PPF vs NPS: किस स्कीम में निवेश से बड़ा रिटायरमेंट फंड बनेगा? पूरा कैलकुलेशन समझिए

PPF vs NPS: जब रिटायरमेंट प्लानिंग की बात होती है, तो दो स्कीमों पर सबसे अधिक जोर रहता है… पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) और नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) इन दोनों को अच्छा विकल्प माना जाता हैं, लेकिन दोनों में फर्क है। PPF सुरक्षित निवेश है। इसका ब्याज सरकार तय करती है। वहीं NPS बाजार से जुड़ा है। इसमें ज्यादा रिटर्न मिलने की संभावना होती है, लेकिन रिटर्न तय नहीं होता।

किस स्कीम में कितना फंड बनेगा?

PPF और NPS में वक्त के साथ बड़ा रिटायरमेंट फंड सकता है। यहां ₹2,000, ₹5,000 और ₹12,500 मंथली निवेश का कैलकुलेशन है। इसमें 30 साल तक निवेश की अवधि मानी गई है। PPF पर 7.1% सालाना ब्याज और NPS में 10% सालाना औसत रिटर्न मानकर कैलकुलेशन किया गया है।

हर महीने निवेश30 साल में कुल निवेशPPF में अनुमानित फंड
NPS में अनुमानित फंड

₹2,000₹7.20 लाख₹25.03 लाख₹45.59 लाख
₹5,000₹18 लाख₹62.58 लाख₹1.14 करोड़
₹12,500₹45 लाख₹1.56 करोड़₹2.85 करोड़

दोनों स्कीम में निवेश की अवधि और रकम समान है। फर्क रिटर्न का है। इसी वजह से लंबे समय में NPS में बड़ा फंड बन सकता है।

₹2,000 की मंथली निवेश

अगर आप 30 साल तक हर महीने ₹2,000 निवेश करते हैं, तो कुल ₹7.20 लाख जमा होंगे। PPF में 7.1% के हिसाब से फंड करीब ₹25.03 लाख हो सकता है।

वहीं NPS में 10% औसत रिटर्न मिलने पर फंड करीब ₹45.59 लाख पहुंच सकता है। यानी ₹2,000 की छोटी मंथली निवेश भी लंबे समय में अच्छा फंड बना सकती है।

₹5,000 की मंथली निवेश

हर महीने ₹5,000 निवेश करने पर 30 साल में आपकी जेब से ₹18 लाख जाएंगे। PPF में अनुमानित फंड करीब ₹62.58 लाख बन सकता है।

वहीं NPS में 10% औसत रिटर्न के हिसाब से फंड करीब ₹1.14 करोड़ हो सकता है। यानी PPF के मुकाबले करीब ₹51 लाख ज्यादा फंड बन सकता है।

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₹12,500 की मंथली निवेश

हर महीने ₹12,500 निवेश करने पर 30 साल में कुल ₹45 लाख जमा होंगे। PPF में 7.1% ब्याज के हिसाब से फंड करीब ₹1.56 करोड़ तक पहुंच सकता है।

NPS में 10% औसत रिटर्न मिलने पर यही फंड करीब ₹2.85 करोड़ हो सकता है। दोनों के बीच करीब ₹1.29 करोड़ का अंतर है। यह अंतर कंपाउंडिंग और ज्यादा रिटर्न की वजह से बनता है।

NPS में ज्यादा फंड क्यों बन सकता है?

NPS का पैसा इक्विटी, सरकारी बॉन्ड और कॉरपोरेट बॉन्ड में लगाया जाता है। इक्विटी की वजह से लंबे समय में ज्यादा रिटर्न मिलने की संभावना रहती है।

लेकिन बाजार का जोखिम भी होता है। 10% रिटर्न की कोई गारंटी नहीं है। खराब बाजार के दौरान फंड की वैल्यू कम हो सकती है।

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NPS का पूरा पैसा एकमुश्त नहीं मिलेगा

ऊपर टेबल में दिखाया गया NPS का फंड कुल रिटायरमेंट कॉर्पस है। मौजूदा सामान्य नियमों के तहत 60 साल की उम्र पर अधिकतम 60% रकम एकमुश्त निकाली जा सकती है। बाकी रकम से एन्युटी खरीदनी पड़ती है, जिससे नियमित पेंशन मिलती है।

उदाहरण के लिए, ₹12,500 की मंथली निवेश से ₹2.85 करोड़ का कॉर्पस बनता है। इसमें से 60% यानी करीब ₹1.71 करोड़ एकमुश्त मिल सकते हैं। बाकी करीब ₹1.14 करोड़ एन्युटी में जा सकते हैं।

PPF में मैच्योरिटी की रकम आपके हाथ में

PPF की मैच्योरिटी अवधि 15 साल है। इसे तय नियमों के तहत आगे बढ़ाया जा सकता है। PPF में बाजार का जोखिम नहीं होता।

सबसे बड़ी बात यह है कि मैच्योरिटी की पूरी रकम आपके नियंत्रण में रहती है। आपको एन्युटी खरीदना जरूरी नहीं होता। आप अपनी जरूरत के हिसाब से पैसा इस्तेमाल कर सकते हैं।

रिटायरमेंट के लिए कौन बेहतर?

अगर आपको सुरक्षित रिटर्न चाहिए, तो PPF बेहतर हो सकता है। अगर आपकी उम्र कम है और रिटायरमेंट में काफी समय बाकी है, तो NPS बड़ा कॉर्पस बनाने में मदद कर सकता है।

दोनों में निवेश करना भी एक विकल्प है। इससे बाजार की ग्रोथ और सुरक्षित निवेश, दोनों का फायदा मिल सकता है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

PPF Calculator: PPF में मंथली निवेश करें या साल में एकमुश्त, किसमें ज्यादा फायदा है? समझिए पूरा कैलकुलेशन

PPF Calculator: पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) में निवेश करने वालों के सामने अक्सर यह सवाल आता है कि हर महीने पैसा जमा करना बेहतर है या पूरे साल का पैसा एक साथ जमा कर देना चाहिए। दोनों तरीकों में निवेश की रकम समान हो सकती है, लेकिन ब्याज में बड़ा अंतर आ सकता है।

मान लीजिए आप हर वित्त वर्ष PPF में ₹1.5 लाख निवेश करते हैं। आप चाहें तो ₹12,500 हर महीने जमा करें। दूसरा तरीका है कि पूरे ₹1.5 लाख साल की शुरुआत में ही PPF में डाल दें। लेकिन, दोनों का कैलकुलेशन आखिर में दिलचस्प तस्वीर दिखाता है।

₹1.5 लाख एकमुश्त या ₹12,500 मंथली?

यहां 15 साल का एक उदाहरण देखते हैं। कैलकुलेशन 7.1% सालाना ब्याज दर के आधार पर किया गया है। माना गया है कि PPF की ब्याज दर पूरे 15 साल इसी स्तर पर रहती है। साथ ही मंथली निवेश हर महीने की 5 तारीख से पहले किया गया है।

सालाना अनुमानित रिटर्न

₹2 लाख तक पहुंचने में समयकुल SIP निवेशअनुमानित फंड
12.00%13 साल 5 महीने₹80,500₹2,00,130
15.00%12 साल₹72,000₹2,01,792
18.00%10 साल 10 महीने₹65,000₹2,00,552

इस हिसाब से दोनों तरीकों में कुल निवेश ₹22.50 लाख ही है। लेकिन साल की शुरुआत में एकमुश्त ₹1.5 लाख जमा करने पर मैच्योरिटी पर करीब ₹1.24 लाख ज्यादा मिल सकते हैं।

एकमुश्त निवेश पर ज्यादा फायदा क्यों?

PPF में ब्याज का हिसाब हर महीने किया जाता है। किसी महीने में 5 तारीख के बाद से लेकर महीने के आखिर तक खाते में मौजूद सबसे कम बैलेंस को ब्याज के लिए माना जाता है।

अगर आप 1 अप्रैल से 5 अप्रैल के बीच पूरे ₹1.5 लाख जमा कर देते हैं, तो पूरी रकम को उस वित्त वर्ष के सभी 12 महीनों का ब्याज मिल सकता है। वहीं मंथली निवेश में पैसा धीरे-धीरे खाते में आता है।

इसका सीधा असर ब्याज पर पड़ता है। ₹1.5 लाख को अप्रैल की शुरुआत में जमा करने पर पहले साल करीब ₹10,650 का ब्याज मिल सकता है। वहीं हर महीने ₹12,500 जमा करने पर पहले साल ब्याज करीब ₹5,769 होगा। यानी सिर्फ पहले साल में ही करीब ₹4,881 का अंतर आ सकता है।

15 साल में कैसे बढ़ता जाता है अंतर?

पहले साल एकमुश्त निवेश पर जो अतिरिक्त ब्याज मिलता है, वह अगले साल से खुद भी ब्याज कमाने लगता है। यही कंपाउंडिंग का फायदा है।

हर साल अगर आप शुरुआत में एकमुश्त निवेश करते हैं, तो आपके पैसे को ज्यादा समय तक ब्याज मिलता है। 15 साल तक यही अंतर जुड़ता जाता है। इसलिए मैच्योरिटी पर करीब ₹1.24 लाख का फासला बन सकता है।

अगर एकमुश्त ₹1.5 लाख नहीं है तो?

हर किसी के पास वित्त वर्ष की शुरुआत में ₹1.5 लाख जमा करने के लिए बड़ी रकम नहीं होती। ऐसी स्थिति में मंथली निवेश बेहतर विकल्प हो सकता है। आप हर महीने ₹12,500 जमा कर सकते हैं और पूरे साल में ₹1.5 लाख का निवेश पूरा कर सकते हैं।

बस कोशिश करें कि PPF में जमा करने वाला पैसा हर महीने की 5 तारीख से पहले खाते में पहुंच जाए। 5 तारीख के बाद जमा करने पर उस महीने का पूरा ब्याज नहीं मिलेगा। इसलिए 1 से 5 तारीख के बीच निवेश करना बेहतर माना जाता है।

साल में एक बार पैसा कब जमा करें?

अगर आपके पास पूरे साल का निवेश पहले से तैयार है, तो नया वित्त वर्ष शुरू होते ही 1 अप्रैल से 5 अप्रैल के बीच पैसा जमा करना फायदेमंद हो सकता है। इससे रकम को पूरे साल ब्याज कमाने का मौका मिलता है।

लेकिन सिर्फ ज्यादा ब्याज के लिए अपनी इमरजेंसी सेविंग या जरूरी पैसा PPF में नहीं डालना चाहिए। PPF लंबी अवधि का निवेश है और इसमें पैसे निकालने के नियम भी लागू होते हैं।

PPF में कौन सा तरीका चुनें?

अगर आपके पास साल की शुरुआत में पूरी रकम है, तो एकमुश्त निवेश से ज्यादा ब्याज मिलने की संभावना होती है। वहीं सैलरी या नियमित आमदनी से निवेश करने वालों के लिए मंथली निवेश आसान है।

मंथली निवेश में एक और फायदा है। आपको एक बार में ₹1.5 लाख की व्यवस्था नहीं करनी पड़ती। हर महीने थोड़ा-थोड़ा पैसा जमा होता रहता है। इसलिए सबसे अच्छा तरीका वही है, जिसे आप लंबे समय तक आसानी से जारी रख सकें।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

PPF vs SIP: 15 साल बाद कौन ज्यादा पैसा देगा? पूरा कैलकुलेशन समझिए

PPF vs SIP: हर साल अगर आपके पास निवेश के लिए ₹1.5 लाख हैं, तो सबसे बड़ा सवाल यही होता है। पैसा PPF में डालें या SIP करें? दोनों 15 साल के लिए अच्छे विकल्प माने जाते हैं। लेकिन दोनों का खेल अलग है। PPF में सरकार की गारंटी मिलती है। SIP में शेयर बाजार की ग्रोथ का फायदा मिलता है।

यही वजह है कि 15 साल बाद दोनों का रिजल्ट भी अलग निकलता है। अगर सिर्फ कमाई देखें तो SIP आगे निकल सकती है। लेकिन सुरक्षा और टैक्स के मामले में PPF की अपनी ताकत है।

PPF और SIP में सबसे बड़ा फर्क

PPF एक सरकारी बचत योजना है। इसमें ब्याज तय होता है और फिलहाल यह 7.1% है। इसमें पैसा सुरक्षित रहता है और मैच्योरिटी पर मिलने वाली रकम भी टैक्स-फ्री होती है।

दूसरी तरफ SIP, म्यूचुअल फंड में निवेश का तरीका है। इसमें कोई तय रिटर्न नहीं होता। बाजार अच्छा चला तो कमाई ज्यादा हो सकती है। बाजार कमजोर रहा तो रिटर्न भी कम हो सकता है।

15 साल का हिसाब

मान लेते हैं कि आप हर साल ₹1.5 लाख निवेश करते हैं। यानी SIP में हर महीने ₹12,500 डालते हैं। तुलना के लिए SIP में 12% सालाना औसत रिटर्न का उदाहरण लिया गया है। यह इक्विटी म्यूचुअल फंड अमूमन लॉन्ग टर्म में देते हैं।

पैमानाPPF
SIP (12% उदाहरण)

हर साल निवेश₹1.5 लाख₹1.5 लाख
कुल निवेश₹22.5 लाख₹22.5 लाख
अनुमानित रिटर्न7.10%12.00%
15 साल बाद रकम₹40.7 लाख₹63.1 लाख
कुल मुनाफा₹18.2 लाख₹40.6 लाख

यानी इस मामले में SIP, PPF से करीब ₹22 लाख ज्यादा पैसा बना सकती है।

उदाहरण से समझिए

मान लीजिए राहुल और अमित दोनों हर साल ₹1.5 लाख निवेश करते हैं। राहुल PPF चुनता है। अमित हर महीने ₹12,500 की SIP करता है।

15 साल बाद राहुल के पास करीब ₹40.7 लाख होंगे। वहीं अमित के पास करीब ₹63.1 लाख हो सकते हैं। दोनों ने बराबर पैसा लगाया, लेकिन रिटर्न का फर्क करीब ₹22 लाख तक पहुंच गया।

अगर SIP का रिटर्न बदल जाए तो?

यहीं असली बात है। SIP में कोई गारंटी नहीं होती। इसलिए अलग-अलग रिटर्न पर तस्वीर बदल जाती है।

SIP का औसत रिटर्न15 साल बाद रकम
8%₹43 लाख
10%₹52 लाख
12%₹63 लाख
15%₹84 लाख

यानी 8% पर SIP और PPF का फर्क बहुत कम रह जाता है। लेकिन 12-15% रिटर्न मिलने पर अंतर तेजी से बढ़ जाता है।

टैक्स में कौन आगे है?

PPF का सबसे बड़ा फायदा टैक्स है। इसमें जमा किया गया पैसा, मिलने वाला ब्याज और मैच्योरिटी पर मिलने वाली रकम तीनों टैक्स-फ्री रहती हैं।

SIP में टैक्स देना पड़ सकता है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपने किस तरह के म्यूचुअल फंड में निवेश किया है और कितने समय बाद पैसा निकाला है।

किसे क्या चुनना चाहिए?

अगर आपको बिना जोखिम वाला विकल्प चाहिए, तो PPF ज्यादा सुकून देता है। इसमें पैसा सुरक्षित रहता है और रिटर्न भी तय रहता है। अगर आपका लक्ष्य ज्यादा पैसा बनाना है और आप बाजार के उतार-चढ़ाव झेल सकते हैं, तो SIP बेहतर विकल्प बन सकती है।

दोनों में निवेश ज्यादा बेहतर

मान लीजिए आपके पास हर साल ₹1.5 लाख हैं। ऐसे में पूरा पैसा सिर्फ एक जगह लगाने की जरूरत नहीं है। आप ₹75,000 PPF में और ₹75,000 SIP में लगा सकते हैं।

इससे एक तरफ सरकारी सुरक्षा मिलती है। दूसरी तरफ बाजार की ग्रोथ का फायदा भी मिलता है। यही वजह है कि कई वित्तीय सलाहकार लंबी अवधि के लिए इस तरह का संतुलन बेहतर मानते हैं।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

PPF Calulator: हर साल PPF में ₹1.5 लाख डालने पर कितना पैसा मिलेगा? पूरा कैलकुलेशन समझिए

PPF Calulator: अगर आप हर साल ₹1.5 लाख कहीं ऐसी जगह लगाना चाहते हैं, जहां पैसा सुरक्षित रहे और धीरे-धीरे बढ़ता भी रहे, तो PPF एक अच्छा विकल्प हो सकता है। इसमें शेयर बाजार जैसा उतार-चढ़ाव नहीं होता। सरकार की गारंटी रहती है। साथ ही, लंबे समय तक पैसा छोड़ने पर कंपाउंडिंग का फायदा मिलता है। फिलहाल PPF पर 7.1% सालाना ब्याज है। सरकार इसे समय-समय पर घटा या बढ़ा सकती है।

अगर आप हर साल PPF में पूरे ₹1.5 लाख जमा करते हैं, तो 15 साल बाद आपके पास कितने पैसे होंगे? अगर यही निवेश 20 या 25 साल तक चलता रहे तो रकम कहां पहुंच जाएगी? आइए इसका पूरा हिसाब समझते हैं।

15 साल में करीब ₹41 लाख

PPF की सामान्य अवधि 15 साल होती है। इस दौरान अगर आप हर साल ₹1.5 लाख जमा करते हैं, तो अपनी जेब से कुल ₹22.50 लाख डालेंगे।

अब इसमें ब्याज जुड़ता जाएगा। 7.1% की दर को मानकर चलें तो 15 साल बाद रकम करीब ₹40.68 लाख हो सकती है। यानी ₹22.50 लाख आपने जमा किए और करीब ₹18.18 लाख ब्याज से जुड़ गए। यहीं से PPF की असली ताकत समझ आती है।

20 साल में रकम करीब ₹67 लाख

15 साल पूरे होने के बाद PPF को आगे भी जारी रखा जा सकता है। इसे 5 साल के ब्लॉक में बढ़ाया जा सकता है। अब मान लीजिए आप 20 साल तक हर साल ₹1.5 लाख डालते रहे। तब आपकी कुल जमा रकम ₹30 लाख होगी।

7.1% की दर को पूरे समय समान मानें तो 20 साल बाद यह रकम करीब ₹66.58 लाख हो सकती है। यानी आपकी जमा रकम ₹30 लाख है, लेकिन ब्याज से करीब ₹36.58 लाख और जुड़ सकते हैं।

25 साल में ₹1 करोड़ से ज्यादा

अब सबसे दिलचस्प हिसाब 25 साल का है। हर साल ₹1.5 लाख के हिसाब से 25 साल में आप कुल ₹37.50 लाख जमा करेंगे। लेकिन अगर 7.1% ब्याज दर पूरी अवधि में बनी रहती है, तो रकम करीब ₹1.03 करोड़ तक पहुंच सकती है।

यानी आपने ₹37.50 लाख लगाए और करीब ₹65.58 लाख ब्याज से जुड़ गए। कुल रकम ₹1 करोड़ के पार निकल जाती है। इसी वजह से लंबी अवधि के निवेश में सिर्फ यह देखना ठीक नहीं होता कि आपने कितना पैसा जमा किया है। यह भी देखना चाहिए कि उस पैसे को बढ़ने के लिए कितना समय मिला।

15, 20 और 25 साल का पूरा हिसाब

अवधिहर साल जमाआपकी कुल जमा रकमअनुमानित ब्याजकुल रकम
15 साल₹1.50 लाख₹22.50 लाख₹18.18 लाख₹40.68 लाख
20 साल₹1.50 लाख₹30 लाख₹36.58 लाख₹66.58 लाख
25 साल₹1.50 लाख₹37.50 लाख₹65.58 लाख₹1.03 करोड़

नोट : ये आंकड़े 7.1% ब्याज दर को पूरे 15, 20 या 25 साल तक समान मानकर निकाले गए हैं। असल में PPF की ब्याज दर बदल सकती है। इसलिए भविष्य में मिलने वाली रकम भी अलग हो सकती है।

पैसा कब जमा करना बेहतर है?

PPF में ब्याज का कैलकुलेशन महीने की 5 तारीख से महीने के अंत तक खाते में मौजूद सबसे कम रकम के आधार पर होती है। इसलिए अगर आप साल की पूरी ₹1.5 लाख की रकम एक साथ जमा करने की सोच रहे हैं, तो महीने की 5 तारीख से पहले जमा करना फायदेमंद हो सकता है।

अगर हर साल पैसा एक साथ जमा करना मुश्किल है, तो पूरे साल में भी किस्तों में रकम जमा की जा सकती है। लेकिन सालाना ₹1.5 लाख की सीमा का ध्यान रखना जरूरी है।

PPF निवेश में किन बातों का ध्यान रखें?

  • PPF में कुछ शर्तों के तहत आंशिक निकासी की सुविधा मिलती है। लेकिन इसे सेविंग अकाउंट की तरह इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
  • ब्याज दर हमेशा एक जैसी नहीं रहती। PPF की ब्याज दर सरकार तय करती है। भविष्य में यह बढ़ या घट सकती है।
  • हर साल निवेश जारी रखें। अकाउंट को चालू रखने के लिए हर वित्त वर्ष कम से कम ₹500 जमा करना जरूरी है।
  • नॉमिनी जरूर जोड़ें। इससे खाताधारक की मृत्यु की स्थिति में रकम के क्लेम की प्रक्रिया आसान हो जाती है।
  • PPF सुरक्षित निवेश है, लेकिन हर वित्तीय लक्ष्य के लिए अकेला PPF पर्याप्त नहीं। अपनी जरूरत और जोखिम के हिसाब से दूसरे निवेश विकल्प भी रखें।

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SSY vs PPF: सुकन्या समृद्धि या PPF… हर महीने ₹5000 जमा करें तो कहां बनेगा ज्यादा पैसा? समझिए पूरा हिसाब

Sukanya Samriddhi Yojana vs PPF: अगर आप हर महीने बचत करके भविष्य के लिए बड़ा फंड बनाना चाहते हैं, तो पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) और सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) दोनों अच्छे विकल्प हो सकते हैं। ये दोनों ही सरकार की गारंटी वाली योजनाएं हैं। इसलिए पैसा डूबने का जोखिम भी नहीं रहता। लेकिन सवाल यह है कि अगर हर महीने ₹5,000 जमा किए जाएं, तो आखिर किस योजना में ज्यादा पैसा मिलेगा? आइए पूरा हिसाब समझते हैं।

PPF और सुकन्या योजना में क्या अंतर है?

PPF में कोई भी भारतीय नागरिक खाता खोल सकता है। चाहे नौकरीपेशा हो, किसान हो, दुकानदार हो या छोटा कारोबारी। फिलहाल इस योजना पर 7.1% सालाना ब्याज मिल रहा है। इसका लॉक-इन पीरियड 15 साल का होता है।

वहीं सुकन्या समृद्धि योजना सिर्फ बेटियों के लिए बनाई गई है। 10 साल से कम उम्र की बेटी के नाम पर यह खाता खोला जा सकता है। इस समय इस योजना पर 8.2% सालाना ब्याज मिल रहा है। इसमें 15 साल तक पैसा जमा करना होता है, लेकिन खाता 21 साल बाद मैच्योर होता है।

हर महीने ₹5,000 जमा करने पर कितना निवेश होगा?

अगर आप हर महीने ₹5,000 जमा करते हैं, तो सालभर में कुल ₹60,000 निवेश होगा। 15 साल तक ऐसा करने पर आपका कुल निवेश ₹9 लाख होगा। अब देखते हैं कि यह ₹9 लाख आगे चलकर कितना बन सकता है।

PPF में कितना पैसा बन सकता है?

अगर PPF पर पूरे 15 साल तक 7.1% सालाना ब्याज मिलता है और आप हर साल 60,000 रुपये जमा करते हैं, तो इस दौरान आपका कुल निवेश 9 लाख रुपये होगा। इस पर आपको करीब 7.27 लाख रुपये ब्याज मिलेगा। मैच्योरिटी पर आपके हाथ में करीब 16.27 लाख रुपये होंगे। यानी 9 लाख रुपये का निवेश बढ़कर 15 साल में 16 लाख रुपये से ज्यादा हो जाएगा।

सुकन्या योजना में कितना पैसा बन सकता है?

अगर आपकी बेटी छोटी है और उसके नाम पर सुकन्या समृद्धि योजना में खाता खुलवाते हैं, तो तस्वीर पूरी तरह बदल जाती है। अगर आप 15 साल तक हर साल 60,000 रुपये जमा करते हैं, तो आपका कुल निवेश यहां भी 9 लाख रुपये ही रहेगा।

लेकिन 15 साल बाद जमा बंद होने के बावजूद खाते में ब्याज मिलता रहता है और यह 21 साल में मैच्योर होता है। मौजूदा 8.2% ब्याज दर के हिसाब से मैच्योरिटी पर आपको करीब 30.7 लाख रुपये मिल सकते हैं। यानी 9 लाख रुपये का निवेश बढ़कर 30 लाख रुपये से ज्यादा हो सकता है।

सुकन्या में ज्यादा पैसा क्यों बनता है?

इसकी दो बड़ी वजह हैं। पहली वजह है ज्यादा ब्याज दर। फिलहाल सुकन्या योजना पर PPF से ज्यादा ब्याज मिल रहा है। दूसरी वजह है लंबी कंपाउंडिंग। आप 15 साल तक पैसा जमा करते हैं, लेकिन उसके बाद भी 6 साल तक पैसा ब्याज कमाता रहता है। यही कारण है कि अंतिम रकम में बड़ा अंतर दिखाई देता है।

टैक्स में भी मिलता है फायदा

PPF और सुकन्या समृद्धि योजना दोनों में टैक्स का फायदा मिलता है। इन योजनाओं में जमा रकम पर आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत सालाना ₹1.5 लाख तक की छूट ली जा सकती है।

सिर्फ निवेश पर ही नहीं, बल्कि मिलने वाले ब्याज और मैच्योरिटी पर मिलने वाली रकम पर भी टैक्स नहीं लगता। यानी निवेश, ब्याज और मैच्योरिटी… तीनों स्तर पर टैक्स छूट का फायदा मिलता है।

किसके लिए कौन-सी योजना बेहतर?

अगर आपकी बेटी है और आप उसकी पढ़ाई, शादी या भविष्य के लिए पैसा जोड़ना चाहते हैं, तो सुकन्या समृद्धि योजना बेहतर विकल्प हो सकती है। इसमें लंबी अवधि तक निवेश बढ़ने का फायदा मिलता है।

वहीं, अगर आपका लक्ष्य रिटायरमेंट के लिए फंड बनाना है, तो PPF बेहतर विकल्प हो सकता है। इसकी एक और खासियत यह है कि इसमें कोई भी व्यक्ति निवेश कर सकता है।

किसमें मिलेगा ज्यादा फायदा?

अगर सिर्फ रिटर्न की बात करें, तो मौजूदा ब्याज दरों के हिसाब से सुकन्या समृद्धि योजना PPF से आगे नजर आती है। हर महीने ₹5,000 जमा करने पर जहां PPF में करीब ₹16.27 लाख का फंड बन सकता है, वहीं सुकन्या योजना में यह रकम करीब ₹30.7 लाख तक पहुंच सकती है।

हालांकि निवेश का फैसला सिर्फ रिटर्न देखकर नहीं करना चाहिए। यह भी देखना जरूरी है कि आपका पैसा किस लक्ष्य के लिए जमा किया जा रहा है। बेटी के भविष्य के लिए सुकन्या योजना बेहतर हो सकती है। वहीं, लंबी अवधि की बचत के लिए PPF एक मजबूत विकल्प माना जाता है।

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SIP vs PPF: 30 साल तक हर महीने ₹5000 निवेश, किसमें बनेगा ज्यादा फंड? समझिए पूरा कैलकुलेशन

SIP vs PPF: अगर लंबी अवधि के निवेश की बात करें, तो पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) और सिस्टेमैटिक इनवेस्टमेंट प्लान (SIP) सबसे लोकप्रिय विकल्पों में शामिल हैं। दोनों का इस्तेमाल घर खरीदने, बच्चों की पढ़ाई, शादी, रिटायरमेंट या लंबी अवधि में संपत्ति बनाने जैसे बड़े वित्तीय लक्ष्यों को पूरा करने के लिए किया जाता है।

हालांकि, निवेश का फैसला करते समय सिर्फ रिटर्न नहीं देखना चाहिए। अपनी कमाई, जोखिम लेने की क्षमता और भविष्य के लक्ष्यों को भी ध्यान में रखना जरूरी है। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर कोई व्यक्ति 30 साल तक हर महीने 5,000 रुपये निवेश करे तो PPF और SIP में से कौन ज्यादा बड़ा फंड बना सकता है।

PPF में 30 साल तक 5,000 रुपये का निवेश

अगर PPF पर 7.1% सालाना ब्याज दर बनी रहती है और आप 30 साल तक हर महीने 5,000 रुपये निवेश करते हैं, तो मैच्योरिटी पर आपका कुल फंड करीब 61.80 लाख रुपये हो सकता है।

इस दौरान आपका कुल निवेश 18 लाख रुपये होगा। वहीं, ब्याज के रूप में करीब 43.80 लाख रुपये मिल सकते हैं। यानी निवेश से कहीं ज्यादा रकम सिर्फ ब्याज से जुड़ सकती है। हालांकि, इस कैलकुलेशन में महंगाई का असर शामिल नहीं है।

chart pfss

SIP में 30 साल तक 5,000 रुपये का निवेश

वहीं, अगर आप 30 साल तक हर महीने 5,000 रुपये की SIP करते हैं और औसतन 12% सालाना रिटर्न मिलता है, तो आपका कुल फंड करीब 1.41 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। आमतौर पर माना जाता है कि इक्विटी म्यूचुअल फंड 12% रिटर्न देते हैं। लेकिन, इसकी कोई गारंटी नहीं होती।

इस दौरान आपका कुल निवेश 18 लाख रुपये होगा। वहीं, करीब 1.23 करोड़ रुपये का फायदा रिटर्न के रूप में मिल सकता है। इस तरह कुल फंड 1.41 करोड़ रुपये से ज्यादा हो सकता है।

महंगाई को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी

निवेश की योजना बनाते समय महंगाई को ध्यान में रखना बेहद जरूरी है। आज के 1 करोड़ रुपये की कीमत 30 साल बाद उतनी नहीं रहेगी। अगर SIP पर 12% रिटर्न मिले और महंगाई दर 6% मान ली जाए, तो 30 साल बाद आपके फंड की वास्तविक कीमत करीब 40.84 लाख रुपये रह जाएगी।

इसमें 18 लाख रुपये का निवेश और लगभग 22.84 लाख रुपये का वास्तविक रिटर्न शामिल होगा। यही वजह है कि निवेश का आकलन करते समय सिर्फ कुल फंड नहीं, बल्कि उसकी वास्तविक खरीद क्षमता भी देखनी चाहिए।

SIP को क्यों पसंद करते हैं निवेशक?

  • SIP लंबी अवधि में वेल्थ बनाने का आसान तरीका माना जाता है। इसमें आप छोटी रकम से शुरुआत कर सकते हैं।
  • म्यूचुअल फंड में SIP छह महीने से लेकर किसी भी अवधि के लिए शुरू की जा सकती है। इसकी कोई अधिकतम सीमा नहीं है।
  • SIP में ज्यादा रिटर्न की संभावना है। लंबी अवधि में इक्विटी म्यूचुअल फंड्स ने अच्छे रिटर्न दिए हैं। हालांकि, रिटर्न पूरी तरह बाजार पर निर्भर करता है।
  • SIP निवेश की आदत भी बनती है। बैंक से ऑटो-डेबिट सेट करने के बाद हर महीने तय रकम अपने आप निवेश हो जाती है।
  • SIP में रुपी कॉस्ट एवरेजिंग का लाभ मिलता है। बाजार में उतार-चढ़ाव के दौरान अलग-अलग कीमतों पर यूनिट्स खरीदने से लंबी अवधि में औसत खरीद लागत संतुलित रहती है।

इसके अलावा SIP में Systematic Withdrawal Plan (SWP) की सुविधा भी मिलती है। इसके जरिए निवेशक जरूरत पड़ने पर हर महीने एक तय रकम निकाल सकते हैं। इससे पूरे निवेश को एक साथ तोड़ने की जरूरत नहीं पड़ती।

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PPF को क्यों चुनते हैं निवेशक?

  • PPF लंबे समय से सुरक्षित निवेश का पर्याय माना जाता है। यह केंद्र सरकार की गारंटी वाली बचत योजना है। इसमें बाजार के उतार-चढ़ाव का असर नहीं पड़ता।
  • PPF की सबसे बड़ी खासियत इसकी सुरक्षा है। फिलहाल इस पर 7.1% सालाना ब्याज मिल रहा है। सरकार हर तिमाही ब्याज दर की समीक्षा करती है।
  • टैक्स बचत के लिहाज से भी PPF काफी आकर्षक है। यह EEE कैटेगरी का निवेश है। यानी निवेश की रकम, उस पर मिलने वाला ब्याज और मैच्योरिटी राशि तीनों टैक्स फ्री होती हैं।
  • पुराने टैक्स रिजीम में PPF में सालाना 1.5 लाख रुपये तक के निवेश पर सेक्शन 80C के तहत टैक्स छूट भी मिलती है।
  • PPF खाते पर लोन की सुविधा भी उपलब्ध है। खाता खुलने के एक साल बाद जमा राशि के आधार पर लोन लिया जा सकता है। आमतौर पर खाते में मौजूद बैलेंस का 25% तक लोन मिलता है।

निकासी के मामले में भी कुछ सुविधाएं हैं। PPF में 15 साल का लॉक-इन पीरियड होता है। हालांकि, पांच साल बाद कुछ शर्तों के साथ आंशिक निकासी की जा सकती है। मैच्योरिटी के बाद खाते को पांच-पांच साल के ब्लॉक में आगे भी बढ़ाया जा सकता है।

आखिर किसे चुनना चाहिए?

अगर आपकी पहली प्राथमिकता सुरक्षा है और आप गारंटीड रिटर्न चाहते हैं, तो PPF बेहतर विकल्प हो सकता है। वहीं, अगर आपका लक्ष्य लंबी अवधि में बड़ा फंड बनाना है और आप बाजार से जुड़े जोखिम उठा सकते हैं, तो SIP ज्यादा आकर्षक साबित हो सकती है।

यही वजह है कि कई वित्तीय सलाहकार दोनों में संतुलित निवेश की सलाह देते हैं। इससे एक तरफ PPF की सुरक्षा मिलती है, तो दूसरी तरफ SIP के जरिए ज्यादा रिटर्न और वेल्थ क्रिएशन की संभावना भी बनी रहती है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।