PNB Bank Share Price: मुनाफे में जबरदस्त उछाल से 7 महीने के हाई पर पहुंचा शेयर, अब खरीदें, बेचें या रहे बने

PNB Bank Share Price: पीएसयू बैंक पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के शेयर आज 8% उछलकर 7 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए। स्टॉक में यह तेजी कंपनी के तिमाही नतीजों के ऐलान के बाद आई। हालांकि स्टॉक में अच्छी तेजी देखी जा रही है, लेकिन ग्लोबल इन्वेस्टमेंट बैंकिंग फर्मों CLSA और Citi की इस पर अलग-अलग राय है। CLSA इसे लेकर बुलिश है, जबकि Citi ने इस स्टॉक पर Sell की रेटिंग दी है।

कैसे रहे तिमाही नतीजे

PNB ने सितंबर 2024 को समाप्त तिमाही के लिए अपने नेट प्रॉफिट में 145% की बढ़ोतरी की जानकारी दी। सितंबर 2023 की तिमाही में 1756 करोड़ रुपये के मुकाबले, Q2 में नेट प्रॉफिट बढ़कर 4303.5 करोड़ रुपये हो गया। Q2 में ग्रॉस NPA, जून 2024 की तिमाही के 4.98% से घटकर 4.48% रह गए। नेट NPA भी जून 2024 की तिमाही के 0.60% से घटकर 0.46% पर आ गए।

जुलाई-सितंबर तिमाही के दौरान बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) 5.99% बढ़कर 10,517 करोड़ रुपये हो गई, जबकि पिछले साल की इसी तिमाही में यह 9923 करोड़ रुपये थी। प्रॉफिटेबिलिटी (मुनाफे) का एक अहम पैमाना, नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) पिछली तिमाही में 2.92% रहा।

स्टॉक पर क्या है ब्रोकरेज की राय

CLSA

CLSA ने PNB को “आउटपरफॉर्म” रेटिंग दी है और इसका टारगेट प्राइस ₹140 प्रति शेयर तय किया है। यह पिछले क्लोजिंग प्राइस से 20.4% की बढ़त की संभावना दिखाता है। फर्म के अनुसार, बैंक का दूसरी तिमाही का टैक्स के बाद मुनाफा (PAT) अनुमानों से 20% अधिक रहा। इसकी मुख्य वजह नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) का बेहतर प्रदर्शन और कुछ विशेष रिकवरी रही, हालांकि अन्य आय (other income) में कमी ने इस बढ़त को कुछ हद तक कम कर दिया।

CLSA ने बताया कि बैंक की लोन ग्रोथ पिछले साल के मुकाबले बढ़कर 16% हो गई है, जबकि कुछ तिमाहियों पहले यह दहाई के निचले स्तर (low double-digits) पर थी। वहीं, डिपॉजिट ग्रोथ पिछले साल के मुकाबले 10% पर स्थिर बनी हुई है।

पंजाब नेशनल बैंक के नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) में 8 बेसिस पॉइंट्स का सुधार हुआ है, जो मुख्य रूप से लोन यील्ड (loan yields) और डिपॉजिट कॉस्ट (deposit cost) में बदलाव के कारण हुआ है।

बैंक प्रबंधन ने संकेत दिया है कि NIM में आगे और सुधार हो सकता है। CLSA के अनुसार, बैंक की एसेट क्वालिटी स्थिर रही है और ग्रॉस स्लिपेज रेशियो 0.8% है।

Citi

Citi ने पंजाब नेशनल बैंक के शेयरों पर “Sell” की सलाह दी है। Citi का कहना है कि FCNR इनफ्लो के जरिए होलसेल डिपॉजिट कम होने से डिपॉजिट पर कैश 5 बेसिस पॉइंट्स घट गया। वहीं, रिटेल IBPC और कम रिटर्न देने वाले कॉर्पोरेट एक्सपोजर को कम करने से यील्ड (yields) में 8 बेसिस पॉइंट्स का इजाफा हुआ। सिटी (Citi) के अनुसार, स्टैंडर्ड एसेट प्रोविज़निंग से मिली राशि ने नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) और फ्लोटिंग प्रोविज़न बफ़र्स की भरपाई कर दी, जिससे बैंक की क्रेडिट कॉस्ट लगभग शून्य हो गई।

PNB का ‘रिटर्न ऑन एसेट्स’ 1% से ऊपर स्थिर रहा। बैंक के ग्लोबल एडवांसेज (कर्ज) में पिछले साल के मुकाबले 14.7% और पिछली तिमाही के मुकाबले 5.3% की बढ़ोतरी हुई। यह FY27 के लिए तय 12% – 13% के लक्ष्य से भी अधिक है। इसमें FCNR-फंडेड ओवरसीज एक्सपोजर का भी योगदान रहा, जो बैंक की कुल बुक का 1.5% है।

पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के शेयर पर नजर रखने वाले 23 एनालिस्ट्स में से 14 ने इसे buy , 3 ने hold करने और 6 ने sell की रेटिंग दी है।

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(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

1 करोड़ रुपये हैं तो FD, म्यूचुअल फंड या इक्विटी में कहां लगाएं पैसा? उम्र के हिसाब से जानिए पूरा प्लान

मान लीजिए कि कोई प्रॉपर्टी बेचने या विरासत में मिली रकम के कारण आपके बैंक खाते में 1 करोड़ रुपये आ गए हैं। इन सभी पैसों को फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में डाल देना सबसे आसान विकल्प लग सकता है। वहीं, पूरी रकम को शेयर या म्यूचुअल फंड में लगाने से बेहतर ग्रोथ मिल सकती है, लेकिन इसमें बाजार के उतार-चढ़ाव के कारण आपकी बचत को नुकसान होने का जोखिम भी रहता है। चुनौती यह है कि इन दोनों के बीच एक सही संतुलन कैसे बनाया जाए।

इसकी शुरुआत आप अपनी उम्र को ध्यान में रखकर कर सकते हैं। 30 की उम्र वाले किसी व्यक्ति के पास नियमित सैलरी का सहारा हो सकता है, जो बाजार कमजोर होने पर काम आ सकती है। वहीं, रिटायर हो चुके व्यक्ति को अपने रोजमर्रा के खर्चों, मेडिकल बिलों और अन्य जरूरतों के लिए इसी 1 करोड़ रुपये पर निर्भर रहना पड़ सकता है। आपका निवेश प्लान इसी अंतर को ध्यान में रखकर तैयार किया जाना चाहिए।

30 की उम्र में, समय का फायदा उठाएं

अगर रिटायरमेंट में अभी भी 25 या 30 साल का समय है, तो आपके पास बाजार के उतार-चढ़ाव को संभालने के लिए काफी समय है। आप अपनी रकम का एक हिस्सा डायवर्सिफाइड इक्विटी म्यूचुअल फंड में लगा सकते हैं। इनमें लंबे समय में अच्छी ग्रोथ की संभावना तो होती है, लेकिन रिटर्न की कोई गारंटी नहीं होती।

उदाहरण के लिए, 35 साल के किसी व्यक्ति को लें, जिसे नियमित सैलरी मिलती है। अगर आने वाले समय में कोई बड़ा खर्च नहीं है, तो आप अपनी रकम को इस तरह बांट सकते हैं। 60 लाख रुपये इक्विटी फंड में, 30 लाख रुपये फिक्स्ड-इनकम निवेश (जैसे FD या बॉन्ड) में और 10 लाख रुपये ऐसी बचत में जिसे जरूरत पड़ने पर आसानी से निकाला जा सके। लेकिन, अगर आप अगले 3 सालों में घर खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो यह बंटवारा बदल जाएगा। घर के डाउन पेमेंट के लिए जरूरी पैसों को इस बात पर निर्भर नहीं छोड़ना चाहिए कि उस समय शेयर बाजार कैसा प्रदर्शन करेगा। इसके बजाय, इस रकम को ऐसे निवेश विकल्पों में रखें जो अपेक्षाकृत स्थिर हों।

40 और 50 की उम्र में, जोखिम पर ज्यादा ध्यान दें

इस उम्र तक पहुंचते-पहुंचते, रिटायरमेंट अब कोई दूर की बात नहीं रह जाती। बच्चों की स्कूल-कॉलेज की फीस, होम लोन की किस्तें और माता-पिता की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतें आपकी मासिक आय का एक बड़ा हिस्सा ले सकती हैं। ऐसे में अगर आपको जल्द ही पैसों की जरूरत पड़े और आपके निवेश की वैल्यू में भारी गिरावट आ जाए, तो स्थिति को संभालना मुश्किल हो सकता है। 40 के दशक के आखिर में चल रहे लोग अपनी कुल रकम का 40 से 60 प्रतिशत हिस्सा इक्विटी में लगाने पर विचार कर सकते हैं, जबकि बाकी हिस्सा फिक्स्ड-इनकम प्रोडक्ट्स और लिक्विड सेविंग्स में रखा जा सकता है। यह सिर्फ एक उदाहरण है। जिस व्यक्ति के पास पेंशन या कोई पक्की आय का साधन है, वह उस व्यक्ति की तुलना में अधिक जोखिम उठा सकता है, जिसे रिटायरमेंट के बाद मुख्य रूप से इसी पैसे पर निर्भर रहना है।

फिक्स्ड डिपॉजिट, उपयुक्त डेट फंड और सरकारी बचत योजनाओं पर विचार किया जा सकता है। किसी भी विकल्प को चुनने से पहले उस पर लगने वाले टैक्स और पैसे निकालने के नियमों को जरूर देख लें। अगर किसी जरूरी खर्च के समय आपका पैसा कहीं फंस जाए, तो बहुत अधिक रिटर्न का वादा भी किसी काम का नहीं रहता।

60 की उम्र के बाद, मासिक खर्चों के लिए योजना बनाएं

रिटायर होने वाले लोगों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह होता है कि उनका पैसा कितने समय तक चलेगा। घर के नियमित खर्च, दवाइयों का खर्च और अचानक आने वाले अस्पताल के बिल धीरे-धीरे आपकी बचत को कम कर सकते हैं। कुछ पैसा सेविंग्स अकाउंट या शॉर्ट-टर्म डिपॉजिट में रखने से तुरंत आने वाली जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है। बाकी बची रकम को उपयुक्त फिक्स्ड-इनकम निवेशों में लगाया जा सकता है। अगर आप बाजार के जोखिम को उठा सकते हैं, तो इसमें कुछ हिस्सा इक्विटी में भी निवेश किया जा सकता है।

पूरी रकम को बिना सोचे-समझे निवेश न करें

निवेश करने से पहले, इमरजेंसी फंड के लिए कुछ पैसा अलग रख लें और महंगे कर्ज चुका दें। यह भी जांच लें कि आपका हेल्थ इंश्योरेंस पर्याप्त है या नहीं, खासकर तब जब आप रिटायरमेंट के करीब हों। साथ ही, उन खर्चों का भी ध्यान रखें जिन्हें टाला नहीं जा सकता।

साल में एक बार अपने निवेश की समीक्षा (रिव्यू) जरूर करें। अगर आपके पोर्टफोलियो का कोई एक हिस्सा बाकी हिस्सों की तुलना में बहुत तेजी से बढ़ गया है, तो आपको उसे फिर से संतुलित (रीबैलेंस) करने की जरूरत पड़ सकती है। याद रखें कि डेट प्रोडक्ट्स में भी जोखिम होता है, और टैक्स व अन्य शुल्क आपके रिटर्न को कम कर सकते हैं।

1 करोड़ रुपये की रकम आपको एक अच्छी शुरुआत दे सकती है, लेकिन यह सिर्फ इस बात पर निर्भर नहीं करता कि आपके पास कितनी रकम है, बल्कि इस बात पर भी निर्भर करता है कि आपने उसे कहां निवेश किया है। अपने भविष्य के खर्चों को ध्यान में रखकर निवेश करें, न कि सिर्फ अपनी उम्र या किसी और के बताए गए रिटर्न को देखकर।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।