8th Pay Commission: आठवें वेतन आयोग (8th CPC) की तैयारियां तेज हो गई हैं। आयोग 22 अक्टूबर से मुंबई में दो दिन तक बैठक करेगा। इसमें कर्मचारी संगठनों, संस्थानों और केंद्र सरकार के कर्मचारियों की यूनियनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
दूसरी तरफ, केंद्रीय कर्मचारियों को जुलाई 2026 के महंगाई भत्ते (DA) में बढ़ोतरी का इंतजार है। यह साल की दूसरी बढ़ोतरी होगी। इसके साथ ही कर्मचारियों की नजर फिटमेंट फैक्टर पर भी है। सवाल है कि 8th Pay Commission में बेसिक सैलरी कितनी बढ़ सकती है? और DA, HRA जैसे भत्तों को जोड़ने के बाद कुल सैलरी कितनी होगी?
DA और HRA से कैसे बढ़ती है ग्रॉस सैलरी?
मान लीजिए, आठवां वेतन आयोग फिटमेंट फैक्टर 2.0 रखने की सिफारिश करता है। इससे बेसिक सैलरी दोगुनी हो सकती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि कुल सैलरी भी दोगुनी हो जाएगी। ऐसा इसलिए, क्योंकि DA, हाउस रेंट अलाउंस (HRA), ट्रांसपोर्ट अलाउंस और दूसरे भत्तों की गणना नए नियमों के हिसाब से हो सकती है।
बेसिक सैलरी कर्मचारी की तनख्वाह का मुख्य हिस्सा होती है। इसमें DA, HRA, ट्रांसपोर्ट अलाउंस और दूसरे लागू भत्ते जोड़ने पर ग्रॉस सैलरी बनती है। इसके बाद NPS या UPS के तहत पेंशन योगदान, टैक्स और प्रोफेशनल टैक्स जैसी कटौतियां हो सकती हैं।
इन कटौतियों के बाद कर्मचारी के हाथ में आने वाली रकम यानी टेक-होम सैलरी तय होती है। वहीं, पुरानी पेंशन योजना (OPS) पेंशन से जुड़ी व्यवस्था है। इसे सैलरी से होने वाली कटौती नहीं माना जाता।
अभी Level 1 कर्मचारी की कितनी है ग्रॉस सैलरी?
मान लीजिए, किसी Level 1 कर्मचारी की मौजूदा बेसिक सैलरी ₹21,700 है। वह X कैटेगरी के शहर में तैनात है। अगर DA 60% और HRA 30% मानें, तो उसकी ग्रॉस सैलरी का हिसाब इस तरह बनेगा।
| सैलरी का हिस्सा | रकम |
| बेसिक सैलरी | ₹21,700 |
| DA (60%) | ₹13,020 |
| HRA (30%) | ₹6,510 |
| कुल ग्रॉस सैलरी | ₹41,230 |
इस हिसाब से कर्मचारी की ग्रॉस सैलरी ₹41,230 होगी। इसमें ट्रांसपोर्ट अलाउंस और दूसरे लागू भत्ते शामिल नहीं हैं। इन्हें जोड़ने पर कुल रकम और बढ़ सकती है।
8th Pay Commission में कितनी हो सकती है बेसिक सैलरी?
नई बेसिक सैलरी का हिसाब फिटमेंट फैक्टर के आधार पर लगाया जा सकता है। लेकिन इसमें एक अहम बात है। गणना के लिए मौजूदा बेसिक सैलरी को आधार बनाया जाता है या नौकरी शुरू करते समय की बेसिक सैलरी को, इससे नतीजा बदल जाएगा।
मान लीजिए, फिटमेंट फैक्टर 2.0 लागू होता है। अगर मौजूदा बेसिक सैलरी ₹21,700 को आधार बनाया जाए, तो नई बेसिक सैलरी ₹43,400 होगी। लेकिन अगर नौकरी शुरू करते समय की बेसिक सैलरी ₹18,000 को आधार बनाया जाए, तो नई बेसिक सैलरी ₹36,000 होगी।
दोनों हिसाब में ₹7,400 का अंतर है। हालांकि, यह सिर्फ उदाहरण के लिए किया गया कैलकुलेशन है। वास्तविक बेसिक सैलरी इस बात पर निर्भर करेगी कि आठवां वेतन आयोग क्या सिफारिश करता है और केंद्र सरकार उसे किस तरह लागू करती है।
7th Pay Commission में HRA कितना था?
सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें 2017 में लागू करते समय सरकार ने शहरों के हिसाब से HRA की अलग-अलग दरें तय की थीं।
| शहर की कैटेगरी | HRA की दर | न्यूनतम HRA |
| X कैटेगरी | 24% | ₹5,400 |
| Y कैटेगरी | 16% | ₹3,600 |
| Z कैटेगरी | 8% | ₹1,800 |
ये दरें सातवें वेतन आयोग के तहत तय की गई थीं। आठवें वेतन आयोग में HRA की दरें क्या होंगी, यह आयोग की सिफारिशों और सरकार के फैसले पर निर्भर करेगा।
DA बढ़ने पर HRA में भी हुआ था बदलाव
सातवें वेतन आयोग में HRA को महंगाई भत्ते (DA) से भी जोड़ा गया था। जब DA 25% से ऊपर गया, तो X कैटेगरी के शहरों में HRA बढ़ाकर 27% कर दिया गया। Y कैटेगरी में यह 18% और Z कैटेगरी में 9% हो गया। इसके बाद DA 50% से ऊपर पहुंचा, तो HRA की दरें फिर बढ़ाई गईं। X कैटेगरी के शहरों में HRA 30%, Y कैटेगरी में 20% और Z कैटेगरी में 10% हो गया।
आठवें वेतन आयोग में भी HRA और दूसरे भत्तों में बदलाव हो सकता है। लेकिन अभी इनकी अंतिम दरें तय नहीं हैं। इसलिए सिर्फ फिटमेंट फैक्टर के आधार पर यह मान लेना सही नहीं होगा कि कर्मचारी की कुल सैलरी भी उतने ही अनुपात में बढ़ जाएगी।
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