, “पिछले महीने मेरी रेटिंग 4.2 थी। जब मैं एक्स्ट्रा माइल जाता हूं तो यह 4.8 हो जाती है। यही मेरी अप्रेजल है।” उसकी यह सोच बताती है कि वह सिर्फ एक ऑर्डर पूरा नहीं कर रहा था, बल्कि अपनी रोज की मेहनत से अपने प्रदर्शन रिकॉर्ड को बेहतर बना रहा था।

MBA से ज्यादा असरदार निकली उसकी सोच

मानसी ने कहा कि उनके पास MBA की डिग्री है, लेकिन उस डिलीवरी पार्टनर ने परफॉर्मेंस और मोटिवेशन को जिस तरह समझा, वह कई मैनेजर्स के लिए भी सीखने वाली बात है। जहां कॉर्पोरेट कर्मचारियों की परफॉर्मेंस साल में एक-दो बार मापी जाती है, वहीं गिग वर्कर्स को हर ऑर्डर के साथ अपनी रेटिंग सुधारने का मौका मिलता है।

सोशल मीडिया पर लोगों ने कहा ‘यही असली मैनेजमेंट है’

मानसी की पोस्ट वायरल होने के बाद कई यूजर्स ने डिलीवरी पार्टनर की सोच और काम के प्रति लगन की तारीफ की। लोगों ने कहा कि बिना बड़ी डिग्री के भी कई लोग जिंदगी और काम की ऐसी समझ रखते हैं, जो किताबों से नहीं मिलती।

एक यूजर ने लिखा, “कुछ लोग डिग्री से ज्यादा बड़ी सीख दे जाते हैं।” वहीं दूसरे यूजर ने कहा कि असली मोटिवेशन अक्सर टाइटल से नहीं, बल्कि उस चीज से आता है जो किसी व्यक्ति के भविष्य को प्रभावित करती है।

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पहली LinkedIn पोस्ट और उसमें नौकरी जाने की खबर! 37 साल तक Microsoft का दिया साथ, फिर एक झटके में गई जॉब

37 साल… किसी नौकरी में बिताया गया यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि मेहनत, भरोसे और अनगिनत यादों का सफर होता है। केविन लाचैपल ने माइक्रोसॉफ्ट में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में शुरुआत की और अपनी मेहनत के दम पर Xbox प्लेटफॉर्म के वाइस प्रेसिडेंट बने। उन्होंने कंपनी के कई बड़े प्रोजेक्ट्स को नई पहचान दी, लेकिन आखिरकार एक दिन उनका भी नाम छंटनी की लिस्ट में शामिल हो गया। सबसे भावुक बात यह रही कि 21 साल पुराने LinkedIn अकाउंट पर उन्होंने पहली बार कोई पोस्ट की और वह भी अपने 37 साल लंबे करियर के खत्म होने की खबर शेयर करने के लिए।

37 साल बाद नौकरी जाने की खबर बनी Xbox VP की पहली LinkedIn पोस्ट

केविन लाचैपल ने माइक्रोसॉफ्ट में 37 साल तक काम किया और इस दौरान कंपनी की कई बड़ी कंज्यूमर टेक्नोलॉजी विकसित करने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में शुरुआत की और बाद में Xbox प्लेटफॉर्म के वाइस प्रेसिडेंट बने। उन्होंने Xbox बैकवर्ड कम्पैटिबिलिटी और क्लाउड गेमिंग जैसे कई बड़े प्रोजेक्ट्स का नेतृत्व किया। लेकिन इस बार उनकी LinkedIn पोस्ट किसी नई उपलब्धि या प्रोडक्ट लॉन्च के बारे में नहीं थी, बल्कि नौकरी जाने की खबर थी। लाचैपल ने LinkedIn पर बताया कि वे Microsoft के Xbox डिवीजन में हाल ही में हुई छंटनी का हिस्सा बने हैं। उन्होंने लिखा, “आज Xbox से निकाले गए कर्मचारियों की सूची में मेरा भी नाम शामिल हो गया। इसके साथ ही माइक्रोसॉफ्ट में मेरा 37 साल का सफर खत्म हो गया।”

37 साल बाद पहली LinkedIn पोस्ट में सुनाई अपनी कहानी

केविन लाचैपल की यह पोस्ट उनके LinkedIn अकाउंट की पहली और अब तक की इकलौती पोस्ट है। उनका अकाउंट मई 2005 में बना था, लेकिन करीब 21 साल तक उस पर कोई अपडेट नहीं किया गया। आखिरकार उन्होंने अपने लगभग चार दशक लंबे करियर के खत्म होने की जानकारी इसी पोस्ट के जरिए साझा की। माइक्रोसॉफ्ट में बिताए अपने समय को याद करते हुए लाचैपल ने कहा कि उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक Xbox की उस टीम का नेतृत्व करना था, जिसने Xbox बैकवर्ड कम्पैटिबिलिटी फीचर तैयार किया। इसकी मदद से पुराने Xbox गेम्स नए कंसोल पर भी खेले जा सकते हैं।

उन्होंने लिखा कि उनकी सबसे अच्छी यादें उन बेहतरीन इंजीनियरों के साथ काम करने की हैं, जिन्होंने इस प्रोजेक्ट को सफल बनाया। लाचैपल ने यह भी बताया कि उन्हें आज भी वह पल याद है, जब E3 2015 इवेंट में उस समय के Xbox प्रमुख फिल स्पेंसर ने पहली बार इस फीचर की घोषणा की थी। उस दौरान वह खुद भी ऑडिटोरियम में मौजूद थे।

लाचैपल ने बताया कि जब Xbox बैकवर्ड कम्पैटिबिलिटी फीचर की घोषणा की गई थी, तब दर्शकों की प्रतिक्रिया शानदार थी। उनके मुताबिक, वह पल उनके करियर की सबसे यादगार घटनाओं में से एक था। इसके बाद उन्होंने माइक्रोसॉफ्ट की क्लाउड गेमिंग टीम का नेतृत्व किया। आगे चलकर यही प्रोजेक्ट ‘प्रोजेक्ट xCloud’ बना, जो Xbox की रणनीति का अहम हिस्सा बन गया। लाचैपल का मानना है कि आने वाले समय में लोग कहीं भी हों, मनोरंजन का ज्यादातर कंटेंट स्ट्रीमिंग के जरिए ही देखेंगे और इस्तेमाल करेंगे। कंपनी छोड़ते समय उन्होंने Xbox के पूर्व प्रमुख करीम चौधरी का भी धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि माइक्रोसॉफ्ट में अपने 37 साल के करियर के दौरान करीम चौधरी उनके सबसे अच्छे मैनेजर रहे।

विंडोज से लेकर Xbox क्लाउड गेमिंग तक, 37 साल का शानदार सफर

केविन लाचैपल ने तीन दशक से भी ज्यादा समय पहले माइक्रोसॉफ्ट में अपने करियर की शुरुआत की थी। Xbox प्लेटफॉर्म के वाइस प्रेसिडेंट बनने से पहले उन्होंने कंपनी के कई बड़े विभागों में काम किया और कई महत्वपूर्ण तकनीकी प्रोजेक्ट्स का हिस्सा रहे। उनके योगदान में Project xCloud को शुरू करने में अहम भूमिका निभाना, Microsoft Expression Encoder बनाने वाली टीम की स्थापना करना, HighMAT मल्टीमीडिया फॉर्मेट का सह-विकास करना, Windows के शुरुआती संस्करणों पर काम करना, Windows Movie Maker का पहला संस्करण लॉन्च करना और Xbox में वीडियो स्ट्रीमिंग व बैकवर्ड कम्पैटिबिलिटी जैसे फीचर विकसित करना शामिल है। अपने लंबे करियर के दौरान उन्हें स्ट्रीमिंग, वीडियो एडिटिंग और मल्टीमीडिया तकनीक से जुड़े 17 पेटेंट भी मिले।

माइक्रोसॉफ्ट छोड़ने से पहले लाचैपल Xbox के क्लाउड, कंसोल और पीसी प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। वह बड़ी इंजीनियरिंग टीमों का नेतृत्व करते थे और कंपनी की तकनीकी योजनाओं को बिजनेस रणनीति के साथ जोड़ने का काम करते थे।

Xbox में बड़े बदलाव के बीच गई केविन लाचैपल की नौकरी

केविन लाचैपल ऐसे समय में माइक्रोसॉफ्ट से अलग हुए हैं, जब Xbox अपने इतिहास के सबसे बड़े पुनर्गठन से गुजर रहा है। हाल ही में Xbox की सीईओ आशा शर्मा ने कर्मचारियों को बताया कि कंपनी बड़े बदलाव के तहत करीब 3,200 पद खत्म करेगी। यह Xbox के कुल कर्मचारियों का लगभग 20 प्रतिशत है। इनमें से 1,600 नौकरियां तुरंत समाप्त की जाएंगी, जबकि बाकी कटौती वित्त वर्ष 2027 तक पूरी की जाएगी। इसके अलावा कंपनी चार गेम स्टूडियो बेच रही है और एक अन्य स्टूडियो को भी अलग करने की तैयारी में है।

कर्मचारियों को भेजे गए एक संदेश में आशा शर्मा ने कहा कि कंपनी का कारोबार उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर रहा है। उन्होंने बताया कि Xbox का मुनाफा (मार्जिन) इस क्षेत्र की दूसरी कंपनियों की तुलना में काफी कम है। उन्होंने गेमिंग इंडस्ट्री में चल रही हार्डवेयर से जुड़ी चुनौतियों का भी जिक्र किया और कहा कि अब Xbox के कारोबार को नए सिरे से मजबूत करने की जरूरत है।

‘सिर्फ 2 पैसे ज्यादा और शनिवार-रविवार की छुट्टी…’ कर्मचारी का ऐसा इस्तीफा पढ़कर आप भी हंस पड़ेंगे!

नौकरी छोड़ने के पीछे की वजहें अक्सर लोगों को सोचने पर मजबूर कर देती हैं। कोई बेहतर करियर के लिए कदम बढ़ाता है तो कोई नई चुनौतियों की तलाश में कंपनी बदलता है। लेकिन इन दिनों सोशल मीडिया पर एक ऐसा इस्तीफा वायरल हो रहा है, जिसने अपनी सादगी और ईमानदारी से लोगों का ध्यान खींच लिया है। इस पत्र में न तो बड़े-बड़े कॉर्पोरेट शब्दों का इस्तेमाल किया गया और न ही लंबी-चौड़ी सफाई दी गई।

कर्मचारी ने बेहद सीधे और मजेदार अंदाज में अपनी बात रखी, जिसे पढ़कर इंटरनेट यूजर्स मुस्कुराने पर मजबूर हो गए। यही वजह है कि यह इस्तीफा तेजी से सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है। कई लोग इसे नौकरीपेशा लोगों की असली सोच और आज के कार्यस्थल की हकीकत का सबसे सटीक उदाहरण भी बता रहे हैं।

LinkedIn पर शेयर हुई अनोखी चिट्ठी

यह इस्तीफा HR कंसल्टेंट अंश्वर्या गुप्ता ने LinkedIn पर शेयर किया। उन्होंने इसे अपनी “Resignation Series Part 20” का हिस्सा बताया। तस्वीर में कर्मचारी फरहान का हाथ से लिखा छोटा-सा इस्तीफा नजर आता है, जिसने देखते ही देखते लोगों का ध्यान खींच लिया।

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क्या लिखा था इस्तीफे में?

फरहान ने अपने पत्र में बेहद सरल शब्दों में लिखा:

“Dear Sir, सामने वाली कंपनी शनिवार-रविवार की छुट्टी और 2 पैसे ज्यादा दे रही है, तो मैं बिक गया।”

इसके बाद उन्होंने अपना नाम लिखकर पत्र समाप्त कर दिया।

ईमानदारी पर फिदा हुए यूजर्स

फरहान का इस्तीफा लोगों को खूब पसंद आ रहा है। कई यूजर्स ने कहा कि आज के समय में बेहतर वेतन और वर्क-लाइफ बैलेंस ही नौकरी बदलने की सबसे बड़ी वजह बन चुके हैं।

एक यूजर ने लिखा, “सब इस्तीफे की बात कर रहे हैं, लेकिन मैं तो उनकी शानदार हैंडराइटिंग का फैन हो गया हूं।”

दूसरे ने मजाकिया अंदाज में कहा, “LinkedIn कहता है करियर ग्रोथ, लेकिन असली दुनिया में लोग ज्यादा सैलरी और वीकेंड ऑफ के लिए नौकरी बदलते हैं।”

वीकेंड की छुट्टी बनी सबसे बड़ा आकर्षण

कई लोगों ने टिप्पणी की कि अगर नौकरी में शनिवार और रविवार की छुट्टी मिल जाए तो कर्मचारी थोड़ा कम वेतन भी स्वीकार कर सकते हैं। कुछ यूजर्स ने इसे कर्मचारियों की वास्तविक जरूरतों और कार्यस्थल की सच्चाई का सबसे ईमानदार उदाहरण बताया।

सोशल मीडिया पर छाई चर्चा

यह अनोखा इस्तीफा अब हजारों लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग इसे मजेदार होने के साथ-साथ नौकरीपेशा लोगों की वास्तविक सोच का प्रतिबिंब भी मान रहे हैं। फरहान की दो लाइन की चिट्ठी ने एक बार फिर दिखा दिया कि कभी-कभी सबसे सरल बातें ही सबसे ज्यादा असर छोड़ जाती हैं।

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