How to Buy Home: ₹30000 की सैलरी में भी खरीद सकते हैं अपना घर, समझिए कैसे बनाएं पूरा प्लान

How to Buy Home: अपना घर खरीदने का सपना हर कोई देखता है। लेकिन महीने की सैलरी ₹30,000 के आसपास हो, तो लगता है कि आज के जमाने में घर खरीदना शायद मुमकिन नहीं है। किराया, राशन, बिजली का बिल और बच्चों की फीस देने के बाद बचता ही कितना है? ऐसे में होम लोन की EMI चुकाना बड़ी जिम्मेदारी लगती है।

हालांकि, कम सैलरी में भी घर खरीदा जा सकता है। इसके लिए जरूरी है कि आप अपनी कमाई के हिसाब से घर चुनें। बड़ा लोन लेने के बजाय ऐसी EMI रखें, जिसे हर महीने आसानी से चुका सकें। आइए, उदाहरण से समझते हैं कि ₹30,000 की सैलरी में घर खरीदने का प्लान कैसे बना सकते हैं।

₹30,000 की सैलरी पर कितना होम लोन लें?

BASIC Home Loan के CEO और को-फाउंडर अतुल मोंगा का कहना है कि अगर आप ₹10 लाख का होम लोन लेते हैं, तो ब्याज दर और लोन की अवधि के हिसाब से EMI करीब ₹10,000 हो सकती है। मोंगा के मुताबिक, अगर आपकी सैलरी ₹30,000 है, तो घर खरीदना सिर्फ कमाई पर निर्भर नहीं करता। ये भी जरूरी है कि आप घर खरीदने की कितनी अच्छी तैयारी करते हैं। घर

इसे एक उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए कि आपकी सैलरी ₹30,000 है। इसमें से ₹8,000 घर और किराने, ₹3,000 बिजली और दूसरे बिलों, ₹4,000 आने-जाने और ₹5,000 परिवार के अन्य खर्चों में जाते हैं। इस तरह कुल खर्च ₹20,000 हुआ। अब आपके पास ₹10,000 बचते हैं।

सैलरी के हिसाब से खर्च का पूरा हिसाब समझें

महीने का हिसाबरकम
कुल सैलरी₹30,000
राशन और घर का खर्च₹8,000
बिजली, मोबाइल और दूसरे बिल₹3,000
आने-जाने का खर्च₹4,000
परिवार के दूसरे खर्च₹5,000
कुल खर्च₹20,000
खर्च के बाद बची रकम₹10,000

ये सिर्फ उदाहरण है। आप अपने परिवार के खर्च के हिसाब से इसमें बदलाव कर सकते हैं। जैसे कि कुछ पैसे बचाकर इमरजेंसी के लिए रख सकते हैं।

डाउन पेमेंट के लिए पैसे कैसे जुटाएं?

बैंक आमतौर पर घर की पूरी कीमत का लोन नहीं देते। घर खरीदते समय आपको भी कुछ पैसा लगाना पड़ता है। इसी को डाउन पेमेंट कहते हैं। इसके अलावा रजिस्ट्री और स्टांप ड्यूटी जैसे खर्च भी हो सकते हैं।

मान लीजिए, आपको ₹15 लाख का घर पसंद आया। बैंक ₹12 लाख का लोन देने को तैयार है। ऐसे में बाकी ₹3 लाख आपको अपनी तरफ से लगाने होंगे। रजिस्ट्री और दूसरे खर्चों के लिए अलग से पैसा भी चाहिए हो सकता है।

इसलिए घर खरीदने से पहले बचत शुरू करें। हर महीने ₹5,000 बचाने पर एक साल में ₹60,000 जमा होंगे। इसी तरह, तीन साल में ब्याज को छोड़कर ₹1.80 लाख जमा हो सकते हैं। अगर परिवार से आर्थिक मदद मिले या बोनस की रकम बचा सकें, तो डाउन पेमेंट का लक्ष्य जल्दी पूरा हो सकता है।

होम लोन लेने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

अतुल मोंगा के मुताबिक, होम लोन लेने से पहले सबसे पहले अलग-अलग बैंकों की ब्याज दरें और प्रोसेसिंग फीस देखें। सिर्फ कम ब्याज दर देखकर लोन लेने से बचना चाहिए। लोन की अवधि और दूसरी शर्तें भी समझना जरूरी है।

कमाई और बैंकिंग रिकॉर्ड व्यवस्थित रखने से आवेदन की प्रक्रिया आसान हो सकती है। अगर भविष्य में आपकी कमाई बढ़ती है और आपके पास अतिरिक्त पैसा आता है, तो लोन की कुछ रकम पहले चुकाने पर भी विचार कर सकते हैं। इसे पार्ट-प्रीपेमेंट कहते हैं। इससे बकाया लोन और कुल ब्याज घट सकता है।

मोंगा का कहना है कि आखिरकार मकसद सिर्फ होम लोन लेना नहीं होना चाहिए। जरूरी यह है कि लोन की रकम इतनी हो, जिसकी EMI परिवार लंबे समय तक आसानी से चुका सके। इसके लिए परिवार के दूसरे जरूरी खर्चों और भविष्य के वित्तीय लक्ष्यों से समझौता नहीं करना पड़े।

हेल्थ पॉलिसी के बावजूद हॉस्पिटल का 3 लाख बिल जेब से भरना है, FD तोड़े या किसी से उधार लें?

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

हेल्थ पॉलिसी के बावजूद हॉस्पिटल का 3 लाख बिल जेब से भरना है, FD तोड़े या किसी से उधार लें?

हेल्थ पॉलिसी होने के बावजूद कई बार हॉस्पिटल के बिल का कुछ हिस्सा जेब से भरना पड़ता है। अगर हॉस्पिटल के बिल में से 3 लाख रुपये जेब से भरना हो तो फिर क्या करना चाहिए? क्या सेविंग्स के पैसा का इस्तेमाल करना चाहिए, बैंक एफडी को तोड़ देना चाहिए या पीएफ से पैसे निकालने चाहिए? मनीकंट्रोल ने यह सवाल एक्सपर्ट से पूछा।

बीमारी को ध्यान में रखकर लेने होंगे फैसले

आरोग्य फाइनेंस के को-फाउंडर और सीईओ जोस पीटर ने कहा कि इस सवाल का जवाब कई बातों पर निर्भर है। इसमें बीमारी कौन सी है, बीमारी के इलाज में कितना समय लगेगा और कितने पैसे खर्च होंगे शामिल हैं। कई बार बीमारी का इलाज एक सर्जरी से हो जाता है, जबकि कुछ बीमारी में बार-बार हॉस्पिटल में भर्ती होने की जरूरत पड़ती है।

हॉस्पिटल बिल और इंश्योरेंस सेटलमेंट स्टेंटमेंट को चेक करें

उन्होंने कहा कि अगर हॉस्पिटल का बिल 5 लाख आने पर हेल्थ पॉलिसी के बावजूद 3 लाख जेब से चुकाना हो तो बड़ी समस्या हो जाती है। खासकर तब जब परिवार को दवाइयां भी खरीदनी हो और आगे भी डॉक्टर से दिखाना हो। ऐसे में परिवार को हॉस्पिटल के बिल को ध्यान से देखना जरूरी है। इंश्योरेंस कंपनी के सेटलमेंट स्टेटमेंट को भी देखना होगा। इससे पता चलेगा कि कौन-कौन से चार्ज इंश्योरेंस में कवर नहीं हुआ है।

कई हॉस्पिटल इंटरेस्ट-फ्री मेडिकल EMI ऑफर करते हैं

सबसे पहले हॉस्पिटल से यह पूछा जा सकता है कि क्या वह इंटरेस्ट-फ्री मेडिकल EMI ऑफर करता है। इसमें इंटरेस्ट का बोझ हॉस्पिटल उठाता है। अगर हॉस्पिटल यह सुविधा ऑफर करता है तो परिवार के लिए इसका इस्तेमाल करना सबसे अच्छा रहेगा। परिवार मंथली किस्त चुकाने के लिए अपने गैरजरूरी खर्चों में कटौती कर सकता है। अगर यह सुविधा हॉस्पिटल ऑफर नहीं करता है तो ही बैंक एफडी तोड़ने या दूसरे विकल्प का इस्तेमाल करने की जरूरत पड़ेगी।

बैंक एफडी तोड़ने से पहले इन बातों को ध्यान में रखें 

अगर बैंक एफडी तोड़ना जरूरी हो तो पहले यह देखना होगा कि इंटरेस्ट के मामले में कितना लॉस होगा और तय समय से पहले एफडी तोड़ने पर कितनी पेनाल्टी चुकानी होगी। एफडी पर लोन लेना अच्छा विकल्प हो सकता है। लेकिन, अगर एफडी अगर लंबी अवधि का है तो उसे तोड़ना सस्ता पड़ेगा। परिवार दोनों विकल्पों पर विचार करने के बाद फैसला ले सकता है।

ईपीएफ में जमा पैसा निकालने का भी विकल्प

तीसरा विकल्प ईपीएफ से पैसे निकालना है। लेकिन, यह ध्यान में रखना जरूरी है कि ईपीएफ से पैसे निकालने का असर आपकी रिटायरमेंट सेविंग्स पर पड़ता है। इस प्रोसेस में समय भी लगता है। यह विकल्प तब काम नहीं करेगा, जब पेशेंट हॉस्पिटल में है और उसे हॉस्पिटल से घर लाने से पहले बिल चुकाना जरूरी हो। ऐसी स्थिति में ईपीएफ से पैसे निकलने का इंतजार नहीं किया जा सकता।

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जरूरत के हिसाब से कुछ विकल्पों का किया जा सकता है इस्तेमाल

उपर्युक्त विकल्पों पर विचार करने के बाद सबसे अच्छा यह होगा कि हॉस्पिटल का बिल चुकाने के लिए सेविंग्स के कुछ पैसे का इस्तेमाल किया जाए और बाकी पैसा का इंतजाम दूसरे स्रोतों से किया जाए। इससे अचानक हाथ खाली नहीं होगा और हॉस्पिटल से पेशेंट के डिस्चार्ज के बाद भी उसकी देखभाल के लिए पैसे बचे रहेंगे।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

Google Pixel 11 पर ₹26,000 तक की बचत, Pixel 11 Pro और Fold पर भी ऑफर, जानें पूरी डिटेल

भारत में नवरात्रि 2026 के जश्न के बीच Google ने दिवाली से पहले ही अपनी सेल शुरू कर दी है। अगर आप Google के नए Pixel 11 स्मार्टफोन खरीदने की सोच रहे हैं, तो यह आपके लिए अच्छा मौका हो सकता है। Google Store पर यह सेल शुरू हो चुकी है और 8 नवंबर 2026 तक चलेगी। इस दौरान ग्राहकों को फोन की कीमत में छूट, बैंक से तुरंत कैशबैक, पुराने फोन को एक्सचेंज करने पर अतिरिक्त छूट और चुनिंदा खरीदारी पर बिना ब्याज वाली EMI जैसे फायदे मिल सकते हैं।

Google Store की जानकारी के मुताबिक, Pixel 11 के 512GB मॉडल पर कुल ₹26,000 तक के ऑफर मिल रहे हैं। इसके अलावा, Pixel 11 Pro, Pixel 11 Pro XL, Pixel 11 Pro Fold और पुराने Pixel स्मार्टफोन पर भी छूट दी जा रही है। Google की यह सेल ऐसे समय में आई है, जब भारत में Amazon और Flipkart की फेस्टिव सेल भी जारी है।

Google Pixel 11 दिवाली सेल: जानें ऑफर्स और डिस्काउंट

भारत में Google Pixel 11 की शुरुआती कीमत ₹89,999 है। दिवाली सेल के दौरान ग्राहक इसके 512GB वेरिएंट पर Google Store से ₹10,000 की छूट पा सकते हैं। इसके अलावा, चुनिंदा पुराने फोन एक्सचेंज करने पर ₹9,000 का अतिरिक्त बोनस भी मिल सकता है। Google Pixel 9 को एक्सचेंज करने पर ₹34,000 तक की कीमत मिल सकती है।

वहीं, HDFC Bank और ICICI Bank के क्रेडिट कार्ड से चुनिंदा EMI ट्रांजैक्शन करने पर ₹7,000 तक का इंस्टेंट कैशबैक मिल सकता है।

दिए गए ऑफर्स के मुताबिक, सभी लागू छूट और कैशबैक को मिलाकर Pixel 11 के 512GB वेरिएंट पर कुल ₹26,000 तक की बचत हो सकती है। इससे फोन की प्रभावी कीमत ₹70,000 से कम हो सकती है। हालांकि, इसका फायदा ग्राहकों की पात्रता और ऑफर की शर्तों पर निर्भर करेगा।

Google Pixel 11 Pro, Pixel 11 Pro XL और Pixel 11 Pro Fold पर ऑफर्स

Google की दिवाली सेल में कंपनी के प्रीमियम स्मार्टफोन पर भी छूट मिल रही है। ग्राहक चुनिंदा बैंक क्रेडिट कार्ड से भुगतान करने पर ₹10,000 तक का इंस्टेंट डिस्काउंट पा सकते हैं। इसके अलावा, चुनिंदा पुराने फोन एक्सचेंज करने पर ₹9,000 का अतिरिक्त बोनस भी मिल सकता है।

Google के मुताबिक, Pixel 9 को एक्सचेंज करने वाले ग्राहकों को अलग-अलग ऑफर्स मिलाकर कुल ₹46,000 तक की बचत हो सकती है। Google Store की वेबसाइट पर बिना ब्याज वाली EMI का विकल्प भी दिया जा रहा है। हालांकि, ये सभी फायदे ऑफर की शर्तों पर निर्भर करेंगे।

कीमत की बात करें तो Google Pixel 11 Pro की कीमत ₹1,19,999 और Pixel 11 Pro XL की कीमत ₹1,34,999 है। वहीं, Google Store India की वेबसाइट पर Pixel 11 Pro Fold को ₹1,86,999 में लिस्ट किया गया है।

ग्राहकों को फोन कितने में पड़ेगा, यह उनके चुने गए मॉडल, भुगतान के तरीके और पुराने फोन की एक्सचेंज वैल्यू पर निर्भर करेगा।

Google दिवाली सेल: Pixel 10 और Pixel 10a पर छूट

जो ग्राहक Google के पुराने स्मार्टफोन खरीदना चाहते हैं, उनके लिए भी दिवाली सेल में अच्छे ऑफर्स मिल रहे हैं। Google Pixel 10 को ₹64,000 से कम और Pixel 10a को ₹46,000 से कम कीमत में खरीदा जा सकता है। इन कीमतों का फायदा Google Store की छूट, बैंक से मिलने वाले इंस्टेंट कैशबैक और पुराने फोन को एक्सचेंज करने पर मिलने वाले बोनस के साथ मिल सकता है।

हालांकि, कितनी बचत होगी, यह फोन के मॉडल, उपलब्ध ऑफर्स और ग्राहक की पात्रता पर निर्भर करेगा। इसलिए ऑर्डर करने से पहले Google Store के चेकआउट पेज पर दिखाई देने वाली अंतिम कीमत जरूर देख लें।

Google की इस दिवाली सेल में Pixel स्मार्टवॉच पर भी छूट मिल रही है। ग्राहक Pixel Watch 5 पर ₹2,500 तक और Pixel Watch 4 पर ₹1,500 तक का बैंक डिस्काउंट पा सकते हैं। Google Store India की वेबसाइट पर Pixel Watch 5 की कीमत ₹42,900 और Pixel Watch 4 की कीमत ₹39,900 है।

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₹1,49,900 वाला iPhone 17 Pro Max अब ₹71,990 में? जानें डिस्काउंट और एक्सचेंज की पूरी डिटेल

अगर आप iPhone 17 Pro Max खरीदना चाहते हैं, लेकिन इसकी ज्यादा कीमत के कारण अब तक फैसला नहीं कर पाए हैं, तो आपके लिए एक खास ऑफर है। भारत में Apple के एक अधिकृत रिटेलर के यहां यह फोन डिस्काउंट, एक्सचेंज बोनस और कैशबैक के साथ मिल रहा है। ऑफर की शर्तें पूरी होने पर इसके 256GB वेरिएंट को ₹71,990 की प्रभावी कीमत पर खरीदा जा सकता है। इसकी लिस्टेड MRP ₹1,49,900 है।

इस डील में ग्राहकों को फोन की कीमत पर ₹9,910 का इन-स्टोर डिस्काउंट मिल रहा है। इसके अलावा, पुराना योग्य फोन एक्सचेंज करने पर उसकी कीमत ₹55,000 तक मिल सकती है। ग्राहकों को ₹10,000 का एक्सचेंज बोनस और ₹3,000 का कैशबैक भी दिया जा रहा है।

इन सभी फायदों को जोड़ने के बाद फोन की प्रभावी कीमत ₹71,990 हो जाती है। हालांकि, एक्सचेंज में मिलने वाली रकम पुराने फोन की स्थिति और मॉडल पर निर्भर करेगी। इसलिए खरीदारी से पहले रिटेलर से ऑफर की शर्तें जरूर जांच लें।

iPhone 17 Pro Max डील: कैसे मिलेगा डिस्काउंट?

iPhone 17 Pro Max के 256GB वेरिएंट की कीमत ₹1,49,900 है। इस पर ₹9,910 का इन-स्टोर डिस्काउंट मिल रहा है, जिसके बाद फोन की कीमत घटकर ₹1,39,990 रह जाती है।

इसके बाद ग्राहक अपना पुराना योग्य स्मार्टफोन एक्सचेंज कर सकते हैं। इसके बदले अधिकतम ₹55,000 तक की कीमत मिल सकती है। रिटेलर की ओर से ₹10,000 का अतिरिक्त एक्सचेंज बोनस और ₹3,000 का कैशबैक भी दिया जा रहा है। वहीं, इन सभी फायदों को मिलाने के बाद फोन की प्रभावी कीमत ₹71,990 हो जाती है।

ऑफर की जानकारी के मुताबिक, अधिकतम ₹55,000 का एक्सचेंज वैल्यू iPhone 15 Pro के बदले मिल सकता है। हालांकि, पुराने फोन का मॉडल, उसकी स्थिति और एक्सचेंज की पात्रता के आधार पर मिलने वाली रकम अलग-अलग हो सकती है। इसलिए फोन खरीदने से पहले रिटेलर से ऑफर की शर्तें जरूर जांच लें।

iPhone 17 Pro Max EMI ऑफर

जो ग्राहक किश्तों में भुगतान करना चाहते हैं, वे 12 महीने के ‘नो-कॉस्ट EMI’ प्लान का विकल्प चुन सकते हैं। ऑफर के अनुसार, इसमें मासिक भुगतान 6,249 रुपये से शुरू होता है।

यह डील स्टोर से खरीदारी करने पर उपलब्ध है। ग्राहक रिटेलर के ‘स्टोर लोकेटर’ का इस्तेमाल करके अपने आस-पास का आउटलेट ढूंढ सकते हैं और वहां iPhone 17 Pro Max की उपलब्धता की जांच कर सकते हैं।

iPhone 17 Pro Max डील: क्या आपको इसे खरीदना चाहिए?

यह ऑफर उन ग्राहकों के लिए फायदेमंद हो सकता है जो अपने पुराने iPhone को अपग्रेड करने की सोच रहे हैं, खासकर उनके लिए जिन्हें अधिकतम एक्सचेंज वैल्यू और अतिरिक्त लाभ मिल सकते हैं। हालांकि, 71,990 रुपये की प्रभावी कीमत (effective price) पाने के लिए आपको एक्सचेंज वैल्यू, एक्सचेंज बोनस और कैशबैक को एक साथ जोड़ना होगा। यानी यह स्मार्टफोन पर मिलने वाला कोई सीधा डिस्काउंट नहीं है।

खरीदने से पहले, ग्राहकों को रिटेलर से फाइनल एक्सचेंज वैल्यू, कैशबैक मिलने की पात्रता और EMI की शर्तों के बारे में अच्छी तरह पता कर लेना चाहिए।

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₹10 लाख की कार खरीदें या पैसा निवेश करें? 5 साल में कितना हो सकता है फायदा-नुकसान, पूरा हिसाब समझिए

Car vs Investment: कार खरीदना कई लोगों का सपना होता है। लेकिन इस फैसले का असर आपकी जेब पर भी पड़ता है। कार खरीदने के बाद उसकी कीमत घटती है। साथ ही पेट्रोल, इंश्योरेंस और मेंटेनेंस पर भी पैसा खर्च होता है। दूसरी तरफ, यही ₹10 लाख निवेश कर दिए जाएं तो 5 साल में अच्छी रकम बन सकती है। ऐसे में सवाल है कि कार खरीदना बेहतर है या पैसे को बढ़ने का मौका देना?

₹10 लाख निवेश करने पर कितना पैसा बनेगा?

मान लीजिए आपके पास ₹10 लाख हैं। आप इस रकम को 5 साल के लिए निवेश करते हैं। अब रिटर्न के अलग-अलग अनुमान से समझते हैं कि आपकी रकम कितनी हो सकती है।

अगर सालाना 8% रिटर्न मिलता है, तो 5 साल बाद ₹10 लाख बढ़कर करीब ₹14.69 लाख हो जाएंगे। इस तरह आपको लगभग ₹4.69 लाख का फायदा होगा।

वहीं, 10% सालाना रिटर्न पर रकम करीब ₹16.11 लाख हो सकती है। यानी ₹6.11 लाख की बढ़त। अगर सालाना रिटर्न 12% रहा, तो 5 साल बाद कुल रकम करीब ₹17.62 लाख हो सकती है। इस स्थिति में मुनाफा लगभग ₹7.62 लाख होगा।

सालाना रिटर्नशुरुआती निवेश5 साल बाद कुल रकमअनुमानित मुनाफा
8%₹10,00,000₹14,69,000₹4,69,000
10%₹10,00,000₹16,11,000₹6,11,000
12%₹10,00,000₹17,62,000₹7,62,000

नोट : यह कैलकुलेशन कंपाउंडिंग के आधार पर है। शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में रिटर्न तय नहीं होता। असल नतीजा निवेश के विकल्प और बाजार के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा।

कार खरीदने पर 5 साल में कितना खर्च होगा?

अब कार का हिसाब समझते हैं। मान लीजिए आप ₹10 लाख की कार खरीदते हैं और 5 साल तक उसे चलाते हैं। इस दौरान कार की कीमत घटेगी। इसे डेप्रिसिएशन कहते हैं। इसके अलावा इंश्योरेंस और सर्विस पर भी खर्च होगा।

उदाहरण के लिए, मान लेते हैं कि 5 साल बाद कार की रीसेल वैल्यू ₹5 लाख रह जाती है। यानी उसकी कीमत में ₹5 लाख की कमी आई। इसके अलावा, 5 साल में इंश्योरेंस पर करीब ₹1 लाख और सर्विस व मेंटेनेंस पर ₹75,000 खर्च होते हैं।

₹10 लाख की कार खरीदने पर 5 साल का खर्च

खर्च का हिसाबअनुमानित रकम
कार की खरीद कीमत₹10,00,000
5 साल बाद रीसेल वैल्यू₹5,00,000
कार की कीमत में कमी₹5,00,000
5 साल का इंश्योरेंस खर्च₹1,00,000
सर्विस और मेंटेनेंस₹75,000
5 साल की कुल लागत₹6,75,000

नोट: ये अनुमानित खर्च और वैल्यू हैं। इसमें पेट्रोल-डीजल, पार्किंग, टोल और लोन का ब्याज शामिल नहीं है।

इस हिसाब से कार रखने की लागत 5 साल में करीब ₹6.75 लाख बैठती है। इसमें पेट्रोल या डीजल, पार्किंग, टोल और लोन का ब्याज शामिल नहीं है। असल खर्च कार के मॉडल और इस्तेमाल के हिसाब से अलग हो सकता है।

दोनों विकल्पों में कितना फर्क पड़ेगा?

अब दोनों की तुलना करते हैं। अगर आप ₹10 लाख निवेश करते हैं और सालाना 10% रिटर्न मिलता है, तो 5 साल बाद रकम करीब ₹16.11 लाख हो सकती है।

दूसरी तरफ, कार खरीदने पर 5 साल बाद उसकी अनुमानित कीमत ₹5 लाख रह जाती है। यानी एक तरफ निवेश की रकम बढ़ रही है, जबकि दूसरी तरफ कार की कीमत घट रही है।

सिर्फ निवेश की रकम और कार की रीसेल वैल्यू देखें, तो दोनों के बीच ₹11.11 लाख का अंतर होगा। कार के इंश्योरेंस और मेंटेनेंस पर खर्च हुए ₹1.75 लाख भी जोड़ दें, तो इस उदाहरण में वित्तीय अंतर करीब ₹12.86 लाख तक पहुंचता है।

लेकिन यह पूरी तरह समान आधार पर की गई तुलना नहीं है। निवेश करने वाले व्यक्ति के पास कार नहीं होगी। उसे आने-जाने के लिए दूसरे साधनों पर खर्च करना पड़ सकता है। वहीं, कार खरीदने वाले को निजी गाड़ी की सुविधा मिलेगी। इसलिए अंतिम फैसला लेते समय इस पहलू को भी देखना जरूरी है।

क्या कार खरीदने के बजाय निवेश करना बेहतर है?

यह आपकी जरूरत पर निर्भर करता है। अगर रोज ऑफिस जाने या परिवार के साथ सफर करने के लिए कार जरूरी है, तो इसे सिर्फ खर्च मानना सही नहीं होगा। कार से समय बचता है और आने-जाने में सुविधा मिलती है।

लेकिन अगर कार खरीदने से आपकी बचत खत्म हो रही है या घर, बच्चों की पढ़ाई और रिटायरमेंट जैसे लक्ष्यों के लिए पैसा कम पड़ सकता है, तो फैसला टालने पर विचार किया जा सकता है। एक विकल्प यह भी है कि आप कम कीमत की कार खरीदें और बाकी रकम निवेश करें। या फिर एकमुश्त 10 लाख आप निवेश कर सकते हैं। और कार लोन ले सकते हैं।

Personal Loan EMI: ₹5 लाख के लोन पर कितना ब्याज देना पड़ेगा? समझिए पूरा कैलकुलेशन

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Parag Parikh MF: पराग पारिख फ्लेक्सी कैप फंड ने कैश होल्डिंग घटाई, इन दो कंपनियों पर लगाया बड़ा दांव

Parag Parikh MF: पराग पारिख फ्लेक्सी कैप फंड ने अपने पास रखी नकदी में बड़ी कटौती की है। एक साल पहले फंड की कैश होल्डिंग करीब 24% थी। अब यह घटकर 9.7% रह गई है। शेयरों की कीमतों में गिरावट के बाद फंड को निवेश के नए मौके दिख रहे हैं। इसलिए उसने बाजार में पैसा लगाना बढ़ा दिया है।

PPFAS Mutual Fund के को-फंड मैनेजर (इक्विटी) और हेड ऑफ रिसर्च रौनक ओंकार ने CNBC-TV18 को एक इंटरव्यू में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि शेयरों की वैल्यूएशन अब पहले के मुकाबले आकर्षक हो रही है। फंड को कुछ कंपनियों के शेयर कम कीमत पर मिल रहे हैं। इसलिए उसने इन कंपनियों में अच्छी-खासी रकम लगाई है।

ओंकार ने बताया कि फंड ऐसी कंपनियों पर भी नजर रख रहा है, जिनके कारोबार से लगातार कैश आता है। फिलहाल बाजार का ज्यादा ध्यान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा सेंटर और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों पर है। इस वजह से कई दूसरी कंपनियों पर निवेशकों का ध्यान कम गया है।

उनके मुताबिक, ऐसी कुछ कंपनियों के शेयर उनकी कमाई और कैश फ्लो के मुकाबले कम वैल्यूएशन पर मिल रहे हैं। इससे मजबूत कारोबार वाली कंपनियों में निवेश का मौका बन रहा है।

DLF में PPFAS क्यों लगा रहा है पैसा?

PPFAS Mutual Fund ने अपने पोर्टफोलियो में रियल एस्टेट कंपनी DLF के शेयर भी शामिल किए हैं। ओंकार ने बताया कि DLF के पास काफी बड़ी जमीन है। कंपनी के पास प्रोजेक्ट पूरे करने की अच्छी क्षमता भी है। इसके अलावा, उसने अपना कर्ज कम किया है। इससे कंपनी की वित्तीय स्थिति मजबूत हुई है।

ओंकार के मुताबिक, अब DLF में निवेश का मौका इस बात में है कि कंपनी अपनी जमीन का इस्तेमाल किस तरह करती है। वह नए प्रोजेक्ट बनाकर कारोबार बढ़ा सकती है। साथ ही, उसके कमर्शियल प्रॉपर्टी से किराये के रूप में लगातार कैश भी आता है।

उन्होंने यह भी कहा कि DLF की बैलेंस शीट पहले से मजबूत है। कर्ज कम होने के कारण कंपनी के पास विस्तार के लिए ज्यादा गुंजाइश है। इससे वह उत्तर भारत के अपने पारंपरिक बाजार से आगे दूसरे क्षेत्रों में भी कारोबार बढ़ा सकती है।

CMS Info Systems पर क्यों है PPFAS की नजर?

PPFAS Mutual Fund ने CMS Info Systems में भी निवेश किया है। इस कंपनी के कारोबार का एक बड़ा हिस्सा कैश से जुड़ा है। ओंकार के मुताबिक, देश की अर्थव्यवस्था में आज भी नकदी का इस्तेमाल हो रहा है। इसलिए बैंकों और दूसरे कैश एक्सेस पॉइंट्स के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत बनी हुई है।

उन्होंने कहा कि देश में चलन में मौजूद नकदी का स्तर नोटबंदी के समय के मुकाबले ज्यादा है। अर्थव्यवस्था में कई तरह के लेनदेन अब भी कैश से होते हैं। ऐसे में बैंकों और दूसरी जगहों पर नकदी पहुंचाने और उसे संभालने के लिए भरोसेमंद ऑपरेटर जरूरी हैं।

CMS Info Systems इसी तरह के काम से जुड़ी कंपनी है। वह कैश लेनदेन के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर संभालती है। हालांकि, ओंकार ने यह भी माना कि कंपनी के मुख्य कारोबार में ऑर्गेनिक ग्रोथ बहुत मजबूत नहीं है। इसी वजह से उसके शेयर की वैल्यूएशन भी ज्यादा ऊंची नहीं है।

इसके बावजूद कंपनी का कैश फ्लो मजबूत है। यानी कारोबार से उसके पास लगातार पैसा आता है। कंपनी अपने मौजूदा कारोबार से जुड़े दूसरे क्षेत्रों में भी विस्तार के मौके तलाश रही है।

प्राइवेट बैंकों में 20% निवेश से संतुष्ट है PPFAS

PPFAS Mutual Fund के पोर्टफोलियो का करीब 20% हिस्सा प्राइवेट सेक्टर के बैंकों में लगा है। इसमें HDFC Bank, ICICI Bank, Axis Bank और Kotak Mahindra Bank जैसे शेयर शामिल हैं।

ओंकार ने कहा कि फंड बैंकिंग शेयरों में अपने मौजूदा निवेश से संतुष्ट है। उसे इस सेक्टर में लगातार अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की जरूरत नहीं दिखती। उन्होंने कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि इसमें इससे आगे निवेश बढ़ाते रहना सही होगा। आखिर यह बैंकिंग फंड नहीं है। हमने अपने पोर्टफोलियो में बैंकिंग सेक्टर को एक तय हिस्सेदारी दी है।’

ओंकार ने फंड की मौजूदा पसंद के हिसाब से बैंकों की रैंकिंग भी बताई। इसमें HDFC Bank पहले नंबर पर है। इसके बाद ICICI Bank, Axis Bank और Kotak Mahindra Bank का स्थान है।

हालांकि, यह रैंकिंग हमेशा एक जैसी रहेगी, ऐसा नहीं है। ओंकार के मुताबिक, समय के साथ इन बैंकों में निवेश का अनुपात बदल सकता है। यह बाजार की चाल, शेयरों के प्रदर्शन और संबंधित बैंकों के कारोबार की स्थिति पर निर्भर करेगा।

Personal Loan EMI: ₹5 लाख के लोन पर कितना ब्याज देना पड़ेगा? समझिए पूरा कैलकुलेशन

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

अब इलाज की नो टेंशन! हर महीने सिर्फ ₹1000 देकर पाएं 3 साल का हेल्थ इंश्योरेंस, हजारों लोगों ने चुना ये नया ट्रेंड

Health Insurance Subscription Model: भारतीय परिवारों के लिए हेल्थ इंश्योरेंस को आसान और किफायती बनाना इंश्योरेंस इंडस्ट्री की प्राथमिकता बनता जा रहा है। हाल ही में हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर GST दरों में कटौती जैसे बड़े फैसलों के बाद अब इंडस्ट्री में एक नया इनोवेटिव मॉडल तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। यह है हेल्थ इंश्योरेंस का सब्सक्रिप्शन बेस्ड EMI मॉडल।

इस नए मॉडल के तहत ग्राहक अपनी सुविधा के अनुसार मासिक या त्रैमासिक किस्तों में प्रीमियम का भुगतान करके 3 साल तक की मल्टी-ईयर कवरेज हासिल कर सकते हैं। पॉलिसीबाजार के आंकड़ों के मुताबिक, देश में लगभग 13% ग्राहक अब एकमुश्त भुगतान के बजाय मंथली या क्वार्टरली EMI के विकल्प को चुन रहे हैं।

कैसे काम करता है हेल्थ इंश्योरेंस का यह EMI मॉडल?

यह मॉडल मल्टी-ईयर हेल्थ इंश्योरेंस कवरेज को आसान किस्तों से जोड़ता है। इसमें ग्राहक एक बार में भारी-भरकम राशि देने के बजाय छोटे-छोटे हिस्सों में प्रीमियम चुकाते हैं।

उदाहरण से समझें तो मान लीजिए आपकी 3 साल की हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी का कुल प्रीमियम ₹36,000 यानी प्रति वर्ष ₹12,000 बनती है। पुराने तरीके में आपको ₹36,000 एक बार में देने पड़ते थे। लेकिन इस EMI मॉडल में आप हर महीने सिर्फ ₹1,000 की किस्त देकर 36 महीनों तक लगातार 3 साल का कवर चालू रख सकते हैं।

ग्राहकों के बीच बढ़ा क्रेज

पॉलिसीबाजार द्वारा जारी किए गए हालिया आंकड़ों के अनुसार:

औसत सालाना प्रीमियम/EMI टिकट साइज: ₹17,500

EMI चुनने वाले ग्राहक: 13% उपभोक्ता अब मासिक या तिमाही भुगतान का विकल्प चुन रहे हैं।

यह रुझान दर्शाता है कि लोग अब अपने हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम को मंथली बजट और घर के अन्य खर्चों की तरह मैनेज करना ज्यादा पसंद कर रहे हैं।

हर साल 10% तक बढ़ने वाले प्रीमियम से मिलेगी राहत

किस्तों में भुगतान के साथ-साथ लॉन्ग-टर्म पॉलिसी चुनने का एक और बड़ा फायदा यह है कि आपका प्रीमियम 3 साल के लिए फिक्स हो जाता है। सामान्यतः हर साल रिन्यूअल के वक्त उम्र या मेडिकल इन्फ्लेशन के कारण प्रीमियम में 10% तक की बढ़ोतरी देखने को मिलती है। मल्टी-ईयर प्लान आपको इस सालाना बढ़ोतरी से सुरक्षा देता है।

इस बदलते ट्रेड पर पॉलिसीबाजार हेल्थ इंश्योरेंस के बिजनेस हेड रोहन गोयल ने कहा, ‘हेल्थ इंश्योरेंस अब धीरे-धीरे पारंपरिक ‘सालाना खरीद और रिन्यूअल’ के चक्र से बाहर निकलकर एक अधिक लचीले और लॉन्ग-टर्म प्रोटेक्शन मॉडल की ओर बढ़ रहा है। मल्टी-ईयर पॉलिसियों और मंथली या क्वार्टरली पेमेंट ऑप्शंस के साथ ग्राहक लंबे समय के लिए अपनी कवरेज सुरक्षित करते हुए प्रीमियम के बोझ को आसानी से बांट सकते हैं। यह साफ संकेत है कि उपभोक्ता अब अपनी हेल्थ सिक्योरिटी के लिए अधिक अनुमानित और प्रबंधनीय तरीके तलाश रहे हैं।’

ग्राहकों को मिलने वाले 3 सबसे बड़े फायदे

 1. वित्तीय राहत: छोटा और अनुमानित पेमेंट शेड्यूल, साथ ही पॉलिसी अवधि के दौरान प्रीमियम स्थिर रहने का फायदा।

2. लगातार सुरक्षा: लंबे समय तक पॉलिसी चालू रहने से अचानक रिन्यूअल मिस होने या कवरेज लैप्स होने का खतरा खत्म।

3. सुविधा और आसानी: हर साल पॉलिसी रिन्यू कराने के झंझट से मुक्ति; सिर्फ एक बार सही निर्णय लें और 3 साल तक निश्चिंत रहें।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Gold Price Today: नवरात्र में सोना ₹1400 सस्ता हुआ, चांदी भी फिसली; जानिए आगे कैसी रहेगी चाल

Gold Price Today: सोने और चांदी की कीमतों में सोमवार को गिरावट आई। दिल्ली में सोना 1,400 रुपये सस्ता हो गया। अब 10 ग्राम सोने का भाव 1.53 लाख रुपये रह गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कमजोरी और रुपये में मजबूती से सोने की कीमतों पर दबाव पड़ा।

ऑल इंडिया सराफा एसोसिएशन के मुताबिक, 24 कैरेट वाले सोने का भाव शुक्रवार को 1,54,400 रुपये प्रति 10 ग्राम था। सोमवार को यह घटकर 1,53,000 रुपये पर आ गया।

चांदी भी सस्ती हुई। इसकी कीमत 2,000 रुपये गिरकर 2,26,500 रुपये प्रति किलो रह गई। शुक्रवार को यह 2,28,500 रुपये प्रति किलो पर बंद हुई थी।

रुपये की मजबूती से सोने को झटका

HDFC Securities के सीनियर एनालिस्ट सौमिल गांधी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार से कमजोर संकेत मिले। इसके अलावा, रुपये में मजबूती ने भी सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव बढ़ाया।

सोमवार को रुपया डॉलर के मुकाबले 96 पैसे मजबूत होकर 95.75 पर बंद हुआ। छह महीने से ज्यादा समय में रुपये की यह एक दिन की सबसे बड़ी बढ़त थी। इससे पहले भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रुपये को संभालने के लिए कई कदम उठाए थे।

गांधी के मुताबिक, घरेलू बाजार में सोने की मांग फिलहाल मिली-जुली है। कीमतें बढ़ने के बाद खरीदारी कमजोर पड़ी है। हालांकि, चीन में छुट्टियों के बाद सोने की मांग बढ़ने की उम्मीद है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी गिरा सोना

विदेशी बाजार में भी सोने की कीमत नीचे आई। हाजिर सोना 17.36 डॉलर यानी 0.41% गिरकर 4,176.88 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। चांदी भी मामूली गिरावट के साथ 60.66 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी।

ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म Lemonn के हेड ऑफ रिसर्च गौरव गर्ग ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना करीब 4,179 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के बावजूद अमेरिकी डॉलर इंडेक्स 18 महीने के ऊंचे स्तर के करीब बना हुआ है। इससे सोने की कीमतों में तेजी पर दबाव पड़ रहा है।

उन्होंने बताया कि रूस से ऊर्जा की सप्लाई बढ़ने की उम्मीद से कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर चिंता कुछ कम हुई है। हालांकि, पश्चिम एशिया में तनाव और समुद्री रास्तों पर जोखिम के कारण तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है।

आगे कैसी रहेगी सोने की चाल?

निवेश प्लेटफॉर्म Giottus.com के CEO विक्रम सुब्बुराज के मुताबिक, फिलहाल सोने का आउटलुक चांदी के मुकाबले मजबूत दिख रहा है। वहीं, चांदी की धीमी बढ़त को देखते हुए निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है।

आने वाले दिनों में बाजार की नजर अमेरिकी डॉलर, बॉन्ड यील्ड और रुपये की चाल पर रहेगी। अमेरिका के महंगाई के आंकड़े भी अहम होंगे। इनसे ब्याज दरों को लेकर संकेत मिल सकते हैं। इसके आधार पर सोने और चांदी की कीमतों में आगे की दिशा तय हो सकती है।

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Retiring at 45: जल्द रिटायरमेंट की तैयारी! नौकरी छोड़ने से पहले कर लें ये कैलकुलेशन

Retiring at 45: जल्दी रिटायर होना काफी आकर्षक लग सकता है लेकिन ऐसा फंड तैयार करना जो 30-40 वर्षों तक या उससे अधिक समय तक खर्चों को पूरा कर सके, इसके लिए सावधानीपूर्वक प्लानिंग की जरूरत होती है। मान लीजिए कि 34 साल की उम्र में आपकी हर महीने की सैलरी ₹1.5 लाख है और आप 45 साल की उम्र तक रिटायर होना चाहते हैं। ऐसे में आपके सामने पहली बड़ी चुनौती यह अनुमान लगाने की है कि भविष्य में आपके खर्च कितने होंगे, रिटायरमेंट के लिए कितने बड़े फंड की जरूरत पड़ेगी और इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए हर महीने कितना निवेश करना होगा।

Retiring at 45: ये है पूरा कैलकुलेशन

बजाज कैपिटल के ज्वाइंट चेयरमैन और एमडी संजीव बजाज का का कहना है कि 45 साल की उम्र में रिटायर होना एक बड़ा लक्ष्य है, लेकिन इसकी शुरुआत निवेश के विकल्प चुनने से नहीं, बल्कि यह समझने से होनी चाहिए कि 45 साल की उम्र में आपका खर्च कितना होगा। चूंकि आपकी उम्र 34 साल है तो आपके पास 11 साल हैं इस प्लानिंग के लिए और इन्हीं 11 साल में जिंदगी भर के लिए खर्चों का इंतजाम करना है। संजीव के मुताबिक इसमें दो चीजों का हल खोजना है- एक तो कम समय में पर्याप्त बड़ा रिटायरमेंट फंड तैयार करना और दूसरा यह सुनिश्चित करना कि वह फंड लंबे समय तक आपके खर्चों को पूरा कर सके।

एक आसान उदाहरण से समझिए इसे। मान लीजिए कि आपका हर महीने का खर्च अभी ₹60 हजार है और अगर महंगाई सालाना 6% की रफ्तार से बढ़े तो जब आप 45 साल के होंगे, तब यही खर्च बढ़कर लगभग ₹1.14 लाख प्रति माह हो सकता है। अब अगर आप रिटायरमेंट के दौरान हर साल अपने फंड का 3.5% निकालने का टारगेट रखते हैं, और महंगाई के हिसाब से निकाली जाने वाले पैसे को हर साल बढ़ाते हैं, तो 40 साल से अधिक के रिटायरमेंट के लिए आपको लगभग ₹3.9 करोड़ के फंड की जरूरत हो सकती है।

अब आता है असली गणित। 11 साल में इस ₹3.9 करोड़ के फंड को तैयार करने के लिए अगर मान लेते हैं कि निवेश की गई पूंजी पर सालाना 10% की रफ्तार से रिटर्न मिल रहा है तो आपको हर महीने लगभग ₹1.7 लाख निवेश करना होगा जोकि ₹1.5 लाख की मौजूदा इनकम से कम है। ऐसे में मौजूदा जीवनशैली और इनकम के हिसाब से 45 साल की उम्र में पूरी तरह रिटायर होना मुश्किल होगा। हालांकि इस कैलकुलेशन से आपको पता चल गया कि कहां क्या बदलाव करना है।

अगर अर्ली-रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाकर 45 साल से 50 वर्ष कर दी जाए तो हर महीने ₹1.15 लाख के निवेश में काम हो जाएगा। इसके अलावा कुछ और तरीके भी अपना सकते हैं जैसे कि रिटायरमेंट के बाद अनुमानित खर्चों को कम करना, सैलरी बढ़ने पर निवेश की रकम बढ़ाना और 45 साल की उम्र के बाद पूरी तरह काम छोड़ने के बजाय पार्ट-टाइम काम या कंसल्टिंग से कुछ कमाई जारी रखना।

कुछ सावधानी और रिस्क समझना भी जरूरी

जल्दी रिटायरमेंट की योजना बनाते समय स्वास्थ्य से जुड़े खर्चों पर खास ध्यान देना चाहिए क्योंकि आमतौर पर नौकरी छोड़ने के बाद कंपनी की तरफ से मिलने वाला हेल्थ इंश्योरेंस भी समाप्त हो जाता है। ऐसे में आपको अपनी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी और भविष्य में मेडिकल खर्चों के लिए अलग से योजना बनानी होगी।

एक और अहम रिस्क मार्केट में बिकवाली का दबाव है। अगर रिटायरमेंट के तुरंत बाद शेयर बाजार में बड़ी गिरावट आ जाती है और आपको अपने खर्चों के लिए गिरते हुए निवेश से पैसा निकालना पड़ता है, तो आपके रिटायरमेंट फंड पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। ऐसी स्थिति से निपटने के लिए कुछ वर्षों के खर्च के बराबर पैसे कम रिस्क वाले एसेट्स में रखने चाहिए। इससे जब शेयर मार्केट में हाहाकार मचा हो, तब जल्दबाजी में पैसे निकालने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

तीन काम करें सबसे पहले

अर्ली-रिटायरमेंट के लिए तीन काम सबसे पहले करना चाहिए-

तीन महीने तक के अपने वास्तविक खर्चों का रिकॉर्ड रखें। इससे आपको पता चलेगा कि हर महीने आपकी जरूरतों पर वास्तव में कितना पैसा खर्च होता है।

म्यूचुअल फंड, शेयर, पीपीएफ और ईपीएफ समेत अपने सभी मौजूदा निवेशों की पूरी लिस्ट बनाएं।

अपने मौजूदा फंड और लक्ष्य के बीच का अंतर निकालें। इससे पता चलेगा कि आपको कितना अतिरिक्त निवेश करना होगा और अपने लक्ष्य के लिए क्या बदलाव जरूरी हैं।

एक लाख रुपये सैलरी तो दिल्ली-NCR में किराए पर रहें या होम लोन लेकर खरीदें घर? एक्सपर्ट से जानें फॉर्मूला और EMI का पूरा कैलकुलेशन

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Amazon Great Indian Festival Sale 2026: ₹25,000 से कम में मिल रहे ये 6 धांसू स्मार्टफोन, फीचर्स में हैं बेस्ट

Amazon Great Indian Festival Sale 2026 इस हफ्ते की शुरुआत में शुरू हुई है। इस सेल में कई लोकप्रिय स्मार्टफोन की कीमतों में बड़ी कटौती की गई है। अगर आप कम बजट में नया फोन खरीदने की सोच रहे हैं, तो ₹25,000 से कम कीमत में एक अच्छा स्मार्टफोन खरीदने का यह बढ़िया मौका है।

सेल में कई ऐसे स्मार्टफोन मिल रहे हैं, जिनमें तेज रिफ्रेश रेट वाली स्क्रीन, बड़ी बैटरी, शानदार कैमरा, दमदार प्रोसेसर और 5G कनेक्टिविटी जैसे फीचर्स दिए गए हैं। इन फोन पर मिल रहे डिस्काउंट के अलावा, चुनिंदा बैंक कार्ड से पेमेंट करने पर तुरंत छूट भी मिल सकती है। साथ ही, ग्राहक नो-कॉस्ट EMI का विकल्प चुनकर आसान किस्तों में भी फोन खरीद सकते हैं।

Amazon Great Indian Festival 2026: ₹25,000 से कम कीमत वाले स्मार्टफोन पर डील्स

इस साल की Amazon Great Indian Festival Sale, दशहरा और दिवाली से पहले iQOO, Samsung, OnePlus, Realme और दूसरे ब्रांड्स के स्मार्टफोन पर डिस्काउंट पाने का एक शानदार मौका है। आप SBI क्रेडिट और डेबिट कार्ड और SBI क्रेडिट कार्ड EMI ट्रांजैक्शन पर 10% का डिस्काउंट पा सकते हैं। Amazon Pay ICICI Bank क्रेडिट कार्ड से खरीदारी करने पर 5% कैशबैक भी मिल सकता है।

वहीं, खरीद की असल कीमत को और कम करने के लिए अतिरिक्त एक्सचेंज बोनस और कैशबैक ऑप्शन का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, Realme Narzo 100x 5G अभी ₹22,499 में मिल रहा है, जबकि इसकी ओरिजिनल MRP ₹35,999 है। एक्सचेंज ऑफर के जरिए ₹23,050 तक की अतिरिक्त बचत की जा सकती है। खरीदार चुनिंदा SBI क्रेडिट और डेबिट कार्ड पर ₹1,250 तक के डिस्काउंट वाले बैंक ऑफर का भी फायदा उठा सकते हैं।

ग्राहक नो-कॉस्ट EMI के आसान विकल्पों का भी फायदा उठा सकते हैं। इसके तहत चुनिंदा क्रेडिट कार्ड, बजाज फिनसर्व कार्ड और Amazon Pay Later के जरिए बिना ब्याज दिए किस्तों में फोन खरीदने का मौका मिल सकता है।

नीचे Amazon Great Indian Festival Sale 2026 के दौरान ₹25,000 से कम कीमत में मिलने वाले बेहतरीन स्मार्टफोन डील्स की लिस्ट दी गई है। खरीदारी करने से पहले आप Flipkart और दूसरी ई-कॉमर्स वेबसाइटों पर भी इन फोन की कीमतों की तुलना कर सकते हैं, ताकि आपको सबसे अच्छी डील मिल सके।

स्मार्टफोन का नामअसली कीमतसेल में कीमतखरीदें
Redmi 17 5G₹39,999₹23,998अभी खरीदें
OnePlus N6₹30,999₹23,499अभी खरीदें
iQOO Z11xa 5G₹40,999₹24,999अभी खरीदें
Realme Narzo 100x 5G₹35,999₹22,499अभी खरीदें
Samsung Galaxy M47₹46,999₹24,999अभी खरीदें
iQOO Z11 Lite₹30,999₹15,499अभी खरीदें

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