Parag Parikh MF: पराग पारिख फ्लेक्सी कैप फंड ने कैश होल्डिंग घटाई, इन दो कंपनियों पर लगाया बड़ा दांव

Parag Parikh MF: पराग पारिख फ्लेक्सी कैप फंड ने अपने पास रखी नकदी में बड़ी कटौती की है। एक साल पहले फंड की कैश होल्डिंग करीब 24% थी। अब यह घटकर 9.7% रह गई है। शेयरों की कीमतों में गिरावट के बाद फंड को निवेश के नए मौके दिख रहे हैं। इसलिए उसने बाजार में पैसा लगाना बढ़ा दिया है।

PPFAS Mutual Fund के को-फंड मैनेजर (इक्विटी) और हेड ऑफ रिसर्च रौनक ओंकार ने CNBC-TV18 को एक इंटरव्यू में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि शेयरों की वैल्यूएशन अब पहले के मुकाबले आकर्षक हो रही है। फंड को कुछ कंपनियों के शेयर कम कीमत पर मिल रहे हैं। इसलिए उसने इन कंपनियों में अच्छी-खासी रकम लगाई है।

ओंकार ने बताया कि फंड ऐसी कंपनियों पर भी नजर रख रहा है, जिनके कारोबार से लगातार कैश आता है। फिलहाल बाजार का ज्यादा ध्यान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा सेंटर और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों पर है। इस वजह से कई दूसरी कंपनियों पर निवेशकों का ध्यान कम गया है।

उनके मुताबिक, ऐसी कुछ कंपनियों के शेयर उनकी कमाई और कैश फ्लो के मुकाबले कम वैल्यूएशन पर मिल रहे हैं। इससे मजबूत कारोबार वाली कंपनियों में निवेश का मौका बन रहा है।

DLF में PPFAS क्यों लगा रहा है पैसा?

PPFAS Mutual Fund ने अपने पोर्टफोलियो में रियल एस्टेट कंपनी DLF के शेयर भी शामिल किए हैं। ओंकार ने बताया कि DLF के पास काफी बड़ी जमीन है। कंपनी के पास प्रोजेक्ट पूरे करने की अच्छी क्षमता भी है। इसके अलावा, उसने अपना कर्ज कम किया है। इससे कंपनी की वित्तीय स्थिति मजबूत हुई है।

ओंकार के मुताबिक, अब DLF में निवेश का मौका इस बात में है कि कंपनी अपनी जमीन का इस्तेमाल किस तरह करती है। वह नए प्रोजेक्ट बनाकर कारोबार बढ़ा सकती है। साथ ही, उसके कमर्शियल प्रॉपर्टी से किराये के रूप में लगातार कैश भी आता है।

उन्होंने यह भी कहा कि DLF की बैलेंस शीट पहले से मजबूत है। कर्ज कम होने के कारण कंपनी के पास विस्तार के लिए ज्यादा गुंजाइश है। इससे वह उत्तर भारत के अपने पारंपरिक बाजार से आगे दूसरे क्षेत्रों में भी कारोबार बढ़ा सकती है।

CMS Info Systems पर क्यों है PPFAS की नजर?

PPFAS Mutual Fund ने CMS Info Systems में भी निवेश किया है। इस कंपनी के कारोबार का एक बड़ा हिस्सा कैश से जुड़ा है। ओंकार के मुताबिक, देश की अर्थव्यवस्था में आज भी नकदी का इस्तेमाल हो रहा है। इसलिए बैंकों और दूसरे कैश एक्सेस पॉइंट्स के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत बनी हुई है।

उन्होंने कहा कि देश में चलन में मौजूद नकदी का स्तर नोटबंदी के समय के मुकाबले ज्यादा है। अर्थव्यवस्था में कई तरह के लेनदेन अब भी कैश से होते हैं। ऐसे में बैंकों और दूसरी जगहों पर नकदी पहुंचाने और उसे संभालने के लिए भरोसेमंद ऑपरेटर जरूरी हैं।

CMS Info Systems इसी तरह के काम से जुड़ी कंपनी है। वह कैश लेनदेन के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर संभालती है। हालांकि, ओंकार ने यह भी माना कि कंपनी के मुख्य कारोबार में ऑर्गेनिक ग्रोथ बहुत मजबूत नहीं है। इसी वजह से उसके शेयर की वैल्यूएशन भी ज्यादा ऊंची नहीं है।

इसके बावजूद कंपनी का कैश फ्लो मजबूत है। यानी कारोबार से उसके पास लगातार पैसा आता है। कंपनी अपने मौजूदा कारोबार से जुड़े दूसरे क्षेत्रों में भी विस्तार के मौके तलाश रही है।

प्राइवेट बैंकों में 20% निवेश से संतुष्ट है PPFAS

PPFAS Mutual Fund के पोर्टफोलियो का करीब 20% हिस्सा प्राइवेट सेक्टर के बैंकों में लगा है। इसमें HDFC Bank, ICICI Bank, Axis Bank और Kotak Mahindra Bank जैसे शेयर शामिल हैं।

ओंकार ने कहा कि फंड बैंकिंग शेयरों में अपने मौजूदा निवेश से संतुष्ट है। उसे इस सेक्टर में लगातार अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की जरूरत नहीं दिखती। उन्होंने कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि इसमें इससे आगे निवेश बढ़ाते रहना सही होगा। आखिर यह बैंकिंग फंड नहीं है। हमने अपने पोर्टफोलियो में बैंकिंग सेक्टर को एक तय हिस्सेदारी दी है।’

ओंकार ने फंड की मौजूदा पसंद के हिसाब से बैंकों की रैंकिंग भी बताई। इसमें HDFC Bank पहले नंबर पर है। इसके बाद ICICI Bank, Axis Bank और Kotak Mahindra Bank का स्थान है।

हालांकि, यह रैंकिंग हमेशा एक जैसी रहेगी, ऐसा नहीं है। ओंकार के मुताबिक, समय के साथ इन बैंकों में निवेश का अनुपात बदल सकता है। यह बाजार की चाल, शेयरों के प्रदर्शन और संबंधित बैंकों के कारोबार की स्थिति पर निर्भर करेगा।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

YES Bank Q2 Update: यस बैंक का लोन 24% बढ़ा, डिपॉजिट में भी तगड़ा उछाल; फोकस में रहेगा स्टॉक

YES Bank Q2 Update: प्राइवेट बैंक YES Bank ने सितंबर तिमाही का बिजनेस अपडेट जारी किया है। बैंक का लोन और एडवांस 30 सितंबर 2026 तक 3,09,675 करोड़ रुपये रहा। तिमाही आधार पर इसमें 8.6% की बढ़त हुई। वहीं सालाना आधार पर लोन 23.8% बढ़ा है।

डिपॉजिट भी बढ़ा

यस बैंक के डिपॉजिट 30 सितंबर तक 3,54,084 करोड़ रुपये पहुंच गए। तिमाही आधार पर इसमें 12.3% की बढ़ोतरी हुई। सालाना आधार पर डिपॉजिट 19.5% बढ़ा है। एक साल पहले यह 2,96,276 करोड़ रुपये था।

CASA डिपॉजिट में बढ़त

बैंक का CASA यानी करंट और सेविंग अकाउंट डिपॉजिट 1,06,255 करोड़ रुपये रहा। जून तिमाही में यह 1,03,233 करोड़ रुपये था। साल भर पहले यह 99,708 करोड़ रुपये था। हालांकि, CASA रेश्यो घटकर 30% रह गया, जो जून में 32.7% और एक साल पहले 33.7% था।

सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट बढ़ा

YES Bank के सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट 30 सितंबर तक 11,382 करोड़ रुपये रहे। जून तिमाही में यह आंकड़ा 6,604 करोड़ रुपये था। यानी इसमें भी अच्छी बढ़ोतरी हुई है।

क्रेडिट-टू-डिपॉजिट रेश्यो घटा

बैंक का क्रेडिट-टू-डिपॉजिट रेश्यो 87.5% रहा। पिछली तिमाही में यह 90.4% था। एक साल पहले यह 84.5% था। वहीं, कंसोलिडेटेड आधार पर औसत लिक्विडिटी कवरेज रेश्यो 131.4% रहा।

नॉर्मलाइज्ड लोन ग्रोथ 3.3%

FCNR(B) डिपॉजिट और उससे जुड़े विदेशी मुद्रा टर्म लोन को हटाने पर लोन ग्रोथ 3.3% रही। पिछली तिमाही में यह 17.7% थी। इसी तरह, नॉर्मलाइज्ड डिपॉजिट ग्रोथ 6.5% रही, जो पिछली तिमाही में 13.2% थी।

नॉर्मलाइज्ड CASA रेश्यो

FCNR(B) को हटाने के बाद CASA रेश्यो 31.7% रहा। जून तिमाही में यह 32.8% और एक साल पहले 33.7% था। नॉर्मलाइज्ड क्रेडिट-टू-डिपॉजिट रेश्यो 83.2% रहा। पिछली तिमाही में यह 90.4% था।

FCNR(B) को लेकर बैंक की सफाई

बैंक ने बताया कि नॉर्मलाइज्ड आंकड़ों में कुछ FCNR(B) डिपॉजिट शामिल नहीं किए गए हैं। ये डिपॉजिट RBI की रियायती USD/INR फॉरेक्स स्वैप सुविधा के तहत जुटाए गए थे। इनसे जुड़े विदेशी मुद्रा टर्म लोन को भी आंकड़ों से अलग रखा गया है।

30 सितंबर और 30 जून 2026 के आंकड़ों को बकाया FCNR(B) डिपॉजिट और संबंधित लोन के हिसाब से एडजस्ट किया गया है। वहीं, 30 सितंबर 2025 के आंकड़ों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

यस बैंक के शेयरों का हाल

1 अक्टूबर को YES Bank का शेयर 1.19% की गिरावट के साथ 20.70 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 6 महीने में स्टॉक 14.05% चढ़ा है। हालांकि, एक साल के दौरान इसमें 5.61% की गिरावट आई है। यस बैंक का मार्केट कैप 64.95 हजार करोड़ रुपये है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

प्राइवेट बैंक शेयरों के आने वाले हैं अच्छे दिन, तो क्या यह निवेश का सही वक्त है?

प्राइवेट बैंक शेयरों के अच्छे दिन आने वाले हैं। इस साल प्राइवेट बैंक शेयरों का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा है। लेकिन, अब स्थिति बदलने वाली है। यह अनुमान यूबीएस में इंडिया फाइनेंशियल एनालिस्ट आलोक श्रीवास्तव ने जताया है। निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स बीते एक साल में सिर्फ 2.83 फीसदी चढ़ा है, जबकि निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स में इस दौरान 21.69 फीसदी उछाल आया है।

प्राइवेट बैंक शेयरों को लेकर बदल रहा सेंटीमेंट

UBS India Conference 2026 से इतर श्रीवास्तव ने बताया कि अब प्राइवेट बैंक के शेयरों को लेकर सेंटीमेंट बदलता दिख रहा है। काफी समय तक कमजोर प्रदर्शन की वजह से इनवेस्टर्स ने प्राइवेट बैंकों के शेयरों से दूरी बना ली थी। उन्होंने कहा, “प्राइवेट बैंकों के बारे में हमारी सोच काफी पॉजिटिव है। हमें इन शेयरों में दिलचस्पी लौटती दिख रही है।”

नई शाखाएं ओपन करने में प्राइवेट बैंक काफी आगे

उन्होंने यूबीएस थिमैटिक रिपोर्ट का जिक्र करते हुए बताया कि इसमें यह बताया गया है कि बीते तीन से पांच सालों में नई शाखाएं ओपन करने के मामले में कई बड़े प्राइवेट बैंक प्रतिद्वंद्बी बैंकों से काफी आगे चल रहे हैं। इनमें से कई ब्रांच इतने पुराने हो चुके हैं कि उनसे अच्छा रेवेन्यू आने लगा है। इसका असर प्राइवेट बैंकों की कुल डिपॉजिट के साथ ही करेंट अकाउंट सेविंग अकाउंट (CASA) ग्रोथ पर दिखेगा।

कुछ बैंकों में लीडरशिप को लेकर अनिश्चितता कायम

उन्होंने हालांकि यह कहा कि कुछ प्राइवेट बैंकों को लीडरशिप के मामले में अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है। इनवेस्टर्स नए निवेश से पहले इस क्राइसिस के खत्म होने का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अभी प्राइवेट बैंक शेयरों की वैल्यूएशन सही लग रही है। साथ ही FCNR से जुटाए गए डिपॉजिट से ग्रोथ को सपोर्ट मिलेगा।

एचडीएफसी बैंक का शेयर बीते एक साल में 28% गिरा

देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक HDFC Bank का शेयर बीते एक साल में 28.50 फीसदी गिरा है। ICICI Bank का शेयर बीते एक साल में 1.91 फीसदी कमजोर हुआ है। कोटक महिंद्रा बैंक का शेयर इस दौरान सिर्फ 4.96 फीसदी चढ़ा है। हालांकि, एक्सिस बैंक के शेयर में इस दौरान 16 फीसदी से ज्यादा तेजी आई है।

लगातार तीन दिनों की गिरावट के बाद बाजार में रिकवरी

10 सितंबर को लगातार तीन दिनों की गिरावट के बाद शेयर बाजारों में रिकवरी आई। सेंसेक्स 0.19 फीसदी यानी 138 अंक चढ़कर 74,902 पर बंद हुआ। निफ्टी 0.20 फीसदी यानी 46 अंक चढ़कर 23,477 पर बंद हुआ। बैंक निफ्टी में भी 0.31 फीसदी की मजबूती दिखी। हालांकि, निफ्टी मिडकैप इंडेक्स पर दबाव दिखा।

HDFC Bank AGM: आने वाली तिमाहियों में HDFC बैंक के CASA और NIM सुधरेंगे : चेयरमैन राजीव कुमार

HDFC Bank AGM: देश के सबसे बड़े प्राइवेट लेंडर HDFC बैंक के पार्ट-टाइम चेयरमैन राजीव कुमार ने कहा कि बैंक की कॉरपोरेट गवर्नेंस मजबूत है। इसे आगे और सशक्त किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आने वाली कुछ तिमाहियों में CASA (करंट अकाउंट-सेविंग अकाउंट) रेशियो और नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) में सुधार होगा।

मर्जर से बैलेंस शीट का स्ट्रक्चर बदला

राजीव कुमार ने कहा कि HDFC लिमिटेड के मर्जर के बाद बैंक की बैलेंस शीट के स्ट्रक्चर में बदलाव आया है। इसका सबसे ज्यादा असर CASA रेशियो और NIM पर पड़ा।

उन्होंने कहा, ‘हम डिपॉजिट मार्केट में अपनी हिस्सेदारी लगातार बढ़ा रहे हैं। साथ ही कंजम्प्शन आधारित कारोबार पर फोकस बढ़ा रहे हैं। हमें भरोसा है कि अगले 2-3 वर्षों में CASA और NIM दोनों में सुधार होगा।’

पहली बार AGM में किया संबोधन

राजीव कुमार ने 5 अगस्त को बैंक की 32वीं एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) को संबोधित किया। यह उनका चेयरमैन के तौर पर पहला संबोधन था।

उन्होंने कहा कि बैंक की कार्यसंस्कृति मजबूत है। आंतरिक नियंत्रण प्रणाली भी मजबूत बनी हुई है। उन्होंने कहा, ‘हम अपने शेयरधारकों, ग्राहकों और सभी हितधारकों के भरोसे की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। बैंक के कामकाज का तरीका और आंतरिक नियंत्रण प्रणाली मजबूत है। इसे आगे और सशक्त बनाया जाएगा।’

पूर्व चेयरमैन के इस्तीफे के बाद आया बयान

राजीव कुमार का यह बयान अहम माना जा रहा है। मार्च में तत्कालीन पार्ट-टाइम चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने नैतिक मूल्यों में मतभेद की बात कही थी। इसके बाद स्वतंत्र कानूनी जांच कराई गई। जून में आई रिपोर्ट में किसी तरह की गवर्नेंस या नैतिक चूक के सबूत नहीं मिले।

CEO के तीसरे कार्यकाल पर चुप्पी

राजीव कुमार ने कहा कि बोर्ड में नई नियुक्तियां सिर्फ मेरिट के आधार पर होंगी। उन्होंने कहा कि योग्यता, ईमानदारी और पेशेवर उत्कृष्टता को ही प्राथमिकता दी जाएगी।

हाल के महीनों में MD और CEO शशिधर जगदीशन के तीसरे कार्यकाल को लेकर चर्चा रही है। हालांकि, राजीव कुमार ने अपने संबोधन में इस मुद्दे का जिक्र नहीं किया।

 

डिपॉजिट ग्रोथ रही मजबूत

राजीव कुमार ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में HDFC बैंक के डिपॉजिट में 14.4% की बढ़ोतरी हुई। यह पूरे बैंकिंग सिस्टम की 11.5% वृद्धि से बेहतर रही। वहीं, इसी अवधि में बैंक के एडवांस (लोन) 12.1% बढ़े।

राजीव कुमार ने कहा कि HDFC बैंक से पहली बार होम लोन लेने वाले 95% से ज्यादा ग्राहक बैंक में सेविंग अकाउंट भी खोल रहे हैं। इससे मर्जर के बाद क्रॉस-सेलिंग के अवसर बढ़े हैं।

HDFC बैंक के शेयरों का हाल

HDFC बैंक के शेयर बुधवार को 0.99% की गिरावट के साथ 734.65 रुपये पर बंद हुए। पिछले 1 महीने में स्टॉक 11.47% गिरा है। वही, 1 साल के दौरान 25.70% टूटा है। पिछले 5 साल का रिटर्न भी 1.56% नेगेटिव हो गया है। बैंक का मार्केट कैप 5.65 लाख करोड़ रुपये है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।