GST Council Meeting: 57वीं बैठक में बड़े बदलाव, रिफंड से लेकर रजिस्ट्रेशन और गिरफ्तारी तक बदलेगा सिस्टम

GST Council Meeting: GST काउंसिल की 57वीं बैठक में कारोबारियों और टैक्सपेयर्स के लिए कई बड़े प्रोसेस सुधारों को मंजूरी दी गई है। इनका मकसद GST को समझना और उसका पालन करना आसान बनाना है। साथ ही रिफंड की प्रक्रिया तेज होगी और टैक्स अधिकारियों का फिजिकल इंटरवेंशन कम किया जाएगा।

ये बदलाव GST के दो-दर वाले स्ट्रक्चर लागू होने के करीब एक साल बाद किए गए हैं। सरकार के मुताबिक, टैक्सेबल सप्लाई 25.8% बढ़कर हर महीने 50.58 लाख करोड़ रुपये हो गई है। पहले यह 40.19 लाख करोड़ रुपये थी। वहीं, कंज्यूमर्स को रिपोर्ट की गई सप्लाई 26.7% बढ़कर 7.58 लाख करोड़ रुपये हो गई है।

इस दौरान घरेलू सप्लाई पर प्रभावी टैक्स रेट भी घटा है। यह 14.55% से कम होकर 13.13% रह गया है। अब Council का फोकस टैक्स रेट से हटकर GST के रोजमर्रा के कामकाज पर है। इसमें रजिस्ट्रेशन, रिटर्न, रिफंड, मुकदमे और टैक्स कार्रवाई जैसे मुद्दे शामिल हैं।

GST रिफंड अब तेजी से मिलेगा

सबसे बड़ा बदलाव रिफंड की प्रक्रिया में किया गया है। रिफंड क्लेम को स्वीकार करने की समयसीमा 15 दिन से घटाकर 10 दिन करने का प्रस्ताव है। अगर 10 दिन के भीतर न तो एक्नॉलेजमेंट जारी होता है और न ही डेफिशिएंसी मेमो, तो क्लेम को अपने आप एक्नॉलेज्ड माना जाएगा।

अब सिस्टम रिस्क असेसमेंट के आधार पर रिफंड क्लेम की 90% रकम को मंजूर करेगा। इसमें अधिकारी की भूमिका कम होगी। एक्नॉलेजमेंट के तीन वर्किंग डे के भीतर रिफंड ऑर्डर जारी करना होगा। अभी इसके लिए सात दिन का समय है।

कैश लेजर में पड़े अतिरिक्त बैलेंस का रिफंड भी पूरी तरह ऑटोमैटिक होगा। इसमें अधिकारी के दखल की जरूरत नहीं होगी। इसका फायदा खासकर एक्सपोर्टर्स और इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर के तहत काम करने वाले कारोबारियों को मिल सकता है। करीब 65% रिफंड क्लेम एक्सपोर्ट या इनवर्टेड रेट से जुड़े हैं, जबकि 19% क्लेम कैश लेजर में पहले से पड़े बैलेंस से जुड़े हैं।

GST रजिस्ट्रेशन भी ज्यादा ऑटोमैटिक होगा

GST रजिस्ट्रेशन और उसमें बदलाव की प्रक्रिया को भी और ऑटोमैटिक करने का प्रस्ताव है। अभी कम जोखिम वाले आवेदकों को बिना अधिकारी की मंजूरी के सिस्टम के जरिए तीन वर्किंग डे में रजिस्ट्रेशन मिल सकता है। कुल रजिस्ट्रेशन में ऐसे मामलों की हिस्सेदारी 61% है।

रजिस्ट्रेशन फॉर्म को भी बदला जाएगा। इसमें आवेदक को वही फील्ड दिखाई जाएंगी, जो उसके लिए जरूरी हैं। साथ ही, मांगे जा रहे दस्तावेजों का मकसद भी बताया जाएगा। इससे आवेदन भरने की प्रक्रिया ज्यादा आसान हो सकती है।

ट्रेड नेम, डायरेक्टर या पार्टनर और कारोबार की अतिरिक्त जगहों में बदलाव जैसे कई सामान्य संशोधन अपने आप मंजूर किए जाएंगे। नवंबर 2025 से सितंबर 2026 के बीच दाखिल 16.73 लाख रजिस्ट्रेशन अमेंडमेंट एप्लिकेशन में से 65.45% इन्हीं कैटेगरी से जुड़े थे।

Input Tax Credit में कारोबारियों को राहत

Council ने कई क्षेत्रों में Input Tax Credit यानी ITC का दायरा बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है। अब कर्मचारियों के लिए लिए गए हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस पर भी ITC मिल सकेगा। फैक्ट्री के बाहर लगे टेलीकॉम टावर और पाइपलाइन पर भी इसका फायदा मिलेगा।

एक्सपायरी के कारण खराब स्टॉक पर भी ITC मिलेगा, अगर कानून के तहत उस सामान को नष्ट करना जरूरी है। फ्री सैंपल पर भी ITC उपलब्ध होगा। इससे उन कारोबारियों को राहत मिल सकती है, जिनके कारोबार में ऐसे खर्च नियमित रूप से होते हैं।

सरकार ने कुछ B2B सर्विस चेन में डबल टैक्सेशन रोकने की भी पहल की है। एजेंट के जरिए बुक किए गए 7,500 रुपये प्रति रात तक के होटल कमरे, रेस्टोरेंट और कैटरिंग सर्विस और पैसेंजर ट्रांसपोर्ट जैसी सेवाओं पर टैक्स दो बार लेने के बजाय एक बार ही लिया जाएगा।

इनवर्टेड ड्यूटी में ITC रिफंड का दायरा बढ़ेगा

मैन्युफैक्चरर्स और एक्सपोर्टर्स के लिए भी एक बड़ा बदलाव प्रस्तावित है। इनवर्टेड रेट स्ट्रक्चर में रिफंड का दायरा बढ़ाया जाएगा। अभी रिफंड सिर्फ गुड्स इनपुट तक सीमित है। अब 1 नवंबर 2026 या उसके बाद लिए गए ITC पर इनपुट सर्विसेज को भी रिफंड में शामिल किया जाएगा।

प्लांट और मशीनरी को रिफंड से बाहर रखने का नियम भी हटाया जाएगा। 1 अप्रैल 2027 या उसके बाद लिए गए ITC पर प्लांट और मशीनरी के रिफंड की गणना हर महीने क्रेडिट के 1/60वें हिस्से के आधार पर होगी। यह अवधि उस एसेट की वर्किंग लाइफ से जुड़ी होगी।

इस बदलाव से फार्मा और FMCG जैसे सेक्टरों के वर्किंग कैपिटल मैनेजमेंट में सुधार की उम्मीद है। खासकर ऐसे कारोबारों में जहां इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर के कारण ITC लंबे समय तक फंसा रहता है, वहां रिफंड का दायरा बढ़ने से कैश फ्लो में मदद मिल सकती है।

छोटे कारोबारियों को साल में एक बार रिटर्न का विकल्प

काउंसिल ने सालाना 5 करोड़ रुपये तक के टर्नओवर वाले और सिर्फ कंज्यूमर्स को सामान या सर्विस बेचने वाले टैक्सपेयर्स के लिए एक वैकल्पिक स्कीम को सैद्धांतिक मंजूरी दी है। इसके तहत ऐसे कारोबारी साल में सिर्फ एक बार रिटर्न दाखिल कर सकेंगे। हालांकि, टैक्स का भुगतान तिमाही आधार पर करना होगा।

सरकार के मुताबिक, 1.05 करोड़ एक्टिव टैक्सपेयर्स में से 16.85 लाख सिर्फ कंज्यूमर सप्लाई रिपोर्ट करते हैं। इनमें 99% का टर्नओवर 5 करोड़ रुपये से कम है। ये सभी मिलकर GST की कुल रिपोर्टेड देनदारी का 1% से भी कम हिस्सा रखते हैं।

इस स्कीम का पूरा फ्रेमवर्क और जरूरी कानूनी बदलाव अगली GST काउंसिल बैठक में देखे जाएंगे। यानी अभी यह प्रस्ताव शुरुआती स्तर पर है। इसके लागू होने से पहले इसके नियम और प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा।

रास्ते में माल की जांच भी कम होगी

माल लेकर जा रहे वाहनों की फिजिकल जांच को लेकर भी नए नियम प्रस्तावित हैं। किसी वाहन को तभी रोका जा सकेगा, जब उसके खिलाफ कोई खास इंटेलिजेंस या सूचना हो। इसके लिए जॉइंट कमिश्नर या उससे ऊपर के अधिकारी की पहले से मंजूरी जरूरी होगी।

किसी गाड़ी में जा रहे माल की जांच सिर्फ सोर्स स्टेट और डेस्टिनेशन स्टेट कर सकेंगे। रास्ते में पड़ने वाले दूसरे राज्यों को वाहन रोकने की अनुमति नहीं होगी। इससे कारोबारियों को रास्ते में बार-बार होने वाली जांच से राहत मिल सकती है।

यानी अगर कोई कंसाइनमेंट पांच राज्यों से होकर गुजरता है, तो अभी हर राज्य में उसकी जांच हो सकती है। नए सिस्टम में फिजिकल चेकिंग सिर्फ शुरुआत और अंतिम राज्य तक सीमित रहेगी। इससे सामान की आवाजाही में समय भी बच सकता है।

GST में गिरफ्तारी की शक्ति खत्म होगी

GST से जुड़े प्रवर्तन के मोर्चे पर भी बड़ा बदलाव प्रस्तावित है। GST के तहत गिरफ्तारी की शक्ति हटाई जा रही है। किसी आरोपी पर मुकदमा चलाने की सीमा 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये की जाएगी। न्यूनतम सजा का प्रावधान भी हटाया जाएगा।

इसके बाद जुर्माना, जेल या दोनों में से क्या सजा दी जाए, यह न्यायिक विवेक पर निर्भर करेगा। जहां कोई खास पेनल्टी तय नहीं है, वहां लगने वाली सामान्य पेनल्टी भी 25,000 रुपये से घटाकर 10,000 रुपये की जाएगी।

सरकार का कहना है कि अब GST सिस्टम खरीदार और विक्रेता के इनवॉइस का मिलान कर सकता है। इससे फर्जी ITC को उसी जगह के करीब पकड़ा जा सकता है, जहां वह बनाया जाता है। इसी वजह से सिस्टम में ज्यादा ऑटोमेशन पर जोर दिया जा रहा है।

सर्विस एक्सपोर्टर्स को भी फायदा

GST काउंसिल ने सर्विस एक्सपोर्ट से जुड़े कुछ नियमों में भी बदलाव का प्रस्ताव रखा है। अगर कोई भारतीय कंपनी अपनी विदेशी ब्रांच के जरिए किसी विदेशी ग्राहक को सर्विस देती है, तो उसे एक्सपोर्ट बेनिफिट मिल सकेगा। इसके लिए मौजूदा कानूनी शर्त हटाई जाएगी।

इससे एनालिटिक्स कंपनियों, डिजाइन स्टूडियो, इंजीनियरिंग कंसल्टेंसी और भारत से काम करने वाले ग्लोबल कंपनियों के ऑफिस को फायदा हो सकता है। ऐसे कारोबारों के लिए विदेशी ग्राहकों को दी जाने वाली सर्विस को एक्सपोर्ट मानने का रास्ता आसान होगा।

अगर किसी विदेशी ग्राहक के सामान पर भारत में टेस्टिंग, रिपेयर, सर्टिफिकेशन, रिसर्च या प्रोसेसिंग का काम किया जाता है, तो वह भी सर्विस एक्सपोर्ट माना जाएगा। इसके लिए जरूरी नहीं होगा कि वह सामान भारत से बाहर जाए।

ई-कॉमर्स पर छोटे विक्रेताओं के लिए रास्ता आसान

ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए कारोबार करने वाले छोटे विक्रेताओं के लिए दूसरे राज्य में कारोबार की जगह दर्ज करना आसान हो सकता है। प्रस्ताव के तहत कोई विक्रेता दूसरे राज्य में ई-कॉमर्स ऑपरेटर के वेयरहाउस को अपना प्रिंसिपल प्लेस ऑफ बिजनेस घोषित कर सकेगा।

इसके लिए ई-कॉमर्स ऑपरेटर की मंजूरी जरूरी होगी। यह मंजूरी सिस्टम के जरिए अपने आप दी जाएगी। हालांकि, विक्रेता की कम से कम एक राज्य में फिजिकल मौजूदगी बनी रहनी चाहिए। यही उसका होम स्टेट होगा।

यह रजिस्ट्रेशन सिर्फ प्लेटफॉर्म के जरिए की गई सप्लाई तक सीमित रहेगा। काउंसिल अलग-अलग ई-कॉमर्स बिजनेस मॉडल में टैक्सेशन को भी एक जैसा करना चाहती है। यानी टैक्स इस बात पर निर्भर करेगा कि वास्तव में कौन-सी सर्विस दी गई है, न कि प्लेटफॉर्म ने कॉन्ट्रैक्ट किस तरह बनाया है।

इस बैठक में GST रेट में कोई बदलाव नहीं

57वीं GST काउंसिल बैठक में GST रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया। आगे से GST रेट से जुड़े मामलों पर साल में एक बार अलग बैठक में चर्चा होगी। यह बैठक सिर्फ रेट से जुड़े मुद्दों के लिए होगी।

इस बार काउंसिल का फोकस पिछले साल के GST 2.0 बदलावों के बाद बची विसंगतियों और अस्पष्टताओं को दूर करने पर रहा। यानी इस बैठक में टैक्स रेट बदलने के बजाय GST के रोजमर्रा के सिस्टम को आसान बनाने पर ज्यादा जोर दिया गया।

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Delhi Property Tax: पुराना प्रॉपर्टी टैक्स बकाया है तो राहत का मौका, MCD की इस स्कीम से बच सकता है ब्याज-जुर्माना

Delhi Property Tax: अगर दिल्ली में आपकी कोई प्रॉपर्टी है और आपने कई सालों से उसका प्रॉपर्टी टैक्स नहीं भरा है, तो आपके लिए एक काम की खबर है। दिल्ली नगर निगम यानी MCD ने पुराने प्रॉपर्टी टैक्स बकाए को चुकाने के लिए SUNIYO 2.0 वन प्लस सेवन स्कीम शुरू की है। यह स्कीम 29 सितंबर 2026 से लागू हो गई है। इसका फायदा 31 दिसंबर 2026 तक उठाया जा सकता है।

इस स्कीम का मकसद उन लोगों को अपना पुराना प्रॉपर्टी टैक्स अकाउंट क्लियर करने का मौका देना है जिन पर कई सालों से टैक्स बकाया है। खास बात यह है कि तय शर्तों के मुताबिक, पेमेंट करने पर 2019-20 से पहले के पुराने बकाए पर ब्याज और पेनल्टी में राहत मिलेगी। लेकिन इसके लिए पहले कुछ तय सालों का प्रिंसिपल टैक्स चुकाना जरूरी होगा।

क्या है SUNIYO 2.0 One Plus Seven स्कीम?

MCD की इस स्कीम का नाम वन प्लस सेवन इसलिए रखा गया है क्योंकि इसमें पिछले सात फाइनेंशियल ईयर के साथ-साथ मौजूदा फाइनेंशियल ईयर 2026-27 का प्रिंसिपल प्रॉपर्टी टैक्स भी शामिल है। इसका मतलब है कि प्रॉपर्टी टैक्सपेयर को 2026-27 का प्रिंसिपल टैक्स और 2019-20 से 2025-26 तक के सात सालों का प्रिंसिपल टैक्स देना होगा।

इसके बाद, स्कीम में बताई गई शर्तों के तहत, 2019-20 से पहले के पुराने बकाया पर लगे इंटरेस्ट और पेनल्टी से राहत मिल सकती है। आसान शब्दों में कहूं तो अगर किसी प्रॉपर्टी पर टैक्स कई सालों से नहीं दिया गया है, तो MCD की यह स्कीम पुराना हिसाब चुकाने का मौका देती है। लेकिन, इसका फायदा उठाने के लिए सिर्फ पुराना इंटरेस्ट या पेनल्टी देना काफी नहीं है। बल्कि, स्कीम के तहत बताई गई प्रिंसिपल टैक्स लायबिलिटी देनी होगी।

31 दिसंबर है आखिरी तारीख

इस स्कीम का फायदा उठाने के लिए प्रॉपर्टी टैक्सपेयर्स को 31 दिसंबर, 2026 तक जरूरी प्रोसेस पूरे करने होंगे। उन्हें ‘MCD प्रॉपर्टी टैक्स पोर्टल’ पर अपना प्रॉपर्टी टैक्स रिटर्न ऑनलाइन फाइल करना होगा। इस दौरान जरूरी पेमेंट करना होगा। प्रॉपर्टी टैक्स से जुड़ी सर्विसेज के साथ-साथ SUNIYO स्कीम की जानकारी भी MCD पोर्टल पर मौजूद है।

₹5 लाख या उससे ज्यादा बकाया है तो किस्तों में भुगतान

यह स्कीम उन प्रॉपर्टी टैक्सपेयर्स के लिए भी एक सुविधा देती है जिन पर ज़्यादा बकाया है। अगर किसी टैक्सपेयर की कुल देनदारी ₹5 लाख या उससे ज्यादा है, तो वे स्कीम के समय के दौरान बराबर किश्तों में रकम चुका सकते हैं। इसका मतलब है कि जिन लोगों पर प्रॉपर्टी टैक्स की बड़ी देनदारी है, उनके पास एकमुश्त रकम चुकाने के बजाय, तय नियमों के मुताबिक पूरी रकम किश्तों में चुकाने का ऑप्शन होगा।

सिर्फ भुगतान करना ही काफी नहीं, रिटर्न भी भरना होगा

SUNIYO 2.0 का फायदा उठाने के लिए टैक्सपेयर्स को अपना प्रॉपर्टी टैक्स रिटर्न ऑनलाइन फाइल करना होगा। उसी हिसाब से जरूरी पेमेंट करना होगा। इसलिए, कोई भी पेमेंट करने से पहले अपनी प्रॉपर्टी की डिटेल्स, प्रॉपर्टी ID/UPIC और बकाया बैलेंस को ध्यान से चेक करना जरूरी है। MCD प्रॉपर्टी टैक्स पोर्टल टैक्सपेयर्स के लिए प्रॉपर्टी डिटेल्स और टैक्स ड्यू सर्टिफिकेट जैसे फीचर भी देता है।

बाद में MCD करेगी जांच

प्रॉपर्टी टैक्सपेयर्स को यहां खास तौर पर सावधान रहना चाहिए। MCD बाद में स्कीम के तहत फाइल किए गए रिटर्न की स्क्रूटनी करेगी। यह स्क्रूटनी 1 अप्रैल, 2027 और 31 मार्च, 2028 के बीच होगी। अगर स्क्रूटनी में पता चलता है कि टैक्सपेयर ने कम पेमेंट किया है, तो MCD अंतर वसूल सकता है और 30% पेनाल्टी लगा सकता है। इसलिए, सिर्फ स्कीम का फायदा उठाने के लिए गलत जानकारी के साथ रिटर्न फाइल करना महंगा पड़ सकता है।

(दिल्ली से शुभांगी तिवारी की रिपोर्ट)

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ITR Filing Deadline: सरकार ने ऑडिट वाले टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत दी, अब 21 नवंबर तक भर सकेंगे ITR

ITR Filing Deadline: सरकार ने टैक्स ऑडिट वाले टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत दी है। CBDT यानी सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज ने असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए ITR भरने की डेडलाइन बढ़ा दी गई है। पहले ITR भरने की आखिरी तारीख 31 अक्टूबर 2026 थी। अब इसे बढ़ाकर 21 नवंबर 2026 कर दिया गया है। यानी करदाताओं को 21 दिन का अतिरिक्त समय मिला है।

टैक्स ऑडिट रिपोर्ट की डेडलाइन भी बढ़ी

CBDT ने टैक्स ऑडिट रिपोर्ट जमा करने की तारीख भी बढ़ा दी है। पहले यह काम 30 सितंबर 2026 तक करना था। अब इसकी आखिरी तारीख 21 अक्टूबर 2026 है। इससे टैक्सपेयर्स और चार्टर्ड अकाउंटेंट को ऑडिट पूरा करने के लिए ज्यादा समय मिलेगा।

डेडलाइन क्यों बढ़ाई गई?

कई CA एसोसिएशन और टैक्स प्रोफेशनल्स ने डेडलाइन बढ़ाने की मांग की थी। उनका कहना था कि ऑडिट पूरा करने में काफी समय लग रहा है। टैक्स से जुड़ी अलग-अलग जानकारियों का मिलान करना पड़ता है। साथ ही कई रिकॉर्ड और दस्तावेज भी जांचने होते हैं। अब डेडलाइन बढ़ने से यह काम पूरा करने के लिए ज्यादा समय मिलेगा।

ऑडिट में किन चीजों की जांच होती है?

टैक्स ऑडिट में कई जानकारियां चेक की जाती हैं। टर्नओवर और दूसरी वित्तीय जानकारी का GST रिटर्न से मिलान होता है। TDS और TCS की जानकारी भी देखी जाती है। इसके अलावा Form 26AS, AIS और TIS को भी चेक किया जाता है।

खर्च, फिक्स्ड एसेट, लोन और वैधानिक बकाया की भी जांच होती है। संबंधित पक्षों के साथ हुए लेनदेन और दूसरी जरूरी जानकारियां भी देखी जाती हैं। अगर कहीं कोई अंतर मिलता है तो उसे ठीक करना पड़ सकता है। इसके बाद ही ऑडिट रिपोर्ट फाइनल होती है।

अब टैक्सपेयर्स को क्या करना चाहिए?

डेडलाइन बढ़ गई है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि काम आखिरी समय तक टाल दें।

टैक्स ऑडिट के दायरे में आने वाले लोगों को अपने जरूरी दस्तावेज CA को दे देना चाहिए। बुक्स ऑफ अकाउंट्स, बैंक स्टेटमेंट, इनवॉइस, GST रिकॉर्ड और TDS की जानकारी अपडेट रखनी चाहिए। AIS, TIS और Form 26AS भी चेक कर लें। इनमें कोई गड़बड़ी या अंतर है तो समय रहते उसे ठीक करा लेनी चाहिए।

ITR भरने से पहले ये काम न भूलें

CA टैक्स ऑडिट रिपोर्ट अपलोड करने के बाद करदाता को उसे अपने इनकम टैक्स ई-फाइलिंग अकाउंट से स्वीकार या अप्रूव करना होता है।

इसलिए सिर्फ CA के रिपोर्ट अपलोड करने का इंतजार न करें। अप्रूवल के लिए भी समय रखें। आखिरी दिन तक काम छोड़ने से बचें। नई डेडलाइन के मुताबिक, टैक्स ऑडिट रिपोर्ट 21 अक्टूबर तक और ITR 21 नवंबर 2026 तक दाखिल करना होगा।

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Market Insight : बाजार में आज फैसले का दिन, आज कोई ट्रेड कैरी ना करें, कल नया नजरिया लेंगे

Market Insight : बाजार की आगे की दशा और दिशा पर अपनी राय साझा करते हुए सीएनबीसी-आवाज़ के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल ने कहा कि बाजार में आज फैसले का दिन है। ग्लोबल बाजारों के लिए आज की रात फैसले की घड़ी है। आज रात को US फेड का फैसला आएगा। US में दरों में बढ़ोतरी की संभावना अब 94% पर है। इसका मतलब बाजार में दरों में बढ़ोतरी 94% भाव में शामिल है। अगर दरों में बढ़ोतरी हुई तो शायद कल एक बॉटम भी बने। लेकिन अगर दरों में बढ़ोतरी नहीं आई तो काफी दिलचस्प होगा। निफ्टी हमारे सारे टार्गेट हासिल कर चुका है। जैक्सन होल के बाद हमने CNBC-आवाज़ पर एक शॉर्ट का नजरिया लिया था। 23,100-23,300 के हमारे सारे टार्गेट स्क्रीन पर हासिल हुए। कल सुबह भी खुलते ही 23,650 के SL के साथ शॉर्ट का नजरिया था। कल क्लोजिंग में फिर शॉर्ट में मुनाफावसूली का नजरिया रहा। आज भी वही नजरिया है, इंट्राडे भले शॉर्ट करें, लेकिन निपटा कर जाएं। आज कुछ हिम्मत दिखाने वाले लोग शायद लॉन्ग भी लेकर जाएंगे।

फेड के फैसले से पहले ग्लोबल बाजार में घबराहट

अमेरिका में 10-साल की बॉन्ड यील्ड 5.041% के इंट्राडे हाई पर है। 2007 के बाद 10-साल की यील्ड सबसे ऊंचे स्तर पर है। ब्रेंट क्रूड $108 प्रति बैरल के ऊपर है। आज रात फेड के दरों में बढ़ोतरी की 94% संभावना है।

क्यों उबल रहा है कच्चा तेल?

रॉयटर्स के मुताबिक सऊदी अरब ने सितंबर की कुछ डिलीवरी रद्द की है। यूरोपीय ग्राहकों की सितंबर की डिलीवरी रद्द की गई है। सऊदी ने ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन बंद की है। सऊदी ने एहतियातन पाइपलाइन बंद की है। हूतियों के हमले में पाइपलाइन को नुकसान हुआ है। पाइपलाइन की मरम्मत कबतक होगी ये साफ नहीं है।

ईरान युद्ध की कीमत

अमेरिकी कांग्रेस बजट ऑफिस स्टडी में कहा गया है कि ईरान युद्ध से अमेरिकी टैक्सपेयर्स पर बोझ बढ़ा है। पहले 5 महीनों में टैक्सपेयर्स पर 38 अरब डॉलर का बोझ पड़ा है। अगले साल की शुरुआत तक महंगाई 0.5% बढ़ सकती है। युद्ध का हर अतिरिक्त महीना 2-3 अरब डॉलर महंगा पड़ रहा है। तनाव बढ़ने पर युद्ध की लागत और बढ़ सकती है। कोर महंगाई पुराने अनुमान से 0.3% ज्यादा रह सकती है।

US डिफेंस सिस्टम पर असर

कांग्रेस बजट ऑफिस स्टडी में आगे कहा गया है कि इस युद्ध में US बेस पर सैकड़ों इमारतें और स्ट्रक्चर तबाह हो गए हैं।कुवैत, बहरीन, कतर में US बेस स्ट्रक्चर तबाह हो गए हैं। UAE, सऊदी अरब, इराक, ओमान, जॉर्डन में भी स्ट्रक्चर तबाह हुए हैं।’Operation Epic Fury’ में विमान नष्ट हुए या क्षतिग्रस्त हुए हैं।

इस बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का बड़ा बयान आया है। इसमें कहा गया है कि ये तो सिर्फ शुरुआत है।

फेड का फैसला: हमारे लिए क्यों अहम?

पुरी दुनिया की नजर इस समय यूएस फेड पर है। बाजार के मुताबिक 25 Bps दरें बढ़ेंगी। एनालिस्ट का कहना है कि होल्ड या dovish hike के लिए बाजार तैयार नहीं है। BoA का कहना है कि इस स्तर पर रेट होल्ड करना “अभूतपूर्व” होगा। केविन वॉर्श की कोई भी टिप्पणी अहम होगी।

फेड की दर बढ़ोतरी का असर?

इससे इमर्जिंग मार्केट्स में आने वाले निवेश फ्लो पर सीधा असर पड़ता है। सोने और चांदी में रेट हाइक से गिरावट आती है। डॉलर की मांग बढ़ने से डॉलर मजबूत होता है। बेस मेटल्स पर भी दबाव आ सकता है। लोग खर्च कम करते हैं, जिससे मंदी का खतरा बढ़ता है। FCNR डिपॉजिट्स जो हमने जुटाए हैं,उनकी देनदारी भी बढ़ेगी। दर बढ़ोतरी किस मैक्रो हालात में होती है,ये सबसे अहम होता है। अगर इकोनॉमी मजबूत हो तो दर बढ़ोतरी हमेशा निगेटिव नहीं होती। पिछले 2-3 साल में भारत में ETF निवेश नहीं हुआ बल्कि पैसा बाहर ही गया है। ऐसे में काफी लोग कहेंगे कि हमें क्या फर्क पड़ता है? लेकिन अगर ग्लोबल बाजार में मंदी का खतरा बढ़े तो फर्क पड़ता है।

बाजार: आज का दांव

ब्रेंट $108/बैरल के ऊपर है। इसमें 4 महीने के शिखर के करीब कारोबार हो रहा है। कच्चे तेल से जुड़े शेयरों में एक्शन जारी रह सकता है। ONGC, OIL इंडिया के लिए पॉजिटिव है। वहीं, OMCs, एशियन पेंट्स और इंडिगो के लिए निगेटिव है। फेड के फैसले से पहले सोने-चांदी की कीमती में कमजोरी है। सोना 6 हफ्तों के और चांदी 5 हफ्तों के निचले स्तर पर है। यह टाइटन और कल्याण के लिए पॉजिटिव है। वहीं, मणप्पुरम, मुथूट फाइनेंस और हिंद जिंक के लिए निगेटिव है। डॉलर इंडेक्स 100 के स्तर के करीब पहुंच रहा है। यह फार्मा और IT के लिए पॉजिटिव है लेकिन बैंकों के लिए निगेटिव है।

मेटल्स पर रखें नजर

डॉलर की मजबूती से मेटल्स में गिरावट आ सकती है। Nickel 10 हफ्तों के निचले स्तर पर है। कॉपर फ्यूचर्स 7 हफ्तों के निचले स्तर पर है। यह मेटल शेयरों के लिए निगेटिव है। खास तौर पर हिंद कॉपर,नाल्को और हिंडाल्को पर खराब असर पड़ सकता है।

रबर पर रखें नजर

रबर की कीमतें 1 हफ्ते के निचले स्तर पर हैं। यह अपोलो टायर्स,सिएट और MRF जैसे टायर शेयरों के लिए पॉजिटिव है।

AI और IT: अब आगे क्या?

एंथ्रोपिक के सीईओ अमोदेई (Amodei) ने कहा है कि AI डेवलपमेंट की रफ्तार धीमा करना जरूरी है। यही इंडस्ट्री को आगे लेकर जाने का सबसे अच्छा तरीका है। वहीं, एनवीडिया के CEO जेन्सेन हुआंग ने कहा है कि बाजार की ताकतें पहले से मौजूद हैं, नए रेगुलेशन की जरूरत नहीं है। जब तक वो ऐसी चीज जारी ना करें जो बाजार पसंद करेगा,कंपनियों को सावधानी से आगे बढ़ना चाहिए।

इस बीच खबर आई है कि OpenAI नई फंडिंग जुटाने की तैयारी में है। कंपनी $1.2 ट्रिलियन वैल्यूएशन पर फंडिंग जुटाने की तैयारी में है। अनुज सिंघल ने कहा कि अभी ये कहना जल्दबाजी होगा कि AI ट्रेड खत्म हो गई है। किसी भी बड़ी बुल मार्केट में बड़े करेक्शन सामान्य होते हैं। पहले भी हमने AI के टॉप की बात की है और हर बार AI शेयरों ने नया हाई लगाया। AI अब यहां रहने और आगे बढ़ने के लिए आया है। हर गिरावट में पावर और डाटा सेंटर शेयर खरीदें। IT में अब आपको सावधान और स्टॉक स्पेसिफिक रहना होगा।

निफ्टी पर रणनीति

निफ्टी के लिए आखिरी सपोर्ट 23,000-23,100 पर है। इसके नीचे बंद हुए तो 200 WMA यानी 22,500 का रास्ता खुलेगा। इसके लिए पहला रजिस्टेंस 23,300-23,350 पर है और बड़ा रजिस्टेंस 23,400-23,500 पर है। आज हम निफ्टी पर न्यूट्रल रहेंगे और कल नया नजरिया लेंगे। कल सारे शॉर्ट्स क्लोजिंग में निपटाने का नजरिया था। आज शायद आपको 1 शॉर्ट और 1 लॉन्ग ट्रेड दोनों मिलेंगे।

बैंक निफ्टी पर रणनीति

बैंक निफ्टी का मेक ऑर ब्रेक जोन 55,100-55,500 है। अगर 55,100 के नीचे बंद हुए तो 53,500-54,000 का रिस्क है। लेकिन अगर 55,100-55,500 बचा रहा तो शॉर्ट कवरिंग संभव है। इसके लिए पहला रजिस्टेंस 56,000-56,200 पर और बड़ा रजिस्टेंस 56,500-56,700 पर है। आज कोई ट्रेड कैरी ना करें, कल नया नजरिया लेंगे।

 

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डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

GST Council Meeting: 12 सितंबर की मीटिंग टली, ब्रिक्स की वजह से अब 7 अक्टूबर को होगी

GST Council Meeting: GST Council की 12 सितंबर को होने वाली बैठक अब 7 अक्टूबर 2026 को होगी। भारत में 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन होना है। इसी वजह से GST Council की बैठक को आगे बढ़ाया गया है।

सूत्रों के मुताबिक, यह GST Council की 57वीं बैठक होगी। इससे पहले अधिकारियों की बैठक 5 और 6 अक्टूबर को होगी। GST Council की अध्यक्षता वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण करती हैं। इसमें राज्यों के वित्त मंत्री भी शामिल होते हैं।

एक साल से ज्यादा समय बाद होगी बैठक

GST Council की पिछली यानी 56वीं बैठक 3-4 सितंबर 2025 को हुई थी। उस बैठक में GST की दरों और स्लैब में बड़ा बदलाव किया गया था।

22 सितंबर 2025 से GST की नई व्यवस्था लागू हुई। इसमें मुख्य तौर पर 5% और 18% के दो स्लैब रखे गए। वहीं, बेहद महंगी और कुछ खास वस्तुओं के लिए 40% की दर रखी गई। इससे पहले GST में 5%, 12%, 18% और 28% के चार स्लैब थे।

बड़े कारोबारियों के GST रजिस्ट्रेशन पर चर्चा

7 अक्टूबर की बैठक में उन कारोबारियों के GST रजिस्ट्रेशन को आसान बनाने पर चर्चा हो सकती है, जिनकी हर महीने टैक्स क्रेडिट पास करने की राशि ₹2.5 लाख से ज्यादा है।

फिलहाल बड़े कारोबारियों के GST रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में एकरूपता नहीं है। केंद्र और अलग-अलग राज्यों में इसके लिए अलग प्रक्रिया अपनाई जाती है। इससे टैक्सपेयर्स के बीच उलझन की स्थिति बनती है।

GST रजिस्ट्रेशन कैंसिल करने की प्रक्रिया भी एजेंडे में

GST रजिस्ट्रेशन कैंसिल करने की प्रक्रिया में ऑटोमेशन और दूसरे बदलावों पर भी चर्चा हो सकती है। इसका मकसद प्रक्रिया को ज्यादा आसान और एक समान बनाना है।

छोटे और कम जोखिम वाले कारोबारियों के लिए पहले ही आसान GST रजिस्ट्रेशन व्यवस्था लागू की जा चुकी है। यह व्यवस्था 1 नवंबर 2025 से शुरू हुई थी।

इस योजना में डेटा के आधार पर GST सिस्टम जिन कारोबारियों को छोटा और कम जोखिम वाला मानता है, वे इसका विकल्प चुन सकते हैं। कारोबारी खुद भी आकलन कर सकते हैं कि उनकी मासिक आउटपुट टैक्स देनदारी ₹2.5 लाख से ज्यादा नहीं है।

GST के तहत 1.68 करोड़ कारोबार

देश में फिलहाल करीब 1.68 करोड़ कारोबार GST के तहत रजिस्टर्ड हैं। आगामी बैठक में रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को आसान बनाने से जुड़े फैसलों पर खास नजर रहेगी।

*एजेंसी से इनपुट के साथ

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September 2026: दूध से लेकर LPG सिलेंडर तक… 1 सितंबर से बदल जाएंगे ये 9 बड़े नियम! आपकी जेब पर पड़ेगा बड़ा असर

Financial Rule Changes September 2026: सितंबर का महीना शुरू होते ही आम आदमी से लेकर निवेशकों और करदाताओं के लिए कई नियम बदलने वाले हैं। सितंबर 2026 में दूध की कीमतों से लेकर डीमैट अकाउंट, एडवांस टैक्स, एलपीजी सिलेंडर बायोमेट्रिक और फ्लाइट में सफर तक से जुड़े 9 बड़े बदलाव लागू हो रहे हैं। 1 सितंबर 2026 से लागू होने वाले इन सभी 9 महत्वपूर्ण बदलावों के बारे में विस्तार से जानिए।

1. डीमैट और म्यूचुअल फंड में नॉमिनेशन के नए नियम

1 सितंबर 2026 से डीमैट अकाउंट और म्यूचुअल फंड फोलियो के लिए नॉमिनेशन के नए दिशानिर्देश लागू हो जाएंगे। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने खातों का नॉमिनेशन स्टेटस तुरंत चेक करें और आवश्यक प्रक्रिया या ऑप्ट-आउट फॉर्म समय रहते पूरा कर लें।

2. SEBI के नए ETF रूल्स

शेयर बाजार के नियामक सेबी का नया एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) फ्रेमवर्क 7 सितंबर 2026 से लागू होने जा रहा है। इसमें बेस प्राइस, प्राइस बैंड, प्री-ओपन कॉल ऑक्शन और क्लोज-आउट प्रक्रियाओं में बदलाव शामिल हैं। पहले इसे लागू करने की समयसीमा अलग थी, जिसे बढ़ाकर 7 सितंबर किया गया है।

3. FCNR(B) डिपॉजिट पर स्पेशल स्वैप विंडो बंद

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की FCNR(B) डिपॉजिट के लिए विशेष डॉलर-रुपया स्वैप सुविधा 31 अगस्त को समाप्त हो रही है। 1 सितंबर से नई FCNR(B) एफडी पर यह स्पेशल फैसिलिटी नहीं मिलेगी। हालांकि, FCNR(B) डिपॉजिट बंद नहीं हुए हैं, लेकिन अब इन पर ब्याज दरें बैंक की सामान्य दरों के आधार पर तय होंगी।

4. एडवांस टैक्स चुकाने की लास्ट डेट: 15 सितंबर

करदाताओं के लिए 15 सितंबर 2026 एडवांस टैक्स की अगली किश्त जमा करने की अंतिम तिथि है। नियमों के तहत, योग्य टैक्सपेयर्स को 15 सितंबर तक अपनी कुल एडवांस टैक्स देनदारी का कम से कम 45% हिस्सा सरकार को जमा करना अनिवार्य है।

5. छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों में बदलाव

सितंबर का आखिरी दिन यानी 30 सितंबर छोटी बचत योजनाओं में निवेश करने वालों के लिए बेहद अहम है। केंद्र सरकार अक्टूबर-दिसंबर 2026 तिमाही के लिए पीपीएफ (PPF), सुकन्या समृद्धि और एनएससी (NSC) जैसी स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स की नई ब्याज दरों की समीक्षा और घोषणा करेगी।

6. इंटरनेशनल फ्लाइट्स: बोर्डिंग पास पर स्टैंप की जरूरत खत्म

1 सितंबर 2026 से भारत से विदेश यात्रा करने वाले यात्रियों को इमिग्रेशन काउंटर पर बोर्डिंग पास पर मोहर लगवाने की बाध्यता से छूट दे दी गई है। अब यात्री अपने मोबाइल में इलेक्ट्रॉनिक बोर्डिंग पास का उपयोग कर सकते हैं या प्रिंटेड पास दिखाकर इमिग्रेशन की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।

7. LPG e-KYC की अनिवार्यता

घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन (e-KYC) कराने की समयसीमा 31 अगस्त यानी आज तक है। जिन उपभोक्ताओं ने अभी तक ई-केवाईसी पूरी नहीं की है, उन्हें 1 सितंबर के बाद रसोई गैस सिलेंडर की रीफिल बुकिंग या सब्सिडी दरों का लाभ लेने में दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है।

8. मुंबई में दूध की कीमतें बढ़ीं

मुंबई में 1 सितंबर से ताजा भैंस के दूध के थोक दामों में ₹9 प्रति लीटर की बढ़ोतरी होने वाली है। इसके बाद अब दूध की नई दरें ₹102 प्रति लीटर तक पहुंच गई हैं। यह रिवाइज्ड रेट अगले छह महीनों के लिए लागू रहेंगे।

9. मुंबई में ऑटो और टैक्सी के किराए में बढ़ोतरी

मुंबई में रोजाना सफर करने वाले यात्रियों के लिए भी झटका लगने वाला है। 1 सितंबर से मुंबई में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी के बेस फेयर में बढ़ोतरी होने वाली है, जिससे लोकल ट्रैवलिंग थोड़ी महंगी हो जाएगी।

ITR Filing Deadline: 31 अगस्त की ITR डेडलाइन छूटने पर क्या होगा? फिर कैसे भर सकते हैं रिटर्न, कितना देना पड़ेगा जुर्माना

अगर आपने अभी तक ITR दाखिल नहीं की है, तो आपके पास सिर्फ कुछ दिन बचे हैं। असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए कुछ टैक्सपेयर्स के लिए ITR फाइल करने की आखिरी तारीख 31 अगस्त 2026 है। समय पर रिटर्न दाखिल करने से लेट फीस और बकाया टैक्स पर लगने वाले ब्याज से बच सकते हैं।

अगर 31 अगस्त तक रिटर्न नहीं भर पाए, तो भी मामला खत्म नहीं होगा। आप 31 दिसंबर 2026 तक बिलेटेड ITR दाखिल कर सकते हैं। लेकिन इसके लिए लेट फीस देनी पड़ सकती है। साथ ही, कुछ मामलों में टैक्स लॉस को आगे कैरी फॉरवर्ड करने का फायदा भी छूट सकता है।

31 अगस्त की डेडलाइन उन कुछ टैक्सपेयर्स पर लागू होती है, जिन्हें ITR-3, ITR-4, ITR-5 या ITR-7 दाखिल करना है। इसमें ऐसे लोग शामिल हैं जिनकी बिजनेस या प्रोफेशन से आय है, लेकिन उनके खातों का टैक्स ऑडिट जरूरी नहीं है।

31 अगस्त की डेडलाइन छूट गई तो क्या होगा?

डेडलाइन निकल जाने का मतलब यह नहीं है कि अब ITR नहीं भर सकते। आप 31 दिसंबर 2026 तक बिलेटेड रिटर्न दाखिल कर सकते हैं। हालांकि, अगर उससे पहले आपका असेसमेंट पूरा हो जाता है, तो उसके बाद रिटर्न दाखिल नहीं किया जा सकता।

देरी से ITR भरने पर लेट फीस भी लगती है। अगर आपकी कुल आय ₹5 लाख से ज्यादा है, तो ₹5,000 तक की लेट फीस लग सकती है। वहीं ₹5 लाख तक की कुल आय वालों के लिए यह फीस ₹1,000 है।

अगर आपका टैक्स भी बकाया है, तो उस पर 1% प्रति महीने या महीने के किसी हिस्से के लिए ब्याज लग सकता है। यह ब्याज इनकम टैक्स एक्ट की धारा 234A के तहत लगता है।

क्या देर से ITR भरने पर रिफंड मिलेगा?

हां, सिर्फ डेडलाइन चूकने से आपका टैक्स रिफंड खत्म नहीं हो जाता। अगर आपको रिफंड मिलना है, तो आप 31 दिसंबर 2026 तक बिलेटेड रिटर्न दाखिल करके उसे क्लेम कर सकते हैं।

लेकिन रिटर्न दाखिल करने के बाद उसे वेरिफाई करना जरूरी है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने ई-वेरिफिकेशन के लिए 30 दिन का समय दिया है। रिटर्न वेरिफाई होने के बाद ही रिफंड की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

नुकसान को आगे एडजस्ट करने में दिक्कत

डेडलाइन के बाद ITR भरने का एक बड़ा नुकसान हो सकता है। यह लॉस को आगे कैरी फॉरवर्ड करने से जुड़ा है। मान लीजिए आपको बिजनेस, शेयर बाजार या F&O ट्रेडिंग में नुकसान हुआ है। आप इस नुकसान को आने वाले वर्षों की कमाई से एडजस्ट करके टैक्स बचा सकते हैं। लेकिन अगर आपने ITR समय पर दाखिल नहीं किया, तो कुछ तरह के नुकसान को आगे ले जाने का फायदा नहीं मिल सकता।

यानी सिर्फ लेट फीस का मामला नहीं है। देर से ITR भरने पर भविष्य में टैक्स बचाने का मौका भी जा सकता है।

ITR में गलती हो गई तो क्या करें?

अगर ITR दाखिल करने के बाद आपको कोई गलती दिखती है या कोई जानकारी छूट गई है, तो आप धारा 139(5) के तहत रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल कर सकते हैं।

असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए आम तौर पर रिवाइज्ड रिटर्न 31 मार्च 2027 तक दाखिल की जा सकती है। हालांकि, अगर उससे पहले असेसमेंट पूरा हो जाता है, तो यह सुविधा खत्म हो सकती है। रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करने पर पुरानी रिटर्न की जगह नई रिटर्न मानी जाती है। इसे भी दोबारा वेरिफाई करना पड़ता है।

लेकिन एक बात ध्यान रखें। देर से ITR भरने की वजह से जो टैक्स लाभ पहले ही खो चुके हैं, रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करने से वे वापस नहीं मिलते। इसमें कुछ तरह के लॉस को आगे कैरी फॉरवर्ड करने का फायदा भी शामिल है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

अमेरिका ने 15 दिन में 5200 भारतीय डिपोर्ट किए:इस साल हर तीसरे हफ्ते डिपोर्टेशन फ्लाइट; कनाडा में 1500 भारतीय छात्र निकाले जा सकते हैं

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दूसरे साल मिशन डिपोर्टेशन तेज कर दिया है। इस अगस्त के पहले 15 दिन में ही 5200 से अधिक भारतीयों को डिपोर्ट किया जा चुका है। इस बार की डिपोर्टेशन लिस्ट में एच-1 बी, ओ-1 और स्टूडेंट वीसा पर अमेरिका गए भारतीय भी शामिल हैं। इन प्रोफेशनल्स की भी अच्छी खासी संख्या है। इस साल हर तीसरे हफ्ते में एक डिपोर्टेशन फ्लाइट रवाना की गई। वहीं, कनाडा के अल्बर्टा प्रांतीय सरकार ने पोस्ट ग्रेजुएशन वर्क परमिट (पीजीडब्ल्यूपी) रद्द कर दिया। अब वहां पर पढ़ाई कर रहे लगभग 1500 भारतीय छात्रों पर डिपोर्टेशन का खतरा बढ़ गया है। 2025 में अमेरिका से डिपोर्ट भारतीयों की संख्या 16 साल में सबसे ज्यादा इमिग्रेशन एजेंसी (आईस) के एक अधिकारी के अनुसार अवैध प्रवासियों के खिलाफ इनकी धरपकड़ और डिपोर्टेशन दोनों की संख्या बढ़ी है। इस साल के अंत तक डिपोर्ट किए जाने वाले अवैध प्रवासियों की रिकॉर्ड संख्या होने वाली है। पिछले साल यानी 2025 में डिपोर्ट किए गए तीन हजार से ज्यादा भारतीयों में सभी ऐसे थे, जो अवैध रूप से अमेरिका में आए थे। आईस ने जून में ही 801 भारतीयों को रिमूवल ऑर्डर (वापसी आदेश) जारी किया। हालांकि, इस रिमूवल ऑर्डर से तुरंत डिपोर्टेशन नहीं होता है। इसके खिलाफ कोर्ट में अपील की जा सकती है या फिर संबंधित व्यक्ति अपनी इच्छा से अमेरिका को छोड़ सकता है। 2025 में डिपोर्ट किए गए भारतीयों की संख्या 16 साल में सबसे ज्यादा थी। ह्यूमन राइट्स फर्स्ट संगठन के अनुसार भारतीयों को ओमानी एयरवेज से डिपोर्ट कर रहे हैं। टेक्सास के हार्लिंग से 20 घंटे की फ्लाइट से नई दिल्ली भेजा जा रहा है। इस साल डिपोर्टेशन उड़ानों का इस्तेमाल किया जा रहा है। पिछले साल अमेरिका ने सैन्य विमान हरक्यूलिस से डिपोर्ट किया था। ट्रैफिक लाइट पार करने या सोशल मीडिया पोस्ट पर भी कार्रवाई वैध वीसा पर आए प्रोफेशनल्स को किसी भी उल्लंघन का आरोप लगा डिपोर्ट किया जा रहा है। अमेरिका के किसी शहर में ट्रैफिक लाइट पार करने पर भी छात्रों को डिपोर्ट करने के मामले सामने आए हैं। कुछ छात्रों द्वारा सोशल मीडिया जैसे एक्स, इंस्टाग्राम और फेसबुक पर ट्रम्प सरकार की आलोचना का दोषी मानकर डिपोर्ट कर दिया गया। टेक्सास में एच-1बी वीसा होल्डर की जॉब चली गई, जबकि उसके पास 60 दिन तक अमेरिका में रहकर नई जॉब सर्च करने का अधिकार था। इस बीच, एक रेस्तरां में पार्ट टाइम जॉब करते समय आईस ने रेड डाली। वीसा होल्डर को पकड़ लिया गया। उसे आईस ने वीसा उल्लंघन का दोषी माना और भारत डिपोर्ट कर दिया। 2025 में 3,567 भारतीय अमेरिका से डिपोर्ट हुए थे 2025 में अमेरिका ने 3,567 भारतीय नागरिकों को डिपोर्ट किया था। यह जानकारी भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने जून 2026 में दी थी। विदेश मंत्रालय ने बताया कि 2026 में जून तक 1076 भारतीयों को डिपोर्ट किया गया है। 5 फरवरी 2025 को अमेरिका ने पहली बार सैन्य विमान से 104 भारतीयों को अमृतसर भेजा था। इस दौरान कई लोगों को हथकड़ी और पैरों में बेड़ियां लगी थीं। इसकी तस्वीरें सामने आने के बाद देशभर में विवाद हुआ। संसद में भी हंगामा हुआ था। कनाडा में 1500 भारतीय छात्रों का वर्क परमिट रद्द, निकाले जा सकते हैं कनाडा की अल्बर्टा राज्य सरकार की ओर से पोस्ट ग्रेजुएशन वर्क परमिट (PGWP) रद्द किए जाने से वहां पढ़ाई कर रहे करीब 1,500 भारतीय छात्रों पर डिपोर्टेशन का खतरा बढ़ गया है। कनाडा में वर्क परमिट होने से ये सभी छात्र स्टडी-जॉब प्रोग्राम में शामिल थे। यानी ये सभी स्टडी के बाद जॉब भी कर रहे थे। अल्बर्टा के इन छात्रों ने धरना-प्रदर्शन किया। फिलहाल कनाडा इमिग्रेशन का कहना है कि कुछ समय तक ये छात्र जॉब कर सकते हैं। इन छात्रों का कहना है कि कनाडा सरकार की ओर से जॉब गारंटी को बढ़ाया जाना चाहिए। इसके लिए नए कानून बनाए जाएं। पीएम बोले- बिना वैध वीजा-वर्क परमिट वाले छात्रों को जाना होगा उधर, कनाडा के पीएम मार्क कार्नी का कहना है कि जिन छात्रों के पास यहां रहने का वैध वीसा या फिर वर्क परमिट नहीं है, उन्हें जाना ही पड़ेगा। अल्बर्टा के प्रीमियर डेनियल स्मिथ ने और भी सख्त रवैया अपनाया है। उन्होंने कहा कि स्टडी वीसा अस्थायी दस्तावेज है। विदेशी छात्र इस आधार पर कनाडा में हमेशा के लिए नहीं रह सकते हैं। हमारे कॉलेज पहले अल्बर्टा के टैक्सपेयर्स के लिए हैं। यहां पढ़ने वाले छात्रों को स्टडी पूरी करने के बाद अपने देश लौटना ही पड़ेगा। जहां तक नियमों की बात है, कनाडा आने वाले हरेक विदेशी छात्र को इन्हें मानना ही होगा। ———— ये खबर भी पढ़ें… अमेरिका में 15 हजार भारतीयों की छंटनी, नई जॉब नहीं:H-1B पर गए थे, ट्रम्प के सख्त नियम से अब डिपोर्ट का खतरा अमेरिका में 15 हजार भारतीय टेक कर्मियों की नौकरी जाने के बाद उनके सामने संकट खड़ा हो गया है। पूरी खबर पढ़ें…

Income Tax Refund: अभी तक इनकम टैक्स रिफंड नहीं आया? ये 5 कारण हो सकते हैं जिम्मेदार

Income Tax Refund: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने के बाद ज्यादातर टैक्सपेयर्स को रिफंड का इंतजार रहता है। कई लोगों के खाते में रिफंड जल्दी आ जाता है। हालांकि, कुछ लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ता है। अगर आपने भी रिटर्न भर दिया है, लेकिन अभी तक रिफंड नहीं मिला, तो इसकी कई वजहें हो सकती हैं। आइए जानते हैं कि रिफंड किन कारणों से अटक सकता है।

1. ITR अभी प्रोसेस नहीं हुआ

रिटर्न फाइल करने के बाद इनकम टैक्स विभाग उसकी जांच करता है। जब तक ITR प्रोसेस नहीं होगा, तब तक रिफंड जारी नहीं किया जाएगा। अगर पोर्टल पर ‘Return Under Processing’ दिख रहा है, तो इसका मतलब है कि विभाग अभी आपके रिटर्न की जांच कर रहा है।

2. बैंक अकाउंट में दिक्कत

रिफंड सीधे बैंक खाते में भेजा जाता है। अगर आपका बैंक अकाउंट प्री-वैलिडेट नहीं है, PAN से लिंक नहीं है या बैंक की जानकारी गलत है, तो रिफंड अटक सकता है। इसलिए ई-फाइलिंग पोर्टल पर बैंक अकाउंट का स्टेटस एक बार जरूर जांच लें।

3. ITR में कोई गलती

अगर रिटर्न में बैंक अकाउंट नंबर, IFSC, आय, TDS या दूसरी जानकारी गलत भर दी गई है, तो रिफंड में देरी हो सकती है। ऐसी स्थिति में जरूरत पड़ने पर संशोधित रिटर्न (Revised Return) दाखिल करना पड़ सकता है।

4. TDS और AIS में अंतर

अगर आपके ITR में दी गई TDS की जानकारी, Form 26AS या AIS से मेल नहीं खाती, तो इनकम टैक्स विभाग अतिरिक्त जांच कर सकता है। इससे रिफंड आने में ज्यादा समय लग सकता है।

5. रिटर्न जांच के लिए चुना गया

कुछ ITR को विभाग स्क्रूटनी या अतिरिक्त वेरिफिकेशन के लिए चुनता है। ऐसे मामलों में जांच पूरी होने के बाद ही रिफंड जारी किया जाता है। अगर विभाग की तरफ से कोई नोटिस आया है, तो उसका जवाब समय पर देना जरूरी है।

रिफंड का स्टेटस कैसे चेक करें?

  • इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉग इन करें।
  • e-File मेन्यू में जाकर Income Tax Returns पर क्लिक करें।
  • View Filed Returns विकल्प चुनें।
  • संबंधित असेसमेंट ईयर (Assessment Year) का ITR चुनें।
  • यहां आपको रिटर्न और रिफंड का मौजूदा स्टेटस दिख जाएगा।
  • अगर रिफंड जारी हो चुका है, तो उसका ट्रांजैक्शन रेफरेंस और भुगतान की जानकारी भी यहीं मिल जाएगी।

RBI का बड़ा फैसला: लोन की EMI चूकने पर नियम बदले, जानिए बैंक क्या कर सकते हैं और क्या नहीं

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Revised ITR Rules: 31 जुलाई से पहले भरा ITR और हो गई गलती? जानें रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करने का सही तरीका

How to File Revised ITR: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 जुलाई 2026 खत्म हो चुकी है। कई टैक्सपेयर्स ने आखिरी समय की जल्दबाजी में अपना रिटर्न तो जमा कर दिया, लेकिन बाद में पता चला कि कोई बैंक ब्याज, शेयर बाजार से हुआ मुनाफा या फिर कोई टैक्स सेविंग डिडक्शन जोड़ना छूट गया है।

अगर आपने भी अपने ITR में कोई गलत जानकारी भर दी है या कोई आय छिपा ली है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। इनकम टैक्स एक्ट का सेक्शन 139(5) आपको अपनी गलती सुधारने का पूरा मौका देता है। आइए जानते हैं कि धारा 139(5) के तहत रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करने के नियम, डेडलाइन और आसान तरीका क्या है।

क्या होता है ‘रिवाइज्ड रिटर्न’ (सेक्शन 139(5))?

इनकम टैक्स एक्ट की धारा 139(5) के तहत अगर किसी टैक्सपेयर को अपना ओरिजिनल ITR सबमिट करने के बाद यह अहसास होता है कि उससे कोई गलत जानकारी चली गई है या कोई ब्योरा दर्ज होने से रह गया है, तो वह एक संशोधित रिटर्न दाखिल कर सकता है।

कौन कर सकता है फाइल?: जिस भी व्यक्ति ने सेक्शन 139(1) के तहत समय पर (31 जुलाई तक या समय बीतने के बाद बिलेटेड रिटर्न (सेक्शन 139(4)) जमा किया है, वह रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल कर सकता है।

कितनी बार कर सकते हैं रिवाइज?: कानूनन आप अपने ITR को एक से अधिक बार भी रिवाइज कर सकते हैं, बशर्ते वह डेडलाइन के भीतर हो।

रिवाइज्ड ITR दाखिल करने की अंतिम तारीख

वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 दिसंबर 2026 है। अगर इनकम टैक्स विभाग द्वारा आपके रिटर्न का एसेसमेंट (सेक्शन 144) पहले ही पूरा कर लिया जाता है, तो एसेसमेंट पूरा होने के बाद या 31 दिसंबर 2026 जो भी पहले हो तक ही आप इसे रिवाइज कर सकेंगे।

रिवाइज्ड ITR फाइल करते समय ध्यान रखें ये 4 अहम बातें

1- ओरिजिनल ITR का पावती नंबर: रिवाइज्ड रिटर्न भरते समय आपको अपने पुराने ITR का पावती नंबर और फाइल करने की तारीख दर्ज करनी होगी।

2- सही ITR फॉर्म का चयन: आप जिस फॉर्म (ITR-1, ITR-2 आदि) में पहले रिटर्न दाखिल कर चुके हैं, उसी फॉर्म का उपयोग करें, जब तक कि आपकी आय के स्रोतों में बदलाव न हुआ हो।

3- AIS और Form 26AS से मिलान: नई फाइलिंग से पहले अपने Annual Information Statement (AIS) को दोबारा ध्यान से जांचें ताकि इस बार कोई ब्याज, डिविडेंड या कैपिटल गेन छूट न जाए।

4- ई-वेरिफिकेशन अनिवार्य: ओरिजिनल ITR की तरह ही रिवाइज्ड ITR को भी सबमिट करने के बाद 30 दिनों के भीतर e-Verify करना अनिवार्य है। बिना वेरिफिकेशन के आपका रिवाइज्ड रिटर्न अमान्य माना जाएगा।

ई-फाइलिंग पोर्टल पर रिवाइज्ड ITR भरने का स्टेप-बाय-स्टेप तरीका

  • स्टेप 1: इनकम टैक्स विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल (eportal.incometax.gov.in) पर जाएं और अपने PAN/Aadhaar तथा पासवर्ड से लॉगिन करें।
  • स्टेप 2: ‘e-File’ टैब में जाएं > ‘Income Tax Returns’ > ‘File Income Tax Return’ पर क्लिक करें।
  • स्टेप 3: Assessment Year 2026-27 चुनें और Filing Type में ‘Revised Return u/s 139(5)’ सिलेक्ट करें।
  • स्टेप 4: स्क्रीन पर मांगे जाने अनुसार अपने ओरिजिनल ITR का Acknowledgement Number और Filing Date दर्ज करें।
  • स्टेप 5: अब फॉर्म में जहाँ भी गलती हुई थी (जैसे आय बढ़ाना, छूटी हुई डिडक्शन जोड़ना या बैंक डिटेल सही करना), उसे ठीक करें।
  • स्टेप 6: टैक्स लायबिलिटी की दोबारा गणना करें और अगर कोई अतिरिक्त टैक्स बनता है, तो उसका भुगतान करें।
  • स्टेप 7: रिटर्न सबमिट करें और तुरंत Aadhaar OTP या नेट बैंकिंग के जरिए इसे e-Verify कर दें।