SBI की 444 दिनों की स्पेशल FD स्कीम! जानें ₹5 लाख और ₹10 लाख फिक्स कराने पर कितना मिलेगा रिटर्न

SBI Amrit Vrishti Scheme: देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की स्पेशल फिक्स्ड डिपॉजिट योजना ‘अमृत वृष्टि’ निवेशकों के बीच काफी लोकप्रिय है। अगर आप सुरक्षित जगह पर निवेश करके शानदार रिटर्न पाना चाहते हैं, तो यह खास 444 दिनों की योजना आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकती है। बैंक की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, जानिए इस स्पेशल टेन्योर स्कीम की हर एक जरूरी बात।

ब्याज दरें: किसे कितना मिलेगा फायदा?

इस योजना के तहत अलग-अलग आयु वर्ग के निवेशकों के लिए ब्याज दरें तय की गई हैं:

  1. आम नागरिक: 6.45% सालाना
  2. वरिष्ठ नागरिक: 6.95% सालाना (सामान्य नागरिकों से 0.50% ज्यादा)
  3. सुपर सीनियर सिटीजन (80 वर्ष से अधिक): 7.05% सालाना

स्कीम की मुख्य विशेषताएं और नियम

अवधि: इस एफडी की मैच्योरिटी अवधि ठीक 444 दिन (करीब 14.5 महीने) तय की गई है।

न्यूनतम और अधिकतम राशि: इस योजना में रिटेल डिपॉजिट के तहत ₹1,000 से निवेश की शुरुआत की जा सकती है, और अधिकतम राशि ₹3 करोड़ से कम होनी चाहिए।

कौन कर सकता है निवेश: भारत के सामान्य नागरिक, हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) और अनिवासी भारतीय (NRIs) इसमें निवेश के पात्र हैं।

ब्याज भुगतान के विकल्प: निवेशक अपनी सुविधा के अनुसार ब्याज का भुगतान मासिक, त्रैमासिक, छमाही या सीधे मैच्योरिटी के समय ले सकते हैं।

लोन सुविधा: जरूरत पड़ने पर निवेशकों को इस एफडी पर लोन या ओवरड्राफ्ट की सुविधा भी मिलती है।

प्री-मैच्योर विड्रॉल यानी समय से पहले पैसे निकासी के नियम

अगर आपको मैच्योरिटी से पहले पैसों की जरूरत पड़ जाती है और आप एफडी तुड़वाते हैं, तो बैंक नियमों के तहत पेनल्टी काटता है:

₹5 लाख तक की राशि पर: 0.50% की पेनल्टी।

₹5 लाख से ₹3 करोड़ से कम राशि पर: 1.0% की पेनल्टी।

खास छूट: अगर एफडी को बुक करने के 7 दिनों के भीतर बंद किया जाता है, तो कोई ब्याज नहीं मिलता है। हालांकि, बैंक के कर्मचारियों और पेंशनर्स को इस पेनल्टी से छूट दी गई है।

कैसे कर सकते हैं आवेदन?

SBI की इस योजना का लाभ उठाने के लिए निवेशकों को बैंक जाने की भी जरूरत नहीं है, इसे घर बैठे ऑनलाइन भी शुरू किया जा सकता है:

  • SBI YONO App के जरिए।
  • एसबीआई की आधिकारिक इंटरनेट बैंकिंग पोर्टल से।
  • अपने नजदीकी एसबीआई की किसी भी शाखा में जाकर फॉर्म भरकर।

₹5 लाख और ₹10 लाख की FD पर कितना मिलेगा रिटर्न

एसबीआई की 444 दिनों वाली ‘अमृत वृष्टि’ एफडी में अगर आप 5 लाख रुपये का निवेश करते हैं, तो 6.45% सालाना ब्याज दर के हिसाब से आम नागरिकों को मैच्योरिटी पर लगभग ₹39,800 से ₹40,000 का ब्याज मिलेगा, जिससे कुल रकम बढ़कर करीब ₹5.40 लाख हो जाएगी; वहीं 6.95% की दर से वरिष्ठ नागरिकों को कुल ₹43,000 से ₹43,200 तक का रिटर्न मिलेगा, जिससे उनकी कुल रकम ₹5.43 लाख के पार पहुंच जाएगी।

इस स्कीम में ₹10 लाख की FD करने पर 6.45% सालाना चक्रवर्ती ब्याज दर के हिसाब से आम नागरिकों को मैच्योरिटी पर लगभग ₹80,000 से ₹80,500 तक का शुद्ध रिटर्न मिलेगा (कुल मैच्योरिटी रकम करीब ₹10.80 लाख हो जाएगी); वहीं 6.95% सालाना ब्याज दर के साथ वरिष्ठ नागरिकों को कुल ₹86,500 से ₹87,000 तक का ब्याज प्राप्त होगा, जिससे 444 दिनों बाद उनकी कुल जमा रकम बढ़कर लगभग ₹10.87 लाख पहुंच जाएगी।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

UP Shiksha Mitra: दिवाली से पहले यूपी के 1.27 लाख शिक्षामित्रों को बड़ा तोहफा, इस बार डबल से ज्यादा आएगी सैलरी

UP Shiksha Mitra Mandeya 2026: उत्तर प्रदेश के शिक्षामित्रों के लिए दिवाली से पहले बड़ी खुशखबरी आई है। सीएम योगी आदित्यनाथ की अगुवाई वाली सरकार ने बढ़े हुए मानदेय के भुगतान के लिए ₹460.23 करोड़ का बजट जारी कर दिया है। इसके बाद प्रदेश के 1,27,841 शिक्षामित्रों को सितंबर और अक्टूबर महीने का बढ़ा हुआ मानदेय मिलने का रास्ता साफ हो गया है। खास बात यह है कि दोनों महीनों की सैलरी एक साथ उनके बैंक खातों में भेजी जा सकती है।

₹10 हजार से बढ़कर ₹18 हजार हुआ मानदेय

सरकार ने शिक्षामित्रों के मानदेय को ₹10,000 से बढ़ाकर ₹18,000 प्रति माह करने की घोषणा की थी। अब सितंबर और अक्टूबर के बढ़े हुए मानदेय के भुगतान के लिए बजट जारी किया गया है। यानी पात्र शिक्षामित्रों को दो महीने के लिए कुल ₹36,000 तक का भुगतान मिल सकता है, जो पहले के दो महीने के ₹20,000 मानदेय से ₹16,000 अधिक है।

सभी जिलों को भेजा गया बजट

NDTV की एक रिपोर्ट के मुताबिक, शिक्षा विभाग की ओर से जारी बजट सभी जिलों को भेज दिया गया है। महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSA) को भुगतान प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि शिक्षामित्रों के खातों में राशि भेजने में किसी तरह की लापरवाही न हो।

दूसरे कर्मचारियों को भी मिल सकता है दिवाली गिफ्ट

शिक्षामित्रों के बाद यूपी सरकार के अन्य कर्मचारियों को भी दिवाली से पहले राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) में बढ़ोतरी की जा सकती है। इसके अलावा कर्मचारियों को करीब ₹3,000 से 7,000 रुपये तक बोनस मिलने की भी संभावना है। इससे प्रदेश के लाखों कर्मचारी और पेंशनर्स राहत की सांस लेंगे।

स्थायी नौकरी की मांग अब भी जारी

मानदेय बढ़ने के बावजूद शिक्षामित्रों की स्थायी रोजगार की मांग खत्म नहीं हुई है। शिक्षामित्र लंबे समय से नियमितीकरण और शिक्षक भर्ती में उचित लाभ दिए जाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि वे वर्षों से सरकारी स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। लेकिन उन्हें स्थायी नियुक्ति या विशेष TET में उचित अवसर नहीं दिया जा रहा।

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हालांकि, हाईकोर्ट ने शिक्षामित्रों को विशेष TET में शामिल होने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। शिक्षामित्रों का आरोप है कि सालों की सेवा के बावजूद उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है। उन्हें नियुक्ति प्रक्रिया में पर्याप्त वेटेज या अवसर नहीं मिल रहा है। इस नाराजगी को देखते हुए योगी सरकार की तरफ से आगामी यूपी चुनाव से पहले शिक्षामित्रों को मनाने की कोशिश जारी है।

8th Pay Commission: इस हफ्ते बेंगलुरु में बड़ी बैठक, कर्मचारियों की सैलरी व पेंशन पर होंगी ये 5 बड़ी चर्चाएं!

8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग की बैठकों की श्रृंखला में अगला सबसे बड़ा पड़ाव बेंगलुरु है। आयोग की टीम 7 और 8 अक्टूबर को बेंगलुरु के दो दिवसीय दौरे पर रहेगी। बैठक में भाग लेने और अपनी मांगें रखने के लिए कर्मचारी संघों, एसोसिएशनों और पेंशनभोगी संगठनों को अधिकारिक पोर्टल के माध्यम से 18 सितंबर तक आवेदन करने का समय दिया गया था। आयोग इस बैठक में प्रतिनिधिमंडलों और हितधारकों के साथ आमने-सामने की विस्तृत चर्चा करने जा रहा है।

किन-किन बड़ी बातों पर होगी चर्चा?

बेंगलुरु बैठक में केंद्र सरकार के कर्मचारियों, पेंशनर्स, रेलवे, रक्षा प्रतिष्ठानों, आयकर और अन्य केंद्रीय विभागों के क्षेत्रीय प्रतिनिधि शामिल होंगे। चर्चा का मुख्य फोकस इन प्रमुख बिंदुओं पर रहेगा:

वेतन और फिटमेंट फैक्टर: नए वेतनमान के तहत बेसिक पे का निर्धारण करने वाले फिटमेंट फैक्टर पर अंतिम सहमति बनाना।

पेंशन और रिटायरमेंट बेनिफिट्स: पेंशनभोगियों की पेंशन संशोधन, कम्यूटेशन अवधि घटाने और फैमिली पेंशन के नियमों को आसान बनाने पर मंथन।

भत्ते: बेंगलुरु जैसे तेजी से बढ़ते और महंगे शहरों के लिए हाउस रेंट अलाउंस (HRA), ट्रांसपोर्ट अलाउंस और मेडिकल सुविधाओं में बढ़ोतरी पर चर्चा।

वार्षिक वेतन वृद्धि: मौजूदा 3% सालाना वेतन वृद्धि दर की समीक्षा और इसे बढ़ाने की मांग।

कार्य परिस्थितियां व पदोन्नति: कैडर पुनर्गठन और समयबद्ध पदोन्नति से जुड़े स्थानीय मुद्दे।

कर्मचारी यूनियंस की मुख्य मांगें

कर्मचारी यूनियनों और नेशनल काउंसिल-जेसीएम (NC-JCM) की ओर से 8वें वेतन आयोग के समक्ष रखी जा रही प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:

 1. न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹69,000 करना: कर्मचारी संघों की मांग है कि न्यूनतम बेसिक सैलरी को मौजूदा ₹18,000 से बढ़ाकर ₹69,000 प्रति माह किया जाए।

2. 3.83 फिटमेंट फैक्टर की मांग: बेसिक पे के रिवीजन के लिए 3.833 फिटमेंट फैक्टर लागू करने का प्रस्ताव रखा गया है।

3. 5-यूनिट फैमिली फॉर्मूला: न्यूनतम वेतन तय करने के लिए कर्मचारी और परिवार के साथ आश्रित माता-पिता को भी शामिल करते हुए ‘5-यूनिट फॉर्मूला’ लागू करने की मांग।

4. वार्षिक इंक्रीमेंट 6% हो: सालाना इंक्रीमेंट को 3% से बढ़ाकर 6% करने की मांग की जा रही है।

5. कम्यूटेड पेंशन रीस्टोरेशन: कम्यूटेड पेंशन की बहाली अवधि को 15 साल से घटाकर 11 साल करने का प्रस्ताव।

ये सभी आंकड़े और शर्तें फिलहाल कर्मचारी यूनियनों द्वारा रखी गई मांगें हैं। आयोग की सिफारिशों और सरकार की अंतिम मंजूरी के बाद ही नई सैलरी और पेंशन की दरें तय होंगी।

DA Hike: इस राज्य के कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए बड़ी खुशखबरी! बढ़ा DA और DR! जानें किसे कितना होगा फायदा

Sikkim Government DA Hike: सिक्किम सरकार ने राज्य के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए बड़ी राहत का ऐलान किया है। वित्त विभाग द्वारा जारी एक आधिकारिक सर्कुलर के अनुसार, राज्य सरकार ने महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) में बढ़ोतरी का फैसला किया है। बढ़ा हुआ डीए और डीआर 1 जनवरी से लागू माना जाएगा।

डीए और डीआर में बढ़ोतरी की मुख्य बातें

रिवाइज्ड पे स्केल वाले कर्मचारी व पेंशनर्स: जिन कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को संशोधित मूल वेतन ढांचे के तहत वेतन मिल रहा है, उनका डीए/डीआर 58% से बढ़ाकर 60% कर दिया गया है।

प्री-रिवाइज्ड पे स्केल वाले कर्मचारी व पेंशनर्स: गैर-संशोधित बेसिक पे स्ट्रक्चर के तहत वेतन पाने वाले कर्मचारियों और पेंशनर्स का डीए/डीआर 257% से बढ़ाकर 262% कर दिया गया है।

कॉन्ट्रैक्ट और वर्क-चार्ज्ड कर्मचारी: यह संशोधित डीए दरें राज्य सरकार के नियमित वेतनमान में काम कर रहे संविदा कर्मचारियों और वर्क-चार्ज्ड प्रतिष्ठानों के कर्मियों पर भी समान रूप से लागू होंगी।

ऑल इंडिया सर्विस (AIS) अधिकारियों के लिए दरें

सातवें केंद्रीय वेतन आयोग (7th CPC) की सिफारिशों के आधार पर संशोधित बेसिक पे पाने वाले ऑल इंडिया सर्विस (AIS) अधिकारियों का डीए 58% से बढ़ाकर 60% कर दिया गया है। वहीं जो एआईएस अधिकारी छठे केंद्रीय वेतन आयोग (6th CPC) के प्री-रिवाइज्ड पे बैंड और ग्रेड पे स्ट्रक्चर के तहत वेतन उठा रहे हैं, उनका डीए 257% से बढ़ाकर 262% कर दिया गया है।

राउंडिंग ऑफ का नियम

सर्कुलर में यह भी स्पष्ट किया गया है कि डीए और डीआर की गणना करते समय अगर राशि में 50 पैसे या उससे अधिक का अंश आता है, तो उसे अगले पूरे रुपये में बदल दिया जाएगा। वहीं, 50 पैसे से कम के अंश को नजरअंदाज कर दिया जाएगा। बता दें कि सिक्किम सरकार के इस फैसले से राज्य के करीब 50,000 कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को सीधा वित्तीय लाभ मिलेगा।

8th Pay Commission पर 1 अक्टूबर को ये है 5 बड़े अपडेट्स! जानें आपकी सैलरी और पेंशन पर क्या होगा असर

8th Pay Commission: केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वें वेतन आयोग से जुड़ी गतिविधियों ने रफ्तार पकड़ ली है। 1 अक्टूबर 2026 तक आयोग के कामकाज, बैठकों और कर्मचारियों की मांगों को लेकर 5 सबसे बड़े अपडेट्स सामने आए हैं, जिन्हें हर सरकारी कर्मचारी को जानना जरूरी है।

1. अक्टूबर में होंगी आयोग की 2 बड़ी बैठकें (बेंगलुरु और मुंबई दौरा)

8वें वेतन आयोग की टीम देश के अलग-अलग हिस्सों में जाकर कर्मचारियों और पेंशनर्स यूनियनों से सीधी बात कर रही है। आयोग 7 और 8 अक्टूबर को बेंगलुरु में और 22-23 अक्टूबर को मुंबई में बड़ी बैठकें करने जा रहा है। इन बैठकों में रेलवे, डिफेंस और सिविल कर्मचारियों के संगठन अपनी मांगें सीधे आयोग के सामने रखेंगे।

2. मीटिंग में शामिल होने की डेडलाइन (10 अक्टूबर)

अगर कोई मान्यता प्राप्त कर्मचारी संगठन या पेंशनर्स एसोसिएशन मुंबई की बैठक में हिस्सा लेकर अपना सुझाव देना चाहता है, तो आधिकारिक प्रक्रिया के तहत आवेदन करने की अंतिम तारीख 10 अक्टूबर 2026 रखी गई है। आयोग इन मेमोरेंडम और सुझावों के आधार पर ही अपनी सिफारिशें तैयार करेगा।

3. दशहरा पर डीए (DA Hike) का तोहफा संभव

त्योहारों के इस सीजन में कर्मचारियों के जुलाई से दिसंबर 2026 तक के महंगाई भत्ते (DA) में बढ़ोतरी का ऐलान किसी भी वक्त हो सकता है। माना जा रहा है कि सरकार डीए में 3% की बढ़ोतरी कर सकती है, जिससे कुल महंगाई भत्ता बढ़कर 63% हो जाएगा।

4. फिटमेंट फैक्टर और न्यूनतम सैलरी पर तगड़ी मांग

स्टाफ साइड (NC-JCM) और विभिन्न कर्मचारी संघों ने आयोग के सामने न्यूनतम बेसिक पे को ₹69,000 करने और फिटमेंट फैक्टर को 3.833 करने का प्रस्ताव रखा है। इसके साथ ही सालाना इंक्रीमेंट को 3% से बढ़ाकर 6% करने की भी मांग रखी गई है। हालांकि, आयोग ने अभी सैलरी या फिटमेंट फैक्टर पर कोई आधिकारिक फैसला नहीं सुनाया है।

5. रिपोर्ट सबमिशन और लागू होने की समयसीमा

3 नवंबर 2025 को गठित हुए 8वें वेतन आयोग को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने (मई 2027 तक) का समय मिला है। आयोग की रिपोर्ट 2027 के मध्य में आएगी और इसे 1 जनवरी 2026 से ही प्रभावी माना जाएगा जिसका एरियर कर्मचारियों को मिलेगा।

Bank Open Sunday: कल रविवार को भी खुलेंगे बैंक! जानिए RBI ने क्यों जारी किया ये बड़ा आदेश

Bank Open Sunday September 27: अगर आपका बैंक से जुड़ा कोई जरूरी काम अटका हुआ है, तो रविवार होने के बावजूद आप कल यानी 27 सितंबर को शाखा जाकर अपना काम निपटा सकते हैं। वित्त मंत्रालय की सिफारिश पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने कल देश के सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को सामान्य दिनों की तरह खुला रखने का विशेष आदेश जारी किया है।

आमतौर पर रविवार को देशभर के बैंकों में साप्ताहिक अवकाश रहता है। हालांकि, इस अभूतपूर्व फैसले के पीछे की मुख्य वजह 28 से 30 सितंबर तक देश भर में होने वाली बैंक हड़ताल है।

RBI और सरकार ने क्यों दिया बैंक खोलने का आदेश?

बैंकिंग यूनियनों ने 28 से 30 सितंबर (सोमवार से बुधवार) तक तीन दिवसीय हड़ताल का ऐलान किया है। चूंकि 26 सितंबर को महीने का चौथा शनिवार था और 27 सितंबर को रविवार, ऐसे में बैंक लगातार 5 दिनों के लिए पूरी तरह ठप हो जाते।

लगातार 5 दिन शाखाएं बंद रहने से आम जनता को नकदी निकासी, चेक क्लियरिंग, लोन डॉक्युमेंटेशन और व्यावसायिक लेनदेन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता। इसी समस्या को टालने के लिए केंद्र सरकार के निर्देश पर RBI ने रविवार को भी बैंक खोलने की मंजूरी दी है।

30 सितंबर को बैंकों की अर्धवार्षिक क्लोजिंग भी है, जो वित्तीय और मार्केट ऑपरेशन्स के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। हड़ताल से पहले एक कार्यदिवस मिलने से पेंडिंग काम निपटाए जा सकेंगे।

कल कौन-कौन से बैंक और सेवाएं चालू रहेंगी?

RBI के सर्कुलर के अनुसार, 27 सितंबर, रविवार को सभी सरकारी बैंक जैसे- SBI, PNB, BOB, कैनरा बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRBs) में पूरी तरह कामकाज होगा। बैंक शाखाओं के साथ-साथ उनके प्रशासनिक कार्यालय, एटीएम से जुड़ी शाखाएं और करेंसी चेस्ट सामान्य कामकाजी घंटों के दौरान काम करेंगे।

प्राइवेट बैंक जैसे- HDFC Bank, ICICI Bank, Axis Bank हड़ताल का हिस्सा नहीं हैं। रविवार को उनकी शाखाओं की सामान्य छुट्टियां लागू हो सकती है।

क्यों हड़ताल पर जा रहे हैं बैंक कर्मचारी?

बैंकिंग क्षेत्र के करीब 90% कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले ‘यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स’ (UFBU) ने 3 दिनों की हड़ताल बुलाई है। कर्मचारियों की मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:

5-डे बैंकिंग: सभी शनिवारों को आधिकारिक छुट्टी घोषित करना।

पेंशन में सुधार व OPS: पुरानी पेंशन योजना (OPS) का विकल्प देना और पेंशनर्स के लिए एक समान महंगाई भत्ता लागू करना।

हालांकि, सरकार और बैंक प्रबंधन ने यूनियनों से हड़ताल वापस लेने या टालने की अपील की है, लेकिन सहमति न बन पाने के कारण हड़ताल का जोखिम बरकरार है।

Bank Strike: 3 दिनों की हड़ताल के बीच ग्राहकों को बड़ी राहत, सरकारी बैंकों ने ATM को लेकर किया ये बड़ा ऐलान

8th Pay Commission से पेंशनर्स की हो सकती है बल्ले-बल्ले! ₹45,000 न्यूनतम पेंशन और OPS बहाली की उठी मांग

8th Pay Commission OPS vs NPS Demand: देश में जबसे 8वें वेतन आयोग का गठन हुआ है तभी से सरकारी कर्मचारियों में सैलरी और पेंशन को लेकर चर्चा तेज है। कोई फिटमेंट फैक्टर की बात करता है तो कोई भत्तों की। वही रिटायर हो चुके कर्मचारियों के बीच पुरानी पेंशन योजना और नेशनल पेंशन सिस्टम को लेकर बहस होती है।

जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित 8वें वेतन आयोग का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। 3 नवंबर 2025 को गठित इस आयोग को 10 महीने से अधिक का समय हो चुका है। देश के अलग-अलग शहरों में कर्मचारी यूनियनों और एसोसिएशनों के साथ लगातार बैठकें की जा रही हैं। सितंबर में पुडुचेरी और चंडीगढ़ में हुई बैठकों के बाद अब 7 और 8 अक्टूबर को बेंगलुरु में केंद्रीय कर्मचारियों की मांगें सुनी जाएंगी।

आयोग को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का वक्त दिया गया है, जिसके अनुसार रिपोर्ट मई-जून 2027 तक सरकार को सौंपी जा सकती है। बैठकों में फिटमेंट फैक्टर, सैलरी रिवीजन और भत्तों के अलावा सबसे गर्मा-गर्मी वाला विषय पुरानी पेंशन योजना (OPS) बनाम नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) का बना हुआ है। साल 2004 के बाद सेवा में आए केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनभोगी संगठन अब ‘गारंटीड पेंशन’ की मांग पर अड़ गए हैं।

क्यों केंद्रीय कर्मचारियों के लिए सबसे बड़ा मुद्दा बना ‘OPS vs NPS’?

वर्ष 2004 के बाद भर्ती हुए कर्मचारियों के लिए शुरू की गई अंशदायी पेंशन व्यवस्था से देश भर के कर्मचारी संगठन असंतुष्ट हैं। 8वें वेतन आयोग को सौंपे गए ज्ञापनों में कर्मचारी यूनियनों ने साफ कहा है कि मौजूदा बाजार-आधारित रिटर्न वाली योजनाएं उनके और उनके परिवार के भविष्य को आर्थिक सुरक्षा देने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रही हैं।

कर्मचारियों की मांग है कि उन्हें अनिश्चितता के माहौल से निकालकर पुरानी ‘परिभाषित लाभ’ वाली व्यवस्था के तहत लाया जाए।

प्रमुख कर्मचारी संगठनों की क्या हैं 4 बड़ी मांगें?

अलग-अलग केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनभोगी यूनियनों ने 8वें वेतन आयोग के समक्ष अपनी विस्तृत मांगें रखी हैं:

A. मिनिस्टीरियल स्टाफ एसोसिएशन (सर्वे ऑफ इंडिया): सर्वे ऑफ इंडिया के कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन योजना (OPS) की पूरी तरह बहाली की मांग की है। उनकी मांग है कि सेवानिवृत्ति के समय कर्मचारी के अंतिम प्राप्त मूल वेतन का कम से कम 50% हिस्सा गारंटीड पेंशन के रूप में तय किया जाए।

B. फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गेनाइजेशन्स (FNPO): डाक विभाग के इस प्रमुख संगठन ने तर्क दिया है कि NPS और हाल ही में घोषित यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) जैसी योजनाएं कर्मचारियों की आशंकाओं को दूर नहीं कर पा रही हैं। इसलिए NPS और UPS के दायरे में आने वाले सभी कर्मचारियों को वापस पुरानी परिभाषित-लाभ पेंशन व्यवस्था (OPS) में शामिल किया जाए।

C. रेलवे सीनियर सिटीजन्स वेलफेयर सोसाइटी (RSCWS): रेलवे पेंशनभोगियों के इस संगठन ने पूर्व कर्मचारियों के वित्तीय और स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है। संघ ने सरकार से एक गारंटीड न्यूनतम पेंशन का प्रावधान करने और पेंशन सुरक्षा को और मजबूत करने का आग्रह किया है।

D. भारत पेंशनर्स समाज (BPS): पेंशनभोगियों के इस सबसे बड़े मंच ने आयोग के सामने आंकड़ों के साथ बड़ी मांग रखी है। BPS ने न्यूनतम पेंशन को बढ़ाकर ₹45,000 प्रति माह करने, अंतिम वेतन का 67% पेंशन देने और फैमिली पेंशन को अंतिम वेतन का 50% करने की सिफारिश की है।

आगे क्या होगा? जानिए कब लागू हो सकती हैं सिफारिशें

वेतन आयोग देश भर के अलग-अलग जोनों में जाकर सभी हितधारकों की बातें सुन रहा है। इन बैठकों में फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाने, न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी करने और पेंशन बराबरी जैसे गंभीर मुद्दों पर भी ज्ञापन प्राप्त हुए हैं।

आयोग अपनी रिपोर्ट मई-जून 2027 तक केंद्र सरकार को सौंपेगा। इसके बाद सरकार द्वारा सिफारिशें मंजूर होने पर इसे लागू किया जाएगा। अब सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि क्या केंद्र सरकार मौजूदा NPS/UPS जैसे अंशदायी ढांचे को ही मजबूत करेगी या फिर कर्मचारी संगठनों के भारी दबाव में पेंशन संरचना में कोई क्रांतिकारी बदलाव लेकर आएगी।

8वें वेतन आयोग के तहत पेंशन सुधारों को लेकर जिस तरह से केंद्रीय कर्मचारी एकजुट होकर ‘गारंटीड पेंशन’ और अंतिम वेतन के 50% के फिक्स फॉर्मूले की मांग कर रहे हैं, उससे सरकार पर नैतिक दबाव बढ़ गया है। 2027 में आने वाली फाइनल रिपोर्ट यह तय करेगी कि 2004 के बाद भर्ती हुए लाखों कर्मचारियों का रिटायरमेंट सुरक्षित हो पाएगा या नहीं।

PM Kisan Samman Nidhi Updates: 24वीं किस्त का इंतजार जल्द होगा खत्म, अगले महीने आएगा किसानों के खाते में पैसा

देश के करोड़ों किसानों को जल्द खुशखबरी मिल सकती है। पीएम किसान सम्मान योजना की 24वीं किस्त अगले महीने उनके बैंक अकाउंट में आ सकती है। इस योजना के दायरे में आने वाले किसानों को एक साल में कुल 6,000 रुपये मिलते हैं। यह पैसा सरकार की तरफ से किसानों के खातों में दो-दो हजार की तीन किस्तों में ट्रांसफर किया जाता है।

अगले महीने बड़े त्योहार

अगले महीने दशहरा है। उसके बाद नवंबर में दिवाली है। ऐसे में खाते में इस स्कीम का पैसा आने से किसानों को काफी राहत मिलगी। पिछले साल 19 नवंबर को सरकार की तरफ से इस स्कीम की दूसरी किस्त का पैसा किसानों के खातों में ट्रांसफर हुआ था। हालांकि, 2024 में 5 अक्तूबर को ही किसानों के खातों में स्कीम का पैसा आ गया था।

ई-केवायसी जरूरी है

यह ध्यान में रखना जरूरी है कि पीएम किसान योजना का फायदा उन किसानों को नहीं मिलेगा, जिन्होंने ई-केवायसी नहीं कराई है। इस योजना के दायरे में आने वाले किसानों को ई-केवायसी कराने पर ही पैसा खाते में आएगा। साथ ही उन्हें अपने बैंक अकाउंट को भी आधार से लिंक करना होगा। इसके बाद ही उनके खाते में योजना की 24वीं किस्त आएगी।

अगले महीने आ सकता है पैसा

इस स्कीम से जुड़ी खबरों पर नजर रखने वाले एक्सपर्ट्स का कहना है कि चूंकि अक्तूबर में दशहरा है। दूसरे हफ्ते नवरात्र शुरू हो जाएगा। इस वजह से 24वीं किस्त के अक्तूबर की शुरुआत या दूसरे हफ्ते तक आ जाने की उम्मीद है। योजना की 23 किस्त इस साल जून में किसानों के खाते में आई थी।

कुछ किसानों को 23वीं किस्त भी मिल सकता है

इस बार कुछ किसानों को 24वीं किस्त के साथ 23वीं किस्त का भी पैसा मिल सकता है। इसकी वजह यह है कि कई किसानों को ई-केवायसी और जमीन का सत्यापन नहीं होने से से 23वीं किस्त का पैसा नहीं मिला था। अब जिन किसानों ने अपना ई-केवायसी पूरा कर लिया है और जमीन का सत्यापन भी हो चुका है, उन्हें 24वीं किस्त के साथ 23वीं किस्त का पैसा भी मिल सकता है।

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2019 में शुरू हुई थी केंद्र सरकार की स्कीम

पीएम किसान सम्मान निधि केंद्र सरकार की स्कीम है। इस स्कीम के तहत किसानों को मिलने वाला पूरा पैसा केंद्र सरकार की तरफ से आता है। इस योजना का ऐलान केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने 2019 के अंतरिम बजट में किया था। इस स्कीम का मकसद देश के करोड़ों किसानों की इनकम को सपोर्ट देना है।

8th Pay Commission: कितनी बढ़ेगी सैलरी? DA मर्जर, फिटमेंट फैक्टर और HRA पर ये है बड़े अपडेट्स

8th Pay Commission Salary Hike Updates: केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए आठवें वेतन आयोग को लेकर सरगर्मियां तेज हैं। 3 नवंबर 2025 को गठित हुआ 8वां वेतन आयोग इस समय देशभर में कर्मचारी यूनियनों, पेंशनभोगी संघों, रेलवे और रक्षा बलों के प्रतिनिधियों के साथ परामर्श के दौर में है। हाल ही में चंडीगढ़, चेन्नई और पुडुचेरी में बैठकों के बाद अगले महीने आयोग की टीम बेंगलुरु के दौरे पर जाने वाली है।

वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने पर 1 करोड़ से अधिक कर्मचारियों और पेंशनर्स की सैलरी और पेंशन में बंपर इजाफा होगा। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि आपकी सैलरी कितनी बढ़ेगी और किन-किन घटकों में बड़ा बदलाव होने वाला है?

सैलरी हाइक के ये है 4 मुख्य पिलर

मंत्रिमंडल द्वारा मंजूर की गई टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) के तहत आठवां वेतन आयोग कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और पेंशन ढांचे की समीक्षा कर रहा है। सैलरी रिवीजन मुख्य रूप से इन 4 घटकों पर निर्भर करेगा:

1. बेसिक पे: इसमें नया वेतन मैट्रिक्स, पे-स्ट्रक्चर और सबसे अहम फिटमेंट फैक्टर शामिल है।

2. भत्ते: महंगाई भत्ता (DA/DR), मकान किराया भत्ता (HRA) और ट्रैवल अलाउंस (TA)।

3. कैश और अन्य लाभ: सालाना इंक्रीमेंट, प्रमोशन, परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव और रिवॉर्ड।

4. अन्य ढांचागत सुधार: कामकाजी जरूरतें और विभिन्न पदों का युक्तिकरण।

बेसिक पे में महंगाई भत्ते के विलय की मांग क्यों?

कर्मचारी संगठन और पेंशनर्स लगातार मांग कर रहे हैं कि 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों के तहत डीए का विलय मूल वेतन में किया जाए। बेसिक सैलरी ही वह आधार है जिससे प्रोविडेंट फंड (PF) योगदान, पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य भत्तों की गणना होती है। अगर डीए को बेसिक पे में मिला दिया जाता है, तो बेसिक सैलरी अपने आप बढ़ जाएगी, जिससे मिलने वाले सभी अन्य भत्ते और रिटायर्मेंट बेनेफिट्स कई गुना बढ़ जाएंगे।

फिटमेंट फैक्टर से ही होगा पूरा खेल

फिटमेंट फैक्टर एक गणितीय गुणांक है, जिसका उपयोग पुराना बेसिक वेतन बदलकर नया बेसिक वेतन तय करने के लिए किया जाता है। 7वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 था।

8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर कितना होगा इस पर फिलहाल आयोग में चर्चा जारी है, लेकिन विश्लेषकों और कर्मचारी यूनियनों की रिपोर्ट के मुताबिक यह 2.28 से लेकर 3.83 के बीच तय हो सकता है। अगर फिटमेंट फैक्टर 3.68 या 3.83 तक जाता है, तो कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी में रिकॉर्ड बढ़ोतरी होगी।

HRA में संशोधन: 2017 के बाद पहली बार बदलाव की तैयारी!

नेशनल काउंसिल – जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) और ऑल इंडिया एनपीएस एंप्लाइज फेडरेशन ने आयोग के सामने HRA बढ़ाने की पुरजोर वकालत की है। 2017 के बाद से मकान किराए भत्ते (HRA) की दरों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है, जबकि शहरों में कमरों और मकानों का किराया काफी बढ़ चुका है।

कर्मचारी संगठनों का प्रस्ताव है कि शहरों की कैटेगरी के हिसाब से HRA को X श्रेणी के शहरों के लिए 36%, Y श्रेणी के लिए 24% और Z श्रेणी के शहरों के लिए 12% किया जाए। साथ ही, जब-जब डीए बढ़े, तब-तब HRA में भी अपने आप बढ़ोतरी का नियम बने।

कब तक लागू होंगी सिफारिशें?

गठन के नियमों के अनुसार आठवें वेतन आयोग को अपनी अंतिम सिफारिशें सौंपने के लिए 18 महीने का वक्त (मई 2027 तक) मिला है। वैसे जानकारों का मानना है कि फरवरी या अप्रैल 2027 के आसपास कुछ अंतरिम सिफारिशों की घोषणा की जा सकती है। पिछले वेतन आयोगों के ट्रेंड को देखें तो आयोग की रिपोर्ट आने के बाद इसे पूरी तरह लागू होने और एरियर जारी होने में 2029 या 2030 तक का समय लग सकता है।

 

8th Pay Commission में इस नए फॉर्मूले से बदल जाएगा पूरा सैलरी स्ट्रक्चर! बेसिक पे में होगा बंपर इजाफा

8th Pay Commission Minimum Pay Calculation: 8वें वेतन आयोग फिलहाल देशभर में बैठके कर के विभिन्न कर्मचारी संगठनों से उनकी मांगों का ब्योरा तैयार कर रहा है। इसी बीच केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक बड़ा अपडेट है है। आयोग के सामने दशकों से चले आ रहे उस नियम को बदलने की जोरदार मांग उठी है, जिसके आधार पर सरकारी कर्मचारियों की न्यूनतम सैलरी तय की जाती है।

अब तक वेतन आयोग न्यूनतम सैलरी का हिसाब लगाते समय एक परिवार में केवल 3 यूनिट (कर्मचारी, पति/पत्नी और 2 बच्चे) को ही जोड़ता था। लेकिन कर्मचारी यूनियनों और पेंशनभोगी संगठनों ने 8वें वेतन आयोग के समक्ष मांग रखी है कि इस परिवार यूनिट में बुजुर्ग आश्रित माता-पिता को भी शामिल किया जाए।

अगर इस फॉर्मूले को मंजूरी मिलती है, तो कर्मचारियों की बेसिक पे और पेंशन में भारी-भरकम बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। आइए आसान भाषा में समझते हैं इस नए गणित को।

3 यूनिट नहीं, अब 5.2 यूनिट पर तय हो सैलरी!

करीब 10 लाख पेंशनभोगियों का प्रतिनिधित्व करने वाले भारत पेंशनर्स समाज (BPS) और कर्मचारियों की शीर्ष संस्था नेशनल काउंसिल ऑफ जेसीएम (NCJCM-Staff Side) ने 8वें वेतन आयोग को सौंपे ज्ञापन में एक समान नया फॉर्मूला पेश किया है:

कर्मचारी (स्वयं): 1.0 यूनिट

पति या पत्नी: 1.0 यूनिट

दो बच्चे: 0.8 + 0.8 = 1.6 यूनिट

दो आश्रित माता-पिता: 0.8 + 0.8 = 1.6 यूनिट

इस हिसाब से कुल परिवार की यूनिट 5.2 (राउंड ऑफ में 5 यूनिट) बनती है। यूनियनों का तर्क है कि भारत में एक कर्मचारी न केवल अपने बच्चों का बल्कि अपने बुजुर्ग माता-पिता का भी मुख्य कमाऊ सहारा होता है। इसके अलावा ‘माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण अधिनियम’ और ‘सोशल सिक्योरिटी कोड 2020’ भी कानूनी रूप से माता-पिता की जिम्मेदारी बच्चों पर डालता है।

सैलरी का नया गणित: ₹19,900 से सीधे ₹69,000 न्यूनतम बेसिक पे?

अगर 5 यूनिट के इस नए फॉर्मूले को 8वां वेतन आयोग स्वीकार कर लेता है, तो न्यूनतम सैलरी की गणना पूरी तरह बदल जाएगी।

NCJCM और BPS द्वारा दिए गए आंकड़े के अनुसार:

फूड बास्केट: 5 यूनिट के परिवार के लिए भोजन (चावल, दाल, सब्जी, दूध, अंडा, मांस आदि) का मासिक खर्च करीब ₹24,443 बैठता है।

अन्य खर्च: इसमें 10% मसाले/पेय पदार्थ, 7.5% मकान किराया, 20% ईंधन व बिजली, 25% स्किल डेवलपमेंट, 25% त्योहार व शादी-ब्याह और 5% टेक्नोलॉजी खर्च जोड़ने पर न्यूनतम सैलरी ₹68,947 (राउंड ऑफ ₹69,000) बनती है।

फिटमेंट फैक्टर: ₹69,000 की न्यूनतम बेसिक पे के आधार पर 3.833 का फिटमेंट फैक्टर निकलकर आता है, जिसे कर्मचारियों और पेंशनभोगियों दोनों पर समान रूप से लागू करने की मांग की गई है।

(नोट: NCJCM के एक अन्य अनुमान के अनुसार, 2025-26 की महंगाई दरों के आधार पर 5 यूनिट का न्यूनतम वेतन ₹80,444 तक भी जा सकता है)।

पिछले वेतन आयोगों में कैसे बदली मिनिमम बेसिक सैलरी?

NCJCM द्वारा 8वें वेतन आयोग को सौंपे गए आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले आयोगों में न्यूनतम वेतन किस तरह बढ़ा:

8th Pay Commission में इस एक नए फॉर्मूले से बदल जाएगा पूरा सैलरी स्ट्रक्चर! बेसिक पे में होगा बंपर इजाफा

पेंशनभोगियों और कर्मचारियों पर क्या होगा इसका बड़ा असर?

रेलवे सीनियर सिटीजन्स वेलफेयर सोसाइटी (RSCWS) ने भी तर्क दिया है कि वर्तमान में भत्तों पर ज्यादा और बेसिक पे पर कम ध्यान दिया जाता है। चूंकि पेंशन और ग्रेच्युटी पूरी तरह से बेसिक पे पर निर्भर करती हैं, इसलिए बेसिक पे कम होने से रिटायर्ड कर्मचारियों को नुकसान होता है।

अगर 8वां वेतन आयोग 5 यूनिट का फॉर्मूला मान लेता है, तो बेसिक सैलरी की शुरुआती सीमा काफी ऊपर चली जाएगी। इसका सीधा फायदा यह होगा कि नए कर्मचारियों की सैलरी के साथ-साथ पुराने पेंशनभोगियों की पेंशन में भी कई गुना का इजाफा होगा।

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, परिवार की परिभाषा में माता-पिता को शामिल करने की यह मांग केवल आर्थिक नहीं, बल्कि व्यावहारिक रूप से बेहद जायज लगती है। अब सबकी निगाहें 8वें वेतन आयोग के अंतिम फैसले पर टिकी हैं कि क्या वह इस 5.2 यूनिट वाले फॉर्मूले को स्वीकार करता है या पुराने 3-यूनिट ढर्रे पर ही कायम रहता है। यह फैसला आने वाले एक दशक तक देश के लाखों कर्मचारियों और पेंशनरों का भविष्य तय करेगा।