LIC का जीवन उमंग प्लान, सिर्फ कुछ साल चुकाएं प्रीमियम और जीवनभर का बीमा कवर पाएं

अगर आप लंबी अवधि तक इंश्योरेंस प्रोटेक्शन वाली पॉलिसी चाहते हैं तो आप एलआईसी की एक खास पॉलिसी के बारे में सोच सकते हैं। इस पॉलिसी का नाम एलआईसी जीवन उमंग है। इस पॉलिसी में निवेश से 100 साल की उम्र तक बीमा कवर पक्का हो जात है। खास बात यह है कि एलआईसी यानी भारतीय जीवन बीमा निगम सरकार की इंश्योरेंस कंपनी है, जिससे इसकी पॉलिसी में निवेश करने में किसी तरह का रिस्क नहीं है।

100 साल के होने तक मिलता है बीमा कवर

जो लोग रिटायरमेंट के बाद गारंटीड सालाना इनकम चाहते हैं, वे LIC Jeevan Umang Plan में निवेश शुरू कर सकते है। यह दरअसल एक होल- लाइफ इंश्योरेंस प्लान है, जिसमें पॉलिसीहोल्डर को तब तक बीमा कवर मिलता है, जब तक वह 100 साल का नहीं हो जाता। इस प्लान में आपको प्रोटेक्शन के साथ इनकम का भी विकल्प मिलता है।

प्रीमियम पेमेंट पीरियड के विकल्प

इस पॉलिसी में प्रीमियम चुकाने की अवधि ग्राहक अपनी सुविधा के हिसाब से चुन सकता है। ग्राहक को 15 साल, 20 साल, 25 साल और 30 साल तक प्रीमियम चुकाने का विकल्प मिलता है। इनमें से वह किसी एक चुनाव कर सकता है। यह एक पार्टिसिपेटरी प्लान है, जिसमें पॉलिसीहोल्डर को पॉलिसी के परफॉर्मेंस के हिसाब से बोनस मिलता है।

टैक्स के लिहाज से भी फायदेमंद

पॉलिसी की अवधि में हर साल चुकाए जाने वाले प्रीमियम पर इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80सी के तहत डिडक्शन का बेनेफिट मिलता है। साथ ही पॉलिसीहोल्डर की मौत या पॉलिसी की मैच्योरिटी पर मिलने वाला पूरा पैसा टैक्स-फ्री होता है। टैक्स से यह छूट इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के सेक्शन 10डी(डी) के तहत मिलती है।

डेथ बेनेफिट का फ्लेक्सिबल पेमेंट

इस पालिसी की एक खास बात यह है कि पॉलिसीहोल्डर किस्तों में डेथ बेनेफिट के विकल्प का भी चुनाव कर सकता है। इसमें पॉलिसीहोल्डर की मौत की स्थिति में बीमा के पैसे का पेमेंट एकमुश्त की जगह 5 साल, 10 साल या 15 साल के दौरान नॉमिनी को मिलेगा। इससे पॉलिसीहोल्डर की मौत की स्थिति में कुछ सालों तक परिवार को रेगुलर इनकम होती रहती है।

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प्रीमियम हर महीने भी चुका सकते हैं

इस पॉलिसी के प्रीमियम का पेमेंट हर महीने, हर तिमाही, हर छमाही या सालाना किया जा सकता है। अगर आप हर महीने प्रीमियम का पेंमेंट करना चाहते हैं तो आपको कम से कम 5000 रुपये का पेमेंट करना होगा। आप हर तिमाही पेमेंट करना चाहते हैं तो मिनिमम 15,000 रुपये का पेमेंट करना होगा। अगर हर छमाही पेमेंट करना चाहते हैं तो 25,000 का पेमेंट करना होगा। सालाना पेमेंट के लिए कम से कम 50,000 रुपये चुकाने होंगे।

38 साल की उम्र में पुणे के इस कपल ने बनाया अपना रिटायरमेंट प्लान, इस एक चीज ने डिसाइड किया इनका FIRE फॉर्म्युला

पुणे के रहने वाले 38 साल के एक कपल ने कुल मिलाकर लगभग 11.5 करोड़ रुपये की संपत्ति जमा कर ली है। वे अगले दो-तीन साल और काम करने के बाद जल्दी रिटायर होने के बारे में सोच रहे हैं, क्योंकि काम का बढ़ता दबाव और सेहत की चिंताएं उन्हें अपनी फाइनेंशियल प्राथमिकताओं पर फिर से सोचने के लिए मजबूर कर रही हैं।

इस कपल की कोई संतान नहीं है और वे अभी अपनी जीवनशैली पर सालाना लगभग 22 लाख रुपये खर्च करते हैं। उनकी संपत्ति रियल एस्टेट, भारतीय इक्विटी और म्यूचुअल फंड, अमेरिकी स्टॉक, कैश और रिटायरमेंट सेविंग्स में बंटी हुई है। उनकी मौजूदा संपत्ति के बंटवारे में रियल एस्टेट में लगभग 3.2 करोड़ रुपये, भारतीय स्टॉक और म्यूचुअल फंड में 1.8 करोड़ रुपये, अमेरिकी स्टॉक में 5 करोड़ रुपये और कैश व रिटायरमेंट सेविंग्स में 1.5 करोड़ रुपये शामिल हैं।

कपल रिटायरमेंट का फैसला लेने से पहले अगले दो-तीन साल तक काम जारी रखने की योजना बना रहा है। 30 के दशक के आखिर में होने वाले कई अन्य जोड़ों के विपरीत, उन्हें बच्चों की उच्च शिक्षा, शादी या परिवार पालने से जुड़े अन्य बड़े खर्चों के लिए रिटायरमेंट फंड नहीं बनाना है।

हालांकि, उनकी फाइनेंशियल जिम्मेदारियां खत्म नहीं हुई हैं। उनके माता-पिता रिटायर हो चुके हैं और उन पर निर्भर हैं, जिसका मतलब है कि कपल इतनी फाइनेंशियल सिक्योरिटी बनाए रखना चाहता है कि अगर वे जल्दी काम करना छोड़ भी दें, तो भी वे अपने माता-पिता की आराम से मदद कर सकें।

X पर शेयर की गई जानकारी के अनुसार, सबसे बड़ी चिंता उनकी अपनी सेहत है। उनकी नौकरियों में लंबे समय तक काम करना, लगातार दबाव और काम से बहुत कम छुट्टी मिलना शामिल हो गया है। इस कपल को अपनी जीवनशैली के कारण सेहत पर असर भी दिखने लगा है, जिससे वे यह सोचने पर मजबूर हो गए हैं कि क्या इतनी तेज़ी से और ज़्यादा पैसा कमाते रहना सही है।

अब चर्चा इस बात पर हो रही है कि “हम और कितना कमा सकते हैं?” के बजाय “कितना पैसा काफ़ी है?” पत्नी की बात को पोस्ट में इस तरह बताया गया- “हमने अपनी जवानी का समय पैसा बनाने में बिताया। शायद अब समय आ गया है कि हम इसमें से कुछ पैसा अपनी ज़िंदगी पर खर्च करें।”

यह जानकारी X पर अमित अरोड़ा नाम के यूज़र ने शेयर की। उन्होंने कपल की आर्थिक स्थिति को तो शानदार बताया, लेकिन सवाल उठाया कि क्या उनका असली मकसद ज़्यादा नेट वर्थ (कुल संपत्ति) बनाना होना चाहिए या ज़्यादा आज़ादी पाना।

“38 साल की उम्र में ऐसी स्थिति में होना शानदार है। दिलचस्प बात यह है कि वे आज़ादी चाहते हैं या ज़्यादा पैसा। ऐसी क्या चीज़ है जो उन्हें रिटायरमेंट में देरी करने पर मजबूर कर सकती है?” इस पोस्ट ने एक बहस छेड़ दी है कि क्या 11.5 करोड़ रुपये का फंड इस कपल के लिए 30 के दशक के आखिर में काम बंद करने के लिए काफ़ी है, खासकर उनके सालाना खर्च, माता-पिता की मदद करने की संभावना और निवेश के कई दशकों तक चलने की ज़रूरत को देखते हुए।

एक कमेंट करने वाले ने कपल की लोकेशन के हिसाब से उनके जमा किए गए पैसे (कॉर्पस) के साइज़ पर सवाल उठाया और उनकी इनकम के बारे में पूछा- “38 साल की उम्र में 11.5 करोड़ की नेट वर्थ बहुत बड़ी बात है… वो भी पुणे में… वहां की सैलरी देखकर सुखद आश्चर्य हुआ… क्या उनकी सालाना इनकम पता चल सकती है ताकि मैं यह देख सकूं कि मेरा बेंचमार्क कितना खराब रहा है?”

दूसरों ने कपल के बच्चे न करने के फ़ैसले और आगे चलकर उनकी ज़िंदगी कैसी होगी, इस पर ध्यान दिया। एक कमेंट में लिखा था- “जब वे बूढ़े हो जाएंगे, तो उनसे बात करने के लिए कुत्ते होंगे।” एक और कमेंट करने वाले ने सवाल उठाया कि क्या कपल की मौजूदा फाइनेंशियल स्थिति उन्हें बिना नौकरी के अगले चार दशकों तक सहारा देने के लिए काफ़ी होगी और उनकी इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटेजी पर चिंता जताई।

“मौजूदा आंकड़े बिना काम किए अगले 40 साल गुज़ारने के लिए ठीक नहीं हैं और एसेट एलोकेशन वेटेज और एस्टेट प्लानिंग पर फिर से काम करने की ज़रूरत है।” एक ज़्यादा आलोचनात्मक प्रतिक्रिया में सवाल उठाया गया कि क्या कपल को बाद में बच्चे न होने का पछतावा हो सकता है और तर्क दिया गया कि उन्हें जल्दी रिटायर होने के बजाय काम करते रहना चाहिए। “रिटायर होने के बाद वे क्या करेंगे? बच्चे न होने का पछतावा? जितना कम समय इसके लिए होगा, उतना ही अच्छा है। इसलिए उन्हें कड़ी मेहनत करते रहना चाहिए ताकि वे अपने उस भयानक फ़ैसले के बारे में न सोचें।” यह बहस FIRE (फाइनेंशियल इंडिपेंडेंस, रिटायर अर्ली) अप्रोच से जुड़े एक बड़े सवाल को सामने लाती है, जिसमें लोग इतनी संपत्ति और इन्वेस्टमेंट इनकम जमा करने का लक्ष्य रखते हैं कि पेड एम्प्लॉयमेंट (नौकरी) ज़रूरी न रहे।

ITR: 31 जुलाई तक फाइल किए गए करीब 6 करोड़ रिटर्न, इनकम के ट्रेंड में दिखा दिलचस्प बदलाव

इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की अंतिम तारीख तक कुल 5.9 लाख रिटर्न फाइल हुए। आईटीआर फॉर्म-1 और आईटीआर फॉर्म-2 से रिटर्न फाइल करने की अंतिम तारीख 31 जुलाई थी। फाइल कुल रिटर्न की संख्या की जानकारी इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने 1 अगस्त को दी है।

आईटीआर-3 और ITR-4 फॉर्म वाले टैक्सपेयर्स के लिए अंतिम तारीख 31 अगस्त

इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की 31 जुलाई की अंतिम तारीख उन टैक्सपेयर्स के लिए थी, जिनके अकाउंट्स का ऑडिट जरूरी नहीं है। ऐसे टैक्सपेयर्स जिनकी बिजनेस और प्रोफेशनल इनकम है, उनके लिए इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की डेडलाइन 31 अगस्त है। आईटीआर-1 का इस्तेमाल ऐसे रेजिडेंट इंडिविजुअल टैक्सपेयर्स करते हैं, जिनकी कुल सालाना इनकम 50 लाख रुपये तक होती है। उनकी इनकम में सैलरी, एक घर से इनकम और 5,000 रुपये तक की एग्रीकल्चर इनकम शामिल हो सकती है।

अब ज्यादातर टैक्सपेयर्स की इनकम का स्रोत सिर्फ सैलरी नहीं

ITR फॉर्म 2 उन टैक्सपेयर्स के लिए है, जिनकी बिजनेस या प्रोफेशन से कोई इनकम नहीं है, लेकिन कैपिटल गेंस से इनकम है। टैक्स फाइलिंग प्लेटफॉर्म क्लियरटैक्स के डेटा के मुताबिक, पिछले कुछ सालों में टैक्स फाइलिंग का पैटर्न बदला है। अब ज्यादा टैक्सपेयर्स सैलरी के अलावा इनकम के दूसरे स्रोतों की भी रिपोर्टिंग कर रहे हैं।

कैपिटल गेंस दिखाने वाले टैक्सपेयर्स की संख्या भी बढ़ी

इस साल रिटर्न फाइल कर चुके टैक्सपेयर्स में से सिर्फ 42 फीसदी ने सैलरी को इनकम का मुख्य स्रोत दिखाया है। AY2022-23 में यह संख्या 82 फीसदी थी। टैक्सपेयर्स के इनकम में कैपिटल गेंस बड़ा स्रोत के रूप में सामने आया है। कैपिटल गेंस से इनकम वाले टैक्सपेयर्स की हिस्सेदारी इस साल 39 फीसदी पहुंच गई। AY2022-23 में यह सिर्फ 9 फीसदी थी।

बिजनेस इनकम रिपोर्ट करने वाले टैक्सपेयर्स की हिस्सेदारी बढ़कर 26 फीसदी

बिजनेस इनकम रिपोर्ट करने वाले टैक्सपेयर्स की संख्या भी बढ़कर 26 फीसदी पहुंच गई है। AY2022-23 में यह सिर्फ 4 फीसदी थी। इससे यह संकेत मिलता है कि सेल्फ-एंप्लॉयमेंट वाले लोग अब पहले के मुकाबले ज्यादा रिटर्न फाइल कर रहे हैं। यह ट्रेंड हर उम्र वर्ग के टैक्सपेयर्स में देखने को मिला है। सीनियर सिटीजंस में ऑनलाइन रिटर्न फाइल करे वाले लोगों की संख्या बढ़कर 53 फीसदी हो गई है।

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होम लोन, कार लोन सहित दूसरी जरूरतों की वजह से ज्यादा लोग फाइल कर रहे रिटर्न

एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसलिए भी अब पहले के मुकाबले ज्यादा लोग रिटर्न फाइल कर रहे हैं, क्योंकि अब होम लोन, कार लोन, क्रेडिट कार्ड और रेंट एग्रीमेंट बनवाने के लिए इनकम टैक्स रिटर्न मांगा जा रहा है। अब रिटर्न फाइल करना सिर्फ एक औपचारिकता नहीं रह गया है। टैक्सपेयर्स इसे गंभीरता से ले रहे हैं। सरकार ने रिटर्न फाइल प्रोसेस को पहले के मुकाबले काफी आसान बना दिया है। इसका फायदा भी मिल रहा है।

Income Tax Return: 31 जुलाई तक रिटर्न फाइल करने का मौका चूक गए? जानिए अब आपके लिए क्या हैं विकल्प

अगस्त का महीना शुरू हो गया है। रुपये-पैसे से जुड़े कई नियम आज से बदल गए हैं। आज से आईटीआर-1 और आईटीआर-2 फॉर्म से रिटर्न भरने पर पेनाल्टी चुकानी होगी। साथ ही आईटीआर-3 और आईटीआर-4 फॉर्म से रिटर्न फाइल करने की अंतिम तारीख 31 अगस्त को खत्म हो जाएगी। आइए इनके बारे में विस्तार से जानते हैं।

बिलेटेड रिटर्न 31 दिसंबर तक फाइल किया जा सकता है

ITR-1 और ITR-2 फॉर्म से इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की अंतिम तारीख 31 जुलाई थी। अगर किसी वजह से आप डेडलाइन तक रिटर्न फाइल करने से चूक गए हैं तो आप इस साल 31 दिसंबर तक रिटर्न फाइल कर सकते हैं। इसके लिए आपको पेनाल्टी चुकानी होगी। साथ ही टैक्स अमाउंट पर इंटरेस्ट देना होगा। ऐसे टैक्सपेयर्स का रिफंड आने में थोड़ा ज्यादा समय लग सकता है।

बिलेटेड रिटर्न फाइल करने के लिए पेनाल्टी चुकानी होगी

ऐसे टैक्सपेयर्स जिनकी सालाना इनकम 5 लाख रुपये से ज्यादा है, उन्हें बिलेटेड रिटर्न फाइल करने के लिए 5000 रुपये पेनाल्टी चुकानी होगी। ऐसे टैक्सपेयर्स जिनकी सालाना इनकम 5 लाख रुपये तक है उन्हें 1000 रुपये पेनाल्टी चुकानी होगी। इसके अलावा टैक्सपेयर्स को इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 234ए के तहत बकाया टैक्स पर इंटरेस्ट चुकाना होगा।

ये टैक्सपेयर्स बगैर पेनाल्टी 31 अगस्त तक फाइल कर सकते हैं रिटर्न

ऐसे टैक्सपेयर्स जिनके लिए आईटीआर-3 या आईटीआर-4 का इस्तेमाल करना जरूरी है और जिन्हें टैक्स ऑडिट की जरूरत नहीं है, उनके लिए रिटर्न फाइल करने की अंतिम तारीख 31 अगस्त है। इस कैटेगरी में सेल्फ-एंप्लॉयड प्रोफेशनल्स, फ्रीलांसर्स, छोटे कारोबारी जैसे टैक्सपेयर्स आते हैं। इसके अलावा ऐसे टैक्सपेयर्स भी इस कैटेगरी में आते हैं, जिन्होंने सेक्शन 44 एडी और 44एडीए के तहत प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन स्कीम को सेलेक्ट किया है।

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इस महीने आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी की भी होगी बैठक

इस महीने आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक होगी। 3 अगस्त को यह बैठक शुरू होगी, जिसके नतीजे 5 अगस्त को आएंगे। अगर इस मीटिंग में आरबीआई इंटरेस्ट रेट बढ़ाने का ऐलान करता है तो होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन महंगे हो जाएंगे। साथ ही जिन लोगों ने पहले से लोन लिए हैं, उनकी EMI बढ़ जाएगी। हालांकि, अगस्त की बैठक में आरबीआईआ के रेपो रेट बढ़ाने की उम्मीद कम है। रेपो रेट बढ़ने से बैंक लोन का इंटरेस्ट रेट बढ़ा देते हैं।

ITR: बगैर पेनाल्टी आज इनकम टैक्स रिटर्न भरने का आखिरी मौका, आपको होंगे ये फायदे

ITR: इनकम टैक्स रिटर्न फॉर्म 1 और फॉर्म 2 से रिटर्न फाइल करने का आज आखिरी मौका है। आज के बाद रिटर्न फाइल करने पर पेनाल्टी लगेगी और टैक्स पर इंटरेस्ट भी देना पड़ेगा। टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि टैक्सपेयर्स को आज रिटर्न फाइल करने की कोशिश करनी चाहिए। आज रिटर्न फाइल करने के कई फायदे हैं।

इनकम का एक सोर्स होने पर 30 मिनट में फाइल होगा रिटर्न

सैलरीड टैक्सपेयर्स जिनकी इनकम का एक सोर्स है, वे बगैर किसी दिक्कत करीब 30 मिनट में रिटर्न फाइल कर सकते हैं। टैक्सपेयर्स को रिटर्न फाइल करने से पहले फॉर्म 16, फॉर्म 26एएस, एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) जैसे डॉक्युमेंट्स तैयार रखने होंगे। इसके अलावा बैंक अकाउंट डिटेल, इंटरेस्ट से हुई इनकम और कैपिटल गेंस का कैलकुलेशन भी तैयार रखना होगा।

सभी जरूरी डॉक्युमेंट्स रिटर्न फाइल करने से पहले जुटा लें

चार्टर्ड अकाउंटेंट श्रेया गुप्ता गोयल ने कहा कि 30 मिनट में रिटर्न तभी फाइल किया जा सकता है, जब टैक्सपेयर्स ने सभी जरूरी डॉक्युमेंट्स पहले से जुटा लिया हो। उन्होंने कहा, “प्री-फिल्ड डेटा की वजह से खुद डेटा डालने में लगने वाला समय बच रहा है। लेकिन, टैक्सपेयर्स के लिए डेटा को एक बार चेक कर लेना जरूरी है।”

आईटीआर फॉर्म में भरे गए हर डेटा के लिए टैक्सपेयर जिम्मेदार

रिटर्न में भरे हर डेटा के लिए टैक्सपेयर जिम्मेदार होता है। इसलिए रिटर्न फाइल करते वक्त प्री-फिल्ड डेटा को भी वेरिफाय कर लेना जरूरी है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि टैक्सपेयर्स को प्री-फिल्ड डेटा फॉर्म 16, AIS और 26AS से मैच करा लेना चाहिए। सेविंग्स अकाउंट से इंटरेस्ट, फिक्स्ड डिपॉजिट से इंटरेस्ट और कैपिटल गेंस की रिपोर्टिंग अलग से होती है।

31 जुलाई के बाद रिटर्न फाइल करने पर पेनाल्टी और इंटरेस्ट चुकाना होगा

31 जुलाई के बाद रिटर्न फाइल करने पर पेनाल्टी चुकानी होगी। इसके अलावा टैक्स पर इंटरेस्ट भी देना होगा। सालाना इनकम 5 लाख रुपये से ज्यादा होने पर पेनाल्टी 5000 रुपये है। 5 लाख रुपये से कम सालाना इनकम पर पेनाल्टी 1000 रुपये है।

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31 जुलाई तक आईटीआर फाइल करने के ये हैं फायदे

दूसरा, फायदा यह है कि आप लॉस को कैरी फॉरवर्ड कर सकेंगे। 31 जुलाई के बाद रिटर्न फाइल करने पर लॉस कैरी फॉरवर्ड की सुविधा नहीं मिलती है। तीसरा, रिफंड का पैसा भी जल्द अकाउंट में आ जाएगा। चौथा, 31 जुलाई तक रिटर्न फाइल करने पर टैक्सपेयर्स के सामने इनकम टैक्स की नई और पुरानी दोनों रीजीम के इस्तेमाल का विकल्प खुला है। 31 के बाद सिर्फ इन रीजीम में रिटर्न फाइल करना होगा।

कम इनकम में कार खरीदना अब हुआ और आसान, सैलरी बेस पर ऐसे करें सही बजट प्लान!

घर के बाद कार खरीदना ज्यादातर लोगों के लिए एक बड़ा फाइनेंशियल डिसिजन होता है। सही कार चुनते समय सिर्फ उसकी कीमत नहीं, बल्कि आपकी सालाना इनकम, मासिक खर्च, बचत और फ्यूचर की फाइनेंशियल प्लान का भी ध्यान रखना चाहिए। आमतौर पर ऐसी कार चुनना बेहतर माना जाता है, जिसकी ऑन-रोड कीमत आपकी सालाना टेक-होम इनकम के आसपास हो, ताकि ईएमआई और बाकी खर्च आसानी से संभाले जा सकें। आइए जानते हैं कि 2026 में आपकी सैलरी के हिसाब से कौन-सी कार खरीदना सबसे सही ऑप्शन हो सकता है:

सालाना आय: ₹10 लाख से ज़्यादा

10 अक्टूबर से बुक कर पाएंगे टाटा टियागो ईवी, जनवरी 2023 से मिलेगी डिलेवरी - carandbike

इस बजट में लोग आमतौर पर किफायती और माइलेज-फ्रेंडली हैचबैक या एंट्री SUV चुनते हैं। मारुति सुजुकी स्विफ्ट, हुंडई ग्रैंड i10 Nios और टाटा टियागो जैसे मॉडल भरोसेमंद और लो मेंटेनेंस विकल्प हैं। SUV लुक के लिए रेनॉल्ट काइगर और निसान मैग्नाइट भी अच्छे ऑप्शन हैं, जो स्टाइल और बजट दोनों का बैलेंस रखते हैं।

सालाना आय: ₹10-15 लाख

New Baleno 2022: मारुति सुजुकी ने लॉन्च की नए जमाने की नई बलेनो, पहली बार इस सेगमेंट में मिलेंगे ये फीचर्स, जानें कीमत - maruti suzuki launches new age baleno starting in

इस इनकम में प्रीमियम हैचबैक और कॉम्पैक्ट SUV बेहतर ऑप्शन बनते हैं। मारुति बलेनो और टोयोटा ग्लैंज़ा फीचर्स और माइलेज के लिए पॉपुलर हैं, जबकि हुंडई i20 और टाटा अल्ट्रोज़ स्टाइल और सेफ्टी का अच्छा कॉम्बिनेशन देते हैं। SUV सेगमेंट में हुंडई एक्सटर, टाटा पंच, मारुति फ्रॉन्क्स और टोयोटा टैसर काफी पसंद की जाती हैं।

सालाना आय: ₹15-25 लाख

किआ सोनेट सबकॉम्पैक्ट SUV के लॉन्च की तारीख़ का हुआ खुलासा - carandbike

यह सेगमेंट कॉम्पैक्ट SUV और सेडान का बैलेंस है। मारुति ब्रेज़ा, हुंडई वेन्यू, किआ सोनेट और महिंद्रा XUV 3XO जैसे मॉडल काफी डिमांड में हैं। वहीं होंडा एलिवेट जैसी SUV और फॉक्सवैगन वर्टस या स्कोडा स्लाविया जैसी सेडान भी अच्छे ऑप्शन हैं।

सालाना आय: ₹25-40 लाख

टाटा हैरियर के वेरिएंट लाइनअप में बदलाव - नए ट्रिम्स के बारे में विस्तार से जानकारी

इस इनकम ग्रुप में मिड-साइज SUV सबसे ज्यादा पसंद की जाती हैं। हुंडई क्रेटा और किआ सेल्टोस इस सेगमेंट की टॉप कारें हैं। इसके अलावा टोयोटा हाइब्रिड मॉडल और मारुति ग्रैंड विटारा भी अच्छे ऑप्शन हैं। बड़ी और पावरफुल SUV के लिए महिंद्रा स्कॉर्पियो-N, टाटा हैरियर और MG हेक्टर भी शामिल हैं।

सालाना आय: ₹40-60 लाख

टोयोटा इनोवा हाईक्रॉस भारत में लॉन्च, कीमत 18.30 लाख रुपये से शुरू | CarDekho.com

यहां लोग प्रीमियम SUV और लग्जरी जैसी सुविधाओं वाली गाड़ियों की तरफ बढ़ते हैं। टोयोटा इनोवा हाईक्रॉस फैमिली के लिए बेहद भरोसेमंद विकल्प है। महिंद्रा XUV700 फीचर्स के लिए मशहूर है। वहीं जीप कंपास, हुंडई टक्सन और BYD Atto 3 (EV) भी मजबूत ऑप्शन’हैं।

सालाना आय: ₹60 लाख से ₹1 करोड़

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इस लेवल पर लग्जरी ब्रांड्स में एंट्री आसान हो जाती है। BMW X1, Mercedes-Benz GLA और Volvo XC40 जैसी SUV लोकप्रिय हैं। सेडान सेगमेंट में Audi A4, BMW 3 Series और Mercedes C-Class पसंद की जाती हैं। Toyota Fortuner भी प्रीमियम SUV के तौर पर मजबूत ऑप्शन बनी रहती है।

सालाना आय: ₹1 करोड़+

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यह लेवल पूरी तरह लग्जरी और प्रीमियम कारों का है। Mercedes-Benz E-Class, BMW 5 Series जैसी सेडान और Audi Q5, BMW X3, Mercedes GLC जैसी SUV आमतौर पर पसंद की जाती हैं। वहीं Range Rover और Toyota Vellfire जैसी गाड़ियां प्रीमियम लाइफस्टाइल का एक्सपीरियंस देती हैं।

आज के समय में सभी कार सेगमेंट में कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, ऐसे में समझदारी इसी में है कि कार खरीदने का फैसला अपनी सालाना आय को ध्यान में रखकर लिया जाए। हर व्यक्ति की फाइनेंशियल सिचुएशन अलग होती है, लेकिन सैलरी के बेस पर बजट डिसाइड करने से सही ऑप्शन चुनना आसान हो जाता है।

Viral Post: 6 अंकों की सैलरी के बाद भी खर्च करने में डरता है ये युवक! 26 साल के प्रोफेशनल ने शेयर किया पोस्ट

आज के समय में कई लोगों को ऐसा लगता है कि 6 अंकों वाली सैलरी मिलने के बाद आर्थिक परेशानियां खत्म हो जाती हैं। लेकिन 26 साल के एक युवक ने सोशल मीडिया पर बताया कि अच्छी कमाई होने के बावजूद हर महीने खर्च और बचत के बीच बैलेंस बनाना आसान नहीं है। सोशल मीडिया पर शेयर किए गए एक पोस्ट में एक प्रोफेशनल ने अपनी आर्थिक स्थिति को लेकर दिलचस्प अनुभव साझा किया है। उन्होंने बताया कि करीब 82 लाख रुपए सालाना कमाने के बावजूद कई बार ये तय करना मुश्किल हो जाता है कि मनोरंजन, घूमने-फिरने या महंगे कपड़ों जैसी चीजों पर पैसा खर्च किया जाए या नहीं। युवक का ये पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा हैय़

उसकी पोस्ट के बाद कई लोगों ने कहा कि बढ़ती महंगाई और रोजमर्रा के खर्चों की वजह से अच्छी सैलरी वाले लोगों को भी अपने पैसों का सही तरीके से हिसाब रखना पड़ता है।

युवक ने शेयर किया पोस्ट

रेडिट पर शेयर किए गए पोस्ट में यूजर ने लिखा, “मुझे पता है कि मेरी आर्थिक स्थिति अच्छी है और पैसों को लेकर कोई बड़ी परेशानी नहीं है, लेकिन एक चीज को लेकर मैं अब भी असमंजस में रहता हूं। कॉन्सर्ट या थिएटर के टिकट, किसी खास मौके पर बाहर घूमने जाना या अच्छे कपड़े खरीदने जैसी छोटी-बड़ी चीजों पर खर्च करने का फैसला मेरे लिए आसान नहीं होता। कई बार समझ नहीं आता कि इन चीजों पर कितना और कब खर्च करना सही रहेगा।”

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कितनी है सैलरी

26 साल के इस यूजर ने बताया कि उनकी सालाना आय करीब 95,000 डॉलर है। रिटायरमेंट फंड, हेल्थकेयर और इंश्योरेंस जैसी कटौतियों के बाद उनके पास हर महीने लगभग 3,000 डॉलर बचते हैं। यूजर ने पोस्ट में लिखा, “मैं चाहता हूं कि इन खर्चों के लिए मेरा बजट थोड़ा बड़ा हो, ताकि मैं कभी-कभी अच्छे ड्रेस शूज़ जैसी चीजें भी खरीद सकूं। लेकिन ज्यादातर महीनों में मैं इस कैटेगरी के लिए तय रकम का 90 से 110 प्रतिशत तक खर्च कर देता हूं।”

यूजर की पोस्ट पर लोगों ने किया कमेंट

इस पोस्ट पर कई लोगों ने अपनी राय भी शेयर की। एक यूजर ने लिखा, “बजट बनाना खर्चों का अंदाजा लगाने के लिए अच्छा तरीका है, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात समझदारी से खर्च करना है। हर स्थिति को बजट में शामिल नहीं किया जा सकता, इसलिए किसी भी खरीदारी से पहले यह जरूर सोचें कि उसकी कीमत वाकई उचित है या नहीं।” वहीं एक अन्य यूजर ने कहा, “जब मैं ऐसी स्थिति में होता हूं, तो मैं उस चीज के लिए कुछ महीनों तक बचत करने का फैसला करता हूं जिसे खरीदना चाहता हूं। अगर चाहूं तो अपने बजट में बदलाव कर सकता हूं, लेकिन मैं ऐसा नहीं करता। इसलिए मेरे लिए सबसे अच्छा तरीका धैर्य रखना और इंतजार करना है।”