डेंटिस्ट बनने दुबई गईं भारतीय महिला, डांस फिटनेस से बदली किस्मत, अब हर महीने कमाती हैं 11 लाख रुपये

कभी-कभी जिंदगी में एक छोटा-सा शौक करियर की ऐसी राह खोल देता है, जिसके बारे में इंसान ने कभी सोचा भी नहीं होता। भारतीय महिला मोनिका सिंह के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। वह डेंटिस्ट बनने का सपना लेकर दुबई पहुंची थीं, लेकिन डांस फिटनेस में उनकी दिलचस्पी ने उन्हें एक अलग पहचान दिला दी। आज वह दुबई में महिलाओं की फिटनेस और हेल्थ से जुड़ा अपना बिजनेस चला रही हैं और हर महीने करीब 10.9 लाख से 11.6 लाख रुपये तक कमाती हैं।

भारत से दुबई पहुंचीं, डेंटिस्ट के तौर पर काम करने की थी तैयारी

द नेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक, मोनिका सिंह करीब 12 साल पहले दुबई गई थीं। उनका इरादा वहां डेंटिस्ट के रूप में अपना करियर बनाने का था। इसके लिए उन्हें दुबई हेल्थ अथॉरिटी (DHA) की लाइसेंसिंग परीक्षा पास करनी थी। इसी तैयारी के दौरान वह ग्रुप वर्कआउट क्लास में जाने लगीं। यहां उन्हें डांस फिटनेस पसंद आने लगी। शुरुआत में यह सिर्फ एक्सरसाइज और खुद को फिट रखने का तरीका था, लेकिन धीरे-धीरे यही उनका जुनून बन गया। मोनिका ने बताया कि वह पहले फिटनेस को लेकर ज्यादा दिलचस्पी नहीं रखती थीं। डांस फिटनेस क्लास में जाने के बाद उन्हें एहसास हुआ कि वह इस क्षेत्र में काम करना चाहती हैं। उन्होंने अपने पति से इस बारे में बात की और पति ने भी उनके फैसले का समर्थन किया।

फिटनेस क्लास से शुरू हुआ सफर

मोनिका ने दुबई के अलग-अलग स्टूडियो में ग्रुप एक्सरसाइज क्लास लेना शुरू किया। इससे उन्हें फिटनेस इंडस्ट्री में अनुभव मिला और आगे चलकर अपना बिजनेस शुरू करने का रास्ता खुला। डेंटिस्ट्री की पढ़ाई ने भी उनके काम में मदद की। मानव शरीर की बनावट और उसके काम करने के तरीके की उनकी समझ ने उन्हें फिटनेस और महिलाओं की सेहत को बेहतर तरीके से समझने में मदद की। इसके बाद उन्होंने महिलाओं की वेलनेस, खासकर मिडलाइफ के दौरान होने वाले बदलावों पर ध्यान दिया और इससे जुड़ी ट्रेनिंग भी ली।

23 महिलाओं को देती हैं कोचिंग

आज मोनिका दुबई में महिलाओं को फिटनेस और वेलनेस कोचिंग देती हैं। रिपोर्ट के अनुसार, फिलहाल उनके पास 23 क्लाइंट हैं। उनकी मासिक कमाई 42,000 से 45,000 दिरहम के बीच बताई गई है, जो भारतीय रुपये में करीब 10.9 लाख से 11.6 लाख रुपये होती है। उनका तरीका महिलाओं को जरूरत से ज्यादा कठिन एक्सरसाइज या शारीरिक दबाव में डालने के बजाय उनकी जरूरतों के हिसाब से फिटनेस लक्ष्य हासिल करने में मदद करना है।

लाखों की कमाई के बावजूद निवेश नहीं

अच्छी कमाई होने के बावजूद मोनिका ने अभी निवेश करना शुरू नहीं किया है। वह फिलहाल अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा बचाकर रखती हैं। उनके सात साल के बेटे की स्कूल फीस, कार लोन और घर के रोजमर्रा के खर्च भी उनकी जिम्मेदारियों में शामिल हैं। मोनिका के मुताबिक, वह घरेलू खर्चों के लिए हर महीने करीब 3,000 से 4,000 दिरहम अलग रखती हैं और बाकी रकम बचाती हैं। घर के अन्य खर्चों की जिम्मेदारी उनके पति संभालते हैं।

अब ऑनलाइन बिजनेस और बड़े घर का सपना

मोनिका का अगला लक्ष्य अपने वेलनेस बिजनेस के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल और ऐप लॉन्च करना है। इसके लिए वह पैसे जोड़ रही हैं, क्योंकि इसे तैयार करने में काफी खर्च आएगा।

लंबे समय में वह अपने परिवार के साथ बड़ा घर खरीदना चाहती हैं। उनकी कहानी बताती है कि करियर का रास्ता हमेशा पहले से तय नहीं होता। कभी-कभी किसी नए अनुभव को मौका देना जिंदगी की दिशा बदल सकता है। हालांकि, उनकी कमाई और सफलता का यह सफर उनकी अपनी परिस्थितियों और बिजनेस पर आधारित है।

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Cult.fit को IPO के लिए SEBI से मिली मंजूरी, रहेंगे ₹950 करोड़ तक के नए शेयर

फिटनेस सर्विसेज प्लेटफॉर्म Cult.fit को IPO लाने के लिए कैपिटल मार्केट रेगुलेटर SEBI से मंजूरी मिल गई है। सेबी की वेबसाइट पर मौजूद एक दस्तावेज से पता चलता है कि कंपनी अब लिस्टिंग की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकती है। Cult.fit के पब्लिक इश्यू में 950 करोड़ रुपये तक के नए इक्विटी शेयर जारी होंगे। साथ ही मौजूदा शेयरधारकों की ओर से 17.86 करोड़ तक इक्विटी शेयरों का ऑफर फॉर सेल (OFS) रहेगा।

Cult.fit भारत में 77 शहरों में 708 फिटनेस सेंटर चलाती है। 31 मार्च, 2026 तक इसके 987,000 से अधिक पेड मेंबर थे। यह कई माध्यमों से मेंबरशिप बेचती है, जिनमें इसका ऐप, वेबसाइट, कॉरपोरेट पार्टनरशिप प्रोग्राम और फिटनेस सेंटरों पर होने वाली डायरेक्ट सेल शामिल हैं। कल्ट फिट ने इस साल जुलाई में SEBI के पास IPO के लिए आवेदन किया था।

कंपनी में टेमासेक होल्डिंग्स के निवेश वाली मैकरिची इनवेस्टमेंट्स, फिटनेस फर्स्ट लक्जमबर्ग, IDG वेंचर्स इंडिया फंड, टाटा डिजिटल, चिराटे ट्रस्ट, श्रोडर्स कैपिटल, ट्वेंटी नाइन कैपिटल पार्टनर्स और एक्सेल इंडिया V (मॉरीशस) का भी पैसा लगा हुआ है।

IPO के पैसे कैसे इस्तेमाल करेगी Cult.fit

Cult.fit अपने IPO में नए शेयरों को जारी कर हासिल होने वाले पैसों का इस्तेमाल नए सेंटर खोलने, और ब्रांडिंग व मार्केटिंग के खर्चों के लिए करेगी। इस इश्यू के लिए एक्सिस कैपिटल और गोल्डमैन सैक्स जैसी एंटिटीज ‘बुक-रनिंग लीड मैनेजर’ हैं। साल 2016 में शुरू हुई कल्ट फिट भारत में जिम, ग्रुप वर्कआउट, आउटडोर फॉर्मेट, एट-होम वर्कआउट और फिटनेस प्रोडक्ट्स जैसे- कपड़े, जूते और जिम के सामान बेचने वाला एक बहुत बड़ा और जाना-माना प्लेटफॉर्म बन चुका है।

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इन कंपनियों के IPO को भी मंजूरी

कल्ट फिट के अलावा SEBI ने ईश्वरी ग्लोबल मेटल इंडस्ट्रीज और सोहन लाल कमोडिटी मैनेजमेंट के IPO को भी मंजूरी दी है। ईश्वरी ग्लोबल मेटल इंडस्ट्रीज के IPO में 500 करोड़ रुपये के नए शेयर जारी होंगे और 1.32 करोड़ इक्विटी शेयरों का OFS रहेगा। IPO का साइज 1,100 करोड़ रुपये से 1,300 करोड़ रुपये के बीच रह सकता है। सोहन लाल कमोडिटी मैनेजमेंट ने मार्च में कॉन्फिडेंशियल रूट से SEBI के पास IPO ड्राफ्ट जमा किया था। साल 2026 में अब तक 97 मेनबोर्ड कंपनियां अपने IPO के जरिए 1.1 लाख करोड़ रुपये से अधिक जुटा चुकी हैं।

जिम बना अखाड़ा! बागपत में युवक ने नॉनस्टॉप जड़े 32 थप्पड़, CCTV वीडियो वायरल

जिम में लोग फिटनेस सुधारने, ताकत बढ़ाने और खुद को स्वस्थ रखने पहुंचते हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश के बागपत में एक जिम का माहौल उस वक्त बदल गया, जब दो लोगों के बीच हुई कहासुनी मारपीट में बदल गई। मामला इतना बढ़ा कि जिम के अंदर शुरू हुई लड़ाई सड़क तक पहुंच गई। वहां मौजूद लोग कसरत करने के बजाय झगड़ा रोकने की कोशिश करते नजर आए। अब घटना का CCTV फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और लोग इस पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, यह घटना बागपत के अग्रवाल मंडी टटीरी इलाके में हुई, जो बागपत कोतवाली थाना क्षेत्र के अंतर्गत आता है। पुलिस ने मामले में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

एक्सरसाइज के बीच शुरू हुई बहस, देखते ही देखते बढ़ा तनाव

रिपोर्ट के अनुसार, घटना के समय जिम में कई लोग अपनी कसरत कर रहे थे। इसी दौरान दो लोगों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हो गया। बहस बढ़ी तो दोनों के बीच हाथापाई शुरू हो गई।

CCTV फुटेज में दोनों को जिम के अंदर व्यायाम करने वाले उपकरणों के आसपास लड़ते देखा जा सकता है। इस दौरान कुछ लोग बीच में आकर उन्हें अलग करने की कोशिश करते दिखाई देते हैं। हालांकि, विवाद का अंत जिम के भीतर नहीं हुआ।

जिम से बाहर निकली लड़ाई, सड़क पर भी चले हाथ

बताया गया कि एक पक्ष के लोगों ने कथित तौर पर अपने साथियों को मौके पर बुला लिया। इसके बाद जिम के बाहर सड़क पर दोनों पक्षों के बीच दोबारा भिड़ंत हो गई। वहां भी लोग झगड़ा शांत कराने की कोशिश करते नजर आए।

इस घटनाक्रम ने आसपास मौजूद लोगों को भी चौंका दिया। जिस विवाद को बातचीत से सुलझाया जा सकता था, वह कथित तौर पर कई लोगों के बीच झड़प में बदल गया। हालांकि, झगड़े की शुरुआत किस बात से हुई और इसमें शामिल लोगों की भूमिका क्या रही, इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

CCTV फुटेज वायरल, पुलिस ने शुरू की जांच

वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद बागपत पुलिस ने मामले का संज्ञान लिया। रिपोर्ट के मुताबिक, केस दर्ज कर संबंधित थाने को जांच और आवश्यक कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। फिलहाल पुलिस मामले से जुड़े तथ्यों की पड़ताल कर रही है।

Anubhav Sinha: अनुभव सिन्हा का मिडिल एज इश्क है लखनऊ…, खाने की खुशबू बार-बार बुला लेती है शहर

Anubhav Sinha: फिल्ममेकर अनुभव सिन्हा का लखनऊ के लिए प्यार इस बात से पता चलता है कि ‘मुल्क’ (2018) की शूटिंग के बाद से उन्होंने इस शहर में तीन और फिल्में शूट की हैं – जिनमें डायरेक्टर के तौर पर ‘आर्टिकल 15’ (2019) और ‘थप्पड़’ (2020) शामिल हैं और दो फिल्में प्रोड्यूसर के तौर पर की हैं।

लखनऊ के अपने हालिया दौरे पर, ‘अस्सी’ (Assi) फिल्म के डायरेक्टर ने कहा कि “लखनऊ में कुछ तो ऐसा है, जो मुझे यहां खींच लाता है। ‘मुल्क’ की शूटिंग से पहले, मैं यहां सिर्फ दो बार आया था – वो भी ‘तुम बिन’ (2021) और उसके सीक्वल के प्रमोशन के लिए और तब से एक फिल्ममेकर के तौर पर छह फिल्में कर चुका हूं, जिसमें मेरी लेटेस्ट प्रोडक्शन फिल्म भी शामिल है।”

‘शहर ने मुझे बहुत प्यार दिया है’

फिल्ममेकर ने कहा कि “लखनऊ मेरा मिडिल एज लव है! अगर मैं इसे बांटकर देखूं तो बनारस वो जगह है जहां मैंने अपना बचपन बिताया, अलीगढ़ कॉलेज वाले दिन प्यार है और मुंबई ने मुझे इतना कुछ दिया है, जो मेरी सोच से भी परे है। अब लखनऊ है, जहां मैं काम के सिलसिले में आया था और इससे प्यार हो गया। फिर शूटिंग, इवेंट्स और प्रमोशन के लिए बार-बार आता रहा। यह शहर मुझे इतना प्यार देता है जिसे मापा नहीं जा सकता। अब मेरे इतने दोस्त और शुभचिंतक हैं कि मुझे अपनी यात्रा को सीक्रेट रखना पड़ता है।

“जब मैं लखनऊ से निकलता हूं, तो मिठाइयों से लेकर मूंगबड़ी, अचार और न जाने क्या-क्या लेकर जाता हूं! ऐसा लगता है जैसे कोई दामाद जा रहा हो… इस बार मैं 10 किलो खाने-पीने का सामान लेकर गया। पुरानी दिल्ली (Old City) की साबिर की फिरनी से लेकर नैमतखाना के खट्टे-मीठे करेले तक।”

‘बेहतरीन खाना’

खाने के शौकीन अनुभव ने कहा कि “शानदार खाने की चाहत और हेल्दी लाइफस्टाइल के बीच बैलेंस बनाना मुश्किल होता है, इसलिए जब मुझे मौका मिलता है तो मैं इसका पूरा मजा लेता हूं और फिर डाइट और वर्कआउट से उसे बैलेंस करता हूं।” लखनऊ में बहुत बढ़िया खाना मिलता है। मुझे लगता है कि वहां के लोगों को भी शायद पता नहीं है कि ऐसी जगहों पर कितना शानदार खाना मिलता ,है जो कोई विज्ञापन नहीं करतीं और जहां पारंपरिक घरों में खाना परोसा जाता है। और ऐसा सिर्फ नॉन-वेज खाने के लिए नहीं है… वहां बहुत बढ़िया वेज खाना भी मिलता है! भारत में अमृतसर, वाराणसी, दिल्ली और लखनऊ जैसे कुछ शहर हैं, जहां जाने के लिए मुझे एक महीने पहले से तैयारी करनी पड़ती है।”

उन्होंने ‘अभी तो पार्टी शुरू हुई है’ फिल्म की शूटिंग भी की है, जो अभी रिलीज नहीं हुई है। इसके अलावा एक एंथोलॉजी फिल्म को प्रोड्यूस किया है, जिसे हंसल मेहता, सुधीर मिश्रा और उन्होंने खुद शूट किया था और वे अपनी मौजूदा फिल्म पर भी काम कर रहे हैं। अपनी जर्नी के दौरान उन्होंने कैंट में गायत्री स्वीट्स के समोसे, अमीनाबाद में नेतराम की कचौड़ी और खानसामों द्वारा खास तौर पर तैयार किए गए लजीज व्यंजनों का मजा लिया।

Google Fitbit Air भारत में लॉन्च, बिना स्क्रीन के करेगा हेल्थ ट्रैक, 7 दिन चलेगी बैटरी

Google Fitbit Air: Google ने भारत में Fitbit Air लॉन्च किया है, जो हेल्थ और फिटनेस ट्रैकिंग के लिए बिना स्क्रीन वाला तरीका लेकर आया है। यह छोटा पहनने वाला डिवाइस दिन भर हेल्थ डेटा को मॉनिटर करने में मदद करता है, साथ ही नोटिफिकेशन और स्मार्टफोन जैसी दूसरी चीजों से होने वाली रुकावटों को कलाई से दूर रखता है। इसमें लगातार हार्ट-रेट मॉनिटरिंग, स्लीप ट्रैकिंग और एक्टिविटी डिटेक्शन के साथ-साथ पर्सनलाइज्ड गाइडेंस के लिए Google का Health Coach भी शामिल है।

Fitbit Air को इस तरह डिजाइन किया गया है कि इसे लंबे समय तक कलाई पर पहना जा सके। यह हल्का है, इसका डिजाइन पेबल-स्टाइल का है और इसकी बैटरी 7 दिनों तक चलती है। यूज़र्स Google Health ऐप के जरिए अपना हेल्थ और फिटनेस डेटा देख सकते हैं, और इसके बदले जा सकने वाले बैंड की वजह से ट्रैकर को वर्कआउट के साथ-साथ रोजमर्रा की गतिविधियों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

Google Fitbit Air: कीमत और उपलब्धता

भारत में Fitbit Air की कीमत ₹13,999 है और यह चार कलर ऑप्शन में उपलब्ध है: bsidian, Berry, Lavender और Fog। Google इस डिवाइस के साथ Google Health Premium का तीन महीने का ट्रायल भी दे रहा है, जिससे Google Health Coach का एक्सेस मिलता है।

लॉन्च ऑफर की बात करें तो फुल स्वाइप ट्रांजैक्शन पर 1,000 रुपये तक का कैशबैक मिल सकता है। इसके अलावा, चुनिंदा HDFC Bank और ICICI Bank कार्ड से 6 महीने की नो-कॉस्ट EMI के साथ 1,000 रुपये का कैशबैक भी दिया जा रहा है। वहीं, कंज्यूमर लोन के जरिए 12 महीने तक की नो-कॉस्ट EMI का विकल्प भी मिल रहा है।

Google Fitbit Air: फीचर्स

Fitbit Air बिना स्क्रीन वाला एक पहनने योग्य डिवाइस (वेयरेबल) है, जो कनेक्टेड स्मार्टफोन पर Google Health ऐप को हेल्थ और वेलनेस से जुड़ी जानकारी भेजता है। यह लगातार हार्ट-रेट मॉनिटरिंग, रेस्टिंग हार्ट रेट और हार्ट रेट वेरिएबिलिटी ट्रैकिंग के साथ-साथ अनियमित हार्ट रिदम (Afib) के नोटिफिकेशन को भी सपोर्ट करता है।

नींद को ट्रैक करने के लिए, यह डिवाइस नींद की अवधि और उसके चरणों (stages) पर नजर रखता है। इसमें ब्लड ऑक्सीजन (SpO2) ट्रैकिंग और ऑटोमैटिक एक्टिविटी डिटेक्शन की सुविधा भी मिलती है।

Google का दावा है कि Fitbit Air एक बार चार्ज करने पर 7 दिनों तक चल सकता है। वहीं, इसे 5 मिनट चार्ज करने पर एक दिन तक की बैटरी लाइफ मिल सकती है।

यह वियरेबल Google Health Coach के साथ काम करता है, जो इकट्ठा किए गए डेटा का इस्तेमाल करके पर्सनलाइज्ड गाइडेंस देता है। यूजर्स अपने वर्कआउट को अपने-आप रिकॉर्ड कर सकते हैं, गाइडेड सेशन को फॉलो कर सकते हैं और अपनी एक्टिविटीज को रिकॉर्ड करने के लिए जिम इक्विपमेंट या वर्कआउट रूटीन की फोटो का इस्तेमाल कर सकते हैं।

Google Fitbit Air: स्पेसिफिकेशन्स और फीचर्स

स्पेसिफिकेशनGoogle Fitbit Air
टाइपस्क्रीनलेस हेल्थ ट्रैकर
हार्ट ट्रैकिंग24/7 हार्ट रेट, रेस्टिंग हार्ट रेट और HRV
हार्ट हेल्थअनियमित हार्ट रिदम (Afib) नोटिफिकेशन
स्लीप ट्रैकिंगनींद के स्टेज और अवधि की जानकारी
ब्लड ऑक्सीजनSpO2 ट्रैकिंग
एक्टिविटी ट्रैकिंगऑटोमैटिक एक्टिविटी डिटेक्शन
बैटरी लाइफ7 दिनों तक
फास्ट चार्जिंग5 मिनट चार्ज करने पर 1 दिन तक
हेल्थ प्लेटफॉर्मGoogle Health ऐप
AI/वेलनेसGoogle Health Coach
बॉक्स में बैंडPerformance Loop Band
अन्य बैंडActive Band, Elevated Modern Band
कलर ऑप्शनObsidian, Berry, Lavender और Fog
भारत में कीमत₹13,999
सेल डेट2 अक्टूबर 2026
प्रीमियम ट्रायल3 महीने का Google Health Premium ट्रायल

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पिछले साल से 20 KPH घटी गति, मोहम्मद सिराज ने बताया क्या गलत हुआ

मोहम्मद सिराज ने जसप्रीत बुमराह की गैर-मौजूदगी में तेज़ गेंदबाज़ी का काफ़ी ज़्यादा बोझ उठाया है। उन्होंने पिछले साल इंग्लैंड में पाँच टेस्ट मैचों में 1113 गेंदें फेंकीं और आख़िरी गेंद तक पूरी शिद्दत के साथ गेंदबाज़ी की, जैसा कि ओवल में मिली मशहूर टेस्ट जीत में देखा गया था। यह चौंकाने वाला आँकड़ा कुल मिलाकर 185.3 ओवर का है: सिर्फ़ क्रिस वोक्स ही 181 ओवर के साथ इसके आस-पास पहुँच पाए।

लेकिन उन्होंने सिराज के सीरीज़-बेस्ट 23 विकेटों की तुलना में 12 विकेट कम लिए। वर्कलोड मैनेजमेंट के इस दौर में, जहाँ तेज़ गेंदबाज़ों को तरोताज़ा होने के लिए आराम की ज़रूरत होती है, सिराज एक अलग ही तरह के खिलाड़ी साबित हुए हैं।

असल में, वह इस मामले में बिल्कुल अलग स्थिति में हैं, जहाँ लंबे ब्रेक का उनकी गेंदबाज़ी की लय (रिदम) पर बुरा असर पड़ता है। हाल ही में ऐसे ही एक ब्रेक ने उनकी लय बिगाड़ दी थी। 8 जून को खत्म हुए अफ़गानिस्तान के ख़िलाफ़ एकमात्र टेस्ट के बाद, सिराज को दो महीने का ब्रेक मिला और फिर 7 अगस्त को कोलंबो में एसएलसी XI के ख़िलाफ़ वॉर्म-अप मैच में उन्होंने गेंदबाज़ी की। खुद उनके मुताबिक, इससे उनकी गेंदबाज़ी पर बुरा असर पड़ा।

गॉल में श्रीलंका के ख़िलाफ़ पहले टेस्ट में शुभमन गिल ने अपने पाँच मुख्य गेंदबाज़ों में मोहम्मद सिराज का इस्तेमाल सबसे कम किया – उन्होंने दोनों पारियों में नौ-नौ ओवर डाले। कोलंबो में उन्होंने थोड़ी ज़्यादा गेंदबाज़ी की, लेकिन पूरी सीरीज़ में उन्होंने कुल 44 ओवर ही डाले – जो इस दौरे पर भारत के दूसरे तेज़ गेंदबाज़ प्रसिद्ध कृष्णा से 14.3 ओवर कम थे।

चेन्नई में दलीप ट्रॉफ़ी फ़ाइनल के बाद सिराज ने कहा, “हर गेंदबाज़ का शरीर अलग होता है, लेकिन मेरा शरीर लंबे ब्रेक को अच्छी तरह से नहीं झेल पाता। थोड़ा ब्रेक लेना ठीक है, लेकिन अपने 10 साल के करियर में मैंने कभी पूरे दो महीने की छुट्टी नहीं ली थी। मैं जिम में वर्कआउट कर रहा था और कभी-कभी बॉलिंग भी कर रहा था, लेकिन कितनी भी प्रैक्टिस कर लें, मैच की तीव्रता की बराबरी नहीं हो सकती। यह एक नया अनुभव था, लेकिन आगे बढ़ने के लिए मेरे लिए सीखने का एक अच्छा मौका था।

उन्होंने कहा,”मैं पूरी तरह से रिदम (लय) वाला बॉलर हूँ। अगर मैं सही लय में नहीं हूँ, तो मैं क्रीज़ पर पूरी ताकत से बॉलिंग नहीं कर पाता। श्रीलंका में यही दिक्कत थी – मेरा रन-अप सही नहीं लग रहा था। कुछ कदम बहुत छोटे थे, तो कुछ बहुत लंबे, जिससे मेरा फ्लो टूट गया और मेरी पेस (गति) कम हो गई। यहाँ सब कुछ सही हो गया और पेस अपने आप बढ़ गई।”
 

Mohammed Siraj IND vs SA

पिछले साल से 20 KPH घटी गति

दो टेस्ट मैचों में वाकई सिराज की पेस कम थी, जो 120 के आखिर और 130 की शुरुआत के आसपास थी। अगर तुलना करें तो, पाँच मैचों की सीरीज़ के आखिरी दिन, जिसमें सभी टेस्ट पाँचवें दिन तक चले थे, उन्होंने गस एटकिंसन को 143 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार से यॉर्कर डाली थी। इसलिए, श्रीलंका से लौटने के बाद सिराज चेन्नई गए और दिलीप ट्रॉफी फ़ाइनल में तिलक वर्मा की कप्तानी में साउथ ज़ोन के लिए खेले।

“दो महीने के ब्रेक के बाद सीधे मैच में आने पर मेरी लय वैसी नहीं थी। इस गेम (दिलीप ट्रॉफी फ़ाइनल) में उतरते समय मेरा मुख्य लक्ष्य वही लय पाना था। इस मैच में खेलने से बहुत मदद मिली। दो महीने के ब्रेक के बाद शरीर वैसा रिस्पॉन्स नहीं देता – सब कुछ थोड़ा धीमा लगता है। इस गेम को खेलने से मेरा शरीर फिर से हरकत में आया और मेरी लय वापस आ गई।”

Duleep Trophy Final -दोनों पारियों में 41 ओवर फेंके

चेन्नई की भीषण गर्मी में, सिराज ने ईस्ट ज़ोन की दोनों पारियों में 41 ओवर फेंके और अंत में अपनी बॉलिंग को लेकर काफ़ी बेहतर महसूस किया। “मेरा शरीर ऐसे ही काम करता है – मैं जितने ज़्यादा ओवर फेंकता हूँ, उतना ही बेहतर होता जाता हूँ। अगर मैं लंबे स्पेल में बॉलिंग नहीं करता, तो मेरी लय वापस नहीं आएगी। ब्रेक की वजह से क्रीज़ पर मेरा शरीर सुस्त महसूस हो रहा था, इसलिए मैंने खुद से और तिलक से कहा कि मैं ज़्यादा से ज़्यादा देर तक बॉलिंग करना चाहता हूँ। मैंने 10 और 11 ओवर के स्पेल में गेंदबाज़ी की, और इसी से मुझे अपनी लय वापस मिली।”

सिराज ने घरेलू मैच की शुरुआत विकेटकीपर एन. जगदीसन के स्टंप्स के पास खड़े होने के साथ की। लेकिन इसका मतलब यह नहीं था कि उन्होंने छोटे रन-अप के साथ गेंदबाज़ी की। “नहीं, रन-अप बिल्कुल वैसा ही है। मेरा तरीका छोटे-छोटे कदमों के बजाय लगातार और बिना रुके तेज़ी पकड़ने पर आधारित है। दो महीने के ब्रेक के बाद वापसी करते समय, मेरा शरीर अपने कदमों की लंबाई को फिर से एडजस्ट कर रहा था। इस मैच में, सब कुछ फिर से बिल्कुल स्वाभाविक लगा।”उन्होंने आगे कहा, “आखिरकार, सिर्फ़ मैं ही अपनी लय को सही मायने में समझता हूँ। मैं चाहे किसी के भी साथ काम करूँ, असल बात तो यही है कि मैं आसानी से दौड़ते हुए आऊँ। एक बार जब मैं ऐसा कर लेता हूँ, तो लय अपने आप बन जाती है।”

Apple Watch Series 12 में भारत के लिए फिलहाल रोक दिया गया है यह खास फीचर, क्यों किया ऐसा कंपनी ने वजह भी बताई

Apple Watch Series 12: अमेरिकी टेक दिग्गज एपल ने अपनी नई Apple Watch Series 12 और Apple Watch Ultra 4 की बिक्री भारत में शुरू करने के साथ ही एक बड़ा ऐलान किया है। कंपनी ने बताया है कि इन नई स्मार्टवॉच का सबसे चर्चित हेल्थ फीचर हाइपरटेंशन नोटिफिकेशन यानी हाई ब्लड प्रेशर की चेतावनी भारत में शुरुआत में उपलब्ध नहीं होगा।

कंपनी ने इस फीचर में हो रही देरी की आधिकारिक वजह बताते हुए स्पष्ट किया है कि यह फैसला नियामकीय मंजूरियों में आ रही प्रक्रिया के कारण लिया गया है।

क्यों अटका हाइपरटेंशन फीचर? एपल ने जारी किया बयान

एपल ने अपने आधिकारिक बयान में कहा, ‘Apple Watch Series 12 और Ultra 4 के लिए हाइपरटेंशन नोटिफिकेशन फीचर भारत में शुरुआत में उपलब्ध नहीं होगा, क्योंकि इस मॉडल के लिए अतिरिक्त नियामकीय मंजूरियों की प्रक्रिया अभी जारी है। भारत में इसकी उपलब्धता अगले साल (2027) तक होने की उम्मीद है।’

चूंकि हाइपरटेंशन फीचर सीधे तौर पर यूजर के हाई ब्लड प्रेशर से जुड़ा एक संवेदनशील मेडिकल नोटिफिकेशन है, इसलिए भारत में केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) जैसी संस्थाओं से मेडिकल डिवाइस के रूप में इसकी पूर्ण मंजूरी मिलना आवश्यक होता है। मंजूरी मिलते ही इसे सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिए भारत में रोलआउट कर दिया जाएगा।

Apple Watch Series 12: भारत में कीमत और कब से मिलेगी?

भारत में Apple Watch Series 12 की कीमत ₹56,900 से शुरू होती है। भारतीय ग्राहक इस स्मार्टवॉच का प्री-ऑर्डर कर सकते हैं, जबकि स्टोर्स में इसकी बिक्री 18 सितंबर से आधिकारिक रूप से शुरू हो जाएगी।

हाई बीपी फीचर रुका, लेकिन मिलेंगे ये एडवांस्ड हेल्थ फीचर्स

भले ही हाइपरटेंशन नोटिफिकेशन के लिए भारतीय यूजर्स को थोड़ा इंतजार करना पड़े, लेकिन Apple Watch Series 12 में कई नेक्स्ट-जेन हेल्थ और फिटनेस फीचर्स शामिल किए गए हैं:

हायर-फ्रीक्वेंसी हार्ट रेट मॉनिटरिंग: इसमें हाई-फ्रीक्वेंसी हार्ट रेट और हार्ट रेट वेरिएबिलिटी (HRV) ट्रैकिंग दी गई है।

न्यू रेडिनेस स्कोर: यूजर की बॉडी रिकवरी और वर्कआउट के लिए शरीर कितना तैयार है, इसका सटीक आकलन करने के लिए नया ‘रेडिनेस स्कोर’ फीचर दिया गया है।

अन्य हेल्थ ट्रैकिंग: ईसीजी ऐप (ECG App), स्लीप एपनिया (Sleep Apnea) नोटिफिकेशन, स्लीप ट्रैकिंग, फॉल डिटैक्शन (Fall Detection) और इमरजेंसी एसओएस जैसे प्रीमियम फीचर्स पहले की तरह चालू रहेंगे।

बैटरी लाइफ में 25% तक का सुधार

एपल का दावा है कि Apple Watch Series 12 सामान्य इस्तेमाल में 24 घंटे तक का डेली बैटरी बैकअप देती है। वहीं आउटडोर वर्कआउट के दौरान यह बिना रुके 10 घंटे तक चल सकती है, जो कि पिछले मॉडल की तुलना में 25% अधिक बैटरी लाइफ है।

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टाइट नहीं परफेक्ट फिट! जिम में बेस्ट परफॉरमेंस के लिए ऐसे सेलेक्ट करें जिम वियर

वर्कआउट के दौरान आपका ध्यान एक्सरसाइज पर होना चाहिए, जिससे बार-बार कपड़ों को ठीक करने की जरूरत न पड़े। गलत फिटिंग वाले जिम कपड़े शरीर की मूवमेंट को मुश्किल बना सकते हैं और लंबे समय तक पहनने पर असहज भी लग सकते हैं। इसलिए अपनी एक्सरसाइज के अनुसार कपड़ों की फिटिंग चुनना जरूरी है। कुछ वर्कआउट में फिटेड कपड़े बेहतर रहते हैं, जबकि योग या हल्की एक्सरसाइज के लिए ढीले और आरामदायक कपड़े ज्यादा सही हो सकते हैं।

हल्के वर्कआउट में ओवरसाइज्ड वियर

अगर आपका वर्कआउट बहुत ज्यादा इंटेंस नहीं है, तो ओवरसाइज्ड जिम वियर भी चुना जा सकता है। वार्म-अप, कूल-डाउन, हल्की वॉक, रिकवरी डे या सामान्य स्ट्रेचिंग के दौरान ढीले कपड़े काफी आरामदायक लगते हैं। ओवरसाइज्ड टी-शर्ट, ढीले ट्रैक पैंट या रिलैक्स्ड शॉर्ट्स शरीर को ज्यादा खुला और आरामदायक महसूस करा सकते हैं। गर्म मौसम में ऐसे कपड़े हवा के लिए भी थोड़ी ज्यादा जगह देते हैं। कई लोग इन्हें जिम के बाहर कैजुअल और स्टाइलिश लुक के लिए भी पहनना पसंद करते हैं।

इंटेंस वर्कआउट के लिए फिटेड वियर

HIIT, वेटलिफ्टिंग, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, रनिंग और स्प्रिंट जैसी ज्यादा इंटेंसिटी वाली एक्सरसाइज में फिटेड कपड़े ज्यादा आरामदायक रहते हैं। लेगिंग्स, कम्प्रेशन शॉर्ट्स, फिटेड टी-शर्ट और स्पोर्ट्स ब्रा जैसे कपड़े शरीर के साथ अच्छी तरह फिट रहते हैं। इससे एक्सरसाइज करते समय कपड़ा बार-बार ऊपर या नीचे नहीं खिसकता और शरीर को मूव करने में आसानी होती है। ये मशीन या किसी दूसरे इक्विपमेंट में फंस सकते हैं और आपका ध्यान वर्कआउट से हटा सकते हैं।

योग और स्ट्रेचिंग लूज फिटिंग

योग, स्ट्रेचिंग और मोबिलिटी एक्सरसाइज में शरीर को अलग-अलग दिशाओं में मोड़ना, फैलाना और घुमाना पड़ता है। ऐसे वर्कआउट के लिए बहुत टाइट कपड़े कई बार असहज महसूस हो सकते हैं। इसलिए रिलैक्स्ड फिट वाले टॉप, वाइड लेग पैंट या ढीले शॉर्ट्स बेहतर विकल्प हो सकते हैं। कपड़े ज्यादा खिंचने या स्किन से लगातार रगड़ खाने की परेशानी भी कम हो सकती है।

वेदर के हिसाब से चुनें जिम वियर

जिम वियर चुनते समय सिर्फ एक्सरसाइज और फिटिंग ही नहीं, बल्कि मौसम का भी ध्यान रखना जरूरी है। भारत में गर्मी और नमी के दौरान वर्कआउट करने पर शरीर से ज्यादा पसीना निकल सकता है। ऐसे मौसम में हल्के, हवादार और पसीना जल्दी सोखने या सुखाने वाले कपड़े ज्यादा आरामदायक रहते हैं। ठंड के मौसम में जरूरत के हिसाब से लेयरिंग की जा सकती है, ताकि एक्सरसाइज शुरू करने से पहले शरीर गर्म रहे और बाद में जरूरत के हिसाब से कपड़े कम किए जा सकें।

जिम वियर चुनते समय सबसे ज्यादा ध्यान आराम और सही फिटिंग पर देना चाहिए। ऐसे कपड़े पहनें जिनमें एक्सरसाइज करते समय शरीर आसानी से मूव कर सके और कपड़ों की वजह से आपका ध्यान न भटके। सही जिम वियर न सिर्फ वर्कआउट को कम्फर्टेबल बनाता है, बल्कि आपके पूरे फिटनेस रूटीन को अच्छा एक्सपीरियंस भी देता है।

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भागदौड़ भरी आधुनिक जिंदगी में खुद को सेहतमंद और ऊर्जावान बनाए रखना किसी चुनौती से कम नहीं है। हम अक्सर अपनी व्यस्त दिनचर्या में छोटी-छोटी मगर बेहद महत्वपूर्ण आदतों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे धीरे-धीरे शरीर में थकान, मानसिक तनाव और बीमारियों का खतरा बढ़ने लगता है। 

 

अगर आप भी अपनी लाइफस्टाइल में बड़ा बदलाव लाए बिना, केवल कुछ आसान आदतों को सुधारकर एक खुशहाल और रोगमुक्त जीवन जीना चाहते हैं, तो ये 10 सुनहरे नियम आपकी जिंदगी को पूरी तरह बदल सकते हैं। आइए जानते हैं कि रोजमर्रा के जीवन में कौन-से बदलाव आपको लंबे समय तक फिट रख सकते हैं:

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1. थाली को बनाएं रंग-बिरंगा (संतुलित और पोषण युक्त आहार)

अपनी दैनिक खुराक में प्र प्रचुर मात्रा में ताजे फल, हरी पत्तेदार सब्जियां, अंकुरित अनाज और प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थों को शामिल करें। जितना हो सके प्रसंस्कृत (प्रोसेस्ड) भोजन और जंक फूड से दूरी बनाएं, क्योंकि आपकी सेहत का सीधा रास्ता आपकी थाली से होकर गुजरता है।

 

2. 30 मिनट का वर्कआउट रूल (नियमित शारीरिक गतिविधि)

दिनभर में कम से कम आधा घंटा अपने शरीर को सक्रिय रखने के लिए जरूर निकालें। इसके लिए आपको रोज जिम जाने की ही जरूरत नहीं है; आप तेज चाल में टहलना (ब्रिस्क वॉक), एरोबिक्स या कोई पसंदीदा खेल खेलकर भी शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बना सकते हैं।

 

3. 7 से 8 घंटे की गहरी नींद (शरीर का नेचुरल रिपेयर मोड)

जिस तरह मोबाइल को चार्जिंग की जरूरत होती है, उसी तरह हमारे मस्तिष्क और अंगों को री-सेट होने के लिए गुणवत्तापूर्ण नींद की आवश्यकता होती है। रोजाना 7-8 घंटे की निर्बाध नींद लेने से मानसिक थकान दूर होती है और इम्यूनिटी भी बूस्ट होती है।

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4. बॉडी को रखें फुल्ली हाइड्रेटेड (भरपूर पानी का सेवन)

पानी हमारे शरीर के विषाक्त पदार्थों (टॉक्सिन्स) को बाहर निकालने का सबसे बेहतरीन जरिया है। दिनभर में कम से कम 8 से 10 गिलास पानी पीने से न सिर्फ पाचन तंत्र दुरुस्त रहता है, बल्कि त्वचा पर प्राकृतिक निखार भी बना रहता है।

 

5. मेंटल वेलनेस पर दें ध्यान (ध्यान और प्राणायाम)

शारीरिक सेहत के साथ-साथ मानसिक शांति भी बेहद जरूरी है। दिन की शुरुआत में केवल 10-15 मिनट का ध्यान (मेडीटेशन) और अनुलोम-विलोम जैसे प्राणायाम करने से तनाव का स्तर तेजी से कम होता है और एकाग्रता बढ़ती है।

 

6. बुरी लत को कहें बाय-बाय (नशे से पूरी दूरी)

तंबाकू, धूम्रपान और अत्यधिक शराब के सेवन से दूरी बनाए रखें। ये आदतें न केवल आपके फेफड़ों और लिवर को नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि असमय बुढ़ापे और कई गंभीर बीमारियों का मुख्य कारण भी बनती हैं।

 

7. फिटनेस में लाएं वेरायटी (वर्कआउट रूटीन बदलें)

एक ही तरह की कसरत से शरीर और मन दोनों ऊब जाते हैं। अपने रूटीन को मजेदार बनाने के लिए इसमें योग, स्विमिंग, साइक्लिंग या डांस को बारी-बारी से शामिल करें। इससे शरीर के सभी हिस्सों का सही व्यायाम होता है।

 

8. पॉजिटिव और हेल्दी सोशल सर्कल (सकारात्मक लोगों का साथ)

आप जिन लोगों के साथ समय बिताते हैं, उनकी ऊर्जा का आपकी मानसिकता पर गहरा प्रभाव पड़ता है। ऐसे दोस्तों और सहकर्मियों के साथ रहें जो आपको फिटनेस के प्रति प्रोत्साहित करें और जिंदगी में आगे बढ़ने की प्रेरणा दें।

 

9. अपनी सोच को बनाएं सकारात्मक (पॉजिटिव एटीट्यूड)

हर परिस्थिति में सकारात्मक नजरिया बनाए रखना मानसिक स्वास्थ्य के लिए सुरक्षा कवच का काम करता है। आभार व्यक्त करने की आदत डालें (ग्रैटिट्यूड) और नकारात्मक विचारों को खुद पर हावी न होने दें।

 

10. प्रकृति और आयुर्वेद का लें सहारा (नेचुरल हीलिंग)

अपनी दिनचर्या में ग्रीन टी, हर्बल काढ़ा, तुलसी, आंवला और एलोवेरा जैसे प्राकृतिक व आयुर्वेदिक उपायों को शामिल करें। ये घरेलू नुस्खे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) को कुदरती रूप से मजबूत बनाते हैं।

वॉकिंग… स्विमिंग या HIIT, जानिए डॉक्टर ने किसे बताया सबसे अच्छा कार्डियो वर्कआउट

जब लोग ‘कार्डियो’ शब्द सुनते हैं, तो अक्सर सबसे पहले दौड़ने (रनिंग) का ख्याल आता है। लेकिन कार्डियोवैस्कुलर फ़िटनेस बेहतर करने के लिए आपको दौड़ने की ज़रूरत नहीं है। पैदल चलना, तैराकी और हाई-इंटेन्सिटी इंटरवल ट्रेनिंग (HIIT) – ये सभी असरदार कार्डियोवैस्कुलर वर्कआउट हो सकते हैं और हर एक के अपने अलग-अलग फ़ायदे हैं।

बेंगलुरु के महादेवपुरा स्थित KIMS हॉस्पिटल्स में कार्डियोलॉजी के डायरेक्टर और लीड कंसल्टेंट डॉ. दीपक कृष्णमूर्ति के अनुसार, कार्डियो का सबसे अच्छा तरीका जरूरी नहीं कि सबसे जयादा जोरदार वाला ही हो। डॉ. कृष्णमूर्ति कहते हैं, “सबसे असरदार कार्डियो एक्सरसाइज़ वह है जिसे आप सुरक्षित रूप से, लगातार और मजे के साथ कर सकें। दौड़ना एक बेहतरीन कार्डियोवैस्कुलर एक्सरसाइज है, लेकिन यह निश्चित रूप से एकमात्र विकल्प नहीं है। अगर पैदल चलना, तैराकी और HIIT को नियमित एक्सरसाइज़ रूटीन में सही ढंग से शामिल किया जाए, तो ये सभी कार्डियोवैस्कुलर फ़िटनेस को बेहतर बना सकते हैं।”

पैदल चलना- आसान, असरदार और जोड़ों के लिए सुरक्षित

जो लोग लंबे समय से कोई शारीरिक गतिविधि नहीं कर रहे हैं, उनके लिए रोजाना की दिनचर्या में कार्डियो एक्सरसाइज़ शामिल करने का सबसे आसान तरीका तेज चलना (ब्रिस्क वॉकिंग) हो सकता है। डॉ. कृष्णमूर्ति कहते हैं, “पैदल चलने को अक्सर कम आंका जाता है क्योंकि यह बहुत आसान है, लेकिन नियमित रूप से तेज चलने से कार्डियोवैस्कुलर फ़िटनेस में काफ़ी सुधार हो सकता है। यह खास तौर पर बुज़ुर्गों, शुरुआत करने वालों और लंबे ब्रेक के बाद दोबारा एक्सरसाइज़ शुरू करने वाले लोगों के लिए फ़ायदेमंद है।”

पैदल चलना एक कम-ज़ोर वाली (लो-इम्पैक्ट) गतिविधि भी है, जिसमें दौड़ने की तुलना में जोड़ों पर कम दबाव पड़ता है। इसकी तीव्रता को धीरे-धीरे बढ़ाया जा सकता है – जैसे कि चाल तेज़ करके, चढ़ाई पर चलकर या चलने का समय बढ़ाकर।

तेज चलने के फ़ायदे

रोज़ाना तेज़ चलने से कार्डियोवैस्कुलर फ़िटनेस बेहतर हो सकती है, कैलोरी बर्न करने और वज़न कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है, ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर कंट्रोल में सुधार हो सकता है, पैरों की मांसपेशियाँ मज़बूत हो सकती हैं, स्टैमिना बढ़ सकता है और एक्टिव रहने का एक ऐसा तरीका मिल सकता है जो जोड़ों के लिए भी सुरक्षित हो।

डॉ. कृष्णमूर्ति कहते हैं, “पहले ही दिन से बहुत तेज़ी से चलने की कोशिश करने के बजाय, ऐसी अवधि से शुरुआत करना ज़्यादा ज़रूरी है जिसे आप आसानी से कर सकें और फिर धीरे-धीरे अपनी रफ़्तार और दूरी बढ़ाएँ।”

तैराकी- पूरे शरीर का कार्डियो वर्कआउट

तैराकी एक अलग तरह की कार्डियोवैस्कुलर चुनौती देती है क्योंकि शरीर को पानी के दबाव (रेज़िस्टेंस) के ख़िलाफ़ हिलना-डुलना पड़ता है। साथ ही, पानी की उछाल (buoyancy) जोड़ों पर पड़ने वाले दबाव को कम करती है।

डॉ. कृष्णमूर्ति कहते हैं, “जो लोग कम-ज़ोर वाले कार्डियोवैस्कुलर वर्कआउट की तलाश में हैं, उनके लिए तैराकी एक बेहतरीन विकल्प है। इसमें शरीर के कई बड़े मसल्स का इस्तेमाल होता है, जबकि पानी का रेजिस्टेंस शरीर को लगातार काम करने पर मजबूर करता है।”

इस वजह से तैराकी उन लोगों के लिए खास तौर पर आकर्षक हो सकती है जिन्हें ज़्यादा ज़ोर-शोर वाली गतिविधियां (हाई-इम्पैक्ट एक्टिविटीज़) आरामदायक नहीं लगतीं या जो अपनी एक्सरसाइज़ रूटीन में कुछ नयापन लाना चाहते हैं। हालांकि, पूल तक पहुंच और तैरने की बुनियादी जानकारी होना ज़रूरी है। जो लोग शुरुआत कर रहे हैं और पानी में सहज महसूस नहीं करते, उन्हें सीधे ज़ोरदार कसरत के तौर पर तैराकी शुरू करने के बजाय, पहले तैराकी की सही तकनीक सीखनी चाहिए।

तैराकी के फ़ायदे

तैराकी से कार्डियोवैस्कुलर क्षमता बेहतर हो सकती है, शरीर की कई मांसपेशियों पर एक साथ काम होता है, मांसपेशियों की सहनशक्ति बढ़ती है, कैलोरी बर्न होती है, कुल मिलाकर स्टैमिना बेहतर होता है, कम दबाव वाला वर्कआउट मिलता है और वज़न उठाने वाले जोड़ों पर तनाव कम होता है।

डॉ. कृष्णमूर्ति कहते हैं, “क्योंकि तैराकी में कार्डियोवैस्कुलर गतिविधि और मांसपेशियों का इस्तेमाल दोनों शामिल होते हैं, इसलिए यह एक बहुत असरदार वर्कआउट हो सकता है।” “हालांकि, इसकी तीव्रता व्यक्ति के फ़िटनेस लेवल के हिसाब से होनी चाहिए।”

HIIT- छोटा लेकिन ज़ोरदार

जिन लोगों के पास समय कम है, उनके लिए HIIT (हाई-इंटेंसिटी इंटरवल ट्रेनिंग) कार्डियो का एक अच्छा और समय बचाने वाला तरीका हो सकता है। HIIT में ज़ोरदार एक्सरसाइज़ और आराम या कम-तीव्रता वाली गतिविधि के बीच बारी-बारी से बदलाव किया जाता है। व्यक्ति के फ़िटनेस लेवल के आधार पर, एक सेशन में तेज़ साइकलिंग, दौड़ना, बॉडीवेट एक्सरसाइज़ या दूसरी गतिविधियां शामिल हो सकती हैं।

डॉ. कृष्णमूर्ति कहते हैं, “HIIT कम समय में कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम को मजबूत स्टिमुलस दे सकता है। लेकिन क्योंकि इसकी तीव्रता ज़्यादा होती है, इसलिए यह हर किसी के लिए सही नहीं होता है।” शुरुआत करने वालों को सीधे बहुत मुश्किल HIIT सेशन नहीं करने चाहिए। जिन लोगों को पहले से कोई स्वास्थ्य समस्या है, उन्हें भी ज़ोरदार ट्रेनिंग शुरू करने से पहले सही मेडिकल और एक्सरसाइज़ से जुड़ी सलाह लेनी चाहिए।

HIIT के फ़ायदे

सही तरीके से करने पर, HIIT कार्डियोवैस्कुलर फ़िटनेस को बेहतर बना सकता है, कम समय के वर्कआउट में एक्सरसाइज़ की तीव्रता बढ़ा सकता है, सहनशक्ति (एंड्योरेंस) बढ़ा सकता है, कैलोरी बर्न करने में मदद कर सकता है, एक्सरसाइज़ रूटीन में विविधता ला सकता है, कार्डियोवैस्कुलर और मस्कुलर सिस्टम दोनों को चुनौती दे सकता है, और उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है जिन्हें लंबे वर्कआउट के लिए समय नहीं मिल पाता है।

डॉ. कृष्णमूर्ति बताते हैं, “HIIT का मतलब सिर्फ़ जितनी हो सके उतनी ज़ोरदार एक्सरसाइज़ करना नहीं है। इंटरवल, रिकवरी पीरियड और एक्सरसाइज़ की तीव्रता को व्यक्ति की फ़िटनेस और स्वास्थ्य की स्थिति के अनुसार एडजस्ट किया जाना चाहिए।”

तो कौन सी कार्डियो एक्सरसाइज़ सबसे अच्छी है?

कार्डियो के मामले में कोई एक चीज़ सबसे अच्छी नहीं होती। वॉकिंग, स्विमिंग और HIIT अलग-अलग ज़रूरतों को पूरा करते हैं, और सही चुनाव व्यक्ति के फ़िटनेस लेवल, सेहत, पसंद, उपलब्ध समय और सुरक्षित रूप से एक्सरसाइज़ करने की क्षमता पर निर्भर करता है।

डॉ. कृष्णमूर्ति कहते हैं, “जो लोग रोज़ाना आसान कार्डियो करना चाहते हैं, उन्हें तेज़ी से चलने (ब्रिस्क वॉकिंग) से बहुत फ़ायदा हो सकता है। जो लोग कम-इम्पैक्ट वाला, पूरे शरीर का वर्कआउट चाहते हैं, उनके लिए स्विमिंग बेहतर हो सकती है, जबकि HIIT उन लोगों के लिए सही हो सकता है जो पहले से ही फ़िट हैं और ज़्यादा ज़ोरदार, कम समय में होने वाला सेशन चाहते हैं।”

परफ़ेक्ट वर्कआउट चुनने से ज़्यादा ज़रूरी है उसे लगातार करना

लोग सबसे बड़ी गलतियों में से एक यह करते हैं कि वे सिर्फ़ “सबसे अच्छी” एक्सरसाइज़ खोजने पर बहुत ज़्यादा ध्यान देते हैं और उसे नियमित रूप से करने पर बहुत कम। डॉ. कृष्णमूर्ति कहते हैं, “कार्डियो के फ़ायदे लगातार करने से मिलते हैं। अगर आप बहुत मुश्किल वर्कआउट को कभी-कभार करते हैं और उसे जारी नहीं रख पाते, तो उसका कोई खास फ़ायदा नहीं होता।”

अलग-अलग तरह के कार्डियो को मिलाने से एक्सरसाइज़ ज़्यादा मज़ेदार भी हो सकती है। कोई व्यक्ति अपनी फ़िटनेस और मेडिकल स्थिति के आधार पर ज़्यादातर दिन टहल सकता है, हफ़्ते में एक या दो बार तैर सकता है और कभी-कभी ज़्यादा ज़ोरदार सेशन भी कर सकता है।

ऐसा कार्डियो चुनें जिसे आप लंबे समय तक कर सकें

दौड़ना (रनिंग) एक बेहतरीन कार्डियोवैस्कुलर एक्सरसाइज़ है, लेकिन यह एकमात्र विकल्प नहीं है। तेज़ी से चलना (ब्रिस्क वॉकिंग) शुरुआत करने का एक आसान तरीका हो सकता है, स्विमिंग से पूरे शरीर का कम-इम्पैक्ट वाला वर्कआउट मिल सकता है, और समय कम होने पर HIIT एक ज़ोरदार सेशन दे सकता है।

आखिरकार, सबसे अच्छी कार्डियो एक्सरसाइज़ वही है जो आपकी क्षमताओं के अनुकूल हो और जिसे आप सुरक्षित रूप से और लगातार कर सकें। डॉ. कृष्णमूर्ति कहते हैं, “यह पूछने के बजाय कि वॉकिंग, स्विमिंग या HIIT में से कौन सा सबसे अच्छा है, यह पूछें कि आप कौन सी गतिविधि नियमित रूप से और सुरक्षित रूप से कर सकते हैं। यही बात एक्सरसाइज़ रूटीन को लंबे समय तक जारी रखने लायक और आखिरकार दिल की सेहत के लिए फ़ायदेमंद बनाती है।”