New Tax Regime: अब 10 में 9 टैक्सपेयर्स चुन रहे हैं न्यू टैक्स रिजीम, जानिए 5 बड़े कारण

New Tax Regime: इस बार इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने वाले ज्यादातर लोग न्यू टैक्स रिजीम चुन रहे हैं। टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस साल उनके पास रिटर्न फाइल करने वाले 80% से 95% तक टैक्सपेयर्स ने नया टैक्स सिस्टम चुना है। पिछले कुछ सालों में यह संख्या लगातार बढ़ी है। आखिर इसके पीछे क्या वजह है? आइए जानते हैं।

  1. टैक्स में ज्यादा राहत मिलने लगी

न्यू टैक्स रिजीम में सरकार ने सेक्शन 87A के तहत मिलने वाली टैक्स छूट बढ़ाई है। टैक्स स्लैब में भी बदलाव किए गए हैं और स्टैंडर्ड डिडक्शन का फायदा बढ़ाया गया है। इसी वजह से पहले के मुकाबले कई सैलरीड लोगों का टैक्स कम हो गया है।

ClearTax का कहना है कि कम टैक्स दरें, ज्यादा टैक्स रिबेट और बढ़ा हुआ स्टैंडर्ड डिडक्शन न्यू टैक्स रिजीम को ज्यादा आकर्षक बना रहे हैं।

2. कागजी झंझट लगभग खत्म

ओल्ड टैक्स रिजीम में HRA, 80C, 80D और दूसरे डिडक्शन के लिए कई तरह के दस्तावेज संभालकर रखने पड़ते हैं। न्यू टैक्स रिजीम में इसकी जरूरत काफी कम हो जाती है। इसलिए ITR भरना भी आसान हो गया है।

SBHS & Associates के पार्टनर हिमांक सिंगला कहते हैं कि लोग अब सिर्फ टैक्स बचाने के लिए निवेश नहीं करना चाहते। आसान प्रक्रिया की वजह से वे तेजी से न्यू टैक्स रिजीम की तरफ बढ़ रहे हैं।

3. कम टैक्स रेट का फायदा

जिन लोगों के पास ज्यादा डिडक्शन नहीं हैं, उनके लिए न्यू टैक्स रिजीम सीधे टैक्स बचाने का मौका दे रही है। यही वजह है कि हर साल इसे चुनने वालों की संख्या बढ़ रही है।

HJ Aggarwal & Co. के पार्टनर सीए हर्षित अग्रवाल के मुताबिक, इस साल उनकी फर्म के करीब 95% क्लाइंट्स ने न्यू टैक्स रिजीम चुनी है। पिछले साल यह आंकड़ा 70% से थोड़ा ज्यादा था, जबकि दो साल पहले सिर्फ 20% लोग इसे चुन रहे थे।

4. ITR फाइल करना पहले से आसान

न्यू टैक्स रिजीम में कम कैलकुलेशन और कम दस्तावेजों की जरूरत पड़ती है। इससे रिटर्न जल्दी फाइल हो जाता है।

TaxSpanner के को-फाउंडर और CEO सुधीर कौशिक कहते हैं कि 12 लाख रुपये तक की आय वाले कई टैक्सपेयर्स सिर्फ इसलिए न्यू टैक्स रिजीम चुन रहे हैं क्योंकि इसमें दस्तावेज कम लगते हैं और पूरी प्रक्रिया आसान है।

5. फिर भी हर किसी के लिए सही नहीं

न्यू टैक्स रिजीम भले ही ज्यादातर लोगों की पहली पसंद बन गई हो, लेकिन हर टैक्सपेयर के लिए यह बेहतर विकल्प नहीं है। NA Shah Associates के पार्टनर गोपाल बोहरा का कहना है कि जिन लोगों को HRA, होम लोन के ब्याज, Chapter VI-A के तहत मिलने वाले डिडक्शन या दूसरे बड़े टैक्स बेनेफिट मिलते हैं, उनके लिए ओल्ड टैक्स रिजीम अब भी ज्यादा फायदे की हो सकती है।

वहीं, S.K. Patodia LLP के एसोसिएट डायरेक्टर मिहिर तन्ना भी सलाह देते हैं कि रिटर्न भरने से पहले दोनों टैक्स रिजीम में अपना टैक्स निकालकर जरूर देखें। अगर आपके पास HRA, होम लोन, NPS, PPF, EPF या दूसरे बड़े डिडक्शन हैं, तो ओल्ड टैक्स रिजीम आज भी बेहतर विकल्प साबित हो सकती है।

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ITR Filing 2026: NPS, PPF या EPF… रिटायरमेंट के लिए कौन-सी स्कीम टैक्स में सबसे ज्यादा फायदा दिलाएगी?

ITR Filing 2026: रिटायरमेंट की प्लानिंग करते समय ज्यादातर लोग NPS, PPF और EPF में से किसी एक या एक से ज्यादा स्कीम में निवेश करते हैं। तीनों का मकसद रिटायरमेंट के लिए पैसा जोड़ना है। हालांकि, टैक्स छूट, ब्याज और निकासी के नियम अलग-अलग हैं। साथ ही, यह भी मायने रखता है कि आपने पुराना टैक्स रिजीम चुना है या नया।

NPS में सबसे ज्यादा टैक्स छूट

अगर आप पुराना टैक्स रिजीम चुनते हैं, तो NPS सबसे ज्यादा टैक्स बचाने वाली स्कीम बन सकती है।

NPS Tier-I में निवेश पर Section 80CCD(1) के तहत ₹1.5 लाख तक की छूट मिलती है। यह सीमा Section 80C का हिस्सा है। इसके अलावा Section 80CCD(1B) के तहत ₹50,000 की अतिरिक्त छूट भी मिलती है। यानी NPS के जरिए कुल ₹2 लाख तक टैक्स डिडक्शन का फायदा लिया जा सकता है।

अगर आप नया टैक्स रिजीम चुनते हैं, तो अपनी तरफ से किए गए निवेश पर छूट नहीं मिलेगी। हालांकि, अगर आपका नियोक्ता NPS में योगदान देता है, तो Section 80CCD(2) के तहत बेसिक सैलरी और DA के 14% तक की रकम पर टैक्स छूट मिल सकती है।

रिटायरमेंट के समय NPS की 60% रकम टैक्स-फ्री निकाली जा सकती है। बाकी 40% से एन्युटी खरीदनी होती है। उस पर मिलने वाली पेंशन आपके टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्सेबल होती है।

PPF में पूरा टैक्स-फ्री फायदा

PPF को EEE (Exempt-Exempt-Exempt) कैटेगरी की स्कीम माना जाता है। पुराने टैक्स रिजीम में PPF में निवेश पर Section 80C के तहत ₹1.5 लाख तक की टैक्स छूट मिलती है। इसके अलावा मिलने वाला ब्याज भी टैक्स-फ्री रहता है और मैच्योरिटी पर मिलने वाली पूरी रकम पर भी कोई टैक्स नहीं लगता।

अगर आपने नया टैक्स रिजीम चुना है, तो नए निवेश पर टैक्स छूट नहीं मिलेगी। हालांकि, ब्याज और मैच्योरिटी की रकम पहले की तरह टैक्स-फ्री रहेगी।

EPF का फायदा नौकरीपेशा लोगों को

EPF संगठित क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए रिटायरमेंट सेविंग स्कीम है।

पुराने टैक्स रिजीम में कर्मचारी का EPF योगदान Section 80C के तहत टैक्स छूट के दायरे में आता है। तय शर्तें पूरी होने पर ब्याज और निकासी भी टैक्स-फ्री रहती है। हालांकि, अगर समय से पहले पैसा निकाला जाता है, तो कुछ मामलों में टैक्स देना पड़ सकता है।

पुराने और नए टैक्स रिजीम में क्या फर्क?

अगर आपने पुराना टैक्स रिजीम चुना है, तो NPS, PPF और EPF तीनों में टैक्स बचाने का फायदा मिलता है। इनमें भी NPS सबसे आगे है, क्योंकि इसमें ₹50,000 की अतिरिक्त टैक्स छूट मिलती है।

वहीं, नए टैक्स रिजीम में Section 80C की छूट नहीं मिलती। इसलिए PPF और EPF में निवेश पर टैक्स डिडक्शन का फायदा नहीं मिलेगा। NPS में भी सिर्फ नियोक्ता के योगदान पर ही टैक्स छूट मिलती है।

किसे स्कीम को चुनना बेहतर?

अगर आपका लक्ष्य सबसे ज्यादा टैक्स बचाना है, तो पुराने टैक्स रिजीम में NPS बेहतर विकल्प हो सकता है। अगर आप पूरी तरह टैक्स-फ्री रिटर्न चाहते हैं, तो PPF मजबूत विकल्प है। वहीं, नौकरीपेशा लोगों के लिए EPF रिटायरमेंट बचत का अहम हिस्सा बना रहता है।

हालांकि, फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स का मानना है कि बेहतर रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए इन तीनों का संतुलित इस्तेमाल करना ज्यादा फायदेमंद हो सकता है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

ITR Filing 2026: सेक्शन 87A में ₹60000 तक की टैक्स रिबेट, जानिए कौन कर सकता है क्लेम

ITR Filing 2026: इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने असेसमेंट ईयर 2026-27 (FY 2025-26) के लिए ITR-1 से ITR-5 तक के फॉर्म जारी कर दिए हैं। साथ ही ITR-1, ITR-2, ITR-3 और ITR-4 की एक्सेल यूटिलिटी भी शुरू कर दी है। इसकी मदद से टैक्सपेयर्स पहले ऑफलाइन रिटर्न भर सकते हैं। इसके बाद उसे ई-फाइलिंग पोर्टल पर अपलोड कर सकते हैं। ITR फाइल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई है।

अगर आप ITR भर रहे हैं, तो सेक्शन 87A के तहत मिलने वाले टैक्स रिबेट के नियम जानना जरूरी है।

क्या है सेक्शन 87A का रिबेट?

सेक्शन 87A के तहत मिलने वाला रिबेट सीधे आपके कुल टैक्स से घट जाता है। यह टैक्स छूट (Exemption) या टैक्स डिडक्शन (Deduction) से अलग होता है। इसका मकसद कम और मध्यम आय वाले लोगों को टैक्स में राहत देना है।

कितना मिलेगा रिबेट?

अगर आपने पुराना टैक्स रिजीम चुना है और आपकी टैक्सेबल इनकम 5 लाख रुपये तक है, तो आपको अधिकतम 12,500 रुपये का रिबेट मिल सकता है।

अगर आप नया टैक्स रिजीम चुनते हैं और आपकी टैक्सेबल इनकम 12 लाख रुपये तक है, तो आपको 60,000 रुपये तक का रिबेट मिल सकता है।

इसमें ध्यान रखने वाली बात है कि यह रिबेट 4% हेल्थ एंड एजुकेशन सेस जोड़ने से पहले टैक्स की रकम पर मिलता है।

किन लोगों को मिलेगा फायदा?

सेक्शन 87A का फायदा सिर्फ इंडिविजुअल टैक्सपेयर्स को मिलता है। इसका मतलब है कि कंपनियां, HUF (हिंदू अविभाजित परिवार) और NRI इसका फायदा नहीं ले सकते।

अगर आपको शेयर बेचने से लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) या शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) हुआ है, तो उस टैक्स पर भी यह रिबेट नहीं मिलेगा। लॉटरी, गेम शो या दूसरी ऐसी कमाई, जिस पर विशेष टैक्स दर लागू होती है, उस पर भी यह सुविधा नहीं मिलती।

ITR में रिबेट कैसे क्लेम करें?

सबसे पहले पूरे साल की ग्रॉस टोटल इनकम निकालें। इसके बाद मिलने वाली छूट और डिडक्शन घटाकर टैक्सेबल इनकम निकालें। ITR में अपनी टैक्सेबल इनकम भरें। अगर आपकी आय तय सीमा के भीतर है, तो सेक्शन 87A के तहत रिबेट क्लेम कर दें। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने ITR-2 और ITR-3 में भी यह सुविधा दी है।

क्या है मार्जिनल रिलीफ?

नए टैक्स रिजीम में अगर आपकी कमाई 12 लाख रुपये से थोड़ी ज्यादा है और बनने वाला टैक्स, 12 लाख से ऊपर की अतिरिक्त इनकम से ज्यादा है, तो आपको मार्जिनल रिलीफ मिलता है।

अब मान लीजिए आपकी टैक्सेबल इनकम 12.15 लाख रुपये है। यानी 12 लाख की सीमा से 15,000 रुपये ज्यादा। इस पर सामान्य नियम से 62,250 रुपये टैक्स बनता है।

लेकिन मार्जिनल रिलीफ मिलने के बाद आपका टैक्स घटकर सिर्फ 15,000 रुपये रह जाएगा। इस पर 4% हेल्थ एंड एजुकेशन सेस जोड़ने के बाद आपकी टैक्स देनदारी 62,250 रुपये से घटकर 15,600 रुपये रह जाएगी।

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ITR Filing 2026: फॉर्म 16 नहीं मिला? फिर भी आसानी से भर सकते हैं ITR, जानिए स्टेप-बाय-स्टेप तरीका

ITR Filing 2026: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने का समय आते ही ज्यादातर नौकरीपेशा लोग Form 16 का इंतजार करने लगते हैं। यह दस्तावेज ITR फाइल करने का काम काफी आसान बना देता है। लेकिन कई बार नौकरी बदलने, कंपनी बंद हो जाने, कम सैलरी होने या किसी दूसरी वजह से Form 16 नहीं मिल पाता। ऐसे में कई लोगों को लगता है कि अब ITR भरना मुश्किल हो जाएगा।

लेकिन ऐसा नहीं है। अगर आपके पास Form 16 नहीं है, तब भी आप आसानी से अपना ITR फाइल कर सकते हैं। बस आपको अपनी कमाई, टैक्स कटौती और निवेश से जुड़ी कुछ जरूरी जानकारियां जुटानी होंगी।

Form 16 आखिर होता क्या है?

Form 16 एक टैक्स सर्टिफिकेट होता है, जिसे कंपनी अपने कर्मचारियों को देती है। इसमें सालभर की सैलरी, TDS, टैक्स छूट और दूसरी जरूरी जानकारियां दर्ज होती हैं।

हालांकि Form 16 ITR भरने में मदद करता है, लेकिन ITR दाखिल करने के लिए इसका होना जरूरी नहीं है। आयकर विभाग ने ऐसी कोई शर्त नहीं रखी है कि बिना Form 16 के रिटर्न नहीं भरा जा सकता।

बिना Form 16 के ITR कैसे भरें?

सबसे पहले सैलरी स्लिप जुटाएं

अगर Form 16 नहीं मिला है, तो सबसे पहले पूरे वित्त वर्ष की सैलरी स्लिप निकाल लें। इन स्लिप्स में आपकी बेसिक सैलरी, HRA, स्पेशल अलाउंस, बोनस और दूसरी भुगतान संबंधी जानकारी होती है।

अगर आपने साल के दौरान नौकरी बदली है, तो दोनों कंपनियों की सैलरी स्लिप साथ रखें। इससे कुल आय निकालना आसान हो जाएगा।

AIS और TIS जरूर चेक करें

इनकम टैक्स पोर्टल पर लॉगिन करके एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) और टैक्सपेयर इंफॉर्मेशन समरी (TIS) डाउनलोड करें।

AIS में आपकी सैलरी, बैंक ब्याज, डिविडेंड, शेयरों से हुई कमाई, TDS और कई दूसरे वित्तीय लेन-देन की जानकारी मिल जाती है। इससे आपको अपनी कुल आय का सही हिसाब लगाने में मदद मिलेगी।

Form 26AS को नजरअंदाज न करें

ITR भरने से पहले Form 26AS जरूर देखें। इसमें आपके PAN पर कटे TDS और जमा किए गए टैक्स का पूरा रिकॉर्ड होता है।

अगर आपकी कंपनी या बैंक ने TDS काटा है, तो वह यहां दिखाई देगा। इससे यह भी पता चल जाएगा कि आपके नाम पर कितना टैक्स जमा किया गया है।

सिर्फ सैलरी नहीं, दूसरी आय भी जोड़ें

कई लोग ITR भरते समय सिर्फ सैलरी की जानकारी भरते हैं और बैंक ब्याज, FD का ब्याज, डिविडेंड या दूसरी आय को भूल जाते हैं।

ऐसी गलती बाद में नोटिस की वजह बन सकती है। इसलिए AIS, बैंक स्टेटमेंट और निवेश से जुड़े रिकॉर्ड देखकर सभी आय को जोड़ना जरूरी है।

टैक्स छूट का फायदा लेना न भूलें

अगर आप पुरानी टैक्स व्यवस्था (Old Tax Regime) चुन रहे हैं, तो 80C, 80D, NPS, होम लोन और दूसरी उपलब्ध कटौतियों को जरूर शामिल करें।

अपने निवेश और खर्च से जुड़े दस्तावेज संभालकर रखें, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें दिखाया जा सके।

नौकरी बदली है तो ये गलती न करें

अगर आपने वित्त वर्ष के दौरान एक से ज्यादा कंपनियों में काम किया है, तो सभी कंपनियों से मिली सैलरी को जोड़कर कुल आय निकालें।

कई बार नया नियोक्ता पुरानी नौकरी की आय को अपने टैक्स कैलकुलेशन में शामिल नहीं करता। ऐसे में ITR भरते समय सही आंकड़ा खुद जोड़ना जरूरी होता है। वरना बाद में अतिरिक्त टैक्स देना पड़ सकता है।

ITR भरने से पहले एक बार सब मिलान कर लें

रिटर्न फाइल करने से पहले AIS, Form 26AS, बैंक स्टेटमेंट और सैलरी रिकॉर्ड का मिलान जरूर करें। यह भी सुनिश्चित करें कि आपकी हर आय उसमें शामिल हो।

अगर आपकी कमाई के कई स्रोत हैं या मामला थोड़ा जटिल है, तो किसी टैक्स एक्सपर्ट की सलाह लेना बेहतर हो सकता है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।