SEBI का ऑमेक्स और पांच अन्य के खिलाफ बड़ा एक्शन, सिक्योरिटीज मार्केट में नहीं कर सकेंगे ट्रांजेक्शन

सेबी ने ऑमेक्स और पांच अन्य के खिलाफ बड़ा एक्शन लिया है। ये सभी एक साल तक सिक्योरिटीज मार्केट में ट्रांजेक्शन नहीं कर सकेंगे। इन पर कुल 1.92 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। इन पर मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग के नियम के पालन के लिए आर्टफिशियल पब्लिक शेयरहोल्डिंग स्ट्रक्चर बनाने का आरोप है।

ऑमेक्स पर तीन महीनों के लिए रोक

Omaxe पर सिक्योरिटीज में ट्रांजेक्शन करने पर तीन महीने की रोक लगाई गई है। प्रमोटर्स रोहतास गोयल और जय भगवान गोयल, ग्रुप की कंपनियां ड्रीम होम डेवलेपर्स और गिल्ड बिल्डर्स पर सिक्योरिटीज मार्केट में किसी तरह के ट्रांजेक्शन पर एक साल के लिए रोक लगा दी गई है।

सेबी ने 24 सितंबर को पारित किया आदेश

ऑमेक्स के पूर्व ज्वाइंट मैनेजिंग डायरेक्टर सुनील गोयल को भी सिक्योरिटीज मार्केट में किसी तरह का ट्रांजेक्शन करने से एक साल के लिए रोक दिया गया है। सेबी ने यह आदेश 24 सितंबर को पारित किया। मार्केट रेगुलेटर ने कहा कि ऑमेक्स 25 फीसदी मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग (MPS) के तय नियम का इंडिपेंडेंट पब्लिक शेयरहोल्डर्स के जरिए पालन करने में नाकाम रही।

MPS नियम के पालन के लिए आर्टफिशियल स्ट्रक्चर बनाए

मार्केट रेगुलेटर ने कहा है कि कुछ एनटिटीज ने ऑमेक्स और ग्रुप कंपनियों के पैसे से कंपनी के शेयर हासिल किए, और इस तरह से एमपीएस के नियम के पालन के लिए आर्टफिशियल शेयरहोल्डिंग स्ट्र्क्चर बनाए। ऐसे एनटिटीज को बाद में पब्लिक शेयरहोल्डर्स के रूप में दिखाया गया। सेबी ने यह भी कहा है कि ऑमेक्स और ग्रुप कंपनियों के पैसे को कई एनटिटीज के जरिए रूट किया गया और इनका इस्तेमाल उन नामों से शेयर खरीदने के लिए किया गया, जिन्हें बाद में पब्लिक शेयरहोल्डर्स दिखाया गया।

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रेगुलेटर ने कुल 1.92 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया

मार्केट रेगुलेटर ने इन पर 1.92 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया है। ऑमेक्स, ड्रीम होम डेवलपर्स और गिल्ड बिल्डर्स पर 27-27 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। रोहतास गोयल, सुनील गोयल और जय भगवान गोयल पर 37-37 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इसे सेबी के बड़े एक्शन के रूप में देखा जा रहा है।

IPO News: SEBI की हरी झंडी, दो कंपनियों के आईपीओ के रास्ते का एक बड़ा पड़ाव पार

IPO News: बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने पारस हेल्थकेयर और एमके सन्स के आईपीओ प्रस्ताव को हरी झंडी दिखा दी है। सेबी की साइट पर मौजूद डिटेल्स के मुताबिक अब ये दोनों कंपनियों अपनी आईपीओ योजना पर आगे बढ़ सकती हैं। इन दोनों ने इस साल की शुरुआत में सेबी के पास आईपीओ का ड्राफ्ट फाइल किया था। अब इन्हें हरी झंडी मिल चुकी है लेकिन अभी तक आईपीओ खुलने की तारीख या प्राइस बैंड का ऐलान नहीं हुआ है। आईपीओ की सफलता के बाद इनके शेयरों की बीएसई और एनएसई पर एंट्री होगी।

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पारस हेल्थकेयर ने ₹1,800 करोड़ तक का आईपीओ लाने का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत कंपनी की योजना ₹500 करोड़ तक के नए इक्विटी शेयर जारी करने की है को ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत ₹1,300 करोड़ तक के शेयरों की बिक्री हो सकती है। ऑफर फॉर सेल का पैसा तो शेयर बेचने वाले शेयरहोल्डर्स को मिलेगा तो नए शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों का इस्तेमाल कंपनी कर्ज हल्का करने में करेगी। इसके अलावा कंपनी की योजना आईपीओ के पैसों को सब्सिडियरी PMHPL में भी निवेश की है ताकि इसका भी कर्ज हल्का हो सकते है। इसके अलावा आईपीओ के बाकी पैसों का इस्तेमाल आम कॉरपोरेट उद्देश्यों में होगा।

पारस हेल्थकेयर पारस हेल्थ ब्रांड के तहत काम करती है और टर्शियरी और क्वाटर्नरी हेल्थकेयर सर्विसेज देती है। 31 मार्च 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक यह उत्तर भारत, बिहार और झारखंड में कुल 2,211 बेड की क्षमता वाले आठ अस्पताल चला रही थी। इसके अस्पताल हरियाणा, बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, झारखंड और जम्मू-कश्मीर में हैं।

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एमके सन्स फाइन ज्वेल्स रिटेल-फोकस्ड ज्वैलरी कंपनी है। इसकी योजना आईपीओ के तहत 1.36 करोड़ नए इक्विटी शेयर जारी करने की है और ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत प्रमोटर शेयरहोल्डर रामचंद मुरलीधर रायमलानी अधिकतम 34 लाख शेयरों की बिक्री कर सकते हैं। ऑफर फॉर सेल का पैसा तो शेयर बेचने वाले प्रमोटर को मिलेगा तो नए शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों का इस्तेमाल कंपनी महाराष्ट्र में एक नया शोरूम खोलने, गुजरात में अपने मौजूदा शोरूम को बड़ा करने, कर्ज हल्का करने और आम कॉर्रपोरेट उद्देश्यों में करेगी। एमके सन्स फाइन ज्वेल्स अपने शोरूम के जरिए सोने, हीरे और क्यूबिक जिर्कोनिया के गहने बेचती है। अभी मुंबई और अहमदाबाद में इसके पांच शोरूम हैं।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

CAS में गड़बड़ी पर SEBI का तगड़ा एक्शन, जेपी मॉर्गन की इकाई मानसी शेयर पर लगी रोक, जानिए कैसे हुआ ये पूरा खेल

मार्केट रेगुलेटर सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने दो एंटिटीज़ को सिक्योरिटीज़ मार्केट से प्रतिबंधित कर दिया। इसके साथ ही इनके द्वारा गलत तरीके से कमाए गए 3.68 करोड़ रुपये जब्त करने के भी आदेश दिए हैं। यह कार्रवाई एक अंतरिम जांच के बाद की गई है जिसमें 13 अगस्त, 2026 को इंडेक्स की एक्सपायरी के दिन क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) के दौरान सेंसेक्स में हेरफेर के शुरुआती सबूत मिले थे।

सेबी ने 19 अगस्त को JP मॉर्गन की कंपनी कॉप्थॉल मॉरीशस इन्वेस्टमेंट लिमिटेड (Copthall Mauritius Investment Limited) से 2.96 करोड़ रुपये और मानसी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकिंग प्राइवेट लिमिटेड (Mansi Share and Stock Broking Private Limited) से 71.65 लाख रुपये ज़ब्त करने का आदेश दिया है।

SEBI के सर्विलांस सिस्टम ने 13 अगस्त को दोपहर 3:20 से 3:30 बजे के बीच CAS विंडो में सेंसेक्स की इंडिकेटिव इक्विलिब्रियम प्राइस (IEP) में तीन बड़े उतार-चढ़ाव देखे। इनमें 362.02 प्वाइंट, 132.67 प्वाइंट और 405.08 प्वाइंट के उतार-चढ़ाव शामिल थे,जो 2 सेकंड से लेकर 28 सेकंड के अंदर हुए थे। इस दिन आखिर में सेंसेक्स 78,080 पर बंद हुआ,जो निफ्टी में हुई वैसी ही हलचल के आधार पर SEBI के हिसाब से तय लेवल से लगभग 240 प्वाइंट ज़्यादा था। इससे सेबी को गड़बड़ी की आशंका हुई।

कॉप्थॉल ने कैसे किया खेल?

सेबी की जांच से पता चला कि कॉप्थॉल ने आक्रामक खरीदारी से सेंसेक्स को ऊपर चढ़ाया। सेंसेक्स के सभी शेयरों में एग्रेसिव तरीके से 126 करोड़ रुपए के BUY ऑर्डर लगाए। ये ऑर्डर रेफरेंस प्राइस से करीब 3% ऊपर लगाए गए थे। CAS के दौरान कुल Buy ऑर्डर वैल्यू में इनकी 99.91% हिस्सेदारी थी। बाद में खरीदारी के सभी ऑर्डर कैंसिल कर दिए गए। इस तरह कॉप्थॉल ने ऑप्शंस के जरिये की 2.96 करोड़ रुपए कमाए।

कॉप्थॉल की ऑप्शंस पोजिशन

कॉप्थॉल की ऑप्शंस पोजिशन पर नजर डाले तो इसने जांच वाले दिन के 1 दिन पहले 26560 सेंसेक्स 77500 के कॉल खरीदे और 26560 सेंसेक्स 77500 पुट बेचे। वहीं, उसी दिन इंट्राडे में इसने 84200 सेंसेक्स 78000 के कॉल खरीदे और 84200 सेंसेक्स 78000 पुट बेचे। इसी तरह इसने इसने जांच वाले दिन के 1 दिन पहले 12640 सेंसेक्स 78500 के कॉल खरीदे और 12640 सेंसेक्स 78500 के पुट बेचे।

SEBI ने कहा कि कीमत में बदलाव होने के बाद कॉप्थॉल ने इन ऑर्डर्स का एक बड़ा हिस्सा रद्द कर दिया। उनकी डेरिवेटिव्स पोजीशन में सेंसेक्स ऑप्शंस में लॉन्ग कॉल और शॉर्ट पुट पोजीशन शामिल थीं,जिन्हें इंडेक्स के ऊंचे स्तर पर बंद होने से फायदा होता।

मानसी शेयर ने कैसे किया खेल?

इसने सेंसेक्स के 8 शेयरों में ऑर्डर लगाए। कुल 12.65 लाख शेयरों के Sell ऑर्डर लगाए गए। 7.05 लाख शेयर 2.5% नीचे के भाव पर लगाए गए। ये ऑर्डर रेफरेंस प्राइस से 2.5% नीचे थे। इसके बाद मानसी ने पूरे Sell ऑर्डर कैंसिल कर दिए। इस तरह मानसी ने पुट ऑप्शंस खरीदकर 71.64 लाख रुपए कमाए।

मानसी शेयर की ऑप्शंस पोजिशन

मानसी ने इंट्राडे में 5000 सेंसेक्स 77800 के कॉल खरीदे। इसके साथ ही इसने इंट्राडे में ही 42020 सेंसेक्स 77800 के पुट खरीदे। दूसरी किस्त में इसने इंट्राडे में 83320 सेंसेक्स 77900 पुट खरीदे। फिर इसने तीसरी किस्त में इंट्राडे में ही 44000 सेंसेक्स 78000 पुट खरीदे।

सेबी ने अपनी जांच में पाया कि मानसी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकिंग ने रेफरेंस प्राइस से काफी कम कीमत पर बड़े सेल ऑर्डर दिए थे। SEBI के अनुसार,इन ऑर्डरों ने लगभग पांच मिनट तक इंडेक्स पर दबाव बनाए रखा और फिर लगभग सभी ऑर्डर कैंसिल कर दिए गए। मानसी की डेरिवेटिव्स पोजीशन में पुट ऑप्शन शामिल थे,जिनसे सेंसेक्स के निचले स्तर पर बंद होने से फायदा होता।

SEBI ने कहा है कि Copthall ने इस गलत तरीके से ₹2.96 करोड़ और Mansi ने ₹71.64 लाख की कमाई की। हालांकि,आदेश में यह नहीं कहा गया है कि इन दोनों एंटिटीज ने मिलीभगत के साथ काम किया। SEBI का शुरुआती आकलन यह है कि इन एंटिटीज ने स्वतंत्र रूप से इंडेक्स को अपनी-अपनी डेरिवेटिव्स पोजीशन का फ़ायदा उठाने के लिए प्रभावित किया।

SEBI ने आगे की जांच होने तक दोनों संस्थाओं को सिक्योरिटीज़ मार्केट में ट्रेड करने और CAS में सीधे या परोक्ष रूप से भाग लेने से रोक दिया है। मानसी के मामले में ये पाबंदियां उसके प्रोप्राइटरी ट्रेडिंग अकाउंट पर लागू होंगी।

सेबी ने इनके बैंक और डीमैट अकाउंट से पैसे निकालने पर भी रोक लगा दी है,SEBI की मंज़ूरी के बिना एसेट्स को बेचने या ट्रांसफर करने पर भी पाबंदी लगा दी गई है और उन्हें 15 दिनों के अंदर अपने एसेट्स,बैंक अकाउंट,डीमैट अकाउंट,सिक्योरिटीज़ और इन्वेस्टमेंट की पूरी लिस्ट जमा करने के निर्देश दिए गए हैं। SEBI ने कहा कि इस मामले की विस्तृत जांच जारी रहेगी।

 

 

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