Retirement Planning: सुकन्या समृद्धि, पीपीएफ और SIP में मंथली ₹10000 इनवेस्ट करने से कितना बड़ा फंड बनेगा? समझें पूरा कैलकुलेशन

रिटायरमेंट प्लानिंग जल्द करने के कई फायदे हैं। निवेश के लिए ज्यादा समय मिलता है। पैसे को बढ़ने के लिए भी पर्याप्त समय मिल जाता है। करियर की शुरुआत में व्यक्ति पर आर्थिक जिम्मेदारी कम होती है। इससे निवेश करने में दिक्कत नहीं आती है। सवाल है कि अगर 40 साल का कोई व्यक्ति अगले 15 साल के लिए निवेश करना चाहता है तो उसके लिए बेस्ट इनवेस्टमेंट ऑप्शन क्या होगा?

15 साल में निवेश से बनेगा बड़ा फंड

एक्सपर्ट्स का कहना है कि 15 साल का पीरियड निवेश के लिए अच्छा है। अगर हर महीने 10000 रुपये का निवेश 15 साल तक किया जाए तो अच्छा फंड तैयार हो सकता है। लंबी अवधि के निवेश के लिए कुछ अच्छे विकल्प हैं। इनमें पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF), सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) और म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम में SIP शामिल हैं।

पीपीएफ और SSY सरकारी की स्कीम

पीपीएफ और एसएसवाय सरकारी की स्कीम हैं। ये फिक्स्ड रिटर्न स्कीम हैं। इसका मतलब है कि निवेश से पहले आपको अंदाजा मिल जाता है कि किसी खास अवधि तक निवेश करने के बाद आपके लिए कितना बड़ा फंड तैयार होगा। सरकार की स्कीम होने की वजह से यह पूरी तरह सुरक्षित हैं। इनमें पैसा डूबने का डर ना के बराबर है। इसके अलावा इनके रिटर्न पर शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव का कोई असर नहीं पड़ता है।

SIP से मंथली निवेश करने में रिस्क

म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम में SIP उन लोगों के लिए सही है, जो निवेश पर रिस्क ले सकते हैं। इसकी वजह यह है कि म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम सिप से हर महीने निवेश के पैसे को शेयर बाजार में लगाती है। इसलिए स्कीम के रिटर्न पर शेयर बाजार के प्रदर्शन का सीधा असर पड़ता है। शेयर बाजार का प्रदर्शन अच्छा रहने पर ज्यादा रिटर्न मिलता है, जबकि प्रदर्शन खराब होने पर रिटर्न भी कम रह सकता है।

एसएसवाय में निवेश का पीरियड 15 साल

अब हम देखेंगे कि तीनों इनवेस्टमेंट ऑप्शंस में मंथली 10,000 रुपये के निवेश से 15 साल में कितना बड़ा फंड तैयार होता है। सबसे पहले हम SSY का उदाहरण लेते हैं। यह स्कीम उन लोगों के लिए है, जिनकी बेटियां हैं। माता-पिता मैक्सिमम दो बेटियों के नाम से सुकन्या समृद्धि अकाउंट ओपन कर सकते हैं। एक बेटी के नाम से सिर्फ एक अकाउंट ओपन होगा। बेटी की उम्र 10 साल से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।

एसएसवाय का इंटरेस्ट रेट सालाना 8.2 फीसदी

सुकन्या समृद्धि स्कीम का इंटरेस्ट रेट 8.2 फीसदी है। इस स्कीम में सिर्फ 15 साल तक निवेश करना होता है। अकाउंट ओपन करने के 21 साल बाद स्कीम मैच्योर हो जाती है। इसका मतलब है कि अगर बेटी की उम्र अभी 5 साल है तो मंथली 10,000 रुपये 15 साल तक निवेश करने पर साल 2047 तक करीब 55,42,062 लाख रुपये का फंड तैयार हो जाएगा। इसमें 15 साल में कुल निवेश 18,00,000 रुपये होगा। इस पर आपको 37,42,062 रुपये का इंटरेस्ट मिलेगा। मैच्योरिटी अमाउंट पर टैक्स नहीं लगेगा।

retirement table

पीपीएफ का इंटरेस्ट रेट सालाना 7.1 फीसदी 

PPF की स्कीम 15 साल में मैच्योर हो जाती है। इसका इंटरेस्ट रेट अभी 7.1 फीसदी है। इस तरह आप 15 साल में कुल 18,00,000 रुपये निवेश करेंगे। इस पर आपको कुल 14,54,567 रुपये का इंटरेस्ट मिलेगा। कुल मिलाकर 15 साल बाद आपको कुल 32,54,567 लाख रुपये मिलेंगे। इस पैसे पर आपको कोई टैक्स नहीं चुकाना होगा। अगर आप इनकम टैक्स की ओल्ड रीजीम का इस्तेमाल करते हैं तो आप निवेश के पैसे पर डिडक्शंस क्लेम कर सकते हैं।

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सिप से निवेश करने में बनेगा सबसे बड़ा फंड

म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम में मंथली 10000 रुपये का निवेश करने पर कुल 47,59,314 रुपये का फंड बनेगा। इस कैलकुलेशन में सालाना 12 फीसदी रिटर्न माना गया है। इसका मतलब है कि 15 साल में आपका 18 लाख रुपये का निवेश कंपाउंडिंग की वजह से 29,59,314 रुपये का रिटर्न जेनरेट करता है। लेकिन, ध्यान देने वाली बात यह है कि इस पैसे पर आपको कैपिटल गेंस टैक्स चुकाना होगा। लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस का रेट 12.5 फीसदी है। इस रेट से कुल 5,94,914.25 रुपये टैक्स लगेगा। इसके बावजूद 15 साल का रिटर्न पीपीएफ और सुकन्या समृद्धि योजना से ज्यादा है।

SIP Calculator: 40 साल तक जीरो सेविंग के बाद भी 60 तक बना सकते हैं 3 करोड़ का रिटायरमेंट फंड, ये है मंथली एसआईपी कैलकुलेशन

SIP Calculator: कई लोगों को सेविंग्स और इनवेस्टमेंट का ख्याल देर से आता है। फिर उन्हें लगता है कि इसके लिए समय उनके हाथ से निकल गया है। लेकिन, यह पूरा सच नहीं है। जल्द सेविंग्स और निवेश शुरू करने के कई फायदे हैं। लेकिन, देर से निवेश शुरू करने पर भी रिटायरमेंट के लिए अच्छा फंड बन सकता है।

40 की उम्र में भी रिटायरमेंट के लिए शुरू कर सकते हैं निवेश

अगर आपकी उम्र 40 हो गई है तो भी आप रिटायरमेंट फंड के लिए निवेश शुरू कर सकते हैं। लेकिन, आपको हर महीने ज्यादा इनवेस्ट करना होगा। अगर कोई व्यक्ति 40 साल की उम्र में रिटायरमेंट फंड के लिए निवेश शुरू करता है तो उसके पास इसके लिए 20 साल बचते हैं। यह समय ज्यादा नहीं है तो बहुत कम भी नहीं है।

रिटायरमेंट फंड के कैलकुलेशन में इनफ्लेशन को ध्यान में रखना होगा

आम तौर पर यह माना जाता है कि आपका रिटायरमेंट फंड आपके सालाना खर्च का 25 से 30 गुना होना चाहिए। मान लीजिए किसी व्यक्ति के परिवार का मंथली खर्च आज 30,000 रुपये है। अगर इनफ्लेशन 6 फीसदी मान लिया जाए तो यह 20 साल बाद 96,000 रुपये हो जाएगा। इसका 25 गुना करीब 2.9 करोड़ रुपये होगा।

मंथली 15000 रुपये सिप निवेश से 1.5 करोड़ का फंड बन सकता है

अगर आप हर महीने सिप से 15,000 रुपये इनवेस्ट करते हैं तो आप 20 साल में आप 36 लाख रुपये निवेश करेंगे। अगर आपके निवेश पर सालाना 10 फीसदी रिटर्न मिलता है तो 20 साल बाद आपका पैसा बढ़कर 1.15 करोड़ हो जाएगा। अगर सालाना रिटर्न 12 फीसदी मान लिया जाए तो यह पैसा करीब 1.5 करोड़ रुपये होगा। यह सिर्फ एक उदाहरण है। इक्विटी फंड में निवेश पर रिटर्न की गारंटी नहीं होती है।

3 करोड़ रुपये के फंड के लिए बढ़ाना होगा मंथली सिप अमाउंट 

अगर आप 2.9 करोड़ रुपये का रिटायरमेंट फंड चाहते हैं तो आपको हर महीने करीब 29,000 रुपये इनवेस्ट करना होगा। इस कैलकुलेशन में सालाना रिटर्न 12 फीसदी माना गया है। यह अमाउंट आपको ज्यादा लग सकता है। इसकी वजह यह है कि 40 साल के व्यक्ति पर परिवार सहित कई तरह की जिम्मेदारियां होती हैं। लेकिन, इसका एक दूसरा तरीका है।

हर साल सिप 10 फीसदी बढ़ाने से मिल सकती है काफी मदद  

अगर आप मंथली 15,000 रुपये के सिप को हर साल 10 फीसदी बढ़ाते हैं तो निवेश पर 12 फीसदी रिटर्न से आपके लिए करीब 3 करोड़ रुपये का फंड तैयार हो जाएगा। आपको हर साल इनकम बढ़ने के साथ सिप का अमाउंट बढ़ाना होगा। आपको गैरजरूरी खर्चों में कटौती करनी होगी। जरूरत पड़ने पर आप रिटायरमेंट की उम्र 62 या 63 साल मान सकते हैं।

पीपीएफ में भी निवेश करने से रिटायरमें फंड बनाना होगा आसान

अगर आप नौकरी करते हैं तो ईपीएफ में रेगुलर कंट्रिब्यूशन से भी बड़ा फंड बनेगा। सबसे पहले आपको यह चेक कर लेना चाहिए कि इससे कितना बड़ा फंड बनेगा। दूसरा, आप पीपीएफ यानी पब्लिक प्रोविडेंट फंड में भी निवेश शुरू कर सकते हैं। पीपीएफ 15 साल में मैच्योर हो जाता है। दिसंबर तिमाही में पीपीएफ का इंटरेस्ट रेट 7.1 फीसदी है। सरकार हर तिमाही पीपीएफ सहित स्मॉल सेविंग्स स्कीम के इंटरेस्ट रेट की समीक्षा करती है।

NPS भी हालिया बदलाव के बाद सब्सक्राइबर्स के लिए काफी अट्रैक्टिव

NPS यानी नेशनल पेंशन सिस्टम भी अब काफी अट्रैक्टिव हो गया है। हाल में पीएफआरडीए ने इसमें कई बदलाव किए हैं। अगर आपके एनपीएस में 12 लाख या इससे ज्यादा हैं तो आप 60 साल की उम्र में एकमुश्त 80 फीसदी पैसे निकाल सकते हैं। सिर्फ 20 फीसदी पैसे का इस्तेमाल एन्युटी के लिए होगा। दूसरा, सब्सक्राइबर्स 85 साल की उम्र तक इनवेस्टमेंट बनाए रख सकते हैं।

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हर महीने निवेश करने में इन बातों का रखना होगा खास ख्याल 

40 की उम्र में निवेश शुरू करने पर आपको ज्यादातर पैसा इंडेक्स या फ्लेक्सीकैप फंड जैसे डायवर्सिफायड इक्विटी फंड में लगाना होगा। आपको निवेश सिप के जरिए करना होगा। रिटायरमेंट नजदीक आने पर कई एक्सपर्ट्स पैसा इक्विटी फंड से निकालकर धीरे-धीरे हाइब्रिड या डेट फंड्स में लगाने की सलाह देते हैं। इससे अचानक बाजार में गिरावट आने पर आपके रिटायरमेंट फंड पर खराब असर नहीं पड़ेगा।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

Retiring at 45: जल्द रिटायरमेंट की तैयारी! नौकरी छोड़ने से पहले कर लें ये कैलकुलेशन

Retiring at 45: जल्दी रिटायर होना काफी आकर्षक लग सकता है लेकिन ऐसा फंड तैयार करना जो 30-40 वर्षों तक या उससे अधिक समय तक खर्चों को पूरा कर सके, इसके लिए सावधानीपूर्वक प्लानिंग की जरूरत होती है। मान लीजिए कि 34 साल की उम्र में आपकी हर महीने की सैलरी ₹1.5 लाख है और आप 45 साल की उम्र तक रिटायर होना चाहते हैं। ऐसे में आपके सामने पहली बड़ी चुनौती यह अनुमान लगाने की है कि भविष्य में आपके खर्च कितने होंगे, रिटायरमेंट के लिए कितने बड़े फंड की जरूरत पड़ेगी और इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए हर महीने कितना निवेश करना होगा।

Retiring at 45: ये है पूरा कैलकुलेशन

बजाज कैपिटल के ज्वाइंट चेयरमैन और एमडी संजीव बजाज का का कहना है कि 45 साल की उम्र में रिटायर होना एक बड़ा लक्ष्य है, लेकिन इसकी शुरुआत निवेश के विकल्प चुनने से नहीं, बल्कि यह समझने से होनी चाहिए कि 45 साल की उम्र में आपका खर्च कितना होगा। चूंकि आपकी उम्र 34 साल है तो आपके पास 11 साल हैं इस प्लानिंग के लिए और इन्हीं 11 साल में जिंदगी भर के लिए खर्चों का इंतजाम करना है। संजीव के मुताबिक इसमें दो चीजों का हल खोजना है- एक तो कम समय में पर्याप्त बड़ा रिटायरमेंट फंड तैयार करना और दूसरा यह सुनिश्चित करना कि वह फंड लंबे समय तक आपके खर्चों को पूरा कर सके।

एक आसान उदाहरण से समझिए इसे। मान लीजिए कि आपका हर महीने का खर्च अभी ₹60 हजार है और अगर महंगाई सालाना 6% की रफ्तार से बढ़े तो जब आप 45 साल के होंगे, तब यही खर्च बढ़कर लगभग ₹1.14 लाख प्रति माह हो सकता है। अब अगर आप रिटायरमेंट के दौरान हर साल अपने फंड का 3.5% निकालने का टारगेट रखते हैं, और महंगाई के हिसाब से निकाली जाने वाले पैसे को हर साल बढ़ाते हैं, तो 40 साल से अधिक के रिटायरमेंट के लिए आपको लगभग ₹3.9 करोड़ के फंड की जरूरत हो सकती है।

अब आता है असली गणित। 11 साल में इस ₹3.9 करोड़ के फंड को तैयार करने के लिए अगर मान लेते हैं कि निवेश की गई पूंजी पर सालाना 10% की रफ्तार से रिटर्न मिल रहा है तो आपको हर महीने लगभग ₹1.7 लाख निवेश करना होगा जोकि ₹1.5 लाख की मौजूदा इनकम से कम है। ऐसे में मौजूदा जीवनशैली और इनकम के हिसाब से 45 साल की उम्र में पूरी तरह रिटायर होना मुश्किल होगा। हालांकि इस कैलकुलेशन से आपको पता चल गया कि कहां क्या बदलाव करना है।

अगर अर्ली-रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाकर 45 साल से 50 वर्ष कर दी जाए तो हर महीने ₹1.15 लाख के निवेश में काम हो जाएगा। इसके अलावा कुछ और तरीके भी अपना सकते हैं जैसे कि रिटायरमेंट के बाद अनुमानित खर्चों को कम करना, सैलरी बढ़ने पर निवेश की रकम बढ़ाना और 45 साल की उम्र के बाद पूरी तरह काम छोड़ने के बजाय पार्ट-टाइम काम या कंसल्टिंग से कुछ कमाई जारी रखना।

कुछ सावधानी और रिस्क समझना भी जरूरी

जल्दी रिटायरमेंट की योजना बनाते समय स्वास्थ्य से जुड़े खर्चों पर खास ध्यान देना चाहिए क्योंकि आमतौर पर नौकरी छोड़ने के बाद कंपनी की तरफ से मिलने वाला हेल्थ इंश्योरेंस भी समाप्त हो जाता है। ऐसे में आपको अपनी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी और भविष्य में मेडिकल खर्चों के लिए अलग से योजना बनानी होगी।

एक और अहम रिस्क मार्केट में बिकवाली का दबाव है। अगर रिटायरमेंट के तुरंत बाद शेयर बाजार में बड़ी गिरावट आ जाती है और आपको अपने खर्चों के लिए गिरते हुए निवेश से पैसा निकालना पड़ता है, तो आपके रिटायरमेंट फंड पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। ऐसी स्थिति से निपटने के लिए कुछ वर्षों के खर्च के बराबर पैसे कम रिस्क वाले एसेट्स में रखने चाहिए। इससे जब शेयर मार्केट में हाहाकार मचा हो, तब जल्दबाजी में पैसे निकालने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

तीन काम करें सबसे पहले

अर्ली-रिटायरमेंट के लिए तीन काम सबसे पहले करना चाहिए-

तीन महीने तक के अपने वास्तविक खर्चों का रिकॉर्ड रखें। इससे आपको पता चलेगा कि हर महीने आपकी जरूरतों पर वास्तव में कितना पैसा खर्च होता है।

म्यूचुअल फंड, शेयर, पीपीएफ और ईपीएफ समेत अपने सभी मौजूदा निवेशों की पूरी लिस्ट बनाएं।

अपने मौजूदा फंड और लक्ष्य के बीच का अंतर निकालें। इससे पता चलेगा कि आपको कितना अतिरिक्त निवेश करना होगा और अपने लक्ष्य के लिए क्या बदलाव जरूरी हैं।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

इन 5 सरकारी योजनाओं में करें निवेश, पैसा सुरक्षित रहेगा और ब्याज भी मिलेगा; समझिए पूरा कैलकुलेशन

Small Savings Schemes: पैसा निवेश करने के लिए हर किसी को शेयर बाजार का जोखिम पसंद नहीं होता। खासकर जब बात बच्चों की पढ़ाई, रिटायरमेंट या भविष्य के लिए जमा की गई रकम की हो।

ऐसे निवेशकों के लिए सरकार की कई स्मॉल सेविंग स्कीमें हैं। इनमें पैसा तय नियमों के तहत लगाया जाता है और ब्याज दर सरकार तय करती है। PPF, NSC, सुकन्या समृद्धि योजना और सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम जैसी योजनाएं इसी कैटेगरी में आती हैं।

1. PPF

PPF यानी Public Provident Fund लंबे समय के निवेश के लिए है। इसका मैच्योरिटी पीरियड 15 साल है। इसमें हर महीने ₹5,000 जमा करते हैं तो साल में ₹60,000 निवेश होगा। 15 साल में आपकी कुल जमा रकम ₹9 लाख होगी।

मौजूदा 7.1% ब्याज दर को मानें तो 15 साल बाद यह रकम मोटे तौर पर ₹16 लाख के आसपास हो सकती है। यानी करीब ₹7 लाख ब्याज से जुड़ सकते हैं। असल रकम जमा करने की तारीख और उस समय लागू ब्याज दर पर निर्भर करेगी। PPF की ब्याज दर सरकार समय-समय पर तय करती है।

2. सुकन्या समृद्धि योजना

अगर बेटी के भविष्य के लिए पैसा जमा करना है तो सुकन्या समृद्धि योजना एक विकल्प है। मौजूदा ब्याज दर 8.2% है। इसमें हर महीने ₹3,000 जमा करने पर सालाना ₹36,000 निवेश होगा। 15 साल में कुल जमा रकम ₹5.40 लाख होगी।

अगर मौजूदा ब्याज दर के आसपास रिटर्न बना रहता है, तो 21 साल की मैच्योरिटी अवधि में यह रकम करीब ₹17 लाख तक पहुंच सकती है। यहां ध्यान रखें कि सुकन्या की ब्याज दर भी समय-समय पर बदल सकती है। इसलिए इसे एक अनुमान के तौर पर देखें।

3. सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम

60 साल या उससे ज्यादा उम्र के लोगों के लिए SCSS यानी Senior Citizens Savings Scheme है। रिटायरमेंट के बाद नियमित ब्याज आय चाहने वालों के लिए यह विकल्प देखा जा सकता है।

मौजूदा ब्याज दर 8.2% है। ऐसे में अगर कोई ₹10 लाख जमा करता है तो सालाना ब्याज करीब ₹82,000 बैठेगा। ब्याज तिमाही आधार पर मिलता है, यानी करीब ₹20,500 हर तिमाही। 5 साल में कुल ब्याज करीब ₹4.10 लाख बनता है, अगर पूरी अवधि में यही दर बनी रहे।

4. नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट

NSC यानी National Savings Certificate उन लोगों के लिए है जो एक तय अवधि के लिए पैसा लगाकर ब्याज कमाना चाहते हैं। मौजूदा ब्याज दर 7.7% है और इसकी अवधि 5 साल है।

अगर आप ₹5 लाख NSC में लगाते हैं तो 5 साल बाद रकम करीब ₹7.23 लाख हो सकती है। यानी करीब ₹2.23 लाख ब्याज से जुड़ेंगे। NSC का ब्याज सालाना कंपाउंड होता है।

5. किसान विकास पत्र

KVP यानी Kisan Vikas Patra में निवेश रकम तय अवधि में दोगुनी होती है। मौजूदा ब्याज दर 7.5% है और इस दर पर रकम 115 महीने यानी करीब 9 साल 7 महीने में दोगुनी होती है।

इस हिसाब से अगर आप ₹3 लाख KVP में लगाते हैं तो मैच्योरिटी पर रकम करीब ₹6 लाख हो सकती है। यानी करीब ₹3 लाख का ब्याज मिलेगा। KVP में मैच्योरिटी अवधि उस समय लागू दर के आधार पर तय होती है।

किसके लिए कौन सी स्कीम?

अगर आपका लक्ष्य लंबी अवधि का है तो PPF पर विचार किया जा सकता है। बेटी के भविष्य के लिए सुकन्या समृद्धि योजना देख सकते हैं। रिटायरमेंट के बाद नियमित ब्याज आय चाहिए तो SCSS पर नजर डाल सकते हैं।

वहीं तय अवधि के लिए रकम लगानी है तो NSC या KVP जैसे विकल्प आजमाए जा सकते हैं। इन योजनाओं में बाजार के रोजाना उतार-चढ़ाव का असर सीधे आपके निवेश पर नहीं पड़ता।

Retirement Planning: ₹1 करोड़ का रिटायरमेंट फंड कितने साल चलेगा? समझिए पूरा कैलकुलेशन

नोट: इन सभी छोटी बचत योजनाओं की मौजूदा दरें जुलाई से सितंबर 2026 की तिमाही के लिए लागू हैं।

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Wealth Creation Tips: सिर्फ हाई सैलरी के भरोसे बैठे हैं तो धोखा खा जाएंगे, एक्सपर्ट ने बताए वेल्थ क्रिएशन के 5 तरीके

Wealth Creation Tips: वेल्थ क्रिएशन के लिए क्या ज्यादा सैलरी जरूरी है? आपकी इस बारे में क्या राय है? ज्यादातर लोग यह सोचते हैं कि इनवेस्टमेंट से मोटा पैसा बनाने के लिए ज्यादा सैलरी जरूरी है। वे सैलरी बढ़ने के इंतजार में इनवेस्टमेंट शुरू नहीं कर पाते, जबकि कम इनकम वाले लोग रेगुलर इनवेस्टमेंट से बड़ा फंड तैयार कर लेते हैं। आशीष कांचरला एंड एसोसिएट्स के फाउंडर और सीए ने बताया कि वेल्थ क्रिएशन के लिए मोटी सैलरी से ज्यादा जरूरी कुछ खास आदतें हैं।

पहले निवेश करें फिर खर्च

उन्होंने कहा कि वेल्थ क्रिएशन के आपके रास्ते में सबसे बड़ी बाधा रुपये-पैसे को लेकर आपकी पुरानी सोच है। हममें से ज्यादातर लोग पहले खर्च करने के बारे में सोचते हैं। पैसे बचने पर वे सेविंग्स के बारे में सोचते हैं। यह आदत वेल्थ क्रिएशन से आपको रोक देती है। अगर आप वेल्थ क्रिएट करना चाहते हैं तो पहले आपको सेविंग्स करनी होगी फिर बाकी पैसे से महीने का खर्च चलाना होगा। मान लीजिए आपकी सैलरी मंथली 1 लाख रुपये है तो आपको कम से कम हर महीने 20,000-30,000 रुपये सेविंग्स और निवेश के लिए इस्तेमाल करना होगा।

निवेश को बनाएं आदत

दूसरा, इनवेस्टमेंट किसी त्योहार की तरह नहीं है, जो साल में तीन बार या चार बार आता है। इसका नियमित होना जरूरी है। आपको हर महीने अनुशासित रूप से निवेश जारी रखना होगा। कई लोग निवेश शुरू तो करते हैं, लेकिन कुछ ही महीनों बाद उनके निवेश की गाड़ी पटरी से उतर जाती है। सबसे पहले आपको इनवेस्टमेंट अमाउंट सोच-समझकर तय करना होगा। अगर आप ज्यादा अमाउंट तय करेंगे तो फिर आपको उसे जारी रखने में दिक्कत आ सकती है।

 खर्च को नहीं बढ़ने दें

ज्यादातर लोगों का खर्च सैलरी बढ़ने के साथ ही बढ़ जाता है। यह वेल्थ क्रिएशन के लिए ठीक नहीं है। आपको अपने खर्च को सैलरी के हिसाब से बढ़ने से रोकना होगा। अगर आज आपकी सैलरी 1 लाख है, जो पांच साल बाद बढ़कर 2.5 लाख हो जाएगी तो इसका मतलब यह नहीं आपका खर्च भी 2.5 गुना हो जाना चाहिए। आपको बढ़ी हुई इनकम का इस्तेमाल इनवेस्टमेंट बढ़ाने के लिए करना चाहिए। इससे कम से ज्यादा वेल्थ आसानी से क्रिएट कर सकेंगे।

इंश्योरेंस सिर्फ प्रोटेक्शन के लिए

कई लोग इंश्योरेंस का मतलब ठीक तरह से नहीं समझते। एक्सपर्ट्स का कहना है कि बीमा का इस्तेमाल सिर्फ प्रोटेक्शन के लिए होना चाहिए, न कि इनवेस्टमेंट के लिए। अगर आप नौकरी करते हैं और आपकी फैमिली है, जिसमें बीवी और बच्चें हैं तो परिवार की फाइनेंशियल सिक्योरिटी आपकी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। यहां इंश्योरेंस आपकी मदद करता है। टर्म पॉलिसी खरीदकर आप अपने परिवार को पर्याप्त फाइनेंशियल कवर दे सकते हैं। किसी अनहोनी की स्थिति में इंश्योरेंस से आपके परिवार को इतना पैसा मिल जाएगा कि उन्हें आर्थिक रूप से लाचार नहीं होना पड़ेगा। टर्म पॉलिसी का प्रीमियम एन्डॉमेंट पॉलिसी के प्रीमियम के मुकाबले काफी कम होता है।

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निवेश में डायवर्सिफिकेशन

सिर्फ निवेश करना पर्याप्त नहीं है। आप कहां अपने पैसे का निवेश कर रहे हैं, यह काफी मायने रखता है। पहला, आपके निवेश से मिलने वाला रिटर्न इनफ्लेशन रेट से काफी ज्यादा होना चाहिए। अगर ऐसा नहीं है तो आपके पैसे की वैल्यू लंबी अवधि में बढ़ने की जगह घटेगी। दूसरा, निवेश में डायवर्सिफिकेशन बहुत जरूरी है। आप कुछ पैसा अगर शेयर या म्यूचुअल फंड की स्कीम में लगा रहे हैं तो कुछ फिक्स्ड इनकम इंस्ट्रूमेंट्स में भी लगाना चाहिए। इसके अलावा आपके पोर्टफोलियो में कम से कम 10-15 फीसदी हिस्सेदारी बुलियन यानी गोल्ड और सिल्वर की होनी चाहिए। पीपीएफ, वीपीएफ, बैंक एफडी और बॉन्ड फंड्स फिक्स्ड इनकम के अच्छे ऑप्शंस हैं।

September 2026: दूध से लेकर LPG सिलेंडर तक… 1 सितंबर से बदल जाएंगे ये 9 बड़े नियम! आपकी जेब पर पड़ेगा बड़ा असर

Financial Rule Changes September 2026: सितंबर का महीना शुरू होते ही आम आदमी से लेकर निवेशकों और करदाताओं के लिए कई नियम बदलने वाले हैं। सितंबर 2026 में दूध की कीमतों से लेकर डीमैट अकाउंट, एडवांस टैक्स, एलपीजी सिलेंडर बायोमेट्रिक और फ्लाइट में सफर तक से जुड़े 9 बड़े बदलाव लागू हो रहे हैं। 1 सितंबर 2026 से लागू होने वाले इन सभी 9 महत्वपूर्ण बदलावों के बारे में विस्तार से जानिए।

1. डीमैट और म्यूचुअल फंड में नॉमिनेशन के नए नियम

1 सितंबर 2026 से डीमैट अकाउंट और म्यूचुअल फंड फोलियो के लिए नॉमिनेशन के नए दिशानिर्देश लागू हो जाएंगे। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने खातों का नॉमिनेशन स्टेटस तुरंत चेक करें और आवश्यक प्रक्रिया या ऑप्ट-आउट फॉर्म समय रहते पूरा कर लें।

2. SEBI के नए ETF रूल्स

शेयर बाजार के नियामक सेबी का नया एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) फ्रेमवर्क 7 सितंबर 2026 से लागू होने जा रहा है। इसमें बेस प्राइस, प्राइस बैंड, प्री-ओपन कॉल ऑक्शन और क्लोज-आउट प्रक्रियाओं में बदलाव शामिल हैं। पहले इसे लागू करने की समयसीमा अलग थी, जिसे बढ़ाकर 7 सितंबर किया गया है।

3. FCNR(B) डिपॉजिट पर स्पेशल स्वैप विंडो बंद

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की FCNR(B) डिपॉजिट के लिए विशेष डॉलर-रुपया स्वैप सुविधा 31 अगस्त को समाप्त हो रही है। 1 सितंबर से नई FCNR(B) एफडी पर यह स्पेशल फैसिलिटी नहीं मिलेगी। हालांकि, FCNR(B) डिपॉजिट बंद नहीं हुए हैं, लेकिन अब इन पर ब्याज दरें बैंक की सामान्य दरों के आधार पर तय होंगी।

4. एडवांस टैक्स चुकाने की लास्ट डेट: 15 सितंबर

करदाताओं के लिए 15 सितंबर 2026 एडवांस टैक्स की अगली किश्त जमा करने की अंतिम तिथि है। नियमों के तहत, योग्य टैक्सपेयर्स को 15 सितंबर तक अपनी कुल एडवांस टैक्स देनदारी का कम से कम 45% हिस्सा सरकार को जमा करना अनिवार्य है।

5. छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों में बदलाव

सितंबर का आखिरी दिन यानी 30 सितंबर छोटी बचत योजनाओं में निवेश करने वालों के लिए बेहद अहम है। केंद्र सरकार अक्टूबर-दिसंबर 2026 तिमाही के लिए पीपीएफ (PPF), सुकन्या समृद्धि और एनएससी (NSC) जैसी स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स की नई ब्याज दरों की समीक्षा और घोषणा करेगी।

6. इंटरनेशनल फ्लाइट्स: बोर्डिंग पास पर स्टैंप की जरूरत खत्म

1 सितंबर 2026 से भारत से विदेश यात्रा करने वाले यात्रियों को इमिग्रेशन काउंटर पर बोर्डिंग पास पर मोहर लगवाने की बाध्यता से छूट दे दी गई है। अब यात्री अपने मोबाइल में इलेक्ट्रॉनिक बोर्डिंग पास का उपयोग कर सकते हैं या प्रिंटेड पास दिखाकर इमिग्रेशन की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।

7. LPG e-KYC की अनिवार्यता

घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन (e-KYC) कराने की समयसीमा 31 अगस्त यानी आज तक है। जिन उपभोक्ताओं ने अभी तक ई-केवाईसी पूरी नहीं की है, उन्हें 1 सितंबर के बाद रसोई गैस सिलेंडर की रीफिल बुकिंग या सब्सिडी दरों का लाभ लेने में दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है।

8. मुंबई में दूध की कीमतें बढ़ीं

मुंबई में 1 सितंबर से ताजा भैंस के दूध के थोक दामों में ₹9 प्रति लीटर की बढ़ोतरी होने वाली है। इसके बाद अब दूध की नई दरें ₹102 प्रति लीटर तक पहुंच गई हैं। यह रिवाइज्ड रेट अगले छह महीनों के लिए लागू रहेंगे।

9. मुंबई में ऑटो और टैक्सी के किराए में बढ़ोतरी

मुंबई में रोजाना सफर करने वाले यात्रियों के लिए भी झटका लगने वाला है। 1 सितंबर से मुंबई में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी के बेस फेयर में बढ़ोतरी होने वाली है, जिससे लोकल ट्रैवलिंग थोड़ी महंगी हो जाएगी।

Tax-Saving Mutual Fund: टैक्स बचाने वाला इकलौता म्यूचुअल फंड प्लान, तो सबसे कम लॉक-इन वाला ऑप्शन भी

Tax-Saving Mutual Fund: इक्विटी मार्केट में निवेश से अच्छा रिटर्न हासिल किया जा सकता है और जो निवेशक कंजर्वेटिव हैं, वे म्यूचु्अल फंड्स के जरिए अपने पोर्टफोलियो में इक्विटी मार्केट का एक्सपोजर रखते हैं। हालांकि इसमें एक खामी ये है कि इसमें जो पैसे लगाते हैं, उस पर कोई टैक्स डिडक्शन नहीं मिलता है, सिवाय एक विकल्प में। यहां उसी एक म्यूचुअल फंड ऑप्शन यानी ELSS (इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम) के बारे में बताया जा रहा है, जिसमें निवेश से अच्छा रिटर्न हासिल कर सकते हैं और ऐसा भी नहीं है कि टैक्स बेनेफिट्स मिल रहा है, तो रिटर्न म्यूचुअल फंड्स के बाकी विकल्पों की तुलना में फीका रहेगा, बल्कि महंगाई को बीट करते हुए तगड़ा रिटर्न भी हासिल किया जा सकता है। इसके अलावा एक और खास बात ये है कि इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80सी के तहत पुरानी टैक्स रिजीम में जितने भी तरीके हैं टैक्स बचाने के, उसमें सबसे कम लॉक-इन भी इसी का है।

ELSS में निवेश के क्या हैं टैक्स बेनेफिट्स

ईएलएसएस म्यूचुअल फंड्स में निवेश पर पुरानी टैक्स रिजीम में इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80सी के तहत एक वित्त वर्ष में ₹1.50 लाख तक के निवेश पर डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं।

एक साल से अधिक होल्डिंग को रिडीम करने पर यानी लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) में से ₹1 लाख से अधिक जितना मुनाफा है, उस पर 10% की दर से तो एक साल से कम वाली होल्डिंग को रिडीम करने पर यानी शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) पर 20% की दर से टैक्स देना होगा।

ईएलएसएस की यूनिट्स के रिडेम्प्शन पर कोई TDS (टैक्स डिडक्टेड ऐट सोर्स) नहीं है।

टैक्स बेनेफिट्स के अलावा और क्या है खासियतें

ईएलएसएस इकलौता ऐसा म्यूचुअल फंड प्लान हैं, जिसमें टैक्स बेनेफिट्स मिलता है।

एक और खास बात ये है कि सेक्शन 80सी के तहत जिन-जिन विकल्पों में जितने भी निवेश प्लान हैं, उनमें सबसे कम लॉक-इन पीरियड इसी का है जैसे कि पीपीएफ में 15 साल का लॉक-इन है तो टैक्स-सेविंग्स एफडी का लॉक-इन पांच साल है लेकिन ईएलएसएस के मामले में तीन ही साल है।

ईएलएसएस में लॉक-इन पीरियड खत्म होने के बाद यूनिट्स बेचने पर कोई एग्जिट लोड नहीं लगेगा।

इसमें चाहें तो एकमुश्त निवेश कर सकते हैं या एसआईपी (SIP) यानी एक नियमित समय अंतराल पर थोड़ा-थोड़ा करके भी लंबे समय में अच्छा फंड तैयार कर सकते हैं।

कैसा है रिटर्न के मामले में

ईएलएसएस में रिटर्न भी तगड़ा मिलता है। सिर्फ तीन साल के ही आंकड़ों को लेकर बात करें तो मोतीलाल ओसवाल ईएलएसएस टैक्स फंड डायरेक्ट ग्रोथ में सालाना 23.84%, आईटीआई ईएलएसएस टैक्स सेवर फंड डायरेक्ट ग्रोथ में 19.45%, व्हाइटओक कैपिटल ईएलएसएस टैक्स फंड डायरेक्ट ग्रोथ में 18.63%, एचएसबीसी ईएलएसएस टैक्स सेवर फंड डायरेक्ट ग्रोथ में 18.34% और जेएम ईएलएसएस टैक्स सेवर फंड डायरेक्ट ग्रोथ में 18.27% की रफ्तार से बढ़ा है।

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

PPF Vs SSY: हर महीने ₹5000 निवेश करें तो पीपीएफ और सुकन्या समृद्धि योजना में कितना पैसा बनेगा? जानिए पूरा हिसाब

PPF Vs SSY: अपनी बेटी के हायर एजुकेशन, शादी या दूसरी लंबे समय की फाइनेंशियल जरूरतों के लिए बचत की शुरुआत करते समय माता-पिता के मन में सबसे पहला सवाल यही उठता है कि पैसा कहां निवेश किया जाए। सरकार द्वारा समर्थित पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) और सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) दो सबसे लोकप्रिय और सुरक्षित विकल्प हैं। हालांकि इनकी एलिजिबिलिटी, इंट्रेस्ट रेट, मैच्योरिटी और समय से पहले पैसे निकालने के नियमों के मामले में दोनों योजनाएं एक-दूसरे से काफी अलग हैं।

वर्तमान में सुकन्या समृद्धि योजना 8.2 प्रतिशत का हायर इंट्रेस्ट रेट देती है। वहीं पीपीएफ पर 7.1 प्रतिशत की दर से ब्याज मिल रहा है। हालांकि सुकन्या योजना में मिलने वाला अधिक रिटर्न सख्त विड्रॉल नियमों के साथ आता है जबकि पीपीएफ में ज्यादा फ्लेक्सिबिलिटी मिलती है।

बैंकबाजार के सीईओ आदिल शेट्टी कहते हैं कि पीपीएफ और सुकन्या समृद्धि योजना दोनों ही सरकार के सपोर्ट से चलने वाली बचत योजनाएं हैं, लेकिन उनकी एलिबिलिटी, टेन्योर, इंट्रेस्ट रेट और निकासी के नियम अलग-अलग हैं। ये बातें उन्हें अलग-अलग बचत जरूरतों के हिसाब से बनाते हैं।’ उन्होंने आगे कहा कि सही ऑप्शन का चुनाव बच्ची की उम्र, निवेश की समयसीमा और इस बात पर निर्भर करता है कि आप बेटी के भविष्य के लिए इन्वेस्ट करना चाहते हैं या आपका लॉन्ग टर्म गोल कुछ और है।

सुकन्या समृद्धि योजना (SSY): ज्यादा इंट्रेस्ट पर विड्रॉल के नियम सख्त

सुकन्या समृद्धि योजना का खाता 10 साल से कम उम्र की बच्ची के लिए खोला जा सकता है। यह अकाउंट ओपन होने के डेट से 21 साल में मैच्योर होता है। इसमें सिर्फ शुरुआती 15 वर्षों तक ही कंट्रीब्यूशन करना होता है। अभी इस योजना पर 8.2 प्रतिशत की दर से इंट्रेस्ट दिया जा रहा है।

यह योजना उन माता-पिता के लिए ज्यादा बेहतर है जो अपनी बेटी के भविष्य के लिए फोकस होकर फंड बनाना चाहते हैं।

पैसे निकालने के नियम: SSY से आप जब चाहें तब पैसे नहीं निकाले जा सकते। नियम के मुताबिक बच्ची के 18 वर्ष का होने के बाद हायर एजुकेशन के खर्चों के लिए पिछले वित्तीय वर्ष के अंत में मौजूद बैलेंस का 50 फीसदी तक आंशिक रूप से निकालने की अनुमति देते हैं। यह रकम एक बार में या कुछ वर्षों की किश्तों में ली जा सकती है।

समय से पहले खाता बंद करना: बच्ची के 18 साल का होने के बाद शादी होने की स्थिति में खाता बंद किया जा सकता है। इसके अलावा खाताधारक की मौत या फाइनेंशियल क्राइसिस जैसी गंभीर परिस्थितियों में भी शर्तों के तहत समय से पहले खाता बंद करने की अनुमति है।

पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF): इन्वेस्टमेंट में ज्यादा फ्लेक्सिबिलिटी के लिए पीपीएफ की शुरुआती मैच्योरिटी अवधि 15 साल की होती है। इसे 5-5 साल के ब्लॉक में आगे बढ़ाया जा सकता है। इसमें फिक्स्ड टेन्योर के बाद लोन और पार्टिशयस विड्रॉल की सुविधा मिलती है।

खाता खोलने के वर्ष के अंत से 5 साल पूरे होने के बाद कुछ खास परिस्थितियों या वजहों से पीपीएफ खाते को समय से पहले बंद किया जा सकता है, जैसे-

खाताधारक, जीवनसाथी, बच्चों या आश्रित माता-पिता की गंभीर बीमारी के इलाज के लिए।

खाताधारक या उनके बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए (प्रवेश का प्रमाण पत्र देने पर)।

खाताधारक की निवास स्थिति में बदलाव होने पर।

यह सुविधा उन माता-पिता के लिए फायदेमंद है जो अपनी बेटी के लिए बचत तो करना चाहते हैं लेकिन उस पैसे को सिर्फ उसी के खर्चों से पूरी तरह बांधकर नहीं रखना चाहते।

PPF VS SSY कैलकुलेशन: हर महीने ₹5000 के निवेश पर कितना मिलेगा रिटर्न?

अगर आप PPF और SSY दोनों में हर महीने ₹5000 (यानी ₹60000 सालाना) इन्वेस्ट करते हैं तो मौजूदा इंट्रेस्ट रेट पर ही कैलकुलेट किया जाए तो भी दोनों की मैच्योरिटी पर बड़ी फर्क देखने को मिलता है। पहले बात करते हैं पीपीएफ की। अगर आप हर महीने ₹5000 डालते हैं तो 15 साल में आप कुल 9 लाख रुपये जमा करेंगे। 7.1 फीसदी के इंट्रेस्ट रेट के हिसाब से आपको 7 लाख 27 हजार के करीब ब्याज मिलेगा। 15 साल बाद आपकी कुल मैच्योरिटी राशि ₹1627284 हो जाएगी.

अगर आप सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) में अपनी बेटी के लिए हर महीने ₹5000 जमा करते हैं, तो 8.2 प्रतिशत की वर्तमान ब्याज दर के आधार पर आपको काफी अधिक रिटर्न मिलेगा। इस योजना के नियमानुसार आपको सिर्फ शुरुआती 15 सालों तक ही पैसे जमा करने होते हैं। इससे आपकी कुल जमा राशि 9 लाख रुपये ही रहेगी. हालांकि खाता खोलने की तारीख से 21 वर्ष में मैच्योर होने की वजह से अगले 6 वर्षों तक आपकी जमा राशि पर ब्याज जुड़ता रहेगा। इस तरह 21 साल की मैच्योरिटी पूरी होने पर आपको करीब ₹18 लाख 71 हजार का सिर्फ इंट्रेस्ट मिलेगा और आपकी कुल मैच्योरिटी 27 लाख 71 हजार से ज्यादा हो जाएगी।

यह भी पढ़ें: SSY Return Calculator: सुकन्या समृद्धि योजना में ₹3 लाख इंटरेस्ट कमाना चाहते हैं? तो इस्तेमाल करें यह फॉर्मूला

कौन सा विकल्प आपके लिए सबसे सही है?

अगर आपका एकमात्र उद्देश्य अपनी बेटी के भविष्य के लिए एक बड़ा और डेडिकेटेड फंड तैयार करना है, तो उच्च ब्याज दर (8.2%) की वजह से सुकन्या समृद्धि योजना अधिक फायदेमंद है। अगर आप उच्च ब्याज दर के बजाय निवेश में अधिक फ्लेक्सिबिलिटी और इमरजेंसी में पैसे निकालने की सुविधा चाहते हैं, तो पीपीएफ ज्यादा बेहतर विकल्प है।

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

PPF vs NSC: ₹10 लाख के निवेश पर कहां मिलेगा ज्यादा रिटर्न? समझिए 5 साल का पूरा गणित और टैक्स कैलकुलेशन

PPF vs NSC Investment Return Comparison: अगर आपके पास ₹10 लाख हैं और आप उसे अगले 5 सालों के लिए सरकारी गारंटी वाली स्कीम में बिना किसी रिस्क के जमा करना चाहते हैं, तो स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स सबसे बेहतरीन जरिया हैं।

स्मॉल सेविंग्स में दो सबसे पसंदीदा विकल्प पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (PPF) और नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC) हैं। चालू वित्त वर्ष (जुलाई-सितंबर 2026 तिमाही) के लिए सरकार ने पीपीएफ की ब्याज दर 7.1% और एनएससी की ब्याज दर 7.7% पर बरकरार रखी है।

अगर आप ₹10 लाख का निवेश करते हैं, तो 5 साल में कहां ज्यादा फायदा मिलेगा? जानिए पूरी कैलकुलेशन।

₹10 लाख के निवेश पर 5 साल की कैलकुलेशन

अगर हम दोनों स्कीम्स में ₹10 लाख के कॉर्पस पर 5 साल के ग्रोथ की तुलना करें, तो आंकड़े इस प्रकार हैं:

PPF कैलकुलेशन (7.1% ब्याज): ₹10 लाख की जमा राशि 5 साल में 7.1% सालाना ब्याज दर के हिसाब से बढ़कर लगभग ₹14,09,120 हो जाएगी। इसमें आपको 5 साल में करीब ₹4,09,120 का प्री-टैक्स ब्याज मिलेगा।

NSC कैलकुलेशन (7.7% ब्याज): ₹10 लाख का निवेश 5 साल में 7.7% की चक्रवृद्वि ब्याज दर के हिसाब से बढ़कर ₹14,49,030 हो जाएगा। यानी 5 साल में करीब ₹4,49,030 का प्री-टैक्स मुनाफा होगा।

ध्यान रहे कि पीपीएफ में एक वित्त वर्ष में अधिकतम ₹1.5 लाख ही जमा करने की इजाजत है। इसलिए ₹10 लाख का यह आंकड़ा तुलनात्मक गणना के लिए 7.1% ब्याज के आधार पर दर्शाया गया है। NSC में निवेश की कोई ऊपरी सीमा नहीं होती।

प्री-टैक्स रिटर्न में NSC आगे, लेकिन टैक्स का पेंच समझें

कागजों पर 5 साल में NSC, PPF की तुलना में सीधे तौर पर ₹39,910 का ज्यादा रिटर्न देता दिख रहा है। लेकिन असली गणित टैक्स Slab के बाद बदलता है:

PPF पर EEE स्टेटस: पीपीएफ पूरी तरह से ‘EEE’ कैटगरी में आता है। यानी जमा राशि, मिला हुआ ब्याज और मैच्योरिटी अमाउंट तीनों पूरी तरह से टैक्स-फ्री होते हैं।

NSC पर टैक्स नियम: एनएससी से मिलने वाला ब्याज आपके इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्सेबल होता है। हालांकि, पहले 4 सालों के री-इन्वेस्टेड इंटरेस्ट पर सेक्शन 80C के तहत छूट क्लेम की जा सकती है, लेकिन आखिरी साल का ब्याज पूरी तरह टैक्सेबल रहता है। Higher Tax Slab वाले निवेशकों के लिए NSC का नेट रिटर्न कम हो सकता है।

मैच्योरिटी और लिक्विडिटी में कौन सा बेहतर?

NSC (5 साल का लॉक-इन): एनएससी की मैच्योरिटी ठीक 5 साल में पूरी हो जाती है। इसके अलावा, इसमें निवेश करते ही ब्याज दर पूरे 5 साल के लिए लॉक हो जाती है, जो मार्केट में ब्याज दरें घटने पर भी नहीं बदलती।

PPF (15 साल का लॉक-इन): पीपीएफ मूल रूप से 15 साल की लंबी अवधि की स्कीम है। हालांकि, इसमें 7वें साल से आंशिक निकासी और तीसरे साल से लोन की सुविधा मिलती है। पीपीएफ की ब्याज दरों की समीक्षा सरकार हर तिमाही करती है।

PPF vs NSC: ₹10 लाख निवेश की तुलना

PPF vs NSC: ₹10 लाख निवेश की तुलना

आपके लिए कौन सा विकल्प है बेस्ट?

अगर आपकी प्राथमिकता 5 साल की फिक्स्ड अवधि, गारंटीड रिटर्न और ज्यादा ब्याज दर है और आप लोअर टैक्स स्लैब में आते हैं तो NSC आपके लिए बेस्ट है। दूसरी ओर, अगर आपका लक्ष्य लंबी अवधि के लिए पूरी तरह से टैक्स-फ्री फंड बनाना है, तो PPF से बेहतर कोई विकल्प नहीं है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि अपने वित्तीय लक्ष्यों के हिसाब से पोर्टफोलियो को डायवर्सिफाई करके दोनों स्कीम्स का सही अनुपात में इस्तेमाल करना चाहिए।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।