इस म्यूचुअल फंड ने मंथली ₹10000 के SIP को 15 साल में ₹81 लाख बनाया

म्यूचुअल फंड की कुछ स्कीमें हैं, जिन्होंने निवेशकों को करोड़पति बनाया है। फ्रैंकलिन टेंपलटन इंडिया म्यूचुअल फंड की इस स्मॉलकैप स्कीम ने भी निवेशकों को मालामाल किया है। इसका नाम फ्रैंकलिन इंडिया स्मॉलकैप फंड है। इस फंड में अगर आपने हर महीने 10,000 रुपये का सिप इनवेस्टमेंट 15 साल तक किया होता तो आज आपका पैसा बढ़कर 81 लाख रुपये हो गया होता। फ्रैंकलिन टेंपलटन ने अपने इस फंड के प्रदर्शन के बारे में बताया है।

जनवरी 2006 में हुई थी इस फंड की शुरुआत

Franklin India Small Cap Fund का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) 14,000 करोड़ रुपये से ज्यादा है। फ्रैंकलिन टेंपलटन के कैलकुलेशन के मुताबिक, अगर आपने इस फंड के शुरू होने के समय इसमें एकमुश्त 10,000 रुपये का निवेश किया होता तो आज आपका पैसा बढ़कर 1.79 लाख रुपये हो गया होता। इस फंड की शुरुआत जनवरी 2006 में हुई थी। फ्रैंकलिन टेंपलटन ने कहा है कि इस फंड ने शुरुआत से लेकर अब तक अपने बेंचमार्क निफ्टी स्मॉलकैप 250 इंडेक्स से ज्यादा रिटर्न दिया है।

15 साल में इस फंड का रिटर्न 19 फीसदी से ज्यादा रहा

5 साल, 15 साल और शुरुआत से अब तक इस फंड का प्रदर्शन बेंचमार्क के मुकाबले बेहतर रहा है। लेकिन, 3 साल में इसका रिटर्न बेंचमार्क से कम रहा है। इस दौरान बेंचमार्क का रिटर्न 16.15 फीसदी रहा, जबकि इस फंड का रिटर्न 12.82 फीसदी रहा। 10 साल में भी फंड का रिटर्न बेंचमार्क से कम रहा। लेकिन, 15 साल में फंड का रिटर्न 19.03 फीसदी रहा, जबकि बेंचमार्क का 15.75 फीसदी रहा।

मिनिमम 5000 रुपये से किया जा सकता है एकमुश्त निवेश

इस फंड के पोर्टफोलियो मैनेजर अखिल काल्लुरी ने कहा कि फंड का फोकस ऐसी कंपनियों के शेयरों पर होता है, जो बुनियादी रूप से मजबूत होती हैं और जिनकी ग्रोथ की संभावना ज्यादा होती है। इस फंड में निवेश के एक साल के अंदर पैसे निकालने पर 1 फीसदी का एग्जिट लोड लगता है। इस फंड में मिनिमम 5,000 रुपये से एकमुश्त निवेश किया जा सकता है। अतिरिक्त निवेश 1,000 रुपये के मल्टीपल में किया जा सकता है।

स्मॉलकैप फंड में निवेश में ज्यादा रिस्क

यह फंड स्मॉलकैप फंड की कैटेगरी में आता है। यह सिर्फ स्मॉलकैप कंपनियों के शेयरों में निवेश करता है। स्मॉलकैप शेयरों में निवेश में रिस्क ज्यादा होता है। इनका रिटर्न ज्यादा होता है। लेकिन, मार्केट क्रैश करने पर इन शेयरों में गिरावट भी लार्जकैप और मिडकैप स्टॉक्स के मुकाबले ज्यादा आती है। इसलिए सिर्फ ज्यादा रिस्क लेने की क्षमता वाले इनवेस्टर्स को ही स्मॉलकैप फंड में निवेश करना चाहिए।

यह भी पढ़ें:  बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट में पैसा रखने वालों के लिए खुशखबरी, रेपो रेट बढ़ने से अब FD पर मिलेगा ज्यादा इंटरेस्ट

फाइनेंशियल एडवाइजर की सलाह से ले निवेश का फैसला

दूसरा, किसी फंड के पिछले प्रदर्शन को देखकर उसमें निवेश करने का फैसला नहीं करना चाहिए। किसी फंड का अब तक का अच्छा प्रदर्शन भविष्य में उसके अच्छे प्रदर्शन की गारंटी नहीं होता। इनवेस्टर्स को अपने फाइनेंशियल एडवाइजर की सलाह के बाद ही किसी फंड में निवेश का फैसला लेना चाहिए।

इस म्यूचुअल फंड ने ₹10 लाख के निवेश को सिर्फ 13 साल में ₹1.25 करोड़ बना दिया

म्यूचुअल फंड की स्कीम में निवेश में फंड का चुनाव काफी मायने रखता है। आप सिप से निवेश करें या एकमुश्त, अगर आपने सही फंड का चुनाव किया है तो आप पैसे की बरसात होगी। खासकर लंबी अवधि के निवेश में यह बात पूरी तरह से लागू होती है। हम बात कर रहे हैं एचडीएफसी मिडकैप फंड डायरेक्ट ग्रोथ की। लंबी अवधि में इस फंड ने निवेशकों को मालामाल किया है।

10 लाख का निवेश आज 1.25 करोड़ रुपये हो गया होता

अगर आपने HDFC Mid Cap Fund Direct Growth में 2013 में 10 लाख रुपये का एकमुश्त निवेश किया होता तो आज आपका पैसा बढ़कर 1.25 करोड़ रुपये हो गया होता। यह रिटर्न फंड के एनएवी में ग्रोथ के आधार पर कैलकुलेट किया गया है। यह एक ओपन एंडेड स्कीम है। इसका मतलब है कि इस फंड में किसी समय निवेश किया जा सकता है और किसी समय पैसे निकाले जा सकते हैं।

यह स्कीम मुख्यत: मिडकैप कंपनियों के शेयरों में निवेश करती है

एचडीएफसी फंड हाउस की यह इक्विटी स्कीम मुख्य रूप से मिडकैप कंपनियों के शेयरों में निवेश करती है। फंड हाउस के मुताबिक, फंड का फोकस हर समय मिडकैप स्टॉक्स में कम से कम 65 फीसदी निवेश बनाए रखने पर होता है। हालांकि, यह फंड काफी ज्यादा रिस्क वाले फंड की कैटेगरी में आता है। इसलिए यह फंड सिर्फ उन निवेशकों के लिए सही है, जो रिस्क ले सकते हैं।

इस फंड के डायरेक्ट प्लान की शुरुआत 2013 में हुई थी

इस फंड की शुरुआत 1 जनवरी, 2013 को हुई थी। इस फंड के बेहतर रिटर्न में लॉन्ग टर्म कंपाउंडिंग का बड़ा हाथ है। मिडकैप कंपनियों के शेयरों में ज्यादा-उतार चढ़ाव होता है। लेकिन, इकोनॉमी और कॉर्पोरेट अर्निंग्स बेहतर रहने पर इन शेयरों का रिटर्न भी ज्यादा रहता है। इस फंड ने कई तरह के सेक्टर की कंपनियों में निवेश किया है। इससे डायवर्सिफिकेशन का फायदा इससे मिलता है। साथ ही रिस्क भी कम हो जाता है।

इस फंड का लंबी अवधि में सालाना रिटर्न 20 फीसदी से ज्यादा

इस फंड के डायरेक्ट ग्रोथ प्लान का लंबी अवधि में रिटर्न सालाना 20 फीसदी से ज्यादा रहा है। इस स्की की शुरुआत जून 2007 में हुई थी। लेकिन, इसका डायरेक्ट प्लान जनवरी 2013 में शुरू हुआ था। इस फंड का रिटर्न शानदार रहा है। लेकिन, एक्सपर्ट्स का कहना है कि किसी फंड के पिछले प्रदर्शन के आधार पर उसमें निवेश का फैसला नहीं लेना चाहिए।

किसी फंड के पिछले प्रदर्शन के आधार पर नहीं लें निवेश का फैसला

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इनवेस्टर्स को निवेश के अपने मकसद, रिस्क लेने की क्षमता और निवेश की अवधि को ध्यान में रख फंड का चुनाव करना चाहिए। खासकर इक्विटी फंड में अच्छा रिटर्न तभी मिलता है, जब आप लंबी अवधि के लिहाज से उसमें एकमुश्त या सिप से निवेश करते हैं।