Retirement Planning: सुकन्या समृद्धि, पीपीएफ और SIP में मंथली ₹10000 इनवेस्ट करने से कितना बड़ा फंड बनेगा? समझें पूरा कैलकुलेशन

रिटायरमेंट प्लानिंग जल्द करने के कई फायदे हैं। निवेश के लिए ज्यादा समय मिलता है। पैसे को बढ़ने के लिए भी पर्याप्त समय मिल जाता है। करियर की शुरुआत में व्यक्ति पर आर्थिक जिम्मेदारी कम होती है। इससे निवेश करने में दिक्कत नहीं आती है। सवाल है कि अगर 40 साल का कोई व्यक्ति अगले 15 साल के लिए निवेश करना चाहता है तो उसके लिए बेस्ट इनवेस्टमेंट ऑप्शन क्या होगा?

15 साल में निवेश से बनेगा बड़ा फंड

एक्सपर्ट्स का कहना है कि 15 साल का पीरियड निवेश के लिए अच्छा है। अगर हर महीने 10000 रुपये का निवेश 15 साल तक किया जाए तो अच्छा फंड तैयार हो सकता है। लंबी अवधि के निवेश के लिए कुछ अच्छे विकल्प हैं। इनमें पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF), सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) और म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम में SIP शामिल हैं।

पीपीएफ और SSY सरकारी की स्कीम

पीपीएफ और एसएसवाय सरकारी की स्कीम हैं। ये फिक्स्ड रिटर्न स्कीम हैं। इसका मतलब है कि निवेश से पहले आपको अंदाजा मिल जाता है कि किसी खास अवधि तक निवेश करने के बाद आपके लिए कितना बड़ा फंड तैयार होगा। सरकार की स्कीम होने की वजह से यह पूरी तरह सुरक्षित हैं। इनमें पैसा डूबने का डर ना के बराबर है। इसके अलावा इनके रिटर्न पर शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव का कोई असर नहीं पड़ता है।

SIP से मंथली निवेश करने में रिस्क

म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम में SIP उन लोगों के लिए सही है, जो निवेश पर रिस्क ले सकते हैं। इसकी वजह यह है कि म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम सिप से हर महीने निवेश के पैसे को शेयर बाजार में लगाती है। इसलिए स्कीम के रिटर्न पर शेयर बाजार के प्रदर्शन का सीधा असर पड़ता है। शेयर बाजार का प्रदर्शन अच्छा रहने पर ज्यादा रिटर्न मिलता है, जबकि प्रदर्शन खराब होने पर रिटर्न भी कम रह सकता है।

एसएसवाय में निवेश का पीरियड 15 साल

अब हम देखेंगे कि तीनों इनवेस्टमेंट ऑप्शंस में मंथली 10,000 रुपये के निवेश से 15 साल में कितना बड़ा फंड तैयार होता है। सबसे पहले हम SSY का उदाहरण लेते हैं। यह स्कीम उन लोगों के लिए है, जिनकी बेटियां हैं। माता-पिता मैक्सिमम दो बेटियों के नाम से सुकन्या समृद्धि अकाउंट ओपन कर सकते हैं। एक बेटी के नाम से सिर्फ एक अकाउंट ओपन होगा। बेटी की उम्र 10 साल से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।

एसएसवाय का इंटरेस्ट रेट सालाना 8.2 फीसदी

सुकन्या समृद्धि स्कीम का इंटरेस्ट रेट 8.2 फीसदी है। इस स्कीम में सिर्फ 15 साल तक निवेश करना होता है। अकाउंट ओपन करने के 21 साल बाद स्कीम मैच्योर हो जाती है। इसका मतलब है कि अगर बेटी की उम्र अभी 5 साल है तो मंथली 10,000 रुपये 15 साल तक निवेश करने पर साल 2047 तक करीब 55,42,062 लाख रुपये का फंड तैयार हो जाएगा। इसमें 15 साल में कुल निवेश 18,00,000 रुपये होगा। इस पर आपको 37,42,062 रुपये का इंटरेस्ट मिलेगा। मैच्योरिटी अमाउंट पर टैक्स नहीं लगेगा।

retirement table

पीपीएफ का इंटरेस्ट रेट सालाना 7.1 फीसदी 

PPF की स्कीम 15 साल में मैच्योर हो जाती है। इसका इंटरेस्ट रेट अभी 7.1 फीसदी है। इस तरह आप 15 साल में कुल 18,00,000 रुपये निवेश करेंगे। इस पर आपको कुल 14,54,567 रुपये का इंटरेस्ट मिलेगा। कुल मिलाकर 15 साल बाद आपको कुल 32,54,567 लाख रुपये मिलेंगे। इस पैसे पर आपको कोई टैक्स नहीं चुकाना होगा। अगर आप इनकम टैक्स की ओल्ड रीजीम का इस्तेमाल करते हैं तो आप निवेश के पैसे पर डिडक्शंस क्लेम कर सकते हैं।

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सिप से निवेश करने में बनेगा सबसे बड़ा फंड

म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम में मंथली 10000 रुपये का निवेश करने पर कुल 47,59,314 रुपये का फंड बनेगा। इस कैलकुलेशन में सालाना 12 फीसदी रिटर्न माना गया है। इसका मतलब है कि 15 साल में आपका 18 लाख रुपये का निवेश कंपाउंडिंग की वजह से 29,59,314 रुपये का रिटर्न जेनरेट करता है। लेकिन, ध्यान देने वाली बात यह है कि इस पैसे पर आपको कैपिटल गेंस टैक्स चुकाना होगा। लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस का रेट 12.5 फीसदी है। इस रेट से कुल 5,94,914.25 रुपये टैक्स लगेगा। इसके बावजूद 15 साल का रिटर्न पीपीएफ और सुकन्या समृद्धि योजना से ज्यादा है।

Retirement Planning: ₹50000 मंथली सिप से बन जाएगा 8 करोड़ रुपये का रिटायरमेंट फंड, जानिए कैसे

रिटायरमेंट प्लानिंग के बारे में लोगों के मन में कई तरह के सवाल चलते रहते हैं। इसमें से एक सवाल है कि 35 साल का एक व्यक्ति जिसकी मंथली सैलरी 2 लाख रुपये है क्या वह मंथली 50,000 रुपये के निवेश से 5-8 करोड़ रुपये का रिटायरमेंट फंड तैयार कर सकता है?

रिटायरमेंट फंड का टारगेट और मंथली इनवेस्टमेंट की जानकारी अहम

मनीकंट्रोल ने बजाज कैपिटल के ज्वाइंट चेयरमैन एवं एमडी संजीव बजाज से इस सवाल का जवाब पूछा। उन्होंने कहा कि इस मामले में दो चीजें बिल्कुल साफ हैं। पहला, व्यक्ति कितना बड़ा रिटायरमेंट फंड जुटाना चाहता है। दूसरा, वह मंथली कितना इनवेस्ट कर सकता है। अब यह देखना है कि क्या इन दोनों इनपुट्स से टारगेट हासिल किया जा सकता है।

35 साल की उम्र में निवेश शुरू करने पर मिलेगा 25 साल का वक्त

मान लीजिए आप हर महीने 50,000 रुपये का निवेश तब तक करते हैं, जब तक आपकी उम्र 60 साल की नहीं हो जाती। इसका मतलब है कि अगर 35 साल की उम्र में आप निवेश शुरू करते हैं तो आपके पास निवेश के लिए करीब 25 साल का समय होगा। रिटायरमेंट फंड मार्केट के रिटर्न पर निर्भर करेगा।

सालाना रिटर्न के हिसाब से रिटायरमेंट फंड का आकार बदल जाएगा

अब हम तीन तरह की स्थितियों को लेकर चलते हैं। पहले में हम सालाना रिटर्न अगर 8 फीसदी मानते हैं तो इसका मतलब है कि रिटायरमेंट फंड करीब 4.6 करोड़ रुपये का होगा। अगर हम सालाना रिटर्न 10 फीसदी मानते हैं तो इसका मतलब है कि रिटायरमेंट फंड 6.2 करोड़ रुपये का होगा। 12 फीसदी रिटर्न पर यह करीब 8.5 करोड़ रुपये होगा।

रिटायरमेंट फंड पर इनफ्लेशन के पड़ने वाले असर का ध्यान रखना होगा

इसका मतलब है कि कैलकुलेशन के आधार पर अलग-अलग रिटर्न के हिसाब से 5-8 करोड़ रुपये का रिटायरमेंट फंड तैयार हो सकता है। लेकिन, अब एक बड़ा सवाल है कि आज से 25 साल बाद 5-8 करोड़ रुपये की असल वैल्यू कितनी रह जाएगी? अगर हम 6 फीसदी इनफ्लेशन मान लें तो 25 साल बाद 5 करोड़ रुपये की परचेंजिंग पावर करीब 1.2 करोड़ रुपये रह जाएगी।

इनफ्लेशन की वजह से लंबी अवधि में धीरे-धीरे घटती जाती है पैसे की वैल्यू

8 करोड़ रुपये की परचेंजिंग पावर 1.9 करोड़ रुपये रह जाएगी। इसका मतलब है कि 25 साल बाद हम 8 करोड़ रुपये से उतनी चीजें खरीद पाएंगे जितनी आज हम 1.9 करोड़ रुपये से खरीद सकते हैं। इसलिए रिटायरमेंट प्लानिंग करने में अपने लाइफ स्टाइल को ध्यान में रखना बहुत जरूरी है।

धीरे-धीरे सिप के अमाउंट को बढ़ाने पर लंबी अवधि में बड़ा फर्क पड़ता है

रिटायरमेंट प्लानिंग में धीरे-धीरे सिप के अमाउंट को बढ़ाने से बड़ा फर्क पड़ता है। अगर आप आज 35 साल की उम्र में हर महीने 50,000 रुपये से निवेश शुरू करते हैं तो पूरे करियर के दौरान आपका मंथली निवेश सिर्फ 50,000 नहीं रहेगा। इनकम बढ़ने के साथ आप अपना मंथली इनवेस्टमेंट बढा सकते हैं। अगर हर साल आप इसे 10 फीसदी बढ़ाते हैं तो काफी ज्यादा फर्क देखने को मिलेगा।

इनवेस्टमेंट में डायवर्सिफिकेशन का भी ध्यान रखना सबसे जरूरी

जब आप लंबी अवधि का निवेश करते हैं तो आप शेयरों से जुड़े इनवेस्टमेंट ऑप्शंस में निवेश के बारे में सोच सकते हैं। लेकिन, इसमें डायवर्सिफिकेशन का ध्यान रखना जरूरी है। आपकी रिटायरमेंट प्लानिंग में ईपीएफ या एनपीएस का कंट्रिब्यूशन शामिल हो सकता है। जैसे-जैसे आप रिटायरमेंट की तरफ बढ़ते हैं आपका फोकस वेल्थ क्रिएशन की जगह वेल्थ प्रोटेक्शन पर होना चाहिए।

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निवेश के दौरान इन तीन चीजों का भी जरूर रखें ध्यान 

इस दौरान आपको हेल्थ इंश्योरेंस, टर्म इंश्योरेंस और इमर्जेंसी फंड को भी बनाए रखना होगा। इसका फायदा यह है कि किसी अनहोनी की स्थिति में आपके इनवेस्टमेंट पर खराब असर नहीं पड़ेगा। साथ ही आपको अपने इनवेस्टमेंट प्लान को साल में एक बार रिव्यू करना होगा। जरूरत पड़ने पर आप इस प्लान में बदलाव कर सकते है। इस तरह से आप अपने लिए एक बड़ा रिटायरमेंट फंड तैयार कर सकते हैं।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

आज आपकी मंथली सैलरी 50 हजार रुपये है तो रिटायरमेंट के लिए कितना फंड पर्याप्त होगा?

कई लोग रिटायरमेंट के लिए सेविंग्स और इनवेस्टमेंट तो करना चाहते हैं, लेकिन उन्हें यह नहीं पता होता कि उनका रिटायरमेंट फंड कितना बड़ा होना चाहिए। एक्सपर्ट का कहना है रिटायरमेंट फंड का साइज इस बात पर निर्भर करता है कि आज आपका हर महीने का खर्च कितना है।

रिटायरमेंट फंड के कैलकुलेशन का फॉर्मूला

डीएसपी पेंशन फंड के चीफ इनवेस्टमेंट अफसर रमनीक कुंदरा के मुताबिक, रिटायरमेंट फंड आपके सालाना खर्च का करीब 25-30 गुना होना चाहिए। इसे एक उदाहरण की मदद से आसानी से समझ सकते हैं। मान लीजिए अगर किसी व्यक्ति का मंथली खर्च रिटायरमेंट से ठीक पहले 50,000 रुपये है तो इसका मतलब है कि उसका सालाना खर्च 6 लाख रुपये होगा। 6 लाख का 25 से 30 गुना 1.5 से 1.8 करोड़ होगा।

निवेश का एक बड़ा हिस्सा इक्विटी में लगाना होगा

कुंदरा ने कहा कि रिटायरमेंट फंड बनाने के लिए निवेश की जल्द शुरुआत करना सबसे जरूरी है। दूसरा, आपको निवेश में अनुशासन बरतना होगा। लंबी अवधि में बड़ा रिटायरमेंट फंड तैयार करने लिए निवेश का एक बड़ा हिस्सा इक्विटी यानी शेयरों में लगाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे टारगेट तय करने से बड़ा रिटायरमेंट फंड तैयार करना आसान हो जाता है।

छोटे-छोटे टारगेट तय करने से होगी आसानी 

उन्होंने बताया कि 30 साल की उम्र में आपका रिटायरमेंट फंड आपकी एक साल की इनकम के बराबर होना चाहिए। 40 की उम्र तक यह आपकी सालाना इनकम का तीन गुना होना चाहिए। 50 की उम्र तक यह आपकी सालाना इनकम का पांच से छह गुना तक होना चाहिए। उन्होंने कहा कि रिटायरमेंट फंड पर मार्केट के उतार-चढ़ाव से ज्यादा निगेटिव असर इनफ्लेशन का पड़ता है।

शेयरों का सालाना रिटर्न 12-13 फीसदी के बीच 

भारत में शेयर बाजारों का लंबी अवधि का रिटर्न उतार-चढ़ाव के बावजूद सालाना 12-13 फीसदी रहा है। नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) अभी सब्सक्राइबर को शेयरों में 75 फीसदी तक ऐलोकेशन की इजाजत देता है। मल्टीपल स्कीम फ्रेमवर्क के तहत नए इनवेस्टमेंट ऑप्शंस तो इक्विटी में 100 फीसदी तक ऐलोकेशन की इजाजत देते हैं।

रिटायरमेंट करीब आने पर पैसा डेट में शिफ्ट करना जरूरी

कुंदरा ने कहा कि रिटायरमेंट जैसे-जैसे नजदीक आता है इनवेस्टर को अपनी इनवेस्टमेंट स्ट्रेटेजी में बदलाव करना जरूरी हो जाता है। रिटायरमेंट से पहले के कुछ सालों में फोकस वेल्थ बढ़ाने की जगह उसके प्रोटेक्शन पर होना चाहिए। इसकी वजह यह है कि अचानक शेयर बाजार में तेज गिरावट से आपका रिटायरमेंट फंड का एक बड़ा हिस्सा डूब सकता है।

दो-तीन साल के खर्च का पैसा लिक्विड फंड में रखने की सलाह

ऐसी स्थिति से बचने के लिए इनवेस्टर को धीरे-धीरे अपना निवेश इक्विटी की जगह डेट या लिक्विड एसेट्स में शिफ्ट करना पड़ता है। इसकी प्रक्रिया रिटायरमेंट के 5 से 10 पहले शुरू की जा सकती है। इसके अलावा दो से तीन साल की जरूरत का पैसा लिक्विड इनवेस्टमेंट में डाल देना समझदारी है। इसका फायदा यह होता है कि बाजार में गिरावट की स्थिति में इनवेस्टर को अपने जरूरी खर्च के लिए इक्विटी कम कीमत पर बेचने को मजबूर नहीं होना पड़ता है।

FD Interest Calculator: ₹1 लाख की FD 10 साल बाद कितनी होगी? समझिए ब्याज का पूरा हिसाब

FD Interest Calculator: अगर आपके पास ₹1 लाख की एकमुश्त रकम है और आप इसे 10 साल के लिए निवेश करना चाहते हैं, तो FD एक विकल्प हो सकता है। खासकर, शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव को देखते हुए। हालांकि, FD में सिर्फ ब्याज दर देखना काफी नहीं है। यह भी समझना जरूरी है कि ब्याज कैसे जुड़ता है और 10 साल में आपकी रकम कितनी हो सकती है।

मान लीजिए आपको 10 साल की FD पर 7% सालाना ब्याज मिलता है। अगर यह क्युमुलेटिव FD है और ब्याज को FD में ही जुड़ने दिया जाता है, तो कंपाउंडिंग का फायदा मिलता है। इस स्थिति में ₹1 लाख की रकम 10 साल बाद करीब ₹2 लाख हो सकती है।

अलग-अलग ब्याज दर पर कितना पैसा बनेगा?

10 साल की अवधि और तिमाही कंपाउंडिंग मानें, तो अलग-अलग ब्याज दर पर ₹1 लाख की रकम लगभग इतनी हो सकती है:

सालाना ब्याज10 साल बाद रकमकुल ब्याज
6%₹1.81 लाख₹81,400
7%₹1.91 लाख₹90,600
7%₹2.00 लाख₹1.00 लाख
7.50%₹2.10 लाख₹1.10 लाख
8%₹2.21 लाख₹1.21 लाख

इस कैलकुलेशन से पता चलता है कि लंबी अवधि में ब्याज दर का छोटा अंतर भी रकम पर असर डालता है। उदाहरण के लिए, 6% की जगह 8% ब्याज मिलने पर 10 साल बाद रकम करीब ₹39,400 ज्यादा हो सकती है।

कंपाउंडिंग का क्या फायदा है?

क्युमुलेटिव FD में ब्याज नियमित तौर पर आपके खाते में नहीं आता। वह FD में जुड़ता रहता है। इसके बाद अगले चक्र का ब्याज मूल रकम के साथ जुड़ी ब्याज की रकम पर भी मिलता है।

यही कंपाउंडिंग है। लंबी अवधि में इसका असर ज्यादा साफ दिखाई देता है। इसलिए FD चुनते समय सिर्फ शुरुआती ब्याज दर नहीं, बल्कि ब्याज के भुगतान और कंपाउंडिंग के तरीके को भी देखना चाहिए।

हर महीने ब्याज चाहिए तो?

अगर आपका मकसद हर महीने इनकम लेना है, तो मंथली इंटरेस्ट पेआउट वाली FD अलग विकल्प है। इसमें ब्याज नियमित तौर पर आपके बैंक खाते में आ सकता है।

इस स्थिति में ब्याज FD में वापस नहीं जुड़ता। इसलिए 10 साल बाद मिलने वाली मैच्योरिटी रकम क्युमुलेटिव FD से अलग होगी। बदले में आपको निवेश के दौरान नियमित ब्याज मिलता रहेगा।

10 साल की FD करने से पहले ये बातें देखें

लंबी अवधि की FD करते समय ब्याज दर के साथ कुछ दूसरी शर्तें भी देखनी चाहिए। FD क्युमुलेटिव है या मंथली पेआउट वाली, समय से पहले निकालने पर क्या नियम हैं और प्रीमैच्योर क्लोजर पर कितना ब्याज मिलेगा, इन बातों का असर आपके रिटर्न पर पड़ सकता है।

FD से मिलने वाला ब्याज टैक्स के दायरे में आता है। इस पर आपके इनकम स्लैब के हिसाब से टैक्स लग सकता है। इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए।

Retirement Planning: रिटायरमेंट के बाद हर महीने ₹50000 चाहिए तो कहां और कितना करें निवेश, समझिए पूरा कैलकुलेशन

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Gold Silver Price: सोने-चांदी का चढ़ा भाव, अमेरिकी जॉब्स डेटा से रेट हाइक की चिंता घटी

Gold Silver Price: अमेरिका में सितंबर का जॉब्स डेटा उम्मीद से कमजोर रहा। इसके बाद सोने में शुक्रवार को 1% से ज्यादा तेजी आई। कमजोर रोजगार आंकड़ों से इस महीने अमेरिकी फेडरल रिजर्व के रेट बढ़ाने की चिंता कम हुई है। हालांकि, मजबूत डॉलर और ऊंची ट्रेजरी यील्ड अभी भी सोने पर दबाव बना रही हैं।

1% से ज्यादा चढ़ा सोना

शुक्रवार को स्पॉट गोल्ड 1.1% बढ़कर 4,223.49 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स भी 1.2% चढ़कर 4,254.10 डॉलर प्रति औंस हो गया।

हालांकि, पूरे हफ्ते की बात करें तो सोना अभी करीब 1.5% नीचे है। यानी शुक्रवार की तेजी के बावजूद साप्ताहिक नुकसान की भरपाई नहीं हो पाई है।

सितंबर में सिर्फ 29,000 नौकरियां बढ़ीं

अमेरिका में सितंबर के दौरान नॉन-फार्म पेरोल में सिर्फ 29,000 की बढ़ोतरी हुई। अगस्त के आंकड़े को भी घटाकर 1.33 लाख कर दिया गया है।

रॉयटर्स के सर्वे में अर्थशास्त्रियों ने सितंबर में 90,000 नई नौकरियां जुड़ने का अनुमान लगाया था। यानी असल आंकड़ा अनुमान से काफी कम रहा।

फेड की रेट हाइक की उम्मीद घटी

कमजोर जॉब्स डेटा के बाद अक्टूबर में अमेरिकी फेड की ब्याज दर बढ़ने की संभावना भी कम हो गई है। CME FedWatch Tool के मुताबिक, अब ट्रेडर्स रेट हाइक की सिर्फ 14% संभावना देख रहे हैं।

जॉब्स डेटा से पहले यह संभावना 28% थी। हफ्ते की शुरुआत में तो यह करीब 70% थी। रेट हाइक की उम्मीद घटने से डॉलर थोड़ा कमजोर हुआ और सोने को सहारा मिला।

Marex के एनालिस्ट एडवर्ड मेयर ने कहा कि ब्याज दर बढ़ने की उम्मीद कम होने से डॉलर पर दबाव आया। इसका फायदा सोने को मिला। उन्होंने यह भी कहा कि सोने में पहले काफी बिकवाली हो चुकी थी, इसलिए इसमें उछाल आना स्वाभाविक था।

फिर भी सोने पर दबाव क्यों?

सोने के लिए अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड अभी बड़ी चिंता है। 10 साल और 30 साल की अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड गुरुवार को 2002 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई थी।

ऊंची यील्ड आमतौर पर सोने के लिए चुनौती होती है। इसकी वजह यह है कि सोने से ब्याज नहीं मिलता। ऐसे में बॉन्ड यील्ड बढ़ने पर निवेशकों के लिए सोने की आकर्षकता कम हो सकती है।

युद्ध शुरू होने के बाद 20% गिरा सोना

फरवरी के अंत में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद से सोना करीब 20% गिर चुका है। युद्ध के कारण महंगाई बढ़ने की चिंता ने अमेरिकी ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रखने की उम्मीद बढ़ाई थी।

हालिया महंगाई के आंकड़े भी उम्मीद से नरम रहे हैं। इसके अलावा, कम से कम दो बड़े फेड अधिकारियों ने अक्टूबर में एक और रेट हाइक का विरोध किया है। इससे बाजार में रेट को स्थिर रखने की उम्मीद बढ़ी है।

आगे क्या देखना होगा?

Bybit के चीफ मार्केट एनालिस्ट हान टैन के मुताबिक, सोने में आगे भी तेजी की गुंजाइश हो सकती है। इसके लिए अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड का अपने ऊंचे स्तर पर पहुंचना अहम होगा।

दूसरी ओर, Marex के एडवर्ड मेयर ने कहा कि सोने का चार्ट अभी कमजोर दिख रहा है। अगर ब्याज दरों का चक्र फिर ऊपर जाता है, तो सोने में और गिरावट आ सकती है।

चांदी भी 2% चढ़ी

सोने के साथ दूसरे कीमती मेटल्स में भी शुक्रवार को तेजी रही। स्पॉट सिल्वर 2% बढ़कर 62.07 डॉलर प्रति औंस हो गया।

प्लैटिनम 1% चढ़कर 1,740.53 डॉलर और पैलेडियम 2.2% बढ़कर 1,197.47 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। हालांकि, ये तीनों मेटल्स भी इस हफ्ते अब तक गिरावट में हैं।

Retirement Planning: रिटायरमेंट के बाद हर महीने ₹50000 चाहिए तो कहां और कितना करें निवेश, समझिए पूरा कैलकुलेशन

Retirement Planning: रिटायरमेंट के बाद हर महीने ₹50000 चाहिए तो कहां और कितना करें निवेश, समझिए पूरा कैलकुलेशन

Retirement Planning: रिटायरमेंट के बाद हर महीने ₹50,000 चाहिए, तो सिर्फ आज की जरूरत देखकर निवेश करना काफी नहीं है। आज के ₹50,000 की कीमत 20-30 साल बाद उतनी नहीं रहेगी। महंगाई धीरे-धीरे आपके खर्च को बढ़ाती रहेगी।

इसे आसान तरीके से समझते हैं। मान लीजिए आपकी उम्र 30 साल है और आप 60 की उम्र में रिटायर होना चाहते हैं। आज आपका महीने का खर्च ₹50,000 है। अगर अगले 30 साल तक औसत महंगाई 6% रहती है, तो 60 की उम्र में इसी खर्च के लिए करीब ₹2.87 लाख महीने चाहिए होंगे।

यानी रिटायरमेंट के लिए आपका लक्ष्य आज के ₹50,000 नहीं, बल्कि भविष्य का खर्च होना चाहिए। इसी आधार पर रिटायरमेंट फंड तैयार करना होगा।

रिटायरमेंट के लिए कितना पैसा चाहिए?

मान लेते हैं कि 60 की उम्र में रिटायर होने के बाद आपको करीब 30 साल तक इस पैसे से खर्च चलाना है। साथ ही निवेश से औसतन 8% सालाना रिटर्न मिलता है और महंगाई 6% रहती है। इस हिसाब से आपको करीब ₹7.4 करोड़ चाहिए होगा। इससे रिटायरमेंट के बाद बढ़ते खर्च को लंबे समय तक संभालने की गुंजाइश बनती है।

अगर आपको रिटायरमेंट के बाद पैसा 25 साल तक चाहिए, तो यह जरूरत करीब ₹6.4 करोड़ रह सकती है। यानी रिटायरमेंट की अवधि बढ़ने के साथ जरूरी कॉर्पस भी बढ़ता है।

₹7.4 करोड़ का फंड कैसे तैयार करें?

अब सवाल है कि 30 साल में ₹7.4 करोड़ कैसे जमा होंगे। इसके लिए SIP एक तरीका हो सकता है।

अगर औसतन 12% सालाना रिटर्न मानें, तो 30 साल तक करीब ₹21,200 महीने की SIP से ₹7.4 करोड़ के आसपास का कॉर्पस बन सकता है। हालांकि, SIP मार्केट से जुड़ा निवेश है, तो रिटर्न कम या ज्यादा हो सकता है।

अनुमानित सालाना रिटर्न
30 साल तक मासिक SIP

8%करीब ₹52,500
10%करीब ₹32,700
12%करीब ₹21,200

पैसा कहां निवेश करें?

30 साल का समय है, तो रिटायरमेंट के लिए सिर्फ एक ही निवेश विकल्प पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है। इक्विटी म्यूचुअल फंड, EPF, NPS और डेट निवेश जैसे विकल्पों को अपनी जरूरत और जोखिम क्षमता के हिसाब से पोर्टफोलियो में शामिल किया जा सकता है।

लंबी अवधि में इक्विटी म्यूचुअल फंड कॉर्पस बढ़ाने में मदद कर सकते हैं। वहीं EPF और NPS रिटायरमेंट के लिए अलग आधार तैयार कर सकते हैं। डेट वाले निवेश पोर्टफोलियो के अपेक्षाकृत स्थिर हिस्से के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

कितना पैसा कहां लगाना है, इसका कोई एक फॉर्मूला नहीं है। 30 साल की उम्र में जोखिम लेने की क्षमता और रिटायरमेंट के ठीक पहले की स्थिति अलग हो सकती है। इसलिए समय के साथ निवेश का तरीका भी बदलना पड़ सकता है।

रिटायरमेंट से 5 साल पहले क्या करें?

रिटायरमेंट के करीब पहुंचने पर पूरा पैसा ज्यादा उतार-चढ़ाव वाले निवेश में रखना जोखिम बढ़ा सकता है। मान लीजिए रिटायरमेंट से ठीक पहले शेयर बाजार में बड़ी गिरावट आ गई। उसी समय अगर आपको खर्च के लिए निवेश बेचना पड़ा, तो कॉर्पस पर ज्यादा दबाव पड़ सकता है।

इसलिए रिटायरमेंट के करीब आने पर अगले कुछ साल के खर्च के लिए कम जोखिम वाले और आसानी से उपलब्ध निवेशों में पर्याप्त रकम रखने पर विचार किया जा सकता है। इससे बाजार में गिरावट के दौरान तुरंत इक्विटी बेचने की जरूरत कम हो सकती है।

इस बात पर भी गौर करना जरूरी

अगर आपके पास EPF, NPS, पेंशन, किराये की इनकम या कोई दूसरी नियमित कमाई है, तो पूरा ₹7.4 करोड़ का कॉर्पस अकेले आपको तैयार नहीं करना होगा। दूसरी इनकम से रिटायरमेंट के बाद होने वाले खर्च का कुछ हिस्सा पूरा हो सकता है।

वहीं, मेडिकल खर्च और लंबी रिटायरमेंट को भी ध्यान में रखना जरूरी है। इसलिए सिर्फ एक लक्ष्य बनाकर निवेश शुरू करना काफी नहीं है। हर कुछ साल में अपनी इनकम, खर्च, महंगाई और निवेश की समीक्षा करते रहना चाहिए।

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रिटायरमेंट के बाद भी भरी रहेगी जेब! रिटायर्ड राम स्वार्थ सिंह से जानिए तनावमुक्त और अमीर रहने का 3 स्टेप फॉर्मूला

यदि आप रिटायरमेंट के बाद के लिए अभी प्लानिंग नहीं करेंगे तो बाद में दिक्कत हो सकती है। अगर आप खुद प्लानिंग नहीं कर सकते तो एक्सपर्ट से जान लें कि रिटायरमेंट से पहले किस प्रकार से प्लानिंग करनी चाहिए। इससे रिटायरमेंट के बाद आपकी जिंदगी खुशनुमा माहौल में बीतेगी। अक्सर लोग रिटायरमेंट के नाम से घबरा जाते हैं, लेकिन सही प्लानिंग से यह जीवन का सबसे सुनहरा दौर बन सकता है। ऐसे ही एक रिटायर्ड अधिकारी राम स्वार्थ सिंह ने अपनी सफल प्लानिंग के बारे में बताया।

लक्ष्य तय करना सबसे जरूरी है

राम स्वार्थ सिंह बताते हैं कि मेरे कई लक्ष्य थे और लायबिलिटीजी भी थीं। इसमें एक लड़की और एक लड़के की शादी करनी की जिम्मेदारी शामिल थी। एक जमीन थी शहर में जिस पर मकान नहीं बना था। मैंने सोचा सबसे पहले यह तीन काम करना है। उन्होंने बताया कि रिटायरमेंट से पहले ही उन्होंने अपने तीन मुख्य लक्ष्य तय कर लिए थे।

सही जगह इनवेस्टमेंट करना होगा

सिंह ने कहा, “रिटायरमेंट के बाद यह तीनों काम सफलतापूर्वक पूरे किए। उसके बाद कुछ पैसे उन्होंने LIC और फिक्स डिपॉजिट में इन्वेस्टमेंट किया। वे कहते हैं, “मैंने इस तरीके से प्लानिंग की थी की थी कि लड़की की शादी मैंने अच्छे से की। लड़के की भी शादी बहुत धूमधाम से की। शहर में जो जमीन मेरी खाली पड़ी थी उस पर मैंने दो फ्लोर का मकान भी बनाया। कुछ जमीन भी मैंने खरीदी।”

नौकरी के पहले दिन से प्लानिंग जरूरी

एक्सपर्ट्स के अनुसार, रिटायरमेंट प्लानिंग की शुरुआत नौकरी के पहले दिन से ही कर देनी चाहिए। रिटायरमेंट प्लानिंग के 3 सुनहरे नियम हैं। सबसे पहले लक्ष्य तय करें। बच्चों की शादी, मकान, जैसे बड़े खर्चों के लिए पहले से तैयार रहें। निवेश में विविधता का ख्याल रखें। सारा पैसा एक जगह न लगाएं।

निवेश अलग-अलग एसेट में करना होगा

FD, LIC, म्यूचुअल फंड और जमीन में बांटकर निवेश करें। आखिरी नियम यह है कि कर्ज मुक्त रहें। कोशिश करें कि रिटायरमेंट से पहले सारे लोन खत्म हो जाएं। राम स्वार्थ सिंह की कहानी बताती है कि अगर समय रहते सही योजना बनाई जाए तो रिटायरमेंट के बाद भी जिंदगी आराम और सुकून से कटती है।

Pension Calculator: LIC की इस स्कीम में एक बार लगाएं पैसा, जिंदगीभर मिलेगी पेंशन; समझिए पूरा कैलकुलेशन

Pension Calculator: रिटायरमेंट के बाद हर महीने एक तय रकम खाते में आती रहे, तो काफी सहूलियत रहती है। इसी जरूरत के लिए LIC की Jeevan Akshay-VII स्कीम है। इसमें एक बार पैसा लगाना होता है। इसके बाद चुने गए विकल्प के हिसाब से पेंशन मिलती रहती है।

यह LIC का Immediate Annuity Plan है। यानी पैसा लगाने के बाद एन्युटी का भुगतान शुरू हो जाता है। LIC के मुताबिक इसमें एन्युटी की दर शुरुआत में तय होती है और चुने गए विकल्प के मुताबिक जिंदगीभर भुगतान मिलता है।

₹10 लाख लगाने पर कितनी पेंशन?

मान लीजिए आपकी उम्र 60 साल है। आप इस स्कीम में ₹10 लाख लगाते हैं। LIC के मौजूदा V07 ब्रोशर में सालाना पेमेंट के उदाहरण दिए गए हैं।

Option A में ₹10 लाख लगाने पर सालाना ₹86,100 की एन्युटी मिलती है। यानी करीब ₹7,175 महीने के हिसाब से। वहीं, Option F में सालाना एन्युटी ₹64,000 है। यानी करीब ₹5,333 महीने।

विकल्प₹10 लाख पर सालाना एन्युटी
करीब मासिक रकम

Option A₹86,100₹7,175
Option B₹85,500₹7,125
Option C₹84,000₹7,000
Option D₹81,800₹6,817
Option E₹79,200₹6,600
Option F₹64,000₹5,333
Option G₹68,700₹5,725

ये आंकड़े 60 साल की उम्र में ₹10 लाख के खरीद मूल्य और सालाना पेमेंट के LIC के उदाहरण पर आधारित हैं। इनमें पेंशन उम्रभर मिलती है। हालांकि, LIC से मिलने वाली एन्युटी/पेंशन पर आपकी इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लग सकता है।

पेंशन के कई विकल्प मिलते हैं

इस स्कीम में सिर्फ एक तरह की पेंशन नहीं है। LIC ने कुल 10 एन्युटी विकल्प दिए हैं। Option A में जिंदगीभर एक तय रकम मिलती है। Option B, C, D और E में 5, 10, 15 या 20 साल की गारंटी अवधि है। इसके बाद भी पॉलिसीधारक के जिंदा रहने तक पेंशन जारी रहती है।

Option F थोड़ा अलग है। इसमें जिंदगीभर पेंशन मिलती है। पॉलिसीधारक की मृत्यु के बाद खरीद मूल्य वापस करने का प्रावधान है। इसी वजह से इस विकल्प में पेंशन बाकी कुछ विकल्पों से कम रहती है।

पैसा एक बार लगाना होगा

Jeevan Akshay-VII में नियमित प्रीमियम नहीं भरना होता। इसमें एकमुश्त रकम लगानी होती है। इसके बाद आप पेंशन लेने का तरीका चुन सकते हैं।

पेंशन मासिक, तिमाही, छमाही या सालाना ली जा सकती है। LIC के मुताबिक इस प्लान में 10 अलग-अलग एन्युटी विकल्प हैं।

पति-पत्नी के लिए भी विकल्प

अगर आप चाहते हैं कि आपके बाद पति या पत्नी को भी पेंशन मिलती रहे, तो जॉइंट लाइफ के विकल्प हैं। इनमें दोनों लोगों की उम्र और चुने गए विकल्प के आधार पर एन्युटी तय होती है।

LIC के विकल्प H और I में दूसरे व्यक्ति को पेंशन जारी रखने का प्रावधान है। Option J में आखिरी व्यक्ति की मृत्यु के बाद खरीद मूल्य वापस करने का भी प्रावधान है।

पेंशन हर साल 3% बढ़ाने का विकल्प भी

Option G में पेंशन हर साल साधारण आधार पर 3% बढ़ती है। शुरुआत में मिलने वाली रकम बाकी कुछ विकल्पों से कम होती है। लेकिन समय के साथ पेंशन बढ़ती रहती है।

इसका फायदा लंबे समय तक पेंशन लेने वाले व्यक्ति को मिल सकता है। हालांकि, इसमें भी शुरुआत में मिलने वाली रकम और दूसरे विकल्पों की तुलना देखना जरूरी है।

सबसे जरूरी बात

इस स्कीम की सबसे बड़ी खासियत तय एन्युटी है। बाजार ऊपर जाए या नीचे, चुने गए विकल्प के मुताबिक एन्युटी भुगतान जारी रहता है। इसलिए रिटायरमेंट के बाद तय आय चाहने वाले लोगों के लिए यह एक विकल्प है।

लेकिन एकमुश्त रकम लगाने के बाद उसे आसानी से वापस निकालने की सुविधा नहीं होती। इसलिए पूरी रिटायरमेंट बचत एक ही जगह लगाने के बजाय अपनी जरूरत और बाकी आय को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

Pension Calculator: NPS में हर महीने ₹30 हजार की पेंशन के लिए कितना निवेश करना होगा? समझिए पूरा कैलकुलेशन

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Pension Calculator: NPS में हर महीने ₹30 हजार की पेंशन के लिए कितना निवेश करना होगा? समझिए पूरा कैलकुलेशन

Pension Calculator: रिटायरमेंट के बाद हर महीने ₹30,000 की पेंशन मिले तो खर्च संभालना आसान हो सकता है। लेकिन इसके लिए NPS में कितना पैसा जमा करना होगा? इसका जवाब आपकी उम्र, निवेश पर मिलने वाले रिटर्न और रिटायरमेंट के समय मिलने वाली एन्युटी दर पर निर्भर करता है।

इसे एक आसान उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए आप 60 साल की उम्र में NPS से बाहर निकलना चाहते हैं। रिटायरमेंट के समय आपके NPS कॉर्पस का 40% हिस्सा एन्युटी खरीदने में जाता है।

₹30 हजार की पेंशन के लिए कितना कॉर्पस चाहिए?

सबसे पहले पेंशन का हिसाब समझिए। ₹30,000 महीने की पेंशन यानी सालाना ₹3.60 लाख। अब मान लेते हैं कि रिटायरमेंट के समय एन्युटी दर 6% सालाना है। इस हिसाब से ₹3.60 लाख की सालाना पेंशन के लिए करीब ₹60 लाख का एन्युटी कॉर्पस चाहिए।

अब NPS के सामान्य निकासी नियम को देखें। इसमें कम से कम 40% कॉर्पस एन्युटी में लगाना होता है। इसलिए ₹60 लाख के एन्युटी कॉर्पस के लिए कुल NPS कॉर्पस करीब ₹1.50 करोड़ होना चाहिए।

इसमें करीब ₹60 लाख एन्युटी खरीदने में जाएंगे। बाकी करीब ₹90 लाख यानी 60% रकम एकमुश्त निकाली जा सकती है। PFRDA के मौजूदा नियमों के मुताबिक सामान्य निकासी पर कम से कम 40% कॉर्पस एन्युटी के लिए इस्तेमाल होता है। बाकी 60% तक रकम एकमुश्त निकाली जा सकती है।

₹1.50 करोड़ का कॉर्पस कैसे बनेगा?

अब असली सवाल है कि ₹1.50 करोड़ का कॉर्पस कैसे बनाया जाए? यहां आपकी उम्र सबसे अहम है। मान लीजिए NPS में निवेश पर औसतन 10% सालाना रिटर्न मिलता है। आप हर महीने निवेश करते हैं और 60 साल की उम्र तक निवेश जारी रखते हैं। इस हिसाब से अलग-अलग उम्र में NPS शुरू करने पर अनुमानित मासिक निवेश इस तरह हो सकता है:

NPS शुरू करने की उम्र60 साल तक समय
अनुमानित मासिक निवेश

25 साल35 सालकरीब ₹1,000
30 साल30 सालकरीब ₹1,700
35 साल25 सालकरीब ₹2,800
40 साल20 सालकरीब ₹4,900
45 साल15 सालकरीब ₹9,000
50 साल10 सालकरीब ₹18,300

30 साल की उम्र में शुरू करें तो

अगर आपकी उम्र 30 साल है। और आप हर महीने करीब ₹1,700 NPS में डालना शुरू करते हैं। आपके पास 60 साल तक 30 साल का समय है। 10% सालाना औसत रिटर्न मानने पर यह निवेश करीब ₹1.50 करोड़ के कॉर्पस तक पहुंच सकता है।

अब इस कॉर्पस का 40% यानी करीब ₹60 लाख एन्युटी में लगाया जाएगा। अगर उस समय एन्युटी दर 6% है, तो इससे सालाना करीब ₹3.60 लाख की पेंशन बन सकती है। यानी करीब ₹30,000 महीने की पेंशन।

40 साल की उम्र में शुरू करने पर

अगर NPS में निवेश 40 साल की उम्र में शुरू करते हैं तो 60 साल तक सिर्फ 20 साल बचेंगे। इसी ₹1.50 करोड़ के कॉर्पस का लक्ष्य रखने पर 10% औसत रिटर्न के अनुमान से करीब ₹4,900 हर महीने निवेश करना होगा।

यानी 30 साल की उम्र के मुकाबले 10 साल देर से शुरुआत करने पर मासिक निवेश काफी बढ़ जाता है। इसकी वजह चक्रवृद्धि का असर है।

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50 साल की उम्र में कितना निवेश?

अगर NPS की शुरुआत 50 साल की उम्र में होती है तो 60 साल तक सिर्फ 10 साल बचेंगे। इस स्थिति में ₹1.50 करोड़ का कॉर्पस बनाने के लिए इसी अनुमान के आधार पर करीब ₹18,300 हर महीने निवेश करना होगा।

यानी रिटायरमेंट की तैयारी जितनी देर से शुरू होगी, हर महीने उतनी ज्यादा रकम लगानी पड़ेगी।

60% पैसा एकमुश्त मिल सकता है

₹30,000 महीने की पेंशन वाले इस उदाहरण में हमने कुल ₹1.50 करोड़ का कॉर्पस माना है। अगर निकासी के समय 40% यानी ₹60 लाख एन्युटी में लगाए जाते हैं, तो बाकी 60% यानी करीब ₹90 लाख एकमुश्त निकाले जा सकते हैं।

PFRDA के मुताबिक खाताधारक 60 साल के बाद भी NPS में बने रहने का विकल्प चुन सकता है। यह खाता 75 साल की उम्र तक जारी रखा जा सकता है। कुछ परिस्थितियों में एकमुश्त रकम और एन्युटी को भी बाद के लिए टाला जा सकता है।

Sukanya Samriddhi: क्या सुकन्या समृद्धि का इस तिमाही में बढ़ेगा ब्याज? जानिए बेटी के लिए ₹50 लाख के फंड बनाने का पूरा कैलकुलेशन

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

इन 5 सरकारी योजनाओं में करें निवेश, पैसा सुरक्षित रहेगा और ब्याज भी मिलेगा; समझिए पूरा कैलकुलेशन

Small Savings Schemes: पैसा निवेश करने के लिए हर किसी को शेयर बाजार का जोखिम पसंद नहीं होता। खासकर जब बात बच्चों की पढ़ाई, रिटायरमेंट या भविष्य के लिए जमा की गई रकम की हो।

ऐसे निवेशकों के लिए सरकार की कई स्मॉल सेविंग स्कीमें हैं। इनमें पैसा तय नियमों के तहत लगाया जाता है और ब्याज दर सरकार तय करती है। PPF, NSC, सुकन्या समृद्धि योजना और सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम जैसी योजनाएं इसी कैटेगरी में आती हैं।

1. PPF

PPF यानी Public Provident Fund लंबे समय के निवेश के लिए है। इसका मैच्योरिटी पीरियड 15 साल है। इसमें हर महीने ₹5,000 जमा करते हैं तो साल में ₹60,000 निवेश होगा। 15 साल में आपकी कुल जमा रकम ₹9 लाख होगी।

मौजूदा 7.1% ब्याज दर को मानें तो 15 साल बाद यह रकम मोटे तौर पर ₹16 लाख के आसपास हो सकती है। यानी करीब ₹7 लाख ब्याज से जुड़ सकते हैं। असल रकम जमा करने की तारीख और उस समय लागू ब्याज दर पर निर्भर करेगी। PPF की ब्याज दर सरकार समय-समय पर तय करती है।

2. सुकन्या समृद्धि योजना

अगर बेटी के भविष्य के लिए पैसा जमा करना है तो सुकन्या समृद्धि योजना एक विकल्प है। मौजूदा ब्याज दर 8.2% है। इसमें हर महीने ₹3,000 जमा करने पर सालाना ₹36,000 निवेश होगा। 15 साल में कुल जमा रकम ₹5.40 लाख होगी।

अगर मौजूदा ब्याज दर के आसपास रिटर्न बना रहता है, तो 21 साल की मैच्योरिटी अवधि में यह रकम करीब ₹17 लाख तक पहुंच सकती है। यहां ध्यान रखें कि सुकन्या की ब्याज दर भी समय-समय पर बदल सकती है। इसलिए इसे एक अनुमान के तौर पर देखें।

3. सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम

60 साल या उससे ज्यादा उम्र के लोगों के लिए SCSS यानी Senior Citizens Savings Scheme है। रिटायरमेंट के बाद नियमित ब्याज आय चाहने वालों के लिए यह विकल्प देखा जा सकता है।

मौजूदा ब्याज दर 8.2% है। ऐसे में अगर कोई ₹10 लाख जमा करता है तो सालाना ब्याज करीब ₹82,000 बैठेगा। ब्याज तिमाही आधार पर मिलता है, यानी करीब ₹20,500 हर तिमाही। 5 साल में कुल ब्याज करीब ₹4.10 लाख बनता है, अगर पूरी अवधि में यही दर बनी रहे।

4. नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट

NSC यानी National Savings Certificate उन लोगों के लिए है जो एक तय अवधि के लिए पैसा लगाकर ब्याज कमाना चाहते हैं। मौजूदा ब्याज दर 7.7% है और इसकी अवधि 5 साल है।

अगर आप ₹5 लाख NSC में लगाते हैं तो 5 साल बाद रकम करीब ₹7.23 लाख हो सकती है। यानी करीब ₹2.23 लाख ब्याज से जुड़ेंगे। NSC का ब्याज सालाना कंपाउंड होता है।

5. किसान विकास पत्र

KVP यानी Kisan Vikas Patra में निवेश रकम तय अवधि में दोगुनी होती है। मौजूदा ब्याज दर 7.5% है और इस दर पर रकम 115 महीने यानी करीब 9 साल 7 महीने में दोगुनी होती है।

इस हिसाब से अगर आप ₹3 लाख KVP में लगाते हैं तो मैच्योरिटी पर रकम करीब ₹6 लाख हो सकती है। यानी करीब ₹3 लाख का ब्याज मिलेगा। KVP में मैच्योरिटी अवधि उस समय लागू दर के आधार पर तय होती है।

किसके लिए कौन सी स्कीम?

अगर आपका लक्ष्य लंबी अवधि का है तो PPF पर विचार किया जा सकता है। बेटी के भविष्य के लिए सुकन्या समृद्धि योजना देख सकते हैं। रिटायरमेंट के बाद नियमित ब्याज आय चाहिए तो SCSS पर नजर डाल सकते हैं।

वहीं तय अवधि के लिए रकम लगानी है तो NSC या KVP जैसे विकल्प आजमाए जा सकते हैं। इन योजनाओं में बाजार के रोजाना उतार-चढ़ाव का असर सीधे आपके निवेश पर नहीं पड़ता।

Retirement Planning: ₹1 करोड़ का रिटायरमेंट फंड कितने साल चलेगा? समझिए पूरा कैलकुलेशन

नोट: इन सभी छोटी बचत योजनाओं की मौजूदा दरें जुलाई से सितंबर 2026 की तिमाही के लिए लागू हैं।

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।