OYO IPO: ओयो की पैरेंट कंपनी Prism नवंबर में ला सकती है IPO, ₹6650 करोड़ जुटाने की तैयारी

OYO IPO: ओयो की पैरेंट कंपनी Prism नवंबर में IPO लॉन्च कर सकती है। कंपनी फिलहाल निवेशकों से बातचीत कर रही है, ताकि शेयर बिक्री को लेकर उनकी दिलचस्पी का अंदाजा लगाया जा सके। यह जानकारी मनीकंट्रोल को सूत्रों ने दी है। सूत्रों के मुताबिक, IPO की तारीख अभी तय नहीं हुई है। यह फैसला निवेशकों की मांग, बाजार की स्थिति और जरूरी मंजूरियों पर निर्भर करेगा।

IPO से जुटाए पैसे का क्या करेगी कंपनी?

29 जून 2026 को जारी अपडेटेड ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) के मुताबिक, Prism फ्रेश शेयर जारी करके ₹6,650 करोड़ तक जुटाना चाहती है। इसमें मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी नहीं बेचेंगे।

कंपनी ₹4,987.5 करोड़ अपनी सब्सिडियरी Oravel Stays Singapore में निवेश करेगी। इस रकम से कुछ कर्ज चुकाया जाएगा या उसका समय से पहले भुगतान किया जाएगा। बाकी पैसे का इस्तेमाल सामान्य कॉरपोरेट जरूरतों के लिए होगा।

दिसंबर 2025 तक के नौ महीनों में कंपनी का फाइनेंस कॉस्ट ₹1,089.3 करोड़ रहा। यह मार्च 2025 में समाप्त पूरे वित्त वर्ष के ₹959.2 करोड़ से ज्यादा है।

35 से ज्यादा देशों में कारोबार

2012 में शुरू हुआ OYO अब सिर्फ बजट होटल तक सीमित नहीं है। इसका कारोबार होटल, छुट्टियों में किराये पर मिलने वाले घरों और प्रॉपर्टी लिस्टिंग तक फैला है। इसके ब्रांड्स में Townhouse, Sunday, Motel 6, Studio 6 और Belvilla शामिल हैं।

31 दिसंबर 2025 तक कंपनी के प्लेटफॉर्म पर 35 से ज्यादा देशों में 2.93 लाख से अधिक लिस्टिंग थीं। इनमें होटल, होम और सब्सक्रिप्शन आधारित प्रॉपर्टी लिस्टिंग शामिल हैं। विदेशों में विस्तार के लिए कंपनी ने G6, CheckMyGuest और MadeComfy जैसी कंपनियों का अधिग्रहण भी किया है।

मुनाफा बढ़ा, लेकिन टैक्स क्रेडिट का भी असर

वित्त वर्ष 2025 में OYO का रेवेन्यू 16% बढ़कर ₹6,252.8 करोड़ हो गया। वित्त वर्ष 2024 में यह ₹5,388.8 करोड़ था। नेट प्रॉफिट भी ₹229.6 करोड़ से बढ़कर ₹244.8 करोड़ पहुंच गया।

हालांकि, इस मुनाफे में ₹767.6 करोड़ के डिफर्ड टैक्स क्रेडिट की बड़ी भूमिका थी। कंपनी को वित्त वर्ष 2025 में ₹489.3 करोड़ का प्री-टैक्स नुकसान हुआ था।

दिसंबर 2025 तक के नौ महीनों में Prism ने ₹6,941 करोड़ का रेवेन्यू और ₹748.3 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया। इस दौरान ₹559.3 करोड़ का डिफर्ड टैक्स क्रेडिट भी मिला।

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Jio Platforms IPO: ₹1065-₹1119 रह सकता है प्राइस बैंड, 21 अक्टूबर से ओपनिंग; 10 पॉइंट में जानें अहम डिटेल

रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़ी जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड के IPO का बेसब्री से इंतजार हो रहा है। और हो भी क्यों न, लगभग दो दशकों यानि कि 20 साल बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज ग्रुप की किसी कंपनी का IPO आ रहा है। यह देश का अब तक का सबसे बड़ा पब्लिक इश्यू साबित हो सकता है। Jio Platforms IPO पर ताजा अपडेट इसके प्राइस बैंड को लेकर है। यह कितना रहने वाला है, इस बारे में ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में जानकारी दी गई है। आइए जानते हैं जियो IPO को लेकर अब तक सामने आईं खास बातें…

संभावित प्राइस बैंड और साइज

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में मामले की जानकारी रखने वालों के हवाले से कहा गया है कि Jio Platforms Ltd. के प्रस्तावित IPO के लिए प्राइस बैंड 1065-1119 रुपये प्रति शेयर रहने वाला है। ब्लूमबर्ग की कैलकुलेशन के अनुसार, प्राइस बैंड के ऊपरी स्तर पर Jio के IPO से लगभग 30200 करोड़ रुपये जुटाए जाएंगे। इससे यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा IPO बन सकता है।

वैल्यूएशन

रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी 10.3 लाख करोड़ रुपये तक की मार्केट वैल्यू का लक्ष्य रख रही है। लेकिन बातचीत अभी जारी है और प्राइस बैंड, वैल्यूएशन और टाइमिंग सहित अन्य डिटेल अभी भी बदल सकती हैं। IPO का ड्राफ्ट कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सेबी के पास इस साल जून में जमा किया गया था। मंजूरी अगस्त में मिली।

IPO कब खुलेगा और कब लिस्ट होगा

यह पब्लिक इश्यू 21 अक्टूबर को खुल सकता है। एंकर निवेशक 19 अक्टूबर को बोली लगा सकते हैं। 20 अक्टूबर को शेयर बाजार में दशहरा की छुट्टी है। कंपनी के शेयर 28 अक्टूबर को शेयर बाजारों में लिस्ट हो सकते हैं। जियो प्लेटफॉर्म्स के कारोबार में टेलिकॉम, डिजिटल सर्विसेज, उद्यम समाधान और उभरते टेक्नोलॉजी इनीशिएटिव शामिल हैं। इसकी टेलिकॉम यूनिट रिलायंस जियो इंफोकॉम लिमिटेड देश में सबसे बड़ी टेलिकॉम कंपनियों में से एक है।

Jio IPO में कितने नए शेयर

19 जून 2026 को रिलायंस इंडस्ट्रीज की 49वीं सालाना आम बैठक के दौरान चेयरमैन मुकेश अंबानी ने घोषणा की कि Jio Platforms को अपने प्रस्तावित IPO के लिए बोर्ड की मंजूरी मिल गई है। रिलायंस इंडस्ट्रीज के मुताबिक, इश्यू में 10 रुपये फेस वैल्यू वाले 27 करोड़ तक नए शेयर जारी करने की योजना है।

बुक रनिंग लीड मैनेजर

ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) में Jio Platforms ने घोषणा की कि उसने IPO के लिए 19 इनवेस्टमेंट बैंकों को बुक रनिंग लीड मैनेजर (BRLM) के तौर पर नियुक्त किया है। इस ऑफर के लिए BRLM हैं- कोटक महिंद्रा कैपिटल कंपनी, मॉर्गन स्टेनली इंडिया कंपनी प्राइवेट लिमिटेड, BofA सिक्योरिटीज इंडिया, एक्सिस कैपिटल, BNP पारिबा, सिटीग्रुप ग्लोबल मार्केट्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, CLSA इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, DAM कैपिटल एडवाइजर्स, गोल्डमैन सैक्स (इंडिया) सिक्योरिटीज प्राइवेट लिमिटेड, HDFC बैंक, HSBC सिक्योरिटीज एंड कैपिटल मार्केट्स (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड, ICICI सिक्योरिटीज, IIFL कैपिटल सर्विसेज (पहले IIFL सिक्योरिटीज), जेफरीज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, JM फाइनेंशियल, JP मॉर्गन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, SBI कैपिटल मार्केट्स, UBS सिक्योरिटीज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और 360 ONE WAM।

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कैसे बन सकता है देश का सबसे बड़ा IPO

भारत में अभी तक सबसे बड़ा पब्लिक इश्यू Hyundai Motor India का रहा है। यह अक्टूबर 2024 में आया था और इसका साइज 27,858.75 करोड़ रुपये या 294.97 करोड़ डॉलर रहा था। अब जियो का IPO 30000 करोड़ रुपये से ज्यादा का रहने वाला है।

रिजर्व हिस्से पर क्या अपडेट

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, पता चला है कि IPO में जियो प्लेटफॉर्म्स, रिलायंस इंडस्ट्रीज और जियो प्लेटफॉर्म्स की सब्सिडियरीज के स्थायी कर्मचारियों के लिए शेयर रिजर्व होंगे। इसके बाद नेट इश्यू का 50 प्रतिशत हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIBs) के लिए, 15 प्रतिशत हिस्सा नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NIIs) के लिए और 35 प्रतिशत हिस्सा रिटेल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व रहेगा। QIB के हिस्से में से 60 प्रतिशत तक हिस्सा एंकर निवेशकों को अलॉट किया जा सकता है। इसमें से कुछ हिस्सा विशेष रूप से म्यूचुअल फंड्स, बीमा कंपनियों और पेंशन फंड्स के लिए रिजर्व होगा।

IPO के पैसे कैसे होंगे इस्तेमाल

जियो प्लेटफॉर्म्स के मुताबिक, IPO में नए शेयरों को जारी कर हासिल होने वाले पैसों का इस्तेमाल मुख्य रूप से कंपनी की टेलिकॉम यूनिट रिलायंस जियो इंफोकॉम के कर्ज को कुछ हद तक या पूरी तरह चुकाने के लिए और सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए किया जाएगा।

अंतरराष्ट्रीय रोड शो कंप्लीट

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, सूत्रों का कहना है कि जियो प्लेटफॉर्म्स ने अमेरिका, ब्रिटेन, दुबई, हांगकांग और सिंगापुर में अपने अंतरराष्ट्रीय रोडशो पूरे कर लिए हैं। अब वह 12 अक्टूबर से शुरू होने वाले सप्ताह में सेबी के पास IPO का फाइनल ड्राफ्ट जमा कर सकती है। कंपनी भारत में भी IPO रोडशो आयोजित कर सकती है। IPO के मामले में रोड शो का मतलब है- संबंधित कंपनी के मैनेजमेंट की ओर से इनवेस्टर्स के साथ मीटिंग और रिप्रेजेंटेशंस। मीटिंग्स में IPO ला रही कंपनी के अधिकारी संभावित निवेशकों से बातचीत करते हैं और उन्हें समझाते हैं कि उनके IPO में निवेश करना क्यों उचित है।

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जियो प्लेटफॉर्म्स की वित्तीय सेहत

वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का रेवेन्यू 14.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 1.47 लाख करोड़ रुपये और शुद्ध मुनाफा 15.1 प्रतिशत बढ़ोतरी के साथ 30,000 करोड़ रुपये रहा। EBITDA 18.8 प्रतिशत बढ़कर 76,255 करोड़ रुपये हो गया। वित्त वर्ष 2025-26 में Jio के ग्राहकों की संख्या 52.44 करोड़ रही। जियो 5G के सब्सक्राइबर्स की संख्या 26.8 करोड़ है।

Jio Platforms में किसके पास कितनी हिस्सेदारी

रिलायंस इंडस्ट्रीज के पास जियो प्लेटफॉर्म्स में 66.43 प्रतिशत हिस्सेदारी है। मेटा के पास 9.99 प्रतिशत हिस्सेदारी है। वहीं गूगल की 7.73 प्रतिशत, सऊदी अरेबिया वेल्थ फंड्स की 2.31 प्रतिशत, विस्टा इक्विटी पार्टनर्स की 2.31 प्रतिशत, सिल्वर लेक की 1.88 प्रतिशत, मुबादला की 1.85 प्रतिशत, जीए सिंगापुर की 1.34 प्रतिशत, अबुधाबी इनवेस्टमेंट अथॉरिटी की 1.16 प्रतिशत और टीपीजी कैपिटल की 0.93 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

Disclaimer:मनीकंट्रोल, नेटवर्क18 ग्रुप का हिस्सा है। नेटवर्क18 का नियंत्रण इंडिपेंडेट मीडिया ट्रस्ट करता है, जिसकी एकमात्र लाभार्थी रिलायंस इंडस्ट्रीज है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Maxivision Super Specialty Eye Hospitals ला रही है IPO, ड्राफ्ट किया जमा; क्वाड्रिआ कैपिटल का भी लगा है पैसा

मैक्सीविजन सुपर स्पेशिएलिटी आई हॉस्पिटल्स (Maxivision Super Specialty Eye Hospitals) ने अपने IPO के लिए कॉन्फिडेंशियल तरीके से ड्राफ्ट जमा किया है। रॉयटर्स के मुताबिक, यह बात एक अखबार के विज्ञापन से सामने आई है। इस IPO में नए शेयर तो जारी होंगे ही, साथ ही कंपनी के मौजूदा निवेशकों की ओर से ऑफर फॉर सेल भी रहेगा। कंपनी में क्वाड्रिआ कैपिटल का भी पैसा लगा हुआ है।

कॉन्फिडेंशियल रूट कंपनियों को लिस्टिंग पर अंतिम फैसले पर पहुंचने तक गोपनीयता की सुविधा देता है। अगर जरूरी हो तो वे बाद में बाजार की स्थितियों के आधार पर महत्वपूर्ण जानकारी का खुलासा किए बिना ड्राफ्ट को वापस भी ले सकती हैं। कॉन्फिडेंशियल प्री-फाइलिंग कंपनियों को सेंसिटिव बिजनेस डिटेल्स या फाइनेंशियल मेट्रिक्स और रिस्क्स को गोपनीय रखने की इजाजत देती है, खासकर कॉम्पिटीटर्स से। दूसरी ओर स्टैंडर्ड DRHP (ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस) फाइलिंग के बाद एक पब्लिक डॉक्युमेंट बन जाता है।

IPO के लिए ICICI सिक्योरिटीज और IIFL कैपिटल हैं मर्चेंट बैंकर

रॉयटर्स ने जुलाई में रिपोर्ट दी थी कि मैक्सीविजन सुपर स्पेशिएलिटी आई हॉस्पिटल्स ने IPO के लिए ICICI सिक्योरिटीज और IIFL कैपिटल को बैंकर के तौर पर नियुक्त किया है। 1996 में शुरू हुई यह हॉस्पिटल चेन 6 राज्यों में 90 से ज्यादा सेंटर चलाती है। ग्रैंड व्यू रिसर्च के अनुसार, भारत का आई-केयर मार्केट 2033 तक 31.2 अरब डॉलर का बन जाने का अनुमान है।

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इसी महीने आ सकता है Jio IPO

Jio Platforms के IPO को लेकर कंपनी की अंदरूनी तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। मनीकंट्रोल को मामले से जुड़े लोगों से पता चला है कि विदेशी निवेशकों से भी कंपनी को काफी अच्छी प्रतिक्रिया मिली है। IPO 21 से 23 अक्टूबर के बीच खुल सकता है। एंकर बुक 19 अक्टूबर को खुलने की उम्मीद है। वहीं, शेयरों की लिस्टिंग 28 अक्टूबर को हो सकती है। हालांकि, बाजार की स्थिति को देखते हुए तारीखों में बदलाव भी हो सकता है। Jio Platforms ने इस साल जून में SEBI के पास अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस जमा किया था। इसके बाद SEBI ने अगस्त में IPO को मंजूरी दी। यह पब्लिक इश्यू लगभग 37,700 करोड़ रुपये का रह सकता है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Jio IPO: इसी महीने आ सकता है जियो का आईपीओ, विदेशी निवेशकों से मिला मजबूत रिस्पॉन्स

Jio IPO: रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल होल्डिंग कंपनी Jio Platforms अपने बहुप्रतीक्षित IPO की तैयारी कर रही है। कंपनी की अंदरूनी तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। मामले से जुड़े लोगों के मुताबिक, विदेशी निवेशकों से भी कंपनी को काफी अच्छी प्रतिक्रिया मिली है।

IPO 21 से 23 अक्टूबर के बीच खुल सकता है। एंकर बुक 19 अक्टूबर को खुलने की उम्मीद है। वहीं, शेयरों की लिस्टिंग 28 अक्टूबर को हो सकती है। हालांकि, बाजार की स्थिति को देखते हुए तारीखों में बदलाव भी हो सकता है।

IPO लॉन्च के काफी करीब Jio

मामले से जुड़े एक व्यक्ति के मुताबिक, Jio IPO लॉन्च करने के काफी करीब है। हालांकि, बाजार की स्थिति और दुनियाभर में होने वाले घटनाक्रम पर भी नजर रखी जा रही है। सूत्र ने बताया कि SEBI से जुड़ी रेग्युलेटरी प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है। जरूरी मंजूरियां भी मिल गई हैं।

Jio ने विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FIIs के साथ इन्वेस्टर मीटिंग की है। इन बैठकों में निवेशकों का रिस्पॉन्स काफी अच्छा रहा। घरेलू निवेशकों की दिलचस्पी भी उम्मीद से ज्यादा बताई जा रही है।

बाजार की स्थिति पर रोज नजर

हाल में शेयर बाजार में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। ऐसे में Jio की टीम बाजार की स्थिति पर रोज नजर रख रही है।

एक अन्य सूत्र ने कहा कि बाजार अभी कुछ अस्थिर है। इसके बावजूद निवेशकों ने संकेत दिया है कि इससे IPO में उनकी दिलचस्पी पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा। यानी बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद IPO में भाग लेने की उनकी इच्छा बनी हुई है।

SEBI से मिल चुकी है मंजूरी

Jio Platforms ने जून में SEBI के पास अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस यानी DRHP दाखिल किया था। इसके बाद SEBI ने 28 अगस्त को अपने फाइनल ऑब्जर्वेशन जारी किए।

इसके साथ ही IPO के लिए जरूरी रेग्युलेटरी प्रक्रिया काफी हद तक पूरी हो गई। अब कंपनी लॉन्च की तैयारी में है।

IPO से कर्ज चुकाएगी कंपनी

Jio Platforms का IPO पूरी तरह फ्रेश इश्यू होगा। यानी इसमें नए शेयर जारी किए जाएंगे। IPO से मिलने वाली रकम का बड़ा हिस्सा Reliance Jio Infocomm के कर्ज को चुकाने में इस्तेमाल होगा।

कंपनी करीब ₹27,500 करोड़ के बकाया कर्ज को पूरी तरह या कुछ हिस्से में चुकाने या पहले से भुगतान करने की योजना बना रही है। बाकी रकम का इस्तेमाल सामान्य कॉर्पोरेट जरूरतों के लिए किया जाएगा।

IPO की कीमत और वैल्यूएशन अभी तय नहीं

Jio IPO का फाइनल प्राइस और कंपनी का वैल्यूएशन अभी तय नहीं हुआ है। सूत्रों के मुताबिक, निवेशकों की प्रतिक्रिया और बाजार की स्थिति को देखकर अगले हफ्ते प्राइसिंग पर फैसला हो सकता है।

सूत्र ने बताया कि कंपनी का मकसद यह है कि IPO में आने वाले शेयरधारकों के लिए शुरुआत से ही वैल्यू बने। साथ ही, लंबे समय में भी उन्हें कंपनी की ग्रोथ का फायदा मिले।

रिटेल और HNI के लिए 50% हिस्सा

प्रस्तावित इश्यू स्ट्रक्चर के मुताबिक, IPO का 50% हिस्सा रिटेल और HNI निवेशकों के लिए रखा जाएगा। बाकी 50% हिस्सा संस्थागत निवेशकों के लिए होगा।

रिटेल और HNI वाले हिस्से में 35% हिस्सा उन रिटेल निवेशकों के लिए होगा, जो ₹2 लाख तक के शेयरों के लिए आवेदन करेंगे। बाकी 15% हिस्सा दो कैटेगरी में बांटा जाएगा।

इसमें ₹10 लाख से ज्यादा निवेश करने वाले निवेशक और ₹2 लाख से ₹10 लाख के बीच निवेश करने वाले निवेशक शामिल होंगे। संस्थागत निवेशकों के हिस्से में एंकर बुक और मुख्य इंस्टीट्यूशनल बुक शामिल होगी।

मामले से जुड़े लोगों के मुताबिक, Jio Platforms का मैनेजमेंट चाहता है कि रिटेल निवेशक IPO में अच्छी भागीदारी करें। कंपनी चाहती है कि रिटेल निवेशकों को लंबे समय में बनने वाली वैल्यू का भी फायदा मिले।

Jio को सिर्फ टेलीकॉम कंपनी नहीं मान रहे निवेशक

निवेशक अब Jio को सिर्फ टेलीकॉम कंपनी के तौर पर नहीं देख रहे हैं। कंपनी का डिजिटल बिजनेस काफी बड़ा है। इसमें मोबाइल कनेक्टिविटी के साथ होम ब्रॉडबैंड, एंटरप्राइज टेक्नोलॉजी और इंटरनेशनल सर्विसेज भी शामिल हैं।

Jio Platforms की टेलीकॉम यूनिट Reliance Jio Infocomm के पास 31 मार्च तक 52.44 करोड़ ग्राहक थे। सब्सक्राइबर की संख्या के हिसाब से यह भारत की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी है। इनमें 26.85 करोड़ 5G ग्राहक थे। कंपनी के मुताबिक, चीन को छोड़कर दुनिया में Jio सबसे बड़ा 5G स्टैंडअलोन ऑपरेटर था।

FWA में भी बड़ा कारोबार

Jio फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस यानी FWA में भी बड़ा खिलाड़ी है। मार्च तक कंपनी के पास करीब 1.5 करोड़ FWA ग्राहक थे। कंपनी के मुताबिक, चीन को छोड़कर दुनिया में Jio सबसे बड़ा FWA प्रोवाइडर था। इसके ग्राहकों की संख्या अमेरिका की T-Mobile की FWA ग्राहक संख्या से करीब 1.5 गुना थी।

Jio Platforms ने शुक्रवार शाम भेजे गए ईमेल का जवाब नहीं दिया।

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Carlsberg India IPO को SEBI से मंजूरी, ₹6600 करोड़ तक जुटा सकती है Tuborg वाली कंपनी

सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने डेनमार्क की नामी शराब कंपनी कार्ल्सबर्ग (Carlsberg) के भारतीय कारोबार के IPO को मंजूरी दे दी है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है। कार्ल्सबर्ग इंडिया लिमिटेड ने 1 जुलाई को SEBI के पास गोपनीय तरीके से IPO के दस्तावेज जमा किए थे। इससे पहले खबर आई थी कि कंपनी का प्लान 70 करोड़ डॉलर (6,600 करोड़ रुपये) तक जुटाने का है। IPO में कंपनी की ओर से केवल ऑफर फॉर सेल रह सकता है। लिस्टिंग इस साल के आखिर में हो सकती है।

कॉन्फिडेंशियल रूट कंपनियों को लिस्टिंग पर अंतिम फैसले पर पहुंचने तक गोपनीयता की सुविधा देता है। अगर जरूरी हो तो वे बाद में बाजार की स्थितियों के आधार पर महत्वपूर्ण जानकारी का खुलासा किए बिना ड्राफ्ट को वापस भी ले सकती हैं। कॉन्फिडेंशियल प्री-फाइलिंग कंपनियों को सेंसिटिव बिजनेस डिटेल्स या फाइनेंशियल मेट्रिक्स और रिस्क्स को गोपनीय रखने की इजाजत देती है, खासकर कॉम्पिटीटर्स से। दूसरी ओर स्टैंडर्ड DRHP (ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस) फाइलिंग के बाद एक पब्लिक डॉक्युमेंट बन जाता है।

कार्ल्सबर्ग इस प्रस्तावित शेयर बिक्री के लिए कोटक महिंद्रा कैपिटल कंपनी, जेपी मॉर्गन चेस एंड कंपनी और सिटीग्रुप इंक की भारतीय यूनिट्स के साथ काम कर रही है। कार्ल्सबर्ग के ब्रांड्स में कार्ल्सबर्ग, टुबोर्ग, क्रोननबर्ग 1664, ग्रिमबर्गेन, सोमरस्बी, होल्स्टन शामिल हैं। कंपनी के IPO के साइज, स्ट्रक्चर और टाइमिंग जैसी डिटेल्स में बदलाव हो सकता है।

Carlsberg का मार्केट शेयर करीब 22 प्रतिशत

कार्ल्सबर्ग इंडिया भारत की दूसरी सबसे बड़ी शराब निर्माता कंपनी है। इसका मार्केट शेयर लगभग 22 प्रतिशत है। इसकी वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार, कार्ल्सबर्ग की इंडिया यूनिट को 2007 में शुरू किया गया था। कंपनी देश भर में 14 ब्रुअरीज (शराब बनाने के कारखाने) चलाती है। इनमें से 8 का मालिकाना हक कंपनी के पास है। 6 कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स हैं। वहीं कार्ल्सबर्ग ग्रुप की शुरुआत 1847 में हुई थी।

कार्ल्सबर्ग इंडिया की सबसे करीबी लिस्टेड कॉम्पिटीटर, यूनाइटेड ब्रुअरीज लिमिटेड है। एब्सोल्यूट वोदका और चिवास रीगल स्कॉच व्हिस्की बनाने वाली कंपनी पेरनोड रिकार्ड SA भी अपने भारतीय कारोबार की संभावित लिस्टिंग पर विचार कर रही है।

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इन कंपनियों को भी मिली IPO की मंजूरी

SEBI ने कार्ल्सबर्ग इंडिया लिमिटेड के साथ-साथ टीएमसी ट्रांसफॉर्मर्स (इंडिया) लिमिटेड, उजिन फार्मा लिमिटेड और मातंगी रबड़ लिमिटेड के IPO को भी मंजूरी दे दी है। टीएमसी ट्रांसफॉर्मर्स (इंडिया) के प्रस्तावित 550 करोड़ रुपये के IPO में केवल नए शेयर जारी होंगे। उजिन फार्मा के IPO में 1.18 करोड़ नए शेयर जारी किए जाएंगे। साथ ही प्रमोटर्स की ओर से 72.82 लाख शेयरों को ओएफएस के तहत बिक्री के लिए रखा जाएगा।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stocks to Watch: सात हफ्ते टूटकर संभलेगा मार्केट! आज 3 लिस्टिंग्स और Fortis समेत 11 शेयर फोकस में

Stocks to Watch: एशियाई बाजारों से मिले-जुले रुझानों के बीच गिफ्ट निफ्टी से आज 28 सितंबर को घरेलू स्टॉक मार्केट में लाल शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं। गिफ्ट निफ्टी फिलहाल 76.00 प्वाइंट्स यानी 0.33% की गिरावट के साथ 23,112.00 पर है। एक कारोबारी दिन पहले 25 सितंबर को सेंसेक्स (Sensex) 315.20 प्वाइंट्स यानी 0.43% की बढ़त के साथ 73,895.74 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 77.40 प्वाइंट्स यानी 0.34% की तेजी के साथ 23,140.50 पर बंद हुआ था। अब आज इंडिविजुअल स्टॉक्स की बात करें तो अपनी खास कॉरपोरेट एक्टिविटीज के चलते कुछ स्टॉक्स में तेज हलचल दिख सकती है। यहां इन शेयरों के बारे में डिटेल्स दी जा रही है।

Stocks to Watch: आज इन स्टॉक्स पर फोकस

Clean Max Enviro Energy Solutions

सीएनबीसी-टीवी18 की सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट के मुताबिक ऑगमेंट इंडिया I होल्डिंग्स एलएलसी क्लीन मैक्स एंवायरों एनर्जी सॉल्यूशंस के 85 लाख शेयर (7.25% हिस्सेदारी) बेच सकती है। इस ऑफर का साइज ₹1,062.8 करोड़ और फ्लोर प्राइस प्रति शेयर ₹1,250 तय किया गया है। जून 2026 तक कंपनी में ऑगमेंट इंडिया की हिस्सेदारी 9.5% थी।

Unichem Laboratories

अमेरिकी दवा नियामक एफडीए ने यूनिकेम लैब की गोवा के पिलर्ने में स्थित फॉर्म्यूलेशन फैसिलिटी की 21-26 सितंबर, 2026 के बीच जांच की, जिसके बाद पांच ऑब्जर्वेशन जारी हुए।

Zydus Lifesciences

अमेरिकी दवा नियामक एफडीए ने अमेरिका के न्यू जर्सी में जाइडस लाइफसाइंसेज के ऑफिस में फार्माकोविजिलेंस और पोस्ट-मार्केटिंग सर्विलांस सिस्टम का ऑन-साइट इंस्पेक्शन किया। यह इंस्पेक्शन 22 से 25 सितंबर, 2026 के बीच हुआ और इसमें कोई ऑब्जर्वेशन नहीं मिला

Wheels India

व्हील्स इंडिया ने 25 सितंबर को अपना क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) इश्यू बंद किया और प्रति शेयर ₹2,088 के भाव पर 11.97 लाख शेयरों के अलॉटमेंट को मंजूरी दी। इश्यू प्राइस प्रति शेयर ₹2,197.10 के फ्लोर प्राइस से ₹109.10 डिस्काउंट पर है। इस इश्यू के तहत आदिक्य बिड़ला सनलाइफ एएमसी, एसबीआई म्यूचुअल फंड, व्हाइटओक कैपिटल और अशोक इंडिया इक्विटी इंवेस्टमेंट ट्रस्ट जैसे निवेशकों ने पैसे डाले।

Aequs

एक्वस के बोर्ड ने प्रमोटर ग्रुप के सदस्य मेलवुड ट्रस्टी सर्विसेज को 2.8 करोड़ तक के वारंट के प्रेफरेंशियल इश्यू को मंजूरी दी है, जिसकी कुल वैल्यू लगभग ₹650 करोड़ है। इसमें से ₹325 करोड़ तो वारंट के अलॉटमेंट के समय तुरंत चुकाने होंगे, जो इश्यू साइज का 50% और रेगुलेटरी मिनिमम का दोगुना है। बाकी रकम वारंट के इस्तेमाल यानी एक्सरसाइज के समय चुकानी होगी।

Signatureglobal (India)

सिग्नेचरग्लोबल ने गुरुग्राम के फर्रुखनगर में लगभग 194.22 एकड़ जमीन हासिल की। इससे उसके डेवलपमेंट पाइपलाइन में लगभग 67.7 करोड़ स्क्वेयर फुट का डेवलप करने लायक एरिया जुड़ गया है। इस प्रोजेक्ट की अनुमानित ग्रॉस डेवलपमेंट वैल्यू (GDV) लगभग ₹5,500-₹6,000 करोड़ है।

Prestige Estates Projects

प्रेस्टीज एस्टेट्स प्रोजेक्ट्स की सब्सिडियरी प्रेस्टीज हॉस्पिटैलिटी वेंचर्स (PHVL) ने रणनीतिक कारणों और मार्केट की अनिश्चित स्थितियों का हवाला देते हुए अपने आईपीओ का ड्राफ्ट यानी ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) वापस लेने का फैसला किया है। बाद में यह फिर आईपीओ के लिए सेबी के पास नया ड्राफ्ट दाखिल करने पर विचार कर सकती है।

Fortis Healthcare

फोर्टिस हेल्थकेयर ने दाइची सैंक्यो और सिंह ब्रदर्स के बीच चल रहे कानूनी विवाद में अपना पक्ष रखा है। कंपनी का कहना है कि वह इस विवाद से पूरी तरह अनजान थी और पुराने प्रमोटरों की हिस्सेदारी कम होने के मामले में उसकी कोई भूमिका नहीं थी। फोर्टिस के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने 25 सितंबर के अपने आदेश में कंपनी की स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) का निपटारा कर दिया और स्वतंत्र रूप से फोरेंसिक ऑडिट का आदेश दिया है।

लिस्टिंग

आज एफएक्स मल्टीटेक, रोबोकिड्ज एडुवेंचर्स और विवेकानंद कॉटस्पिन के शेयर बीएसई एसएमई पर लिस्ट होंगे।

Stocks to Watch: इन पर भी रहेगी नजर

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एक्स-बोनस: आस्था स्पिंटेक्स

F&O बैन: आज कीन्स टेक्नोलॉजी इंडिया, मणप्पुरम फाइनेंस, एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस, SAIL

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Cars24 IPO: लिस्टिंग की तैयारी, अप्रैल तक फाइल होगा ड्राफ्ट, अभी गुजर रही इस लंबे प्रोसेस से

Cars24 IPO: पुराने कारों की बिक्री के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ऑफर करने वाली कार्स24 सात महीने में आईपीओ के लायक हो सकती है। कंपनी के सीएफओ Shivanshu Makkar का कहना है कि सिंगापुर से भारत में अपने रिवर्स फ्लिप की प्रक्रिया पूरी करने के बाद वह अप्रैल तक आईपीओ का ड्राफ्ट यानी DRHP (ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस) दाखिल कर सकेगी। रिवर्स फ्लिप में छह से नौ महीने तक का समय लग सकता है। शिवांशु ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से इंटरव्यू में बताया कि 2015 में सिंगापुर में बनी कार्स24 को रिवर्स फ्लिप के लिए मंजूरी मिल चुकी है और अब यह भारत में अपने आईपीओ का ड्राफ्ट फाइल कर सकती है।

कब तक आ सकता है आईपीओ?

शिवांशु ने कहा था कि अभी कार्स24 सिंगापुर सिंगापुर की कंपनी है लेकिन अब इसे भारतीय कंपनी बनाने की तैयारी है। यह रिवर्स फ्लिप प्रक्रिया है, जैसा कि फ्लिकार्ट (Flipkart) और मिंत्रा (Myntra) ने किया था। शिवांशु की कहना है कि कंपनी को सिंगापुर से मंजूरी मिल चुकी है और भारत में दाखिल करने की प्रक्रिया चल रही है। इसमें 6 से 9 महीने लग सकते हैं। आधिकारिक तौर पर भारतीय कंपनी बनने के बाद ही यह आईपीओ का ड्राफ्ट दाखिल कर सकेगी। शिवांश को उम्मीद है कि अप्रैल तक कंपनी ऐसा करने के योग्य हो जाएगी। इसके बाद सेबी की मंजूरी, आईपीओ की प्राइस तय करने और बुक-बिल्डिंग जैसी प्रक्रियाओं में करीब 3 से 4 महीने लग सकते हैं।

कैसी है Cars24 की स्थिति

कार्स24 ने आखिरी बार साल 2022 में फंडिंग जुटाई थी, जिसके बाद कंपनी का वैल्यूएशन करीब $330 करोड़ हो गया। शिवांशु के मुताबिक इसके बाद से शिवांशु ने बाहर से कोई नया निवेश नहीं जुटाया, क्योंकि उसे अतिरिक्त पूंजी की जरूरत नहीं पड़ी। उन्होंने कहा कि कंपनी के पास अभी भी पर्याप्त पूंजी मौजूद है और वह फिलहाल कैश बर्न नहीं कर रही है। ऐसे में शिवांशु का कहना है कि अगर कंपनी आईपीओ लाती है तो इसका मुख्य उद्देश्य तत्काल पैसों की जरूरत पूरी करना नहीं, बल्कि भारत में विस्तार और देश के बाहर दूसरे बाजारों में एंट्री के लिए पूंजी तैयार करना होगा।

उनका कहना है कि फिलहाल भारत में 100 में से सिर्फ 5 भारतीयों के पास कार है, तो इस मार्केट में विस्तार की काफी संभावनाएं हैं। शिवांशु का कहना है कि कार्स24 का रिटेल कारोबार इस समय देश के करीब 25 शहरों में है, जिसे बढ़ाकर लगभग 200 शहरों तक ले जाने और करीब 50,000 कारों तक विस्तार करने पर विचार चल रहा है।

शिवांशु का कहना है कि भारत के अलावा कार्स24 खाड़ी के देशों और ऑस्ट्रेलिया में भी अपने कारोबार को बढ़ाने पर विचार कर रही है। अभी यूएई में पुरानी कारों के बाजारों में कार्स24 की लगभग 7% हिस्सेदारी है और यह लगभग 30% की दर से बढ़ रही है, जबकि ऑस्ट्रेलिया में इसने तीन शहरों तक अपना विस्तार किया है।

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Stocks to Watch: 25 सितंबर को Nykaa, PB Fintech, ESDS Software Solution समेत इन शेयरों में बड़े उतार-चढ़ाव के आसार

शुक्रवार, 25 सितंबर को कई शेयरों पर फोकस रहेगा। लिस्ट में नाइका, पीबी फिनटेक, व्हील्स इंडिया, आइनॉक्स ग्रीन एनर्जी, पर्पल स्टाइल लैब्स जैसे कई नाम शामिल हैं। इन शेयरों में बड़ी उठापटक दिख सकती है। वजह हैं- तिमाही नतीजे, कारोबार से जुड़े डेवलपमेंट्स, नई डील या कॉन्ट्रैक्ट, आदि। इसके अलावा शुक्रवार को SME सेगमेंट में एक कंपनी की लिस्टिंग होने वाली है। साथ ही 4 कंपनियों के शेयर एक्स-डिविडेंड और 2 कंपनियों के शेयर एक्स-स्प्लिट ट्रेड करने वाले हैं। आइए डिटेल में जानते हैं किन प्रमुख शेयरों पर रहेगी नजर…

इन शेयरों पर रहेगी नजर

ESDS Software Solution: अप्रैल-जून 2026 तिमाही (Q1) में कंसोलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार पर 14% बढ़कर 29.3 करोड़ रुपये हो गया। रेवेन्यू 7.3% बढ़कर 133.7 करोड़ रुपये हो गया।

Purple Style Labs: Q1 में कंसोलिडेटेड घाटा सालाना आधार पर कम होकर 88.1 करोड़ रह गया। रेवेन्यू 13% बढ़कर 119.4 करोड़ रुपये हो गया।

PB Fintech: Policybazaar प्लेटफॉर्म की पेरेंट कंपनी का शेयर 24 सितंबर को 36 प्रतिशत टूटा था। बंपर बिकवाली की वजह रही इंश्योरेंस रेगुलेटर IRDAI का डिस्ट्रीब्यूशन सुधारों पर नया ड्राफ्ट और उसके बाद बर्नस्टीन का व्यू। बर्नस्टीन का मानना है कि कमीशन को लेकर ड्राफ्ट पेपर में प्रस्तावित कटौती से PB Fintech को सबसे ज्यादा नुकसान होगा, क्योंकि इन टेक-रेट पर कॉल सेंटर की लागत नहीं निकल पाएगी। इस शेयर पर शुक्रवार को भी नजर रहेगी।

Wheels India: कंपनी का क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) 24 सितंबर को खुल गया। फ्लोर प्राइस ₹2,197.10 प्रति शेयर है।

Inox Green Energy Services: कंपनी ने 24 सितंबर को अपना QIP लॉन्च किया। फ्लोर प्राइस ₹174.36 प्रति शेयर तय किया गया है।

FSN E-Commerce Ventures (Nykaa): नाइका और L’Oréal के कॉर्पोरेट वेंचर कैपिटल फंड, BOLD (बिजनेस अपॉर्चुनिटीज फॉर L’Oréal डेवलपमेंट) ने तेजी से बढ़ रहे भारतीय ब्यूटी और पर्सनल केयर ब्रांड्स की अगली पीढ़ी में मिलकर निवेश करने के लिए एक सहयोग की घोषणा की है।

Waaree Energies: कंपनी की सब्सिडियरी, Waaree Clean Energy Solutions ने भारत के स्पेशिएलिटी गैस बिजनेस में उतरने की घोषणा की है। इसका मकसद देश की सेमीकंडक्टर और सोलर सेल बनाने वाली कंपनियों के लिए वन-स्टॉप सप्लायर बनना है।

LCC Projects: कंपनी राजस्थान के गंगधार में छोटी कालीसिंध और चाहुरनी नदियों पर सोलर पावर वाले स्प्रिंकलर सिस्टम पर बेस्ड ‘छोटी कालीसिंध मीडियम इरिगेशन प्रोजेक्ट’ के लिए L-1 बिडर (सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी) के तौर पर उभरी है। इस प्रोजेक्ट की कुल अनुमानित कीमत 653.34 करोड़ रुपये है।

Dr Lal PathLabs: कंपनी के बोर्ड ने SN Genelab में 70 प्रतिशत हिस्सेदारी मौजूदा शेयरधारकों से खरीदने को मंजूरी दे दी है। डील ₹168 करोड़ तक की होगी। इस अधिग्रहण के बाद SN Genelab, डॉ. लाल पैथलैब्स की सब्सिडियरी बन जाएगी। ट्रांजेक्शन के 30 नवंबर, 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है।

JSW Cement: कंपनी को बेलागावी ऑडिट कमिश्नरेट के एडिशनल कमिश्नर (सेंट्रल टैक्स) से एक ‘कारण बताओ नोटिस’ मिला है। यह नोटिस गलत क्लासिफिकेशन के कारण GST के कथित तौर पर कम भुगतान से संबंधित है। इसके चलते, डिपार्टमेंट ने अप्रैल 2022 से मार्च 2024 की अवधि के लिए 229.85 करोड़ रुपये के GST की मांग की है, जिसमें लागू ब्याज और 10 प्रतिशत जुर्माना भी शामिल है।

इस बीच, JSW स्टील और JSW सीमेंट द्वारा प्रमोटेड JSW वन प्लेटफॉर्म्स ने IPO के जरिए 3,054 करोड़ रुपये तक जुटाने के लिए SEBI, BSE और एनएसई के पास ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल किया है।

L&T Technology Services: कंपनी ने इंडस्ट्रियल AI में ग्लोबल लीडर, कॉग्नाइट (Cognite) के साथ एक स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप की घोषणा की है। इसका मकसद एसेट-इंटेंसिव इंडस्ट्रीज के लिए जॉइंट इंडस्ट्रियल AI और डेटा सॉल्यूशन विकसित करना और उन्हें उपलब्ध कराना है।

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बल्क और ब्लॉक डील्स

PB Fintech: HDFC म्यूचुअल फंड ने लगभग 320.6 करोड़ रुपये के 25 लाख शेयर खरीदे।

Brainbees Solutions (FirstCry): प्री-IPO निवेशक न्यूक्वेस्ट एशिया इनवेस्टमेंट्स ने लगभग 202 करोड़ रुपये के 1.15 करोड़ शेयर बेचे। वहीं गोल्डमैन सैक्स ने लगभग 119 करोड़ रुपये के 68 लाख शेयर खरीदे।

Sedemac Mechatronics: एक ही ब्लॉक डील में लगभग 1,469 करोड़ रुपये के 48.8 लाख शेयरों का लेन-देन हुआ। A91 एमर्जिंग फंड II और एक्सपोन्शिया कैपिटल से जुड़े फंड्स सहित प्राइवेट इक्विटी निवेशकों ने अपनी हिस्सेदारी का कुछ हिस्सा बेचा। खरीदारों में सिंगापुर सरकार (GIC) और मॉनेटरी अथॉरिटी ऑफ सिंगापुर जैसे सॉवरेन फंड्स के साथ-साथ T रो प्राइस, अमांसा होल्डिंग्स और SBI, ICICI प्रूडेंशियल, एक्सिस, आदित्य बिड़ला सन लाइफ और इनवेस्टको सहित कई घरेलू म्यूचुअल फंड्स शामिल थे।

BlueStone Jewellery and Lifestyle: ब्लूस्टोन ज्वेलरी के लगभग 61.98 लाख शेयरों का लेन-देन 513.01 करोड़ रुपये में हुआ। बजाज लाइफ इंश्योरेंस, कुवैत इनवेस्टमेंट अथॉरिटी FD F238, सिटीग्रुप, गोल्डमैन सैक्स, निप्पॉन इंडिया म्यूचुअल फंड, मिरे एसेट म्यूचुअल फंड, बंधन म्यूचुअल फंड और SBI लाइफ इंश्योरेंस ने Accel और 360 ONE WAM से BlueStone के शेयर खरीदे।

SME लिस्टिंग

Axiom Gas Engineering

ये स्टॉक करेंगे एक्स-डिविडेंड ट्रेड

श्री लोटस डेवलपर्स एंड रियल्टी

LGT ग्लोबल हॉस्पिटैलिटी

A D S डायग्नोस्टिक्स

नोबल पॉलिमर्स

ये शेयर करेंगे एक्स-स्प्लिट ट्रेड

नेच्युराइट एग्रो प्रोडक्ट्स

मिडवेस्ट एनर्जी

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Abakkus AMC IPO: सुनील सिंघानिया की कंपनी आईपीओ लाने को तैयार, OFS में 1.5 करोड़ शेयर बिकेंगे

Abakkus AMC IPO: दिग्गज निवेशक सुनील सिंघानिया की अगुवाई वाली Abakkus Asset Manager Limited ने IPO की तैयारी शुरू कर दी है। कंपनी ने IPO के लिए SEBI के पास ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस यानी DRHP दाखिल किया है।

कंपनी का IPO पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) होगा। इसमें प्रमोटर Abakkus Expert Professional करीब 1.5 करोड़ शेयर बेचेंगे। यानी इस इश्यू से मिलने वाली रकम कंपनी के पास नहीं जाएगी। शेयर बेचने वाले प्रमोटर को इसका फायदा मिलेगा।

IPO के लिए Axis Capital, ICICI Securities, IIFL Capital और JM Financial को लीड मैनेजर बनाया गया है।

FY26 में ₹796 करोड़ रहा रेवेन्यू

वित्त वर्ष 2025-26 में Abakkus Asset Manager का रेवेन्यू ₹796 करोड़ रहा। इस दौरान कंपनी का PAT यानी नेट प्रॉफिट बढ़कर ₹327 करोड़ पहुंच गया।

कंपनी का कारोबार मुख्य रूप से इक्विटी इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी का है। Abakkus चार प्रमुख वर्टिकल में काम करती है। कंपनी का कारोबार चार प्रमुख सेगमेंट में फैला है। इनमें अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट, ऑफशोर इन्वेस्टमेंट, प्राइवेट इक्विटी और म्यूचुअल फंड शामिल हैं।

PMS में ₹18,538 करोड़ का AUM

DRHP में दी गई ICRA की रिपोर्ट के मुताबिक, 31 मार्च 2026 तक Abakkus भारत के डिस्क्रिशनरी PMS सेगमेंट में AUM के लिहाज से चौथे नंबर पर थी। कंपनी का AUM ₹18,538 करोड़ था। इस सेगमेंट में उसकी बाजार हिस्सेदारी 5.3% थी।

कंपनी ने बताया कि ₹12,500 करोड़ से ज्यादा AUM वाले टॉप सात ऑपरेशनल प्रतिद्वंद्वी कंपनियों में वह सबसे तेजी से बढ़ने वाली कंपनी थी। डिस्क्रिशनरी PMS का QAAUM छह साल में बढ़कर करीब ₹20,000 करोड़ हो गया।

दो इक्विटी स्ट्रैटेजी में ₹5,000 करोड़ से ज्यादा

Abakkus के पास दो डिस्क्रिशनरी इक्विटी स्ट्रैटेजी हैं। दोनों में QAAUM ₹5,000 करोड़ से ज्यादा है।

ICRA की रिपोर्ट के मुताबिक, 31 मार्च 2026 तक डिस्क्रिशनरी PMS प्रोवाइडर्स के बीच Abakkus का क्लाइंट बेस देश में दूसरा सबसे बड़ा था।

म्यूचुअल फंड कारोबार में भी तेज ग्रोथ

Abakkus ने म्यूचुअल फंड कारोबार में भी तेजी से विस्तार किया है। कंपनी के मुताबिक, 1 अप्रैल 2002 के बाद शुरू हुए AMCs में वह इक्विटी कैटेगरी की म्यूचुअल फंड स्कीम्स में ₹10,000 करोड़ AUM तक पहुंचने वाली सबसे तेज कंपनियों में शामिल है।

कंपनी ने यह आंकड़ा म्यूचुअल फंड कारोबार शुरू करने के सिर्फ आठ महीने में हासिल किया।

2018 में हुई थी कंपनी की शुरुआत

Abakkus की शुरुआत 2018 में सुनील बनवारीलाल सिंघानिया ने की थी। उनके पास एसेट मैनेजमेंट और इक्विटी निवेश का तीन दशक से ज्यादा का अनुभव है।

सिंघानिया 2003 से 2017 तक Nippon Life India Asset Management में Investment – Equity फंक्शन के इक्विटीज के ग्लोबल हेड रह चुके हैं।

NSE IPO में शेयर नहीं बेचे, अब नारायण मूर्ति और अजीम प्रेमजी समेत चार के पास ₹26000 करोड़ की होल्डिंग

NSE IPO पर आई सबसे बड़ी खबर! तगड़ी डिमांड, फिर भी क्यों घटा आईपीओ का साइज? जानिए क्या है माजरा

NSE IPO Latest News: ‘नेशनल स्टॉक एक्सचेंज’ (NSE) के आईपीओ का इंतजार कर रहे निवेशकों के लिए एक बेहद बड़ी खबर आई है। NSE ने मार्केट रेगुलेटर SEBI के पास अपना अपडेटेड ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (UDRHP) जमा कर दिया है।

हालांकि, इस बार आईपीओ से जुड़ा एक बड़ा ट्विस्ट सामने आया है। कंपनी के इस मेगा आईपीओ का कुल साइज घटकर लगभग ₹23,000 करोड़ रह गया है, जबकि पहले इसके ₹30,000 करोड़ के आसपास रहने का अनुमान था।

आइए समझते हैं कि आईपीओ का साइज क्यों घटा, कौन-कौन से बड़े निवेशक अपने शेयर बेच रहे हैं और इसका बाजार पर क्या असर होगा।

क्यों घटा NSE के IPO का साइज?

एनएससी का यह आईपीओ पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) होगा। इसका मतलब है कि एनएसई खुद कोई नए शेयर जारी नहीं कर रही है और आईपीओ से मिलने वाला पूरा पैसा उन मौजूदा शेयरधारकों के पास जाएगा जो अपने शेयर बेच रहे हैं।

जून में दाखिल किए गए ओरिजिनल DRHP में 14.89 करोड़ शेयर यानी NSE की कुल इक्विटी का लगभग 6% बेचने का प्रस्ताव था। लेकिन नए ड्राफ्ट के मुताबिक, कुछ प्रमुख सरकारी बीमा कंपनियों और वैश्विक वित्तीय दिग्गज मॉर्गन स्टेनली ने आईपीओ के जरिए बेचे जाने वाले अपने शेयरों की संख्या कम कर दी है।

किन-किन दिग्गजों ने घटाया अपना स्टेक सेल?

सूत्रों के मुताबिक, जिन प्रमुख संस्थागत निवेशकों ने बेचे जाने वाले शेयरों की संख्या घटाई है, उनमें ये प्रमुख कंपनियां शामिल हैं:

सरकारी बीमा कंपनियां:

GIC Re (General Insurance Corp): पहले 1.066 करोड़ शेयर बेचने का प्रस्ताव था।

New India Assurance: पहले 1.05 करोड़ शेयर बेचने की योजना थी।

National Insurance Company: पहले 60 लाख शेयर।

United India Insurance: पहले 60 लाख शेयर।

(शुरुआती ड्राफ्ट में ये चारों कंपनियां मिलकर कुल 3.37 करोड़ शेयर बेचने वाली थीं, जिसमें अब कटौती की गई है।)

मॉर्गन स्टेनली: मॉर्गन स्टेनली से जुड़ी संस्था MS Strategic (Mauritius) Ltd ने भी अपनी हिस्सेदारी बिक्री कम की है। मूल प्रॉस्पेक्टस में यह संस्था 1.60 करोड़ शेयर बेचने वाली थी।

संस्थागत निवेशकों में बंपर क्रेज

भले ही मौजूदा शेयरधारकों ने बेचे जाने वाले शेयरों की संख्या कम कर दी हो, लेकिन NSE के आईपीओ को लेकर बाजार में गजब का उत्साह है। सूत्रों का कहना है कि एंकर और संस्थागत निवेशकों की ओर से लगभग ₹85,000 करोड़ की डिमांड आ चुकी है। इससे यह साफ पता चलता है कि बड़े डोमेस्टिक और विदेशी निवेशकों (FIIs) के बीच भारत के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज में हिस्सेदारी खरीदने की जबरदस्त होड़ मची हुई है।

एक दशक लंबे इंतजार के बाद ऐतिहासिक कदम

यह कदम नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की लिस्टिंग की दिशा में एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक मील का पत्थर है। एनएसई ने लगभग 10 साल पहले पहली बार आईपीओ की प्रक्रिया शुरू की थी, जो कई तरह की विनियामक और कानूनी प्रक्रियाओं के कारण रुकी हुई थी। UDRHP दाखिल होना यह संकेत देता है कि अब जल्द ही यह मेगा आईपीओ दलाल स्ट्रीट पर दस्तक देने वाला है।

क्या हो सकता है प्राइस बैंड, कब से खुलेगा और क्या चल रहा GMP?

बाजार सूत्रों के अनुसार एनएसई आईपीओ का अनुमानित प्राइस बैंड ₹1,700 से ₹1,785 प्रति शेयर रहने की उम्मीद है। यह आईपीओ 18 सितंबर 2026 से खुलने और 22 सितंबर को बंद होने की संभावना जताई जा रही है। ग्रे मार्केट में इसे लेकर बाजार का माहौल गरम है। अनऑफिशियल ग्रे मार्केट में इसका GMP फिलहाल ₹225 से ₹250 के प्रीमियम के आसपास ट्रेड कर रहा है। वैसे बीते कुछ दिनों में इसमें थोड़ी गिरावट देखने को मिली है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।