PB Fintech Share Price: पॉलिसीबाजार की पेरेंट का शेयर लगातार 6ठे दिन गिरा, ​​7% तक टूटकर 52 वीक के नए लो पर

Policybazaar प्लेटफॉर्म की पेरेंट कंपनी PB Fintech के शेयरों में गुरुवार को लगातार छठे दिन गिरावट है। बीएसई पर शेयर पिछले बंद भाव से 7 प्रतिशत तक टूटकर 988.30 रुपये के लो तक गया। यह शेयर का 52 सप्ताह का नया निचला स्तर है। कंपनी का मार्केट कैप घटकर 46200 करोड़ रुपये पर आ गया है। पीबी फिनटेक के शेयर में 24 सितंबर से लगातार गिरावट आ रही है। इंश्योरेंस रेगुलेटर IRDAI का डिस्ट्रीब्यूशन सुधारों पर नया ड्राफ्ट आने के बाद शेयर में जबरदस्त बिकवाली का सिलसिला शुरू हुआ और अभी तक जारी है। माना जा रहा है कि कमीशन को लेकर ड्राफ्ट पेपर में प्रस्तावित कटौती से PB Fintech को सबसे ज्यादा नुकसान होगा, क्योंकि इन टेक-रेट पर कॉल सेंटर की लागत नहीं निकल पाएगी।

इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) ने कुछ स्ट्रक्चरल सुधारों का प्रस्ताव दिया है। इनका मकसद इंश्योरेंस की लागत कम करना, उन लोगों तक कवरेज पहुंचाना जिन्हें अभी तक यह सुविधा नहीं मिली है, और इस सेक्टर को टिकाऊ विकास की राह पर वापस लाना है। एक दिन पहले सामने आया था कि ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन ने पीबी फिनटेक के शेयर के लिए टारगेट प्राइस 2310 रुपये से घटाकर 1085 रुपये प्रति शेयर कर दिया है। लेकिन आउटपरफॉर्म रेटिंग बरकरार रखी है।

IRDAI का ड्राफ्ट आने के बाद बर्नस्टीन ने अपने नोट में लिखा कि कमीशन में प्रस्तावित कटौती बहुत बुरी है और ड्राफ्ट पेपर में प्रस्तावित ‘टेक रेट’ से PB Fintech का यूनिट-इकोनॉमिक्स बिगड़ जाएगा। कम जनरल इंश्योरेंस टेक रेट पीबी फिनटेक की मौजूदा लागत को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकते हैं। IRDAI के ड्राफ्ट पेपर में कोटेशन (Rates) बनाने के लिए कॉन्टैक्ट डिटेल्स इकट्ठा करने पर साफ तौर पर रोक लगाई गई है। बर्नस्टीन के अनुसार, PB Fintech के लिए यह कस्टमर बनाने का एक अहम जरिया है।

PB Fintech के लिए दूसरे ब्रोकरेज की रेटिंग

पीबी फिनटेक के शेयर के लिए HSBC ने रेटिंग घटाकर होल्ड कर दी है। टारगेट प्राइस 2,100 रुपये से घटाकर 1,150 रुपये प्रति शेयर कर दिया है। मोतीलाल ओसवाल ने 1,150 रुपये के टारगेट के साथ न्यूट्रल रेटिंग बरकरार रखी है। मैक्वेरी ने शेयर की रेटिंग आउटपरफॉर्म से घटाकर न्यूट्रल कर दी है। टारगेट प्राइस 1,150 रुपये प्रति शेयर दिया है।

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PB Fintech के शेयर में पिछले 5 दिनों में 43 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई है। शेयर अकेले 24 सितंबर को 36 प्रतिशत नीचे आया था। शेयर की फेस वैल्यू 2 रुपये है। यह BSE 100 इंडेक्स का हिस्सा है। कंपनी में जून 2026 के आखिर तक पब्लिक शेयरहोल्डर्स के पास 99.86 प्रतिशत हिस्सेदारी थी।

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Stocks to Watch: 25 सितंबर को Nykaa, PB Fintech, ESDS Software Solution समेत इन शेयरों में बड़े उतार-चढ़ाव के आसार

शुक्रवार, 25 सितंबर को कई शेयरों पर फोकस रहेगा। लिस्ट में नाइका, पीबी फिनटेक, व्हील्स इंडिया, आइनॉक्स ग्रीन एनर्जी, पर्पल स्टाइल लैब्स जैसे कई नाम शामिल हैं। इन शेयरों में बड़ी उठापटक दिख सकती है। वजह हैं- तिमाही नतीजे, कारोबार से जुड़े डेवलपमेंट्स, नई डील या कॉन्ट्रैक्ट, आदि। इसके अलावा शुक्रवार को SME सेगमेंट में एक कंपनी की लिस्टिंग होने वाली है। साथ ही 4 कंपनियों के शेयर एक्स-डिविडेंड और 2 कंपनियों के शेयर एक्स-स्प्लिट ट्रेड करने वाले हैं। आइए डिटेल में जानते हैं किन प्रमुख शेयरों पर रहेगी नजर…

इन शेयरों पर रहेगी नजर

ESDS Software Solution: अप्रैल-जून 2026 तिमाही (Q1) में कंसोलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार पर 14% बढ़कर 29.3 करोड़ रुपये हो गया। रेवेन्यू 7.3% बढ़कर 133.7 करोड़ रुपये हो गया।

Purple Style Labs: Q1 में कंसोलिडेटेड घाटा सालाना आधार पर कम होकर 88.1 करोड़ रह गया। रेवेन्यू 13% बढ़कर 119.4 करोड़ रुपये हो गया।

PB Fintech: Policybazaar प्लेटफॉर्म की पेरेंट कंपनी का शेयर 24 सितंबर को 36 प्रतिशत टूटा था। बंपर बिकवाली की वजह रही इंश्योरेंस रेगुलेटर IRDAI का डिस्ट्रीब्यूशन सुधारों पर नया ड्राफ्ट और उसके बाद बर्नस्टीन का व्यू। बर्नस्टीन का मानना है कि कमीशन को लेकर ड्राफ्ट पेपर में प्रस्तावित कटौती से PB Fintech को सबसे ज्यादा नुकसान होगा, क्योंकि इन टेक-रेट पर कॉल सेंटर की लागत नहीं निकल पाएगी। इस शेयर पर शुक्रवार को भी नजर रहेगी।

Wheels India: कंपनी का क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) 24 सितंबर को खुल गया। फ्लोर प्राइस ₹2,197.10 प्रति शेयर है।

Inox Green Energy Services: कंपनी ने 24 सितंबर को अपना QIP लॉन्च किया। फ्लोर प्राइस ₹174.36 प्रति शेयर तय किया गया है।

FSN E-Commerce Ventures (Nykaa): नाइका और L’Oréal के कॉर्पोरेट वेंचर कैपिटल फंड, BOLD (बिजनेस अपॉर्चुनिटीज फॉर L’Oréal डेवलपमेंट) ने तेजी से बढ़ रहे भारतीय ब्यूटी और पर्सनल केयर ब्रांड्स की अगली पीढ़ी में मिलकर निवेश करने के लिए एक सहयोग की घोषणा की है।

Waaree Energies: कंपनी की सब्सिडियरी, Waaree Clean Energy Solutions ने भारत के स्पेशिएलिटी गैस बिजनेस में उतरने की घोषणा की है। इसका मकसद देश की सेमीकंडक्टर और सोलर सेल बनाने वाली कंपनियों के लिए वन-स्टॉप सप्लायर बनना है।

LCC Projects: कंपनी राजस्थान के गंगधार में छोटी कालीसिंध और चाहुरनी नदियों पर सोलर पावर वाले स्प्रिंकलर सिस्टम पर बेस्ड ‘छोटी कालीसिंध मीडियम इरिगेशन प्रोजेक्ट’ के लिए L-1 बिडर (सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी) के तौर पर उभरी है। इस प्रोजेक्ट की कुल अनुमानित कीमत 653.34 करोड़ रुपये है।

Dr Lal PathLabs: कंपनी के बोर्ड ने SN Genelab में 70 प्रतिशत हिस्सेदारी मौजूदा शेयरधारकों से खरीदने को मंजूरी दे दी है। डील ₹168 करोड़ तक की होगी। इस अधिग्रहण के बाद SN Genelab, डॉ. लाल पैथलैब्स की सब्सिडियरी बन जाएगी। ट्रांजेक्शन के 30 नवंबर, 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है।

JSW Cement: कंपनी को बेलागावी ऑडिट कमिश्नरेट के एडिशनल कमिश्नर (सेंट्रल टैक्स) से एक ‘कारण बताओ नोटिस’ मिला है। यह नोटिस गलत क्लासिफिकेशन के कारण GST के कथित तौर पर कम भुगतान से संबंधित है। इसके चलते, डिपार्टमेंट ने अप्रैल 2022 से मार्च 2024 की अवधि के लिए 229.85 करोड़ रुपये के GST की मांग की है, जिसमें लागू ब्याज और 10 प्रतिशत जुर्माना भी शामिल है।

इस बीच, JSW स्टील और JSW सीमेंट द्वारा प्रमोटेड JSW वन प्लेटफॉर्म्स ने IPO के जरिए 3,054 करोड़ रुपये तक जुटाने के लिए SEBI, BSE और एनएसई के पास ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल किया है।

L&T Technology Services: कंपनी ने इंडस्ट्रियल AI में ग्लोबल लीडर, कॉग्नाइट (Cognite) के साथ एक स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप की घोषणा की है। इसका मकसद एसेट-इंटेंसिव इंडस्ट्रीज के लिए जॉइंट इंडस्ट्रियल AI और डेटा सॉल्यूशन विकसित करना और उन्हें उपलब्ध कराना है।

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बल्क और ब्लॉक डील्स

PB Fintech: HDFC म्यूचुअल फंड ने लगभग 320.6 करोड़ रुपये के 25 लाख शेयर खरीदे।

Brainbees Solutions (FirstCry): प्री-IPO निवेशक न्यूक्वेस्ट एशिया इनवेस्टमेंट्स ने लगभग 202 करोड़ रुपये के 1.15 करोड़ शेयर बेचे। वहीं गोल्डमैन सैक्स ने लगभग 119 करोड़ रुपये के 68 लाख शेयर खरीदे।

Sedemac Mechatronics: एक ही ब्लॉक डील में लगभग 1,469 करोड़ रुपये के 48.8 लाख शेयरों का लेन-देन हुआ। A91 एमर्जिंग फंड II और एक्सपोन्शिया कैपिटल से जुड़े फंड्स सहित प्राइवेट इक्विटी निवेशकों ने अपनी हिस्सेदारी का कुछ हिस्सा बेचा। खरीदारों में सिंगापुर सरकार (GIC) और मॉनेटरी अथॉरिटी ऑफ सिंगापुर जैसे सॉवरेन फंड्स के साथ-साथ T रो प्राइस, अमांसा होल्डिंग्स और SBI, ICICI प्रूडेंशियल, एक्सिस, आदित्य बिड़ला सन लाइफ और इनवेस्टको सहित कई घरेलू म्यूचुअल फंड्स शामिल थे।

BlueStone Jewellery and Lifestyle: ब्लूस्टोन ज्वेलरी के लगभग 61.98 लाख शेयरों का लेन-देन 513.01 करोड़ रुपये में हुआ। बजाज लाइफ इंश्योरेंस, कुवैत इनवेस्टमेंट अथॉरिटी FD F238, सिटीग्रुप, गोल्डमैन सैक्स, निप्पॉन इंडिया म्यूचुअल फंड, मिरे एसेट म्यूचुअल फंड, बंधन म्यूचुअल फंड और SBI लाइफ इंश्योरेंस ने Accel और 360 ONE WAM से BlueStone के शेयर खरीदे।

SME लिस्टिंग

Axiom Gas Engineering

ये स्टॉक करेंगे एक्स-डिविडेंड ट्रेड

श्री लोटस डेवलपर्स एंड रियल्टी

LGT ग्लोबल हॉस्पिटैलिटी

A D S डायग्नोस्टिक्स

नोबल पॉलिमर्स

ये शेयर करेंगे एक्स-स्प्लिट ट्रेड

नेच्युराइट एग्रो प्रोडक्ट्स

मिडवेस्ट एनर्जी

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

PB Fintech Share Price: Policybazaar के शेयरों पर अलर्ट, इस कारण दिख सकता है दबाव

PB Fintech Share Price: पॉलिसीबाजार (Policybazaar) की पैरेंट कंपनी पीबी फिनटेक के शेयरों में नियर टर्म में बिकवाली का दबाव दिख सकता है। ऐसा ब्रोकरेज फर्म बर्न्स्टीन का मानना है। 24 सितंबर की अपनी रिपोर्ट में बर्न्स्टीन ने डिस्ट्रीब्यूशन रिफॉर्म पर इंश्योरेंस रेगुलेटर IRDAI का ड्राफ्ट पेपर सामने आने के बाद पॉलिसीबाजार पर इस दबाव की बात कही है। अभी इसके शेयरों की बात करें तो एक कारोबारी दिन पहले बीएसई पर यह 5% की बढ़त के साथ ₹1890.00 पर बंद हुआ था। अभी पिछले महीने यशिश दहिया के पद छोड़ने की अफवाहों पर इसके शेयरों में तेज हलचल दिखी थी, लेकिन यशिश ने इसका खंडन किया था।

Policybazaar की PB Fintech पर Bernstein क्यों बेयरेश

बर्न्स्टीन ने अपनी रिपोर्ट में जिक्र किया है कि डिस्ट्रीब्यूशन रिफॉर्म्स पर बीमा नियामक IRDA के प्रस्ताव का सबसे अधिक नुकसान पीबी फिनटेक को होगा क्योंकि इसके टेक-रेट्स यानी कमीशन पर कॉल सेंटर की लागत नहीं निकाल पाएगी।

इरडा ने बीमा की लागत कम करने, अंडरसर्व्ड लोगों तक इसका कवरेज बढ़ाने और इंश्योरेंस सेक्टर की टिकाऊ ग्रोथ को लेकर स्ट्रक्चरल रिफॉर्म का प्रस्ताव पेश किया है। इसमें मैनेजमेंट से जुड़े खर्चों को तार्किक बनाने, सेगमेंट के हिसाब से कमीशन की लिमिट फिर से तय करने, डार्क पैटर्न पर रोक लगाने यानी बिना पर्सनल डिटेल्स के प्रोडक्ट और कीमत की जानकारी देने, पॉलिसी डॉक्यूमेंट्स पर कमीशन की दर बताने और मोटर इंश्योरेंस की प्रक्रिया को आसान बताने की बात है। इसमें अन्य प्रस्ताव भी हैं जैसे कि बैंक कौन सी पॉलिसी और कैसे बेचें, एजेंटों को इंसेंटिव देने पर रोक, इंश्योरेंस बेचने के लिए MIIs (मल्टी-इंश्योरेंस इंटरमीडियरीज) का इस्तेमाल कैसे हो, और क्रेडिट लाइफ जैसे इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स की अनिवार्य बंडलिंग पर रोक।

ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि इन प्रस्तावों से पीबी फिनटेक के मुनाफे का गणित बिगड़ सकता है। ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि इरडा के प्रस्तावित कैप से कंपनियों की हेल्थ/टर्म इंश्योरेंस ग्रोथ पर कुछ असर पड़ेगा। हालांकि कम लागत और हायर एजेंसी-यूलिप मिक्स वाली कंपनियों जैसे कि एसबीआई लाइफ और एलआईसी पर इसका असर कम होगा। इरडा के प्रस्ताव के हिसाब से कोटेशन देने के लिए कॉन्टैक्ट डिटेल्स नहीं मांगा जा सकता है जो बर्न्स्टीव के मुताबिक पीबी फिनटेक के लिए ग्राहक बनाने का एक मुख्य जरिया है। इसके अलावा बर्न्स्टीन के मुताबिक ड्राफ्ट पेपर में एडवाइजरी फीस और मार्केटिंग खर्च से जुड़े लूपहोल्स को भी खत्म किया जा रहा है जिसका हल पीबी फिनटेक को खोजना होगा।

एक साल में कैसी रही शेयरों की चाल

पॉलिसीबाजार के शेयरों ने निवेशकों को तगड़ा शॉक दिया है। पिछले साल 9 दिसंबर 2025 को बीएसई पर यह ₹1,963.00 के भाव पर था, जो इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड हाई लेवल है। इस हाई लेवल से 3 ही महीने में यह 32.03% फिसलकर 2 मार्च 2026 को ₹1,334.20 पर आ गया, जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है।

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US नागरिकों को निशाना बनाने वाले फर्जी कॉल सेंटर का ED ने किया भंडाफोड़, पटियाला-पुणे में रात तक चल रहा था पूरा नेटवर्क

(रिपोर्ट- शंकर आनंद) 

केंद्रीय जांच एजेंसी ED यानी प्रवर्तन निदेशालय के हैदराबाद जोनल ऑफिस ने मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत पटियाला, चंडीगढ़ और पुणे में तलाशी अभियान चलाया। जांच के दौरान US नागरिकों को निशाना बनाकर ठगी और जबरन वसूली करने वाले संगठित फर्जी कॉल सेंटर नेटवर्क का खुलासा हुआ है। इस मामले में ईडी की तफ्तीश में सामने आया है कि ये कॉल सेंटर कॉरपोरेट कंपनियों की तरह संचालित किए जा रहे थे। इनमें बाकायदा कंप्यूटर, हेडसेट, डायलर और VoIP सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा था। आरोप है कि नेटवर्क के मास्टरमाइंड गुजरात के अहमदाबाद से इन कॉल सेंटरों को रिमोट तरीके से नियंत्रित कर रहे थे।

पटियाला के दो कॉल सेंटरों में 194 कर्मचारी

ED के मुताबिक, पटियाला के अर्बन एस्टेट फेज-II में DM Web Solutions के नाम से चल रहे दो कॉल सेंटरों में कुल 194 लोग काम कर रहे थे। इन कॉल सेंटरों का संचालन और नियंत्रण अहमदाबाद के हर्षिल रावल और रवि रामी तथा उनके सहयोगियों के हाथ में था। वहीं, पुणे के हिंजवड़ी फेज-II स्थित Gera’s Imperial Complex में चल रहे कॉल सेंटर में 22 लोग काम कर रहे थे। इसे अहमदाबाद के विपुल कोटाडिया और उसके सहयोगियों द्वारा संचालित किए जाने की जानकारी सामने आई है।

नागालैंड, मिजोरम और मणिपुर से युवाओं की भर्ती

जांच में पता चला कि कॉल सेंटरों में काम करने वाले कई कर्मचारियों की पहचान स्थानीय नेटवर्क के जरिए की गई थी। इनमें बड़ी संख्या में नागालैंड, मिजोरम और मणिपुर जैसे पूर्वोत्तर राज्यों से आए लोग शामिल थे। ईडी के मुताबिक, इनमें से ज्यादातर कर्मचारी निम्न आय वर्ग और बेरोजगार पृष्ठभूमि से थे। उन्हें करीब 30 हजार से 50 हजार रुपये मासिक वेतन दिया जाता था। इसके अलावा पीड़ितों से सफलतापूर्वक रकम वसूलने पर इंसेंटिव भी दिया जाता था।

ऐसे चलता था US नागरिकों को ठगने का पूरा खेल

जांच में फर्जी कॉल सेंटर के काम करने का पूरा तरीका सामने आया है। सबसे पहले मास्टरमाइंड कथित तौर पर अमेरिकी नागरिकों का डेटा हासिल करते थे। इसके बाद सिस्टम के जरिए बड़े पैमाने पर स्पैम ई-मेल या कंप्यूटर पर पॉप-अप अलर्ट भेजे जाते थे। इन फर्जी अलर्ट में पीड़ितों को बताया जाता था कि उनके कंप्यूटर में वायरस है, बैंक अकाउंट खतरे में है या उनकी पहचान और कानूनी स्थिति से जुड़ी कोई गंभीर समस्या है। इसके साथ एक फर्जी टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर दिया जाता था। पीड़ित जब उस नंबर पर फोन करता था तो कॉल सेंटर में उसे अलग-अलग स्तर के कर्मचारियों के पास भेजा जाता था।

Opener से Banker और फिर Closer

इस फर्जीवाड़े को तीन चरणों में अंजाम दिया जाता था, उसे हम इस तरह से समझ सकते हैं:-

  • पहला चरण:- Opener/Dialler.. शुरुआत में Opener पीड़ित से बात करता था। वह खुद को Amazon, Microsoft, PayPal जैसी कंपनियों के टेक्निकल सपोर्ट कर्मचारी के तौर पर पेश कर सकता था। उसका मकसद पीड़ित का भरोसा हासिल करना और उसकी चिंता का स्तर समझना होता था।
  • दूसरा चरण- Banker: इसके बाद Banker की भूमिका आती थी। वह कथित तौर पर पीड़ित के बैंक अकाउंट, उपलब्ध रकम और चल-अचल संपत्तियों के बारे में जानकारी हासिल करता था, ताकि पैसे वसूलने का तरीका तय किया जा सके।
  • तीसरा चरण- Closer:- इसके बाद कॉल Closer को ट्रांसफर की जाती थी। Closer पीड़ित पर दबाव बनाने के लिए खुद को अमेरिकी कानून प्रवर्तन एजेंसी, बैंक के फ्रॉड डिविजन या किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर पेश करता था। पीड़ित को तत्काल भुगतान नहीं करने पर कानूनी या आर्थिक नुकसान की धमकी दी जाती थी।

Gift Card, कैश और गोल्ड के जरिए वसूली

ED की जांच में सामने आया कि पीड़ितों से रकम हासिल करने के लिए पारंपरिक बैंकिंग चैनल के बजाय अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल किया जाता था। पीड़ितों को Apple और Google Play जैसे गिफ्ट कार्ड खरीदने, कैश भेजने या सोना खरीदने के लिए मजबूर किया जाता था। कुछ मामलों में अमेरिका में मौजूद कूरियर के जरिए पीड़ितों से कैश या गोल्ड कलेक्ट करने की व्यवस्था भी की जाती थी। इसके बाद रकम को क्रिप्टोकरेंसी, हवाला और अन्य माध्यमों के जरिए भारत सहित दूसरे देशों में ट्रांसफर कर कथित तौर पर मनी लॉन्ड्रिंग की जाती थी।

Cloud के जरिए रिमोट कंट्रोल

ED के अनुसार, पटियाला और पुणे के कॉल सेंटरों में लगे कंप्यूटरों को मास्टरमाइंड Cloud के जरिए रिमोट तरीके से नियंत्रित करते थे। टारगेट का नाम और संपर्क विवरण भी कर्मचारियों को ऑनलाइन उपलब्ध कराया जाता था। कॉल-ब्लास्ट की शुरुआती प्रक्रिया भी मास्टरमाइंड द्वारा नियंत्रित सिस्टम और IT सपोर्ट टीम के जरिए संचालित की जाती थी। इसके बाद Opener, Banker और Closer की पूरी प्रक्रिया के जरिए पीड़ित से रकम वसूलने का काम होता था।

गुजरात के अहमदाबाद से होता था रकम का प्रोसेसिंग और लेयरिंग

जांच में सामने आया कि कथित तौर पर हर्षिल रावल और रवि रामी पीड़ितों से हासिल रकम के आगे के ट्रांसफर और प्रोसेसिंग की व्यवस्था करते थे। ED के मुताबिक, अपराध से हासिल रकम को विभिन्न माध्यमों से भारतीय मुद्रा में बदला जाता था। इसके बाद इस पैसे का इस्तेमाल चल-अचल संपत्तियां खरीदने में किया जाता था या रकम को क्रिप्टो/बिटकॉइन के रूप में रखा जाता था। कुछ रकम देश के बाहर भी रखे जाने की जानकारी जांच में सामने आई है।

Digital Evidence से सामने आई पूरी चेन

ED की तलाशी के दौरान बड़ी मात्रा में डिजिटल साक्ष्य बरामद हुए हैं। इन साक्ष्यों से कथित तौर पर हवाला ऑपरेटरों, अंगड़िया फर्मों और अमेरिका में पीड़ितों से वसूली गई रकम के कलेक्शन में शामिल लोगों की भूमिका सामने आई है। जांच एजेंसी के मुताबिक, डिजिटल एविडेंस से भारत के अलग-अलग हिस्सों में संचालित फर्जी कॉल सेंटरों के बीच एक संगठित नेटवर्क की जानकारी मिली है।

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18,000 रुपये की सैलरी से शुरू हुआ सफर, अब हर महीने ₹10 लाख कमाते हैं शब्बीर, जानें कैसे बदली किस्मत

रात की नौकरी और दिनभर की पढ़ाई के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं होता, लेकिन शब्बीर मिठाईवाला ने कई साल तक इसी चुनौतीपूर्ण जिंदगी को अपनी मेहनत का हिस्सा बनाया। UAE में बचपन बिताने के बाद पढ़ाई के लिए मुंबई आए शब्बीर के सामने आर्थिक चुनौतियां थीं। अपनी पढ़ाई का खर्च खुद उठाने के लिए उन्होंने नौकरी करने का फैसला किया। एक कॉल सेंटर से शुरू हुआ यह सफर सिर्फ कमाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आगे चलकर उनके करियर और जिंदगी की दिशा बदलने वाला साबित हुआ। दिन में कॉलेज, पढ़ाई और रात की शिफ्ट के बीच उन्होंने लगातार मेहनत की।

उस दौर में उनकी कमाई भले ही आज की तुलना में छोटी थी, लेकिन अनुभव और संघर्ष ने उन्हें आगे बढ़ने का हौसला दिया। कई साल बाद जब परिस्थितियों ने उन्हें एक बड़ा फैसला लेने के लिए मजबूर किया, तब मुंबई में सीखी मेहनत और आत्मनिर्भरता उनके काम आई। उनकी कहानी अब संघर्ष से सफलता तक के सफर की मिसाल बन गई है।

18-19 घंटे की जिंदगी, पांच साल तक यही रूटीन

कमाई का इस्तेमाल किराए, खाने और पढ़ाई के खर्चों को संभालने में होता था, लेकिन इसके लिए उन्हें बेहद व्यस्त दिनचर्या अपनानी पड़ती थी। सुबह 11 बजे तक कॉलेज, दोपहर से शाम तक CA की कोचिंग और रात 10 बजे से सुबह 5 बजे तक नौकरी। यानी कई बार दिन का करीब 18-19 घंटे हिस्सा पढ़ाई और काम में गुजरता था। शब्बीर के मुताबिक, करीब पांच साल तक उन्होंने इसी तरह काम किया और इसी अनुभव ने उन्हें मुश्किल परिस्थितियों में शुरुआत से कुछ खड़ा करने का आत्मविश्वास दिया।

पिता की आंख की रोशनी गई, तो बदल गई जिंदगी की दिशा

CA की पढ़ाई पूरी करने के दौरान उन्हें पता चला कि उनके पिता की एक आंख की रोशनी चली गई है। उनके पिता 1984 से दुबई में पिक्चर-फ्रेम का कारोबार चला रहे थे, लेकिन 2013 में जब शब्बीर UAE लौटे, तब परिवार का बिजनेस गंभीर आर्थिक संकट में था। कारोबार में कैश-फ्लो की समस्या थी और करीब 10 लाख दिरहम का कर्ज जमा हो चुका था। दूसरी ओर, परिवार को शब्बीर के छोटे भाई-बहनों की पढ़ाई का खर्च भी उठाना था।

CA का सपना छोड़ा, परिवार का कारोबार चुना

शब्बीर के सामने बड़ा सवाल था जिस CA करियर के लिए उन्होंने वर्षों मेहनत की, उसे आगे बढ़ाएं या परिवार के मुश्किल दौर में कारोबार संभालें? उन्होंने CA करियर छोड़कर परिवार के बिजनेस में लौटने का फैसला किया। मुंबई के वर्षों के संघर्ष ने उन्हें दोबारा शून्य से शुरुआत करने का हौसला दिया था। दुबई लौटने के बाद उन्होंने एक बार फिर करीब 19-20 घंटे काम करने वाली दिनचर्या अपना ली।

पिक्चर फ्रेम से आर्किटेक्चरल ग्लास तक बदला कारोबार

शब्बीर सिर्फ पुराने बिजनेस को बचाने तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने कारोबार के लिए नया रास्ता तलाशना शुरू किया। पारंपरिक रूप से परिवार का काम पिक्चर फ्रेम बनाने पर केंद्रित था, लेकिन उन्होंने इसे एक नए बाजार की ओर ले जाने का फैसला किया। 2017 में उन्होंने Glass R Us Industries की शुरुआत की, जिसके जरिए कंपनी ने आर्किटेक्चरल ग्लास सॉल्यूशंस की दिशा में कदम बढ़ाया। कारोबार अब रेजिडेंशियल, कमर्शियल और हॉस्पिटैलिटी प्रोजेक्ट्स के लिए ग्लास सॉल्यूशंस देने की ओर बढ़ गया।

करीब 7 साल लगे कर्ज से बाहर निकलने में

कारोबार को नई दिशा देने के बावजूद आर्थिक मुश्किलें तुरंत खत्म नहीं हुईं। शब्बीर के मुताबिक, परिवार को करीब छह से सात साल का समय लगा पूरा कर्ज चुकाने में। कर्ज खत्म होने के बाद उनका फोकस सिर्फ कारोबार चलाने पर नहीं रहा। उन्होंने इसे आगे बढ़ाने और एक लग्जरी ब्रांड के रूप में स्थापित करने की दिशा में काम शुरू किया।

खुद की सैलरी भी रखी सीमित

करीब 10 लाख दिरहम के कर्ज का अनुभव शब्बीर की वित्तीय सोच पर भी गहरा असर डाल गया। अब वह कर्ज लेने और खर्च करने को लेकर काफी सावधानी बरतते हैं। उनके मुताबिक, कंपनी से वह हर महीने करीब 40,000 दिरहम यानी लगभग ₹10 लाख लेते हैं, जबकि वह इससे ज्यादा रकम भी निकाल सकते हैं। लेकिन वह अपने व्यक्तिगत खर्च और जरूरतों का हिसाब लगाकर सैलरी की सीमा तय करते हैं और बाकी पैसा कारोबार में वापस लगाते हैं।

अब लक्ष्य है इंटरनेशनल मार्केट और रोजाना $1 मिलियन

शब्बीर की महत्वाकांक्षा अब सिर्फ पारिवारिक कारोबार को सफल बनाने तक सीमित नहीं है। वह अपने ब्रांड को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाना चाहते हैं। उनका सबसे बड़ा वित्तीय लक्ष्य सुनकर शायद कई लोग चौंक जाएं। शब्बीर का कहना है कि वह भविष्य में हर दिन 1 मिलियन डॉलर कमाने का लक्ष्य रखते हैं। उनके लिए यह सिर्फ एक बड़ी रकम का सपना नहीं, बल्कि सोच को बड़े स्तर पर ले जाने का लक्ष्य है। मुंबई की रात की शिफ्ट से शुरू हुई उनकी कहानी अब दुबई से ग्लोबल बिजनेस बनाने की महत्वाकांक्षा तक पहुंच चुकी है।

डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।

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कॉल सेंटर वर्कर्स की जगह ले रहा AI; माइक्रोसॉफ्ट से उबर तक ने इस्तेमाल बढ़ाया; भारत को लग सकता है बड़ा झटका

AI Jobs: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब सिर्फ कर्मचारियों की मदद करने वाला टूल नहीं रह गया है। बड़ी कंपनियां इसे लागत घटाने और कर्मचारियों की संख्या कम करने के लिए भी इस्तेमाल कर रही हैं।

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक Microsoft, Uber, Hyatt Hotels और Commonwealth Bank of Australia जैसी कंपनियां अब कस्टमर सर्विस का बड़ा हिस्सा AI चैटबॉट और ऑटोमेटेड फोन सिस्टम से संभाल रही हैं। इससे हजारों नौकरियां पहले ही खत्म हो चुकी हैं।

AI से सबसे ज्यादा खतरा किसे?

कॉल सेंटर इंडस्ट्री में लंबे समय से ऑटोमेशन का खतरा था। लेकिन जनरेटिव AI आने के बाद यह बदलाव काफी तेज हो गया है। अब कंपनियां उन कामों को भी AI से करा रही हैं, जिनके लिए पहले इंसानों की जरूरत पड़ती थी।

रिसर्च फर्म Forrester की एनालिस्ट केट लेगेट के मुताबिक, अमेरिका में कस्टमर सर्विस की नौकरियां लगातार घट रही हैं। उनका अनुमान है कि 2030 तक करीब आधी कस्टमर सर्विस नौकरियां AI से प्रभावित हो सकती हैं। सबसे ज्यादा असर फिलीपींस और भारत जैसे देशों पर पड़ सकता है, जहां पश्चिमी कंपनियां बड़ी संख्या में कॉल सेंटर का काम आउटसोर्स करती हैं।

बड़ी कंपनियां कैसे घटा रही हैं लागत?

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, Microsoft ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी कस्टमर सर्विस वर्कफोर्स करीब 50,000 से घटाकर 40,000 कर दी है। कंपनी का कहना है कि AI की मदद से उसे हर साल करीब 750 मिलियन डॉलर की बचत हो रही है। हालांकि, जटिल मामलों में अभी भी इंसानी कर्मचारियों की जरूरत पड़ती है।

वहीं, Uber ने हाल ही में अपनी कस्टमर सर्विस टीम में करीब 10% कटौती की। अब कंपनी ग्राहकों को ऐप के भीतर AI चैटबॉट के जरिए सहायता देने पर ज्यादा जोर दे रही है।

Commonwealth Bank of Australia ने भी AI अपनाने के बाद अपने चैट सपोर्ट से जुड़े सैकड़ों कर्मचारियों की जरूरत कम कर दी। इससे बैंक को हर साल करोड़ों डॉलर की बचत होने की बात कही गई है।

कॉल सेंटर इंडस्ट्री पर बढ़ा दबाव

Hyatt Hotels भी होटल बुकिंग में बदलाव, रसीद भेजने और दूसरे सामान्य अनुरोध AI से निपटा रही है। वहीं, होम सिक्योरिटी कंपनी Brinks Home ने AI की मदद से कॉल वॉल्यूम दो-तिहाई घटा दिया और कॉल सेंटर स्टाफ को करीब 800 से घटाकर 400 कर दिया।

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, AI के बढ़ते इस्तेमाल का असर आउटसोर्सिंग कंपनियों पर भी दिखने लगा है। Teleperformance, Concentrix और TTEC जैसी कंपनियां पहले ही चेतावनी दे चुकी हैं कि कम जटिल काम AI की वजह से तेजी से खत्म हो रहे हैं। ऐसे में आने वाले वर्षों में कॉल सेंटर इंडस्ट्री में रोजगार पर दबाव और बढ़ सकता है।

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