8th Pay Commission Updates: फिटमेंट फैक्टर पर निर्भर करेगी सैलरी में होने वाली बढ़ोतरी, जानिए कितना रहेगा फिटमेंट फैक्टर

आठवें वेतन आयोग ने केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के वेतन में संशोधन की सिफारिशें देने से पहले चर्चा की प्रक्रिया तेज कर दी है। एंप्लॉयीज की नजरें वेतन आयोग की सिफारिशों पर लगी हैं। इस बार आयोग वेतन में संशोधन, अलाउन्सेज, सैलरी स्ट्रक्चर सहित कई मसलों के बारे में अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपेगा। इसका फायदा एक करोड़ से ज्यादा लोगों को मिलेगा। इनमें केंद्र सरकार के करीब 50 लाख एंप्लॉयीज और 65 लाख पेंशनर्स शामिल हैं।

आयोग की 9 दौर की बैठकें हो चुकी हैं

आठवां वेतन आयोग अब तक रीजनल और केंद्रीय एंप्लॉयीज यूनियंस और दूसरे पक्षों के साथ नौ दौर की बैठकें पूरी कर चुका है। इस महीने की 9 और 10 तारीख को उसने कोलकाता में बैठक की। इस मामले की जानकारी रखने वाले लोगों को कहना है कि आयोग की सिफारिशें अगले साल जून-जुलाई तक आने की उम्मीद है। उसके बाद केंद्र सरकार सिफारिशों पर विचार करने के बाद उन्हें लागू करने के बारे में अंतिम फैसला लेगी।

फैमिली यूनिट्स की परिभाषा बदलने की मांग

ऑल इंडिया एनपीएस एंप्लॉयीज फेडरेशन ने आयोग से फैमिली यूनिट्स की परिभाषा में बदलाव करने की सलाह दी है। आयोग फैमिली यूनिट्स के आधार पर वेतन में संशोधन का कैलकुलेशन करता है। फेडरेशन का कहना है कि फैमिली यूनिट्स 3 से बढ़ाकर 4.4 की जानी चाहिए। इसमें आश्रित माता-पिता को भी शामिल किया जाना चाहिए। इससे फिटमेंट फैक्टर 2.05 से बढ़कर 2.10 हो जाएगा। फिटमेंट फैक्टर बढ़ने से बेसिक सैलरी भी बढ़ जाएगी।

मेट्रो शहरों के लिए 36 फीसदी एचआरए की मांग

एंप्लॉयीज यूनियंस को उम्मीद है कि वेतन आयोग डीए, एचआरए और ट्रैवल अलाउंसेज पर भी विचार करेगा और इनके कैलकुलेशन के तरीकों में जरूरी संशोधन करेगा। एंप्लॉयीज के प्रतिनिधि एक्स कैटेगरी के शहरों के लिए 36 फीसदी एचआरए की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि वाय कैटेगरी के शहरों के लिए एचआरए 24 फीसदी और जेड कैटेगरी के शहरों के लिए 12 फीसदी होना चाहिए। ट्रैवल अलाउंसेज को भी लेवल 1 एंप्लॉयीज के लिए कम से कम प्रति माह 9000 रुपये करने की मांग की जा रही है।

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एंप्लॉयीज की सबसे ज्यादा नजरें फिटमेंट फैक्टर पर 

एंप्लॉयीज की सबसे ज्यादा नजरें फिटमेंट फैक्टर पर है। एंप्लॉयीज के प्रतिनिधि और यूनियंस 3.83 फिटमेंट फैक्टर की मांग कर रहे हैं। सातवें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 था। अगर 3.83 फिटमेंट फैक्टर की मांग मान ली जाती है तो केंद्र सरकार के एंप्लॉयीज का मिनिमम बैसिक पे बढ़कर प्रति माह 69,000 रुपये हो जाएगा। अभी यह 18,000 रुपये है। हालांकि, जानकारों का कहना है कि क्रूड की कीमतों में उछाल से सरकार पर वित्तीय दबाव बढ़ा है। ऐसे में फिटमेंट फैक्टर 1.82-2.57 के बीच रह सकता है।

8th Pay Commission: केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए बड़ी खबर! सैलरी, DA और पेंशन में बदलाव का पूरा रोडमैप जारी, देखें पूरी लिस्ट

8th Pay Commission ToR Full List Out: केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वें पे कमीशन को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। केंद्रीय कैबिनेट द्वारा मंजूर किए गए ‘टर्म्स ऑफ रेफरेंस’ (ToR) से यह साफ हो गया है कि नए वेतन आयोग के दायरे में क्या-क्या चीजें शामिल होंगी और कर्मचारियों की सैलरी, डीए (DA), पेंशन तथा अन्य भत्तों में किस तरह के बदलाव होने जा रहे हैं।

इस 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों का सीधा फायदा देश के 1 करोड़ से अधिक लोगों को मिलेगा। इसमें लगभग 50 लाख सक्रिय केंद्रीय कर्मचारी और करीब 65 लाख पेंशनभोगी शामिल हैं। आइए जानते हैं कि 8th CPC की इस पूरी लिस्ट में आपके लिए क्या खास है।

8th Pay Commission का गठन और समय सीमा

8वां वेतन आयोग एक अस्थायी निकाय होगा। इसमें एक अध्यक्ष, एक पार्ट-टाइम सदस्य और एक सदस्य-सचिव शामिल होंगे। आयोग को अपनी अंतिम रिपोर्ट और सिफारिशें सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। हालांकि, जरूरत पड़ने पर आयोग बीच में अंतरिम रिपोर्ट भी सौंप सकता है।

सैलरी, DA और भत्तों में क्या-क्या बदलेगा?

8th CPC के टर्म्स ऑफ रेफरेंस के मुताबिक, आयोग इन प्रमुख क्षेत्रों में व्यापक बदलावों की जांच करेगा और अपनी सिफारिशें देगा:

पे-मैट्रिक्स और सैलरी स्ट्रक्चर: कर्मचारियों के मूल वेतन और पे-मैट्रिक्स को तर्कसंगत बनाया जाएगा ताकि सरकारी सेवाओं में बेहतरीन टैलेंट को आकर्षित किया जा सके।

भत्ते: इसमें मुख्य रूप से महंगाई भत्ता (DA), पेंशनर्स के लिए महंगाई राहत (DR) और हाउस रेंट अलाउंस (HRA) की समीक्षा और संशोधन शामिल है।

अन्य सुविधाएं और लाभ: कर्मचारियों के सालाना इंक्रीमेंट, प्रमोशन पॉलिसी और समकालीन कामकाजी जरूरतों के आधार पर मिलने वाली अन्य नकद या गैर-नकद सुविधाओं की समीक्षा की जाएगी।

भत्तों का युक्तिकरण: वर्तमान में मिल रहे तमाम तरह के छोटे-बड़े भत्तों की संख्या की समीक्षा होगी ताकि उनकी जटिलता को कम किया जा सके।

परफॉर्मेंस-लिंक्ड इंसेंटिव और बोनस पर नया फोकस

नए वेतन आयोग में काम के कल्चर को अधिक कुशल और जवाबदेह बनाने पर विशेष जोर दिया गया है:

कार्य संस्कृति में सुधार: एक ऐसा इमोल्यूमेंट स्ट्रक्चर तैयार करना जिससे सरकारी कामकाज में दक्षता, जवाबदेही और जिम्मेदारी को बढ़ावा मिले।

उत्पादकता आधारित बोनस: मौजूदा बोनस योजनाओं की समीक्षा की जाएगी ताकि इसे परफॉर्मेंस से जोड़ा जा सके।

इंसेंटिव स्कीम: बेहतर और उत्कृष्ट काम करने वाले कर्मचारियों को पुरस्कृत करने के लिए वित्तीय और प्रदर्शन-आधारित मापदंडों के साथ एक नई इंसेंटिव योजना की सिफारिश की जाएगी।

पेंशनर्स और NPS/UPS के लिए क्या है खास?

वेतन आयोग पेंशनभोगियों के हितों और उनकी वित्तीय सुरक्षा की भी पूरी समीक्षा करेगा:

NPS और UPS के तहत ग्रेच्युटी: राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली और एकीकृत पेंशन योजना के दायरे में आने वाले कर्मचारियों के लिए डेथ-कम-रिटायरमेंट ग्रेच्युटी की समीक्षा कर नई सिफारिशें दी जाएंगी।

ओल्ड पेंशन धारक: जो कर्मचारी NPS या UPS के दायरे में नहीं हैं, उनकी ग्रेच्युटी और मासिक पेंशन की भी विस्तृत समीक्षा की जाएगी। इसके अलावा, बिना अंशदान वाली गैर-अंशदायी पेंशन योजनाओं की बिना फंड वाली लागत का भी आकलन किया जाएगा।

सिफारिशें तय करते समय किन बातों का रखा जाएगा ध्यान?

8th Pay Commission केवल एकतरफा सिफारिशें नहीं देगा, बल्कि उसे देश की आर्थिक स्थिति को भी ध्यान में रखना होगा:

देश की आर्थिक स्थिति और राजकोषीय विवेक: सरकार के खजाने पर बहुत ज्यादा वित्तीय बोझ न पड़े, इसका ध्यान रखा जाएगा।

कल्याणकारी योजनाएं: यह सुनिश्चित किया जाएगा कि वेतन बढ़ाने के बाद भी देश के विकास कार्यों और जन कल्याणकारी योजनाओं के लिए पर्याप्त बजट बचा रहे।

राज्यों पर असर: केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों को आमतौर पर राज्य सरकारें भी कुछ संशोधनों के साथ लागू करती हैं। इसलिए राज्य सरकारों की वित्तीय स्थिति पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव का भी आकलन किया जाएगा।

प्राइवेट सेक्टर से तुलना: पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स (CPSUs) और प्राइवेट सेक्टर में कर्मचारियों को मिलने वाली सैलरी, वर्किंग कंडीशन और बेनिफिट्स की तुलना भी की जाएगी।

कौन-से कर्मचारी होंगे इसके पात्र?

8th CPC की सिफारिशें केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों, एजेंसियों और निम्नलिखित श्रेणियों के कर्मचारियों पर लागू होंगी:

  • केंद्रीय कर्मचारी (इंडस्ट्रियल और नॉन-इंडस्ट्रियल दोनों)
  • अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारी
  • सशस्त्र रक्षा बल के कर्मी
  • केंद्र शासित प्रदेशों के कर्मचारी
  • भारतीय लेखापरीक्षा और लेखा विभाग के अधिकारी व कर्मचारी
  • संसद के अधिनियमों के तहत स्थापित नियामक निकायों के सदस्य (आरबीआई को छोड़कर)
  • सुप्रीम कोर्ट के अधिकारी और कर्मचारी
  • केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा वहन किए जाने वाले खर्च वाले हाईकोर्ट के कर्मचारी
  • केंद्र शासित प्रदेशों की अधीनस्थ अदालतों के न्यायिक अधिकारी

8th Pay Commission पर कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए आया ये बड़ा अपडेट! जानिए सैलरी और HRA पर कितना पड़ेगा असर

8th Pay Commission: 8वां केंद्रीय वेतन आयोग केवल सैलरी में बढ़ोतरी तक सीमित नहीं है। सरकार द्वारा जारी आधिकारिक गैजेट नोटिफिकेशन के अनुसार, इसके नियम और शर्तें केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के भत्तों, पेंशन और काम करने के तरीकों में बड़े बदलावों की ओर इशारा कर रहे हैं।

3 नवंबर 2025 को गठित इस आयोग को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। हाल ही में आयोग ने भुवनेश्वर और कोलकाता (9-10 जुलाई 2026) में विभिन्न कर्मचारी यूनियनों और हितधारकों के साथ बैठकें पूरी की हैं।

1. सभी भत्तों (Allowances) की गहन समीक्षा

गैजेट के अनुसार, आयोग वर्तमान में मिलने वाले सभी प्रकार के भत्तों के ढांचे और उनके नियमों की समीक्षा कर रहा है।

उद्देश्य: बड़ी संख्या में मिलने वाले अलग-अलग भत्तों को सरल और युक्तिसंगत बनाना।

असर: कर्मचारियों को न केवल संशोधित दरें मिल सकती हैं, बल्कि पात्रता के नियमों में बदलाव, क्लेम प्रोसेस का आसान होना या कई भत्तों का आपस में विलय भी देखने को मिल सकता है। कर्मचारी संगठनों द्वारा HRA को बढ़ाकर 40% तक करने की मांग भी ज़ोरों पर है।

2. परफॉर्मेंस-लिंक्ड इंसेंटिव पर जोर 

गैजेट में साफ तौर पर कहा गया है कि आयोग वर्तमान बोनस सिस्टम और परफॉर्मेंस आधारित भुगतानों की जांच करेगा और एक ऐसा इंसेंटिव फ्रेमवर्क तैयार करेगा जो उत्पादकता को बढ़ावा दे।

असर: भविष्य में मिलने वाला कंपंसेशन केवल समय-समय पर होने वाले वेतन संशोधन पर निर्भर नहीं रहेगा, बल्कि कर्मचारी की जवाबदेही, दक्षता और मापने योग्य नतीजों से भी जोड़ा जा सकता है।

3. NPS, UPS, पेंशन और ग्रेच्युटी की समीक्षा

रिटायरमेंट बेनिफिट्स इस बार आयोग के सबसे बड़े फोकस एरिया में से एक हैं। गैजेट में राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) और यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) के तहत आने वाले कर्मचारियों के लिए ‘डेथ-कम-रिटायरमेंट ग्रेच्युटी’ की समीक्षा करने के निर्देश हैं।

असर: जो कर्मचारी NPS या UPS के दायरे से बाहर हैं, उनके लिए भी पेंशन और ग्रेच्युटी लाभों की जांच की जाएगी ताकि विसंगतियों को दूर कर उन्हें बेहतर लाभ दिए जा सकें।

4. प्राइवेट सेक्टर और CPSUs की सैलरी का आकलन

एक अनोखा और महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि आयोग को केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (CPSUs) और निजी क्षेत्र में चल रहे मौजूदा सैलरी स्ट्रक्चर, मिलने वाले फायदों और वर्किंग कंडीशंस पर भी विचार करने को कहा गया है।

उद्देश्य: सरकार ऐसा वेतन ढांचा तैयार करना चाहती है जिससे बेहतरीन टैलेंट को आकर्षित किया जा सके और उसे रोक कर रखा जा सके, साथ ही देश के राजकोषीय अनुशासन पर भी कोई आंच न आए।

5. फाइनल से पहले अंतरिम रिपोर्ट सौंपने की छूट

हालांकि आयोग को अंतिम सिफारिशें सौंपने के लिए 18 महीने (मई-जून 2027 तक) का समय मिला है, लेकिन गैजेट नोटिफिकेशन सरकार को यह लचीलापन देता है कि आयोग विशिष्ट मामलों पर अपनी अंतरिम रिपोर्ट पहले भी दे सकता है।

असर: अगर सरकार चाहे, तो कुछ खास मुद्दों या भत्तों से जुड़ी सिफारिशों को अंतिम रिपोर्ट आने से पहले ही लागू करने पर विचार कर सकती है।

8th Pay Commission: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1. 8वें वेतन आयोग का गठन कब हुआ और इसके अध्यक्ष कौन हैं?

उत्तर: 8वें वेतन आयोग को आधिकारिक तौर पर 3 नवंबर 2025 को एक गैजेट नोटिफिकेशन के जरिए गठित किया गया था। इसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं।

Q2. इस आयोग की सिफारिशें कब से लागू होने की उम्मीद है?

उत्तर: हालांकि सरकार ने अभी किसी आधिकारिक तारीख की घोषणा नहीं की है, लेकिन परंपरा के अनुसार 7वें वेतन आयोग का कार्यकाल 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हो रहा था। इस लिहाज से नई संशोधित सैलरी और पेंशन 1 जनवरी 2026 से (बैकडेट या एरियर के साथ) प्रभावी होने की पूरी संभावना है।

Q3. क्या आयोग ने फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) की घोषणा कर दी है?

उत्तर: नहीं, आयोग की तरफ से अभी तक किसी भी फिटमेंट फैक्टर, वेतन वृद्धि की दर या संशोधित पे-मैट्रिक्स की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। कर्मचारी संगठन लगातार 2.86 से लेकर 3.8 तक के फिटमेंट फैक्टर की मांग कर रहे हैं।

दिल्ली में 25% की बंपर छूट के साथ सरकारी फ्लैट खरीदने का मौका! DDA ने लास्ट डेट आगे बढ़ाई, घर की कीमत समेत स्कीम की फुल डिटेल जानिए

DDA Karmayogi Awaas Yojana: अगर आप सरकारी कर्मचारी हैं या रिटायर हो चुके हैं और देश की राजधानी दिल्ली में अपना घर खरीदने का सपना देख रहे हैं, तो दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने आपके लिए बड़ी राहत दी है। डीडीए ने लोगों से मिले जबरदस्त रिस्पॉन्स की वजह से ‘कर्मयोगी आवास योजना’ 2025 के तहत रेडी-टू-मूव फ्लैट्स की बुकिंग की आखिरी तारीख बढ़ाकर 31 जुलाई 2026 कर दी है।

इस योजना के तहत पात्र आवेदकों को फ्लैट की कीमत पर 25 प्रतिशत तक की विशेष छूट दी जा रही है। योजना के अंतर्गत फ्लैट नरेला के पॉकेट-6, पॉकेट-9 और पॉकेट-13, सेक्टर A1-A4 में उपलब्ध हैं। इनका आवंटन फर्स्ट कम, फर्स्ट सर्व (FCFS) यानी पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर किया जाएगा।

अब इच्छुक सेवारत एवं रिटायर सरकारी कर्मचारी 31 जुलाई 2026 तक इस योजना का लाभ उठा सकेंगे। डीडीए के अनुसार, योजना को मिल रही बेहतर प्रतिक्रिया को देखते हुए आवेदन अवधि बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।

25 फीसदी मिल रहा डिस्काउंट

इस योजना के तहत पात्र सरकारी कर्मचारियों को रेडी-टू-मूव-इन फ्लैट्स पर 25 प्रतिशत की विशेष छूट दी जा रही है। ये फ्लैट दिल्ली के नरेला स्थित पॉकेट-6, 9 और 13, सेक्टर A1 से A4 में उपलब्ध हैं। डीडीए ने स्पष्ट किया है कि फ्लैटों का आवंटन ‘फर्स्ट कम, फर्स्ट सर्व (FCFS)’ यानी ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर किया जाएगा। ऐसे में इच्छुक आवेदकों को समय रहते आवेदन और बुकिंग कराने की सलाह दी गई है।

योजना का उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों को रियायती दरों पर तैयार आवास उपलब्ध कराना है। इच्छुक आवेदक डीडीए की आधिकारिक वेबसाइट और E-सर्विस के पोर्टल पर जाकर योजना से जुड़ी विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। फिर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

किन्हें मिलेगा स्कीम का लाभ?

यह योजना केवल केंद्र और राज्य सरकार के सेवारत एवं रिटायर कर्मचारियों, सार्वजनिक उपक्रमों (PSU), सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSB), स्थानीय निकायों, स्वायत्त संस्थानों और सरकारी विश्वविद्यालयों के नियमित कर्मचारियों एवं पेंशनर्स के लिए है। संविदा, अस्थायी या एडहॉक कर्मचारी इसके लिए पात्र नहीं हैं।

फ्लैट की कीमत कितनी है?

25% छूट के बाद अनुमानित शुरुआती कीमतें इस प्रकार हैं:-

1 BHK: लगभग ₹33.5 लाख से शुरू

2 BHK: लगभग ₹75.5 लाख से

3 BHK: लगभग ₹1.06 करोड़ से शुरू

(फ्लैट रेडी-टू-मूव हैं। इनके साथ पार्किंग की सुविधा भी उपलब्ध है।)

कैसे करें आवेदन?

इच्छुक आवेदक DDA के आवास पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। इसके बाद उपलब्ध फ्लैट का चयन कर बुकिंग राशि जमा करनी होगी। चूंकि आवंटन FCFS आधार पर होगा, इसलिए पसंदीदा फ्लैट पहले बुक करने वाले को मिलेगा।

स्कीम की बड़ी बातें

  • आवेदन की आखिरी तारीख अब 31 जुलाई 2026 तक बढ़ा दी गई है।
  • 25% विशेष छूट केवल सेवारत और रिटायर्ड सरकारी कर्मचारियों के लिए है।
  • रेडी-टू-मूव-इन फ्लैट उपलब्ध है।
  • स्थान: नरेला, पॉकेट-6, 9 और 13, सेक्टर A1-A4।
  • फ्लैट का आवंटन ‘फर्स्ट कम, फर्स्ट सर्व (FCFS)’ के आधार पर होगा।

8th Pay Commission पर केंद्रीय कर्मचारियों के लिए नया अपडेट! इतनी बढ़ जाएगी बेसिक सैलरी और HRA, देखें लेवल 1 से 10 का पूरा कैलकुलेशन

8th Pay Commission Salary HRA Hike: आठवें वेतन आयोग में सैलरी बढ़ने को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच खूब चर्चा है। हालांकि, इसके एक प्रमुख कंपोनेंट हाउस रेंट अलाउंस (HRA) पर लोगों का उतना ध्यान नहीं जाता, लेकिन सैलरी बढ़ाने में इसका बड़ा योगदान होता है। कोलकाता में स्टेकहोल्डर्स के साथ वेतन आयोग की बैठकों का दौर समाप्त हो चुका है। इन बैठकों में कर्मचारी यूनियनों ने बेसिक सैलरी बढ़ाने के साथ-साथ हाउस रेंट अलाउंस (HRA) की मौजूदा दरों को बढ़ाने की पुरजोर मांग की है।

चूंकि एचआरए (HRA) सीधे तौर पर बेसिक सैलरी का एक निश्चित प्रतिशत होता है, इसलिए जैसे ही 8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर के आधार पर बेसिक सैलरी बढ़ेगी, कर्मचारियों का एचआरए भी रॉकेट की तरह बढ़ जाएगा। आइए समझते हैं कि 2.0, 2.1, 2.28 और 2.57 के फिटमेंट फैक्टर पर लेवल 1 से लेकर लेवल 10 तक के कर्मचारियों की सैलरी और एचआरए में कितना बंपर उछाल आ सकता है।

कर्मचारी संगठनों की मांग: 40% तक हो HRA

फिलहाल 7वें वेतन आयोग के नियमों के मुताबिक, शहरों को तीन कैटेगरी X, Y और Z में बांटा गया है। जनवरी 2024 में महंगाई भत्ता (DA) 50% पहुंचने के बाद मौजूदा एचआरए दरें क्रमशः 30% (X शहर), 20% (Y शहर) और 10% (Z शहर) हैं।

कर्मचारी संगठनों का कहना है कि बड़े शहरों में मकानों के किराए बहुत ज्यादा बढ़ चुके हैं, इसलिए मौजूदा एचआरए नाकाफी है। संगठनों ने वेतन आयोग के सामने ये मांगें रखी हैं:

NC-JCM, AIDEF और FNPO जैसे कर्मचारी संगठनों ने मांग की है कि एचआरए की तीन स्लैब को बढ़ाकर 40% (X), 35% (Y) और 30% (Z) किया जाए। साथ ही इसे महंगाई भत्ते (DA) की बढ़ोतरी से जोड़ा जाए और पेंशनर्स को भी इसका लाभ मिले।

AINPSEF ने X, Y और Z शहरों के लिए क्रमशः 36%, 24% और 12% एचआरए की मांग की है।

फिटमेंट फैक्टर का खेल: कैसे तय होगा नया HRA?

एचआरए की गणना हमेशा बेसिक पे पर होती है। मान लीजिए अभी दिल्ली (X सिटी) में कार्यरत एक लेवल 1 के कर्मचारी की न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹18,000 है, तो उसे 30% के हिसाब से ₹5,400 एचआरए मिलता है।

अगर 8वां वेतन आयोग न्यूनतम फिटमेंट फैक्टर 2.0 तय करता है, तो बेसिक सैलरी ₹36,000 हो जाएगी और 30% के हिसाब से एचआरए सीधे ₹10,800 हो जाएगा। वहीं अगर फिटमेंट फैक्टर 2.28 या 2.57 तय होता है, तो यह फायदा और ज्यादा बढ़ जाएगा।

HRA कैलकुलेटर: देखें अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर पर अनुमानित गणित

नीचे दिए गए आंकड़ों में मौजूदा एचआरए दरों (X-30%, Y-20%, Z-10%) को आधार मानकर अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर पर लेवल 1 से लेवल 10 तक के कर्मचारियों के नए वेतन और एचआरए का अनुमान लगाया गया है:

 

HRA से सैलरी में दिखेगा बंपर उछाल

अगर सरकार न्यूनतम फिटमेंट फैक्टर 2.28 या 2.57 को मंजूरी देती है, तो केंद्रीय कर्मचारियों की इन-हैंड सैलरी में ऐतिहासिक बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। उदाहरण के तौर पर, एक एंट्री-लेवल अफसर (लेवल 10) जो अभी दिल्ली जैसे शहर में रह रहा है, उसका सिर्फ मकान किराया भत्ता (HRA) ही बढ़कर ₹43,250 प्रति माह तक पहुंच सकता है।

ITR Filing 2026: हर कोई नहीं भर सकता ITR-1, इन 10 मामलों में चुनना होगा दूसरा फॉर्म

ITR 2026: ITR-1 (सहज) सबसे आसान इनकम टैक्स रिटर्न फॉर्म माना जाता है। इसका इस्तेमाल ज्यादातर सैलरी पाने वाले कर्मचारी और पेंशनर्स करते हैं। लेकिन सिर्फ आसान होने की वजह से ITR-1 नहीं भरना चाहिए। अगर आपकी आय या निवेश कुछ खास कैटेगरी में आता है, तो आपको ITR-2 या ITR-3 भरना होगा। गलत फॉर्म चुनने पर इनकम टैक्स विभाग Defective Return Notice भेज सकता है।

मुंबई के चार्टर्ड अकाउंटेंट सुरेश सुराना बताया कि 10 स्थितियों में ITR-1 नहीं भरा जा सकता। इनके बजाय टैक्सपेयर्स को ITR-2 या ITR-3 भरा जा सकता है।

1. शेयर या म्यूचुअल फंड पर शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन

अगर आपने शेयर या इक्विटी म्यूचुअल फंड बेचकर शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन (STCG) कमाया है, तो आप ITR-1 नहीं भर सकते। ऐसे मामलों में आमतौर पर ITR-2 भरना होता है। हालांकि, अगर आपकी शेयर ट्रेडिंग को बिजनेस इनकम माना जाता है (जैसे F&O या बार-बार ट्रेडिंग), तो ITR-3 लागू होगा।

2. ₹1.25 लाख से ज्यादा लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन

अगर लिस्टेड शेयर या इक्विटी म्यूचुअल फंड बेचने पर धारा 112A के तहत 1.25 लाख रुपये से ज्यादा लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (LTCG) हुआ है, तो ITR-1 मान्य नहीं होगा।

3. जमीन, मकान या अन्य संपत्ति बेची हो

अगर आपने जमीन, मकान, गहने, डेट म्यूचुअल फंड या कोई अन्य कैपिटल एसेट बेचा है, तो उससे होने वाले कैपिटल गेन की जानकारी ITR-1 में नहीं दी जा सकती।

4. बिजनेस या प्रोफेशन से आय हो

अगर आपकी कमाई बिजनेस, फ्रीलांसिंग, कंसल्टेंसी, प्रोफेशनल फीस या किसी प्रोप्राइटरशिप बिजनेस से होती है, तो ITR-1 नहीं भर सकते। ऐसे मामलों में आमतौर पर ITR-3 भरना होता है। अगर आप प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन स्कीम चुनते हैं, तो ITR-4 लागू हो सकता है।

5. F&O या इंट्राडे ट्रेडिंग करते हों

अगर आपने F&O, इंट्राडे ट्रेडिंग या ऐसी ट्रेडिंग की है जिसे बिजनेस इनकम माना जाता है, तो ITR-1 आपके लिए नहीं है।

6. अनलिस्टेड शेयर होल्ड किए हों

अगर पिछले वित्त वर्ष में किसी भी समय आपके पास अनलिस्टेड इक्विटी शेयर रहे हैं, तो ITR-1 नहीं भर सकते। ऐसे में ITR-2 या ITR-3 भरना होगा।

7. किसी कंपनी के डायरेक्टर हों

अगर आप किसी कंपनी में डायरेक्टर हैं, तो ITR-1 भरने के पात्र नहीं हैं। आमतौर पर ऐसे मामलों में ITR-2 या ITR-3 भरना पड़ता है।

8. विदेश में संपत्ति या बैंक खाते का अधिकार हो

अगर आपके पास विदेश में कोई संपत्ति, वित्तीय निवेश या किसी विदेशी बैंक खाते पर साइन करने का अधिकार है, तो ITR-1 नहीं भर सकते। ऐसे मामलों में विदेशी संपत्तियों का अलग से खुलासा करना पड़ता है।

9. विदेश से आय होती हो

अगर आपको विदेश से सैलरी, डिविडेंड, ब्याज, किराया या कैपिटल गेन जैसी कोई आय होती है, तो ITR-1 लागू नहीं होगा। आमतौर पर ITR-2 या ITR-3 के साथ जरूरी शेड्यूल भी भरने होते हैं।

10. आय 50 लाख रुपये से ज्यादा हो

अगर आपकी कुल टैक्सेबल आय 50 लाख रुपये से ज्यादा है, पिछले साल का नुकसान (Loss) आगे ले जाना है या लॉटरी, घुड़दौड़ जैसी विशेष श्रेणी की आय है, तो भी ITR-1 नहीं भर सकते।

गलत फॉर्म चुनने से क्या होगा?

टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि समय पर ITR भरना जितना जरूरी है, उतना ही सही फॉर्म चुनना भी जरूरी है। गलत ITR फॉर्म भरने पर इनकम टैक्स विभाग Defective Return Notice भेज सकता है। इससे रिटर्न प्रोसेस होने में देरी हो सकती है या फिर रिवाइज्ड (Revised) रिटर्न दाखिल करना पड़ सकता है।

शेयर या म्यूचुअल फंड बेचने से पहले जान लें टैक्स के नियम, नहीं तो मुनाफा हो जाएगा कम

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

8th Pay Commission: फिटमेंट फैक्टर पर एक्सपर्ट्स का बड़ा खुलासा, सिर्फ भत्ते बढ़ने से नहीं चलेगा काम; जानिए सैलरी बढ़ाने का असली गणित

8th CPC Fitment Factor Calculator: केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए 8वें वेतन आयोग से जुड़ी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। ओडिशा के भुवनेश्वर में चल रही दो दिवसीय क्षेत्रीय बैठकों (6-7 जुलाई) के बाद अब पूरा फोकस इस बात पर टिक गया है कि इस बार कर्मचारियों की सैलरी बढ़ाने के लिए कौन सा फॉर्मूला अपनाया जाएगा। इस पूरे मामले में सबसे बड़ा पेंच फंसा है ‘फिटमेंट फैक्टर’ पर, जिसे लेकर कर्मचारी यूनियनों और सरकार के बीच अंदरखाने बहस जारी है।

आसान भाषा में कहें तो फिटमेंट फैक्टर ही वह ‘जादुई नंबर’ है जो तय करता है कि आने वाले 10 सालों में सरकारी कर्मचारियों की जेब में कितनी सैलरी आएगी। आइए समझते हैं कि एक्सपर्ट्स इस बार किस नंबर की उम्मीद कर रहे हैं और क्यों केवल भत्तों के भरोसे रहने से कर्मचारियों का बड़ा नुकसान हो सकता है।

क्या है यह फिटमेंट फैक्टर और क्यों अड़े हैं कर्मचारी?

इसे बहुत ही सरल तरीके से समझें तो फिटमेंट फैक्टर एक ‘सैलरी मल्टीप्लायर’ है। पुराने वेतन आयोग की बेसिक सैलरी को इस नंबर से गुणा करके नए वेतन आयोग की न्यूनतम बेसिक सैलरी तय की जाती है।

7वें वेतन आयोग का उदाहरण: पिछले वेतन आयोग में सरकार ने 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया था। इसके कारण कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹7000 से बढ़कर सीधे ₹18000 हो गई थी।

8वें वेतन आयोग की स्थिति: आयोग का गठन हुए 8 महीने से ज्यादा का वक्त बीत चुका है, लेकिन सरकार ने अभी तक इस नंबर को लेकर अपने पत्ते नहीं खोले हैं। जूनियर लेवल के कर्मचारियों की मांग है कि इस मल्टीप्लायर को इस बार और बड़ा रखा जाए ताकि महंगाई के इस दौर में उन्हें एक बेहतर सैलरी हाइक मिल सके।

एक्सपर्ट्स की दो राय: 1.90 से लेकर 2.86 तक का अनुमान

8वें वेतन आयोग में यह नंबर कितना तय होगा, इसे लेकर देश के बड़े फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स के बीच दो अलग-अलग गणित चल रहे हैं:

बैंकबाजार के एक्सपर्ट के मुताबिक, फिलहाल फिटमेंट फैक्टर की रेंज 2.28 से 2.86 के बीच रहने की उम्मीद है। अंतिम फैसला इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार बढ़ती महंगाई और कर्मचारियों की उम्मीदों के बीच कैसे तालमेल बैठाती है।

एक और एक्सपर्ट का मानना है कि देश की वित्तीय स्थिति और बजटीय सीमाओं को देखते हुए सरकार इस नंबर को 1.90 से 2.10 के दायरे में सीमित रख सकती है। उनके अनुसार, वित्तीय दबाव के कारण इस नंबर का 2.3 से पार जाना थोड़ा मुश्किल लग रहा है।

सिर्फ भत्ते बढ़ने से क्यों नहीं बनेगी बात?

आम तौर पर यह माना जाता है कि अगर सरकार फिटमेंट फैक्टर को थोड़ा कम भी रखती है, तो वह हाउस रेंट अलाउंस (HRA), ट्रांसपोर्ट अलाउंस या डियरनेस अलाउंस (DA) बढ़ाकर कर्मचारियों को खुश कर सकती है। लेकिन एक्सपर्ट्स ने इस सोच के पीछे का एक बड़ा कड़वा सच उजागर किया है।

गणित बहुत सीधा है आपका मिलने वाला HRA, महंगाई भत्ता (DA) या रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेंशन ये सभी चीजें आपकी रिवाइज्ड बेसिक सैलरी के आधार पर तय होती हैं। अगर फिटमेंट फैक्टर कम रहेगा, तो आपकी बेसिक सैलरी की नींव ही कमजोर रह जाएगी। जब बुनियादी सैलरी ही कम बढ़ेगी, तो उस पर कैलकुलेट होने वाले भत्तों की रकम भी आनुपातिक रूप से छोटी ही रहेगी। इसलिए, भत्ते कभी भी एक कमजोर फिटमेंट फैक्टर की भरपाई नहीं कर सकते।

सैलरी का पूरा स्ट्रक्चर: किस पर कितना असर?

अगर आप सोच रहे हैं कि इस फैसले से आपकी टेक-होम सैलरी पर क्या असर पड़ेगा। समझे सैलरी कंपोनेंट 8वें वेतन आयोग में इसका गणित

फिटमेंट फैक्टर- नए वेतन ढांचे की नींव है; यह तय करेगा कि न्यूनतम बेसिक पे कितनी बढ़ेगी।

हाउस रेंट अलाउंस (HRA)- नए बेसिक पे पर ही कैलकुलेट होगा, यानी फिटमेंट फैक्टर अच्छा तो HRA भी तगड़ा।

पेंशन लाभ- रिटायर्ड कर्मचारियों की पेंशन भी बेसिक पे के रिवीजन से लिंक है, पेंशनर्स के लिए भी यह नंबर अहम है।

सरकारी खजाना- आयोग को कर्मचारियों की खुशहाली के साथ-साथ देश के वित्तीय बजट का भी ध्यान रखना होगा।

अब आगे क्या होने वाला है?

भुवनेश्वर की दो दिवसीय बैठक खत्म होने के बाद, अब 8वें वेतन आयोग की टीम 9-10 जुलाई को कोलकाता में राज्य और केंद्र के कर्मचारी संगठनों व पेंशनर्स के साथ सीधा संवाद करेगी। आने वाले महीनों में देश के अन्य हिस्सों में भी ऐसी ही क्षेत्रीय बैठकें होंगी। आयोग को अपनी अंतिम रिपोर्ट मध्य-2027 तक सरकार को सौंपनी है, जिसके बाद ही कर्मचारियों की अंतिम सैलरी और पेंशनर्स के भाग्य का फैसला होगा।

8th Pay Commission: पेंशनर्स के लिए बड़ी खुशखबरी! न्यूनतम पेंशन 67% और उम्र के साथ 100% हाइक की मांग, देखें पूरी लिस्ट

8th Pay Commission Pension Revision Demands: केंद्र सरकार के कर्मचारियों के साथ-साथ देश के करीब 65 लाख रिटायर्ड पेंशनर्स के लिए 8वें वेतन आयोग से जुड़ी एक बेहद महत्वपूर्ण खबर आ रही है। आयोग इस समय विभिन्न राज्यों का दौरा करके कर्मचारी संगठनों, यूनियनों और हितधारकों से मुलाकात कर सुझाव जुटा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाले इस आयोग के कार्यक्षेत्र में 31 दिसंबर 2025 या उससे पहले रिटायर होने वाले पेंशनर्स की पेंशन की समीक्षा करना भी शामिल है। अलग-अलग कर्मचारी संगठनों ने आयोग के सामने पेंशन को लेकर कई बड़ी और क्रांतिकारी मांगें रखी हैं। आइए समझते हैं कि पेंशनर्स के लिए क्या-क्या मुख्य मांगें की गई हैं और इन्हें कब तक लागू किया जा सकता है।

प्रमुख कर्मचारी संगठनों की क्या हैं मांगें?

नेशनल काउंसिल फॉर जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM), महाराष्ट्र ओल्ड पेंशन ऑर्गनाइजेशन और ऑल इंडिया डिफेंस एंप्लॉयीज फेडरेशन (AIDEF) जैसे बड़े संगठनों ने आयोग को अपनी विस्तृत मांगें सौंपी हैं:

NC-JCM: संशोधित वेतन के साथ पेंशन का स्ट्रक्चरल अलाइनमेंट किया जाए।

महाराष्ट्र ओल्ड पेंशन ऑर्गनाइजेशन: पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली, यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) में सुधार और इसे DA से जोड़ा जाए।

AIDEF: नए रिवाइज्ड पे-स्ट्रक्चर के आधार पर सभी पेंशनर्स के लिए एक समान पेंशन लागू की जाए।

पेंशन रिवीजन से जुड़ी 5 सबसे बड़ी मांगें

हितधारकों और कर्मचारी यूनियनों द्वारा उठाई गई प्रमुख मांगें नीचे दी गई हैं:

  1. न्यूनतम पेंशन में बंपर बढ़ोतरी: पेंशनर्स के लिए न्यूनतम पेंशन को आखिरी बार मिले वेतन या आखिरी 10 महीनों के औसत वेतन का 67% किया जाए।
  2. फिटमेंट फैक्टर और डीआर में सुधार: पेंशन कैलकुलेशन के लिए इस्तेमाल होने वाले फिटमेंट फैक्टर को संशोधित किया जाए और डियरनेस रिलीफ (DR) के ढांचे की समीक्षा करके इसे पेंशन लाभों में जोड़ा जाए।
  3. फैमिली पेंशन और ग्रेच्युटी: फैमिली पेंशन के दायरे को बढ़ाया जाए, ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा में बढ़ोतरी हो और पेंशन कम्यूटेशन यानी पेंशन की एकमुश्त रकम के नियमों में सुधार किया जाए।
  4. पेंशन स्कीम चुनने की आजादी: रिटायर्ड कर्मचारियों को उनकी सुविधा के अनुसार पुरानी पेंशन योजना (OPS), नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) या यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) में से किसी एक को चुनने का विकल्प दिया जाए।
  5. उम्र बढ़ने के साथ बढ़ेगी पेंशन: जैसे-जैसे पेंशनभोगी की उम्र बढ़े, उसकी पेंशन में भी आनुपातिक बढ़ोतरी की जाए। 90 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों के लिए इसे आखिरी वेतन का 100% करने का प्रस्ताव है।

उम्र के हिसाब से कितनी पेंशन बढ़ाने की है मांग?

संगठनों ने बढ़ती उम्र के साथ पेंशनर्स की चिकित्सा और अन्य जरूरतों को देखते हुए इस प्रकार पेंशन बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है:

उम्र के हिसाब से कितनी पेंशन बढ़ाने की है मांग?

आयोग का अगला शेड्यूल और देशव्यापी बैठकें

8वें वेतन आयोग ने अप्रैल, मई और जून में कई राज्यों का दौरा किया है। जुलाई में भी बैठकों का दौर जारी है:

भुवनेश्वर (ओडिशा): 6 और 7 जुलाई को आयोग यहां हितधारकों के साथ अहम चर्चा कर रहा है। इसके लिए रजिस्ट्रेशन 15 जून को ही बंद हो चुके थे।

कोलकाता (पश्चिम बंगाल): इसके बाद आयोग 9 और 10 जुलाई को कोलकाता का दौरा करेगा।

मुंबई दौरा: आयोग ने मुंबई में सेंट्रल रेलवे जोन के तहत विभिन्न रेलवे विभागों का दौरा करने की इच्छा भी जताई है, ताकि कर्मचारियों की कामकाजी परिस्थितियों को करीब से समझा जा सके।

कब तक लागू होंगी 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें?

आमतौर पर वेतन आयोग को अपनी रिपोर्ट सौंपने में गठन के बाद से करीब 18 महीने का समय लगता है, जो मध्य-2027 (फरवरी या अप्रैल 2027) के आसपास पूरा होगा।

रिपोर्ट सौंपने के बाद, पिछले ट्रेंड्स बताते हैं कि केंद्र सरकार से मंजूरी मिलने और इसे पूरी तरह लागू होने में 2 से 3 साल का समय लग जाता है। इसका मतलब है कि 2027 में घोषित होने वाली वेतन और पेंशन बढ़ोतरी साल 2029 या 2030 तक पूरी तरह से जमीन पर लागू हो पाएगी।

8th Pay Commission: ₹18000 से बढ़कर ₹69000 हो जाएगी बेसिक सैलरी! जानिए इस डिमांड के पीछे का पूरा कैलकुलेशन

8th Pay Commission Minimum Basic Pay: आठवें वेतन आयोग के गठन की सुगबुगाहट के बीच केंद्रीय कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी को लेकर एक बड़ी मांग चर्चा में है। कर्मचारी संगठनों ने सरकारी कर्मचारियों की मौजूदा न्यूनतम बेसिक सैलरी को ₹18,000 से बढ़ाकर सीधे ₹69,000 करने का प्रस्ताव रखा है।

हालांकि, सोशल मीडिया पर इस तेजी के पीछे सिर्फ 3.833 के फिटमेंट फैक्टर की चर्चा हो रही है, लेकिन असल में इस ₹69,000 की मांग के पीछे एक बहुत बड़ा इकोनॉमिक कैलकुलेशन है। नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) की स्टाफ साइड ने सरकार को सौंपे ज्ञापन में न्यूनतम वेतन तय करने के पूरे फॉर्मूले को ही बदलने का सुझाव दिया है। आइए समझते हैं कि इस ₹69,000 की मांग के पीछे का पूरा गणित क्या है।

क्यों उठी फॉर्मूला बदलने की मांग?

कर्मचारी संगठनों (NC-JCM) का तर्क है कि 7वें वेतन आयोग का पुराना फॉर्मूला आज के समय में बढ़ती महंगाई और जीवन यापन की वास्तविक लागत को नहीं दर्शाता है। इसलिए, उन्होंने ‘नीड-बेस्ड लिविंग वेज’ की गणना के लिए परिवार के आकार, खान-पान, मकान और बच्चों की पढ़ाई-लिखाई से जुड़े खर्चों के मानकों में बड़े बदलाव किए हैं।

1. 3 के बजाय 5 यूनिट का परिवार

₹69,000 की मांग के पीछे सबसे बड़ा बदलाव परिवार के आकार को लेकर है:

पुराना नियम (7th Pay Commission): इसमें केवल 3 यूनिट का परिवार माना जाता था, जिसमें कर्मचारी, उसकी पत्नी/पति और दो बच्चे शामिल थे।

नया प्रस्ताव (8th Pay Commission): कर्मचारी पक्ष ने इसे बढ़ाकर 5 यूनिट का परिवार करने का प्रस्ताव दिया है। इसमें पहली बार कर्मचारी के आश्रित माता-पिता और सास-ससुर को भी शामिल करने की मांग की गई है।

नए फॉर्मूले के तहत परिवार का गणित:

  • कर्मचारी: 1 यूनिट
  • जीवनसाथी: 1 यूनिट (पहले इसे 0.8 यूनिट माना जाता था)
  • दो बच्चे: 0.8 यूनिट प्रति बच्चा (कुल 1.6 यूनिट)
  • आश्रित माता-पिता/सास-ससुर: 0.8 यूनिट
  • कुल जोड़: 5.2 यूनिट (जिसे वेतन गणना के लिए राउंड ऑफ करके 5 यूनिट माना गया है)।

2. खाने-पीने और रहन-सहन के खर्चों में बदलाव

परिवार के आकार के अलावा, रोजमर्रा के खर्चों को लेकर भी नया कैलकुलेशन दिया गया है:

कैलोरी इनटेक: इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) की ताजा सिफारिशों के आधार पर अब प्रति दिन 3,490 कैलोरी के हिसाब से भोजन और कपड़ों का खर्च तय करने की मांग है।

घर का खर्च: मकान के खर्च को पुराने फॉर्मूले के 3% से बढ़ाकर सीधे 7.5% करने का प्रस्ताव है।

बिजली-पानी: ईंधन, बिजली और पानी के खर्च को कुल लागत का 20% तय किया गया है।

स्किल डेवलपमेंट: बच्चों की पढ़ाई और कौशल विकास के खर्च को 25% पर आंका गया है।

सामाजिक जिम्मेदारी: शादी-ब्याह, त्योहार, मनोरंजन और सामाजिक दायित्वों के लिए अतिरिक्त 5% खर्च जोड़ा गया है।

कैसे निकल कर आया 3.833 का फिटमेंट फैक्टर?

इन सभी नए और संशोधित खर्चों को जोड़ने के बाद, NC-JCM ने गणना की है कि एक केंद्रीय कर्मचारी की न्यूनतम मासिक बेसिक सैलरी कम से कम ₹69,000 होनी चाहिए।

फिटमेंट फैक्टर का गणित: चूंकि अभी न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹18,000 है, इसलिए ₹18,000 से ₹69,000 तक पहुंचने के लिए 3.833 का फिटमेंट फैक्टर निकल कर आता है (यानी 18,000×3.833=69,000 लगभग)।

पेंशनर्स पर भी असर: कर्मचारी संगठनों ने सिफारिश की है कि पेंशन को रिवाइज करते समय भी इसी 3.833 के फिटमेंट फैक्टर का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

यह मांग हाल के महीनों में चर्चा में रहे 2 से 2.5 के फिटमेंट फैक्टर की तुलना में काफी अधिक है। हालांकि, सरकार ने अभी तक इस आंकड़े पर अपनी कोई सहमति या पसंदीदा नंबर नहीं बताया है।

आगे क्या होगा?

यह ध्यान रखना जरूरी है कि ₹69,000 की न्यूनतम सैलरी और 3.833 का फिटमेंट फैक्टर अभी केवल कर्मचारी यूनियनों द्वारा रखा गया एक प्रस्ताव है। 8वां वेतन आयोग अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करने से पहले सभी कर्मचारी संगठनों, विभिन्न मंत्रालयों और अन्य हितधारकों के अभ्यावेदनों की जांच करेगा। इसके बाद आयोग अपनी अंतिम सिफारिशें सरकार को सौंपेगा और अंतिम फैसला केंद्र सरकार का होगा।

अगर वेतन आयोग इस नए फॉर्मूले को आंशिक रूप से भी स्वीकार करता है, तो इसका असर केवल शुरुआती सैलरी पर नहीं बल्कि पूरे पे-मैट्रिक्स पर पड़ेगा। इसके चलते सभी स्तरों के कर्मचारियों की बेसिक सैलरी, भत्ते और पेंशन में भारी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

8th Pay Commission: फैमिली यूनिट में माता-पिता को शामिल करने की मांग, इससे बढ़ेगा मिनिमम बेसिक पे

8th Pay Commission: केंद्र सरकार के एंप्लॉयीज ने 8वें वेतन आयोग से फैमिली यूनिट के प्रस्तावित विस्तार में माता-पिता (आश्रित सास-ससुर सहित) को शामिल करने की मांग की है। इससे एंप्लॉयी की फैमिली की यूनिट्स तीन से बढ़कर पांच हो जाएगी। इससे पहले के वेतन आयोग ने जरूरत आधारित मिनिमम वेजेज के कैलकुलेशन के लिए एंप्लॉयी की फैमिली के तीन यूनिट्स तक पर विचार किया था। इनमें गवर्नमेंट एंप्लॉयी (1 यूनिट), पत्नी/पति (0.8 यूनिट) और दो बच्चे (0.6X2=1.2 यूनिट्स) शामिल थे।

एंप्लॉयीज के अलग-अलग लेवल के पे में काफी फर्क

एंप्लॉयीज एसोसिएशंस और यूनियंस का कहना है कि नए वेतन आयोग को जरूरत आधारित वेजेज के कैलकुलेशन के लिए माता-पिता सहित फैमिली यूनिट्स पर विचार करना चाहिए। अगर यह मांग मान ली जाती है तो केंद्र सरकार के हर लेवल के एंप्लॉयीज का बेसिक पे काफी बढ़ जाएगा। यूनियंस की दलील है कि एंप्लॉयीज के अलग-अलग लेवल के बीच पे के मामले में बड़ा फर्क है।

एंप्लॉयीज की फैमिली यूनिट की संख्या बढ़ाने की मांग

एंप्लॉयीज यूनियंस के मुताबिक, लेवल 1 के लिए मिनिमम बेसिक पे प्रति माह 18,000 रुपये है। लेवल 18 के एंप्लॉयीज के लिए बेसिक पे 2.5 लाख रुपये प्रति माह है। एंप्लॉयीज का प्रतिनिधित्व करने वाली नेशनल काउंसिल-ज्वाइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JMC) की दलील है कि फैमिली यूनिट्स 5 मानी जानी चाहिए। इसमें एंप्लॉयी एक यूनिट, पत्नी/पति 1 यूनिट (0.8 यूनिट से बढ़ाकर 1), दो तक बच्चे (0.8 यूनिटX2 = 1.6 यूनिट), पेरेंट्स (आश्रित माता-पिता सहित) 0.8 यूनिट्स शामिल होने चाहिए।

आश्रित सास-ससुर भी फैमिली में शामिल होने चाहिए 

अगर 8वां वेतन आयोग माता-पिता को 0.8 यूनिट्स मान लेता है और पत्नी/पति का यूनिट 0.2 बढ़ा देता है तो कुल फैमिली यूनिट्स बढ़कर 5.2 हो जाएगी। एनसी-जेसीएम की मांग है कि मिनिमम पे तय करने के लिए फैमिली यूनिट्स पर विचार के दौरान सास-ससुर को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। फूड एंड क्लॉदिंग के लिए 3490 Kcal के ICMR की सिफारिश मानी जानी चाहिए। हाउसिंग को मौजूदा 3 फीसदी से बढ़ाकर 7.5 फीसदी किया जाना चाहिए।

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5 यूनिट के लिए मिनिमम 69,000 पे का कैलकुलेशन

फ्यूल, इलेक्ट्रिसिटी, वाटर चार्जेज ओवरऑल कॉस्ट का 20 फीसदी होना चाहिए। स्किल डेवलपमेंट 25 फीसदी होना चाहिए। एडिशनल एक्सपेंसेज 5 फीसदी होने चाहिए। NC-JCM की ड्राफ्टिंग कमेटी ने अपने ज्ञापन में कहा है कि एनसी-जेसीएम ने जिस मिनिमम पे का कैलकुलेशन किया है, वह 5 यूनिट फैमिली के लिए 69,000 रुपये है। इसके हिसाब से एंप्लॉयीज और पेंशनर्स के लिए फिटमेंट फॉर्मूला 3.83 होगा।