Parag Parikh Flexi Cap Fund: पराग पारिख में पैसा लगाना बंद कर रहे निवेशक? 6 महीने में 77% घटा निवेश

Parag Parikh Flexi Cap Fund: पराग पारिख फ्लेक्सी कैप फंड में हर महीने आने वाला अनुमानित निवेश तेजी से घटा है। मार्च 2026 में यह करीब ₹3,950 करोड़ था। सितंबर में घटकर सिर्फ ₹900 करोड़ रह गया। यानी 6 महीने में करीब 77% की गिरावट आई। हालांकि, फंड में पैसा आना बंद नहीं हुआ है। इसके बावजूद फंड मैनेजर ने नए शेयरों और दूसरे निवेश विकल्पों में पैसा लगाना जारी रखा है।

फंड की कैश होल्डिंग भी काफी घटी है। मार्च में कुल संपत्ति का 18.94% पैसा कैश में था। सितंबर में यह घटकर 9.77% रह गया। इस दौरान फंड को रियल एस्टेट, REITs और चुनिंदा ऑयल एंड गैस कंपनियों में निवेश के मौके मिले।

फंड में निवेश क्यों घटा?

PPFAS Mutual Fund के फंड मैनेजर राज मेहता ने Moneycontrol को बताया कि निवेश में कमी से फंड की रणनीति नहीं बदली है। उनके मुताबिक, फंड में अब भी नया पैसा आ रहा है।

उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में मिडकैप और स्मॉलकैप फंडों का प्रदर्शन बेहतर रहा है। ऐसे में निवेशकों का रुझान भी उनकी तरफ बढ़ा है। अक्सर निवेशक हालिया रिटर्न देखकर अपना पैसा लगाने का फैसला करते हैं।

कैश में पैसा रखने के बजाय कहां निवेश किया?

राज मेहता के मुताबिक, फंड कितना पैसा कैश में रखेगा, यह बाजार के स्तर से ज्यादा निवेश के मौकों पर निर्भर करता है। बाजार में लंबे समय तक खास तेजी न आने और कुछ शेयरों की कीमत घटने से फंड को खरीदारी के मौके मिले। इसलिए उसने कैश घटाकर शेयरों में निवेश बढ़ाया।

सितंबर की फैक्टशीट के मुताबिक, फंड की कुल संपत्ति का 72.06% हिस्सा भारतीय कोर इक्विटी में था। वहीं, 11.90% विदेशी सिक्योरिटीज, IDR और ADR में लगा था। REITs और InvITs में निवेश 6.27% था।

सितंबर में किन शेयरों में बढ़ाया निवेश?

अगस्त के मुकाबले सितंबर में DLF में सबसे ज्यादा नया निवेश किया गया। फंड की कुल संपत्ति का 1.81% हिस्सा इसमें लगाया गया। इसके अलावा Mahindra & Mahindra, Indus Towers, Bharti Airtel और कुछ ऑयल एंड गैस कंपनियों में भी निवेश बढ़ाया गया।

दूसरी तरफ, फंड ने Great Eastern Shipping Company से अपना निवेश निकाल लिया। अगस्त में इस शेयर में फंड की संपत्ति का 0.11% हिस्सा लगा था।

फंड के पास Embassy Office Parks REIT में 2.49%, Knowledge Realty Trust में 2.18% और Brookfield India Real Estate Trust में 1.60% निवेश था।

फंड का रिटर्न कैसा रहा?

हाल के प्रदर्शन की बात करें तो फंड का रिटर्न कमजोर रहा है। इसके रेगुलर प्लान ने एक साल में 4.14% निगेटिव रिटर्न दिया। वहीं, बेंचमार्क Nifty 500 TRI में 2.03% की गिरावट आई।

हालांकि, तीन, पांच और दस साल की अवधि में फंड ने अपने बेंचमार्क से बेहतर प्रदर्शन किया।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

LTCG Tax: क्या अमेरिकी शेयरों की कमाई पर मिलेगा ₹1.25 लाख टैक्स छूट का फायदा? जानें क्या कहते हैं नियम

LTCG Tax on Global Stocks: बजट 2027 से पहले लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स और सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के रुख ने इक्विटी टैक्सेशन पर नई बहस छेड़ दी है। विदेशी निवेशकों की निकासी और भारतीय इक्विटी की प्रतिस्पर्धा को लेकर चिंताओं के बीच निवेशक राहत की उम्मीद कर रहे हैं।

एक बड़ा सवाल यह है कि क्या भारत में चुनिंदा इक्विटी निवेशों पर मिलने वाली ₹1.25 लाख सालाना LTCG टैक्स छूट का फायदा विदेशी शेयरों पर भी मिल सकता है। आइए जानते हैं कि विदेशी शेयरों पर कैपिटल गेन्स पर टैक्स कैसे लगता है और कौन से निवेश इसके दायरे में आते हैं।

क्या ग्लोबल शेयरों पर ₹1.25 लाख की सालाना LTCG टैक्स छूट मिलती है?

आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 198 के तहत मिलने वाला ₹1.25 लाख का सालाना थ्रेशोल्ड सिर्फ इसलिए विदेशी शेयरों के मुनाफे पर लागू नहीं होता कि वे विदेशी एक्सचेंजों पर सूचीबद्ध हैं या लंबे समय तक रखे गए हैं।

इस प्रावधान में केवल वे लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स शामिल हैं जो योग्य इक्विटी शेयरों, इक्विटी-ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड्स की यूनिट्स और बिजनेस ट्रस्टों की यूनिट्स से मिलते हैं, बशर्ते वे निर्धारित सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) की शर्तों को पूरा करते हों।

विदेशी शेयर आमतौर पर इन शर्तों को पूरा नहीं करते हैं। धारा 197 के तहत उनके लॉन्ग-टर्म मुनाफे पर बिना ₹1.25 लाख की छूट के 12.5 प्रतिशत की दर से टैक्स लगता है, जिसमें लागू सरचार्ज और सेस शामिल हैं।

उदाहरण के लिए, अगर किसी भारतीय निवासी को अमेरिकी शेयरों से ₹1 लाख का लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन होता है, तो यह मुनाफा सिर्फ इसलिए टैक्स-फ्री नहीं हो जाता कि यह ₹1.25 लाख से कम है। किसी अन्य राहत या एडजस्टमेंट को छोड़कर, इस पर सरचार्ज और सेस से पहले ₹12,500 का टैक्स बनेगा।

ग्लोबल शेयरों पर LTCG और STCG की गणना कैसे की जाती है?

विदेशी शेयरों पर कैपिटल गेन्स की गणना, बिक्री मूल्य में से खरीद लागत और ट्रांसफर से जुड़े योग्य खर्चों को घटाकर की जाती है। निवेशकों को इसमें विदेशी मुद्रा रूपांतरण के नियमों का भी ध्यान रखना होता है।

धारा 2(101) के तहत, विदेशी एक्सचेंजों पर सूचीबद्ध शेयर उन एसेट्स की श्रेणी में आते हैं जिन पर मान्यता प्राप्त भारतीय स्टॉक एक्सचेंजों पर सूचीबद्ध विशिष्ट प्रतिभूतियों के मुकाबले 24 महीने की होल्डिंग पीरियड की परीक्षा लागू होती है।

24 महीने या उससे कम समय के लिए रखे गए विदेशी शेयरों से होने वाले मुनाफे को शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स (STCG) माना जाता है और निवेशक के लागू इनकम-टर्म स्लैब दरों के अनुसार टैक्स लगाया जाता है। वहीं, 24 महीने से अधिक समय तक रखे गए शेयर बिना इंडेक्सेशन के 12.5 प्रतिशत की लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स दर के दायरे में आते हैं।

किन अन्य निवेशों को इस छूट से बाहर रखा गया है?

पीएनएएम एंड कंपनी एलएलपी (PNAM & Co. LLP) के पार्टनर मोहित गुप्ता के अनुसार, ₹1.25 लाख का थ्रेशोल्ड सभी प्रकार के लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स के लिए यूनिवर्सल छूट नहीं है। धारा 198 के दायरे से बाहर रहने वाले प्रमुख निवेश ये हैं:

रियल एस्टेट: जमीन या मकान की बिक्री से होने वाला मुनाफा।

सोना और चांदी: भौतिक कीमती धातुओं से होने वाला लाभ।

डेट-ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड: टैक्स का तरीका विशिष्ट म्यूचुअल फंड्स के विशेष नियमों समेत लागू प्रावधानों पर निर्भर करता है।

इंटरनेशनल म्यूचुअल फंड: अगर वे विदेशी इक्विटी में निवेश करते हैं और इक्विटी-ओरिएंटेड फंड की वैधानिक परिभाषा पर खरे नहीं उतरते हैं, तो वे इसके पात्र नहीं हैं।

बॉन्ड और डिबेंचर: टैक्स का स्वरूप इंस्ट्रूमेंट और लागू नियमों के अनुसार अलग-अलग होता है।

अन्य गैर-पात्र एसेट्स: वे मुनाफे जो धारा 198 की पात्रता और STT शर्तों को पूरा नहीं करते।

निवेशकों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

निवेशकों को सबसे पहले यह जांचना चाहिए कि क्या उनके निवेश धारा 198 के तहत योग्य हैं और क्या निर्धारित STT शर्तें पूरी होती हैं।

  • ₹1.25 लाख की छूट की सीमा पात्र मुनाफे के लिए एक संयुक्त वार्षिक सीमा है, न कि प्रत्येक स्टॉक, ब्रोकर, डीमैट खाते या म्यूचुअल फंड निवेश के लिए अलग-अलग मिलने वाली छूट।
  • कैपिटल गेन्स की गणना को सही साबित करने के लिए निवेशकों को खरीद और बिक्री की पुष्टि, ब्रोकरेज स्टेटमेंट, ट्रांजैक्शन खर्च और विदेशी मुद्रा रूपांतरण के रिकॉर्ड संभाल कर रखने चाहिए।
  • निवेशक की रेसिडेंशियल स्थिति और फाइलिंग की परिस्थितियों के आधार पर विदेशी निवेशों में विदेशी संपत्ति और विदेशी आय से जुड़े अतिरिक्त खुलासे की जरूरत पड़ सकती है।
  • जिन निवेशकों ने विदेश में टैक्स चुकाया है, उन्हें अलग से यह आकलन करना चाहिए कि क्या वे लागू प्रावधानों और संधि की शर्तों के तहत विदेशी कर क्रेडिट का दावा कर सकते हैं।

मुख्य अंतर यह है कि किसी निवेश को लंबे समय तक होल्ड करने मात्र से उसका मुनाफा स्वचालित रूप से ₹1.25 लाख की छूट के योग्य नहीं हो जाता। अपनी टैक्स देनदारी की गणना करने से पहले निवेशकों को एसेट कैटेगरी और प्रासंगिक वैधानिक शर्तों की जांच जरूर करनी चाहिए।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Axis Mutual Fund का नया फंड लॉन्च, EV और ऑटो सेक्टर की कंपनियों पर लगेगा पैसा; ₹100 से कर सकेंगे निवेश

Axis Mutual Fund ने इलेक्ट्रिक गाड़ियों और नई ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी से जुड़ी कंपनियों में निवेश का नया विकल्प पेश किया है। कंपनी ने Axis Nifty EV & New Age Automotive Index Fund लॉन्च किया है। यह एक इंडेक्स फंड है, जो इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और नए जमाने की ऑटो इंडस्ट्री से जुड़ी कंपनियों में निवेश करेगा।

इस फंड का न्यू फंड ऑफर (NFO) 16 अक्टूबर को खुल गया है। इसमें 30 अक्टूबर 2026 तक निवेश किया जा सकता है। निवेश की शुरुआत सिर्फ ₹100 से होगी। इसके बाद ₹1 के गुणक में रकम बढ़ाई जा सकती है।

फंड की खास बातें

फंड को नंदिक मलिक और रोहित गौतम मैनेज करेंगे। यह एक ओपन-एंडेड इंडेक्स फंड है। इसका मतलब है कि निवेशक तय नियमों के मुताबिक इसमें निवेश कर सकते हैं और यूनिट बेचकर पैसा निकाल भी सकते हैं। हालांकि, जल्दी पैसा निकालने पर एग्जिट लोड देना पड़ सकता है।

अगर निवेशक यूनिट खरीदने के 15 दिन के भीतर पैसा निकालते हैं, तो 0.25% एग्जिट लोड लगेगा। 15 दिन के बाद पैसा निकालने पर

एग्जिट लोड नहीं लगेगा।

फंड का बेंचमार्क Nifty EV & New Age Automotive TRI होगा। इसका मकसद इस इंडेक्स के प्रदर्शन के मुताबिक रिटर्न देना है। हालांकि, इंडेक्स के रिटर्न और फंड के रिटर्न में थोड़ा अंतर हो सकता है।

किन कंपनियों में लगेगा पैसा?

यह फंड इलेक्ट्रिक गाड़ियों और नई ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी से जुड़ी कंपनियों में निवेश करेगा। इसमें गाड़ी बनाने वाली कंपनियों के साथ बैटरी, ऑटो पार्ट्स, कच्चे माल और आधुनिक ऑटो टेक्नोलॉजी से जुड़ी कंपनियां भी शामिल हो सकती हैं।

इसका आधार Nifty EV & New Age Automotive Index होगा। इस इंडेक्स में Nifty 500 से तय शर्तों को पूरा करने वाली कंपनियों को चुना जाता है। इनमें कारोबार और शेयरों में खरीद-बिक्री से जुड़ी शर्तें भी शामिल हैं।

30 सितंबर 2026 तक इस इंडेक्स में बड़ी कंपनियों की हिस्सेदारी 44% थी। मिडकैप कंपनियों की हिस्सेदारी 29% और स्मॉलकैप कंपनियों की 27% थी। इंडेक्स की समीक्षा और बदलाव साल में दो बार, मार्च और सितंबर में किए जाते हैं।

EV बाजार में बढ़ती हिस्सेदारी पर नजर

Axis Mutual Fund के मुताबिक, भारत में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की हिस्सेदारी FY21 में 1% से भी कम थी। FY26 में यह बढ़कर 9.4% हो गई।

कंपनी का मानना है कि बैटरी की लागत, टेक्नोलॉजी और चार्जिंग की सुविधा में सुधार से इस सेक्टर को आगे बढ़ने में मदद मिल सकती है। इलेक्ट्रिक गाड़ियों का असर सिर्फ ऑटो कंपनियों तक सीमित नहीं है। इससे बैटरी, ऑटो पार्ट्स और दूसरे संबंधित कारोबार को भी फायदा मिल सकता है।

Axis AMC के MD और CEO बी. गोपकुमार ने कहा कि इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर बढ़ता रुझान ऑटो इंडस्ट्री को बदल रहा है। कंपनी का कहना है कि यह फंड निवेशकों को इस बदलाव से जुड़ी अलग-अलग तरह की कंपनियों में एक साथ निवेश का मौका देगा।

निवेश से पहले इन बातों को समझें

इस फंड के जरिए निवेशकों को अलग-अलग कंपनियों के शेयर खुद चुनने की जरूरत नहीं होगी। फंड इंडेक्स में शामिल कंपनियों के मुताबिक निवेश करेगा। हालांकि, यह थीमैटिक इक्विटी फंड है। इसलिए इसका प्रदर्शन EV और ऑटो सेक्टर की स्थिति से प्रभावित हो सकता है।

अगर इस सेक्टर की कंपनियों के शेयर गिरते हैं, तो फंड की वैल्यू भी घट सकती है। इंडेक्स को ट्रैक करने के बावजूद फंड का रिटर्न बिल्कुल उसके बराबर रहने की गारंटी नहीं है। कंपनी ने भी साफ किया है कि निवेश का उद्देश्य पूरा होने की कोई गारंटी नहीं है।

इसलिए अपनी जोखिम उठाने की क्षमता, निवेश की अवधि और वित्तीय लक्ष्य को ध्यान में रखकर ही फैसला लें। जरूरत पड़ने पर वित्तीय सलाहकार से भी बात कर सकते हैं।

हेल्थ पॉलिसी के बावजूद हॉस्पिटल का 3 लाख बिल जेब से भरना है, FD तोड़े या किसी से उधार लें?

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

1 करोड़ रुपये हैं तो FD, म्यूचुअल फंड या इक्विटी में कहां लगाएं पैसा? उम्र के हिसाब से जानिए पूरा प्लान

मान लीजिए कि कोई प्रॉपर्टी बेचने या विरासत में मिली रकम के कारण आपके बैंक खाते में 1 करोड़ रुपये आ गए हैं। इन सभी पैसों को फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में डाल देना सबसे आसान विकल्प लग सकता है। वहीं, पूरी रकम को शेयर या म्यूचुअल फंड में लगाने से बेहतर ग्रोथ मिल सकती है, लेकिन इसमें बाजार के उतार-चढ़ाव के कारण आपकी बचत को नुकसान होने का जोखिम भी रहता है। चुनौती यह है कि इन दोनों के बीच एक सही संतुलन कैसे बनाया जाए।

इसकी शुरुआत आप अपनी उम्र को ध्यान में रखकर कर सकते हैं। 30 की उम्र वाले किसी व्यक्ति के पास नियमित सैलरी का सहारा हो सकता है, जो बाजार कमजोर होने पर काम आ सकती है। वहीं, रिटायर हो चुके व्यक्ति को अपने रोजमर्रा के खर्चों, मेडिकल बिलों और अन्य जरूरतों के लिए इसी 1 करोड़ रुपये पर निर्भर रहना पड़ सकता है। आपका निवेश प्लान इसी अंतर को ध्यान में रखकर तैयार किया जाना चाहिए।

30 की उम्र में, समय का फायदा उठाएं

अगर रिटायरमेंट में अभी भी 25 या 30 साल का समय है, तो आपके पास बाजार के उतार-चढ़ाव को संभालने के लिए काफी समय है। आप अपनी रकम का एक हिस्सा डायवर्सिफाइड इक्विटी म्यूचुअल फंड में लगा सकते हैं। इनमें लंबे समय में अच्छी ग्रोथ की संभावना तो होती है, लेकिन रिटर्न की कोई गारंटी नहीं होती।

उदाहरण के लिए, 35 साल के किसी व्यक्ति को लें, जिसे नियमित सैलरी मिलती है। अगर आने वाले समय में कोई बड़ा खर्च नहीं है, तो आप अपनी रकम को इस तरह बांट सकते हैं। 60 लाख रुपये इक्विटी फंड में, 30 लाख रुपये फिक्स्ड-इनकम निवेश (जैसे FD या बॉन्ड) में और 10 लाख रुपये ऐसी बचत में जिसे जरूरत पड़ने पर आसानी से निकाला जा सके। लेकिन, अगर आप अगले 3 सालों में घर खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो यह बंटवारा बदल जाएगा। घर के डाउन पेमेंट के लिए जरूरी पैसों को इस बात पर निर्भर नहीं छोड़ना चाहिए कि उस समय शेयर बाजार कैसा प्रदर्शन करेगा। इसके बजाय, इस रकम को ऐसे निवेश विकल्पों में रखें जो अपेक्षाकृत स्थिर हों।

40 और 50 की उम्र में, जोखिम पर ज्यादा ध्यान दें

इस उम्र तक पहुंचते-पहुंचते, रिटायरमेंट अब कोई दूर की बात नहीं रह जाती। बच्चों की स्कूल-कॉलेज की फीस, होम लोन की किस्तें और माता-पिता की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतें आपकी मासिक आय का एक बड़ा हिस्सा ले सकती हैं। ऐसे में अगर आपको जल्द ही पैसों की जरूरत पड़े और आपके निवेश की वैल्यू में भारी गिरावट आ जाए, तो स्थिति को संभालना मुश्किल हो सकता है। 40 के दशक के आखिर में चल रहे लोग अपनी कुल रकम का 40 से 60 प्रतिशत हिस्सा इक्विटी में लगाने पर विचार कर सकते हैं, जबकि बाकी हिस्सा फिक्स्ड-इनकम प्रोडक्ट्स और लिक्विड सेविंग्स में रखा जा सकता है। यह सिर्फ एक उदाहरण है। जिस व्यक्ति के पास पेंशन या कोई पक्की आय का साधन है, वह उस व्यक्ति की तुलना में अधिक जोखिम उठा सकता है, जिसे रिटायरमेंट के बाद मुख्य रूप से इसी पैसे पर निर्भर रहना है।

फिक्स्ड डिपॉजिट, उपयुक्त डेट फंड और सरकारी बचत योजनाओं पर विचार किया जा सकता है। किसी भी विकल्प को चुनने से पहले उस पर लगने वाले टैक्स और पैसे निकालने के नियमों को जरूर देख लें। अगर किसी जरूरी खर्च के समय आपका पैसा कहीं फंस जाए, तो बहुत अधिक रिटर्न का वादा भी किसी काम का नहीं रहता।

60 की उम्र के बाद, मासिक खर्चों के लिए योजना बनाएं

रिटायर होने वाले लोगों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह होता है कि उनका पैसा कितने समय तक चलेगा। घर के नियमित खर्च, दवाइयों का खर्च और अचानक आने वाले अस्पताल के बिल धीरे-धीरे आपकी बचत को कम कर सकते हैं। कुछ पैसा सेविंग्स अकाउंट या शॉर्ट-टर्म डिपॉजिट में रखने से तुरंत आने वाली जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है। बाकी बची रकम को उपयुक्त फिक्स्ड-इनकम निवेशों में लगाया जा सकता है। अगर आप बाजार के जोखिम को उठा सकते हैं, तो इसमें कुछ हिस्सा इक्विटी में भी निवेश किया जा सकता है।

पूरी रकम को बिना सोचे-समझे निवेश न करें

निवेश करने से पहले, इमरजेंसी फंड के लिए कुछ पैसा अलग रख लें और महंगे कर्ज चुका दें। यह भी जांच लें कि आपका हेल्थ इंश्योरेंस पर्याप्त है या नहीं, खासकर तब जब आप रिटायरमेंट के करीब हों। साथ ही, उन खर्चों का भी ध्यान रखें जिन्हें टाला नहीं जा सकता।

साल में एक बार अपने निवेश की समीक्षा (रिव्यू) जरूर करें। अगर आपके पोर्टफोलियो का कोई एक हिस्सा बाकी हिस्सों की तुलना में बहुत तेजी से बढ़ गया है, तो आपको उसे फिर से संतुलित (रीबैलेंस) करने की जरूरत पड़ सकती है। याद रखें कि डेट प्रोडक्ट्स में भी जोखिम होता है, और टैक्स व अन्य शुल्क आपके रिटर्न को कम कर सकते हैं।

1 करोड़ रुपये की रकम आपको एक अच्छी शुरुआत दे सकती है, लेकिन यह सिर्फ इस बात पर निर्भर नहीं करता कि आपके पास कितनी रकम है, बल्कि इस बात पर भी निर्भर करता है कि आपने उसे कहां निवेश किया है। अपने भविष्य के खर्चों को ध्यान में रखकर निवेश करें, न कि सिर्फ अपनी उम्र या किसी और के बताए गए रिटर्न को देखकर।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Parag Parikh MF: पराग पारिख फ्लेक्सी कैप फंड ने कैश होल्डिंग घटाई, इन दो कंपनियों पर लगाया बड़ा दांव

Parag Parikh MF: पराग पारिख फ्लेक्सी कैप फंड ने अपने पास रखी नकदी में बड़ी कटौती की है। एक साल पहले फंड की कैश होल्डिंग करीब 24% थी। अब यह घटकर 9.7% रह गई है। शेयरों की कीमतों में गिरावट के बाद फंड को निवेश के नए मौके दिख रहे हैं। इसलिए उसने बाजार में पैसा लगाना बढ़ा दिया है।

PPFAS Mutual Fund के को-फंड मैनेजर (इक्विटी) और हेड ऑफ रिसर्च रौनक ओंकार ने CNBC-TV18 को एक इंटरव्यू में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि शेयरों की वैल्यूएशन अब पहले के मुकाबले आकर्षक हो रही है। फंड को कुछ कंपनियों के शेयर कम कीमत पर मिल रहे हैं। इसलिए उसने इन कंपनियों में अच्छी-खासी रकम लगाई है।

ओंकार ने बताया कि फंड ऐसी कंपनियों पर भी नजर रख रहा है, जिनके कारोबार से लगातार कैश आता है। फिलहाल बाजार का ज्यादा ध्यान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा सेंटर और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों पर है। इस वजह से कई दूसरी कंपनियों पर निवेशकों का ध्यान कम गया है।

उनके मुताबिक, ऐसी कुछ कंपनियों के शेयर उनकी कमाई और कैश फ्लो के मुकाबले कम वैल्यूएशन पर मिल रहे हैं। इससे मजबूत कारोबार वाली कंपनियों में निवेश का मौका बन रहा है।

DLF में PPFAS क्यों लगा रहा है पैसा?

PPFAS Mutual Fund ने अपने पोर्टफोलियो में रियल एस्टेट कंपनी DLF के शेयर भी शामिल किए हैं। ओंकार ने बताया कि DLF के पास काफी बड़ी जमीन है। कंपनी के पास प्रोजेक्ट पूरे करने की अच्छी क्षमता भी है। इसके अलावा, उसने अपना कर्ज कम किया है। इससे कंपनी की वित्तीय स्थिति मजबूत हुई है।

ओंकार के मुताबिक, अब DLF में निवेश का मौका इस बात में है कि कंपनी अपनी जमीन का इस्तेमाल किस तरह करती है। वह नए प्रोजेक्ट बनाकर कारोबार बढ़ा सकती है। साथ ही, उसके कमर्शियल प्रॉपर्टी से किराये के रूप में लगातार कैश भी आता है।

उन्होंने यह भी कहा कि DLF की बैलेंस शीट पहले से मजबूत है। कर्ज कम होने के कारण कंपनी के पास विस्तार के लिए ज्यादा गुंजाइश है। इससे वह उत्तर भारत के अपने पारंपरिक बाजार से आगे दूसरे क्षेत्रों में भी कारोबार बढ़ा सकती है।

CMS Info Systems पर क्यों है PPFAS की नजर?

PPFAS Mutual Fund ने CMS Info Systems में भी निवेश किया है। इस कंपनी के कारोबार का एक बड़ा हिस्सा कैश से जुड़ा है। ओंकार के मुताबिक, देश की अर्थव्यवस्था में आज भी नकदी का इस्तेमाल हो रहा है। इसलिए बैंकों और दूसरे कैश एक्सेस पॉइंट्स के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत बनी हुई है।

उन्होंने कहा कि देश में चलन में मौजूद नकदी का स्तर नोटबंदी के समय के मुकाबले ज्यादा है। अर्थव्यवस्था में कई तरह के लेनदेन अब भी कैश से होते हैं। ऐसे में बैंकों और दूसरी जगहों पर नकदी पहुंचाने और उसे संभालने के लिए भरोसेमंद ऑपरेटर जरूरी हैं।

CMS Info Systems इसी तरह के काम से जुड़ी कंपनी है। वह कैश लेनदेन के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर संभालती है। हालांकि, ओंकार ने यह भी माना कि कंपनी के मुख्य कारोबार में ऑर्गेनिक ग्रोथ बहुत मजबूत नहीं है। इसी वजह से उसके शेयर की वैल्यूएशन भी ज्यादा ऊंची नहीं है।

इसके बावजूद कंपनी का कैश फ्लो मजबूत है। यानी कारोबार से उसके पास लगातार पैसा आता है। कंपनी अपने मौजूदा कारोबार से जुड़े दूसरे क्षेत्रों में भी विस्तार के मौके तलाश रही है।

प्राइवेट बैंकों में 20% निवेश से संतुष्ट है PPFAS

PPFAS Mutual Fund के पोर्टफोलियो का करीब 20% हिस्सा प्राइवेट सेक्टर के बैंकों में लगा है। इसमें HDFC Bank, ICICI Bank, Axis Bank और Kotak Mahindra Bank जैसे शेयर शामिल हैं।

ओंकार ने कहा कि फंड बैंकिंग शेयरों में अपने मौजूदा निवेश से संतुष्ट है। उसे इस सेक्टर में लगातार अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की जरूरत नहीं दिखती। उन्होंने कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि इसमें इससे आगे निवेश बढ़ाते रहना सही होगा। आखिर यह बैंकिंग फंड नहीं है। हमने अपने पोर्टफोलियो में बैंकिंग सेक्टर को एक तय हिस्सेदारी दी है।’

ओंकार ने फंड की मौजूदा पसंद के हिसाब से बैंकों की रैंकिंग भी बताई। इसमें HDFC Bank पहले नंबर पर है। इसके बाद ICICI Bank, Axis Bank और Kotak Mahindra Bank का स्थान है।

हालांकि, यह रैंकिंग हमेशा एक जैसी रहेगी, ऐसा नहीं है। ओंकार के मुताबिक, समय के साथ इन बैंकों में निवेश का अनुपात बदल सकता है। यह बाजार की चाल, शेयरों के प्रदर्शन और संबंधित बैंकों के कारोबार की स्थिति पर निर्भर करेगा।

Personal Loan EMI: ₹5 लाख के लोन पर कितना ब्याज देना पड़ेगा? समझिए पूरा कैलकुलेशन

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

SIP Calculator: हर महीने ₹1000 की SIP से 20 साल में कितना पैसा बनेगा? समझिए पूरा कैलकुलेशन

SIP Calculator: हर किसी के पास निवेश करने के लिए बड़ी रकम नहीं होती। लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि आप निवेश शुरू ही न करें। अगर आप हर महीने सिर्फ ₹1,000 बचा सकते हैं, तो भी सिस्टमैटिक इनवेस्टमेंट प्लान (SIP) शुरू कर सकते हैं।

अब सवाल है कि हर महीने ₹1,000 निवेश करने पर 20 साल बाद कितना पैसा मिलेगा? इसका जवाब निर्भर करेगा आपकी SIP पर मिलने वाले रिटर्न पर। म्यूचुअल फंड ने लॉन्ग टर्म में औसतन 12% का रिटर्न दिया है। हालांकि, कुछ मिडकैप और स्मॉलकैप फंड इससे ज्यादा रिटर्न दे सकते हैं। इनमें जोखिम थोड़ा ज्यादा होता है। वहीं, कुछ फंड का रिटर्न 10% के आसपास भी है, जो अमूमन सुरक्षित लगाते हैं।

20 साल में अपनी जेब से कितने पैसे लगाएंगे?

अगर आप हर महीने ₹1,000 निवेश करते हैं, तो सालभर में ₹12,000 जमा होंगे। इसी तरह 20 साल में आप कुल ₹2.40 लाख निवेश करेंगे।

लेकिन 20 साल बाद आपके पास सिर्फ इतने ही पैसे नहीं होंगे। निवेश पर मिलने वाला रिटर्न भी आपकी रकम में जुड़ता रहेगा। फिर उस बढ़ी रकम पर भी रिटर्न मिलेगा। इसे कंपाउंडिंग कहते हैं। लंबे समय तक निवेश करने पर इसका असर साफ दिखाई देता है।

10% रिटर्न मिला तो कितना पैसा बनेगा?

मान लीजिए कि आपके निवेश पर हर साल औसतन 10% रिटर्न मिलता है। ऐसे में 20 साल बाद आपके पास करीब ₹7.18 लाख हो सकते हैं। इस दौरान आप अपनी जेब से कुल ₹2.40 लाख लगाएंगे। बाकी करीब ₹4.78 लाख रिटर्न से जुड़ेंगे। यानी आपने हर महीने सिर्फ ₹1,000 निवेश किए, लेकिन लंबे समय में आपका फंड लगाए गए पैसों से काफी बड़ा हो सकता है।

12% रिटर्न पर कितना बनेगा फंड?

अगर सालाना रिटर्न 12% मिलता है, तो? इस हिसाब से 20 साल बाद आपका फंड करीब ₹9.11 लाख हो सकता है। आपका कुल निवेश फिर भी ₹2.40 लाख ही रहेगा। बाकी करीब ₹6.71 लाख रिटर्न से बनेंगे। यहां रिटर्न में सिर्फ 2 प्रतिशत अंक का अंतर है, लेकिन 20 साल बाद बनने वाले फंड में करीब ₹2 लाख का बड़ा फर्क आ जाता है।

15% रिटर्न मिला तो कितनी होगी रकम?

अगर सालाना रिटर्न औसतन 15% रहा, तो 20 साल बाद आपका फंड करीब ₹13.12 लाख हो सकता है। इस दौरान आप कुल ₹2.40 लाख निवेश करेंगे। बाकी करीब ₹10.72 लाख रिटर्न से जुड़ेंगे। हालांकि, लंबी अवधि में 15% रिटर्न मिलना अमूमन मुश्किल होता है। इसके लिए ज्यादा जोखिम उठाने वाले फंड में निवेश करना पड़ सकता है।

₹1,000 की SIP पर रिटर्न का हिसाब

सालाना रिटर्न20 साल बाद कुल फंडकुल निवेशअनुमानित रिटर्न
10%₹7.18 लाख₹2.40 लाख₹4.78 लाख
12%₹9.11 लाख₹2.40 लाख₹6.71 लाख
15%₹13.12 लाख₹2.40 लाख₹10.72 लाख

नोट: यह कैलकुलेशन हर महीने के अंत में ₹1,000 निवेश करने और अनुमानित सालाना रिटर्न के आधार पर है। वास्तविक रिटर्न और अंतिम फंड अलग हो सकते हैं।

कम पैसों से निवेश शुरू करना क्यों जरूरी है?

कई लोग सोचते हैं कि जब कमाई बढ़ेगी, तभी निवेश शुरू करेंगे। लेकिन इस इंतजार में कई साल निकल जाते हैं। दूसरी तरफ, छोटी रकम से शुरुआत करने पर निवेश की आदत बन जाती है।

बाद में कमाई बढ़ने पर आप हर महीने निवेश की रकम भी बढ़ा सकते हैं। उदाहरण के लिए, शुरुआत ₹1,000 से की और फिर इसे ₹1,500 या ₹2,000 महीने तक बढ़ा दिया। इससे लंबे समय में बड़ा फंड बनाने में मदद मिल सकती है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Zerodha का बड़ा ऐलान: अब एक ही ऐप पर मिलेंगे शेयर और म्यूचुअल फंड, Kite में ही शुरू होगी डायरेक्ट SIP

Zerodha Kite Mutual Fund Trading: देश के सबसे बड़े डिस्काउंट ब्रोकर्स में शामिल जेरोधा ने अपने करोड़ों यूजर्स के लिए बड़ा फैसला किया है। Zerodha बहुत जल्द अपने पॉपुलर स्टॉक ट्रेडिंग ऐप ‘Kite’ पर ही म्यूचुअल फंड में निवेश करने की सुविधा देने जा रहा है। यानी अब निवेशकों को शेयर खरीदने और म्यूचुअल फंड/SIP में पैसा लगाने के लिए अलग-अलग ऐप्स का इस्तेमाल नहीं करना पड़ेगा।

कंपनी के म्यूचुअल फंड हेड नीलेश वर्मा ने मनीकंट्रोल को दिए इंटरव्यू में बताया कि अगले कुछ ही महीनों में यह नया फीचर Kite ऐप पर लाइव कर दिया जाएगा।

अभी क्या है व्यवस्था और क्यों हो रहा है यह बड़ा बदलाव?

अब तक Zerodha अपने यूजर्स के लिए दो अलग-अलग ऐप्स का इस्तेमाल करता रहा है:

Kite App: एक्टिव ट्रेडिंग और शेयरों की खरीद-बिक्री के लिए।

Coin App: लॉन्ग-टर्म और पैसिव इन्वेस्टमेंट्स जैसे म्यूचुअल फंड्स, NPS और FD के लिए।

फिलहाल, जब यूजर्स Kite ऐप पर म्यूचुअल फंड्स देखते हैं, तो उन्हें खरीदारी करने के लिए ऑटोमैटिकली Coin ऐप पर रीडायरेक्ट कर दिया जाता है। लेकिन Groww जैसे प्रतिस्पर्धी ब्रोकर्स द्वारा एक ही ऐप पर सभी सुविधाएं देने के कारण यूजर्स काफी समय से Zerodha से भी ‘ऑल-इन-वन ऐप’ की मांग कर रहे थे।

Kite ऐप में मिलेंगे 2 सबसे खास और नए फीचर्स

सिंगल ऐप एक्सपीरियंस: अब यूजर्स अपने इक्विटी पोर्टफोलियो और म्यूचुअल फंड निवेश को एक ही स्क्रीन से मैनेज और ट्रैक कर पाएंगे।

पोर्टफोलियो इंपोर्ट करने की सुविधा: यूजर्स किसी दूसरे प्लेटफॉर्म (जैसे- Groww, PayTM Money आदि) पर चल रहे अपने पुराने म्यूचुअल फंड इन्वेस्टमेंट्स को भी आसानी से Zerodha Kite पर इंपोर्ट कर सकेंगे।

आपको बता दें कि Zerodha अपने ‘Coin’ ऐप को बंद नहीं करेगा। Coin ऐप पैसिव इन्वेस्टर्स के लिए अलग से काम करता रहेगा, लेकिन Kite यूजर्स को अब ऐप बदलने की मजबूरी नहीं होगी।

Zerodha के इस कदम के पीछे के आंकड़े

Zerodha के पास Coin ऐप पर लगभग 30 लाख म्यूचुअल फंड इन्वेस्टर्स और 56 लाख से ज्यादा एक्टिव SIP अकाउंट्स हैं। एसेट अंडर मैनेजमेंट(AUM) के मामले में Coin देश का दूसरा सबसे बड़ा डायरेक्ट म्यूचुअल फंड प्लेटफॉर्म है।

Kite App गूगल प्ले स्टोर पर 1 करोड़+ डाउनलोड्स है और करीब 65 लाख+ एक्टिव यूजर बेस है। वही Coin App के 50 लाख+ डाउनलोड्स और 30 लाख से ज्यादा एक्टिव यूजर है।

Kite का यूजर बेस Coin से दोगुना से भी ज्यादा है। ऐसे में Kite के भीतर ही म्यूचुअल फंड्स का विकल्प मिलने से Zerodha के म्यूचुअल फंड कारोबार में बड़ा उछाल आने की उम्मीद है।

डायरेक्ट म्यूचुअल फंड्स ही क्यों?

Zerodha अपने दोनों प्लेटफॉर्म्स पर सिर्फ डायरेक्ट म्यूचुअल फंड्स ही ऑफर करता है। इसमें निवेशकों को कोई डिस्ट्रीब्यूटर कमीशन या अतिरिक्त चार्ज नहीं देना पड़ता, जिससे लॉन्ग-टर्म में निवेशकों को रेगुलर फंड्स के मुकाबले बेहतर रिटर्न (CAGR) मिलता है।

Groww और Zerodha के बीच म्यूचुअल फंड और SIP ग्राहकों को जोड़ने की होड़ में, Zerodha का यह ‘ऑल-इन-वन’ दांव मार्केट में उसकी पकड़ को और मजबूत कर सकता है।

Investment Mantra : एक्सिस निफ्टी एनर्जी इंडेक्स फंड दे रहा एनर्जी कंपनियों में निवेश का सीधा मौका, जानिए क्या है खासियत

Investment Mantra : एनर्जी और सोना-चांदी दोनों इस वक्त बाजार के फोकस में हैं। एक तरफ जहां क्रूड में तेज उतार-चढ़ाव से एनर्जी सेक्टर सीधे रडार पर है और सोने-चांदी करेक्शन के बाद बुलियन सभी को लुभा रहा है। लेकिन क्या अभी एनर्जी और सोने-चांदी में निवेश का मौका है? यहां हम आपकी यही मुश्किल दूर करने की कोशिश करेंगे। लेकिन पहले हम आपको बता दें कि बाजार में इन दिनों Axis Nifty Energy Index Fund का NFO खुला हुआ है। क्या इसमें निवेश करके एनर्जी सेक्टर में एक्सपोजर बनाना चाहिए? इन्हीं सब बातों पर चर्चा करने के लिए हमारे साथ हैं मनीफ्रंट (Moneyfront) के CEO और को-फाउंडर मोहित गर्ग।

आइए पहले जान लेते हैं निफ्टी एनर्जी इंडेक्स के बारे में

निफ्टी एनर्जी इंडेक्स में एक्सपोजर की बात करें तो इसमें ऑयल एंड गैस, पावर जेनरेशन, ट्रांसमिशन एंड डिस्ट्रीब्यूशन, रिन्यूएबल एनर्जी, एनर्जी इक्विपमेंट और एनर्जी से जुड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल है।

निफ्टी एनर्जी इंडेक्स की खासियत यह है कि इसमें 500 में से अधिकतम 40 शेयरों पर फोकस है। किसी भी एक शेयर का वेटेज 10% से ज्यादा नहीं है। वहीं, किसी एक सेक्टर का वेटेज 25% से ज्यादा नहीं है। साल में दो बार मार्च और सितंबर में रीकंस्ट्रक्शन होता है।

निफ्टी एनर्जी इंडेक्स:टॉप 10 होल्डिंग्स

इसकी कोल इंडिया में 10%, रिलायंस इंडस्ट्रीज में 9.9%, ONGC में 9.5%, NTPC में 5.9%, GAIL में 4.9%, पावर ग्रिड में 4.6%, सुजलॉन एनर्जी में 4.2%, CG पावर में 3.9%, GE वर्नोवा में 3.6% और BHEL में 3.6% होल्डिंग है।

निफ्टी एनर्जी इंडेक्स: इन सेक्टर्स में निवेश

हेवी इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट में 25.5%, रिफाइनिंग में 15%, ऑयल एक्सप्लोरेशन में 11.8%, पावर जेनरेशन में 11.8% और कोल में 10% निवेश है।

निफ्टी एनर्जी इंडेक्स: निवेश कटेगरी

इसका लार्जकैप 72%, मिडकैप में 23% और स्मॉलकैप में 6% निवेश है।

निफ्टी एनर्जी में रिटर्न जोरदार

निफ्टी एनर्जी ने 1 साल में 10.1% रिटर्न दिया है। जबकि, निफ्टी ने इसी अवधि में 1.7 फीसदी रिटर्न दिया है। इसने तीन साल में 18.8% रिटर्न दिया है। इसी अवधि में निफ्टी ने 12.9 फीसदी रिटर्न दिया है। 5 साल में इसने 16.7% और निफ्टी ने 12.4% रिटर्न दिया है। 5 साल में इसने 18.7% और निफ्टी ने 13.9% रिटर्न दिया है। 25 साल में इसने 17.8% और निफ्टी ने 16.5% रिटर्न दिया है।

एक्सिस निफ्टी एनर्जी इंडेक्स फंड को जाने

एक्सिस निफ्टी एनर्जी इंडेक्स फंड एक इक्विटी इंडेक्स फंड है। इसका बेंचमार्क निफ्टी एनर्जी TRI है। इसका NFO खुला 7 अगस्त को खुला है जो 21 अगस्त को बंद होगा। इसमें न्यूनतम 100 रुपए का निवेश किया जा सकता है। इसका NFO NAV 10 रुपए है। इसमें रिस्क काफी हाई है। इस फंड मैनेजर्स नंदिक मलिक और रोहित गौतम हैं। एक्सिस निफ्टी एनर्जी इंडेक्स फंड का एक्जिट लोड 15 दिन के भीतर 0.25% और 15 दिन के बाद निल है।

एक्सिस निफ्टी एनर्जी इंडेक्स फंड: एनर्जी में बड़ा मौका

अगले दशक में भारत में 580+ GW पावर जेनरेशन का अनुमान है। इसमें रिन्यूएबल एनर्जी की बड़ी हिस्सेदारी होगी। अगले दशक में ट्रांसमिशन,स्टोरेज,नेचुरल गैस इंफ्रा में निवेश बढ़ेगा। अगले दशक में ग्रिड मॉडर्नाइजेशन में भी निवेश बढ़ेगा।

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

 

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SIP Investment: ₹10,000 की SIP से बना ₹28.89 लाख, इस फंड ने 10 साल में निवेशकों को किया मालामाल

Bank of India Debt Fund Returns: म्यूचुअल फंड में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए लंबी अवधि तक निवेश बनाए रखना पैसा जुटाने का एक बेहद कारगर जरिया साबित हुआ है। एक ऐसे ही हाइब्रिड फंड ने बीते 10 वर्षों में निवेशकों को मालामाल कर दिया है। Value Research के आंकड़ों के अनुसार, बैंक ऑफ इंडिया के Mid & Small Cap Equity & Debt Fund (रेगुलर प्लान) में जिन निवेशकों ने 10 साल पहले ₹10,000 की मासिक एसआईपी शुरू की थी, उनका फंड आज ₹28 लाख से अधिक हो चुका है।

आइए जानते हैं कि इस फंड ने बीते एक दशक में कैसा प्रदर्शन किया है, इसका पोर्टफोलियो कैसा है और इसमें निवेश करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

10 साल के SIP कैलकुलेशन का पूरा हिसाब

वैल्यू रिसर्च के एसआईपी कैलकुलेटर के अनुसार, इस फंड का 10 साल का रिपोर्ट कार्ड कुछ इस प्रकार है:

मासिक SIP राशि: ₹10,000

कुल निवेश (10 साल में): ₹12,000,000 (12 लाख रुपये)

कुल फंड वैल्यू: ₹28,89,000 (28.89 लाख रुपये)

वार्षिक रिटर्न (XIRR): 16.76%

फंड हाउस द्वारा जारी डेटा के मुताबिक, इस हाइब्रिड स्कीम ने 20 जुलाई 2016 से 31 मार्च 2026 के बीच 13.2% का चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) दर्ज किया है। इसी अवधि के दौरान निफ्टी मिडस्मॉलकैप 400 टीआरआई ने 15.4% और निफ्टी 100 टीआरआई ने 11.7% का सीएजीआर दिया।

कहां और कैसे पैसा लगाता है यह फंड?

बैंक ऑफ इंडिया के Mid & Small Cap Equity & Debt Fund एक ओपन-एंडेड हाइब्रिड स्कीम है। इसका मुख्य उद्देश्य शेयर बाजार की तेजी का फायदा उठाने के साथ-साथ डेट के जरिए पोर्टफोलियो को स्थिरता देना है।

  • इक्विटी आवंटन: यह फंड अपने कुल एसेट का 65% से 80% हिस्सा मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों के शेयरों में निवेश करता है।
  • डेट आवंटन: बाकी बचा हिस्सा (20% से 35%) डेट और मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स में लगाया जाता है।
  • बेंचमार्क: इस स्कीम का बेंचमार्क कंपोजिट इंडेक्स है।

पोर्टफोलियो एलोकेशन: 31 मार्च 2026 तक का आंकड़ा

31 मार्च 2026 तक फंड हाउस द्वारा जारी डेटा के अनुसार, पोर्टफोलियो का बंटवारा इस प्रकार था:

मार्केट कैप के हिसाब से निवेश:

मिड-कैप स्टॉक्स: 48.96%

स्मॉल-कैप स्टॉक्स: 28.63%

डेट एवं अन्य इंस्ट्रूमेंट्स: 22.41%

टॉप सेक्टर्स:

फाइनेंशियल सर्विसेज: 31.33% (सबसे बड़ा हिस्सा)

कैपिटल गुड्स: 13.75%

हेल्थकेयर: 12.35%

मेटल्स एंड माइनिंग: 7.10%

ऑटोमोबाइल एंड ऑटो कंपोनेंट्स: 6.41%

प्रमुख स्टॉक्स: फंड के टॉप 10 स्टॉक्स का कुल पोर्टफोलियो में हिस्सा 23.46% है, जो दिखाता है कि फंड का निवेश किसी एक-दो शेयरों तक सीमित न होकर विविधता से भरा हुआ है। इसके प्रमुख शेयरों में एबॉट इंडिया, यूएनओ मिंडा, इंडियन बैंक, ग्लेनमार्क फार्मास्यूटिकल्स, अरबिंदो फार्मा, लॉयड्स मेटल्स एंड एनर्जी, भारत डायनामिक्स, एरिस लाइफसाइंसेज, जेके सीमेंट और जिंदल स्टेनलेस शामिल हैं।

निवेशकों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में बड़ा हिस्सा होने के कारण यह फंड पारंपरिक बैलेंस्ड फंड्स की तुलना में अधिक रिटर्न की क्षमता रखता है, लेकिन इसमें बाजार का जोखिम भी अधिक होता है। हालांकि फंड का डेट वाला हिस्सा उतार-चढ़ाव को थोड़ा नियंत्रित करने में मदद करता है, लेकिन यह बाजार के जोखिम को पूरी तरह खत्म नहीं करता।

अतीत का प्रदर्शन गारंटी नहीं: म्यूचुअल फंड निवेश बाजार के जोखिमों के अधीन हैं। केवल बीते समय के रिटर्न को देखकर ही फैसला न लें, बल्कि अपने वित्तीय लक्ष्यों, निवेश की अवधि और जोखिम लेने की क्षमता के आधार पर ही निवेश का निर्णय लें।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Market Mantra : 3-6 महीने के नजरिए से निवेश करना रहेगा अच्छा, US-ईरान युद्ध को लेकर ज्यादा टेंशन नहीं

Market Mantra : बाजार के सामने संकट के बादल फिर खड़े हो गए हैं। एक तरफ जहां अमेरिका-ईरान फिर लड़ पड़े हैं तो वहीं क्रूड की बिगड़ी चाल ने बाजार में फिर डर का माहौल बना दिया है। इसके अलावा भी बाजार के सामने कई और बड़ी चुनौतियां अब भी खड़ी हैं। कमजोर मॉनसून और पहली तिमाही के नतीजों पर बाजार नजर बनाए बैठा है। इन सभी मुद्दों से अब आगे बाजार की दिशा तय होनी है। ऐसे में निवेशक कंफ्यूज है कि निवेश को लेकर क्या रणनीति बनाएं,अभी निवेश करें या कुछ महीने पहले देख लें कि हालात क्या करवट लेते हैं। इसी कंफ्यूजन को दूर करने के लिए आज हमारे साथ हैं खास मेहमान LIC म्यूचुअल फंड (LIC Mutual Fund) के CIO इक्विटी सुधांशु अस्थाना।

US-ईरान युद्ध को लेकर ज्यादा टेंशन नहीं

बाजार की चाल पर बात करते हुए सुधांशु अस्थाना ने कहा कि US-ईरान युद्ध को लेकर ज्यादा टेंशन नहीं है। US-ईरान फिर शांति की तरफ बढ़ेंगे। सरकार के कदमों से इकोनॉमी में डिमांड बढ़ी है। प्राइवेट कैपेक्स और क्रेडिट ग्रोथ में भी सुधार देखने को मिल रहा है। कॉर्पोरेट क्रेडिट ग्रोथ में 15% का उछाल आया है। देश में डॉलर का फ्लो आगे सुधरेगा। US-ईरान युद्ध आगे बढ़ा तो FY28 नतीजों पर असर दिखेगा। कच्चा तेल 85-90 डॉलर प्रति बैरल पर रहे तो इकोनॉमी पर असर नहीं होगा।

3-6 महीने के नजरिए से निवेश करना अच्छा

उन्होंने आगे कहा कि 3-6 महीने के नजरिए से निवेश करना अच्छा रहेगा। कंपनियों के मुताबिक युद्ध का असर अभी डिमांड पर नहीं दिखा है। दिसंबर नतीजों के बाद अर्निंग अपग्रेड संभव है। अगले साल से 8वें वेतन आयोग का पैसा भी आने लगेगा। 8वें वेतन आयोग के पैसे से डिमांड को बूस्ट मिलेगा। कच्चे माल की कीमतें बढ़ने का असर Q1 नतीजों पर दिखेगा।नतीजों के साथ कंपनियों की कमेंट्री और आउटलुक पर बाजार की नजर रहेगी।

बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों में एक्सपोजर बढ़ा

सुधांशु अस्थाना ने बताया कि उन्होंनें बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों में एक्सपोजर बढ़ाया है। प्राइवेट बैंक,NBFC और कैपिटल मार्केट शेयरों पर फोकस बढ़ा है। हेल्थकेयर शेयरों में भी एक्सपोजर बढ़ाया है। प्रीसिजन इंजीनियरिंग और डाटा सेंटर पर भी फोकस बढ़ा है। दिसंबर नतीजों के बाद अर्निंग अपग्रेड संभव है।

कम रिस्क चाहते हैं तो मल्टिकैप फंड में डालें पैसा

उन्होंने आगे कहा कि अगर आप कम रिस्क चाहते हैं तो मल्टिकैप फंड में पैसा डालें। फ्लैक्सीकैप फंड में भी निवेश किया जा सकता है। पिछले कुछ महीनों में मिडकैप और स्मॉलकैप में निवेश बढ़ा है। मिडकैप और स्मॉलकैप आगे अच्छा कर सकते हैं।

 

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डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।