PPF vs VPF: नौकरीपेशा लोगों के लिए कौन ज्यादा फायदेमंद है? समझिए पूरा कैलकुलेशन

PPF vs VPF: नौकरीपेशा लोगों के लिए रिटायरमेंट की तैयारी सिर्फ EPF तक सीमित नहीं है। अगर सैलरी से हर महीने कुछ पैसा बचता है, तो उसे PPF में लगाया जा सकता है। दूसरा विकल्प VPF है। इसमें कर्मचारी अपने EPF में तय योगदान से ज्यादा पैसा जमा करता है। दोनों ही लंबे समय के लिए सुरक्षित बचत के विकल्प हैं। लेकिन दोनों के नियम अलग हैं। ब्याज दर भी अलग है। पैसे निकालने के नियम भी अलग हैं।

मौजूदा ब्याज दर देखें तो जुलाई-सितंबर 2026 तिमाही के लिए PPF पर 7.1% सालाना ब्याज मिल रहा है। वहीं वित्त वर्ष 2025-26 के लिए EPF पर 8.25% ब्याज की सिफारिश की गई है। VPF का पैसा भी EPF में ही जाता है। इसलिए इस उदाहरण में VPF के लिए 8.25% की दर ली गई है।

फीचरPPFVPF
क्या है?सरकारी छोटी बचत योजना
EPF में अतिरिक्त कर्मचारी योगदान

ब्याज दर7%8.25%
निवेश सीमाअधिकतम ₹1.5 लाख सालाना
अलग ₹1.5 लाख की सीमा नहीं

निवेश कैसे करें?खुद जमा करना होता है
सैलरी से अतिरिक्त कटौती

मूल अवधि15 साल
EPF के नियम लागू

नौकरी से संबंधनहींEPF और नौकरी से जुड़ा
80Cपुराने टैक्स रिजीम में पात्रपुराने टैक्स रिजीम में पात्र

₹5,000 महीने के निवेश से कितना पैसा बनेगा?

मान लीजिए आप हर महीने ₹5,000 निवेश करते हैं। साल भर में यह रकम ₹60,000 होगी। 15 साल में आपकी कुल जमा रकम ₹9 लाख हो जाएगी। अब तुलना के लिए मान लेते हैं कि पूरे 15 साल तक PPF पर 7.1% और VPF पर 8.25% की दर बनी रहती है।

इस हिसाब से PPF में ₹5,000 महीने का निवेश 15 साल बाद करीब ₹15.9 लाख हो सकता है। इसमें आपकी जमा रकम ₹9 लाख होगी। करीब ₹6.9 लाख ब्याज से आएगा।

वहीं, VPF में 8.25% की दर मानें तो यही निवेश करीब ₹17.7 लाख हो सकता है। इसमें ₹9 लाख आपका निवेश होगा। करीब ₹8.7 लाख ब्याज से आएगा। यानी इस उदाहरण में 15 साल बाद VPF का फंड PPF से करीब ₹1.8 लाख ज्यादा हो सकता है।

PPF की सबसे बड़ी खासियत क्या है?

PPF का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसका आपकी नौकरी से कोई लेना-देना नहीं है। नौकरी बदलने पर भी PPF चलता रहता है। नौकरी छोड़ने पर भी खाते पर कोई असर नहीं पड़ता।

PPF की मूल अवधि 15 साल है। इसके बाद इसे 5-5 साल के ब्लॉक में बढ़ाया जा सकता है। यानी लंबी अवधि के लिए पैसा जमा करने का विकल्प मिलता रहता है।

टैक्स के लिहाज से भी PPF को फायदा मिलता है। पुराने टैक्स रिजीम में इसका निवेश धारा 80C के तहत कटौती के लिए पात्र हो सकता है। PPF का ब्याज भी टैक्स फ्री है। नियमों के मुताबिक मैच्योरिटी की रकम भी टैक्स फ्री रहती है।

VPF किसके लिए ज्यादा अच्छा है?

VPF उन नौकरीपेशा लोगों के लिए काम का विकल्प हो सकता है, जो रिटायरमेंट के लिए ज्यादा पैसा जमा करना चाहते हैं। इसका एक फायदा यह है कि पैसा सीधे सैलरी से कट जाता है। आपको हर महीने अलग से निवेश करने की जरूरत नहीं पड़ती।

लेकिन VPF का पैसा EPF से जुड़ा रहता है। इसलिए इसे सामान्य बैंक खाते की तरह जब चाहें तब निकाल नहीं सकते। निकासी पर EPF के नियम लागू होते हैं।

एक और बात समझना जरूरी है। पुराने टैक्स रिजीम में 80C की कुल सीमा ₹1.5 लाख है। अगर EPF और दूसरे निवेशों से आपकी यह सीमा पहले ही पूरी हो चुकी है, तो VPF में ज्यादा पैसा डालने पर अलग से 80C फायदा नहीं मिलेगा।

PPF या VPF, किसमें पैसा लगाएं?

अगर आपका मकसद रिटायरमेंट के लिए सैलरी से ज्यादा पैसा जमा करना है, तो VPF एक विकल्प हो सकता है। वहीं, अगर आप EPF से अलग एक लंबी अवधि की बचत चाहते हैं, तो PPF पर विचार किया जा सकता है। इसमें नौकरी बदलने या छोड़ने का कोई असर नहीं पड़ता।

ऐसा भी जरूरी नहीं है कि आपको दोनों में से सिर्फ एक ही विकल्प चुनना हो। आपकी वित्तीय क्षमता अच्छी है तो EPF के साथ VPF में अतिरिक्त पैसा डाल सकते हैं। इसके अलावा अलग लक्ष्य के लिए PPF में भी निवेश कर सकते हैं।

आखिर में फैसला सिर्फ ब्याज दर देखकर न करें। यह भी देखें कि पैसा कब चाहिए, कितना पैसा लॉक कर सकते हैं और आपकी मौजूदा बचत कितनी है। रिटायरमेंट के लिए पैसा जमा कर रहे हैं तो निवेश की अवधि और पैसे की जरूरत, दोनों का संतुलन जरूरी है।

SIP में नुकसान हो रहा है तो क्या बंद कर दें? म्यूचुअल फंड एक्सपर्ट ने दी ये खास सलाह

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

PPF Calulator: हर साल PPF में ₹1.5 लाख डालने पर कितना पैसा मिलेगा? पूरा कैलकुलेशन समझिए

PPF Calulator: अगर आप हर साल ₹1.5 लाख कहीं ऐसी जगह लगाना चाहते हैं, जहां पैसा सुरक्षित रहे और धीरे-धीरे बढ़ता भी रहे, तो PPF एक अच्छा विकल्प हो सकता है। इसमें शेयर बाजार जैसा उतार-चढ़ाव नहीं होता। सरकार की गारंटी रहती है। साथ ही, लंबे समय तक पैसा छोड़ने पर कंपाउंडिंग का फायदा मिलता है। फिलहाल PPF पर 7.1% सालाना ब्याज है। सरकार इसे समय-समय पर घटा या बढ़ा सकती है।

अगर आप हर साल PPF में पूरे ₹1.5 लाख जमा करते हैं, तो 15 साल बाद आपके पास कितने पैसे होंगे? अगर यही निवेश 20 या 25 साल तक चलता रहे तो रकम कहां पहुंच जाएगी? आइए इसका पूरा हिसाब समझते हैं।

15 साल में करीब ₹41 लाख

PPF की सामान्य अवधि 15 साल होती है। इस दौरान अगर आप हर साल ₹1.5 लाख जमा करते हैं, तो अपनी जेब से कुल ₹22.50 लाख डालेंगे।

अब इसमें ब्याज जुड़ता जाएगा। 7.1% की दर को मानकर चलें तो 15 साल बाद रकम करीब ₹40.68 लाख हो सकती है। यानी ₹22.50 लाख आपने जमा किए और करीब ₹18.18 लाख ब्याज से जुड़ गए। यहीं से PPF की असली ताकत समझ आती है।

20 साल में रकम करीब ₹67 लाख

15 साल पूरे होने के बाद PPF को आगे भी जारी रखा जा सकता है। इसे 5 साल के ब्लॉक में बढ़ाया जा सकता है। अब मान लीजिए आप 20 साल तक हर साल ₹1.5 लाख डालते रहे। तब आपकी कुल जमा रकम ₹30 लाख होगी।

7.1% की दर को पूरे समय समान मानें तो 20 साल बाद यह रकम करीब ₹66.58 लाख हो सकती है। यानी आपकी जमा रकम ₹30 लाख है, लेकिन ब्याज से करीब ₹36.58 लाख और जुड़ सकते हैं।

25 साल में ₹1 करोड़ से ज्यादा

अब सबसे दिलचस्प हिसाब 25 साल का है। हर साल ₹1.5 लाख के हिसाब से 25 साल में आप कुल ₹37.50 लाख जमा करेंगे। लेकिन अगर 7.1% ब्याज दर पूरी अवधि में बनी रहती है, तो रकम करीब ₹1.03 करोड़ तक पहुंच सकती है।

यानी आपने ₹37.50 लाख लगाए और करीब ₹65.58 लाख ब्याज से जुड़ गए। कुल रकम ₹1 करोड़ के पार निकल जाती है। इसी वजह से लंबी अवधि के निवेश में सिर्फ यह देखना ठीक नहीं होता कि आपने कितना पैसा जमा किया है। यह भी देखना चाहिए कि उस पैसे को बढ़ने के लिए कितना समय मिला।

15, 20 और 25 साल का पूरा हिसाब

अवधिहर साल जमाआपकी कुल जमा रकमअनुमानित ब्याजकुल रकम
15 साल₹1.50 लाख₹22.50 लाख₹18.18 लाख₹40.68 लाख
20 साल₹1.50 लाख₹30 लाख₹36.58 लाख₹66.58 लाख
25 साल₹1.50 लाख₹37.50 लाख₹65.58 लाख₹1.03 करोड़

नोट : ये आंकड़े 7.1% ब्याज दर को पूरे 15, 20 या 25 साल तक समान मानकर निकाले गए हैं। असल में PPF की ब्याज दर बदल सकती है। इसलिए भविष्य में मिलने वाली रकम भी अलग हो सकती है।

पैसा कब जमा करना बेहतर है?

PPF में ब्याज का कैलकुलेशन महीने की 5 तारीख से महीने के अंत तक खाते में मौजूद सबसे कम रकम के आधार पर होती है। इसलिए अगर आप साल की पूरी ₹1.5 लाख की रकम एक साथ जमा करने की सोच रहे हैं, तो महीने की 5 तारीख से पहले जमा करना फायदेमंद हो सकता है।

अगर हर साल पैसा एक साथ जमा करना मुश्किल है, तो पूरे साल में भी किस्तों में रकम जमा की जा सकती है। लेकिन सालाना ₹1.5 लाख की सीमा का ध्यान रखना जरूरी है।

PPF निवेश में किन बातों का ध्यान रखें?

  • PPF में कुछ शर्तों के तहत आंशिक निकासी की सुविधा मिलती है। लेकिन इसे सेविंग अकाउंट की तरह इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
  • ब्याज दर हमेशा एक जैसी नहीं रहती। PPF की ब्याज दर सरकार तय करती है। भविष्य में यह बढ़ या घट सकती है।
  • हर साल निवेश जारी रखें। अकाउंट को चालू रखने के लिए हर वित्त वर्ष कम से कम ₹500 जमा करना जरूरी है।
  • नॉमिनी जरूर जोड़ें। इससे खाताधारक की मृत्यु की स्थिति में रकम के क्लेम की प्रक्रिया आसान हो जाती है।
  • PPF सुरक्षित निवेश है, लेकिन हर वित्तीय लक्ष्य के लिए अकेला PPF पर्याप्त नहीं। अपनी जरूरत और जोखिम के हिसाब से दूसरे निवेश विकल्प भी रखें।

2026 में EPFO के 5 बड़े अपडेट: ऑटो-ट्रांसफर से लेकर UPI-ATM तक, जानिए क्या-क्या बदला

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।