PPF vs NPS: किस स्कीम में निवेश से बड़ा रिटायरमेंट फंड बनेगा? पूरा कैलकुलेशन समझिए

PPF vs NPS: जब रिटायरमेंट प्लानिंग की बात होती है, तो दो स्कीमों पर सबसे अधिक जोर रहता है… पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) और नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) इन दोनों को अच्छा विकल्प माना जाता हैं, लेकिन दोनों में फर्क है। PPF सुरक्षित निवेश है। इसका ब्याज सरकार तय करती है। वहीं NPS बाजार से जुड़ा है। इसमें ज्यादा रिटर्न मिलने की संभावना होती है, लेकिन रिटर्न तय नहीं होता।

किस स्कीम में कितना फंड बनेगा?

PPF और NPS में वक्त के साथ बड़ा रिटायरमेंट फंड सकता है। यहां ₹2,000, ₹5,000 और ₹12,500 मंथली निवेश का कैलकुलेशन है। इसमें 30 साल तक निवेश की अवधि मानी गई है। PPF पर 7.1% सालाना ब्याज और NPS में 10% सालाना औसत रिटर्न मानकर कैलकुलेशन किया गया है।

हर महीने निवेश30 साल में कुल निवेशPPF में अनुमानित फंड
NPS में अनुमानित फंड

₹2,000₹7.20 लाख₹25.03 लाख₹45.59 लाख
₹5,000₹18 लाख₹62.58 लाख₹1.14 करोड़
₹12,500₹45 लाख₹1.56 करोड़₹2.85 करोड़

दोनों स्कीम में निवेश की अवधि और रकम समान है। फर्क रिटर्न का है। इसी वजह से लंबे समय में NPS में बड़ा फंड बन सकता है।

₹2,000 की मंथली निवेश

अगर आप 30 साल तक हर महीने ₹2,000 निवेश करते हैं, तो कुल ₹7.20 लाख जमा होंगे। PPF में 7.1% के हिसाब से फंड करीब ₹25.03 लाख हो सकता है।

वहीं NPS में 10% औसत रिटर्न मिलने पर फंड करीब ₹45.59 लाख पहुंच सकता है। यानी ₹2,000 की छोटी मंथली निवेश भी लंबे समय में अच्छा फंड बना सकती है।

₹5,000 की मंथली निवेश

हर महीने ₹5,000 निवेश करने पर 30 साल में आपकी जेब से ₹18 लाख जाएंगे। PPF में अनुमानित फंड करीब ₹62.58 लाख बन सकता है।

वहीं NPS में 10% औसत रिटर्न के हिसाब से फंड करीब ₹1.14 करोड़ हो सकता है। यानी PPF के मुकाबले करीब ₹51 लाख ज्यादा फंड बन सकता है।

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₹12,500 की मंथली निवेश

हर महीने ₹12,500 निवेश करने पर 30 साल में कुल ₹45 लाख जमा होंगे। PPF में 7.1% ब्याज के हिसाब से फंड करीब ₹1.56 करोड़ तक पहुंच सकता है।

NPS में 10% औसत रिटर्न मिलने पर यही फंड करीब ₹2.85 करोड़ हो सकता है। दोनों के बीच करीब ₹1.29 करोड़ का अंतर है। यह अंतर कंपाउंडिंग और ज्यादा रिटर्न की वजह से बनता है।

NPS में ज्यादा फंड क्यों बन सकता है?

NPS का पैसा इक्विटी, सरकारी बॉन्ड और कॉरपोरेट बॉन्ड में लगाया जाता है। इक्विटी की वजह से लंबे समय में ज्यादा रिटर्न मिलने की संभावना रहती है।

लेकिन बाजार का जोखिम भी होता है। 10% रिटर्न की कोई गारंटी नहीं है। खराब बाजार के दौरान फंड की वैल्यू कम हो सकती है।

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NPS का पूरा पैसा एकमुश्त नहीं मिलेगा

ऊपर टेबल में दिखाया गया NPS का फंड कुल रिटायरमेंट कॉर्पस है। मौजूदा सामान्य नियमों के तहत 60 साल की उम्र पर अधिकतम 60% रकम एकमुश्त निकाली जा सकती है। बाकी रकम से एन्युटी खरीदनी पड़ती है, जिससे नियमित पेंशन मिलती है।

उदाहरण के लिए, ₹12,500 की मंथली निवेश से ₹2.85 करोड़ का कॉर्पस बनता है। इसमें से 60% यानी करीब ₹1.71 करोड़ एकमुश्त मिल सकते हैं। बाकी करीब ₹1.14 करोड़ एन्युटी में जा सकते हैं।

PPF में मैच्योरिटी की रकम आपके हाथ में

PPF की मैच्योरिटी अवधि 15 साल है। इसे तय नियमों के तहत आगे बढ़ाया जा सकता है। PPF में बाजार का जोखिम नहीं होता।

सबसे बड़ी बात यह है कि मैच्योरिटी की पूरी रकम आपके नियंत्रण में रहती है। आपको एन्युटी खरीदना जरूरी नहीं होता। आप अपनी जरूरत के हिसाब से पैसा इस्तेमाल कर सकते हैं।

रिटायरमेंट के लिए कौन बेहतर?

अगर आपको सुरक्षित रिटर्न चाहिए, तो PPF बेहतर हो सकता है। अगर आपकी उम्र कम है और रिटायरमेंट में काफी समय बाकी है, तो NPS बड़ा कॉर्पस बनाने में मदद कर सकता है।

दोनों में निवेश करना भी एक विकल्प है। इससे बाजार की ग्रोथ और सुरक्षित निवेश, दोनों का फायदा मिल सकता है।

Retirement Planning: क्या हो रिटायरमेंट की सबसे बेस्ट स्ट्रेटजी? NPS, EPF और एन्युटी पर समझिए एक्सपर्ट का ये मास्टर प्लान

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

₹1 करोड़ का रिटायरमेंट फंड बनाने के लिए कितने की करनी होगी मंथली SIP? जानिए 15, 20 और 25 साल का पूरा कैलकुलेशन

Monthly SIP For ₹1 Crore Retirement Corpus: अपने रिटायरमेंट के बाद की जिंदगी को बिना किसी आर्थिक तंगी के सुकून से जीने के लिए एक बड़ा फंड होना बेहद जरूरी है। आज के दौर में महंगाई और जीवनशैली के खर्चों को देखते हुए कम से कम ₹1 करोड़ का रिटायरमेंट गोल एक बुनियादी जरूरत बन चुका है। लेकिन सवाल यह है कि इस ₹1 करोड़ के आंकड़े तक पहुंचने के लिए आपको हर महीने कितना निवेश करना होगा?

म्यूचुअल फंड में एसआईपी (SIP) के जरिए रेगुलर निवेश करके आप आसानी से ₹1 करोड़ का फंड तैयार कर सकते हैं। म्यूचुअल फंड इक्विटी स्कीम्स ने लंबी अवधि में औसतन 12% का सीएजीआर रिटर्न दिया है। आइए समझते हैं कि 15, 20 और 25 साल की समय सीमा के हिसाब से आपको हर महीने कितने रुपये की SIP शुरू करनी होगी।

1. 15 साल में 1 करोड़ रुपये बनाने का कैलकुलेशन

अगर आपकी उम्र 40-45 साल के करीब है और आपके पास रिटायरमेंट के लिए केवल 15 साल का समय बचा है, तो आपको कंपाउंडिंग का फायदा उठाने के लिए थोड़ी बड़ी रकम निवेश करनी होगी:

  • लक्ष्य: ₹1 करोड़
  • समय अवधि: 15 साल (180 महीने)
  • अनुमानित वार्षिक रिटर्न: 12%
  • जरूरी मंथली SIP: ₹20,017 (करीब ₹20,000 प्रति महीने)

गणित का पूरा हिसाब:

कुल निवेश: ₹36,03,060

अनुमानित वेल्थ गेन: ₹63,96,940

कुल मैच्योरिटी फंड: ₹1,00,00,000

2. 20 साल में 1 करोड़ रुपये बनाने का कैलकुलेशन

अगर आप 35-40 साल की उम्र में अपनी रिटायरमेंट प्लानिंग शुरू कर रहे हैं और आपके पास 20 साल का समय है, तो आपका मंथली SIP अमाउंट काफी घटकर आधा रह जाता है:

  • जरूरी मंथली SIP: ₹10,009 (करीब ₹10,000 प्रति महीने)
  • कुल निवेश: ₹24,02,160
  • अनुमानित वेल्थ गेन: ₹75,97,840
  • कुल मैच्योरिटी फंड: ₹1,00,00,000

3. 25 साल में 1 करोड़ रुपये बनाने का कैलकुलेशन

अगर आपकी उम्र 25 से 30 साल के बीच है और आप अपने करियर की शुरुआत में ही रिटायरमेंट प्लानिंग शुरू कर देते हैं, तो कंपाउंडिंग (Chakravridhi) का जादू सबसे बेहतरीन काम करता है:

  • जरूरी मंथली SIP: ₹5,270 (करीब ₹5,300 प्रति महीने)
  • कुल निवेश: ₹15,81,000
  • अनुमानित वेल्थ गेन: ₹84,19,000
  • कुल मैच्योरिटी फंड: ₹1,00,00,000

₹1 करोड़ का रिटायरमेंट फंड बनाने के लिए 15, 20 और 25 साल की SIP का गणित

₹1 करोड़ का रिटायरमेंट फंड बनाने के लिए 15, 20 और 25 साल की SIP का गणित

स्मार्ट टिप: Step-Up SIP से आसान होगी राह

अगर आप शुरुआत में ही ₹10,000 या ₹20,000 की बड़ी SIP शुरू नहीं कर सकते, तो आप Step-Up SIP का सहारा ले सकते हैं। इसमें आप हर साल अपनी सैलरी या आमदनी बढ़ने के साथ अपनी SIP रकम में 10% का इजाफा कर सकते हैं। ऐसा करने पर आप बहुत छोटी मंथली रकम (जैसे- ₹2,500 – ₹3,000) से शुरुआत करके भी समय से पहले 1 करोड़ रुपये का गोल हासिल कर सकते हैं।

एक्सपर्ट्स की माने तो रिटायरमेंट प्लानिंग में सबसे महत्वपूर्ण कारक आपकी उम्र और समय है। जितना जल्दी आप निवेश की शुरुआत करेंगे, जेब पर उतना ही कम बोझ पड़ेगा और कंपाउंडिंग का फायदा उतना ही ज्यादा मिलेगा। अगर आप भी 1 करोड़ रुपये का फंड बनाना चाहते हैं, तो आज ही अपनी वित्तीय क्षमता के अनुसार म्यूचुअल फंड्स में SIP की शुरुआत करें।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

₹5 करोड़ vs ₹10 करोड़: रिटायरमेंट के बाद कितने फंड में मिलेगी असली आजादी? जानिए एक्सपर्ट्स का ‘नो रिस्क’ फॉर्मूला

Rs 5 Crore vs Rs 10 Crore Retirement Corpus: भारत में फाइनेंशियल इंडिपेंडेंस या अर्ली रिटायरमेंट का सपना देखने वाले ज्यादातर लोगों के दिमाग में एक ‘मैजिक नंबर’ होता है। अधिकतर भारतीय निवेशकों के लिए यह नंबर ₹5 करोड़ से ₹10 करोड़ के बीच झूलता रहता है। लेकिन सवाल यह है कि क्या ₹5 करोड़ का फंड जुटाने के बाद आपकी पैसों की चिंताएं पूरी तरह खत्म हो जाती हैं, या ₹10 करोड़ का कॉर्पस ही असली आजादी दिला पाता है?

फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इन दोनों पड़ावों के बीच का असली फर्क केवल पैसों का नहीं, बल्कि फ्लेक्सिबिलिटी, सुरक्षा और लाइफस्टाइल में मिलने वाले मार्जिन का है। आइए आसान भाषा में समझते हैं ₹5 करोड़ और ₹10 करोड़ के फंड का पूरा गणित।

क्या ₹5 करोड़ का फंड रिटायरमेंट के लिए काफी है?

आपकी उम्र, खर्च, निर्भर सदस्यों, मेडिकल जरूरतों और लाइफस्टाइल के आधार पर ₹5 करोड़ का फंड फाइनेंशियल फ्रीडम दिला सकता है। लेकिन इस लेवल पर आपको कड़े वित्तीय अनुशासन और सोच-समझकर पैसे निकालने की जरूरत होती है।

MIRA Money के इनवेस्टमेंट रिसर्च एनालिस्ट रोहन गोयल के अनुसार, अगर आप 4% के स्टैंडर्ड विड्रॉल रेट से पैसे निकालते हैं, तो ₹5 करोड़ के फंड से आपको सालाना ₹20 लाख या करीब ₹1.6 लाख महीना मिल सकता है (जो महंगाई के हिसाब से एडजस्ट होगा)।

यह रकम नौकरी छोड़ने, करियर से ब्रेक लेने या कम तनाव वाली नौकरी चुनने के लिए काफी है, लेकिन जोखिम भी है। अचानक आई मेडिकल इमरजेंसी, बच्चे की विदेश में पढ़ाई या शेयर बाजार में लंबी मंदी आपके पूरे प्लान को बिगाड़ सकती है। यही वजह है कि ₹5 करोड़ वाले लेवल पर ज्यादातर लोग कोई न कोई पैसिव इनकम या काम जारी रखते हैं।

कॉर्पस ₹10 करोड़ पहुंचने पर क्या-क्या बदल जाता है?

जब आपका कॉर्पस बढ़कर ₹10 करोड़ हो जाता है, तो 4% के नियम के हिसाब से आपकी सालाना आय दोगुनी होकर ₹40 लाख (लगभग ₹3.33 लाख महीना) हो जाती है। यह रकम आपको केवल आराम ही नहीं, बल्कि अनिश्चितताओं से निपटने की बड़ी ढाल भी देती है।

₹10 करोड़ के लेवल पर हेल्थकेयर, अंतरराष्ट्रीय यात्राएं या बच्चों/माता-पिता की मदद करना आपके बजट पर भारी नहीं पड़ता।

अगर रिटायरमेंट के शुरुआती सालों में ही शेयर बाजार गिर जाता है, तब भी आपके पोर्टफोलियो पर इसका असर कम पड़ता है क्योंकि आपका विड्रॉल रेट आपके कुल फंड के मुकाबले काफी सुरक्षित होता है।

क्या ₹10 करोड़ होने का मतलब ज्यादा फिजूलखर्ची करना है?

बिल्कुल नहीं। बड़ा कॉर्पस आपको तभी तक वित्तीय आजादी दे सकता है जब तक आपकी लाइफस्टाइल और खर्च नियंत्रण में रहें। वाइज फिनसर्व की डायरेक्टर और सीओओ चारू पहूजा चेतावनी देती हैं कि यहाँ ‘लाइफस्टाइल इन्फ्लेशन’ यानी अमीर होने के साथ खर्च बढ़ाने की आदत सबसे बड़ा खतरा बन सकती है। बड़ा घर, महंगी गाड़ियां और बार-बार महंगे वेकेशन आपके मंथली बजट को इतना बढ़ा सकते हैं कि ₹10 करोड़ का बड़ा फंड भी कम पड़ने लगे।

₹5 करोड़ और ₹10 करोड़ में सबसे बड़ा फर्क क्या है?

₹5 करोड़ और ₹10 करोड़ में सबसे बड़ा फर्क क्या है?

आपके लिए कौन सा आंकड़ा सही है?

फाइनेंशियल इंडिपेंडेंस का मतलब केवल पैसों का ढेर लगाना नहीं, बल्कि काम को मजबूरी के बजाय ‘अपनी पसंद’ बनाना है। ₹5 करोड़ आपको काम छोड़ने की आजादी दे सकता है, लेकिन ₹10 करोड़ आपको जिंदगी में किसी भी अनचाहे मोड़ या मंदी से बेफिक्र होने का सुकून देता है। सही कॉर्पस वही है जो आपकी मौजूदा लाइफस्टाइल को बनाए रखे और महंगाई को पछाड़ते हुए आपको कभी दोबारा मजबूरी में काम पर न लौटने दे।

डिस्क्लेमर: यह खबर वित्तीय विशेषज्ञों के विचारों और सैद्धांतिक कैलकुलेशन पर आधारित है। इसे व्यक्तिगत निवेश या रिटायरमेंट सलाह न माना जाए। अपनी उम्र और वित्तीय लक्ष्यों के हिसाब से सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर (CFP) से सलाह जरूर लें।

Retirement Planning: क्या रिटायरमेंट के बाद आपकी बचत 30 साल तक साथ दे पाएगी? पूरा कैलकुलेशन समझिए

Retirement Planning: पहले रिटायरमेंट का मतलब थोड़ा आसान था। 58-60 साल की उम्र में नौकरी छोड़ी और अगले 10-15 साल तक बचत के सहारे जिंदगी चल गई। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं।

आज भारतीय पहले से कहीं ज्यादा लंबी उम्र जी रहे हैं। 1960 में औसत उम्र सिर्फ 41 साल थी। अब यह 70 साल से ऊपर पहुंच चुकी है। इसका मतलब है कि 60 साल में रिटायर होने वाला व्यक्ति 85-90 साल तक जी सकता है। यानी रिटायरमेंट अब 10 साल नहीं, 25-30 साल का सफर बन चुका है।

यही वजह है कि अब सिर्फ बड़ा रिटायरमेंट फंड बनाना काफी नहीं है। असली सवाल यह है कि क्या वही पैसा पूरे रिटायरमेंट में आपका साथ देगा?

क्या 1 करोड़ रुपये काफी होंगे?

मान लीजिए आपके पास रिटायरमेंट के समय 1 करोड़ रुपये हैं। इस पर हर साल 8% रिटर्न मिलता है। आप पहले साल 3.5 लाख रुपये निकालते हैं और हर साल महंगाई के हिसाब से निकासी 5% बढ़ाते हैं।

ऐसे में 30 साल बाद भी आपका फंड खत्म नहीं होता। उल्टा यह करीब 3.37 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। वजह यह है कि शुरुआती वर्षों में निवेश का रिटर्न निकाली गई रकम से ज्यादा रहता है। इसलिए बाकी पैसा लगातार बढ़ता रहता है।

सालशुरुआत में फंडसालाना निकासीसाल के अंत में फंड
1₹1.00 करोड़₹3.50 लाख₹1.05 करोड़
5₹1.19 करोड़₹4.25 लाख₹1.24 करोड़
10₹1.48 करोड़₹5.43 लाख₹1.54 करोड़
15₹1.82 करोड़₹6.93 लाख₹1.90 करोड़
20₹2.23 करोड़₹8.84 लाख₹2.33 करोड़
25₹2.71 करोड़₹11.29 लाख₹2.82 करोड़
30₹3.25 करोड़₹14.41 लाख₹3.37 करोड़

सबसे बड़ा खतरा क्या है?

आज सबसे बड़ा जोखिम लॉन्गेविटी रिस्क है। यानी आपकी बचत खत्म हो जाए, लेकिन जिंदगी बाकी रहे।

एक सर्वे के मुताबिक, औसत भारतीय ने रिटायरमेंट के लिए सिर्फ 28 लाख रुपये जोड़े हैं। जबकि आराम से रिटायर होने के लिए उसे करीब 1 करोड़ रुपये चाहिए। यानी जरूरत और बचत के बीच बड़ा अंतर है, औसतन करीब 72 लाख का।

महंगाई और इलाज का खर्च

रिटायरमेंट में सबसे बड़ा दुश्मन महंगाई है। आज 50,000 रुपये महीने का खर्च है, तो 30 साल बाद यही खर्च 2 लाख रुपये से भी ज्यादा हो सकता है।

इसके ऊपर मेडिकल खर्च तेजी से बढ़ रहा है। उम्र बढ़ने के साथ दवाइयां, टेस्ट और अस्पताल का खर्च भी बढ़ता जाता है। इसलिए रिटायरमेंट का बड़ा हिस्सा इलाज पर खर्च हो सकता है।

जल्दी शुरुआत करना जरूरी

रिटायरमेंट की प्लानिंग जितनी जल्दी शुरू करेंगे, उतना बेहतर रहेगा। कंपाउंडिंग को ज्यादा समय मिलेगा और छोटी-छोटी बचत भी बड़ा फंड बन सकती है।

अब रिटायरमेंट को सिर्फ नौकरी खत्म होने का दिन मत समझिए। यह 25-30 साल की लंबी वित्तीय यात्रा है। अगर इस सफर को आराम से बिताना है, तो तैयारी भी समय रहते शुरू करनी होगी।

इन 5 बातों का भी ध्यान रखें

  • रिटायरमेंट की तैयारी जितनी जल्दी शुरू करेंगे, उतना कम बोझ पड़ेगा।
  • अपना सारा पैसा एक ही जगह मत लगाइए। अलग-अलग विकल्पों में बांटकर निवेश करें।
  • हर साल महंगाई को ध्यान में रखकर अपने निवेश और खर्च का हिसाब जरूर देखें।
  • इलाज का खर्च तेजी से बढ़ता है। इसलिए हेल्थ इंश्योरेंस और मेडिकल इमरजेंसी के लिए अलग पैसा रखें।
  • रिटायरमेंट के बाद हर महीने नियमित आमदनी कैसे आएगी, इसकी योजना पहले से बना लें। SWP, SCSS और दूसरे विकल्प इसमें मदद कर सकते हैं।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Retirement Planning: क्या हो रिटायरमेंट की बेस्ट प्लानिंग, कितना फंड रहेगा पर्याप्त? एक्सपर्ट ने समझा दिया पूरा कैलकुलेशन

Retirement Corpus Calculation: रिटायरमेंट का नाम सुनते ही ज्यादातर लोगों के दिमाग में एक या दो करोड़ रुपये का आंकड़ा आता है। लोगों को लगता है कि इतनी रकम बुढ़ापे के लिए काफी होगी। लेकिन सच यह है कि जो रकम 10 साल पहले बड़ी लगती थी, वह आज के समय में कुछ ही सालों के खर्च में खत्म हो सकती है। अगर आप आज से 15 या 20 साल बाद रिटायर होने की योजना बना रहे हैं, तो पुरानी गणना आपके लिए बड़ी भूल साबित हो सकती है।

वित्तीय सलाहकारों के अनुसार, बढ़ती महंगाई और लंबी जीवन प्रत्याशा के कारण अब 60 की उम्र में सुखद रिटायरमेंट के लिए जीवनशैली के हिसाब से ₹3 करोड़ से लेकर ₹70 करोड़ तक के फंड की जरूरत पड़ सकती है।

क्यों फेल हो जाता है 1 या 2 करोड़ का पुराना कैलकुलेशन?

रिटायरमेंट प्लानिंग के गणित को बिगाड़ने वाले दो सबसे बड़े कारण महंगाई और लंबी उम्र हैं। जो लाइफस्टाइल आज ₹1 लाख प्रति महीने में मेंटेन होती है, वही लाइफस्टाइल 20 साल बाद 7% महंगाई दर के हिसाब से कई गुना महंगी हो जाएगी। डेजर्व (Dezerv) के सह-संस्थापक संदीप जेठवानी के अनुसार, लोग औसतन 75 साल की उम्र मानकर कैलकुलेशन करते हैं, जो बेहद खतरनाक है। मेडिकल सुविधाओं के चलते आज के 40 वर्ष के युवा आसानी से 90 या 100 साल तक जी सकते हैं। ऐसे में 60 के बाद कम से कम 30-40 साल के लिए फंड की आवश्यकता होगी।

किस उम्र और खर्च पर कितने करोड़ का फंड चाहिए?

किस उम्र और खर्च पर कितने करोड़ का फंड चाहिए?

भारत में क्यों काम नहीं आता विदेश का ’25x नियम’?

अवीसा वेल्थ क्रिएटर्स के सीईओ विनीत राठी के अनुसार, विदेशों में प्रचलित ‘FIRE’ (Financial Independence, Retire Early) का वह नियम, जो सालाना खर्च का 25 गुना जोड़ने की सलाह देता है, भारत में फेल हो जाता है। भारत में लाइफस्टाइल, मकान और हेल्थकेयर का खर्च सालाना 6% से 9% की दर से बढ़ता है। इसलिए केवल 25 गुना का टारगेट रखना बुढ़ापे में पैसों की तंगी ला सकता है।

भविष्य के टैक्स और कम रिटर्न के लिए भी रखें बफर

रिटायरमेंट फंड बनाते समय इस बात को नजरअंदाज न करें कि भारतीय शेयर बाजार ने पिछले 20 सालों में जो रिटर्न दिए हैं, जरूरी नहीं कि आने वाले 20 सालों में भी वही रिटर्न मिलें। साथ ही, भविष्य में कैपिटल गेन्स पर टैक्स दरें भी बढ़ सकती हैं। इसलिए अपने लक्ष्य में 10-15% का अतिरिक्त बफर जरूर जोड़ें।

रिटायरमेंट फंड की सही गणना कैसे करें?

एक निश्चित आंकड़े के पीछे भागने के बजाय इस 6-स्टेप फॉर्मूले को अपनाएं:

  1. वर्तमान वार्षिक खर्च निकालें: आज आपकी गृहस्थी चलाने में साल भर में कितना खर्च होता है।
  2. महंगाई दर जोड़ें: कम से कम 7% की दर से भविष्य का खर्च आंकें।
  3. 90 साल की उम्र तक का अनुमान लगाएं: औसतन 30 साल के रिटायरमेंट जीवन की योजना बनाएं।
  4. हेल्थ इमरजेंसी बफर रखें: उम्र बढ़ने के साथ मेडिकल खर्च तेजी से बढ़ते हैं।
  5. टैक्स और बाजार जोखिम जोड़ें: भविष्य के टैक्स और कम रिटर्न के हिसाब से थोड़ा ज्यादा फंड टारगेट करें।
  6. जल्द शुरुआत और स्टेप-अप एसआईपी: जितनी जल्दी हो सके एसआईपी शुरू करें और हर साल अपनी आय बढ़ने के साथ निवेश की राशि बढ़ाते जाएं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Retirement Planning: रिटायरमेंट के बाद नियमित कमाई चाहिए? जानिए आपके लिए कौन-सी स्कीम बेस्ट

Retirement Planning: रिटायरमेंट प्लानिंग अब सिर्फ बचत तक सीमित नहीं रह गई है। बढ़ती उम्र, महंगाई और इलाज का खर्च देखते हुए समय रहते बड़ा रिटायरमेंट फंड बनाना जरूरी हो गया है। नौकरीपेशा लोगों को EPF का फायदा मिलता है। लेकिन इसके अलावा भी कई सरकारी और मार्केट से जुड़ी स्कीम हैं, जो रिटायरमेंट के बाद नियमित आय का सहारा बन सकती हैं।

NPS (National Pension System)

NPS सरकार की रिटायरमेंट स्कीम है। इसे PFRDA रेगुलेट करता है। इसमें नौकरीपेशा और स्वरोजगार करने वाले, दोनों निवेश कर सकते हैं।

इसमें पैसा इक्विटी, कॉरपोरेट बॉन्ड, सरकारी बॉन्ड और दूसरे एसेट्स में लगाया जाता है। रिटायरमेंट पर कुछ रकम एकमुश्त निकाली जा सकती है। बाकी रकम से एन्युटी खरीदनी होती है, जिससे हर महीने पेंशन मिलती है। इसमें टैक्स छूट का भी फायदा मिलता है।

EPF (Employees’ Provident Fund)

EPF संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए सबसे लोकप्रिय रिटायरमेंट स्कीम है। हर महीने कर्मचारी और कंपनी, दोनों बेसिक सैलरी और DA का तय हिस्सा जमा करते हैं।

इस पर EPFO हर साल ब्याज तय करता है। फिलहाल ब्याज दर 8.25% सालाना है। रिटायरमेंट पर पूरा फंड निकाला जा सकता है। वहीं, इलाज, घर खरीदने या पढ़ाई जैसी जरूरतों के लिए कुछ शर्तों के साथ आंशिक निकासी भी की जा सकती है।

PPF (Public Provident Fund)

PPF सरकार समर्थित लंबी अवधि की बचत योजना है। इसकी मैच्योरिटी 15 साल की होती है, जिसे 5-5 साल के ब्लॉक में बढ़ाया जा सकता है।

इसकी ब्याज दर सरकार तय करती है। रिटर्न बाजार के उतार-चढ़ाव से प्रभावित नहीं होता। इसमें टैक्स छूट का भी फायदा मिलता है। यह लंबी अवधि में सुरक्षित रिटायरमेंट फंड बनाने का अच्छा विकल्प माना जाता है।

APY (Atal Pension Yojana)

अटल पेंशन योजना मुख्य रूप से असंगठित क्षेत्र के लोगों के लिए शुरू की गई थी। हालांकि, पात्रता पूरी करने वाले दूसरे लोग भी इसमें शामिल हो सकते हैं।

इसमें कामकाजी उम्र के दौरान नियमित निवेश करना होता है। तय उम्र के बाद हर महीने गारंटीड पेंशन मिलती है। पेंशन की रकम आपके योगदान और चुने गए विकल्प पर निर्भर करती है।

SCSS (Senior Citizens’ Savings Scheme)

SCSS खास तौर पर रिटायर हो चुके लोगों के लिए है। इसमें बैंक और पोस्ट ऑफिस के जरिए निवेश किया जा सकता है।

सरकार समय-समय पर इसकी ब्याज दर तय करती है। ब्याज नियमित अंतराल पर मिलता है, इसलिए रिटायरमेंट के बाद नियमित आय चाहने वालों के बीच यह काफी लोकप्रिय है।

म्यूचुअल फंड

सरकारी योजनाओं के अलावा म्यूचुअल फंड भी रिटायरमेंट फंड बनाने का अच्छा विकल्प हो सकते हैं। लंबी अवधि में इक्विटी म्यूचुअल फंड बेहतर रिटर्न देने की क्षमता रखते हैं। हालांकि, इनमें बाजार का जोखिम भी रहता है।

SIP के जरिए हर महीने निवेश करने से लंबे समय में कंपाउंडिंग का फायदा मिल सकता है। रिटायरमेंट के करीब पहुंचने पर कई निवेशक डेट फंड जैसे स्थिर विकल्पों का रुख करते हैं। इनमें जोखिम कम होता है।

कौन-सी स्कीम चुनें?

हर व्यक्ति के लिए एक ही रिटायरमेंट प्लान सही नहीं हो सकता। सही विकल्प आपकी उम्र, आय, नौकरी, जोखिम लेने की क्षमता और रिटायरमेंट के लक्ष्य पर निर्भर करता है फाइनेंशयल एडवाइजर आमतौर पर सिर्फ एक स्कीम पर निर्भर रहने से बचने की सलाह देते हैं। उनके मुताबिक- आपको अलग अलग स्कीमों में निवेश करना चाहिए, ताकि जोखिम कम रहे।

उदाहरण के लिए, नौकरीपेशा लोगों के लिए EPF आधार बन सकता है। वहीं NPS, PPF और म्यूचुअल फंड अतिरिक्त रिटायरमेंट फंड बनाने में मदद कर सकते हैं। रिटायरमेंट के बाद SCSS जैसी स्कीम नियमित कमाई का अच्छा जरिया बन सकती है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

SIP Calculator: ₹1000 की SIP से हर महीने ₹1 लाख की कमाई! जानिए कैसे काम करता है ये फॉर्मूला

SIP Calculator: रिटायरमेंट के बाद हर महीने नियमित कमाई कौन नहीं चाहता? अच्छी बात यह है कि इसके लिए बहुत बड़ी सैलरी होना जरूरी नहीं है। अगर आप कम उम्र में छोटी SIP शुरू करें, हर साल उसे थोड़ा बढ़ाते रहें और लंबे समय तक निवेश जारी रखें, तो रिटायरमेंट तक बड़ा फंड तैयार किया जा सकता है। इसके बाद उसी फंड से Systematic Withdrawal Plan (SWP) के जरिए हर महीने इनकम ली जा सकती है।

₹1 करोड़ का फंड कैसे बन सकता है?

अब मान लीजिए आपने 28 साल की उम्र में हर महीने ₹1,000 की SIP शुरू की। हर साल SIP में 10% की बढ़ोतरी करते रहे और 60 साल की उम्र तक निवेश जारी रखा। अगर इस दौरान औसतन 12% सालाना रिटर्न मिला, तो रिटायरमेंट तक अच्छा-खासा फंड तैयार हो सकता है। ऐसे में आपके निवेश की तस्वीर कुछ ऐसी दिखेगी।

  • निवेश की अवधि: 32 साल
  • कुल निवेश: ₹24.13 लाख
  • अनुमानित फंड: ₹1.05 करोड़
  • कुल मुनाफा: ₹80.98 लाख

यानी आपने अपनी जेब से करीब ₹24 लाख लगाए, लेकिन कंपाउंडिंग की ताकत से फंड ₹1 करोड़ से ज्यादा हो गया।

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हर साल SIP बढ़ाना क्यों जरूरी है?

इस रणनीति की सबसे बड़ी ताकत SIP स्टेप-अप है। नौकरी में ज्यादातर लोगों की सैलरी हर साल बढ़ती है। अगर उसी हिसाब से SIP भी बढ़ा दें, तो ज्यादा दबाव भी नहीं पड़ता और निवेश तेजी से बढ़ता रहता है।

अगर SIP की रकम पूरे 32 साल तक ₹1,000 ही रहे, तो ₹1 करोड़ का फंड बनाना काफी मुश्किल हो जाएगा। इसलिए हर साल थोड़ा-थोड़ा निवेश बढ़ाना लंबी अवधि में बड़ा फर्क पैदा करता है।

हर महीने ₹1 लाख कैसे मिलेगा?

रिटायरमेंट के बाद पूरा पैसा एक साथ निकालने की जरूरत नहीं होती। यहीं SWP काम आता है। इसमें आप अपने म्यूचुअल फंड से हर महीने तय रकम निकालते रहते हैं। बाकी पैसा फंड में ही लगा रहता है और उस पर रिटर्न भी मिलता रहता है।

SIP 1

मान लीजिए रिटायरमेंट के बाद आपके पास ₹1.5 करोड़ का फंड है। इसे किसी डेट या कंजर्वेटिव हाइब्रिड फंड में निवेश किया गया है। अगर इस पर 6% सालाना रिटर्न मिलता है और आप हर महीने ₹1 लाख निकालते हैं, तो करीब 12 साल तक नियमित इनकम मिल सकती है। इसका हिसाब कुछ ऐसा है।

  • शुरुआती निवेश: ₹1.5 करोड़
  • हर महीने निकासी: ₹1 लाख
  • निकासी की अवधि: 12 साल
  • कुल निकासी: ₹1.44 करोड़
  • निकासी के दौरान अनुमानित कमाई: ₹43.13 लाख

यानी पैसा भी मिलता रहेगा और फंड भी एकदम से खत्म नहीं होगा।

निवेश से पहले ये बातें याद रखें

आपको ध्यान रखना चाहिए कि 12% और 6% का रिटर्न तय नहीं होता। बाजार के हिसाब से रिटर्न कम या ज्यादा हो सकता है। रिटायरमेंट के करीब पहुंचने पर अपने निवेश का रिव्यू जरूर करें। साथ ही महंगाई को भी ध्यान में रखें, क्योंकि आज ₹1 लाख की जो कीमत है, आने वाले वर्षों में वह उतनी नहीं रहेगी।

अगर आप समय पर निवेश शुरू करें, हर साल SIP बढ़ाते रहें और रिटायरमेंट के बाद सही तरीके से SWP का इस्तेमाल करें, तो यही रणनीति आपको रिटायरमेंट के बाद भी नियमित इनकम देने में मदद कर सकती है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

EPF vs VPF: नौकरी जॉइन करते ही करें ये काम, 5 गुना बढ़ जाएगा आपका पीएफ फंड! जानें EPF और VPF का पूरा गणित

EPF vs VPF Retirement Corpus Comparison: जब भी कोई नई नौकरी मिलती है, तो हमारा पूरा ध्यान सालाना CTC पर होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी सीटीसी का एक छोटा सा हिस्सा, जो प्रोविडेंट फंड (EPF) में जाता है, आपके रिटायरमेंट की पूरी तस्वीर बदल सकता है?

अक्सर कंपनियां ईपीएफ योगदान की गणना के लिए एक बेसिक सैलरी की सीमा तय कर देती हैं, जिससे आपका रिटायरमेंट फंड बहुत छोटा रह जाता है। लेकिन अगर आप सही प्लानिंग के साथ EPF और वॉलंटरी प्रोविडेंट फंड (VPF) का सही तालमेल बिठाएं, तो बुढ़ापे में मिलने वाला फंड 5 गुना तक बढ़ सकता है और आप आसानी से करोड़ों रुपये के मालिक बन सकते हैं। आइए समझते हैं इसका पूरा गणित।

कैसे मामूली अंतर से बन जाएगा ₹1.9 करोड़ का फंड?

मान लीजिए एक कर्मचारी की सालाना सीटीसी ₹12 लाख है। अब ईपीएफ योगदान दो अलग-अलग तरीकों से तय होता है:

केस 1: न्यूनतम सीमा पर योगदान

ज्यादातर कंपनियां बेसिक सैलरी की सरकारी सीमा यानी ₹15,000 प्रति महीने पर ही 12% ईपीएफ काटती हैं। इस स्थिति में आपके और कंपनी के हिस्से को मिलाकर हर महीने कुल ₹3,600 ईपीएफ में जमा होंगे। अगर वर्तमान ब्याज दर 8.25% और निवेश की अवधि 30 साल मान लें, तो रिटायरमेंट पर आपको मिलेंगे करीब ₹57 लाख।

केस 2: वास्तविक बेसिक सैलरी पर योगदान

अब मान लीजिए आपकी कंपनी आपकी वास्तविक बेसिक सैलरी जो सीटीसी का 50% यानी ₹50,000 महीना है उस पर 12% पीएफ काटती है। ऐसे में आपका और कंपनी का मिलाकर हर महीने कुल योगदान ₹12,000 हो जाता है। इसी 8.25% ब्याज दर और 30 साल की अवधि में आपका कुल फंड बढ़कर ₹1.9 करोड़ हो जाएगा!

यानी सिर्फ बेसिक सैलरी पर पीएफ कैलकुलेट करवाने से आपकी जेब में बिना किसी अतिरिक्त प्रयास के ₹1.3 करोड़ से अधिक का अतिरिक्त फंड जुड़ जाता है। यह है कंपाउंडिंग की असली ताकत।

VPF कराएगा रिटायरमेंट फंड को सीधे ₹3.2 करोड़ के पार

अगर आप अपने बुढ़ापे को और भी सुरक्षित और आलीशान बनाना चाहते हैं, तो आप VPF का विकल्प चुन सकते हैं। वीपीएफ आपको अनिवार्य 12% की सीमा से अधिक अपनी मर्जी से पीएफ में निवेश करने की छूट देता है। ऊपर दिए गए उदाहरण में अगर आप ईपीएफ के ₹12,000 के योगदान के साथ हर महीने वीपीएफ के जरिए ₹8,000 अतिरिक्त निवेश करते हैं, तो आपकी कुल मासिक बचत ₹20,000 हो जाएगी।

30 साल बाद 8.25% ब्याज के हिसाब से आपका यह फंड बढ़कर करीब ₹3.2 करोड़ हो जाएगा! यह शुरुआती ₹57 लाख के मुकाबले 5 गुना से भी ज्यादा है।

VPF कराएगा रिटायरमेंट फंड को सीधे ₹3.2 करोड़ के पार

नौकरी बदलते या जॉइन करते समय इन 3 बातों का रखें ध्यान

हर कंपनी का पीएफ काटने का नियम अलग होता है। इसलिए सैलरी डिस्कशन के समय ये बातें जरूर जांचें:

पीएफ कैलकुलेशन का आधार: कंपनी से साफ पूछें कि वे पीएफ का योगदान ₹15,000 की न्यूनतम सीमा पर कर रहे हैं या आपकी वास्तविक बेसिक सैलरी पर।

बेसिक सैलरी का हिस्सा: आपकी सीटीसी में बेसिक सैलरी का हिस्सा कितना है, क्योंकि पीएफ इसी से तय होता है।

VPF की सुविधा: क्या कंपनी आपको VPF के जरिए अतिरिक्त निवेश करने की अनुमति देती है।

टेक होम सैलरी में लगेगी चपत

ज्यादा पीएफ और वीपीएफ काटने का एक ही नुकसान है कि इससे आपकी हर महीने हाथ में आने वाली सैलरी कम हो जाती है। इसलिए निवेश बढ़ाने से पहले यह जरूर सुनिश्चित कर लें कि आपके पास इमरजेंसी फंड तैयार है और आपके मंथली खर्चे आसानी से पूरे हो रहे हैं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Retirement Planning: आप रिटायरमेंट के लिए निवेश शुरू करना चाहते हैं? तो ये बातें जरूर जान लें

क्या रिटायरमेंट बाद के खर्च के लिए आपने पैसे जुटाने शुरू कर दिए हैं? अगर नहीं तो इसमें आपको देर नहीं करना चाहिए। लेकिन, इससे पहले आपके लिए यह जानना जरूरी है कि आपका रिटायरमेंट फंड कितना बड़ा होना चाहिए। यह सुनने में आसान लगता है लेकिन यह सवाल मुश्किल है। इसकी वजह यह है कि आज आपको अपने लिए जितना फंड पर्याप्त लगता है, उसकी वैल्यू 10-15 साल बाद काफी कम रह जाएगी।

रिटायरमेंट बाद के खर्च का अंदाजा

कई लोग रिटायरमेंट बाद के खर्चों का सही अंदाजा नहीं लगा पाते। आज आप हर महीने जितना खर्च करते हैं, उतना रिटायरमेंट के बाद आपको खर्च करने की जरूरत नहीं रह जाएगी। कुछ खर्च आपके बजट से निकल जाएंगे तो कुछ नए खर्च आपके बजट में शामिल हो जाएंगे। उदाहरण के लिए घर की EMI चुकाने की जरूरत आपको नहीं रह जाएगी। लेकिन मेडिकल केयर पर होने वाला खर्च बढ़ जाएगा।

इनफ्लेशन से पैसे की वैल्यू घटती रहती है

इनफ्लेशन के असर से पैसे की वैल्यू लगातार घटती रहती है। इसे हम एक उदाहरण की मदद से समझ सकते हैं। मान लीजिए आज आपके परिवार का मंथली खर्च 45,000 रुपये है। 20 साल बाद आपको सेम लाइफ स्टाइल के लिए 1 लाख रुपये से ज्यादा मंथली खर्च करना पड़ेगा। इसकी वजह है कि हर साल इनफ्लेशन की वजह से पैसे की वैल्यू 6 फीसदी तक घटती जाती है।

कम से कम 25 साल के खर्च का इंतजाम जरूरी

दूसरा, लोगों को यह पता नहीं होता कि रिटायरमेंट बाद उन्हें कितने सालों तक खर्च करने की जरूरत पड़ेगी। व्यक्ति जितने लंबे समय तक जीवित रहेगा, उसे उतने लंबे समय तक पैसे खर्च करने की जरूरत पड़ेगी। अगर कोई व्यक्ति 60 साल में रिटायर करता है तो उसे कम से कम अगले 25 सालों तक के खर्च के बारे में सोचना चाहिए।

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निवेश के कई विकल्पों का कर सकते हैं इस्तेमाल 

एक्सपर्ट्स का कहना है कि रिटायरमेंट के लिए फंड तैयार करने के लिए निवेश के कई विकल्पों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इनमें पीपीएफ, एनपीएस, म्यूचुअल फंड की स्कीम आदि शामिल हैं। अगर आप नौकरी करते हैं तो आपके रिटायरमेंट प्लानिंग में ईपीएफ भी शामिल होगा। आप जितना जल्द रिटारमेंट के लिए निवेश शुरू करेंगे, आपके लिए उतना बड़ा फंड तैयार करने की गुंजाइश होगी। साथ ही लंबी अवधि में आपके पैसे पर कंपाउंडिंग का भी फायदा मिलेगा।