इस म्यूचुअल फंड ने ₹10 लाख के निवेश को सिर्फ 13 साल में ₹1.25 करोड़ बना दिया

म्यूचुअल फंड की स्कीम में निवेश में फंड का चुनाव काफी मायने रखता है। आप सिप से निवेश करें या एकमुश्त, अगर आपने सही फंड का चुनाव किया है तो आप पैसे की बरसात होगी। खासकर लंबी अवधि के निवेश में यह बात पूरी तरह से लागू होती है। हम बात कर रहे हैं एचडीएफसी मिडकैप फंड डायरेक्ट ग्रोथ की। लंबी अवधि में इस फंड ने निवेशकों को मालामाल किया है।

10 लाख का निवेश आज 1.25 करोड़ रुपये हो गया होता

अगर आपने HDFC Mid Cap Fund Direct Growth में 2013 में 10 लाख रुपये का एकमुश्त निवेश किया होता तो आज आपका पैसा बढ़कर 1.25 करोड़ रुपये हो गया होता। यह रिटर्न फंड के एनएवी में ग्रोथ के आधार पर कैलकुलेट किया गया है। यह एक ओपन एंडेड स्कीम है। इसका मतलब है कि इस फंड में किसी समय निवेश किया जा सकता है और किसी समय पैसे निकाले जा सकते हैं।

यह स्कीम मुख्यत: मिडकैप कंपनियों के शेयरों में निवेश करती है

एचडीएफसी फंड हाउस की यह इक्विटी स्कीम मुख्य रूप से मिडकैप कंपनियों के शेयरों में निवेश करती है। फंड हाउस के मुताबिक, फंड का फोकस हर समय मिडकैप स्टॉक्स में कम से कम 65 फीसदी निवेश बनाए रखने पर होता है। हालांकि, यह फंड काफी ज्यादा रिस्क वाले फंड की कैटेगरी में आता है। इसलिए यह फंड सिर्फ उन निवेशकों के लिए सही है, जो रिस्क ले सकते हैं।

इस फंड के डायरेक्ट प्लान की शुरुआत 2013 में हुई थी

इस फंड की शुरुआत 1 जनवरी, 2013 को हुई थी। इस फंड के बेहतर रिटर्न में लॉन्ग टर्म कंपाउंडिंग का बड़ा हाथ है। मिडकैप कंपनियों के शेयरों में ज्यादा-उतार चढ़ाव होता है। लेकिन, इकोनॉमी और कॉर्पोरेट अर्निंग्स बेहतर रहने पर इन शेयरों का रिटर्न भी ज्यादा रहता है। इस फंड ने कई तरह के सेक्टर की कंपनियों में निवेश किया है। इससे डायवर्सिफिकेशन का फायदा इससे मिलता है। साथ ही रिस्क भी कम हो जाता है।

इस फंड का लंबी अवधि में सालाना रिटर्न 20 फीसदी से ज्यादा

इस फंड के डायरेक्ट ग्रोथ प्लान का लंबी अवधि में रिटर्न सालाना 20 फीसदी से ज्यादा रहा है। इस स्की की शुरुआत जून 2007 में हुई थी। लेकिन, इसका डायरेक्ट प्लान जनवरी 2013 में शुरू हुआ था। इस फंड का रिटर्न शानदार रहा है। लेकिन, एक्सपर्ट्स का कहना है कि किसी फंड के पिछले प्रदर्शन के आधार पर उसमें निवेश का फैसला नहीं लेना चाहिए।

किसी फंड के पिछले प्रदर्शन के आधार पर नहीं लें निवेश का फैसला

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इनवेस्टर्स को निवेश के अपने मकसद, रिस्क लेने की क्षमता और निवेश की अवधि को ध्यान में रख फंड का चुनाव करना चाहिए। खासकर इक्विटी फंड में अच्छा रिटर्न तभी मिलता है, जब आप लंबी अवधि के लिहाज से उसमें एकमुश्त या सिप से निवेश करते हैं।

इन 10 म्यूचुअल फंडों ने SIP के निवेशकों को बीते 5 साल में दिए सबसे ज्यादा रिटर्न, देखें पूरी लिस्ट

शेयरों की तरह जोरदार रिटर्न के लिए म्यूचु्अल फंड की सही स्कीम का चुनाव जरूरी है। कुछ फंडों का रिटर्न हमेशा कैटेगरी के औसत रिटर्न से काफी ज्यादा होता है। एनालिसिस के नतीजे बताते हैं कि कुछ फंडों ने सिप के निवेशकों को सालाना 20 फीसदी से ज्यादा रिटर्न दिए हैं। खास बात यह है कि स्मॉलकैप और मिडकैप फंड्स रिटर्न देने में सबसे आगे हैं।

बीते पांच सालों में स्मॉलकैप और मिडकैप फंड्स का जलवा

सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाले 10 फंडों में 9 फंड स्मॉलकैप और मिडकैप कैटेगरी के हैं। इनमें 4 स्मॉलकैप स्कीम हैं। पांच मिडकैप स्कीम हैं। SBI Children Fund सिर्फ एक अपवाद है, जो फ्लेक्सीकैप स्ट्रेटेजी का इस्तेमाल करता है।

इससे यह संकेत मिलता है कि बीते 5 सालों में जिन निवेशकों ने ज्यादा रिस्क लिया, उन्हें ज्यादा रिटर्न मिला। इस दौरान स्मॉलकैप कंपनियों का प्रदर्शन अच्छा रहा। स्मॉलकैप और मिडकैप फंडों ने सिप के निवेशकों को लार्जकैप फंडों के मुकाबले ज्यादा रिटर्न दिए।

एक्टिव लार्जकैप फंड्स की चमक पड़ी फीकी

सिप इनवेस्टर्स को सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाले फंडों में एक भी एक्टिवली मैनेज्ड लार्जकैप फंड शामिल नहीं है। पिछले पांच सालों में लार्जकैप स्कीम में सबसे अच्छा प्रदर्शन Invesco India Largecap Fund का रहा है। इसका सालाना सिप रिटर्न 14.27 फीसदी रहा है। यह 64 लार्जकैप फंड्स में 10वें नंबर पर है। लार्जकैप कैटेगरी में टॉप 9 पोजीशन पर इंडेक्स फंड और ईटीएफ रहे हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि लार्जकैप कैटेगरी में पैसिव फंड्स एक्टिव फंड मैनेजर्स को चुनौती दे रहे हैं।

जोरदार रिटर्न देने वाले फंड्स में उतार-चढ़ाव भी ज्यादा

बीते पांच सालों में स्मॉलकैप और मिडकैप रिटर्न देने में सबसे आगे रहे हैं। लेकिन, म्यूचुअल फंड्स की इन दोनों कैटेगरी में सबसे ज्यादा उतार-चढ़ाव दिखा है। उनका शानदार प्रदर्शन फेवरेबल मार्केट साइकिल में दिखा है। इस ट्रेंड के अगले पांच सालों में रिपीट होने की गारंटी नहीं है।

top 10 fund

रिस्क लेने की कपैसिटी के आधार पर फंड का सेलेक्शन्

एक्सपर्ट्स का कहना है कि किसी फंड के पिछले रिटर्न को देखकर निवेश का फैसला ठीक नहीं है। इनवेस्टर को यह देखने की जरूरत है कि वह कितना रिस्क ले सकता है। किसी फंड का लंबी अवधि में लगातार अच्छा प्रदर्शन कुछ सालों में बेहतर प्रदर्शन के मुकाबले ज्यादा मायने रखता है।

Kalyan Jewellers में एक म्यूचुअल फंड हाउस बेच सकता है 5 करोड़ शेयर, कीमत फिसली

ज्वेलरी सेक्टर की कंपनी कल्याण ज्वेलर्स इंडिया के शेयरों में 27 जुलाई को गिरावट है। दिन में शेयर पिछले बंद भाव से 1.6 प्रतिशत तक नीचे आया। BSE पर कीमत 563.65 रुपये के लो तक गई। ऐसी खबर है कि एक बड़ा घरेलू म्यूचुअल फंड हाउस ब्लॉक डील के जरिए कल्याण ज्वेलर्स के लगभग 5 करोड़ शेयर बेच सकता है। एनडीटीवी प्रॉफिट की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि शेयर में कम समय में आए तेज उछाल को देखते हुए म्यूचुअल फंड कुछ हिस्सेदारी बेचने पर विचार कर रहा है। इस डील के लिए दो बैंकर नियुक्त किए गए हैं।

शेयर बिक्री करने वाले म्यूचुअल फंड का नाम सामने नहीं आया है। कल्याण ज्वेलर्स में जून 2026 के आखिर तक पब्लिक शेयरहोल्डर्स के पास 37.14 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। इसमें से 15.41 प्रतिशत हिस्सा म्यूचुअल फंड्स के पास था। सुंदरम म्यूचुअल फंड के पास सुंदरम मिड कैप फंड के जरिए 1.33 प्रतिशत, फ्रैंकलिन इंडिया फ्लेक्सी कैप फंड के पास 1.64 प्रतिशत और मोतीलाल ओसवाल मिडकैप फंड के पास 9.17 प्रतिशत हिस्सेदारी थी।

कल्याण ज्वेलर्स का मार्केट कैप 58500 करोड़ रुपये से ज्यादा है। शेयर की फेस वैल्यू 10 रुपये है। यह BSE 200 इंडेक्स का हिस्सा है। शेयर एक महीने में करीब 50 प्रतिशत मजबूत हो चुका है। 2 सप्ताह में यह लगभग 11 प्रतिशत की बढ़त देख चुका है। कंपनी 4 अगस्त को अपने जून 2026 तिमाही के नतीजे जारी करेगी। जून तिमाही में कंपनी ने 12 कल्याण शोरूम और 5 कैंडेरे स्टोर खोले। 30 जून तक इसके कुल आउटलेट्स की संख्या 524 तक पहुंच गई।

Kalyan Jewellers पर सिटी है बुलिश

जुलाई महीने की शुरुआत में कल्याण ज्वेलर्स के शेयर के लिए ब्रोकरेज सिटीग्रुप ने ‘बाय’ रेटिंग दोहराई थी। टारगेट प्राइस 750 रुपये प्रति शेयर बरकरार रखा था। अप्रैल-जून 2026 तिमाही में कंपनी के बिजनेस पर अपडेट सामने आने के बाद ब्रोकरेज ने अपना व्यू दिया था। तिमाही के दौरान कल्याण ज्वेलर्स का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू सालाना आधार पर लगभग 38 प्रतिशत बढ़ा। इंटरनेशनल ऑपरेशंस से रेवेन्यू में लगभग 35 प्रतिशत की ग्रोथ देखी गई। तिमाही के दौरान इंटरनेशनल मार्केट ने कंसोलिडेटेड रेवेन्यू में लगभग 14 प्रतिशत का योगदान दिया।

सिटी ने स्टॉक पर अपना कंस्ट्रक्टिव लॉन्ग-टर्म व्यू बरकरार रखा है। उसे उम्मीद है कि कंपनी की फ्रेंचाइजी-लेड एक्सपेंशन स्ट्रैटेजी प्रॉफिटेबल ग्रोथ को सपोर्ट करती रहेगी, साथ ही रिटर्न ऑन कैपिटल एंप्लॉइड (RoCE) में भी सुधार करेगी।

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Market Mantra : 3-6 महीने के नजरिए से निवेश करना रहेगा अच्छा, US-ईरान युद्ध को लेकर ज्यादा टेंशन नहीं

Market Mantra : बाजार के सामने संकट के बादल फिर खड़े हो गए हैं। एक तरफ जहां अमेरिका-ईरान फिर लड़ पड़े हैं तो वहीं क्रूड की बिगड़ी चाल ने बाजार में फिर डर का माहौल बना दिया है। इसके अलावा भी बाजार के सामने कई और बड़ी चुनौतियां अब भी खड़ी हैं। कमजोर मॉनसून और पहली तिमाही के नतीजों पर बाजार नजर बनाए बैठा है। इन सभी मुद्दों से अब आगे बाजार की दिशा तय होनी है। ऐसे में निवेशक कंफ्यूज है कि निवेश को लेकर क्या रणनीति बनाएं,अभी निवेश करें या कुछ महीने पहले देख लें कि हालात क्या करवट लेते हैं। इसी कंफ्यूजन को दूर करने के लिए आज हमारे साथ हैं खास मेहमान LIC म्यूचुअल फंड (LIC Mutual Fund) के CIO इक्विटी सुधांशु अस्थाना

US-ईरान युद्ध को लेकर ज्यादा टेंशन नहीं

बाजार की चाल पर बात करते हुए सुधांशु अस्थाना ने कहा कि US-ईरान युद्ध को लेकर ज्यादा टेंशन नहीं है। US-ईरान फिर शांति की तरफ बढ़ेंगे। सरकार के कदमों से इकोनॉमी में डिमांड बढ़ी है। प्राइवेट कैपेक्स और क्रेडिट ग्रोथ में भी सुधार देखने को मिल रहा है। कॉर्पोरेट क्रेडिट ग्रोथ में 15% का उछाल आया है। देश में डॉलर का फ्लो आगे सुधरेगा। US-ईरान युद्ध आगे बढ़ा तो FY28 नतीजों पर असर दिखेगा। कच्चा तेल 85-90 डॉलर प्रति बैरल पर रहे तो इकोनॉमी पर असर नहीं होगा।

3-6 महीने के नजरिए से निवेश करना अच्छा

उन्होंने आगे कहा कि 3-6 महीने के नजरिए से निवेश करना अच्छा रहेगा। कंपनियों के मुताबिक युद्ध का असर अभी डिमांड पर नहीं दिखा है। दिसंबर नतीजों के बाद अर्निंग अपग्रेड संभव है। अगले साल से 8वें वेतन आयोग का पैसा भी आने लगेगा। 8वें वेतन आयोग के पैसे से डिमांड को बूस्ट मिलेगा। कच्चे माल की कीमतें बढ़ने का असर Q1 नतीजों पर दिखेगा।नतीजों के साथ कंपनियों की कमेंट्री और आउटलुक पर बाजार की नजर रहेगी।

बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों में एक्सपोजर बढ़ा

सुधांशु अस्थाना ने बताया कि उन्होंनें बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों में एक्सपोजर बढ़ाया है। प्राइवेट बैंक,NBFC और कैपिटल मार्केट शेयरों पर फोकस बढ़ा है। हेल्थकेयर शेयरों में भी एक्सपोजर बढ़ाया है। प्रीसिजन इंजीनियरिंग और डाटा सेंटर पर भी फोकस बढ़ा है। दिसंबर नतीजों के बाद अर्निंग अपग्रेड संभव है।

कम रिस्क चाहते हैं तो मल्टिकैप फंड में डालें पैसा

उन्होंने आगे कहा कि अगर आप कम रिस्क चाहते हैं तो मल्टिकैप फंड में पैसा डालें। फ्लैक्सीकैप फंड में भी निवेश किया जा सकता है। पिछले कुछ महीनों में मिडकैप और स्मॉलकैप में निवेश बढ़ा है। मिडकैप और स्मॉलकैप आगे अच्छा कर सकते हैं।

 

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