₹67,999 में लॉन्च हुआ Acer का नया AI Laptop, 32GB RAM और 1TB स्टोरेज से है लैस

Acer ने भारत में Swift Neo AI लैपटॉप लॉन्च किया है। इसके साथ कंपनी ने भारत में AI से लैस लैपटॉप की अपनी रेंज को और बढ़ाया है। यह नया पतला और हल्का लैपटॉप Intel Core Ultra प्रोसेसर से लैस है। इसे खासतौर पर प्रोफेशनल्स, छात्रों और क्रिएटर्स को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इसमें AI की मदद से बेहतर परफॉर्मेंस, प्रीमियम मेटल डिजाइन और लेटेस्ट कनेक्टिविटी फीचर्स मिलते हैं।

इस लैपटॉप में Microsoft Copilot इंटीग्रेशन, Intel AI Boost और हल्का डिजाइन भी है, जो इसे प्रोडक्टिविटी, कंटेंट क्रिएशन और रोजाना के मल्टीटास्किंग कामों के लिए बेहतरीन बनाता है।

कीमत और उपलब्धता

Acer Swift Neo AI लैपटॉप की शुरुआती कीमत ₹67,999 है। यह Flipkart, Acer E-store और पूरे भारत में दूसरे रिटेल चैनलों पर उपलब्ध होगा।

फीचर्स

Acer Swift Neo AI में लेटेस्ट Intel Core Ultra 5 और Intel Core Ultra 7 H प्रोसेसर के साथ Intel AI Boost दिया गया है, जो प्रोडक्टिविटी, कोलेबोरेशन और क्रिएटिव ऐप्स में AI-पावर्ड अनुभव देता है। बता दें कि तेज मल्टीटास्किंग और बेहतर सिस्टम रिस्पॉन्स के लिए इस लैपटॉप को 32GB तक LPDDR5 RAM और 1TB PCIe NVMe SSD स्टोरेज के साथ कॉन्फिगर किया जा सकता है।

इसके अलावा, इसमें 16:10 आस्पेक्ट रेशियो, 1920 x 1200 रिजॉल्यूशन और 300 निट्स तक की ब्राइटनेस वाला 14-इंच WUXGA IPS डिस्प्ले है, जबकि कुछ खास वेरिएंट्स में OLED डिस्प्ले का ऑप्शन भी मिलता है।

डिजाइन की बात करें तो लैपटॉप में ऊपर और नीचे प्रीमियम मेटल कवर दिया गया है। इसका वजन सिर्फ 1.25 किलोग्राम है और मोटाई 17.2mm है। इसमें 180-डिग्री हिंज, बैकलिट कीबोर्ड, प्रिसीजन टचपैड और फिंगरप्रिंट रीडर जैसे फीचर्स भी मिलते हैं।

कनेक्टिविटी के लिए, Swift Neo AI में चार्जिंग, डेटा ट्रांसफर और डिस्प्ले आउटपुट सपोर्ट वाले दो फुल-फंक्शन USB Type-C पोर्ट, HDMI, अतिरिक्त USB पोर्ट और Wi-Fi 6 की सुविधा है। इसमें फुल HD 1080p वेबकैम, डुअल स्पीकर और 52Wh की बैटरी भी है, साथ ही यह 65W USB Type-C फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करता है।

सॉफ्टवेयर की बात करें तो यह लैपटॉप Windows 11 Home पर चलता है और इसमें Microsoft Copilot का इंटीग्रेशन मिलता है। इसकी मदद से यूजर्स प्रोडक्टिविटी और क्रिएटिव कामों के लिए AI टूल्स का इस्तेमाल कर सकते हैं।

Acer के मुताबिक, Swift Neo AI को बेहतर परफॉर्मेंस, आसानी से साथ ले जाने वाले डिजाइन और AI फीचर्स का संतुलन देने के लिए बनाया गया है। कंपनी इसे ऐसे यूजर्स के लिए पेश कर रही है जो एक मॉडर्न AI लैपटॉप चाहते हैं।

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Parag Parikh Fund: फंड मैनेजर राजीव ठक्कर की चाल! 39 शेयर्स समान, फिर भी क्यों अलग हैं Flexi Cap और Large Cap?

Parag Parikh Flexi Cap vs Large Cap: पराग पारिख म्यूचुअल फंड (PPFAS) के निवेशकों के बीच इस समय सबसे बड़ी चर्चा Parag Parikh Flexi Cap Fund और हाल ही में लॉन्च हुए Parag Parikh Large Cap Fund को लेकर है। दोनों ही फंड्स का प्रबंधन मुख्य रूप से जाने-माने फंड मैनेजर राजीव ठक्कर संभाल रहे हैं।

मनीकंट्रोल के जुलाई 2026 के पोर्टफोलियो विश्लेषण (ACE MF डेटा) के अनुसार, दोनों फंड्स में 39 शेयर एक जैसे हैं। पहली नजर में देखने पर दोनों स्कीम्स काफी हद तक समान लग सकती हैं, लेकिन पोर्टफोलियो आवंटन और स्ट्रैटेजी के स्तर पर इनमें बड़े अंतर हैं।

रिटर्न की स्थिति: 6 महीने से 3 साल का ट्रैक रिकॉर्ड

Parag Parikh Flexi Cap Fund: इस फंड ने इस साल अब तक -4.57% और 1 साल में -1.79% का रिटर्न दिया है। हालांकि, इसका 3 साल का सालाना रिटर्न 13.87% का रहा है।

Parag Parikh Large Cap Fund: नए फंड ने अपने शुरुआती 6 महीनों की अवधि में -2.11% का रिटर्न दिया है।

एसेट एलोकेशन: लार्ज कैप का दायरा और विदेशी शेयर

दोनों फंड्स के मैंडेट के मुताबिक उनके एसेट एलोकेशन में बड़ा अंतर है:

लार्ज कैप शेयर: फ्लेक्सी कैप फंड अपने पोर्टफोलियो का 64.85% हिस्सा लार्ज कैप कंपनियों में रखता है, जबकि लार्ज कैप फंड में यह हिस्सेदारी 95.25% है।

विदेशी शेयर व कैश: फ्लेक्सी कैप फंड में 11.06% आवंटन ग्लोबल शेयर्स (जैसे- Alphabet, Amazon, Meta और Microsoft) में है। इसके अलावा 7.15% डेट और 4.60% कैश में है। इसके विपरीत, लार्ज कैप फंड 99.16% पैसा सिर्फ भारतीय इक्विटी में ही लगाता है।

39 शेयर कॉमन, लेकिन असली ओवरलैप सिर्फ 37.27%

डेटा दिखाता है कि दोनों स्कीम्स में 39 स्टॉक्स बिल्कुल समान हैं। ये कॉमन शेयर फ्लेक्सी कैप के 67.38% और लार्ज कैप के 68.32% पोर्टफोलियो को कवर करते हैं।हालांकि, दोनों फंड्स में कंपनियों को दिया गया वेटेज अलग-अलग है, जिससे इनका वास्तविक वेटेड पोर्टफोलियो ओवरलैप सिर्फ 37.27% निकलकर आता है:

Bajaj Finance: लार्ज कैप फंड में 2.22% वेटेज है, जबकि फ्लेक्सी कैप में सिर्फ 0.41%।

State Bank of India: लार्ज कैप में 3.08% बनाम फ्लेक्सी कैप में महज 0.09%।

Power Grid & ITC: पावर ग्रिड फ्लेक्सी कैप में 5.98% है तो लार्ज कैप में 0.93%। वहीं ITC फ्लेक्सी कैप में 5.74% और लार्ज कैप में 1.96% है।

HDFC Bank: दोनों फंड्स का सबसे बड़ा होल्डिंग शेयर HDFC Bank है, जो फ्लेक्सी कैप में 7.55% और लार्ज कैप में 8.31% है। इसके अलावा ICICI Bank, Bharti Airtel और Infosys दोनों में प्रमुखता से शामिल हैं।

स्टॉक्स की संख्या और पोर्टफोलियो कंसंट्रेशन

राजीव ठक्कर एक ही फंड मैनेजर होने के बावजूद दोनों फंड्स में डायवर्सिफिकेशन की रणनीति अलग रख रहे हैं:

कुल शेयर्स: फ्लेक्सी कैप के पास 61 भारतीय और 4 विदेशी शेयर (कुल 65) हैं। वहीं, लार्ज कैप फंड ने 103 शेयरों में अपना पैसा फैलाया हुआ है।

टॉप 10 स्टॉक्स: फ्लेक्सी कैप के टॉप 10 शेयर पोर्टफोलियो का 52.31% हिस्सा बनाते हैं, जबकि लार्ज कैप में टॉप 10 शेयर सिर्फ 42.79% बनाते हैं।

टॉप 5 सेक्टर्स: फ्लेक्सी कैप के 5 बड़े सेक्टर्स का योगदान 62.97% है, जबकि लार्ज कैप में यह 55.60% है।

इसका मतलब है कि व्यापक निवेश छूट होने के बावजूद फ्लेक्सी कैप फंड ज्यादा कंसंट्रेटेड पोर्टफोलियो चला रहा है, जबकि लार्ज कैप फंड ने अपनी पूंजी को कई शेयरों में फैला रखा है।

निवेशकों के लिए केवल 39 कॉमन शेयर्स देखकर दोनों फंड्स को एक जैसा मान लेना सही नहीं होगा। फ्लेक्सी कैप फंड जहां कंसंट्रेटेड इंडियन इक्विटी के साथ इंटरनेशनल एक्सपोजर और डेट का बैलेंस देता है, वहीं लार्ज कैप फंड पूरी तरह से भारतीय लार्ज कैप कंपनियों के एक बड़े बास्केट में निवेश करता है। 6 महीने की अवधि नए फंड के प्रदर्शन का आकलन करने के लिए छोटी है, लेकिन पोर्टफोलियो डेटा यह साफ करता है कि कंपनियां भले एक हों, निवेश की दिशा अलग है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

H-1B वीजा पर US का नया प्लान, भारत पर क्या होगा असर?

H-1B वीजा पर US का नया प्लान, भारत पर क्या होगा असर?

डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाली अमेरिकी सरकार ने अत्यधिक कुशल विदेशी कर्मचारियों के लिए नए H-1B वीजा आवेदन पर 1 लाख डॉलर से अधिक की फीस लगाने का प्रस्ताव रखा है। अमेरिकी Department of Homeland Security (DHS) की ओर से जारी प्रस्ताव के तहत यह फीस बढ़ाकर 1,03,265 डॉलर की जा सकती है। सोमवार को Federal Register में प्रकाशित नोटिस के मुताबिक, यह फीस उन सभी H-1B वीजा कैप-सब्जेक्ट आवेदनों पर लागू होगी, जिनमें एडवांस्ड डिग्री यानी उच्च शिक्षा प्राप्त उम्मीदवारों के लिए उपलब्ध छूट वाली श्रेणी भी शामिल है।

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H-1B फीस बढ़ाने का नया प्रस्ताव

 

DHS का यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब H-1B वीजा फीस को लेकर अमेरिकी अदालतों में कानूनी विवाद चल रहा है। करीब एक महीने पहले एक संघीय अपीलीय अदालत ने उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें जिला जज के उस आदेश पर रोक लगाने की मांग की गई थी, जिसने ट्रंप प्रशासन की 1 लाख डॉलर H-1B फीस लगाने की योजना को पलट दिया था।

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सितंबर 2025 में ट्रंप ने एक व्यापक घोषणा पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत H-1B वीजा पर सालाना 1 लाख डॉलर की फीस लगाने का प्रावधान किया गया था। इसी दौरान अमीर लोगों के लिए अमेरिकी नागरिकता की राह के तौर पर 10 लाख डॉलर के ‘गोल्ड कार्ड’ वीजा की योजना भी पेश की गई थी।

 

हालांकि, बाद में एक संघीय अदालत ने 1 लाख डॉलर की H-1B फीस को रद्द कर दिया था। वहीं, ‘गोल्ड कार्ड’ कार्यक्रम एक अलग पहल है।

 

भारतीय प्रोफेशनल्स पर सबसे ज्यादा असर की आशंका

नई प्रस्तावित फीस का सबसे ज्यादा असर भारतीय प्रोफेशनल्स पर पड़ने की आशंका है। इसकी वजह यह है कि H-1B वीजा धारकों में भारतीय नागरिकों की संख्या काफी बड़ी है। H-1B वीजा मुख्य रूप से ऐसे विशेषज्ञ पेशों (Specialty Occupations) के लिए जारी किया जाता है, जिनमें आमतौर पर कम से कम स्नातक डिग्री या उसके समकक्ष योग्यता की आवश्यकता होती है।

 

यह वीजा लंबे समय से अमेरिका की टेक्नोलॉजी कंपनियों और IT सर्विसेज कंपनियों के लिए विदेशी कुशल कर्मचारियों को नियुक्त करने का प्रमुख माध्यम रहा है। हालांकि, आलोचकों का आरोप है कि कुछ कंपनियां H-1B कार्यक्रम का इस्तेमाल अपेक्षाकृत कम लागत वाले विदेशी श्रमिकों तक पहुंच बनाने के लिए करती हैं।

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H-1B वीजा के लिए होता है लॉटरी सिस्टम

 

परंपरागत रूप से जब H-1B वीजा के लिए आवेदन वार्षिक सीमा से अधिक हो जाते थे, तो कैप-सब्जेक्ट वीजा आवेदनों का चयन लॉटरी सिस्टम के जरिए किया जाता था। हालांकि, हाल के वर्षों में H-1B वीजा चयन प्रक्रिया में कई बदलाव किए गए हैं।

 

Amazon, Infosys और TCS समेत ये कंपनियां बड़ी नियोक्ता

H-1B कार्यक्रम के तहत Amazon लगातार सबसे बड़े नियोक्ताओं में शामिल रही है। इसके अलावा Cognizant, Infosys, Tata Consultancy Services (TCS), Microsoft और Google जैसी कंपनियां भी H-1B वीजा के प्रमुख नियोक्ताओं में शामिल हैं। अमेरिका का California राज्य भी H-1B मंजूरियों के मामले में प्रमुख राज्यों में बना हुआ है। इसकी बड़ी वजह राज्य में टेक्नोलॉजी कंपनियों की भारी मौजूदगी है।

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नए प्रस्ताव को अंतिम रूप मिलने पर अमेरिका में काम करने की योजना बना रहे विदेशी कुशल कर्मचारियों और उन्हें नियुक्त करने वाली कंपनियों की लागत में बड़ा इजाफा हो सकता है। भारतीय IT प्रोफेशनल्स और अमेरिकी टेक कंपनियां इस प्रस्ताव से सबसे ज्यादा प्रभावित पक्षों में शामिल हो सकती हैं।

भारत में CMF Buds Neo लॉन्च, 35dB ANC और 52 घंटे की बैटरी के साथ, जानें कीमत

CMF Buds Neo: अगर आप गाना सुनने के शौकीन हैं, या फिर आप अपने ऑफिस मीटिंग को अटेंड करने के लिए नए ईयरबड्स की तलाश में हैं, जो आपको क्लीन वॉइस के साथ बेहतर साउंड क्वालिटी दे, तो यह खबर आपके लिए फायदेमंद हो सकती है। दरअसल, Nothing के CMF ने गुरुवार को भारत में अपने CMF Buds Neo TWS ईयरबड्स लॉन्च किए हैं। ये ईयरबड्स ₹2,000 से कम कीमत वाले कॉम्पिटिटिव सेगमेंट में एक नया कॉम्पिटिटर बनकर आए हैं। इनमें 12.4mm के डायनामिक ड्राइवर दिए गए हैं और ये बैकग्राउंड नॉइज़ को कम करने के लिए 35dB तक अडैप्टिव एक्टिव नॉइज़ कैंसिलेशन को सपोर्ट करते हैं। कॉलिंग के लिए इस डिवाइस में ‘क्लियर वॉयस टेक्नोलॉजी’ वाले चार माइक्रोफ़ोन भी दिए गए हैं। कीमत से लेकर फीचर्स तक, CMF के इन TWS ईयरबड्स के बारे में आपको जो कुछ भी जानना चाहिए, वह यहां बताया गया है।

भारत में CMF Buds Neo की कीमत

CMF Buds Neo की लॉन्च के समय कीमत ₹1,999 रखी गई है। इच्छुक खरीदार इसे Dark Blue, White, और Black कलर ऑप्शन में खरीद सकते हैं। ये TWS ईयरबड्स 26 अगस्त, 2026 से Flipkart और अन्य ऑथराइज्ड रिटेल आउटलेट्स पर खरीदने के लिए उपलब्ध होंगे।

CMF Buds Neo के स्पेसिफिकेशन्स और फीचर्स

CMF Buds Neo में 12.4mm के डायनामिक ड्राइवर दिए गए हैं, जिनमें टाइटेनियम-बेस्ड PET डोम और PEEK + PU सराउंड है। इस डिवाइस में 20Hz-20kHz का फ्रीक्वेंसी रिस्पॉन्स, SBC कोडेक्स, AAC, स्टैटिक स्पेशल ऑडियो और छह EQ प्रीसेट (Pop, Electronic, Immersion Boost, Enhance Vocals और Classical) जैसे फीचर्स हैं। इसके अलावा, यूजर्स को EQ प्रोफाइल कस्टमाइज करने का ऑप्शन भी मिलता है और वे कंपनी के ऑफिशियल ‘Nothing X’ ऐप के जरिए Bass Enhancement को भी एडजस्ट कर सकते हैं।

कनेक्टिविटी के मामले में, CMF Buds Neo में Bluetooth 6.0 है और यह डिवाइस डुअल-डिवाइस कनेक्शन, Microsoft Swift Pair और Google Fast Pair को सपोर्ट करता है। CMF Buds Neo, Nothing X ऐप के जरिए Android 6.0 और iOS 13 के साथ काम कर सकते हैं। इसके अलावा, गेमिंग के लिए, ये TWS बड्स 120ms लो लेटेंसी मोड को भी सपोर्ट करते हैं।

बैटरी की बात करें तो CMF Buds Neo के हर ईयरबड में 45mAh की बैटरी दी गई है, जबकि इसके चार्जिंग केस में 460mAh की बैटरी मिलती है। कंपनी के मुताबिक, ANC बंद रखने पर ईयरबड्स 11 घंटे तक का प्लेबैक टाइम दे सकते हैं।

वहीं, चार्जिंग केस के साथ इनका कुल बैटरी बैकअप 52 घंटे तक बताया गया है। यानी बार-बार चार्ज करने की चिंता किए बिना इन्हें लंबे समय तक इस्तेमाल किया जा सकता है।

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Adobe ने कम CGPA के चलते किया रिजेक्ट, Microsoft ने ₹90 लाख के पैकेज पर दी नौकरी; JIIT ग्रेजुएट की कहानी वायरल

इंजीनियरिंग कॉलेज में अच्छा CGPA अक्सर नौकरी की पहली सीढ़ी माना जाता है। कई कंपनियां कैंपस प्लेसमेंट के दौरान छात्रों के लिए न्यूनतम अंक की शर्त रखती हैं, ऐसे में कम CGPA वाले छात्रों के लिए शुरुआत में मौके सीमित हो जाते हैं। लेकिन नमन बंसल की कहानी इस सोच को थोड़ा अलग नजरिए से देखने पर मजबूर करती है। JIIT नोएडा से B.Tech करने वाले नमन का CGPA करीब 6 बताया जाता है और इसी वजह से वह कॉलेज में किसी कैंपस प्लेसमेंट में शामिल नहीं हो सके। इसके बावजूद उन्होंने अपनी Programming Skills को मजबूत किया और Competitive Programming में भी पहचान बनाई।

शुरुआत में उन्हें कई जगहों से रिजेक्शन मिला, लेकिन एक-एक अवसर उनके करियर को आगे बढ़ाता गया। MakeMyTrip और DE Shaw के बाद उन्होंने Adobe में काम किया और फिर Microsoft तक पहुंचे। सोशल मीडिया पोस्ट में उनकी मौजूदा सालाना Compensation करीब ₹90 लाख बताई गई है।

कॉलेज में एक भी प्लेसमेंट का मौका नहीं मिला

X पर Vikas Alwys की शेयर की गई पोस्ट के मुताबिक, नमन ने JIIT नोएडा से B.Tech किया और उनका CGPA करीब 6 रहा। कम स्कोर के चलते वह कॉलेज के दौरान किसी भी कैंपस प्लेसमेंट में शामिल नहीं हो सके। इसके बाद उन्होंने नौकरी के लिए अपनी तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने पर ध्यान दिया। खास तौर पर उनकी Programming Skills और Competitive Programming में उपलब्धियां चर्चा में रहीं। उन्होंने Codeforces पर Candidate Master रैंक भी हासिल की थी।

Adobe से मिला रिजेक्शन, फिर MakeMyTrip में मिली एंट्री

नौकरी की शुरुआत में नमन को कई जगहों से निराशा मिली। उन्होंने Adobe में इंटर्नशिप के लिए आवेदन किया था। बताया गया कि उन्होंने शुरुआती Technical Rounds अच्छे से पूरे किए, लेकिन कम CGPA की वजह से HR राउंड में उनका चयन नहीं हुआ। इसके बाद एक Referral के जरिए उन्हें MakeMyTrip में इंटर्नशिप मिली। यह अनुभव आगे उनके करियर में काफी काम आया।

MakeMyTrip के बाद DE Shaw और फिर Adobe

MakeMyTrip का अनुभव रिज्यूमे में जुड़ने के बाद नमन को DE Shaw में Full-Time Opportunity मिली। इसके बाद उनकी प्रोफाइल और मजबूत हुई। दिलचस्प बात यह रही कि जिस Adobe ने कभी कम CGPA के कारण उन्हें इंटर्नशिप नहीं दी थी, उसी कंपनी ने बाद में उन्हें Member of Technical Staff के पद पर नियुक्त किया।

अब Microsoft में SDE-2

Adobe में करीब दो साल काम करने के बाद नमन के Microsoft पहुंचने का दावा किया गया है। पोस्ट के अनुसार, वह फिलहाल Microsoft में SDE-2 के तौर पर काम कर रहे हैं और उनकी सालाना Compensation करीब ₹90 लाख है। हालांकि, यह सैलरी आंकड़ा सोशल मीडिया पोस्ट में किया गया दावा है।

सोशल मीडिया पर लोगों ने बताई बड़ी सीख

नमन की कहानी वायरल होने के बाद कई यूजर्स ने इसे लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी। लोगों का कहना है कि कम CGPA करियर की शुरुआत में कुछ अवसरों को रोक सकता है, लेकिन इससे किसी व्यक्ति की पूरी क्षमता तय नहीं होती। कई यूजर्स ने उनकी Coding Skills और लगातार मेहनत की तारीफ की। एक कमेंट में कहा गया कि CGPA उनकी कमजोरी थी, लेकिन Coding उनकी ताकत बन गई। उनकी कहानी से यही सीख मिलती है कि कमजोर अकादमिक रिकॉर्ड के बावजूद मजबूत Skills, Practical Experience और लगातार प्रयास करियर में बड़े मौके दिला सकते हैं।

Balochistan Independence Day: 11 अगस्त को ही आजादी सेलिब्रेट करने वाला था बलूचिस्तान, जानिए आज ही के दिन वहां क्या क्या हुआ

Balochistan Independence Day: पाकिस्तान के बलूचिस्तान में आज यानी 11 अगस्त को ‘आजादी दिवस’ मनाए जाने को लेकर एक बार फिर अलग देश की मांग तेज हो गई है। बलूचिस्तान में आज यानी 11 अगस्त को ‘स्वतंत्रता दिवस’ मनाया जा रहा है। इस मौके पर ‘रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान’ ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मांग की है कि बलूचिस्तान को एक स्वतंत्र देश के तौर पर कानूनी, राजनीतिक और कूटनीतिक मान्यता दी जाए।

बलोच नेता मीर यार बलोच ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि बलूचिस्तान को पाकिस्तान का हिस्सा नहीं, बल्कि एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता दी जाए। इस मौके पर बलूच नेता ने पाकिस्तान पर दमन और मानवाधिकार उल्लंघन के गंभीर आरोप भी लगाए हैं।

X पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा, “बलूचिस्तान के छह करोड़ लोग हर साल 11 अगस्त को अपना राष्ट्रीय स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं। आज हम उस मुकाम पर पहंच गए हैं जहां हम सिर्फ अपनी आजादी का जश्न ही नहीं मनाते। बल्कि दुनिया से यह मांग भी करते हैं कि बलूचिस्तान की आजादी को कानूनी, राजनीतिक, कूटनीतिक और नैतिक रूप से मान्यता दी जाए। आजादी के इस पवित्र अवसर पर बलूचिस्तान में रहने वाले बलोच, पश्तून, हिंदू, सिख, ईसाई और सभी धर्मों के भाइयों और बहनों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं।”

भारत का किया जिक्र

उन्होंने आगे कहा, “बलूचिस्तान गणराज्य दुनिया के और खासकर भारत के बहादुर मुख्यधारा के मीडिया, थिंक टैंक, शोधकर्ताओं, कवियों, लेखकों, छात्रों, वकीलों, नागरिक समाज, व्यापारिक समुदाय, धार्मिक नेताओं, सांसदों और उन सभी भाइयों और बहनों का दिल से आभार व्यक्त करता है जिन्होंने बलोचिस्तान की आवाज को वैश्विक स्तर पर पहुंचाया और हमारे लोगों की आवाज बने। बलूचिस्तान के लोगों को नैतिक समर्थन मिलना जारी रहना चाहिए ताकि हम अपनी जमीन, बलूचिस्तान से पाकिस्तान रूपी कैंसर को हटा सकें।”

50 हजार बलोच पाकिस्तान में कैद

बलूचिस्तान में आजादी को दबाने के पाकिस्तान के प्रयासों की कड़ी निंदा करते हुए मीर यार बलोच ने दावा किया कि 50 हजार से ज्यादा बलोच अभी भी पाकिस्तान की यातना कोठरियों में अमानवीय अत्याचार सह रहे हैं। उन्होंने कहा, “हम उन्हें कभी नहीं भूलेंगे। आज की आजादी की सफलता हमारे महान शहीदों, हजारों राजनीतिक कार्यकर्ताओं और कैदियों के अमर बलिदानों की वजह से मिली है।”

बलूचिस्तान में कुर्बानियों के मजबूत इतिहास को याद करते हुए उन्होंने कहा, “बलूचिस्तान के लोगों ने हमेशा विदेशी हमलावरों को रोका है। उन्हें बलूचिस्तान से पीछे हटने पर मजबूर किया है। पाकिस्तान के पास भले ही हजारों टैंक, सैकड़ों लड़ाकू विमान, तोपखाने और एक बड़ी सेना हो, फिर भी शारीरिक, मानसिक और लड़ने की क्षमता के मामले में बलूचिस्तान की सेना पाकिस्तान की सेना से 10 गुना ज्यादा ताकतवर और सफल है।

बलूचिस्तान की सेना एक मजबूत फोर्स है जो हर स्थिति का सामना करने में सक्षम है। दुनिया की पेशेवर सेनाओं से मुकाबला करने के लिए तैयार है। बलूचिस्तान के इलाके को देखते हुए एक बड़ी सेना की जरूरत है। इसलिए बलूचिस्तान गणराज्य ने पांच लाख सैनिकों की सेना तैयार की है।”

11 अगस्त को ही क्यों चुना अपनी ‘आजादी’ का दिन?

जब बलूचिस्तान ने 11 अगस्त को अपना स्वतंत्रता दिवस घोषित किया, तो ‘वर्ल्ड पीस यूनाइटेड’ के एम्बेसडर डॉ. परविंदर सिंह ने कहा, “1947 में जब अंग्रेज भारत से गए, तो पाकिस्तान और बांग्लादेश अपने मौजूदा रूप में मौजूद नहीं थे। लेकिन बलूचिस्तान मौजूद था। उसने 11 अगस्त 1947 को अंग्रेजों से अपनी आजादी का ऐलान किया था। अगर बलूचिस्तान के लोग अपनी आजादी का जश्न मनाना चाहते हैं, तो उन्हें इसकी इजाजत मिलनी चाहिए। इसे विश्व शांति की दिशा में एक कदम के तौर पर देखा जाना चाहिए।”

उन्होंने आगे कहा, “बलूचिस्तान की ज़मीन खनिजों और प्राकृतिक संसाधनों, जैसे सोना और कीमती पत्थरों से बहुत समृद्ध है। अगर बलूचिस्तान पाकिस्तान से अलग हो जाता है, तो पाकिस्तान को अपने आर्थिक आधार का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा गंवाना पड़ सकता है, क्योंकि यह इलाका चीन और दूसरे देशों को खनिजों के निर्यात का मुख्य स्रोत है।”

उन्होंने आगे कहा, “बलूचिस्तान का हाथ से निकलना पाकिस्तान के लिए एक बहुत बड़ा झटका होगा। यही वजह है कि पाकिस्तान उस पर से अपना नियंत्रण नहीं छोड़ना चाहता। आज 56 से ज्यादा देश बलूचिस्तान की आजादी का समर्थन करते हैं। हम 21वीं सदी में जी रहे हैं। एक ऐसा दौर जिसमें टकराव और जबरदस्ती से अब कोई नतीजा नहीं निकलता।”

दुनिया भर में मनाया गया आजादी का जश्न

मंगलवार को बलूचिस्तान ने अपना 79वां स्वतंत्रता दिवस मनाया। यह एक वार्षिक परंपरा का हिस्सा है, जिसे कई बलूच मानवाधिकार संगठन पाकिस्तान की ओर से क्षेत्र के ‘अवैध कब्जे’ के विरोध के रूप में देखते हैं। बलूच स्वतंत्रता आंदोलन की ऐतिहासिक जड़ें 1947 तक जाती हैं, जब ब्रिटिश भारत के विभाजन के बाद कलात रियासत ने कुछ समय के लिए खुद को स्वतंत्र घोषित किया था। हालांकि, 1948 में पाकिस्तान ने इस क्षेत्र का विलय कर लिया, जिसका बलूच राष्ट्रवादी समूह लगातार विरोध करते रहे हैं।

सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म X पर मीर यार बलूच ने आरोप लगाया कि ‘कब्जा करने वाली’ पाकिस्तानी सेना ने बलूचिस्तान में व्यापक प्रतिबंध लगाए हैं। उनके अनुसार, राष्ट्रीय आयोजनों को रोकने के लिए 7 अगस्त से 30 अगस्त तक इंटरनेट सेवाएं बंद रखने का फैसला किया है। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती, सैन्य संसाधनों या हवाई शक्ति के इस्तेमाल के बावजूद पाकिस्तान बलूचिस्तान में अपनी मौजूदगी को अनिश्चित समय तक बनाए नहीं रख सकता, क्योंकि बलूच जनता का संकल्प मजबूत है।

मीर ने कहा, “बलूचिस्तान गणराज्य बलूच लोगों को उग्रवादी या अलगाववादी बताने की कोशिशों को खारिज करता है। बलूच स्वतंत्रता सेनानी बलूचिस्तान की रक्षा, सुरक्षा और सैन्य ताकत का हिस्सा हैं और उन्हें छह करोड़ बलूच लोगों का समर्थन प्राप्त है। लोग उन पर भरोसा करते हैं क्योंकि वे इसी मिट्टी के बेटे-बेटियां हैं और अपने राष्ट्र के हित में काम करते हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “ये बल किसी आर्थिक लाभ के लिए नहीं लड़ रहे हैं और न ही अशांति या हिंसा फैलाने के लिए काम कर रहे हैं। वे अपना राष्ट्रीय कर्तव्य निभा रहे हैं, जिसमें शांति और सुरक्षा बनाए रखना, लोगों की रक्षा करना और एक शांतिपूर्ण, समृद्ध तथा विकसित बलूचिस्तान की नींव रखना शामिल है।”

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मीर ने दावा किया कि बलूच सशस्त्र समूहों की कार्रवाइयों का उद्देश्य उन नेटवर्कों को खत्म करना और बाहर निकालना है, जिन्हें वे पाकिस्तान से जुड़ा मानते हैं और जो उनके अनुसार बलूचिस्तान में अस्थिरता, असुरक्षा और हिंसा के लिए जिम्मेदार हैं।

कॉल सेंटर वर्कर्स की जगह ले रहा AI; माइक्रोसॉफ्ट से उबर तक ने इस्तेमाल बढ़ाया; भारत को लग सकता है बड़ा झटका

AI Jobs: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब सिर्फ कर्मचारियों की मदद करने वाला टूल नहीं रह गया है। बड़ी कंपनियां इसे लागत घटाने और कर्मचारियों की संख्या कम करने के लिए भी इस्तेमाल कर रही हैं।

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक Microsoft, Uber, Hyatt Hotels और Commonwealth Bank of Australia जैसी कंपनियां अब कस्टमर सर्विस का बड़ा हिस्सा AI चैटबॉट और ऑटोमेटेड फोन सिस्टम से संभाल रही हैं। इससे हजारों नौकरियां पहले ही खत्म हो चुकी हैं।

AI से सबसे ज्यादा खतरा किसे?

कॉल सेंटर इंडस्ट्री में लंबे समय से ऑटोमेशन का खतरा था। लेकिन जनरेटिव AI आने के बाद यह बदलाव काफी तेज हो गया है। अब कंपनियां उन कामों को भी AI से करा रही हैं, जिनके लिए पहले इंसानों की जरूरत पड़ती थी।

रिसर्च फर्म Forrester की एनालिस्ट केट लेगेट के मुताबिक, अमेरिका में कस्टमर सर्विस की नौकरियां लगातार घट रही हैं। उनका अनुमान है कि 2030 तक करीब आधी कस्टमर सर्विस नौकरियां AI से प्रभावित हो सकती हैं। सबसे ज्यादा असर फिलीपींस और भारत जैसे देशों पर पड़ सकता है, जहां पश्चिमी कंपनियां बड़ी संख्या में कॉल सेंटर का काम आउटसोर्स करती हैं।

बड़ी कंपनियां कैसे घटा रही हैं लागत?

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, Microsoft ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी कस्टमर सर्विस वर्कफोर्स करीब 50,000 से घटाकर 40,000 कर दी है। कंपनी का कहना है कि AI की मदद से उसे हर साल करीब 750 मिलियन डॉलर की बचत हो रही है। हालांकि, जटिल मामलों में अभी भी इंसानी कर्मचारियों की जरूरत पड़ती है।

वहीं, Uber ने हाल ही में अपनी कस्टमर सर्विस टीम में करीब 10% कटौती की। अब कंपनी ग्राहकों को ऐप के भीतर AI चैटबॉट के जरिए सहायता देने पर ज्यादा जोर दे रही है।

Commonwealth Bank of Australia ने भी AI अपनाने के बाद अपने चैट सपोर्ट से जुड़े सैकड़ों कर्मचारियों की जरूरत कम कर दी। इससे बैंक को हर साल करोड़ों डॉलर की बचत होने की बात कही गई है।

कॉल सेंटर इंडस्ट्री पर बढ़ा दबाव

Hyatt Hotels भी होटल बुकिंग में बदलाव, रसीद भेजने और दूसरे सामान्य अनुरोध AI से निपटा रही है। वहीं, होम सिक्योरिटी कंपनी Brinks Home ने AI की मदद से कॉल वॉल्यूम दो-तिहाई घटा दिया और कॉल सेंटर स्टाफ को करीब 800 से घटाकर 400 कर दिया।

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, AI के बढ़ते इस्तेमाल का असर आउटसोर्सिंग कंपनियों पर भी दिखने लगा है। Teleperformance, Concentrix और TTEC जैसी कंपनियां पहले ही चेतावनी दे चुकी हैं कि कम जटिल काम AI की वजह से तेजी से खत्म हो रहे हैं। ऐसे में आने वाले वर्षों में कॉल सेंटर इंडस्ट्री में रोजगार पर दबाव और बढ़ सकता है।

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15 लाख रुपये सालाना ऑफर को बताया ‘शर्मनाक’, 5 साल अनुभवी टेक्नीशियन की पोस्ट वायरल

नौकरी जाने का दर्द तब और बढ़ जाता है जब कर्मचारी को लगे कि उसे अपनी बात रखने का मौका ही नहीं मिला। ऐसा ही दावा एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने किया है, जिसने एक भारतीय IT कंपनी में कॉन्ट्रैक्ट पर नौकरी शुरू करने के सिर्फ छह महीने बाद अचानक बाहर किए जाने की बात कही है।इंजीनियर के मुताबिक कंपनी ने खराब प्रदर्शन को कारण बताया, लेकिन न तो कोई ठोस सबूत दिखाया गया और न ही पहले कोई चेतावनी या फीडबैक दिया गया। अब यह मामला Reddit पर चर्चा का विषय बन गया है, जहां कई लोगों ने वर्कप्लेस में परफॉर्मेंस रिव्यू सिस्टम को लेकर सवाल उठाए हैं।

इंजीनियर ने मांगा जवाब

Reddit पोस्ट में इंजीनियर ने बताया कि उसे अचानक जानकारी दी गई कि उसका कॉन्ट्रैक्ट परफॉर्मेंस से जुड़ी चिंताओं के कारण खत्म किया जा रहा है। हालांकि, वह यह समझ नहीं पाया कि कंपनी ने यह फैसला किस आधार पर लिया। उसने सवाल उठाया कि रोजाना उसके साथ काम करने वाली क्लाइंट टीम से कोई फीडबैक क्यों नहीं लिया गया। इंजीनियर ने बताया कि सात लोगों की टीम में उसने पिछले 90 रिलीज किए गए स्टोरी पॉइंट्स में से 40 पर काम किया था।

बग्स और देरी के आरोपों पर भी जताई आपत्ति

इंजीनियर ने अपने ऊपर लगाए गए ज्यादा बग्स के आरोपों पर भी सफाई दी। उसका कहना था कि कई प्रोडक्शन इश्यू बाद में उसके पास इसलिए भेजे गए क्योंकि वे लाइव सिस्टम से जुड़े थे और उन्हें तुरंत ठीक करना जरूरी था। उसने यह भी बताया कि कुछ मिनट देर से होने वाली डेली स्टैंडअप मीटिंग को भी बाद में परफॉर्मेंस इश्यू के तौर पर देखा गया, जबकि टीम और मैनेजर को उसकी मेडिकल अपॉइंटमेंट की जानकारी पहले से थी।

AI ट्रेनिंग और ऑनलाइन स्टेटस मॉनिटरिंग पर भी सवाल

इंजीनियर ने कंपनी की कुछ नीतियों पर भी नाराजगी जताई। उसका कहना था कि अनिवार्य AI ट्रेनिंग सेशन उसके वास्तविक काम से ज्यादा जुड़े हुए नहीं थे। इसके अलावा, रिमोट कर्मचारियों से पूरे दिन Slack और Microsoft Teams पर एक्टिव स्टेटस बनाए रखने की उम्मीद को लेकर भी उसने सवाल उठाए। अपना अनुभव बताते हुए उसने लिखा कि सबसे ज्यादा निराशा इस बात से हुई कि उसे कोई चेतावनी, फीडबैक, पारदर्शिता या सुधार का मौका नहीं मिला।

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Reddit यूजर्स ने बताया अपना अनुभव

पोस्ट वायरल होने के बाद कई यूजर्स ने इंजीनियर का समर्थन किया। कुछ लोगों ने कहा कि कंपनियों को नौकरी खत्म करने से पहले स्पष्ट फीडबैक और सुधार का अवसर देना चाहिए। एक यूजर ने लिखा कि ऐसी वर्क कल्चर में बदलाव की जरूरत है, जबकि कुछ अन्य लोगों ने कहा कि रिमोट कर्मचारियों के साथ कई जगह इसी तरह का व्यवहार देखने को मिलता है।

क्या परफॉर्मेंस रिव्यू सिस्टम में बदलाव की जरूरत है?

हालांकि कुछ यूजर्स ने यह भी कहा कि पूरी कहानी का सिर्फ एक पक्ष सामने आया है, लेकिन ज्यादातर लोगों ने इस बात पर सहमति जताई कि कर्मचारियों को किसी भी बड़े फैसले से पहले स्पष्ट संवाद, सही फीडबैक और अपनी स्थिति सुधारने का मौका मिलना चाहिए।

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AI Bubble: क्या AI का बबल फूट रहा? इन 5 बड़े ‘क्रैश’ ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई

AI Bubble: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने पिछले कुछ सालों में शेयर बाजार को नई रफ्तार दी है। AI से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में जबरदस्त तेजी आई। लेकिन अब तस्वीर बदलती दिख रही है। दुनिया भर के बाजारों में AI शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिल रही है। ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि क्या AI का बूम भी डॉट-कॉम बबल की तरह खत्म होने वाला है?

दक्षिण कोरिया का Kospi Index गुरुवार को 6% से ज्यादा टूट गया। AI चिप बनाने वाली SK Hynix के शेयर 11% और Samsung Electronics के शेयर 8% गिर गए। निवेशकों को अब कंपनियों की ऊंची वैल्यूएशन और भविष्य की कमाई की चिंता सता रही है।

आइए जानते हैं हाल के समय में AI थीम से जुड़े 5 बड़े झटकों के बारे में।

IBM

आईटी और कंसल्टिंग कंपनी IBM के शेयर जुलाई 2026 में करीब 25% टूट गए। इससे कंपनी का करीब 70 अरब डॉलर का मार्केट कैप साफ हो गया। कमजोर शुरुआती नतीजों के साथ यह चिंता भी बढ़ी कि AI कंपनी के पारंपरिक कंसल्टिंग कारोबार पर असर डाल सकता है।

SaaS सेक्टर

सॉफ्टवेयर कंपनियों के शेयर फरवरी 2026 में बुरी तरह टूटे। इसकी वजह Anthropic का नया Agentic AI प्लेटफॉर्म रहा। इसके बाद Salesforce, Adobe और ServiceNow जैसे शेयरों में तेज बिकवाली हुई। निवेशकों को लगा कि AI पारंपरिक सॉफ्टवेयर कंपनियों के बिजनेस मॉडल को बदल सकता है।

Nvidia

AI चिप बनाने वाली कंपनी Nvidia को जनवरी 2025 में बड़ा झटका लगा। कंपनी का मार्केट कैप एक ही दिन में करीब 600 अरब डॉलर घट गया। इसकी वजह चीन के AI स्टार्टअप DeepSeek का सस्ता AI मॉडल था। इसके बाद निवेशकों को डर सताने लगा कि महंगे AI चिप्स की मांग उम्मीद से कम हो सकती है।

Alphabet और Big Tech

टेक दिग्गज कंपनियों Alphabet, Amazon, Meta और Microsoft के शेयर जून 2026 में फिसल गए। Alphabet करीब 6% और Amazon लगभग 5% टूट गया। निवेशकों को चिंता थी कि AI पर हो रहा भारी खर्च कब मुनाफे में बदलेगा।

भारतीय आईटी सेक्टर

भारतीय आईटी कंपनियां भी इस दबाव से नहीं बचीं। IBM की गिरावट के बाद AI को लेकर चिंता बढ़ गई। Infosys, TCS, Wipro, HCLTech, Persistent Systems, Coforge और LTIMindtree जैसे शेयरों में बिकवाली देखने को मिली। Nifty IT Index करीब 2% टूट गया। जबकि Nifty 50 और Sensex बढ़त के साथ बंद हुए।

फिलहाल AI सेक्टर की लंबी अवधि की कहानी मजबूत मानी जा रही है। लेकिन ऊंची वैल्यूएशन, मुनाफे को लेकर सवाल और AI से बदलते कारोबार की वजह से इस सेक्टर में आगे भी तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Tech Mahindra Q1 Profit: टेक महिंद्रा का प्रॉफिट 28 फीसदी बढ़कर 1,465 करोड़ रुपये पहुंचा

Tech Mahindra Q1 Profit: टेक महिंद्रा ने 16 जुलाई को जून तिमाही के नतीजों का ऐलान किया। इस दौरान कंपनी का प्रॉफिट 28 फीसदी बढ़कर 1,465 करोड़ रुपये पहुंच गया। एक साल पहले की समान अवधि में कंपनी को 1,141 करोड़ रुपये प्रॉफिट हुआ था। कंपनी का प्रॉफिट सीएनबीसी-टीवी18 के अनुमान से कम है। सीएनबीसी-टीवी18 ने प्रॉफिट 1,684 करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया था।

जून तिमाही में सभी वर्टिकल्स में ग्रोथ

जून तिमाही में नई डील की कुल कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू 1 अरब डॉलर रही, जो साल दर साल आधार पर 33 फीसदी ज्यादा है। कंपनी के सीईओ मोहित जोशी ने कहा, “साल दर साल आधार पर 6.1 फीसदी ग्रोथ के साथ लगातार तीन तिमाहियों में 1 अरब डॉलर की नई डील से हमारे बिजनेस की मजबूती का पता चलता है। क्लाइंट्स से लगातार गहरे होते रिश्ते भी उत्साहजनक है। 5 करोड़ डॉलर से ज्यादा के क्लाइंट्स बेस में 7 फीसदी इजाफा हुआ। साल दर साल आधार पर सभी वर्टिकल्स ने ग्रोथ दिखाई। “

पहली तिमाही में रेवेन्यू 18 फीसदी बढ़ार्र

Tech Mahindra का रेवेन्यू जून तिमाही में 18 फीसदी बढ़कर 15,712 करोड़ रुपये रहा। एनालिस्ट्स ने रेवेन्यू 15,476 करोड़ रुपये रहने का अनुमान जताया था। कंपनी का EBIT मार्जिन 14.4 फीसदी रहा। यह साल दर साल आधार पर 330 बेसिस प्वाइंट्स और तिमाही दर तिमाही आधार पर 60 बेसिस प्वाइंट्स ज्यादा है।

कम्युनिकेशंस डिवीजन का रेवेन्यू 1.3 फीसदी बढ़ा

टेक महिंद्रा के सीएफओ रोहित आनंद ने कहा, “जून तिमाही में अच्छी ग्रोथ, मार्जिन में इजाफा और अनुशासित पूंजी प्रबंधन के साथ हमारा प्रदर्शन अच्छा रहा। हम फ्यूचर रेडी ऑर्गेनाइजेशन बनने को लेकर प्रतिबद्ध हैं।” जून तिमाही में कंपनी के कम्युनिकेशंस डिवीजन का रेवेन्यू 1.3 फीसदी बढ़ा। कंपनी के कुल रेवेन्यू में इस डिवीजन की हिस्सेदारी एक-तिहाई है।

नई ऑर्डर बुकिंग्स 1 अरब डॉलर के पार

टेक महिंद्रा के मैन्युफैक्चरिंग डिवीजन का रेवेन्यू जून तिमाही में साल दर साल आधार पर 17.2 फीसदी बढ़ा। कंपनी के कुल रेवेन्यू में इसकी दूसरी सबसे ज्यादा हिस्सेदारी है। कंपनी की नई ऑर्डर बुकिंग एक साल पहले के 80.9 करोड़ डॉलर से बढ़कर 1.08 अरब डॉलर हो गई। कंपनी ने जून तिमाही में Telefonica Germany, Microsoft और रोबोटिक्स प्लेटफॉर्म Viam के साथ पार्टनरशिप का ऐलान किया।

कंपनी के शेयरों पर 17 जुलाई को दिखेगा असर

टेक महिंद्रा का शेयर 16 जुलाई को 1.13 फीसदी चढ़कर 1,515.60 रुपये पर बंद हुआ। कंपनी के शेयरों पर जून तिमाही के नतीजों का असर 17 जुलाई को दिखेगा। बीते एक साल में कंपनी का शेयर 5.74 फीसदी गिरा है। इस दौरान निफ्टी आईटी इंडेक्स करीब 23 फीसदी गिरा है।