ITR Filing 2026 Deadline: 31 जुलाई से पहले ऐसे भरें आयकर रिटर्न, पेनल्टी से बचें

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अगर आपने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए अपना आयकर रिटर्न (ITR) अभी तक दाखिल नहीं किया है, तो तुरंत सावधान हो जाएं! व्यक्तिगत करदाताओं और वेतनभोगियों के लिए बिना  किसी लेट फीस के ITR फाइल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 है।

 

अंतिम समय में इनकम टैक्स पोर्टल पर ट्रैफिक का दबाव बढ़ने से सर्वर स्लो होने या पेमेंट अटकने की समस्या हो सकती है। यदि आप 31 जुलाई की समय सीमा चूक जाते हैं, तो आपको  भारी लेट फीस, ब्याज और कई वित्तीय नुकसान उठाने पड़ सकते हैं।
 

धारा 234F के तहत पेनल्टी (Late Fee Slabs) 

आयकर कानून की धारा 234F के अनुसार, नियत तारीख के बाद रिटर्न (Belated Return) दाखिल करने पर निम्नलिखित जुर्माना लागू होता है:

 

कुल वार्षिक आय (Total Income) 31 जुलाई के बाद ITR फाइल करने पर लेट फीस

2.5 लाख तक रुपए (मूल छूट सीमा) कोई पेनल्टी नहीं

2.5 लाख से 5 लाख रुपए तक 1,000 रुपए अधिकतम लेट फीस

5 लाख रुपए से अधिक 5,000 रुपए लेट फीस

 

समय पर ITR न भरने के 4 बड़े नुकसान

1. धारा 234A के तहत ब्याज : यदि आपका कोई टैक्स बकाया है, तो समय सीमा समाप्त होने के बाद आपको बकाए टैक्स पर 1% प्रति माह की दर से ब्याज देना होगा। 
 

2. नुकसान (Losses) को कैरी फॉरवर्ड न कर पाना : शेयर बाजार, फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) या बिजनेस से हुए नुकसान को अगले वर्षों के मुनाफे से एडजस्ट (Carry Forward) करने का विकल्प समाप्त हो जाता है।
 

3. ओल्ड टैक्स रिजीम का विकल्प बंद: यदि आप पुरानी कर व्यवस्था (Old Tax Regime) चुनना चाहते थे, तो समय सीमा बीत जाने के बाद आप केवल न्यू टैक्स  रिजीम (New Tax Regime) के तहत ही बेलैटेड रिटर्न भर पाएंगे।

4. रिफंड में देरी : यदि आपका TDS कटा है और आप रिफंड के हकदार हैं, तो देर से फाइल करने पर आपका रिफंड अटक सकता है या उसमें काफी देरी हो सकती है।

 

पोर्टल पर ऑनलाइन ITR फाइल करने की चरणबद्ध प्रक्रिया

समय सीमा समाप्त होने से पहले घर बैठे आधिकारिक पोर्टल (incometax.gov.in) पर आसानी से ITR फाइल करने के लिए इन स्टेप्स का पालन करें:
 

1.ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉगिन करें: PAN और पासवर्ड तैयार रखें।

आधिकारिक वेबसाइट incometax.gov.in पर जाएं। अपनी यूजर आईडी (PAN) और पासवर्ड का उपयोग करके लॉगिन करें।
 

2.File Income Tax Return चुनें:

लॉगिन के बाद मुख्य डैशबोर्ड पर e-File > Income Tax Returns > File Income Tax Return विकल्प पर क्लिक करें।
 

3.आकलन वर्ष (Assessment Year) का चयन करें:

आकलन वर्ष में AY 2026-27 का चयन करें। इसके बाद ऑनलाइन फाइलिंग (Online Mode) चुनें और 'Start New Filing' पर क्लिक करें।
 

4.करदाता स्थिति एवं सही ITR फॉर्म का चुनाव करें:

अपनी स्थिति Individual चुनें। यदि आपकी केवल वेतन, एक मकान संपत्ति या ब्याज से आय है, तो ITR-1 (Sahaj) चुनें।
 

5.AIS और Form 26AS से आंकड़ों का मिलान करें:

अपने फॉर्म 16, AIS (Annual Information Statement) और Form 26AS के आंकड़ों की जांच करें। यदि कोई टैक्स बकाया दिखता है, तो e-Pay Tax  के माध्यम से तुरंत भुगतान करें।
 

6.समीक्षा करें और e-Verify पूरा करें:

अपनी सभी जानकारियों की दोबारा समीक्षा करके Submit पर क्लिक करें। इसके बाद अपने आधार OTP या नेट बैंकिंग का उपयोग करके e-Verification प्रक्रिया तुरंत पूरी  करें (बिना ई-वेरिफिकेशन के ITR अमान्य माना जाता है)।
 

ITR सबमिट करने से पहले अंतिम चेकलिस्ट 

– AIS/TIS की जांच: अपने पोर्टल पर जाकर AIS जरूर डाउनलोड करें और उसमें दर्ज ब्याज, डिविडेंड या शेयर ट्रेडिंग की जानकारी अपने रिकॉर्ड से मिलाएं।

– बैंक खाता वैलिडेट करें: सुनिश्चित करें कि आपका बैंक खाता पोर्टल पर पूर्व-सत्यापित (Pre-validated) है ताकि रिफंड सीधे आपके खाते में आ सके।

– ई-वेरिफिकेशन न भूलें: ITR फाइल करने के 30 दिनों के भीतर ई-वेरिफिकेशन करना अनिवार्य है।

सलाह: यदि पोर्टल पर अत्यधिक लोड के कारण तकनीकी समस्या आए, तो स्क्रीनशॉट लेकर रखें और थोड़ा रुककर पुनः प्रयास करें। 31 जुलाई की मध्यरात्रि से पहले अपनी प्रक्रिया पूरी कर लें। 

 

आयकर रिटर्न (ITR) भरते समय सही फॉर्म चुनना सबसे महत्वपूर्ण चरण है। गलत फॉर्म चुनने पर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट आपके रिटर्न को 'Defective Return' (धारा  139(9)) करार दे सकता है। 

व्यक्तिगत करदाताओं (Individuals) के लिए ITR-1 (Sahaj) और ITR-2 सबसे आम फॉर्म हैं। 

ITR-1 (Sahaj) और ITR-2 में मुख्य अंतर 

विषय ITR-1 (Sahaj) ITR-2

पात्रता (Eligibility) केवल भारत के निवासी (Resident Individuals) निवासी (Resident), अनिवासी (NRI) और HUF

कुल आय सीमा ₹50 लाख तक ₹50 लाख से अधिक (कोई सीमा नहीं)

मकान संपत्ति (House Property) केवल 1 मकान संपत्ति से आय 1 से अधिक मकान संपत्तियों से आय

कैपिटल गेन्स (शेयर, MF, प्रॉपर्टी) केवल Section 112A के तहत ₹1.25 लाख तक LTCG सभी प्रकार के Capital Gains (STCG/LTCG,  प्रॉपर्टी, सोना आदि)

विदेशी संपत्ति / आय (Foreign Assets) अनुमति नहीं है विदेश में संपत्ति, शेयर (RSUs/ESOPs) या आय होने पर अनिवार्य

कृषि आय (Agricultural Income) ₹5,000 तक ₹5,000 से अधिक होने पर

डायरेक्टर / अनलिस्टेड शेयर कंपनी में डायरेक्टर या अनलिस्टेड शेयरधारक फाइल नहीं कर सकते कंपनी के डायरेक्टर या अनलिस्टेड शेयरधारक फाइल कर सकते हैं

आपके लिए कौन सा फॉर्म सही है?

1. आपको ITR-1 (Sahaj) चुनना चाहिए यदि:
 

आपकी कुल वार्षिक आय ₹50 लाख तक है। 

आपकी आय का मुख्य स्रोत वेतन (Salary), पेंशन (Pension) या ब्याज/डिविडेंड (Other Sources) है। 

आपके पास केवल 1 मकान संपत्ति (Single House Property) है। 

आपकी कृषि आय (Agricultural Income) ₹5,000 या उससे कम है। 

आपने शेयर या म्यूचुअल फंड बेचे हैं, लेकिन आपका कुल लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (Section 112A u/s) ₹1.25 लाख के अंदर है और कोई अन्य कैपिटल गेन  या लॉस नहीं है। 

2. आपको ITR-2 चुनना चाहिए यदि: 

आपकी कुल वार्षिक आय ₹50 लाख से अधिक है। 

आपने शेयर, म्यूचुअल फंड, जमीन, मकान या सोना बेचा है और आपको Short-Term Capital Gain (STCG) या अधिक LTCG हुआ है। 

आपके पास 2 या उससे अधिक मकान हैं जिनसे किराया या आय आती है। 

आपकी विदेशी आय है या विदेश में कोई बैंक खाता/कंपनी शेयर (जैसे MNCs से मिले US Stocks/ESOPs) हैं। 

आपकी कृषि आय ₹5,000 से अधिक है। 

आप किसी कंपनी में डायरेक्टर (Director) हैं या आपके पास अनलिस्टेड कंपनियों के शेयर हैं। 

आपका आवासीय दर्जा NRI (Non-Resident Indian) या RNOR है। 

ध्यान दें: बिजनेस या प्रोफेशन से आय (जैसे फ्रीलांसिंग, कंसल्टेंसी, ट्रेडिंग या बिज़नेस प्रॉफिट) कमाने वाले व्यक्ति ITR-1 या ITR-2 का उपयोग नहीं कर सकते। उनके लिए ITR-3  या ITR-4 लागू होता है। 

 

 

आयकर पोर्टल (Income Tax Portal) से AIS (Annual Information Statement) डाउनलोड करना और उसका Form 16 से मिलान  (Reconciliation) करना आयकर रिटर्न (ITR) फाइल करने का सबसे महत्वपूर्ण चरण है। इससे आपके ITR में किसी प्रकार के मिसमैच की संभावना खत्म हो जाती है।
 

1. AIS कैसे डाउनलोड करें? (Step-by-Step Guide) 
 

1.इ-फाइलिंग पोर्टल पर लॉगिन करें:

आयकर विभाग की आधिकारिक वेबसाइट incometax.gov.in पर जाएं। अपने PAN (यूजर ID) और पासवर्ड से लॉगिन करें।

2.Services मेनू में जाएं:

लॉगिन के बाद मुख्य मेनू बार पर Services टैब पर क्लिक करें और ड्रॉपडाउन से Annual Information Statement (AIS) चुनें।

3.AIS पोर्टल पर रिडायरेक्ट हों:

स्क्रीन पर एक पॉप-अप मैसेज आएगा, वहां Proceed पर क्लिक करें। यह आपको एक नए Compliance Portal पर ले जाएगा।

4.असेसमेंट ईयर और फाइल फॉर्मेट चुनें:

Compliance Portal पर AIS टैब पर क्लिक करें। ऊपर से सही असेसमेंट ईयर (जैसे AY 2026-27) चुनें।

5.PDF या Excel में डाउनलोड करें:PDF खोलने के लिए पासवर्ड डालें.

आप पूरे विवरण को PDF या JSON/Excel फॉर्मेट में डाउनलोड करने के लिए Download बटन पर क्लिक करें।
 

PDF खोलने का पासवर्ड Format: 

AIS की PDF फाइल पासवर्ड प्रोटेक्टेड होती है। इसका पासवर्ड आपका PAN (स्मॉल लेटर्स में) + आपकी जन्मतिथि (DDMMYYYY) होता है। 

उदाहरण: यदि आपका PAN ABCDE1234F और DOB 15/08/1990 है, तो पासवर्ड होगा: abcde1234f15081990।

2. Form 16 और AIS का मिलान (Reconciliation) कैसे करें? 

Form 16 आपके एम्प्लॉयर (कंपनी) द्वारा दी गई सैलरी और काटे गए TDS का प्रमाण है, जबकि AIS में आपकी सैलरी के अलावा बैंक ब्याज, डिविडेंड, शेयर ट्रेडिंग आदि की भी  जानकारी होती है। 

दोनों का मिलान करते समय निम्नलिखित बिंदुओं को क्रमानुसार जांचें:

1. ग्रॉस सैलरी (Gross Salary) का मिलान 

Form 16 (Part B): अपनी कुल ग्रॉस सैलरी और एम्प्लॉयर द्वारा काटे गए कुल TDS की जांच करें। 

AIS (Part B – TDS/TCS section): सैलरी कोड (192) के सामने दिख रही रकम और काटे गए TDS का मिलान Form 16 के Part A से  करें। 

ध्यान दें: यदि आपने साल के दौरान नौकरी बदली है, तो दोनों एम्प्लॉयर्स के Form 16 की कुल रकम का जोड़ AIS की कुल सैलरी से मिलना चाहिए। 

2. TDS और Form 26AS से क्रॉस-चेक 

Form 16 में दर्ज कुल TDS कटौती, AIS के TDS/TCS टैब और आपके Form 26AS में दिख रहे टैक्स क्रेडिट से पूरी तरह मैच होनी चाहिए। 

3. अन्य आय (Other Income) की पहचान 

AIS में सैलरी के अलावा कई ऐसी आय दर्ज होती हैं जो Form 16 में नहीं होतीं: 

बैंक ब्याज (Savings/FD Interest): पासबुक और बैंक से मिले इंटरेस्ट सर्टिफिकेट से इसका मिलान करें। 

डिविडेंड (Dividend Income): शेयर या म्यूचुअल फंड से मिले डिविडेंड को क्रॉस-चेक करें। 

कैपिटल गेन्स (Shares/MF Sale): शेयर या प्रॉपर्टी बिक्री से हुई कमाई AIS के SFT Information में दिखती है।
 

यदि AIS में गलत जानकारी या अंतर दिखाई दे तो क्या करें? 
 

अगर AIS में कोई ऐसी इनकम दर्ज दिख रही है जो आपकी नहीं है या कोई आंकड़ा दो बार (Duplicate) दर्ज हो गया है, तो आप पोर्टल पर Feedback दे सकते हैं: 

1. AIS Portal पर उस गलत एंट्री/लाइन आइटम पर क्लिक करें। 

2. Optional / Feedback बटन चुनें।

3. उपयुक्त विकल्प चुनें (जैसे: Information is not correct, Income is not taxable, या Information relates to  other PAN/Year)।

4. इसे सबमिट कर दें। सबमिट करने के बाद आपकी TIS (Taxpayer Information Summary) अपने आप अपडेट हो जाएगी।

8 साल के एक्सपीरियंस वाले SBI मैनेजर की CTC 35.25 लाख रुपये की पर इसका चौंकाने वाला ब्रेकअप और कैच हुआ वायरल

भारत में सरकारी नौकरी आज भी सुरक्षित करियर और अच्छी सैलरी की वजह से लोगों की पहली पसंद मानी जाती है। खासकर अगर आपकी नौकरी सरकारी बैंक में हो तो अलग ही बात होती है। हाल ही में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के एक स्केल-3 मैनेजर की बताई जा रही सैलरी स्लिप सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल हो रहे इस डाक्युमेंट में सालाना करीब 35.24 लाख रुपये की ग्रॉस सैलरी दिखाई गई है, लेकिन कई लोगों का कहना है कि इसकी पूरी तस्वीर कुछ अलग है। इसे देखने के बाद लोग सरकारी बैंक कर्मचारियों की सैलरी और उससे जुड़ी सुविधाओं को लेकर अलग-अलग राय दे रहे हैं।

यूजर ने पोस्ट किया सैलरी स्लिप

एक्स (X) पर शेयर की गई पोस्ट के कैप्शन में लिखा गया, “लोग अक्सर कहते हैं कि एसबीआई कर्मचारियों की जिंदगी पूरी तरह से सेटल होती है, लेकिन इस स्केल-3 मैनेजर की सैलरी स्लिप देखने के बाद आपकी सोच बदल सकती है।” पोस्ट करने वाले यूजर ने दावा किया कि, संबंधित कर्मचारी ने करीब आठ साल पहले एसबीआई में प्रोबेशनरी ऑफिसर (PO) के रूप में नौकरी शुरू की थी। बाद में पदोन्नति मिलने के बाद वह स्केल-3 मैनेजर बन गया। पोस्ट के साथ शेयर किए गए वित्त वर्ष 2025-26 के फॉर्म-16 के अनुसार, उसकी कुल वार्षिक ग्रॉस सैलरी 35,24,315.88 रुपये बताई गई है।

व्यक्ति ने कही ये बात

पोस्ट शेयर करने वाले व्यक्ति ने ये भी साफ किया कि ग्रॉस सैलरी को कर्मचारी की हर महीने मिलने वाली आय नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि इस रकम में लीव फेयर कंसेशन (LFC) एनकैशमेंट और लीव एनकैशमेंट शामिल हैं, जो सैलरी के बार-बार मिलने वाले हिस्से के बजाय एक बार या कभी-कभी मिलने वाले फायदे हैं। पोस्ट में आगे लिखा गया, “इसके अलावा, हर महीने आयकर, एनपीएस (NPS), ईपीएफ (EPF), होम लोन की ईएमआई, कार लोन और टू-व्हीलर लोन जैसी कई मदों में कटौती होती है। इसलिए फॉर्म-16 में दिखाई गई ग्रॉस सैलरी और हर महीने बैंक खाते में आने वाली वास्तविक रकम में काफी अंतर हो सकता है।”

सोशल मीडिया पर किया कमेंट

इस पोस्ट के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों के बीच नई बहस शुरू हो गई। एक यूजर ने लिखा, “फॉर्म-16 देखने में भले ही शानदार लगता हो, लेकिन हर महीने हाथ में आने वाली सैलरी असली स्थिति बताती है। ग्रॉस सैलरी के बड़े आंकड़े हमेशा बैंक कर्मचारियों की वास्तविक कमाई नहीं दिखाते।” दूसरे यूजर ने मजाकिया अंदाज में कहा, “यही सबसे बड़ी बात है। हम अक्सर सिर्फ बड़े आंकड़े देखकर राय बना लेते हैं, जबकि टैक्स, कटौतियां, जिम्मेदारियां और आखिर में हाथ में आने वाली रकम को नजरअंदाज कर देते हैं।”

एक यूजर ने टिप्पणी करते हुए लिखा, “आठ साल की नौकरी के बाद स्केल-3 पर करीब 2 लाख रुपये इन-हैंड सैलरी मिल रही है। मेरे हिसाब से यह काफी अच्छा पैकेज है। इतने ही अनुभव वाले कई क्लास-ए गजेटेड अधिकारियों से भी यह बेहतर माना जा सकता है।”

Income Tax Return: अगर आपके फॉर्म 16 में टैक्स जीरो है तो भी न करें ये भूल! इन 4 बड़े फायदों के लिए जरूर फाइल करें ITR

नौकरीपेशा लोगों के बीच अक्सर यह आम धारणा होती है कि अगर उनके फॉर्म 16 में कोई टैक्स नहीं कटा है या फिर कोई टैक्स देनदारी नहीं बनती है तो उन्हें इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की कोई जरूरत नहीं है। टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक फॉर्म 16 में टैक्स लायबिलिटी निल होने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आपको आईटीआर दाखिल करने से छूट मिल गई है। ऐसा न करना आपको भारी पड़ सकता है।

फॉर्म 16 नहीं है आपकी वित्तीय स्थिति की पूरी तस्वीर

King Stubb & Kasiva, Advocates and Attorneys के पार्टनर आदित्य भट्टाचार्य का कहना है कि एक आम गलतफहमी यह है कि अगर फॉर्म 16 में कोई टीडीएस या देय टैक्स नहीं है तो आईटीआर फाइल करने की जरूरत नहीं है। हालांकि, फॉर्म 16 सिर्फ इंप्लॉयर द्वारा भुगतान किए गए वेतन और काटे गए टैक्स (अगर कोई है तो) का एक रिकॉर्ड है। यह किसी व्यक्ति की पूरी वित्तीय तस्वीर को नहीं दर्शाता है। आईटीआर फाइल करने की अनिवार्यता इनकम टैक्स एक्ट के प्रावधानों, आपकी कुल आय और वित्तीय वर्ष के दौरान किए गए वित्तीय लेनदेन पर निर्भर करती है।

इन 4 बड़े फायदों के लिए जरूर फाइल करें ITR

भले ही आपके फॉर्म 16 में टैक्स जीरो दिख रहा हो लेकिन नीचे दी गई स्थितियों और फायदों के लिए आपको आईटीआर जरूर दाखिल करना चाहिए-

1- टैक्स रिफंड का दावा करने के लिए

कई बार ऐसा होता है कि बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के ब्याज पर टीडीएस काट लेते हैं या फिर नौकरी बदलने की स्थिति में पिछला इंप्लॉयर नौकरी छोड़ने से पहले टैक्स काट लेता है। भले ही वित्तीय वर्ष के अंत में आपकी कुल अंतिम टैक्स देनदारी शून्य ही क्यों न हो, लेकिन इस कटे हुए एक्स्ट्रा टैक्स को वापस पाने का एकमात्र जरिया आईटीआर है। बिना रिटर्न फाइल किए आप रिफंड क्लेम नहीं कर सकते।

2- वित्तीय घाटे को आगे बढ़ाने के लिए

अगर आप शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड या प्रॉपर्टी से कोई कैपिटल लॉस उठाते हैं तो नियमों के तहत आप इस घाटे को भविष्य के मुनाफे के साथ एडजस्ट कर सकते हैं। यह लाभ आपको तभी मिलेगा जब आप निर्धारित समय सीमा के भीतर अपना आईटीआर दाखिल करेंगे। डेडलाइन चूकने का मतलब है कि आप इस मूल्यवान टैक्स लाभ को हमेशा के लिए खो देंगे।

3- इन विशेष सरकारी शर्तों/नियमों को पूरा करने के लिए

टैक्स एक्सपर्ट्स के अनुसार भले ही आपका अंतिम टैक्स शून्य हो लेकिन अगर आप वित्तीय वर्ष में निम्नलिखित में से किसी भी शर्त के दायरे में आते हैं तो आपके लिए आईटीआर फाइल करना कानूनी रूप से अनिवार्य हो जाता है:

  • एक या अधिक सेविंग्स बैंक अकाउंट्स में 50 लाख रुपये से अधिक जमा करना।
  • एक या अधिक करंट अकाउंट्स (चालू खातों) में 1 करोड़ रुपये या उससे अधिक जमा करना।
  • अपने या किसी अन्य व्यक्ति के लिए विदेश यात्रा पर 2 लाख रुपये से अधिक खर्च करना।
  • एक वित्तीय वर्ष में 1 लाख रुपये से अधिक का बिजली बिल चुकाना।
  • अगर आप भारत के निवासी हैं और विदेशों में संपत्ति रखते हैं, किसी विदेशी संस्था में वित्तीय हित रखते हैं, विदेशी बैंक खाते में हस्ताक्षर करने का अधिकार रखते हैं या विदेशी संपत्तियों के लाभार्थी हैं।
  • वर्ष के दौरान कुल टीडीएस (TDS) या टीसीएस (TCS) 25000 रुपये या उससे अधिक हो (वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह सीमा 50000 रुपये है)।
  • ऐसे प्रोफेशनल्स जिनकी कुल प्राप्तियां 10 लाख रुपये से अधिक हैं, भले ही उनकी टैक्स योग्य आय बुनियादी छूट सीमा से कम ही क्यों न हो।

4- लोन और वीजा के लिए पुख्ता इनकम प्रूफ

‘दिनेश आर्जव एंड एसोसिएट्स, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स’ की पार्टनर और एनआरआई टैक्स एक्सपर्ट प्रियल गोयल जैन कहती हैं कि कंप्लायंस के नजरिए से परे आपका आईटीआर चुपचाप आपके लिए दूसरी जगहों पर भी बहुत काम करता है। बैंक और वीजा कार्यालय अक्सर आय के प्रमाण के रूप में इसी दस्तावेज को मांगते हैं। इसलिए रिकॉर्ड में आईटीआर का होना बेहद फायदेमंद है, भले ही तकनीकी रूप से आपके लिए इसे फाइल करना जरूरी न रहा हो।

ऐसे में फॉर्म 16 में जीरो टैक्स देखकर आईटीआर न भरने की धारणा नुकसानदेह हो सकती है। ‘AQUILAW’ की लीड कंसलटेंट (टैक्स) – IDT डिंपल जोगानी के मुताबिक, फाइलिंग की आवश्यकता को नजरअंदाज करने से टैक्सपेयर्स न सिर्फ अपना रिफंड खो सकते हैं बल्कि नुकसान को कैरी फारवर्ड करने का मौका भी गंवा सकते हैं। अगर आयकर विभाग बाद में यह पाता है कि आपके लिए फाइलिंग अनिवार्य थी तो आपको स्पष्टीकरण के लिए नोटिस भी मिल सकता है। मामले के तथ्यों के आधार पर लेट फाइलिंग फीस, ब्याज या अन्य परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल ने अब ऐसी गलतफहमियों की गुंजाइश को खत्म कर दिया है। इंप्लॉयर, बैंकों, म्यूचुअल फंडों, स्टॉक एक्सचेंजों और अन्य वित्तीय संस्थानों से मिलने वाली जानकारी अब टैक्सपेयर के एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) और टैक्सपेयर इंफॉर्मेशन समरी (TIS) में दिखाई देती है। इसके जरिए इनकम टैक्स डिपार्टमेंट आपके द्वारा किए गए वित्तीय लेनदेन की तुलना आपके रिटर्न में घोषित आय से आसानी से कर लेता है।

एक्सपर्ट्स की सलाह: सिर्फ फॉर्म 16 पर न रहें निर्भर

जैसे-जैसे टैक्स फाइलिंग का सीजन तेज हो रहा है विशेषज्ञ टैक्सपेयर्स को सलाह देते हैं कि वे ‘जीरो टीडीएस’ को ‘जीरो कंप्लायंस’ समझने की भूल न करें। सिर्फ फॉर्म 16 पर निर्भर रहने की बजाय, व्यक्तियों को अपनी आय के सभी स्रोतों की समीक्षा करनी चाहिए। अपने फॉर्म 26AS और एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) की जांच करनी चाहिए। यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे आईटीआर फाइल करने की शर्तों के दायरे में आते हैं या नहीं।

Income Tax Refund: पूरा इनकम टैक्स रिफंड नहीं मिला? ये 7 कारण हो सकते हैं जिम्मेदार

Income Tax Refund: ITR फाइल करने के बाद ज्यादातर लोगों को 4 से 5 हफ्तों में टैक्स रिफंड मिल जाता है। लेकिन कई बार खाते में उतनी रकम नहीं आती, जितनी आपने क्लेम की थी। इसकी वजह यह है कि इनकम टैक्स विभाग रिटर्न प्रोसेस करते समय आपकी जानकारी का दोबारा मिलान करता है। अगर कोई गड़बड़ी मिलती है, तो रिफंड की रकम कम हो सकती है।

पूरा रिफंड क्यों नहीं मिलता?

रिटर्न प्रोसेस करते समय इनकम टैक्स विभाग Form 26AS, AIS, TIS, TDS स्टेटमेंट और दूसरी जानकारियों का मिलान करता है। अगर इनमें अंतर मिलता है, तो रिफंड कम हो सकता है। इसके लिए ये 7 कारण जिम्मेदार हो सकते हैं।

  • TDS या TCS की जानकारी में गड़बड़ी
  • बैंक ब्याज या कैपिटल गेन जैसी टैक्स योग्य आय छूट जाना
  • गलत टैक्स छूट (Deduction) का दावा
  • एडवांस टैक्स या सेल्फ-असेसमेंट टैक्स की गलत जानकारी
  • टैक्स के कैलकुलेशन में गलती
  • धारा 234A, 234B और 234C के तहत ब्याज लगना
  • पुराने असेसमेंट ईयर की बकाया टैक्स डिमांड

अगर विभाग कोई बदलाव करता है, तो धारा 143(1) के तहत इंटिमेशन भेजता है। इसमें रिफंड कम होने की वजह भी बताई जाती है।

रिफंड की रकम कैसे तय होती है?

इनकम टैक्स विभाग आपकी आय, टैक्स छूट और टैक्स क्रेडिट का मिलान करता है। इसके लिए वह कंपनी, बैंक और दूसरी वित्तीय संस्थाओं से मिली जानकारी का इस्तेमाल करता है।

इसके बाद आपकी कुल टैक्स देनदारी दोबारा निकाली जाती है। फिर TDS, TCS, एडवांस टैक्स और सेल्फ-असेसमेंट टैक्स को एडजस्ट किया जाता है। अगर आपने जरूरत से ज्यादा टैक्स जमा किया है, तो बची हुई रकम रिफंड के रूप में मिलती है। अगर पुराने साल का कोई टैक्स बकाया है, तो उसे भी रिफंड से एडजस्ट किया जा सकता है।

पुराने टैक्स बकाया का क्या होगा?

अगर किसी पुराने असेसमेंट ईयर का टैक्स बकाया है, तो इनकम टैक्स विभाग उसे आपके रिफंड से एडजस्ट कर सकता है। हालांकि, ऐसा करने से पहले विभाग ई-फाइलिंग पोर्टल पर सूचना देता है।

टैक्सपेयर्स को डिमांड स्वीकार करने, आंशिक रूप से मानने या उस पर आपत्ति दर्ज कराने का मौका मिलता है। तय समय तक जवाब नहीं मिलने या जवाब पर फैसला होने के बाद ही एडजस्टमेंट किया जाता है।

ब्याज भी घटा सकता है रिफंड

अगर आपने ITR देर से फाइल की है, एडवांस टैक्स कम भरा है या उसकी किस्त समय पर जमा नहीं की है, तो धारा 234A, 234B और 234C के तहत ब्याज देना पड़ सकता है।

यह ब्याज आपकी कुल टैक्स देनदारी में जुड़ जाता है। ऐसे में TDS पूरा कटा होने पर भी रिफंड कम मिल सकता है।

अगर रिफंड कम मिले तो क्या करें?

अगर आपको लगता है कि रिफंड गलत तरीके से कम किया गया है, तो सबसे पहले धारा 143(1) के तहत मिला इंटिमेशन पढ़ें। उसमें पूरी वजह लिखी होती है।

अगर कोई गलती दिखे, तो रेक्टिफिकेशन के लिए आवेदन करें। Form 16, Form 16A, Form 26AS, AIS, TIS, टैक्स चालान, निवेश के दस्तावेज, कैपिटल गेन का हिसाब, ITR की कॉपी और पुराने टैक्स रिकॉर्ड संभालकर रखें। जरूरत पड़ने पर यही दस्तावेज काम आएंगे।

रिफंड कम होने से कैसे बचें?

ITR फाइल करने से पहले Form 26AS, AIS और TIS का अच्छी तरह मिलान करें। बैंक ब्याज, कैपिटल गेन और दूसरी सभी टैक्स योग्य आय जरूर शामिल करें। सही ITR फॉर्म चुनें। टैक्स छूट और टैक्स क्रेडिट का दावा दस्तावेजों के आधार पर ही करें।

बैंक अकाउंट पहले से प्री-वैलिडेट रखें। ITR फाइल करने के बाद समय पर ई-वेरिफिकेशन करें। रिटर्न सबमिट करने से पहले एक बार पूरी जानकारी जरूर जांच लें। इससे रिफंड में कटौती या देरी की संभावना काफी कम हो जाती है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

ITR Filing Deadline: बदल गई ITR भरने की आखिरी तारीख! सैलरीड क्लास और बिजनेसमैन के लिए आ गया नया कैलेंडर, देखें पूरी लिस्ट

Income Tax Return Dates AY 2026-27: अगर आप हर साल की तरह इस बार भी यह मानकर चल रहे हैं कि इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई ही है, तो थोड़ा ठहरिए। असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने डेडलाइन में बड़ा बदलाव किया है।

बजट 2026 में किए गए बदलावों के बाद अब हर किसी के लिए एक सिंगल डेडलाइन 31 जुलाई नहीं होगी। अब आपकी आखिरी तारीख इस बात पर निर्भर करेगी कि आप कौन सा आईटीआर फॉर्म भरते हैं। आइए जानते हैं टैक्स कैलेंडर में हुए इस बदलाव को ताकि आप भारी पेनाल्टी और नुकसान से बच सकें।

बड़ा बदलाव: फॉर्म के हिसाब से अलग-अलग होंगी आखिरी तारीखें

सरकार ने नौकरीपेशा और बिजनेस/प्रोफेशनल क्लास के लिए डेडलाइन को अलग-अलग कर दिया है, जो इस प्रकार है:

सैलरीड क्लास और पेंशनर्स (ITR-1 और ITR-2): नौकरीपेशा लोग, पेंशनर्स और ऐसे निवेशक जिनकी आय सैलरी, कैपिटल गेन्स, ब्याज या एक-दो मकानों से है, उनके लिए आखिरी तारीख 31 जुलाई 2026 ही रहेगी। इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है।

छोटे कारोबारी और प्रोफेशनल्स (ITR-3 और ITR-4 -बिना ऑडिट वाले): फ्रीलांसरों, कंसलटेंट्स, डॉक्टरों, वकीलों, छोटे दुकानदारों और प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन का विकल्प चुनने वालों को सरकार ने बड़ी राहत दी है। अब ये लोग 31 अगस्त 2026 तक अपना आईटीआर भर सकते हैं। इन्हें बुककीपिंग और मिलान के लिए पूरा एक महीना एक्स्ट्रा मिला है।

टैक्स ऑडिट वाले मामले: जिन बिजनेस या कंपनियों का टैक्स ऑडिट होना है, उनके लिए आखिरी तारीख 31 अक्टूबर 2026 तय है हालांकि ऑडिट रिपोर्ट एक महीना पहले, यानी 30 सितंबर तक जमा करनी होगी।

ट्रांसफर प्राइसिंग वाले मामले: इनके लिए डेडलाइन 30 नवंबर 2026 रहेगी।

AY 2026-27 के लिए ITR फाइलिंग का नया कैलेंडर

 

दूसरा बड़ा बदलाव: रिवाइज्ड रिटर्न भरने के लिए अब मिलेगा ज्यादा समय

टैक्सपेयर्स के लिए एक और बड़ी खुशखबरी है। पहले अपनी गलती सुधारने के लिए रिवाइज्ड रिटर्न भरने की आखिरी तारीख 31 दिसंबर हुआ करती थी। लेकिन इस साल से इस विंडो को बढ़ाकर 31 मार्च 2027 कर दिया गया है। यानी अगर फॉर्म भरने के बाद आपको याद आता है कि आप 80C का क्लेम भूल गए हैं या AIS/26AS में कोई मिसमैच है, तो उसे सुधारने के लिए अब आपके पास भरपूर वक्त होगा।

डेडलाइन चूके तो सिर्फ जुर्माना नहीं, होगा यह बड़ा नुकसान

अगर आप तय तारीख तक रिटर्न नहीं भर पाते हैं, तो आप 31 दिसंबर 2026 तक बिलेटेड रिटर्न भर सकते हैं, लेकिन इसके गंभीर नतीजे होंगे:

लेट फीस और ब्याज: सेक्शन 234F के तहत ₹5,000 की लेट फीस लगेगी अगर कुल आय ₹5 लाख से कम है तो ₹1000 और बकाया टैक्स पर ब्याज देना होगा।

ओल्ड टैक्स रिजीम का विकल्प खत्म: सबसे बड़ा नुकसान यह है कि लेट होने पर आप पुरानी टैक्स व्यवस्था को नहीं चुन पाएंगे। आप डिफॉल्ट रूप से नई टैक्स व्यवस्था में शिफ्ट कर दिए जाएंगे। इसके अलावा आप बिजनेस या कैपिटल लॉस को आगे नहीं ले जा पाएंगे।

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यहां ये ध्यान देने वाली बात है कि यह साल पुराने ‘इंकम टैक्स एक्ट, 1961’ के तहत रिटर्न फाइल करने का आखिरी सीजन है। 1 अप्रैल 2026 से नया इनकम टैक्स एक्ट, 2025 लागू हो चुका है, जो अगले साल के रिटर्न्स पर लागू होगा। इस बार फॉर्म भरते समय अपने Form 16, Form 26AS और AIS का मिलान अच्छे से कर लें और सबमिट करने के 30 दिनों के भीतर ई-वेरिफाई करना न भूलें।

ITR Filing 2026: AI से फाइल कर रहे रिटर्न? एक्सपर्ट्स बोले- डेटा लीक होने से लेकर टैक्स नोटिस आने तक का खतरा

ITR Filing 2026: अब तकरीबन सभी सेक्टर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। ईमेल लिखने से लेकर निवेश और टैक्स प्लानिंग तक में लोग AI टूल्स की मदद ले रहे हैं।

लेकिन टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने के लिए केवल सामान्य AI चैटबॉट्स पर भरोसा करना महंगा पड़ सकता है। खासकर जब मामला कैपिटल गेन, विदेशी संपत्ति, क्रिप्टोकरेंसी या बिजनेस इनकम से जुड़ा हो।

AI पर पूरी तरह भरोसा करना क्यों गलत?

ClearTax के फाउंजर और CEO अर्चित गुप्ता का कहना है कि कई लोग अपना Form 16, सैलरी स्लिप और निवेश से जुड़ी जानकारी सीधे सार्वजनिक AI प्लेटफॉर्म पर अपलोड कर रहे हैं। इससे टैक्स कैलकुलेशन में गलती होने का खतरा रहता है।

उनके मुताबिक, सामान्य AI टूल्स के पास टैक्स नियमों का तय ढांचा नहीं होता। यही वजह है कि एक ही Form 16 अपलोड करने पर अलग-अलग बार अलग टैक्स देनदारी दिख सकती है। अगर रिटर्न में कोई गलती होती है तो उसकी पूरी जिम्मेदारी टैक्सपेयर की होगी, AI टूल की नहीं।

डेटा लीक का भी खतरा

रिटर्न फाइल करने में AI के इस्तेमाल से डेटा लीक होने का खतरा भी रहता है। अर्चित गुप्ता के मुताबिक, सार्वजनिक AI प्लेटफॉर्म पर सैलरी स्लिप, PAN, बैंक डिटेल या दूसरे वित्तीय दस्तावेज अपलोड करना सुरक्षित नहीं है। इससे आपकी निजी जानकारी लीक हो सकती है।

उन्होंने कहा कि यह कई कंपनियों की डेटा सिक्योरिटी पॉलिसी का उल्लंघन भी माना जा सकता है। कुछ मामलों में कर्मचारियों पर कार्रवाई तक की नौबत आ चुकी है।

AI कहां तक मददगार है?

Deloitte India के पार्टनर तरुण गर्ग का कहना है कि AI को टैक्स फाइलिंग का विकल्प नहीं, बल्कि एक सहायक टूल की तरह इस्तेमाल करना चाहिए। यह टैक्स नियम समझाने, जरूरी दस्तावेजों की सूची तैयार करने और पुराने-नए टैक्स रिजीम की तुलना करने में मदद कर सकता है।

हालांकि, AI से तैयार रिटर्न को अंतिम मानने के बजाय ड्राफ्ट की तरह देखें। रिटर्न फाइल करने से पहले सभी जानकारियों का मिलान आधिकारिक दस्तावेजों से जरूर करें।

रिटर्न भरने से पहले ये जांच जरूर करें

  • AIS, TIS और Form 26AS से सभी आय का मिलान करें।
  • सही ITR फॉर्म का चयन हुआ है या नहीं, इसकी पुष्टि करें।
  • पुराना या नया टैक्स रिजीम सही तरीके से चुना गया है या नहीं, यह जांचें।
  • TDS और TCS क्रेडिट का मिलान करें।
  • कैपिटल गेन, क्रिप्टो, विदेशी संपत्ति और अन्य जरूरी खुलासों की दोबारा जांच करें।
  • बैंक अकाउंट प्री-वैलिडेटेड है या नहीं, इसकी पुष्टि करें।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि AI टैक्स फाइलिंग को आसान जरूर बना सकता है, लेकिन अंतिम जिम्मेदारी हमेशा टैक्सपेयर की ही रहती है। इसलिए ITR फाइल करते समय AI की सलाह पर आंख बंद करके भरोसा करने के बजाय आधिकारिक पोर्टल या टैक्स प्रोफेशनल की मदद लेना ज्यादा सुरक्षित रहेगा।

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ITR Filing 2026: फॉर्म 16 नहीं मिला? फिर भी आसानी से भर सकते हैं ITR, जानिए स्टेप-बाय-स्टेप तरीका

ITR Filing 2026: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने का समय आते ही ज्यादातर नौकरीपेशा लोग Form 16 का इंतजार करने लगते हैं। यह दस्तावेज ITR फाइल करने का काम काफी आसान बना देता है। लेकिन कई बार नौकरी बदलने, कंपनी बंद हो जाने, कम सैलरी होने या किसी दूसरी वजह से Form 16 नहीं मिल पाता। ऐसे में कई लोगों को लगता है कि अब ITR भरना मुश्किल हो जाएगा।

लेकिन ऐसा नहीं है। अगर आपके पास Form 16 नहीं है, तब भी आप आसानी से अपना ITR फाइल कर सकते हैं। बस आपको अपनी कमाई, टैक्स कटौती और निवेश से जुड़ी कुछ जरूरी जानकारियां जुटानी होंगी।

Form 16 आखिर होता क्या है?

Form 16 एक टैक्स सर्टिफिकेट होता है, जिसे कंपनी अपने कर्मचारियों को देती है। इसमें सालभर की सैलरी, TDS, टैक्स छूट और दूसरी जरूरी जानकारियां दर्ज होती हैं।

हालांकि Form 16 ITR भरने में मदद करता है, लेकिन ITR दाखिल करने के लिए इसका होना जरूरी नहीं है। आयकर विभाग ने ऐसी कोई शर्त नहीं रखी है कि बिना Form 16 के रिटर्न नहीं भरा जा सकता।

बिना Form 16 के ITR कैसे भरें?

सबसे पहले सैलरी स्लिप जुटाएं

अगर Form 16 नहीं मिला है, तो सबसे पहले पूरे वित्त वर्ष की सैलरी स्लिप निकाल लें। इन स्लिप्स में आपकी बेसिक सैलरी, HRA, स्पेशल अलाउंस, बोनस और दूसरी भुगतान संबंधी जानकारी होती है।

अगर आपने साल के दौरान नौकरी बदली है, तो दोनों कंपनियों की सैलरी स्लिप साथ रखें। इससे कुल आय निकालना आसान हो जाएगा।

AIS और TIS जरूर चेक करें

इनकम टैक्स पोर्टल पर लॉगिन करके एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) और टैक्सपेयर इंफॉर्मेशन समरी (TIS) डाउनलोड करें।

AIS में आपकी सैलरी, बैंक ब्याज, डिविडेंड, शेयरों से हुई कमाई, TDS और कई दूसरे वित्तीय लेन-देन की जानकारी मिल जाती है। इससे आपको अपनी कुल आय का सही हिसाब लगाने में मदद मिलेगी।

Form 26AS को नजरअंदाज न करें

ITR भरने से पहले Form 26AS जरूर देखें। इसमें आपके PAN पर कटे TDS और जमा किए गए टैक्स का पूरा रिकॉर्ड होता है।

अगर आपकी कंपनी या बैंक ने TDS काटा है, तो वह यहां दिखाई देगा। इससे यह भी पता चल जाएगा कि आपके नाम पर कितना टैक्स जमा किया गया है।

सिर्फ सैलरी नहीं, दूसरी आय भी जोड़ें

कई लोग ITR भरते समय सिर्फ सैलरी की जानकारी भरते हैं और बैंक ब्याज, FD का ब्याज, डिविडेंड या दूसरी आय को भूल जाते हैं।

ऐसी गलती बाद में नोटिस की वजह बन सकती है। इसलिए AIS, बैंक स्टेटमेंट और निवेश से जुड़े रिकॉर्ड देखकर सभी आय को जोड़ना जरूरी है।

टैक्स छूट का फायदा लेना न भूलें

अगर आप पुरानी टैक्स व्यवस्था (Old Tax Regime) चुन रहे हैं, तो 80C, 80D, NPS, होम लोन और दूसरी उपलब्ध कटौतियों को जरूर शामिल करें।

अपने निवेश और खर्च से जुड़े दस्तावेज संभालकर रखें, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें दिखाया जा सके।

नौकरी बदली है तो ये गलती न करें

अगर आपने वित्त वर्ष के दौरान एक से ज्यादा कंपनियों में काम किया है, तो सभी कंपनियों से मिली सैलरी को जोड़कर कुल आय निकालें।

कई बार नया नियोक्ता पुरानी नौकरी की आय को अपने टैक्स कैलकुलेशन में शामिल नहीं करता। ऐसे में ITR भरते समय सही आंकड़ा खुद जोड़ना जरूरी होता है। वरना बाद में अतिरिक्त टैक्स देना पड़ सकता है।

ITR भरने से पहले एक बार सब मिलान कर लें

रिटर्न फाइल करने से पहले AIS, Form 26AS, बैंक स्टेटमेंट और सैलरी रिकॉर्ड का मिलान जरूर करें। यह भी सुनिश्चित करें कि आपकी हर आय उसमें शामिल हो।

अगर आपकी कमाई के कई स्रोत हैं या मामला थोड़ा जटिल है, तो किसी टैक्स एक्सपर्ट की सलाह लेना बेहतर हो सकता है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

ITR Filing 2026: क्या इस साल भी बढ़ेगी ITR फाइल करने की डेडलाइन? ये 5 फैक्टर करेंगे तय

ITR Filing 2026: ITR फाइलिंग की आखिरी तारीख पिछले साल दो बार बढ़ाई गई थी। इसकी वजह टैक्स नियमों में बदलाव और ई-फाइलिंग पोर्टल से जुड़ी कुछ तकनीकी चुनौतियां थीं। इसके चलते कई टैक्सपेयर उम्मीद कर रहे हैं कि इस साल भी डेडलाइन बढ़ सकती है। हालांकि मौजूदा हालात को देखते हुए इसकी संभावना काफी कम नजर आती है।

सबसे बड़ी वजह यह है कि इस बार फाइलिंग से जुड़ी ज्यादातर सुविधाएं और यूटिलिटीज समय पर उपलब्ध हैं। ई-फाइलिंग सिस्टम भी फिलहाल ठीक तरीके से काम कर रहा है। रिटर्न फाइल करने की रफ्तार भी अच्छी बनी हुई है।

किन 5 फैक्टर से डेडलाइन बढ़ने की उम्मीद कम?

1. कई टैक्सपेयर को पहले ही राहत मिल चुकी है

कई नॉन-ऑडिट टैक्सपेयर, फर्म पार्टनर्स और कुछ प्रोफेशनल्स के लिए ITR फाइलिंग की आखिरी तारीख पहले ही बढ़ाकर 31 अगस्त 2026 कर दी गई है। ऐसे में सभी के लिए एक और व्यापक राहत की जरूरत कम हो जाती है।

2. ITR फॉर्म समय पर जारी हुए

ITR-1, ITR-2, ITR-3 और ITR-4 की यूटिलिटीज पहले से उपलब्ध हैं। ये फॉर्म ज्यादातर टैक्सपेयर इस्तेमाल करते हैं। इसलिए सिर्फ कुछ फॉर्म्स में देरी की वजह से डेडलाइन बढ़ने की संभावना कम है।

3. तकनीकी दिक्कतें कम रहीं

पिछले साल पोर्टल से जुड़ी समस्याएं डेडलाइन बढ़ाने की एक बड़ी वजह थीं। इस बार फाइलिंग सीजन काफी अच्छा रहा है। अब तक कोई बड़ी तकनीकी समस्या सामने नहीं आई है।

4. टैक्स नियमों में ज्यादा बदलाव नहीं

पिछले कुछ वर्षों में इंडेक्सेशन नियमों, STCG और LTCG टैक्स जैसे कई बड़े बदलाव हुए थे। इस बार टैक्स सिस्टम भी काफी स्थिर है। इसलिए टैक्सपेयर और विभाग दोनों बेहतर तरीके से तैयार हैं।

5. फाइलिंग की रफ्तार मजबूत

21 जून 2026 तक 56 लाख से ज्यादा ITR दाखिल हो चुकी थीं। इनमें से 53 लाख से ज्यादा रिटर्न वेरिफाई भी हो चुकी हैं। यह दिखाता है कि फाइलिंग प्रक्रिया सामान्य तरीके से आगे बढ़ रही है।

अगर अब तक ITR नहीं भरा, तो क्या करें?

  • Form 16, ब्याज प्रमाणपत्र, कैपिटल गेन स्टेटमेंट और आय से जुड़े अन्य दस्तावेज पहले से जुटा लें।
  • रिटर्न में दी गई जानकारी AIS और Form 26AS से मेल खानी चाहिए। इससे गलती और नोटिस का जोखिम कम होता है।
  • रिटर्न भरने से पहले दोनों टैक्स रिजीम में अपनी टैक्स देनदारी की तुलना जरूर कर लें।
  • आखिरी समय का इंतजार करने पर पोर्टल पर दबाव बढ़ सकता है और गलतियों की संभावना भी रहती है।
  • सिर्फ ITR भरना काफी नहीं है। रिटर्न को ई-वेरिफाई करना भी जरूरी है। इसके बिना रिटर्न वैध नहीं मानी जाती।

कुल मिलाकर डेडलाइन बढ़ने की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता। हालांकि, मौजूदा हालात को देखते हुए टैक्सपेयर को मौजूदा समयसीमा को ही ध्यान में रखकर अपनी ITR फाइल करनी चाहिए।

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ITR Filing 2026: सैलरीड टैक्सपेयर्स अक्सर करते हैं ये 5 गलतियां, रिफंड में देरी से लेकर नोटिस आने का भी खतरा

ITR Filing 2026: सैलरी पाने वाले ज्यादातर लोगों के लिए अब ITR भरना पहले से काफी आसान हो गया है। Form 16, Form 26AS और पहले से भरी जानकारी की वजह से पूरी प्रक्रिया डिजिटल हो चुकी है। फिर भी हर साल कई टैक्सपेयर गलतियां कर बैठते हैं। इनकी वजह से रिफंड अटक जाता है, अतिरिक्त टैक्स देना पड़ता है या इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का नोटिस आ जाता है।

  1. सिर्फ Form 16 के भरोसे न रहें

कई लोग मान लेते हैं कि Form 16 में ITR के लिए जरूरी सारी जानकारी होती है। लेकिन, ऐसा नहीं है। इसमें सिर्फ सैलरी और कंपनी की ओर से काटा गया TDS दिखता है।

अगर आपको बैंक ब्याज, FD, RD, डिविडेंड, किराया, कैपिटल गेन, फ्रीलांसिंग या किसी दूसरे स्रोत से कमाई हुई है, तो वह Form 16 में नहीं दिखेगी। ऐसी आय छूटने पर बाद में परेशानी हो सकती है।

2. इन तीनों का मिलान जरूर करें

कई टैक्सपेयर Form 16 डाउनलोड करते हैं और सीधे ITR भर देते हैं। यही बड़ी गलती साबित हो सकती है।

Form 26AS में TDS, TCS और जमा किए गए टैक्स की जानकारी होती है। वहीं AIS में आपकी आय और वित्तीय लेनदेन का काफी विस्तृत रिकॉर्ड मिलता है। अगर इन दस्तावेजों और ITR में अंतर रह जाता है, तो रिफंड प्रभावित हो सकता है या अतिरिक्त टैक्स की मांग आ सकती है।

3. सही ITR फॉर्म चुनना जरूरी

हर टैक्सपेयर के लिए एक ही ITR फॉर्म नहीं होता। आपकी आय के स्रोत के हिसाब से फॉर्म बदलता है।

अगर आपके पास कैपिटल गेन, विदेशी एसेट, एक से ज्यादा मकान या बिजनेस इनकम है, तो अलग ITR फॉर्म लागू हो सकता है। गलत फॉर्म चुनने पर रिटर्न को डिफेक्टिव माना जा सकता है और बाद में सुधार करना पड़ सकता है।

4. सिर्फ सैलरी TDS पर भरोसा न करें

कई लोग सोचते हैं कि कंपनी ने सैलरी से TDS काट लिया है, इसलिए उनका टैक्स पूरा हो गया। लेकिन यह हमेशा सही नहीं होता।

अगर बैंक ब्याज, किराया, डिविडेंड या निवेश से अतिरिक्त कमाई हुई है, तो कुल टैक्स देनदारी बढ़ सकती है। ऐसे मामलों में Advance Tax देना पड़ सकता है। अगर यह समय पर नहीं दिया गया, तो ब्याज भी देना पड़ सकता है।

5. बिना दस्तावेज के छूट का दावा न करें

80C, 80D, होम लोन ब्याज या HRA जैसी छूट का दावा करते समय जरूरी दस्तावेज अपने पास जरूर रखें।

हालांकि ITR के साथ दस्तावेज अपलोड नहीं करने होते, लेकिन जरूरत पड़ने पर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट उन्हें मांग सकता है। गलत दावा करने पर अतिरिक्त टैक्स और ब्याज देना पड़ सकता है।

6. छोटी गलती भी पड़ सकती है भारी

ज्यादातर मामलों में टैक्स से जुड़ी परेशानी किसी जटिल नियम की वजह से नहीं, बल्कि ऐसी छोटी गलतियों की वजह से होती है। सभी आय की सही जानकारी देना, AIS और Form 26AS का मिलान करना और सही ITR फॉर्म चुनना आपको नोटिस, रिफंड में देरी और अतिरिक्त टैक्स की मांग से बचा सकता है।

ITR Filing 2026: रिटर्न फाइल करने के बाद रिवाइज कर रहे हजारों टैक्सपेयर, जानिए क्या है इसकी वजह

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।