Cult.fit को IPO के लिए SEBI से मिली मंजूरी, रहेंगे ₹950 करोड़ तक के नए शेयर

फिटनेस सर्विसेज प्लेटफॉर्म Cult.fit को IPO लाने के लिए कैपिटल मार्केट रेगुलेटर SEBI से मंजूरी मिल गई है। सेबी की वेबसाइट पर मौजूद एक दस्तावेज से पता चलता है कि कंपनी अब लिस्टिंग की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकती है। Cult.fit के पब्लिक इश्यू में 950 करोड़ रुपये तक के नए इक्विटी शेयर जारी होंगे। साथ ही मौजूदा शेयरधारकों की ओर से 17.86 करोड़ तक इक्विटी शेयरों का ऑफर फॉर सेल (OFS) रहेगा।

Cult.fit भारत में 77 शहरों में 708 फिटनेस सेंटर चलाती है। 31 मार्च, 2026 तक इसके 987,000 से अधिक पेड मेंबर थे। यह कई माध्यमों से मेंबरशिप बेचती है, जिनमें इसका ऐप, वेबसाइट, कॉरपोरेट पार्टनरशिप प्रोग्राम और फिटनेस सेंटरों पर होने वाली डायरेक्ट सेल शामिल हैं। कल्ट फिट ने इस साल जुलाई में SEBI के पास IPO के लिए आवेदन किया था।

कंपनी में टेमासेक होल्डिंग्स के निवेश वाली मैकरिची इनवेस्टमेंट्स, फिटनेस फर्स्ट लक्जमबर्ग, IDG वेंचर्स इंडिया फंड, टाटा डिजिटल, चिराटे ट्रस्ट, श्रोडर्स कैपिटल, ट्वेंटी नाइन कैपिटल पार्टनर्स और एक्सेल इंडिया V (मॉरीशस) का भी पैसा लगा हुआ है।

IPO के पैसे कैसे इस्तेमाल करेगी Cult.fit

Cult.fit अपने IPO में नए शेयरों को जारी कर हासिल होने वाले पैसों का इस्तेमाल नए सेंटर खोलने, और ब्रांडिंग व मार्केटिंग के खर्चों के लिए करेगी। इस इश्यू के लिए एक्सिस कैपिटल और गोल्डमैन सैक्स जैसी एंटिटीज ‘बुक-रनिंग लीड मैनेजर’ हैं। साल 2016 में शुरू हुई कल्ट फिट भारत में जिम, ग्रुप वर्कआउट, आउटडोर फॉर्मेट, एट-होम वर्कआउट और फिटनेस प्रोडक्ट्स जैसे- कपड़े, जूते और जिम के सामान बेचने वाला एक बहुत बड़ा और जाना-माना प्लेटफॉर्म बन चुका है।

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इन कंपनियों के IPO को भी मंजूरी

कल्ट फिट के अलावा SEBI ने ईश्वरी ग्लोबल मेटल इंडस्ट्रीज और सोहन लाल कमोडिटी मैनेजमेंट के IPO को भी मंजूरी दी है। ईश्वरी ग्लोबल मेटल इंडस्ट्रीज के IPO में 500 करोड़ रुपये के नए शेयर जारी होंगे और 1.32 करोड़ इक्विटी शेयरों का OFS रहेगा। IPO का साइज 1,100 करोड़ रुपये से 1,300 करोड़ रुपये के बीच रह सकता है। सोहन लाल कमोडिटी मैनेजमेंट ने मार्च में कॉन्फिडेंशियल रूट से SEBI के पास IPO ड्राफ्ट जमा किया था। साल 2026 में अब तक 97 मेनबोर्ड कंपनियां अपने IPO के जरिए 1.1 लाख करोड़ रुपये से अधिक जुटा चुकी हैं।

बाजार का टेक्सचर अब पूरी तरह बदला, जब तक निफ्टी 10 और 20 DEMA के ऊपर है “गिरावट में खरीदारी” की रणनीति करेगी काम

Trading Plan : कल की तूफानी तेजी के बाद मार्केट में आज भी मोमेंटम देखने को मिल रहा है। निफ्टी 23100 के ऊपर कारोबार कर रहा है। स्मॉलकैप स्पेस में भी एक्शन वापस लौटा है। लेकिन बैंक निफ्टी और मिडकैप का अंडरपरफॉमेंस देखने को मिल रहा है। बाजार को IT, मेटल और ऑटो का सपोर्ट है। लेकिन FMCG और एनर्जी में सुस्ती है। मार्केट रेगुलेटर सेबी ने क्लोजिंग ऑक्शन सेशन में बड़े बदलाव किए हैं। एक्सपायरी के दिन CAS के बजाए पुराने VWAP सिस्टम से सेटलमेंट होगा। CAS की टाइमिंग भी बदली गई है। ये फैसले 7 दिसंबर से लागू होंगे। हालांकि कैपिटल मार्केट थीम में CAS पर बड़े बदलाव के बाद सेल ऑन न्यूज का रुझान देखने को मिल रहा है।

बाजार में तेजी की कमान IT के हाथ में नजर आ रही है। 4 दिनों में IT इंडेक्स करीब 10 फीसदी चला है। टेक महिंद्रा और विप्रो की जोरदार जुगलबंदी देखने को मिल रही है। अच्छे नतीजों के बाद दोनों शेयर 7 फीसदी तक भागे हैं। इधर दिग्गज इंफोसिस और TCS में भी अच्छी खरीदारी आई है। वहीं बड़े गैप-डाउन के बाद परिस्टेंट में रिकवरी की कोशिश हो रही है।

त्योहार और छुट्टियों के दौरान एयरफेयर बढ़ाने के मामले में जल्द नए नियम जारी किए जा सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने कहा है कि अगले दो हफ्ते के अंदर नए रूल्स जारी किए जाएं। इस खबर के बाद इंडिगो का शेयर दबाव के साथ ट्रेड कर रहा है।

जानें अब कैसी रह सकती है बाजार की चाल

मार्केट ट्रेंड पर बात करते हुए सीएनबीसी-आवाज़ के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल ने कहा कि निफ्टी ट्रेडर्स के लिए एक और शानदार दिन देखने को मिला है। निफ्टी बिल्कुल पहले सपोर्ट लेवल से घूमा है। गिरावट में खरीदारी की रणनीति कारगर रही। एक बार फिर निफ्टी IT ने कमान संभाली है। मल्टी डे निफ्टी IT की हमारी कॉल सटीक पड़ी है। बैंक निफ्टी और मिडकैप आज थोड़े ढीले दिख रहे हैं। हालांकि स्मॉल कैप में एक्शन लौटा है। विप्रो और टेक महिंद्रा आज के हीरो बने हैं। दोनों सुबह आज के दांव में टॉप पिक्स थे। इसके अलावा टाटा एलेक्सी और KPIT TECH पर भी पैसा बना है। कैपिटल मार्केट शेयरों में मुनाफावसूली दिखी है। इंटरग्लोब में गिरावट है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि त्योहारों में फेयर रेगुलेशन का प्रस्ताव है।

बाजार:अब क्या?

अनुज सिंघल की राय है कि बाजार का टेक्सचर अब पूरी तरह बदल चुका है। जब तक निफ्टी 10 और 20 DEMA के ऊपर है “गिरावट में खरीदारी” की रणनीति काम करेगी। अगर ये लेवल टूटते हैं तो शॉर्ट के बारे में सोचें। IT में लॉन्ग रहें और गिरावट पर खरीदारी करें। अर्निंग सीजन की शुरुआत तो बढ़िया हुई है। अगर ऐसे ही नंबर आते रहे तो बाजार के लिए राहत की बात होगी। बस रिस्क है कच्चे तेल और FIIs की बिकवाली का।

निफ्टी-बैंक निफ्टी पर रणनीति

निफ्टी के लिए 23,050-23,100 पर सपोर्ट और 23,200-23,250 पर रेजिस्टेंस है। वहीं, बैंक निफ्टी के लिए 55,500-55,700 पर सपोर्ट और 56,000-56,200 पर रेजिस्टेंस है।

 

 

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SEBI के नए CAS नियम! शेयरों की क्लोजिंग प्राइस और एक्सपायरी डे ट्रेडिंग में क्या बदलेगा? जानिए पूरी डिटेल

SEBI New CAS Rules: मार्केट रेगुलेटर भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने गुरुवार को क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) का अंतिम फ्रेमवर्क जारी कर दिया। इसमें कैश मार्केट में CAS के समय और काम करने के तरीके में बदलाव किए गए हैं। हालांकि, इंडेक्स और स्टॉक डेरिवेटिव्स के एक्सपायरी वाले दिन सेटलमेंट प्राइस तय करने के लिए 30 मिनट के VWAP तरीके को बरकरार रखा गया है।

7 दिसंबर से लागू होंगे नए नियम

नए फ्रेमवर्क के तहत सभी कारोबारी दिनों में CAS दोपहर 3:30 बजे से 3:40 बजे तक चलेगा। ज्यादातर बदलाव 7 दिसंबर 2026 से लागू होंगे। हालांकि, लगातार ट्रेडिंग सेशन के बचे हुए लिमिट और आइसबर्ग ऑर्डर को CAS में ले जाने से जुड़े नियम 8 फरवरी 2027 से लागू होंगे।

कैसे चलेगा Closing Auction Session?

CAS की शुरुआत दोपहर 3:30 बजे से 3:31 बजे तक होगी। इस एक मिनट में रेफरेंस प्राइस की गणना और सेशन में बदलाव की प्रक्रिया पूरी होगी।

इसके बाद 3:31 बजे से 3:36 बजे तक निवेशक लिमिट और मार्केट, दोनों तरह के ऑर्डर दे सकेंगे। 3:36 बजे के बाद केवल लिमिट ऑर्डर की अनुमति होगी। इस दौरान मार्केट ऑर्डर में बदलाव या उन्हें रद्द नहीं किया जा सकेगा।

सेशन 3:38 बजे से 3:40 बजे के बीच किसी भी समय रैंडम तरीके से बंद होगा। इसके बाद ऑर्डर मैच किए जाएंगे।

क्लोजिंग प्राइस कैसे तय होगा?

CAS का रेफरेंस प्राइस लगातार ट्रेडिंग सेशन के आखिरी 15 मिनट के कारोबार के VWAP के आधार पर तय होगा। VWAP यानी वॉल्यूम वेटेड एवरेज प्राइस। इसमें शेयर की कीमत के साथ कारोबार की मात्रा को भी ध्यान में रखा जाता है।

अगर इन 15 मिनट में कोई ट्रेड नहीं होता, तो उस दिन का आखिरी ट्रेडेड प्राइस इस्तेमाल किया जाएगा। वहीं, अगर पूरे दिन शेयर में कारोबार नहीं हुआ, तो पिछले कारोबारी दिन का क्लोजिंग प्राइस लागू होगा। जरूरत पड़ने पर इसमें कॉरपोरेट एक्शन के हिसाब से बदलाव भी किया जाएगा।

डेरिवेटिव्स में ट्रेडिंग का समय

सामान्य कारोबारी दिनों में इंडेक्स डेरिवेटिव्स में ट्रेडिंग दोपहर 3:45 बजे तक जारी रहेगी। लेकिन एक्सपायरी वाले दिन इंडेक्स डेरिवेटिव्स के कॉन्ट्रैक्ट में ट्रेडिंग 3:30 बजे बंद हो जाएगी।

स्टॉक डेरिवेटिव्स में ट्रेडिंग एक्सपायरी वाले दिन भी दोपहर 3:45 बजे तक जारी रहेगी। वहीं, कैश मार्केट का पोस्ट-क्लोज सेशन 3:50 बजे से 4 बजे तक चलेगा। इस दौरान ट्रेड क्लोजिंग प्राइस पर होंगे।

एक्सपायरी सेटलमेंट के लिए 30 मिनट का VWAP

इंडेक्स डेरिवेटिव्स के एक्सपायरी सेटलमेंट के लिए संबंधित इंडेक्स की वैल्यू कैश मार्केट के लगातार ट्रेडिंग सेशन के आखिरी 30 मिनट में उसके घटक शेयरों के VWAP के आधार पर निकाली जाएगी।

स्टॉक डेरिवेटिव्स के मामले में संबंधित शेयर का VWAP इसी 30 मिनट की अवधि के दौरान सभी एक्सचेंजों पर हुए कारोबार के आधार पर तय होगा। एक्सचेंज इन संकेतक वैल्यू को रियल टाइम में जारी करेंगे।

लिमिट और आइसबर्ग ऑर्डर के नियम

लगातार ट्रेडिंग सेशन के बाद बचे हुए पात्र लिमिट ऑर्डर आम तौर पर CAS में आगे बढ़ा दिए जाएंगे। हालांकि, स्टॉप-लॉस ऑर्डर और लागू प्राइस बैंड से बाहर के ऑर्डर इसमें शामिल नहीं होंगे।

आइसबर्ग ऑर्डर को भी कुछ शर्तों के साथ CAS में ले जाया जाएगा। ऐसे ऑर्डर आम तौर पर पूरी मात्रा दिखाने वाले लिमिट ऑर्डर में बदल जाएंगे। हालांकि, निवेशक ऑर्डर देते समय इस प्रक्रिया से बाहर रहने का विकल्प चुन सकेंगे।

पहले से आगे बढ़ाए गए पात्र लिमिट ऑर्डर को CAS में नए लिमिट ऑर्डर के मुकाबले प्राथमिकता मिलेगी। बदले गए आइसबर्ग ऑर्डर की प्राथमिकता पहले से आगे बढ़ाए गए दूसरे लिमिट ऑर्डर से नीचे रहेगी।

CAS के दौरान नए आइसबर्ग और स्टॉप-लॉस ऑर्डर नहीं दिए जा सकेंगे। आम तौर पर ऑर्डर पर लागू मार्जिन नियम भी लागू होंगे। हालांकि, लगातार ट्रेडिंग सेशन से आगे बढ़ाए गए पात्र ऑर्डर को छूट मिलेगी। CAS के दौरान ऐसे ऑर्डर में बदलाव करने पर मार्जिन की शर्त लागू होगी।

स्टॉक फ्यूचर्स के प्राइस बैंड में भी बदलाव

दोपहर 3:30 बजे से 3:45 बजे तक स्टॉक फ्यूचर्स के प्राइस बैंड CAS के प्राइस बैंड के मुताबिक रहेंगे। इस अवधि में डायनेमिक प्राइस बैंड में बदलाव नहीं किया जाएगा।

सेबी ने एक्सचेंजों और क्लियरिंग कॉरपोरेशन को निर्देश दिया है कि वे इस सर्कुलर के सात दिनों के भीतर रेगुलेटर से सलाह लेकर अपनी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) में जरूरी बदलाव करें।

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Bond Investment: PB Money पर खरीद सकेंगे बॉन्ड्स, मिल गया SEBI से लाइसेंस

पीबी मनी (PB Money) को मार्केट रेगुलेटर सेबी से ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफॉर्म प्रोवाइडर (OBPP) के रूप में काम करने का लाइसेंस मिल गया है। यह पैसाबाजार (Paisabazaar) के साथ रणनीतिक साझेदारी वाला एक निवेश प्लेटफॉर्म है। अब इसे ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफॉर्म का लाइसेंस मिला है तो कंपनी अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए निवेशकों को बॉन्ड में निवेश करने की सुविधा दे सकेगी। बॉन्ड्स फिक्स्ड-इनकम इंस्ट्रूमेंट्स होते हैं, जिसमें उनके टर्म्स के आधार पर ब्याज मिलता है। हालांकि इसमें हर मामले में रिटर्न की गारंटी नहीं होती है बल्कि कुछ रिस्क भी होते हैं। इसमें निवेशकों को बॉन्ड इश्यू करने वाले यानी इश्यूअर के डिफॉल्ट होने, मार्केट में ब्याज दरों में बदलाव और लिक्विडिटी से जुड़ी चिंताओं जैसे रिस्क हैं।

PB Money को लाइसेंस का क्या है मतलब?

कंपनी ने 14 अक्टूबर को जो बयान जारी किया है, उसके मुताबिक सेबी से लाइसेंस मिलने के बाद पीबी मनी बॉन्ड इंवेस्टमेंट के पूरे प्रोसेस को ऑपरेट कर सकेगी। इससे कंपनी निवेशकों का रजिस्ट्रेशनस केवाईसी वेरिफिकेशन, बॉन्ड डिस्कवरी, ऑर्डर प्लेसमेंट, पेमेंट कोऑर्डिनेशन, और पोस्ट-इंवेस्टमेंट सर्विसिंग ऑफर कर सकेगी। साथ ही निवेशक प्लेटफॉर्म पर यील्ड यानी रिटर्न, क्रेडिट रेटिंग और इंवेस्टमेंट अमाउंट जैसे मानकों के आधार पर बॉन्ड तलाश सकेंगे। इससे उन्हें उपलब्ध विकल्पों की तुलना करने में मदद मिलेगी।

कब से शुरू कर सकेंगे बॉन्ड्स में निवेश

घरेलू स्टॉक मार्केट में लिस्टेड पीबी फिनटेक (PB Fintech) की पैसाबाजार के निवेश प्लेटफॉर्म पीबी मनी को बॉन्ड प्लेटफॉर्म के तौर पर काम करने का लाइसेंस मिला है। पीबी मनी के डायरेक्टर और पैसाबाजार के सीईओ संतोष अग्रवाल का कहना है कि इस लाइसेंस से बॉन्ड्स में निवेश आसान होगा और खुदरा निवेशकों की फिक्स्ड-इनकम प्रोडक्ट्स तक पहुंच बढ़ेगी। कंपनी को यह लाइसेंस ऐसे समय में मिला है जब पीबी मनी डिजिटल माध्यमों से अपने निवेश विकल्पों का विस्तार करने की योजना बना रही है। हालांकि कंपनी ने यह नहीं बताया है कि इस लाइसेंस के तहत प्लेटफॉर्म पर निवेश की सुविधा कब से शुरू होगी, या शुरुआत में कौन-से बॉन्ड उपलब्ध होंगे।

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SME IPO पर सख्ती की तैयारी! SEBI का मुनाफे से लेकर ऑफर फॉर सेल तक के नियम बदलने का प्रस्ताव

SME IPO लाने वाली कंपनियों के लिए नियम सख्त हो सकते हैं। मार्केट रेगुलेटर SEBI ने इसके लिए कई बदलावों का प्रस्ताव दिया है। सबसे बड़ा बदलाव मुनाफे की शर्त को लेकर है। प्रस्ताव के मुताबिक, कंपनियों को पिछले तीन वित्त वर्षों में औसतन 3 करोड़ रुपये का सालाना ऑपरेटिंग प्रॉफिट दिखाना होगा।

SEBI ने 14 अक्टूबर 2026 को इस बारे में कंसल्टेशन पेपर जारी किया है। इसमें SME IPO के नियमों में बदलाव की बात कही गई है। आम लोगों और बाजार से जुड़े पक्षों से 4 नवंबर तक सुझाव मांगे गए हैं। अभी ये प्रस्ताव हैं, लागू नियम नहीं।

SME IPO के लिए मुनाफे की नई शर्त

अभी कंपनी को पिछले तीन वित्त वर्षों में से कम से कम दो साल में 1 करोड़ रुपये का ऑपरेटिंग प्रॉफिट दिखाना होता है। SEBI अब इसकी जगह नई शर्त लाना चाहता है। इसके तहत पिछले तीन साल का औसत सालाना ऑपरेटिंग प्रॉफिट कम से कम 3 करोड़ रुपये होना चाहिए।

जो कंपनियां यह शर्त पूरी नहीं कर पाएंगी, उनके लिए भी IPO लाने का रास्ता खुला रह सकता है। हालांकि, उन्हें दूसरी शर्तें पूरी करनी होंगी। ऐसी कंपनियों को बुक बिल्डिंग प्रक्रिया अपनानी होगी। साथ ही, IPO के नेट इश्यू का कम से कम 75% हिस्सा बड़े संस्थागत निवेशकों यानी QIBs को देना होगा। अगर इतना आवंटन नहीं हो पाता है, तो निवेशकों की पूरी रकम लौटानी होगी।

मार्केट कैप से तय होगी लिस्टिंग की पात्रता

SEBI कंपनियों की पात्रता तय करने का तरीका भी बदलना चाहता है। अभी इसके लिए पेड-अप कैपिटल को आधार बनाया जाता है। नए प्रस्ताव में कंपनी के मार्केट कैप को आधार बनाने की बात है।

इसके मुताबिक, IPO के बाद 1,000 करोड़ रुपये तक के मार्केट कैप वाली कंपनियां सिर्फ SME प्लेटफॉर्म पर लिस्ट हो सकेंगी। 1,000 करोड़ से ज्यादा और 4,000 करोड़ रुपये तक के मार्केट कैप वाली कंपनियां भी तय शर्तों के साथ SME प्लेटफॉर्म चुन सकेंगी। इनके वित्तीय दस्तावेज Ind AS के नियमों के मुताबिक होने चाहिए।

अगर ऑफर डॉक्यूमेंट के तय चरण में कंपनी का मार्केट कैप 4,000 करोड़ रुपये से ज्यादा हो जाता है, तो उसे मेनबोर्ड के नियमों के तहत दोबारा दस्तावेज जमा करने होंगे।

IPO में आवेदन की रकम घटेगी

SEBI SME IPO में आवेदन की न्यूनतम रकम घटाने का प्रस्ताव भी लाया है। अभी न्यूनतम आवेदन की रकम 2 लाख रुपये से ज्यादा है। इसे घटाकर 1 लाख रुपये करने की तैयारी है। हालांकि, निवेशकों को कम से कम चार लॉट के लिए आवेदन करना होगा। हर लॉट की कीमत कम से कम 25,000 रुपये होगी।

इसके अलावा, IPO में कम से कम 200 निवेशकों को शेयर देने की शर्त बढ़ाकर 500 करने का प्रस्ताव है। रिटेल निवेशकों को शेयर देने के तरीके में भी बदलाव हो सकता है। नए प्रस्ताव के मुताबिक, शेयरों का आवंटन न्यूनतम लॉट के गुणकों से बंधा नहीं रहेगा। यह उपलब्ध शेयरों पर निर्भर करेगा।

कंपनियों को IPO से जुटाई गई रकम में से जनरल कॉरपोरेट कामों पर खर्च करने की 10 करोड़ रुपये की सीमा से भी राहत मिल सकती है। हालांकि, कुल जुटाई गई रकम के 15% तक खर्च करने की मौजूदा सीमा बनी रहेगी।

शेयर बेचने और लॉक-इन के नियम बदलेंगे

SEBI ने ऑफर फॉर सेल (OFS) के लिए अलग नियम बनाने का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत कुछ छूटों को छोड़कर बिक्री के लिए रखे जाने वाले शेयर कम से कम एक साल से शेयरधारक के पास होने चाहिए।

अभी OFS में कुल इश्यू साइज का अधिकतम 20% हिस्सा बेचा जा सकता है। शेयरधारक अपनी पहले से मौजूद हिस्सेदारी का अधिकतम 50% हिस्सा भी बेच सकते हैं। SEBI ने बड़े संस्थागत निवेशकों यानी QIB शेयरधारकों को इन सीमाओं से छूट देने का प्रस्ताव रखा है। हालांकि, मुनाफे की शर्त पूरी नहीं करने वाली कंपनियों के लिए यह छूट नहीं होगी।

SEBI ने शेयरों के लॉक-इन नियम बदलने का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत, प्रमोटरों के न्यूनतम जरूरी शेयर IPO में आवंटन की तारीख से तीन साल तक लॉक रहेंगे। अतिरिक्त प्रमोटर शेयरों पर एक साल की रोक होगी। वहीं, पुराने गैर-प्रमोटर निवेशकों के शेयरों का लॉक-इन एक साल से घटाकर छह महीने करने का प्रस्ताव है। प्रमोटर ग्रुप की कुछ हिस्सेदारी पर भी एक साल का लॉक-इन लागू हो सकता है।

SME IPO से अब तक जुटाए गए 40,222 करोड़ रुपये

SEBI के मुताबिक, SME प्लेटफॉर्म शुरू होने के बाद से अब तक 1,496 कंपनियां इस पर लिस्ट हो चुकी हैं। इनमें वे कंपनियां भी शामिल हैं, जो बाद में मेनबोर्ड पर चली गईं। कुल 365 कंपनियां मेनबोर्ड में माइग्रेट कर चुकी हैं।

SME IPO के जरिए कंपनियों ने अब तक 40,222 करोड़ रुपये जुटाए हैं। 31 जुलाई 2026 तक SME प्लेटफॉर्म की कंपनियों का कुल मार्केट कैप 4,70,984 करोड़ रुपये था। इस आंकड़े में मेनबोर्ड पर जा चुकी कंपनियां भी शामिल हैं।

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Zetwerk Manufacturing IPO 15 अक्टूबर से, प्राइस बैंड ₹143-₹151 प्रति शेयर तय

जेटवर्क मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस लिमिटेड का IPO 15 अक्टूबर को खुलने जा रहा है। इसके लिए प्राइस बैंड ₹143-₹151 प्रति शेयर फिक्स किया गया है। लॉट साइज 99 शेयर है। कंपनी का इरादा ₹5,012.33 करोड़ जुटाने का है। IPO में ₹2,830 करोड़ के नए शेयर जारी होंगे, साथ ही ₹2,182.33 करोड़ के शेयरों का ऑफर फॉर सेल (OFS) रहेगा। इश्यू 19 अक्टूबर को बंद होगा, जिसके बाद अलॉटमेंट 21 अक्टूबर को फाइनल हो सकता है। 20 अक्टूबर को शेयर बाजार में दशहरा की छुट्टी है। कंपनी के शेयर NSE और BSE पर 23 अक्टूबर को लिस्ट हो सकते हैं।

जेटवर्क पहले एक डिजिटल मार्केटप्लेस थी और अब मैन्युफैक्चरर्स को ग्राहकों से जोड़कर एक एंड-टू-एंड इंडस्ट्रियल मैन्युफैक्चरिंग प्लेटफॉर्म बन गई है। यह कई सेक्टर्स में कस्टम-बिल्ट कंपोनेंट्स के लिए इंजीनियरिंग, उत्पादन और डिलीवरी को व्यवस्थित करती है। ग्राहक डिजाइन प्रदान करते हैं, जेटवर्क सप्लायर का चयन, गुणवत्ता नियंत्रण, टाइमलाइंस और लॉजिस्टिक्स को संभालती है। कंपनी लैपटॉप, हियरेबल्स, वियरेबल्स, IT हार्डवेयर बनाती है। जेटवर्क में खोसला वेंचर्स, एक्सेल, लाइटस्पीड, पीक XV पार्टनर्स, ग्रीनओक्स, एवेनिर जैसे दिग्गजों का पैसा लगा हुआ है।

जेटवर्क में फुली डाइल्यूटेड बेसिस पर पीक XV पार्टनर्स इनवेस्टमेंट्स V सबसे बड़ी इंडीविजुअल शेयरहोल्डर है, जिसके पास 9.12 प्रतिशत हिस्सेदारी है। ग्रीनओक्स कैपिटल अपॉर्चुनिटीज फंड II के पास 8.61 प्रतिशत, रामकृष्णन के पास 8.36 प्रतिशत, एक्सेल इंडिया V के पास 7.74 प्रतिशत और आचार्य के पास 7.53 प्रतिशत हिस्सा है।

Zetwerk IPO को जुलाई में सेबी से मिली थी मंजूरी

जेटवर्क ने अपने IPO के लिए इस साल मार्च में कॉन्फिडेंशियल तरीके से ड्राफ्ट पेपर जमा किए थे। कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सेबी से जुलाई में मंजूरी मिलने के बाद अपडेटेड ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस 13 अगस्त 2026 को फाइल किया। OFS में प्रमोटर-ग्रुप एंटिटी Creovate Innovation, को-फाउंडर अमृत आचार्य, श्रीनाथ रामकृष्णन के साथ-साथ निवेशक पीक XV पार्टनर्स, एक्सेल, लाइटस्पीड वेंचर, के कैपिटल आदि भी शेयरों को बिक्री के लिए रखेंगे।

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IPO के लिए कोटक महिंद्रा कैपिटल कंपनी, मॉर्गन स्टेनली इंडिया, गोल्डमैन सैक्स (इंडिया) सिक्योरिटीज, एवेंडस कैपिटल, जेएम फाइनेंशियल, एचएसबीसी सिक्योरिटीज एंड कैपिटल मार्केट्स (इंडिया), पैंटोमैथ कैपिटल एडवाइजर्स, बुक रनिंग लीड मैनेजर हैं। रजिस्ट्रार Kfin Technologies Ltd. है। इश्यू में 75 प्रतिशत हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए, 10 प्रतिशत हिस्सा रिटेल इनवेस्टर्स के लिए और 15 प्रतिशत हिस्सा नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व है।

IPO के पैसे कैसे होंगे इस्तेमाल

Zetwerk अपने IPO में नए शेयरों को जारी कर हासिल होने वाले पैसों का इस्तेमाल अपना और सब्सिडियरीज का कर्ज चुकाने, पहले से न पता अधिग्रहणों, अन्य रणनीतिक निवेशों और सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों के लिए करेगी। अप्रैल-जून 2026 तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू ₹4,195.70 करोड़ और शुद्ध घाटा ₹732.98 करोड़ रहा। इस बीच कंपनी पर ₹1,942.19 करोड़ की उधारी थी। वित्त वर्ष 2025-26 में जेटवर्क का रेवेन्यू 40 प्रतिशत बढ़कर ₹16,100.63 करोड़ रहा। घाटा 1,606.17 करोड़ दर्ज किया गया।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Jio Platforms IPO: ₹1065-₹1119 रह सकता है प्राइस बैंड, 21 अक्टूबर से ओपनिंग; 10 पॉइंट में जानें अहम डिटेल

रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़ी जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड के IPO का बेसब्री से इंतजार हो रहा है। और हो भी क्यों न, लगभग दो दशकों यानि कि 20 साल बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज ग्रुप की किसी कंपनी का IPO आ रहा है। यह देश का अब तक का सबसे बड़ा पब्लिक इश्यू साबित हो सकता है। Jio Platforms IPO पर ताजा अपडेट इसके प्राइस बैंड को लेकर है। यह कितना रहने वाला है, इस बारे में ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में जानकारी दी गई है। आइए जानते हैं जियो IPO को लेकर अब तक सामने आईं खास बातें…

संभावित प्राइस बैंड और साइज

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में मामले की जानकारी रखने वालों के हवाले से कहा गया है कि Jio Platforms Ltd. के प्रस्तावित IPO के लिए प्राइस बैंड 1065-1119 रुपये प्रति शेयर रहने वाला है। ब्लूमबर्ग की कैलकुलेशन के अनुसार, प्राइस बैंड के ऊपरी स्तर पर Jio के IPO से लगभग 30200 करोड़ रुपये जुटाए जाएंगे। इससे यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा IPO बन सकता है।

वैल्यूएशन

रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी 10.3 लाख करोड़ रुपये तक की मार्केट वैल्यू का लक्ष्य रख रही है। लेकिन बातचीत अभी जारी है और प्राइस बैंड, वैल्यूएशन और टाइमिंग सहित अन्य डिटेल अभी भी बदल सकती हैं। IPO का ड्राफ्ट कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सेबी के पास इस साल जून में जमा किया गया था। मंजूरी अगस्त में मिली।

IPO कब खुलेगा और कब लिस्ट होगा

यह पब्लिक इश्यू 21 अक्टूबर को खुल सकता है। एंकर निवेशक 19 अक्टूबर को बोली लगा सकते हैं। 20 अक्टूबर को शेयर बाजार में दशहरा की छुट्टी है। कंपनी के शेयर 28 अक्टूबर को शेयर बाजारों में लिस्ट हो सकते हैं। जियो प्लेटफॉर्म्स के कारोबार में टेलिकॉम, डिजिटल सर्विसेज, उद्यम समाधान और उभरते टेक्नोलॉजी इनीशिएटिव शामिल हैं। इसकी टेलिकॉम यूनिट रिलायंस जियो इंफोकॉम लिमिटेड देश में सबसे बड़ी टेलिकॉम कंपनियों में से एक है।

Jio IPO में कितने नए शेयर

19 जून 2026 को रिलायंस इंडस्ट्रीज की 49वीं सालाना आम बैठक के दौरान चेयरमैन मुकेश अंबानी ने घोषणा की कि Jio Platforms को अपने प्रस्तावित IPO के लिए बोर्ड की मंजूरी मिल गई है। रिलायंस इंडस्ट्रीज के मुताबिक, इश्यू में 10 रुपये फेस वैल्यू वाले 27 करोड़ तक नए शेयर जारी करने की योजना है।

बुक रनिंग लीड मैनेजर

ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) में Jio Platforms ने घोषणा की कि उसने IPO के लिए 19 इनवेस्टमेंट बैंकों को बुक रनिंग लीड मैनेजर (BRLM) के तौर पर नियुक्त किया है। इस ऑफर के लिए BRLM हैं- कोटक महिंद्रा कैपिटल कंपनी, मॉर्गन स्टेनली इंडिया कंपनी प्राइवेट लिमिटेड, BofA सिक्योरिटीज इंडिया, एक्सिस कैपिटल, BNP पारिबा, सिटीग्रुप ग्लोबल मार्केट्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, CLSA इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, DAM कैपिटल एडवाइजर्स, गोल्डमैन सैक्स (इंडिया) सिक्योरिटीज प्राइवेट लिमिटेड, HDFC बैंक, HSBC सिक्योरिटीज एंड कैपिटल मार्केट्स (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड, ICICI सिक्योरिटीज, IIFL कैपिटल सर्विसेज (पहले IIFL सिक्योरिटीज), जेफरीज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, JM फाइनेंशियल, JP मॉर्गन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, SBI कैपिटल मार्केट्स, UBS सिक्योरिटीज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और 360 ONE WAM।

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कैसे बन सकता है देश का सबसे बड़ा IPO

भारत में अभी तक सबसे बड़ा पब्लिक इश्यू Hyundai Motor India का रहा है। यह अक्टूबर 2024 में आया था और इसका साइज 27,858.75 करोड़ रुपये या 294.97 करोड़ डॉलर रहा था। अब जियो का IPO 30000 करोड़ रुपये से ज्यादा का रहने वाला है।

रिजर्व हिस्से पर क्या अपडेट

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, पता चला है कि IPO में जियो प्लेटफॉर्म्स, रिलायंस इंडस्ट्रीज और जियो प्लेटफॉर्म्स की सब्सिडियरीज के स्थायी कर्मचारियों के लिए शेयर रिजर्व होंगे। इसके बाद नेट इश्यू का 50 प्रतिशत हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIBs) के लिए, 15 प्रतिशत हिस्सा नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NIIs) के लिए और 35 प्रतिशत हिस्सा रिटेल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व रहेगा। QIB के हिस्से में से 60 प्रतिशत तक हिस्सा एंकर निवेशकों को अलॉट किया जा सकता है। इसमें से कुछ हिस्सा विशेष रूप से म्यूचुअल फंड्स, बीमा कंपनियों और पेंशन फंड्स के लिए रिजर्व होगा।

IPO के पैसे कैसे होंगे इस्तेमाल

जियो प्लेटफॉर्म्स के मुताबिक, IPO में नए शेयरों को जारी कर हासिल होने वाले पैसों का इस्तेमाल मुख्य रूप से कंपनी की टेलिकॉम यूनिट रिलायंस जियो इंफोकॉम के कर्ज को कुछ हद तक या पूरी तरह चुकाने के लिए और सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए किया जाएगा।

अंतरराष्ट्रीय रोड शो कंप्लीट

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, सूत्रों का कहना है कि जियो प्लेटफॉर्म्स ने अमेरिका, ब्रिटेन, दुबई, हांगकांग और सिंगापुर में अपने अंतरराष्ट्रीय रोडशो पूरे कर लिए हैं। अब वह 12 अक्टूबर से शुरू होने वाले सप्ताह में सेबी के पास IPO का फाइनल ड्राफ्ट जमा कर सकती है। कंपनी भारत में भी IPO रोडशो आयोजित कर सकती है। IPO के मामले में रोड शो का मतलब है- संबंधित कंपनी के मैनेजमेंट की ओर से इनवेस्टर्स के साथ मीटिंग और रिप्रेजेंटेशंस। मीटिंग्स में IPO ला रही कंपनी के अधिकारी संभावित निवेशकों से बातचीत करते हैं और उन्हें समझाते हैं कि उनके IPO में निवेश करना क्यों उचित है।

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जियो प्लेटफॉर्म्स की वित्तीय सेहत

वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का रेवेन्यू 14.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 1.47 लाख करोड़ रुपये और शुद्ध मुनाफा 15.1 प्रतिशत बढ़ोतरी के साथ 30,000 करोड़ रुपये रहा। EBITDA 18.8 प्रतिशत बढ़कर 76,255 करोड़ रुपये हो गया। वित्त वर्ष 2025-26 में Jio के ग्राहकों की संख्या 52.44 करोड़ रही। जियो 5G के सब्सक्राइबर्स की संख्या 26.8 करोड़ है।

Jio Platforms में किसके पास कितनी हिस्सेदारी

रिलायंस इंडस्ट्रीज के पास जियो प्लेटफॉर्म्स में 66.43 प्रतिशत हिस्सेदारी है। मेटा के पास 9.99 प्रतिशत हिस्सेदारी है। वहीं गूगल की 7.73 प्रतिशत, सऊदी अरेबिया वेल्थ फंड्स की 2.31 प्रतिशत, विस्टा इक्विटी पार्टनर्स की 2.31 प्रतिशत, सिल्वर लेक की 1.88 प्रतिशत, मुबादला की 1.85 प्रतिशत, जीए सिंगापुर की 1.34 प्रतिशत, अबुधाबी इनवेस्टमेंट अथॉरिटी की 1.16 प्रतिशत और टीपीजी कैपिटल की 0.93 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

Disclaimer:मनीकंट्रोल, नेटवर्क18 ग्रुप का हिस्सा है। नेटवर्क18 का नियंत्रण इंडिपेंडेट मीडिया ट्रस्ट करता है, जिसकी एकमात्र लाभार्थी रिलायंस इंडस्ट्रीज है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

कॉरपोरेट बॉन्ड इंडेक्स का फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट! NSE को SEBI की हरी झंडी, अब इस सिग्नल का है इंतजार

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (NSE) को कॉर्पोरेट बॉन्ड इंडेक्स पर फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट शुरू करने के लिए मार्केट रेगुलेटर SEBI से नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) मिल गया है। हालांकि अभी इस प्रोडक्ट को लॉन्च करने के लिए RBI से अहम मंजूरी मिलनी बाकी है। यह ऐसे समय में हुआ है, जब एनएसई के शेयर अभी हाल ही में बीएसई पर लिस्ट हुए हैं। ₹22563 करोड़ के आईपीओ को 5 गुना से अधिक सब्सक्रिप्शन मिलने के बाद इसके ₹1785 के शेयर 24 सितंबर को 1% से कम प्रीमियम में ₹1800 पर लिस्ट हुए थे।

क्या बदलेगा कॉर्पोरेट बॉन्ड इंडेक्स के फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट्स से

एनएसई के प्रस्तावित प्रोडक्ट से मार्केट को कॉर्पोरेट बॉन्ड मार्केट के रिस्क को मैनेज करने के लिए एक एक्सचेंज-ट्रेडेड इंस्ट्रूमेंट मिलेगा और इससे देश के कॉर्पोरेट बॉन्ड डेरिवेटिव्स मार्केट के डेवलपमेंट को सपोर्ट मिलेगा। कॉर्पोरेट बॉन्ड इंडेक्स फ्यूचर्स से रिस्क मैनेजमेंट, पोर्टफोलियो हेजिंग और प्राइस डिस्कवरी के लिए एक और जरिया मिलेगा।

यह पहल देश के फिक्स्ड-इनकम मार्केट को मजबूत करने और मार्केट में हिस्सा लेने वालों के लिए उपलब्ध एक्सचेंज-ट्रेडेड रिस्क-मैनेजमेंट प्रोडक्ट्स की रेंज को बढ़ाने की एनएसई की कोशिशों का हिस्सा है। एनएसई के चीफ बिजनेस डेवलपमेंट ऑफिसर श्रीराम कृष्णन का कहना है कि सेबी से मिली एनओसी देश के फिक्स्ड-इनकम मार्केट के लिए एक अहम पड़ाव है। उनका कहना है कि बेहतर डेरिवेटिव इकोसिस्टम से कॉरपोरेट बॉन्ड मार्केट मजबूत होगा।

NSE के शेयरों की क्या है स्थिति

एनएसई के शेयर आईपीओ निवेशकों को ₹1785 के भाव पर जारी हुए थे। ₹1800 पर लिस्ट होने के बाद 24 सितंबर यानी लिस्टिंग के ही दिन यह ₹1878 की रिकॉर्ड ऊंचाई तक पहुंचा था। इस हाई से फिसलने के बाद एनएसई के शेयर आज 1 अक्टूबर 2026 को ₹1755 के भाव तक आ गए जोकि इसके शेयरों के लिए रिकॉर्ड निचला स्तर है। फिलहाल बीएसई पर यह 0.29% की गिरावट के साथ ₹1757.85 के भाव पर है।

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Anmol Industries IPO: बिस्किट कंपनी ने फिर बनाया लिस्ट होने का मन, ₹1800 करोड़ के इश्यू का ड्राफ्ट किया जमा

बिस्किट बनाने वाली कंपनी अनमोल इंडस्ट्रीज ने एक बार फिर IPO के लिए कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सेबी के पास ड्राफ्ट जमा किया है। इस बार कंपनी 1800 करोड़ रुपये जुटाना चाहती है। इससे पहले कंपनी ने साल 2018 में लिस्ट होने का प्लान बनाया था और ड्राफ्ट जमा किया था। उस वक्त IPO का साइज 750 करोड़ रुपये रखा था। कंपनी को सेबी से IPO के​ लिए मंजूरी भी मिल गई थी। लेकिन फिर कंपनी ने प्लान को आगे नहीं बढ़ाया।

नए ड्राफ्ट पेपर्स के मुताबिक, अनमोल इंडस्ट्रीज का IPO पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) होगा। कोई नया शेयर जारी नहीं होगा। लिहाजा कंपनी को कोई रकम नहीं मिलेगा। शेयर बिक्री से मिला पैसा शेयर बेचने वाले के पास जाएगा। OFS में बैजनाथ चौधरी एंड फैमिली ट्रस्ट शेयरों को बिक्री के लिए रखेगी। यह ट्रस्ट कंपनी में सबसे बड़ी इनवेस्टर है। इसके पास लगभग 84 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

एक्सपोर्ट भी करती है Anmol Industries

रॉयटर्स के मुताबिक, कोलकाता की अनमोल इंडस्ट्रीज की शुरुआत 1994 में हुई थी। इसके प्रोडक्ट्स में बिस्किट, कुकीज, केक, रस्क, वेफर, क्रीम रोल शामिल हैं। कंपनी 70 ब्रांड्स के जरिए बिक्री करती है। यह 31 देशों में एक्सपोर्ट भी करती है। कंपनी का दावा है कि यह देश का चौथा सबसे बड़ा बिस्किट ब्रांड है। वहीं केक के मामले में छठा सबसे बड़ा ब्रांड है। अनमोल के लिस्टेड कॉम्पिटीटर्स में ब्रिटानिया, ITC, मिसेज बेक्टर्स फूड स्पेशिएलिटीज जैसे नाम शामिल हैं।

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कंपनी की वित्तीय सेहत

वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान अनमोल इंडस्ट्रीज का शुद्ध मुनाफा 5 गुना बढ़कर 1.91 अरब रुपये हो गया। रेवेन्यू 28 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ लगभग 21 अरब रुपये रहा। कंपनी के IPO को इंटेंसिव फिस्कल सर्विसेज, ICICI सिक्योरिटीज और IIFL कैपिटल सर्विसेज मैनेज कर रहे हैं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

SEBI का ऑमेक्स और पांच अन्य के खिलाफ बड़ा एक्शन, सिक्योरिटीज मार्केट में नहीं कर सकेंगे ट्रांजेक्शन

सेबी ने ऑमेक्स और पांच अन्य के खिलाफ बड़ा एक्शन लिया है। ये सभी एक साल तक सिक्योरिटीज मार्केट में ट्रांजेक्शन नहीं कर सकेंगे। इन पर कुल 1.92 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। इन पर मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग के नियम के पालन के लिए आर्टफिशियल पब्लिक शेयरहोल्डिंग स्ट्रक्चर बनाने का आरोप है।

ऑमेक्स पर तीन महीनों के लिए रोक

Omaxe पर सिक्योरिटीज में ट्रांजेक्शन करने पर तीन महीने की रोक लगाई गई है। प्रमोटर्स रोहतास गोयल और जय भगवान गोयल, ग्रुप की कंपनियां ड्रीम होम डेवलेपर्स और गिल्ड बिल्डर्स पर सिक्योरिटीज मार्केट में किसी तरह के ट्रांजेक्शन पर एक साल के लिए रोक लगा दी गई है।

सेबी ने 24 सितंबर को पारित किया आदेश

ऑमेक्स के पूर्व ज्वाइंट मैनेजिंग डायरेक्टर सुनील गोयल को भी सिक्योरिटीज मार्केट में किसी तरह का ट्रांजेक्शन करने से एक साल के लिए रोक दिया गया है। सेबी ने यह आदेश 24 सितंबर को पारित किया। मार्केट रेगुलेटर ने कहा कि ऑमेक्स 25 फीसदी मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग (MPS) के तय नियम का इंडिपेंडेंट पब्लिक शेयरहोल्डर्स के जरिए पालन करने में नाकाम रही।

MPS नियम के पालन के लिए आर्टफिशियल स्ट्रक्चर बनाए

मार्केट रेगुलेटर ने कहा है कि कुछ एनटिटीज ने ऑमेक्स और ग्रुप कंपनियों के पैसे से कंपनी के शेयर हासिल किए, और इस तरह से एमपीएस के नियम के पालन के लिए आर्टफिशियल शेयरहोल्डिंग स्ट्र्क्चर बनाए। ऐसे एनटिटीज को बाद में पब्लिक शेयरहोल्डर्स के रूप में दिखाया गया। सेबी ने यह भी कहा है कि ऑमेक्स और ग्रुप कंपनियों के पैसे को कई एनटिटीज के जरिए रूट किया गया और इनका इस्तेमाल उन नामों से शेयर खरीदने के लिए किया गया, जिन्हें बाद में पब्लिक शेयरहोल्डर्स दिखाया गया।

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रेगुलेटर ने कुल 1.92 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया

मार्केट रेगुलेटर ने इन पर 1.92 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया है। ऑमेक्स, ड्रीम होम डेवलपर्स और गिल्ड बिल्डर्स पर 27-27 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। रोहतास गोयल, सुनील गोयल और जय भगवान गोयल पर 37-37 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इसे सेबी के बड़े एक्शन के रूप में देखा जा रहा है।