Retirement Planning: सुकन्या समृद्धि, पीपीएफ और SIP में मंथली ₹10000 इनवेस्ट करने से कितना बड़ा फंड बनेगा? समझें पूरा कैलकुलेशन

रिटायरमेंट प्लानिंग जल्द करने के कई फायदे हैं। निवेश के लिए ज्यादा समय मिलता है। पैसे को बढ़ने के लिए भी पर्याप्त समय मिल जाता है। करियर की शुरुआत में व्यक्ति पर आर्थिक जिम्मेदारी कम होती है। इससे निवेश करने में दिक्कत नहीं आती है। सवाल है कि अगर 40 साल का कोई व्यक्ति अगले 15 साल के लिए निवेश करना चाहता है तो उसके लिए बेस्ट इनवेस्टमेंट ऑप्शन क्या होगा?

15 साल में निवेश से बनेगा बड़ा फंड

एक्सपर्ट्स का कहना है कि 15 साल का पीरियड निवेश के लिए अच्छा है। अगर हर महीने 10000 रुपये का निवेश 15 साल तक किया जाए तो अच्छा फंड तैयार हो सकता है। लंबी अवधि के निवेश के लिए कुछ अच्छे विकल्प हैं। इनमें पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF), सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) और म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम में SIP शामिल हैं।

पीपीएफ और SSY सरकारी की स्कीम

पीपीएफ और एसएसवाय सरकारी की स्कीम हैं। ये फिक्स्ड रिटर्न स्कीम हैं। इसका मतलब है कि निवेश से पहले आपको अंदाजा मिल जाता है कि किसी खास अवधि तक निवेश करने के बाद आपके लिए कितना बड़ा फंड तैयार होगा। सरकार की स्कीम होने की वजह से यह पूरी तरह सुरक्षित हैं। इनमें पैसा डूबने का डर ना के बराबर है। इसके अलावा इनके रिटर्न पर शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव का कोई असर नहीं पड़ता है।

SIP से मंथली निवेश करने में रिस्क

म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम में SIP उन लोगों के लिए सही है, जो निवेश पर रिस्क ले सकते हैं। इसकी वजह यह है कि म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम सिप से हर महीने निवेश के पैसे को शेयर बाजार में लगाती है। इसलिए स्कीम के रिटर्न पर शेयर बाजार के प्रदर्शन का सीधा असर पड़ता है। शेयर बाजार का प्रदर्शन अच्छा रहने पर ज्यादा रिटर्न मिलता है, जबकि प्रदर्शन खराब होने पर रिटर्न भी कम रह सकता है।

एसएसवाय में निवेश का पीरियड 15 साल

अब हम देखेंगे कि तीनों इनवेस्टमेंट ऑप्शंस में मंथली 10,000 रुपये के निवेश से 15 साल में कितना बड़ा फंड तैयार होता है। सबसे पहले हम SSY का उदाहरण लेते हैं। यह स्कीम उन लोगों के लिए है, जिनकी बेटियां हैं। माता-पिता मैक्सिमम दो बेटियों के नाम से सुकन्या समृद्धि अकाउंट ओपन कर सकते हैं। एक बेटी के नाम से सिर्फ एक अकाउंट ओपन होगा। बेटी की उम्र 10 साल से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।

एसएसवाय का इंटरेस्ट रेट सालाना 8.2 फीसदी

सुकन्या समृद्धि स्कीम का इंटरेस्ट रेट 8.2 फीसदी है। इस स्कीम में सिर्फ 15 साल तक निवेश करना होता है। अकाउंट ओपन करने के 21 साल बाद स्कीम मैच्योर हो जाती है। इसका मतलब है कि अगर बेटी की उम्र अभी 5 साल है तो मंथली 10,000 रुपये 15 साल तक निवेश करने पर साल 2047 तक करीब 55,42,062 लाख रुपये का फंड तैयार हो जाएगा। इसमें 15 साल में कुल निवेश 18,00,000 रुपये होगा। इस पर आपको 37,42,062 रुपये का इंटरेस्ट मिलेगा। मैच्योरिटी अमाउंट पर टैक्स नहीं लगेगा।

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पीपीएफ का इंटरेस्ट रेट सालाना 7.1 फीसदी 

PPF की स्कीम 15 साल में मैच्योर हो जाती है। इसका इंटरेस्ट रेट अभी 7.1 फीसदी है। इस तरह आप 15 साल में कुल 18,00,000 रुपये निवेश करेंगे। इस पर आपको कुल 14,54,567 रुपये का इंटरेस्ट मिलेगा। कुल मिलाकर 15 साल बाद आपको कुल 32,54,567 लाख रुपये मिलेंगे। इस पैसे पर आपको कोई टैक्स नहीं चुकाना होगा। अगर आप इनकम टैक्स की ओल्ड रीजीम का इस्तेमाल करते हैं तो आप निवेश के पैसे पर डिडक्शंस क्लेम कर सकते हैं।

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सिप से निवेश करने में बनेगा सबसे बड़ा फंड

म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम में मंथली 10000 रुपये का निवेश करने पर कुल 47,59,314 रुपये का फंड बनेगा। इस कैलकुलेशन में सालाना 12 फीसदी रिटर्न माना गया है। इसका मतलब है कि 15 साल में आपका 18 लाख रुपये का निवेश कंपाउंडिंग की वजह से 29,59,314 रुपये का रिटर्न जेनरेट करता है। लेकिन, ध्यान देने वाली बात यह है कि इस पैसे पर आपको कैपिटल गेंस टैक्स चुकाना होगा। लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस का रेट 12.5 फीसदी है। इस रेट से कुल 5,94,914.25 रुपये टैक्स लगेगा। इसके बावजूद 15 साल का रिटर्न पीपीएफ और सुकन्या समृद्धि योजना से ज्यादा है।

Post Office Scheme: पोस्ट ऑफिस की इस स्कीम में करें ₹6,000 मंथली निवेश, 5 साल बाद मिलंगे इतने लाख

Post Office RD Scheme: अगर आप शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव, गिरावट और जोखिम से दूर रहकर हर महीने एक निश्चित बचत करना चाहते हैं, तो पोस्ट ऑफिस की रिकरिंग डिपॉजिट (RD) योजना आपके लिए एक बेहतरीन और सुरक्षित विकल्प साबित हो सकती है। इस सरकारी बचत योजना में आपको एकमुश्त बड़ी रकम निवेश करने की जरूरत नहीं होती, बल्कि आप हर महीने छोटी-छोटी किस्तें जमा करके भविष्य के लिए एक बड़ा फंड तैयार कर सकते हैं।

क्यों खास है पोस्ट ऑफिस की आरडी स्कीम

सुरक्षित और गारंटीड रिटर्न: यह योजना केंद्र सरकार द्वारा समर्थित है, इसलिए इसमें आपका पैसा 100% सुरक्षित रहता है और बाजार के जोखिम का कोई असर नहीं पड़ता।

आसान निवेश सीमा: इसमें न्यूनतम ₹100 प्रति माह से खाता खोला जा सकता है। अधिकतम निवेश की कोई तय सीमा नहीं है।

तय समय सीमा: पोस्ट ऑफिस RD योजना की आधिकारिक अवधि 5 साल (60 महीने) होती है।

आकर्षक ब्याज दर: वर्तमान में इस योजना पर 6.7% सालाना ब्याज (तिमाही चक्रवृद्धि) के आधार पर रिटर्न दिया जा रहा है।

₹6,000 हर महीने जमा करने पर कितना मिलेगा?

मान लीजिए आप अपनी मासिक कमाई या सैलरी से हर महीने ₹6,000 की बचत करते हैं और इसे पोस्ट ऑफिस की आरडी स्कीम में जमा करते हैं। 5 साल पूरे होने पर आपकी मैच्योरिटी राशि का पूरा गणित इस प्रकार होगा:

  • मासिक किस्त: ₹6,000
  • निवेश की अवधि: 5 साल (60 महीने)
  • कुल जमा पूंजी: ₹3,60,000
  • अनुमानित ब्याज आय (6.7%): ₹68,185 (लगभग ₹68 हजार)
  • मैच्योरिटी पर मिलने वाली कुल रकम: ₹4,28,185 (लगभग ₹4.28 लाख)

(नोट: यह अनुमानित गणना लागू 6.7% ब्याज दर पर आधारित है। मैच्योरिटी के समय लागू ब्याज दरों और डाकघर के आधिकारिक नियमों के अनुसार मिलने वाली राशि में आंशिक बदलाव संभव है।)

निवेश करने से पहले इन महत्वपूर्ण नियमों पर दें ध्यान

समय पर किस्त जमा करना अनिवार्य: आरडी में हर महीने तय तारीख तक किस्त जमा करनी होती है। किस्त जमा करने में देरी होने पर नियमों के मुताबिक पेनाल्टी या जुर्माना लग सकता है।

समय से पहले निकासी: अगर आपको अवधि पूरी होने से पहले पैसों की सख्त जरूरत पड़ती है, तो खाता खोलने के 3 साल पूरे होने के बाद इसे बंद कराने की सुविधा मिलती है, लेकिन इससे ब्याज दर पर असर पड़ सकता है।

टैक्स नियम: पोस्ट ऑफिस आरडी में मिलने वाला ब्याज पूरी तरह टैक्स-फ्री नहीं होता है। लागू आयकर नियमों के अनुसार ब्याज आय पर टैक्स चुकाना पड़ सकता है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Retirement Planning: ₹50000 मंथली सिप से बन जाएगा 8 करोड़ रुपये का रिटायरमेंट फंड, जानिए कैसे

रिटायरमेंट प्लानिंग के बारे में लोगों के मन में कई तरह के सवाल चलते रहते हैं। इसमें से एक सवाल है कि 35 साल का एक व्यक्ति जिसकी मंथली सैलरी 2 लाख रुपये है क्या वह मंथली 50,000 रुपये के निवेश से 5-8 करोड़ रुपये का रिटायरमेंट फंड तैयार कर सकता है?

रिटायरमेंट फंड का टारगेट और मंथली इनवेस्टमेंट की जानकारी अहम

मनीकंट्रोल ने बजाज कैपिटल के ज्वाइंट चेयरमैन एवं एमडी संजीव बजाज से इस सवाल का जवाब पूछा। उन्होंने कहा कि इस मामले में दो चीजें बिल्कुल साफ हैं। पहला, व्यक्ति कितना बड़ा रिटायरमेंट फंड जुटाना चाहता है। दूसरा, वह मंथली कितना इनवेस्ट कर सकता है। अब यह देखना है कि क्या इन दोनों इनपुट्स से टारगेट हासिल किया जा सकता है।

35 साल की उम्र में निवेश शुरू करने पर मिलेगा 25 साल का वक्त

मान लीजिए आप हर महीने 50,000 रुपये का निवेश तब तक करते हैं, जब तक आपकी उम्र 60 साल की नहीं हो जाती। इसका मतलब है कि अगर 35 साल की उम्र में आप निवेश शुरू करते हैं तो आपके पास निवेश के लिए करीब 25 साल का समय होगा। रिटायरमेंट फंड मार्केट के रिटर्न पर निर्भर करेगा।

सालाना रिटर्न के हिसाब से रिटायरमेंट फंड का आकार बदल जाएगा

अब हम तीन तरह की स्थितियों को लेकर चलते हैं। पहले में हम सालाना रिटर्न अगर 8 फीसदी मानते हैं तो इसका मतलब है कि रिटायरमेंट फंड करीब 4.6 करोड़ रुपये का होगा। अगर हम सालाना रिटर्न 10 फीसदी मानते हैं तो इसका मतलब है कि रिटायरमेंट फंड 6.2 करोड़ रुपये का होगा। 12 फीसदी रिटर्न पर यह करीब 8.5 करोड़ रुपये होगा।

रिटायरमेंट फंड पर इनफ्लेशन के पड़ने वाले असर का ध्यान रखना होगा

इसका मतलब है कि कैलकुलेशन के आधार पर अलग-अलग रिटर्न के हिसाब से 5-8 करोड़ रुपये का रिटायरमेंट फंड तैयार हो सकता है। लेकिन, अब एक बड़ा सवाल है कि आज से 25 साल बाद 5-8 करोड़ रुपये की असल वैल्यू कितनी रह जाएगी? अगर हम 6 फीसदी इनफ्लेशन मान लें तो 25 साल बाद 5 करोड़ रुपये की परचेंजिंग पावर करीब 1.2 करोड़ रुपये रह जाएगी।

इनफ्लेशन की वजह से लंबी अवधि में धीरे-धीरे घटती जाती है पैसे की वैल्यू

8 करोड़ रुपये की परचेंजिंग पावर 1.9 करोड़ रुपये रह जाएगी। इसका मतलब है कि 25 साल बाद हम 8 करोड़ रुपये से उतनी चीजें खरीद पाएंगे जितनी आज हम 1.9 करोड़ रुपये से खरीद सकते हैं। इसलिए रिटायरमेंट प्लानिंग करने में अपने लाइफ स्टाइल को ध्यान में रखना बहुत जरूरी है।

धीरे-धीरे सिप के अमाउंट को बढ़ाने पर लंबी अवधि में बड़ा फर्क पड़ता है

रिटायरमेंट प्लानिंग में धीरे-धीरे सिप के अमाउंट को बढ़ाने से बड़ा फर्क पड़ता है। अगर आप आज 35 साल की उम्र में हर महीने 50,000 रुपये से निवेश शुरू करते हैं तो पूरे करियर के दौरान आपका मंथली निवेश सिर्फ 50,000 नहीं रहेगा। इनकम बढ़ने के साथ आप अपना मंथली इनवेस्टमेंट बढा सकते हैं। अगर हर साल आप इसे 10 फीसदी बढ़ाते हैं तो काफी ज्यादा फर्क देखने को मिलेगा।

इनवेस्टमेंट में डायवर्सिफिकेशन का भी ध्यान रखना सबसे जरूरी

जब आप लंबी अवधि का निवेश करते हैं तो आप शेयरों से जुड़े इनवेस्टमेंट ऑप्शंस में निवेश के बारे में सोच सकते हैं। लेकिन, इसमें डायवर्सिफिकेशन का ध्यान रखना जरूरी है। आपकी रिटायरमेंट प्लानिंग में ईपीएफ या एनपीएस का कंट्रिब्यूशन शामिल हो सकता है। जैसे-जैसे आप रिटायरमेंट की तरफ बढ़ते हैं आपका फोकस वेल्थ क्रिएशन की जगह वेल्थ प्रोटेक्शन पर होना चाहिए।

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निवेश के दौरान इन तीन चीजों का भी जरूर रखें ध्यान 

इस दौरान आपको हेल्थ इंश्योरेंस, टर्म इंश्योरेंस और इमर्जेंसी फंड को भी बनाए रखना होगा। इसका फायदा यह है कि किसी अनहोनी की स्थिति में आपके इनवेस्टमेंट पर खराब असर नहीं पड़ेगा। साथ ही आपको अपने इनवेस्टमेंट प्लान को साल में एक बार रिव्यू करना होगा। जरूरत पड़ने पर आप इस प्लान में बदलाव कर सकते है। इस तरह से आप अपने लिए एक बड़ा रिटायरमेंट फंड तैयार कर सकते हैं।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

SIP में डेली भी कर सकते हैं इनवेस्ट, मंथली सिप और डेली सिप में से किसमें निवेश करने पर होगी ज्यादा कमाई?

कई लोग अपना खर्च रोजाना की इनकम से चलाते हैं। छोटे दुकानदार और स्व-रोजगार करने वाले लोग इस कैटेगरी में आते हैं। ऐसे लोगों के लिए सेविंग्स और इनवेस्टमेंट एक बड़ा चैलेंज होता है, क्योंकि उनके बैंक अकाउंट में हर महीने के अंत में सैलरी नहीं आती है। ऐसे लोगों के लिए डेली सिप इनवेस्टमेंट का एक आसान जरिया है।

कुछ खास इनवेस्टर्स के लिए शुरू हुआ डेली सिप

पैसाबाजार ने अपने प्लेटफॉर्म पर Daily SIP का ऑप्शन शुरू किया है। इसमें इनवेस्टर हर महीने की एक निश्चित तारीख को एक निश्चित अमाउंट इनवेस्टर करने की जगह रोजाना इनवेस्ट कर सकता है। छोटे दुकानदार, गिग वर्कर्स और सेल्फ-एंप्लॉयड लोगों को ध्यान में रख इसे शुरू किया गया है। चूंकि ऐसे लोगों को हर महीने सैलरी नहीं मिलती है, जिससे उनके लिए मंथली सिप में निवेश करने में दिक्कत आती है।

रिटर्न के मामले में मंथली सिप और डेली सिप में फर्क नहीं

एक्सपर्ट्स का कहना है कि हर महीने की जगह रोजाना सिप में निवेश करने का मतलब यह नहीं है कि इनवेस्टर का रिटर्न बढ़ जाएगा। रिटर्न निवेश किए गए अमाउंट, म्यूचुअल फंड की स्कीम, निवेश की अवधि और बाजार की स्थितियों पर निर्भर करेगा। ऐसे इनवेस्टर्स जिनके बैंक अकाउंट में हर महीने निश्चित तारीख को सैलरी आती है, उनके लिए मंथली सिप निवेश का आसान जरिया है।

एकमुश्त मंथली निवेश की जगह रोजाना थोड़ा-थोड़ा निवेश

डेली सिप यानी रोजाना के सिप में फर्क यह है कि पैसा महीने में एक बार सिप में डालने की जगह उस पैसे को थोड़ा-थोड़ा कर हर दिन आप सिप में डालते हैं। इसे एक उदाहरण की मदद से आसानी से समझा जा सकता है। मान लीजिए आप सिप में मंथली 3000 रुपये निवेश करते हैं। अगर आप इस पैसे को महीने में एकमुश्त निवेश नहीं कर सकते हैं तो आप थोड़ा-थोड़ा कर रोज इनवेस्ट कर सकते हैं।

सिप निवेश का सिर्फ एक अनुशासित तरीका है, जिससे बड़ा फंड तैयार होता है

सिप की खास बात यह है कि यह निवेश का एक अनुशासित तरीका है। अगर आप मंथली सिप करते हैं तो इसका मतलब है कि आप हर महीने अपनी कमाई का कुछ हिस्सा ऐसी स्कीम में डालते हैं तो जो लंबी अवधि में आपके पैसे को कई गुना बना सकती है। इसी तरह डेली सिप से भी आपका पैसा उस स्कीम में जाता है, जिसे आप सेलेक्ट करते हैं। लंबी अवधि में इस पैसे पर आपाक रिटर्न स्कीम के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा। सिप लोगों में सिर्फ इनवेस्टमेंट की हैबिट बनाते में मदद करता है।

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म्यूचुअल फंड में लंबी अवधि तक निवेश करने पर अच्छा रिटर्न 

यह देखा गया है कि शेयर बाजार में निवेश करने पर लंबी अवधि यानी 8-10 साल में अच्छा रिटर्न मिलता है। इससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ता है कि आप डेली सिप से निवेश करते हैं या मंथली सिप से। फर्क इस बात से पड़ता है कि आपको लंबी समय तक लगातार यानी अनुशासित तरीके से निवेश करना होगा। तभी 10-15 सालों में आपके लिए बड़ा फंड तैयार होगा।

PPF vs NPS: किस स्कीम में निवेश से बड़ा रिटायरमेंट फंड बनेगा? पूरा कैलकुलेशन समझिए

PPF vs NPS: जब रिटायरमेंट प्लानिंग की बात होती है, तो दो स्कीमों पर सबसे अधिक जोर रहता है… पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) और नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) इन दोनों को अच्छा विकल्प माना जाता हैं, लेकिन दोनों में फर्क है। PPF सुरक्षित निवेश है। इसका ब्याज सरकार तय करती है। वहीं NPS बाजार से जुड़ा है। इसमें ज्यादा रिटर्न मिलने की संभावना होती है, लेकिन रिटर्न तय नहीं होता।

किस स्कीम में कितना फंड बनेगा?

PPF और NPS में वक्त के साथ बड़ा रिटायरमेंट फंड सकता है। यहां ₹2,000, ₹5,000 और ₹12,500 मंथली निवेश का कैलकुलेशन है। इसमें 30 साल तक निवेश की अवधि मानी गई है। PPF पर 7.1% सालाना ब्याज और NPS में 10% सालाना औसत रिटर्न मानकर कैलकुलेशन किया गया है।

हर महीने निवेश30 साल में कुल निवेशPPF में अनुमानित फंड
NPS में अनुमानित फंड

₹2,000₹7.20 लाख₹25.03 लाख₹45.59 लाख
₹5,000₹18 लाख₹62.58 लाख₹1.14 करोड़
₹12,500₹45 लाख₹1.56 करोड़₹2.85 करोड़

दोनों स्कीम में निवेश की अवधि और रकम समान है। फर्क रिटर्न का है। इसी वजह से लंबे समय में NPS में बड़ा फंड बन सकता है।

₹2,000 की मंथली निवेश

अगर आप 30 साल तक हर महीने ₹2,000 निवेश करते हैं, तो कुल ₹7.20 लाख जमा होंगे। PPF में 7.1% के हिसाब से फंड करीब ₹25.03 लाख हो सकता है।

वहीं NPS में 10% औसत रिटर्न मिलने पर फंड करीब ₹45.59 लाख पहुंच सकता है। यानी ₹2,000 की छोटी मंथली निवेश भी लंबे समय में अच्छा फंड बना सकती है।

₹5,000 की मंथली निवेश

हर महीने ₹5,000 निवेश करने पर 30 साल में आपकी जेब से ₹18 लाख जाएंगे। PPF में अनुमानित फंड करीब ₹62.58 लाख बन सकता है।

वहीं NPS में 10% औसत रिटर्न के हिसाब से फंड करीब ₹1.14 करोड़ हो सकता है। यानी PPF के मुकाबले करीब ₹51 लाख ज्यादा फंड बन सकता है।

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₹12,500 की मंथली निवेश

हर महीने ₹12,500 निवेश करने पर 30 साल में कुल ₹45 लाख जमा होंगे। PPF में 7.1% ब्याज के हिसाब से फंड करीब ₹1.56 करोड़ तक पहुंच सकता है।

NPS में 10% औसत रिटर्न मिलने पर यही फंड करीब ₹2.85 करोड़ हो सकता है। दोनों के बीच करीब ₹1.29 करोड़ का अंतर है। यह अंतर कंपाउंडिंग और ज्यादा रिटर्न की वजह से बनता है।

NPS में ज्यादा फंड क्यों बन सकता है?

NPS का पैसा इक्विटी, सरकारी बॉन्ड और कॉरपोरेट बॉन्ड में लगाया जाता है। इक्विटी की वजह से लंबे समय में ज्यादा रिटर्न मिलने की संभावना रहती है।

लेकिन बाजार का जोखिम भी होता है। 10% रिटर्न की कोई गारंटी नहीं है। खराब बाजार के दौरान फंड की वैल्यू कम हो सकती है।

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NPS का पूरा पैसा एकमुश्त नहीं मिलेगा

ऊपर टेबल में दिखाया गया NPS का फंड कुल रिटायरमेंट कॉर्पस है। मौजूदा सामान्य नियमों के तहत 60 साल की उम्र पर अधिकतम 60% रकम एकमुश्त निकाली जा सकती है। बाकी रकम से एन्युटी खरीदनी पड़ती है, जिससे नियमित पेंशन मिलती है।

उदाहरण के लिए, ₹12,500 की मंथली निवेश से ₹2.85 करोड़ का कॉर्पस बनता है। इसमें से 60% यानी करीब ₹1.71 करोड़ एकमुश्त मिल सकते हैं। बाकी करीब ₹1.14 करोड़ एन्युटी में जा सकते हैं।

PPF में मैच्योरिटी की रकम आपके हाथ में

PPF की मैच्योरिटी अवधि 15 साल है। इसे तय नियमों के तहत आगे बढ़ाया जा सकता है। PPF में बाजार का जोखिम नहीं होता।

सबसे बड़ी बात यह है कि मैच्योरिटी की पूरी रकम आपके नियंत्रण में रहती है। आपको एन्युटी खरीदना जरूरी नहीं होता। आप अपनी जरूरत के हिसाब से पैसा इस्तेमाल कर सकते हैं।

रिटायरमेंट के लिए कौन बेहतर?

अगर आपको सुरक्षित रिटर्न चाहिए, तो PPF बेहतर हो सकता है। अगर आपकी उम्र कम है और रिटायरमेंट में काफी समय बाकी है, तो NPS बड़ा कॉर्पस बनाने में मदद कर सकता है।

दोनों में निवेश करना भी एक विकल्प है। इससे बाजार की ग्रोथ और सुरक्षित निवेश, दोनों का फायदा मिल सकता है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।