ITR Filing Deadline: 31 अगस्त की ITR डेडलाइन छूटने पर क्या होगा? फिर कैसे भर सकते हैं रिटर्न, कितना देना पड़ेगा जुर्माना

अगर आपने अभी तक ITR दाखिल नहीं की है, तो आपके पास सिर्फ कुछ दिन बचे हैं। असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए कुछ टैक्सपेयर्स के लिए ITR फाइल करने की आखिरी तारीख 31 अगस्त 2026 है। समय पर रिटर्न दाखिल करने से लेट फीस और बकाया टैक्स पर लगने वाले ब्याज से बच सकते हैं।

अगर 31 अगस्त तक रिटर्न नहीं भर पाए, तो भी मामला खत्म नहीं होगा। आप 31 दिसंबर 2026 तक बिलेटेड ITR दाखिल कर सकते हैं। लेकिन इसके लिए लेट फीस देनी पड़ सकती है। साथ ही, कुछ मामलों में टैक्स लॉस को आगे कैरी फॉरवर्ड करने का फायदा भी छूट सकता है।

31 अगस्त की डेडलाइन उन कुछ टैक्सपेयर्स पर लागू होती है, जिन्हें ITR-3, ITR-4, ITR-5 या ITR-7 दाखिल करना है। इसमें ऐसे लोग शामिल हैं जिनकी बिजनेस या प्रोफेशन से आय है, लेकिन उनके खातों का टैक्स ऑडिट जरूरी नहीं है।

31 अगस्त की डेडलाइन छूट गई तो क्या होगा?

डेडलाइन निकल जाने का मतलब यह नहीं है कि अब ITR नहीं भर सकते। आप 31 दिसंबर 2026 तक बिलेटेड रिटर्न दाखिल कर सकते हैं। हालांकि, अगर उससे पहले आपका असेसमेंट पूरा हो जाता है, तो उसके बाद रिटर्न दाखिल नहीं किया जा सकता।

देरी से ITR भरने पर लेट फीस भी लगती है। अगर आपकी कुल आय ₹5 लाख से ज्यादा है, तो ₹5,000 तक की लेट फीस लग सकती है। वहीं ₹5 लाख तक की कुल आय वालों के लिए यह फीस ₹1,000 है।

अगर आपका टैक्स भी बकाया है, तो उस पर 1% प्रति महीने या महीने के किसी हिस्से के लिए ब्याज लग सकता है। यह ब्याज इनकम टैक्स एक्ट की धारा 234A के तहत लगता है।

क्या देर से ITR भरने पर रिफंड मिलेगा?

हां, सिर्फ डेडलाइन चूकने से आपका टैक्स रिफंड खत्म नहीं हो जाता। अगर आपको रिफंड मिलना है, तो आप 31 दिसंबर 2026 तक बिलेटेड रिटर्न दाखिल करके उसे क्लेम कर सकते हैं।

लेकिन रिटर्न दाखिल करने के बाद उसे वेरिफाई करना जरूरी है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने ई-वेरिफिकेशन के लिए 30 दिन का समय दिया है। रिटर्न वेरिफाई होने के बाद ही रिफंड की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

नुकसान को आगे एडजस्ट करने में दिक्कत

डेडलाइन के बाद ITR भरने का एक बड़ा नुकसान हो सकता है। यह लॉस को आगे कैरी फॉरवर्ड करने से जुड़ा है। मान लीजिए आपको बिजनेस, शेयर बाजार या F&O ट्रेडिंग में नुकसान हुआ है। आप इस नुकसान को आने वाले वर्षों की कमाई से एडजस्ट करके टैक्स बचा सकते हैं। लेकिन अगर आपने ITR समय पर दाखिल नहीं किया, तो कुछ तरह के नुकसान को आगे ले जाने का फायदा नहीं मिल सकता।

यानी सिर्फ लेट फीस का मामला नहीं है। देर से ITR भरने पर भविष्य में टैक्स बचाने का मौका भी जा सकता है।

ITR में गलती हो गई तो क्या करें?

अगर ITR दाखिल करने के बाद आपको कोई गलती दिखती है या कोई जानकारी छूट गई है, तो आप धारा 139(5) के तहत रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल कर सकते हैं।

असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए आम तौर पर रिवाइज्ड रिटर्न 31 मार्च 2027 तक दाखिल की जा सकती है। हालांकि, अगर उससे पहले असेसमेंट पूरा हो जाता है, तो यह सुविधा खत्म हो सकती है। रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करने पर पुरानी रिटर्न की जगह नई रिटर्न मानी जाती है। इसे भी दोबारा वेरिफाई करना पड़ता है।

लेकिन एक बात ध्यान रखें। देर से ITR भरने की वजह से जो टैक्स लाभ पहले ही खो चुके हैं, रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करने से वे वापस नहीं मिलते। इसमें कुछ तरह के लॉस को आगे कैरी फॉरवर्ड करने का फायदा भी शामिल है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Revised ITR Rules: 31 जुलाई से पहले भरा ITR और हो गई गलती? जानें रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करने का सही तरीका

How to File Revised ITR: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 जुलाई 2026 खत्म हो चुकी है। कई टैक्सपेयर्स ने आखिरी समय की जल्दबाजी में अपना रिटर्न तो जमा कर दिया, लेकिन बाद में पता चला कि कोई बैंक ब्याज, शेयर बाजार से हुआ मुनाफा या फिर कोई टैक्स सेविंग डिडक्शन जोड़ना छूट गया है।

अगर आपने भी अपने ITR में कोई गलत जानकारी भर दी है या कोई आय छिपा ली है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। इनकम टैक्स एक्ट का सेक्शन 139(5) आपको अपनी गलती सुधारने का पूरा मौका देता है। आइए जानते हैं कि धारा 139(5) के तहत रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करने के नियम, डेडलाइन और आसान तरीका क्या है।

क्या होता है ‘रिवाइज्ड रिटर्न’ (सेक्शन 139(5))?

इनकम टैक्स एक्ट की धारा 139(5) के तहत अगर किसी टैक्सपेयर को अपना ओरिजिनल ITR सबमिट करने के बाद यह अहसास होता है कि उससे कोई गलत जानकारी चली गई है या कोई ब्योरा दर्ज होने से रह गया है, तो वह एक संशोधित रिटर्न दाखिल कर सकता है।

कौन कर सकता है फाइल?: जिस भी व्यक्ति ने सेक्शन 139(1) के तहत समय पर (31 जुलाई तक या समय बीतने के बाद बिलेटेड रिटर्न (सेक्शन 139(4)) जमा किया है, वह रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल कर सकता है।

कितनी बार कर सकते हैं रिवाइज?: कानूनन आप अपने ITR को एक से अधिक बार भी रिवाइज कर सकते हैं, बशर्ते वह डेडलाइन के भीतर हो।

रिवाइज्ड ITR दाखिल करने की अंतिम तारीख

वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 दिसंबर 2026 है। अगर इनकम टैक्स विभाग द्वारा आपके रिटर्न का एसेसमेंट (सेक्शन 144) पहले ही पूरा कर लिया जाता है, तो एसेसमेंट पूरा होने के बाद या 31 दिसंबर 2026 जो भी पहले हो तक ही आप इसे रिवाइज कर सकेंगे।

रिवाइज्ड ITR फाइल करते समय ध्यान रखें ये 4 अहम बातें

1- ओरिजिनल ITR का पावती नंबर: रिवाइज्ड रिटर्न भरते समय आपको अपने पुराने ITR का पावती नंबर और फाइल करने की तारीख दर्ज करनी होगी।

2- सही ITR फॉर्म का चयन: आप जिस फॉर्म (ITR-1, ITR-2 आदि) में पहले रिटर्न दाखिल कर चुके हैं, उसी फॉर्म का उपयोग करें, जब तक कि आपकी आय के स्रोतों में बदलाव न हुआ हो।

3- AIS और Form 26AS से मिलान: नई फाइलिंग से पहले अपने Annual Information Statement (AIS) को दोबारा ध्यान से जांचें ताकि इस बार कोई ब्याज, डिविडेंड या कैपिटल गेन छूट न जाए।

4- ई-वेरिफिकेशन अनिवार्य: ओरिजिनल ITR की तरह ही रिवाइज्ड ITR को भी सबमिट करने के बाद 30 दिनों के भीतर e-Verify करना अनिवार्य है। बिना वेरिफिकेशन के आपका रिवाइज्ड रिटर्न अमान्य माना जाएगा।

ई-फाइलिंग पोर्टल पर रिवाइज्ड ITR भरने का स्टेप-बाय-स्टेप तरीका

  • स्टेप 1: इनकम टैक्स विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल (eportal.incometax.gov.in) पर जाएं और अपने PAN/Aadhaar तथा पासवर्ड से लॉगिन करें।
  • स्टेप 2: ‘e-File’ टैब में जाएं > ‘Income Tax Returns’ > ‘File Income Tax Return’ पर क्लिक करें।
  • स्टेप 3: Assessment Year 2026-27 चुनें और Filing Type में ‘Revised Return u/s 139(5)’ सिलेक्ट करें।
  • स्टेप 4: स्क्रीन पर मांगे जाने अनुसार अपने ओरिजिनल ITR का Acknowledgement Number और Filing Date दर्ज करें।
  • स्टेप 5: अब फॉर्म में जहाँ भी गलती हुई थी (जैसे आय बढ़ाना, छूटी हुई डिडक्शन जोड़ना या बैंक डिटेल सही करना), उसे ठीक करें।
  • स्टेप 6: टैक्स लायबिलिटी की दोबारा गणना करें और अगर कोई अतिरिक्त टैक्स बनता है, तो उसका भुगतान करें।
  • स्टेप 7: रिटर्न सबमिट करें और तुरंत Aadhaar OTP या नेट बैंकिंग के जरिए इसे e-Verify कर दें।

ITR Filing 2026 Deadline: 31 जुलाई से पहले ऐसे भरें आयकर रिटर्न, पेनल्टी से बचें

income tax

अगर आपने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए अपना आयकर रिटर्न (ITR) अभी तक दाखिल नहीं किया है, तो तुरंत सावधान हो जाएं! व्यक्तिगत करदाताओं और वेतनभोगियों के लिए बिना  किसी लेट फीस के ITR फाइल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 है।

 

अंतिम समय में इनकम टैक्स पोर्टल पर ट्रैफिक का दबाव बढ़ने से सर्वर स्लो होने या पेमेंट अटकने की समस्या हो सकती है। यदि आप 31 जुलाई की समय सीमा चूक जाते हैं, तो आपको  भारी लेट फीस, ब्याज और कई वित्तीय नुकसान उठाने पड़ सकते हैं।
 

धारा 234F के तहत पेनल्टी (Late Fee Slabs) 

आयकर कानून की धारा 234F के अनुसार, नियत तारीख के बाद रिटर्न (Belated Return) दाखिल करने पर निम्नलिखित जुर्माना लागू होता है:

 

कुल वार्षिक आय (Total Income) 31 जुलाई के बाद ITR फाइल करने पर लेट फीस

2.5 लाख तक रुपए (मूल छूट सीमा) कोई पेनल्टी नहीं

2.5 लाख से 5 लाख रुपए तक 1,000 रुपए अधिकतम लेट फीस

5 लाख रुपए से अधिक 5,000 रुपए लेट फीस

 

समय पर ITR न भरने के 4 बड़े नुकसान

1. धारा 234A के तहत ब्याज : यदि आपका कोई टैक्स बकाया है, तो समय सीमा समाप्त होने के बाद आपको बकाए टैक्स पर 1% प्रति माह की दर से ब्याज देना होगा। 
 

2. नुकसान (Losses) को कैरी फॉरवर्ड न कर पाना : शेयर बाजार, फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) या बिजनेस से हुए नुकसान को अगले वर्षों के मुनाफे से एडजस्ट (Carry Forward) करने का विकल्प समाप्त हो जाता है।
 

3. ओल्ड टैक्स रिजीम का विकल्प बंद: यदि आप पुरानी कर व्यवस्था (Old Tax Regime) चुनना चाहते थे, तो समय सीमा बीत जाने के बाद आप केवल न्यू टैक्स  रिजीम (New Tax Regime) के तहत ही बेलैटेड रिटर्न भर पाएंगे।

4. रिफंड में देरी : यदि आपका TDS कटा है और आप रिफंड के हकदार हैं, तो देर से फाइल करने पर आपका रिफंड अटक सकता है या उसमें काफी देरी हो सकती है।

 

पोर्टल पर ऑनलाइन ITR फाइल करने की चरणबद्ध प्रक्रिया

समय सीमा समाप्त होने से पहले घर बैठे आधिकारिक पोर्टल (incometax.gov.in) पर आसानी से ITR फाइल करने के लिए इन स्टेप्स का पालन करें:
 

1.ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉगिन करें: PAN और पासवर्ड तैयार रखें।

आधिकारिक वेबसाइट incometax.gov.in पर जाएं। अपनी यूजर आईडी (PAN) और पासवर्ड का उपयोग करके लॉगिन करें।
 

2.File Income Tax Return चुनें:

लॉगिन के बाद मुख्य डैशबोर्ड पर e-File > Income Tax Returns > File Income Tax Return विकल्प पर क्लिक करें।
 

3.आकलन वर्ष (Assessment Year) का चयन करें:

आकलन वर्ष में AY 2026-27 का चयन करें। इसके बाद ऑनलाइन फाइलिंग (Online Mode) चुनें और 'Start New Filing' पर क्लिक करें।
 

4.करदाता स्थिति एवं सही ITR फॉर्म का चुनाव करें:

अपनी स्थिति Individual चुनें। यदि आपकी केवल वेतन, एक मकान संपत्ति या ब्याज से आय है, तो ITR-1 (Sahaj) चुनें।
 

5.AIS और Form 26AS से आंकड़ों का मिलान करें:

अपने फॉर्म 16, AIS (Annual Information Statement) और Form 26AS के आंकड़ों की जांच करें। यदि कोई टैक्स बकाया दिखता है, तो e-Pay Tax  के माध्यम से तुरंत भुगतान करें।
 

6.समीक्षा करें और e-Verify पूरा करें:

अपनी सभी जानकारियों की दोबारा समीक्षा करके Submit पर क्लिक करें। इसके बाद अपने आधार OTP या नेट बैंकिंग का उपयोग करके e-Verification प्रक्रिया तुरंत पूरी  करें (बिना ई-वेरिफिकेशन के ITR अमान्य माना जाता है)।
 

ITR सबमिट करने से पहले अंतिम चेकलिस्ट 

– AIS/TIS की जांच: अपने पोर्टल पर जाकर AIS जरूर डाउनलोड करें और उसमें दर्ज ब्याज, डिविडेंड या शेयर ट्रेडिंग की जानकारी अपने रिकॉर्ड से मिलाएं।

– बैंक खाता वैलिडेट करें: सुनिश्चित करें कि आपका बैंक खाता पोर्टल पर पूर्व-सत्यापित (Pre-validated) है ताकि रिफंड सीधे आपके खाते में आ सके।

– ई-वेरिफिकेशन न भूलें: ITR फाइल करने के 30 दिनों के भीतर ई-वेरिफिकेशन करना अनिवार्य है।

सलाह: यदि पोर्टल पर अत्यधिक लोड के कारण तकनीकी समस्या आए, तो स्क्रीनशॉट लेकर रखें और थोड़ा रुककर पुनः प्रयास करें। 31 जुलाई की मध्यरात्रि से पहले अपनी प्रक्रिया पूरी कर लें। 

 

आयकर रिटर्न (ITR) भरते समय सही फॉर्म चुनना सबसे महत्वपूर्ण चरण है। गलत फॉर्म चुनने पर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट आपके रिटर्न को 'Defective Return' (धारा  139(9)) करार दे सकता है। 

व्यक्तिगत करदाताओं (Individuals) के लिए ITR-1 (Sahaj) और ITR-2 सबसे आम फॉर्म हैं। 

ITR-1 (Sahaj) और ITR-2 में मुख्य अंतर 

विषय ITR-1 (Sahaj) ITR-2

पात्रता (Eligibility) केवल भारत के निवासी (Resident Individuals) निवासी (Resident), अनिवासी (NRI) और HUF

कुल आय सीमा ₹50 लाख तक ₹50 लाख से अधिक (कोई सीमा नहीं)

मकान संपत्ति (House Property) केवल 1 मकान संपत्ति से आय 1 से अधिक मकान संपत्तियों से आय

कैपिटल गेन्स (शेयर, MF, प्रॉपर्टी) केवल Section 112A के तहत ₹1.25 लाख तक LTCG सभी प्रकार के Capital Gains (STCG/LTCG,  प्रॉपर्टी, सोना आदि)

विदेशी संपत्ति / आय (Foreign Assets) अनुमति नहीं है विदेश में संपत्ति, शेयर (RSUs/ESOPs) या आय होने पर अनिवार्य

कृषि आय (Agricultural Income) ₹5,000 तक ₹5,000 से अधिक होने पर

डायरेक्टर / अनलिस्टेड शेयर कंपनी में डायरेक्टर या अनलिस्टेड शेयरधारक फाइल नहीं कर सकते कंपनी के डायरेक्टर या अनलिस्टेड शेयरधारक फाइल कर सकते हैं

आपके लिए कौन सा फॉर्म सही है?

1. आपको ITR-1 (Sahaj) चुनना चाहिए यदि:
 

आपकी कुल वार्षिक आय ₹50 लाख तक है। 

आपकी आय का मुख्य स्रोत वेतन (Salary), पेंशन (Pension) या ब्याज/डिविडेंड (Other Sources) है। 

आपके पास केवल 1 मकान संपत्ति (Single House Property) है। 

आपकी कृषि आय (Agricultural Income) ₹5,000 या उससे कम है। 

आपने शेयर या म्यूचुअल फंड बेचे हैं, लेकिन आपका कुल लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (Section 112A u/s) ₹1.25 लाख के अंदर है और कोई अन्य कैपिटल गेन  या लॉस नहीं है। 

2. आपको ITR-2 चुनना चाहिए यदि: 

आपकी कुल वार्षिक आय ₹50 लाख से अधिक है। 

आपने शेयर, म्यूचुअल फंड, जमीन, मकान या सोना बेचा है और आपको Short-Term Capital Gain (STCG) या अधिक LTCG हुआ है। 

आपके पास 2 या उससे अधिक मकान हैं जिनसे किराया या आय आती है। 

आपकी विदेशी आय है या विदेश में कोई बैंक खाता/कंपनी शेयर (जैसे MNCs से मिले US Stocks/ESOPs) हैं। 

आपकी कृषि आय ₹5,000 से अधिक है। 

आप किसी कंपनी में डायरेक्टर (Director) हैं या आपके पास अनलिस्टेड कंपनियों के शेयर हैं। 

आपका आवासीय दर्जा NRI (Non-Resident Indian) या RNOR है। 

ध्यान दें: बिजनेस या प्रोफेशन से आय (जैसे फ्रीलांसिंग, कंसल्टेंसी, ट्रेडिंग या बिज़नेस प्रॉफिट) कमाने वाले व्यक्ति ITR-1 या ITR-2 का उपयोग नहीं कर सकते। उनके लिए ITR-3  या ITR-4 लागू होता है। 

 

 

आयकर पोर्टल (Income Tax Portal) से AIS (Annual Information Statement) डाउनलोड करना और उसका Form 16 से मिलान  (Reconciliation) करना आयकर रिटर्न (ITR) फाइल करने का सबसे महत्वपूर्ण चरण है। इससे आपके ITR में किसी प्रकार के मिसमैच की संभावना खत्म हो जाती है।
 

1. AIS कैसे डाउनलोड करें? (Step-by-Step Guide) 
 

1.इ-फाइलिंग पोर्टल पर लॉगिन करें:

आयकर विभाग की आधिकारिक वेबसाइट incometax.gov.in पर जाएं। अपने PAN (यूजर ID) और पासवर्ड से लॉगिन करें।

2.Services मेनू में जाएं:

लॉगिन के बाद मुख्य मेनू बार पर Services टैब पर क्लिक करें और ड्रॉपडाउन से Annual Information Statement (AIS) चुनें।

3.AIS पोर्टल पर रिडायरेक्ट हों:

स्क्रीन पर एक पॉप-अप मैसेज आएगा, वहां Proceed पर क्लिक करें। यह आपको एक नए Compliance Portal पर ले जाएगा।

4.असेसमेंट ईयर और फाइल फॉर्मेट चुनें:

Compliance Portal पर AIS टैब पर क्लिक करें। ऊपर से सही असेसमेंट ईयर (जैसे AY 2026-27) चुनें।

5.PDF या Excel में डाउनलोड करें:PDF खोलने के लिए पासवर्ड डालें.

आप पूरे विवरण को PDF या JSON/Excel फॉर्मेट में डाउनलोड करने के लिए Download बटन पर क्लिक करें।
 

PDF खोलने का पासवर्ड Format: 

AIS की PDF फाइल पासवर्ड प्रोटेक्टेड होती है। इसका पासवर्ड आपका PAN (स्मॉल लेटर्स में) + आपकी जन्मतिथि (DDMMYYYY) होता है। 

उदाहरण: यदि आपका PAN ABCDE1234F और DOB 15/08/1990 है, तो पासवर्ड होगा: abcde1234f15081990।

2. Form 16 और AIS का मिलान (Reconciliation) कैसे करें? 

Form 16 आपके एम्प्लॉयर (कंपनी) द्वारा दी गई सैलरी और काटे गए TDS का प्रमाण है, जबकि AIS में आपकी सैलरी के अलावा बैंक ब्याज, डिविडेंड, शेयर ट्रेडिंग आदि की भी  जानकारी होती है। 

दोनों का मिलान करते समय निम्नलिखित बिंदुओं को क्रमानुसार जांचें:

1. ग्रॉस सैलरी (Gross Salary) का मिलान 

Form 16 (Part B): अपनी कुल ग्रॉस सैलरी और एम्प्लॉयर द्वारा काटे गए कुल TDS की जांच करें। 

AIS (Part B – TDS/TCS section): सैलरी कोड (192) के सामने दिख रही रकम और काटे गए TDS का मिलान Form 16 के Part A से  करें। 

ध्यान दें: यदि आपने साल के दौरान नौकरी बदली है, तो दोनों एम्प्लॉयर्स के Form 16 की कुल रकम का जोड़ AIS की कुल सैलरी से मिलना चाहिए। 

2. TDS और Form 26AS से क्रॉस-चेक 

Form 16 में दर्ज कुल TDS कटौती, AIS के TDS/TCS टैब और आपके Form 26AS में दिख रहे टैक्स क्रेडिट से पूरी तरह मैच होनी चाहिए। 

3. अन्य आय (Other Income) की पहचान 

AIS में सैलरी के अलावा कई ऐसी आय दर्ज होती हैं जो Form 16 में नहीं होतीं: 

बैंक ब्याज (Savings/FD Interest): पासबुक और बैंक से मिले इंटरेस्ट सर्टिफिकेट से इसका मिलान करें। 

डिविडेंड (Dividend Income): शेयर या म्यूचुअल फंड से मिले डिविडेंड को क्रॉस-चेक करें। 

कैपिटल गेन्स (Shares/MF Sale): शेयर या प्रॉपर्टी बिक्री से हुई कमाई AIS के SFT Information में दिखती है।
 

यदि AIS में गलत जानकारी या अंतर दिखाई दे तो क्या करें? 
 

अगर AIS में कोई ऐसी इनकम दर्ज दिख रही है जो आपकी नहीं है या कोई आंकड़ा दो बार (Duplicate) दर्ज हो गया है, तो आप पोर्टल पर Feedback दे सकते हैं: 

1. AIS Portal पर उस गलत एंट्री/लाइन आइटम पर क्लिक करें। 

2. Optional / Feedback बटन चुनें।

3. उपयुक्त विकल्प चुनें (जैसे: Information is not correct, Income is not taxable, या Information relates to  other PAN/Year)।

4. इसे सबमिट कर दें। सबमिट करने के बाद आपकी TIS (Taxpayer Information Summary) अपने आप अपडेट हो जाएगी।

ITR Filing 2026: आखिरी मौके पर फाइल कर रहे रिटर्न? ये चीजें जरूर चेक करें, वरना बढ़ जाएगा नोटिस और रिफंड में देरी का खतरा

ITR Filing 2026: 31 जुलाई ITR फाइल करने की आखिरी तारीख है। ऐसे में ज्यादातर लोग जल्दबाजी में रिटर्न भर रहे हैं। लेकिन सिर्फ रिटर्न फाइल करना काफी नहीं है। ‘Submit’ बटन दबाने से पहले अगर कुछ जरूरी बातें चेक कर लें, तो बाद में रिफंड अटकने, नोटिस आने या रिटर्न दोबारा भरने जैसी परेशानी से बच सकते हैं।

सही ITR फॉर्म चुना है या नहीं?

सबसे पहले देख लें कि आपने अपनी कमाई के हिसाब से सही ITR फॉर्म चुना है या नहीं। गलत फॉर्म भरने पर आपका रिटर्न डिफेक्टिव माना जा सकता है। इसके साथ ही PAN, आधार, बैंक अकाउंट, मोबाइल नंबर और ईमेल जैसी जानकारी भी एक बार जरूर मिला लें।

ClearTax की टैक्स एक्सपर्ट चांदनी आनंदन कहती हैं कि रिटर्न सबमिट करने से पहले ITR फॉर्म, PAN, बैंक अकाउंट, आय, TDS, AIS, Form 26AS, डिडक्शन और टैक्स चालान जैसी सभी जानकारियां एक बार जरूर जांच लें। इससे बाद में परेशानी नहीं होगी।

AIS, TIS और Form 26AS से मिलान करें

रिटर्न भरने से पहले AIS, TIS और Form 26AS में दर्ज जानकारी का ITR से मिलान जरूर करें।

आपकी सैलरी, बैंक का ब्याज, कैपिटल गेन, शेयरों के सौदे और TDS का रिकॉर्ड इन तीनों में सही होना चाहिए। अगर कहीं कोई फर्क दिखे, तो पहले उसे ठीक करें। उसके बाद ही रिटर्न फाइल करें।

सिर्फ प्री-फिल्ड डेटा पर भरोसा न करें

ITR में पहले से भरी जानकारी देखकर निश्चिंत न हो जाएं। AQUILAW के लीड कंसल्टेंट राकेश गोयल का कहना है कि डिडक्शन का दावा तभी करें, जब उसके दस्तावेज आपके पास हों। कैपिटल गेन की सही कैलकुलेशन करें। अगर कोई टैक्स-फ्री आय है, तो उसे भी जरूर दिखाएं। क्योंकि कानून के हिसाब से सही रिटर्न भरने की जिम्मेदारी आपकी ही होती है, सिस्टम की नहीं।

ई-वेरिफिकेशन करना बिल्कुल न भूलें

कई लोग ‘Submit’ पर क्लिक करते ही मान लेते हैं कि काम पूरा हो गया। जबकि ऐसा नहीं है। ITR तभी पूरा माना जाता है, जब तय समय के भीतर उसका ई-वेरिफिकेशन भी कर दिया जाए। राकेश गोयल के मुताबिक, अगर आपने ई-वेरिफिकेशन नहीं किया, तो आयकर विभाग आमतौर पर उसे ऐसे मानता है जैसे रिटर्न कभी फाइल ही नहीं किया गया।

इसलिए ‘Submit’ दबाने से पहले दो-तीन मिनट जरूर निकालें। सारी जानकारी एक बार फिर देख लें। इतनी सी सावधानी आपको बाद की बड़ी परेशानी से बचा सकती है।

आपके PF का पैसा EPFO कहां निवेश करता है, आपको तगड़ा ब्याज कैसे मिलता है? समझिए पूरा हिसाब

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

ITR Deadline Alert: 31 जुलाई के बाद ITR भरा तो लगेगा जुर्माना! जानिए लेट रिटर्न दाखिल करने पर कितना होगा नुकसान

ITR Filing Deadline AY 2026-27: एसेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की आखिरी तारीख में सिर्फ 4 दिन बचे हैं। करदाताओं के लिए 31 जुलाई 2026 की डेडलाइन बेहद करीब है। टैक्स एक्सपर्ट्स की सलाह है कि आखिरी वक्त के रश और ई-फाइलिंग पोर्टल के संभावित सर्वर डाउन या तकनीकी खराबी से बचने के लिए तुरंत अपना रिटर्न दाखिल कर दें।

आयकर विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 26 जुलाई 2026 तक 4.10 करोड़ से अधिक ITR दाखिल किए जा चुके हैं, जिनमें से 3.85 करोड़ का ई-वेरिफिकेशन पूरा हो चुका है। आइए आपको बताते हैं 31 जुलाई की डेडलाइन मिस करने पर आपको किन-किन समस्याओं का सामना करना पड़ सकता हैं।

क्या 31 जुलाई के बाद भी भरा जा सकता है ITR?

हां, अगर आप 31 जुलाई की डेडलाइन मिस कर देते हैं, तो भी आप अपना रिटर्न दाखिल कर सकते हैं। इसे बिलेटेड आईटीआर कहा जाता है। AY 2026-27 के लिए बिलेटेड रिटर्न दाखिल करने की अंतिम सीमा 31 दिसंबर 2026 तक है। हालांकि, 31 जुलाई के बाद रिटर्न दाखिल करने पर आपको भारी जुर्माना, ब्याज और कई टैक्स लाभों से हाथ धोना पड़ सकता है।

लेट ITR फाइल करने पर कितना लगेगा जुर्माना?

आयकर अधिनियम की सेक्शन 234F के तहत समय सीमा खत्म होने के बाद रिटर्न भरने पर लेट फीस वसूल की जाती है:

₹5 लाख से अधिक आय पर: अगर आपकी कुल आय ₹5 लाख से अधिक है, तो आपको ₹5,000 का जुर्माना देना होगा।

₹5 लाख तक की आय पर: अगर कुल आय ₹5 लाख तक है, तो लेट फीस ₹1,000 होगी।

बेसिक छूट सीमा से कम आय पर: अगर आपकी आय टैक्स फ्री लिमिट से कम है और रिटर्न भरना अनिवार्य नहीं था, तो कोई लेट फीस नहीं लगेगी।

बकाया टैक्स पर लगेगा भारी ब्याज

31 जुलाई तक अगर आपका कोई टैक्स बकाया रह जाता है, तो धारा 234A के तहत हर महीने या महीने के हिस्से पर 1% की दर से ब्याज वसूला जाएगा। यह ब्याज तब तक जुड़ता रहेगा जब तक आप अपना रिटर्न और बकाया टैक्स जमा नहीं कर देते।

घाटे को आगे कैरी फॉरवर्ड करने का अधिकार खत्म

31 जुलाई की डेडलाइन मिस करने का सबसे बड़ा नुकसान उन टैक्सपेयर्स को होता है जिन्हें कैपिटल गेन या बिजनेस में नुकसान हुआ है। समय पर ITR फाइल न करने पर आप इस नुकसान को भविष्य के सालों में अपने मुनाफे से सेट-ऑफ करने के लिए आगे नहीं ले जा सकते।

टैक्स रिफंड मिलने में होगी देरी

अगर आपका टीडीएस अधिक कट गया है और आप टैक्स रिफंड के हकदार हैं, तो देरी से रिटर्न भरने पर रिफंड की प्रक्रिया और भुगतान में काफी वक्त लग सकता है। जितना जल्दी रिटर्न फाइल और वेरिफाई होगा, रिफंड उतनी ही तेजी से आपके बैंक खाते में आएगा।

किसके लिए कौन-सी डेडलाइन है लागू?

  • 31 जुलाई 2026: वेतनभोगी कर्मचारियों, ITR-1 और ITR-2 फाइल करने वाले टैक्सपेयर्स तथा ₹1.25 लाख तक के LTCG वाले व्यक्तियों के लिए।
  • 31 अगस्त 2026: ऐसे कारोबारी और पेशेवर जिनकी खातों की टैक्स ऑडिट की आवश्यकता नहीं होती (ITR-3 / ITR-4)।
  • 30 सितंबर 2026: टैक्स ऑडिट कराने की अंतिम तिथि।
  • 31 अक्टूबर 2026: ऐसे टैक्सपेयर्स जिनके खातों का ऑडिट होना अनिवार्य है।

पीएफ निकालने पर कब नहीं देना पड़ता टैक्स? जानिए 5 साल वाला नियम और TDS का पूरा गणित

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Retirement Planning: रिटायरमेंट के बाद नियमित कमाई चाहिए? जानिए आपके लिए कौन-सी स्कीम बेस्ट

Retirement Planning: रिटायरमेंट प्लानिंग अब सिर्फ बचत तक सीमित नहीं रह गई है। बढ़ती उम्र, महंगाई और इलाज का खर्च देखते हुए समय रहते बड़ा रिटायरमेंट फंड बनाना जरूरी हो गया है। नौकरीपेशा लोगों को EPF का फायदा मिलता है। लेकिन इसके अलावा भी कई सरकारी और मार्केट से जुड़ी स्कीम हैं, जो रिटायरमेंट के बाद नियमित आय का सहारा बन सकती हैं।

NPS (National Pension System)

NPS सरकार की रिटायरमेंट स्कीम है। इसे PFRDA रेगुलेट करता है। इसमें नौकरीपेशा और स्वरोजगार करने वाले, दोनों निवेश कर सकते हैं।

इसमें पैसा इक्विटी, कॉरपोरेट बॉन्ड, सरकारी बॉन्ड और दूसरे एसेट्स में लगाया जाता है। रिटायरमेंट पर कुछ रकम एकमुश्त निकाली जा सकती है। बाकी रकम से एन्युटी खरीदनी होती है, जिससे हर महीने पेंशन मिलती है। इसमें टैक्स छूट का भी फायदा मिलता है।

EPF (Employees’ Provident Fund)

EPF संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए सबसे लोकप्रिय रिटायरमेंट स्कीम है। हर महीने कर्मचारी और कंपनी, दोनों बेसिक सैलरी और DA का तय हिस्सा जमा करते हैं।

इस पर EPFO हर साल ब्याज तय करता है। फिलहाल ब्याज दर 8.25% सालाना है। रिटायरमेंट पर पूरा फंड निकाला जा सकता है। वहीं, इलाज, घर खरीदने या पढ़ाई जैसी जरूरतों के लिए कुछ शर्तों के साथ आंशिक निकासी भी की जा सकती है।

PPF (Public Provident Fund)

PPF सरकार समर्थित लंबी अवधि की बचत योजना है। इसकी मैच्योरिटी 15 साल की होती है, जिसे 5-5 साल के ब्लॉक में बढ़ाया जा सकता है।

इसकी ब्याज दर सरकार तय करती है। रिटर्न बाजार के उतार-चढ़ाव से प्रभावित नहीं होता। इसमें टैक्स छूट का भी फायदा मिलता है। यह लंबी अवधि में सुरक्षित रिटायरमेंट फंड बनाने का अच्छा विकल्प माना जाता है।

APY (Atal Pension Yojana)

अटल पेंशन योजना मुख्य रूप से असंगठित क्षेत्र के लोगों के लिए शुरू की गई थी। हालांकि, पात्रता पूरी करने वाले दूसरे लोग भी इसमें शामिल हो सकते हैं।

इसमें कामकाजी उम्र के दौरान नियमित निवेश करना होता है। तय उम्र के बाद हर महीने गारंटीड पेंशन मिलती है। पेंशन की रकम आपके योगदान और चुने गए विकल्प पर निर्भर करती है।

SCSS (Senior Citizens’ Savings Scheme)

SCSS खास तौर पर रिटायर हो चुके लोगों के लिए है। इसमें बैंक और पोस्ट ऑफिस के जरिए निवेश किया जा सकता है।

सरकार समय-समय पर इसकी ब्याज दर तय करती है। ब्याज नियमित अंतराल पर मिलता है, इसलिए रिटायरमेंट के बाद नियमित आय चाहने वालों के बीच यह काफी लोकप्रिय है।

म्यूचुअल फंड

सरकारी योजनाओं के अलावा म्यूचुअल फंड भी रिटायरमेंट फंड बनाने का अच्छा विकल्प हो सकते हैं। लंबी अवधि में इक्विटी म्यूचुअल फंड बेहतर रिटर्न देने की क्षमता रखते हैं। हालांकि, इनमें बाजार का जोखिम भी रहता है।

SIP के जरिए हर महीने निवेश करने से लंबे समय में कंपाउंडिंग का फायदा मिल सकता है। रिटायरमेंट के करीब पहुंचने पर कई निवेशक डेट फंड जैसे स्थिर विकल्पों का रुख करते हैं। इनमें जोखिम कम होता है।

कौन-सी स्कीम चुनें?

हर व्यक्ति के लिए एक ही रिटायरमेंट प्लान सही नहीं हो सकता। सही विकल्प आपकी उम्र, आय, नौकरी, जोखिम लेने की क्षमता और रिटायरमेंट के लक्ष्य पर निर्भर करता है फाइनेंशयल एडवाइजर आमतौर पर सिर्फ एक स्कीम पर निर्भर रहने से बचने की सलाह देते हैं। उनके मुताबिक- आपको अलग अलग स्कीमों में निवेश करना चाहिए, ताकि जोखिम कम रहे।

उदाहरण के लिए, नौकरीपेशा लोगों के लिए EPF आधार बन सकता है। वहीं NPS, PPF और म्यूचुअल फंड अतिरिक्त रिटायरमेंट फंड बनाने में मदद कर सकते हैं। रिटायरमेंट के बाद SCSS जैसी स्कीम नियमित कमाई का अच्छा जरिया बन सकती है।

ITR Refund: ई-वेरिफिकेशन में देरी होने पर भी मिलेगा रिफंड, ITAT के फैसले से टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

ITR Refund: ई-वेरिफिकेशन में देरी होने पर भी मिलेगा रिफंड, ITAT के फैसले से टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत

ITR Refund: कई टैक्सपेयर समय पर इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करते हैं, लेकिन ई-वेरिफिकेशन में देरी कर देते हैं। इसके बाद भी रिफंड मिल सकता है, लेकिन इसके लिए एक शर्त है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को ई-वेरिफिकेशन में हुई देरी माफ (Condone) करनी होगी।

हाल ही में दिल्ली आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) ने टैक्सपेयर्स के पक्ष में अहम फैसला दिया है। ट्रिब्यूनल ने कहा कि अगर सेंट्रल प्रोसेसिंग सेंटर (CPC) देरी माफ कर चुका है, तो सिर्फ इसी तकनीकी वजह से रिफंड नहीं रोका जा सकता।

ITAT ने कहा कि अगर किसी टैक्सपेयर पर कोई टैक्स बकाया नहीं है, तो उसका पैसा रोककर रखना संविधान के अनुच्छेद 265 के खिलाफ होगा। इस अनुच्छेद के मुताबिक, कानून की अनुमति के बिना न कोई टैक्स लगाया जा सकता है और न ही वसूला जा सकता है।

आखिर क्या था पूरा मामला?

यह मामला दिल्ली के एक टैक्सपेयर से जुड़ा है। उन्होंने आकलन वर्ष 2015-16 के लिए 3 सितंबर 2015 को धारा 139(1) के तहत समय पर ITR दाखिल किया था।

उन्होंने चालू साल के नुकसान, अनएब्जॉर्ब्ड डेप्रिसिएशन और पिछले सालों के नुकसान का सेट-ऑफ लिया। इसके बाद उनकी टैक्स योग्य आय शून्य (Nil) रही। टैक्सपेयर ने करीब 17.08 लाख रुपये के रिफंड का दावा भी किया। यह रकम मुख्य तौर पर किराये की आय पर कटे TDS की थी। लेकिन वह तय समय के भीतर ITR का ई-वेरिफिकेशन नहीं कर पाए।

टैक्सपेयर ने ट्रिब्यूनल को बताया कि उनके 83 साल के पिता गंभीर रूप से बीमार थे। उन्हें बार-बार अस्पताल ले जाना पड़ रहा था। इसी वजह से समय पर ई-वेरिफिकेशन नहीं हो सका। बाद में उन्होंने CPC के पास देरी माफ करने की अर्जी दी। CPC ने इसे स्वीकार कर लिया। इसके बाद 16 फरवरी 2018 को ITR का ई-वेरिफिकेशन पूरा किया गया। इसके बावजूद आयकर विभाग ने धारा 143(1) के तहत रिटर्न प्रोसेस नहीं किया। रिफंड भी जारी नहीं हुआ।

टैक्सपेयर ने इसके बाद धारा 154 के तहत रेक्टिफिकेशन की अर्जी दी। लेकिन असेसिंग ऑफिसर ने इसे खारिज कर दिया। बाद में पहली अपीलीय प्राधिकरण ने भी यही फैसला बरकरार रखा। इसके बाद टैक्सपेयर ITAT पहुंचा।

ITAT ने क्या कहा?

दिल्ली ITAT ने टैक्सपेयर की अपील स्वीकार कर ली। ट्रिब्यूनल ने कहा कि इस बात पर कोई विवाद नहीं है कि किराये की आय पर TDS काटा गया था। इसका रिकॉर्ड भी आयकर विभाग के पास मौजूद था। ITAT ने कहा कि CPC पहले ही ई-वेरिफिकेशन में हुई देरी माफ कर चुका था। ऐसे में आयकर विभाग उसी वजह से रिफंड रोक नहीं सकता।

ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा कि जब किसी टैक्सपेयर पर कोई टैक्स बकाया नहीं है, तब उसका पैसा रोककर रखना सरकार के अनुचित लाभ (Unjust Enrichment) के बराबर होगा।

ITAT ने संविधान के अनुच्छेद 265 का हवाला भी दिया। ट्रिब्यूनल ने कहा कि कानून की अनुमति के बिना कोई टैक्स नहीं वसूला जा सकता। सिर्फ तकनीकी आधार पर TDS की रकम रोकना इस संवैधानिक सिद्धांत के खिलाफ है।

इसी आधार पर ITAT ने निचली अथॉरिटी के आदेश रद्द कर दिए। साथ ही, असेसिंग ऑफिसर और CPC को कानून के मुताबिक रिफंड जारी करने के लिए जरूरी कदम उठाने का निर्देश दिया।

इस फैसले का क्या मतलब है?

ITAT ने साफ किया कि इस मामले में सिर्फ इसलिए रिफंड नहीं रोका जा सकता क्योंकि ITR का ई-वेरिफिकेशन तय समय के बाद हुआ था। खास बात यह है कि CPC पहले ही उस देरी को माफ कर चुका था।

ट्रिब्यूनल ने यह भी माना कि TDS की रकम विभाग के रिकॉर्ड में मौजूद थी। नुकसान का सेट-ऑफ करने के बाद टैक्सपेयर पर कोई टैक्स भी बकाया नहीं था।

ITAT ने कहा कि एक बार देरी माफ हो जाने के बाद उसी तकनीकी आधार पर रिफंड रोकना गलत है। ऐसा करना सरकार के अनुचित लाभ के बराबर होगा। यह संविधान के अनुच्छेद 265 की भावना के भी खिलाफ है।

हालांकि, ट्रिब्यूनल ने यह भी साफ किया कि यह फैसला इसी मामले के तथ्यों के आधार पर दिया गया है। यहां टैक्सपेयर ने ITR समय पर दाखिल किया था। साथ ही, ई-वेरिफिकेशन में हुई देरी को CPC पहले ही माफ कर चुका था।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।