Dussehra Bonus: इस दशहरा पर सरकारी कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले! रिवाइज्ड बोनस को लेकर बड़ा अपडेट, खाते में आएगी मोटी रकम

7th Pay Commission Bonus Update: आगामी दशहरा के त्योहार से पहले केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए एक बड़ी और खुशखबरी वाली खबर सामने आ रही है। केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी के साथ-साथ इस बार उनके बोनस में भी तीन गुना तक का बंपर इजाफा देखने को मिल सकता है।

कर्मचारी पक्ष का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था नेशनल काउंसिल – जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) ने कैबिनेट सचिव को पत्र लिखकर मांग की है कि इस दशहरा कर्मचारियों को ₹7000 के बजाय संशोधित ₹21000 तक का बोनस जारी किया जाए।

NC-JCM ने कैबिनेट सचिव को लिखा पत्र, उठाई ये मांग

NC-JCM के सचिव शिव गोपाल मिश्रा ने 27 अगस्त 2026 को कैबिनेट सचिव को एक लिखित पत्र भेजा है। पत्र में कहा गया है कि दशहरा का त्योहार नजदीक आ रहा है और सरकार जल्द ही प्रॉडक्टिविटी लिंक्ड बोनस (PLB), बोनस और एड-हॉक बोनस के आदेश जारी करेगी।

ऐसे में NC-JCM की 49वीं बैठक में आधिकारिक पक्ष द्वारा दिए गए आश्वासन के अनुसार, केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए बोनस की सीलिंग लिमिट को ₹7,000 से बढ़ाकर तुरंत ₹21,000 किया जाना चाहिए।

श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने अधिसूचित की नई सीमा

NC-JCM ने अपने पत्र में श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा 25 अगस्त 2026 को जारी उस अधिसूचना का हवाला दिया है, जिसमें बोनस पात्रता की सीमा बढ़ाई गई है। कोड ऑन वेजेस 2019 की धारा 26(1) के तहत जारी अधिसूचना S.O. 4711(E) के अनुसार, ₹21,000 प्रति माह तक वेतन पाने वाले कर्मचारी बोनस के हकदार होंगे। इस नियम को 21 नवंबर 2025 से बैकडेट में लागू माना गया है।

₹7,000 की पुरानी सीमा पर उठ रहे थे सवाल

ऑल इंडिया एनपीएस एंप्लाइज फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मंजीत सिंह पटेल ने कहा कि 10 साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी कर्मचारियों को मात्र ₹6,908 का नॉन-प्रॉडक्टिविटी लिंक्ड बोनस दिया जा रहा था। वर्तमान में कर्मचारियों का बोनस ₹7,000 की पुरानी प्राइवेट सेक्टर दर पर तय होता था।

अप्रैल 2026 में सरकार द्वारा तय न्यूनतम दैनिक मजदूरी की दरों (₹783 से ₹1,035 तक) के औसत के आधार पर कर्मचारियों को वास्तव में ₹27,694 तक का बोनस मिलना चाहिए।

11 मई 2026 की बैठक में क्या तय हुआ था?

NC-JCM के अनुसार, 11 मई 2026 को कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में हुई 49वीं बैठक में बोनस सीमा बढ़ाने का मुद्दा उठाया गया था। उस समय सरकार की ओर से कहा गया था कि जैसे ही पेमेंट ऑफ बोनस एक्ट 1965 (अब कोड ऑन वेजेस 2019) के तहत सीलिंग लिमिट में बदलाव होगा, केंद्रीय कर्मचारियों के बोनस पर विचार किया जाएगा।

चूंकि अब श्रम मंत्रालय ने ₹21,000 की नई लिमिट जारी कर दी है, इसलिए कर्मचारी यूनियनों को पूरी उम्मीद है कि सरकार इस दशहरा त्योहार से पहले संशोधित बोनस आदेश जारी कर कर्मचारियों को बड़ा तोहफा देगी।

Vande Bharat चलाने वाले पायलट की सैलरी जानकर रह जाएंगे हैरान, इतनी होती है महीने की कमाई!

वंदे भारत एक्सप्रेस सिर्फ अपनी रफ्तार और आधुनिक सुविधाओं के लिए ही नहीं, बल्कि इसे चलाने वाले लोको पायलटों की जिम्मेदारी और कौशल के लिए भी चर्चा में रहती है। देश की इस प्रीमियम ट्रेन को सुरक्षित तरीके से चलाने के लिए रेलवे अनुभवी और प्रशिक्षित लोको पायलटों का चयन करता है। यात्रियों को समय पर और सुरक्षित मंजिल तक पहुंचाने के पीछे इन पायलटों की अहम भूमिका होती है। ऐसे में यह जानना दिलचस्प है कि जिस ट्रेन को देश की सबसे खास ट्रेनों में गिना जाता है, उसे चलाने वाले लोको पायलट की कमाई कितनी होती है।

उनकी सैलरी सिर्फ बेसिक वेतन तक सीमित नहीं रहती, बल्कि कई तरह के भत्तों और सुविधाओं के साथ उनकी मासिक आय काफी बढ़ जाती है। आइए जानते हैं वंदे भारत लोको पायलट की सैलरी और मिलने वाली सुविधाओं के बारे में।

वंदे भारत लोको पायलट की सैलरी कितनी होती है?

भारतीय रेलवे में वंदे भारत लोको पायलट के लिए अलग से कोई विशेष पे-स्केल तय नहीं है। आमतौर पर इस ट्रेन को चलाने वाले लोको पायलट 7वें वेतन आयोग के तहत लेवल-6 के अनुभवी कर्मचारी होते हैं। इनका बेसिक पे करीब ₹35,400 से शुरू होता है, लेकिन भत्तों और अन्य सुविधाओं को जोड़ने के बाद उनकी कुल आय काफी बढ़ जाती है। अनुभव और पोस्टिंग के आधार पर उनकी बेसिक सैलरी लगभग ₹56,000 से ₹60,000 तक पहुंच सकती है।

भत्तों से बढ़ जाती है लाखों तक कमाई

लोको पायलट की कमाई सिर्फ मूल वेतन तक सीमित नहीं होती। उन्हें कई तरह के सरकारी भत्ते मिलते हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • महंगाई भत्ता (DA)
  • मकान किराया भत्ता (HRA)
  • रनिंग अलाउंस
  • नाइट ड्यूटी अलाउंस
  • ट्रांसपोर्ट अलाउंस
  • मेडिकल सुविधाएं और अन्य सरकारी लाभ

इन सभी को मिलाकर वंदे भारत के अनुभवी लोको पायलट की मासिक आय करीब ₹90,000 से ₹1.30 लाख या इससे ज्यादा तक पहुंच सकती है।

वंदे भारत चलाने वालों को ज्यादा सुविधाएं क्यों मिलती हैं?

वंदे भारत जैसी हाई-स्पीड ट्रेन चलाना बेहद जिम्मेदारी वाला काम है। लोको पायलट को तेज रफ्तार के दौरान सिग्नल, ट्रैक की स्थिति, मौसम और सुरक्षा नियमों पर लगातार नजर रखनी पड़ती है। छोटी सी लापरवाही भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। इसी जिम्मेदारी को देखते हुए उन्हें रनिंग अलाउंस समेत कई अतिरिक्त लाभ दिए जाते हैं।

कैसे बनते हैं वंदे भारत के लोको पायलट?

कोई भी व्यक्ति सीधे वंदे भारत ट्रेन का ड्राइवर नहीं बन सकता। इसके लिए सबसे पहले रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) के जरिए असिस्टेंट लोको पायलट (ALP) के पद पर चयन होता है। इसके बाद वर्षों का अनुभव, विभागीय प्रमोशन, मेडिकल फिटनेस और विशेष तकनीकी प्रशिक्षण पूरा करने के बाद ही किसी लोको पायलट को वंदे भारत जैसी आधुनिक ट्रेन चलाने का मौका मिलता है।

कितनी मुश्किल होती है लोको पायलट की नौकरी?

वंदे भारत के लोको पायलट का काम सिर्फ ट्रेन चलाना नहीं होता। उन्हें लंबे समय तक सतर्क रहकर ड्यूटी करनी पड़ती है। मौसम चाहे गर्मी का हो, सर्दी का या बारिश का, यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी हमेशा उनके कंधों पर रहती है। यही कारण है कि रेलवे इस जिम्मेदारी भरे पद के लिए अनुभवी और कुशल कर्मचारियों को ही चुनता है।

सैलरी के साथ मिलता है सम्मान भी

वंदे भारत ट्रेन चलाने वाले लोको पायलट की कमाई अनुभव, ड्यूटी घंटे, पोस्टिंग और मिलने वाले भत्तों के आधार पर बदलती रहती है। अच्छी सैलरी के साथ यह भारतीय रेलवे की सबसे जिम्मेदार और प्रतिष्ठित नौकरियों में से एक मानी जाती है।

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8th Pay Commission पर कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए आया ये बड़ा अपडेट! जानिए सैलरी और HRA पर कितना पड़ेगा असर

8th Pay Commission: 8वां केंद्रीय वेतन आयोग केवल सैलरी में बढ़ोतरी तक सीमित नहीं है। सरकार द्वारा जारी आधिकारिक गैजेट नोटिफिकेशन के अनुसार, इसके नियम और शर्तें केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के भत्तों, पेंशन और काम करने के तरीकों में बड़े बदलावों की ओर इशारा कर रहे हैं।

3 नवंबर 2025 को गठित इस आयोग को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। हाल ही में आयोग ने भुवनेश्वर और कोलकाता (9-10 जुलाई 2026) में विभिन्न कर्मचारी यूनियनों और हितधारकों के साथ बैठकें पूरी की हैं।

1. सभी भत्तों (Allowances) की गहन समीक्षा

गैजेट के अनुसार, आयोग वर्तमान में मिलने वाले सभी प्रकार के भत्तों के ढांचे और उनके नियमों की समीक्षा कर रहा है।

उद्देश्य: बड़ी संख्या में मिलने वाले अलग-अलग भत्तों को सरल और युक्तिसंगत बनाना।

असर: कर्मचारियों को न केवल संशोधित दरें मिल सकती हैं, बल्कि पात्रता के नियमों में बदलाव, क्लेम प्रोसेस का आसान होना या कई भत्तों का आपस में विलय भी देखने को मिल सकता है। कर्मचारी संगठनों द्वारा HRA को बढ़ाकर 40% तक करने की मांग भी ज़ोरों पर है।

2. परफॉर्मेंस-लिंक्ड इंसेंटिव पर जोर 

गैजेट में साफ तौर पर कहा गया है कि आयोग वर्तमान बोनस सिस्टम और परफॉर्मेंस आधारित भुगतानों की जांच करेगा और एक ऐसा इंसेंटिव फ्रेमवर्क तैयार करेगा जो उत्पादकता को बढ़ावा दे।

असर: भविष्य में मिलने वाला कंपंसेशन केवल समय-समय पर होने वाले वेतन संशोधन पर निर्भर नहीं रहेगा, बल्कि कर्मचारी की जवाबदेही, दक्षता और मापने योग्य नतीजों से भी जोड़ा जा सकता है।

3. NPS, UPS, पेंशन और ग्रेच्युटी की समीक्षा

रिटायरमेंट बेनिफिट्स इस बार आयोग के सबसे बड़े फोकस एरिया में से एक हैं। गैजेट में राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) और यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) के तहत आने वाले कर्मचारियों के लिए ‘डेथ-कम-रिटायरमेंट ग्रेच्युटी’ की समीक्षा करने के निर्देश हैं।

असर: जो कर्मचारी NPS या UPS के दायरे से बाहर हैं, उनके लिए भी पेंशन और ग्रेच्युटी लाभों की जांच की जाएगी ताकि विसंगतियों को दूर कर उन्हें बेहतर लाभ दिए जा सकें।

4. प्राइवेट सेक्टर और CPSUs की सैलरी का आकलन

एक अनोखा और महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि आयोग को केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (CPSUs) और निजी क्षेत्र में चल रहे मौजूदा सैलरी स्ट्रक्चर, मिलने वाले फायदों और वर्किंग कंडीशंस पर भी विचार करने को कहा गया है।

उद्देश्य: सरकार ऐसा वेतन ढांचा तैयार करना चाहती है जिससे बेहतरीन टैलेंट को आकर्षित किया जा सके और उसे रोक कर रखा जा सके, साथ ही देश के राजकोषीय अनुशासन पर भी कोई आंच न आए।

5. फाइनल से पहले अंतरिम रिपोर्ट सौंपने की छूट

हालांकि आयोग को अंतिम सिफारिशें सौंपने के लिए 18 महीने (मई-जून 2027 तक) का समय मिला है, लेकिन गैजेट नोटिफिकेशन सरकार को यह लचीलापन देता है कि आयोग विशिष्ट मामलों पर अपनी अंतरिम रिपोर्ट पहले भी दे सकता है।

असर: अगर सरकार चाहे, तो कुछ खास मुद्दों या भत्तों से जुड़ी सिफारिशों को अंतिम रिपोर्ट आने से पहले ही लागू करने पर विचार कर सकती है।

8th Pay Commission: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1. 8वें वेतन आयोग का गठन कब हुआ और इसके अध्यक्ष कौन हैं?

उत्तर: 8वें वेतन आयोग को आधिकारिक तौर पर 3 नवंबर 2025 को एक गैजेट नोटिफिकेशन के जरिए गठित किया गया था। इसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं।

Q2. इस आयोग की सिफारिशें कब से लागू होने की उम्मीद है?

उत्तर: हालांकि सरकार ने अभी किसी आधिकारिक तारीख की घोषणा नहीं की है, लेकिन परंपरा के अनुसार 7वें वेतन आयोग का कार्यकाल 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हो रहा था। इस लिहाज से नई संशोधित सैलरी और पेंशन 1 जनवरी 2026 से (बैकडेट या एरियर के साथ) प्रभावी होने की पूरी संभावना है।

Q3. क्या आयोग ने फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) की घोषणा कर दी है?

उत्तर: नहीं, आयोग की तरफ से अभी तक किसी भी फिटमेंट फैक्टर, वेतन वृद्धि की दर या संशोधित पे-मैट्रिक्स की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। कर्मचारी संगठन लगातार 2.86 से लेकर 3.8 तक के फिटमेंट फैक्टर की मांग कर रहे हैं।

8th Pay Commission: ₹18000 से बढ़कर ₹69000 हो जाएगी बेसिक सैलरी! जानिए इस डिमांड के पीछे का पूरा कैलकुलेशन

8th Pay Commission Minimum Basic Pay: आठवें वेतन आयोग के गठन की सुगबुगाहट के बीच केंद्रीय कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी को लेकर एक बड़ी मांग चर्चा में है। कर्मचारी संगठनों ने सरकारी कर्मचारियों की मौजूदा न्यूनतम बेसिक सैलरी को ₹18,000 से बढ़ाकर सीधे ₹69,000 करने का प्रस्ताव रखा है।

हालांकि, सोशल मीडिया पर इस तेजी के पीछे सिर्फ 3.833 के फिटमेंट फैक्टर की चर्चा हो रही है, लेकिन असल में इस ₹69,000 की मांग के पीछे एक बहुत बड़ा इकोनॉमिक कैलकुलेशन है। नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) की स्टाफ साइड ने सरकार को सौंपे ज्ञापन में न्यूनतम वेतन तय करने के पूरे फॉर्मूले को ही बदलने का सुझाव दिया है। आइए समझते हैं कि इस ₹69,000 की मांग के पीछे का पूरा गणित क्या है।

क्यों उठी फॉर्मूला बदलने की मांग?

कर्मचारी संगठनों (NC-JCM) का तर्क है कि 7वें वेतन आयोग का पुराना फॉर्मूला आज के समय में बढ़ती महंगाई और जीवन यापन की वास्तविक लागत को नहीं दर्शाता है। इसलिए, उन्होंने ‘नीड-बेस्ड लिविंग वेज’ की गणना के लिए परिवार के आकार, खान-पान, मकान और बच्चों की पढ़ाई-लिखाई से जुड़े खर्चों के मानकों में बड़े बदलाव किए हैं।

1. 3 के बजाय 5 यूनिट का परिवार

₹69,000 की मांग के पीछे सबसे बड़ा बदलाव परिवार के आकार को लेकर है:

पुराना नियम (7th Pay Commission): इसमें केवल 3 यूनिट का परिवार माना जाता था, जिसमें कर्मचारी, उसकी पत्नी/पति और दो बच्चे शामिल थे।

नया प्रस्ताव (8th Pay Commission): कर्मचारी पक्ष ने इसे बढ़ाकर 5 यूनिट का परिवार करने का प्रस्ताव दिया है। इसमें पहली बार कर्मचारी के आश्रित माता-पिता और सास-ससुर को भी शामिल करने की मांग की गई है।

नए फॉर्मूले के तहत परिवार का गणित:

  • कर्मचारी: 1 यूनिट
  • जीवनसाथी: 1 यूनिट (पहले इसे 0.8 यूनिट माना जाता था)
  • दो बच्चे: 0.8 यूनिट प्रति बच्चा (कुल 1.6 यूनिट)
  • आश्रित माता-पिता/सास-ससुर: 0.8 यूनिट
  • कुल जोड़: 5.2 यूनिट (जिसे वेतन गणना के लिए राउंड ऑफ करके 5 यूनिट माना गया है)।

2. खाने-पीने और रहन-सहन के खर्चों में बदलाव

परिवार के आकार के अलावा, रोजमर्रा के खर्चों को लेकर भी नया कैलकुलेशन दिया गया है:

कैलोरी इनटेक: इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) की ताजा सिफारिशों के आधार पर अब प्रति दिन 3,490 कैलोरी के हिसाब से भोजन और कपड़ों का खर्च तय करने की मांग है।

घर का खर्च: मकान के खर्च को पुराने फॉर्मूले के 3% से बढ़ाकर सीधे 7.5% करने का प्रस्ताव है।

बिजली-पानी: ईंधन, बिजली और पानी के खर्च को कुल लागत का 20% तय किया गया है।

स्किल डेवलपमेंट: बच्चों की पढ़ाई और कौशल विकास के खर्च को 25% पर आंका गया है।

सामाजिक जिम्मेदारी: शादी-ब्याह, त्योहार, मनोरंजन और सामाजिक दायित्वों के लिए अतिरिक्त 5% खर्च जोड़ा गया है।

कैसे निकल कर आया 3.833 का फिटमेंट फैक्टर?

इन सभी नए और संशोधित खर्चों को जोड़ने के बाद, NC-JCM ने गणना की है कि एक केंद्रीय कर्मचारी की न्यूनतम मासिक बेसिक सैलरी कम से कम ₹69,000 होनी चाहिए।

फिटमेंट फैक्टर का गणित: चूंकि अभी न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹18,000 है, इसलिए ₹18,000 से ₹69,000 तक पहुंचने के लिए 3.833 का फिटमेंट फैक्टर निकल कर आता है (यानी 18,000×3.833=69,000 लगभग)।

पेंशनर्स पर भी असर: कर्मचारी संगठनों ने सिफारिश की है कि पेंशन को रिवाइज करते समय भी इसी 3.833 के फिटमेंट फैक्टर का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

यह मांग हाल के महीनों में चर्चा में रहे 2 से 2.5 के फिटमेंट फैक्टर की तुलना में काफी अधिक है। हालांकि, सरकार ने अभी तक इस आंकड़े पर अपनी कोई सहमति या पसंदीदा नंबर नहीं बताया है।

आगे क्या होगा?

यह ध्यान रखना जरूरी है कि ₹69,000 की न्यूनतम सैलरी और 3.833 का फिटमेंट फैक्टर अभी केवल कर्मचारी यूनियनों द्वारा रखा गया एक प्रस्ताव है। 8वां वेतन आयोग अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करने से पहले सभी कर्मचारी संगठनों, विभिन्न मंत्रालयों और अन्य हितधारकों के अभ्यावेदनों की जांच करेगा। इसके बाद आयोग अपनी अंतिम सिफारिशें सरकार को सौंपेगा और अंतिम फैसला केंद्र सरकार का होगा।

अगर वेतन आयोग इस नए फॉर्मूले को आंशिक रूप से भी स्वीकार करता है, तो इसका असर केवल शुरुआती सैलरी पर नहीं बल्कि पूरे पे-मैट्रिक्स पर पड़ेगा। इसके चलते सभी स्तरों के कर्मचारियों की बेसिक सैलरी, भत्ते और पेंशन में भारी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

Central Government Employees DA: केंद्र सरकार के एंप्लॉयीज को 7वें पे कमीशन के तहत डीए मिलेगा या 8वें के तहत?

Central Government Employees DA: आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने में अभी वक्त लगेगा। इस बीच केंद्र सरकार के एंप्लॉयीज की नजरें डीए में अगले संशोधन पर लगी हैं, जिसका समय आ चुका है। लेबर ब्यूरो की तरफ से रिलीज नए इंडस्ट्रियल वर्कर्स के लिए कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स के डेटा से पता चलता है कि इस साल मई में इंडेक्स 150.8 पर चला गया। यह अप्रैल में 149.9 था। मई तक के इनफ्लेशन के डेटा के आधार पर जुलाई से डीए में करीब 3 फीसदी वृद्धि हो सकती है।

नया पे स्केल अगले साल के अंत तक होगा लागू

आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें अगले साल के अंत तक लागू होने की उम्मीद है। हालांकि, वेतन में वृद्धि जनवरी 2026 से लागू की जा सकती है। इसका मतलब है कि एंप्लॉयीज को 18-24 महीने का एरियर मिलेगा। जुलाई 2026 के डीए का कैलकुलेशन सातवें वेतन आयोग के तहत होने की उम्मीद है। इसका मतलब है कि इस साल जनवरी से जून पीरियड का डीए का कोई एरियर बकाया नहीं रहेगा।

नए पे स्केल लागू होने के बाद डीए का एरियर मिलेगा

एंप्लॉयी यूनियन के एक सूत्र ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर बताया कि जुलाई 2026 के बाद 7वें वेतन आयोग के तहत डीए में होने वाली वृद्धि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद एरियर्स हो जाएंगी। इसका मतलब है कि अगर एंप्लॉयीज का सातवें वेतन आयोग के तहत जुलाई 2026 में डीए बढ़ता है और बाद में 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होती हैं तो सरकार को पहले से हो चुके डीए के पेमेंट और रिवाइज्ड पे स्केल पर आधारित डीए के बीच के फर्क का पेमेंट बतौर एरियर करना होगा।

साल में दो बार होता है डीए में संशोधन

एक साल में दो बार केंद्र सरकार के एंप्लॉयीज के डीए में संशोधन होता है। यह 1 जनवरी और 1 जुलाई से लागू होता है। हालांकि, इसका ऐलान कुछ महीने की देर से होता है, लेकिन एंप्लॉयी को पहले की तारीख से रिवाइज्ड डीए का पेमेंट होता है। जुलाई 2026 के डीए का ऐलान इस साल अक्तूबर में दीवाली के करीब होने की उम्मीद है। अगर डीए 3 फीसदी बढ़ता है तो एंप्लॉयीज को मिल चुके डीए और 8वें वेतन आयोग की सिफारिश के आधार पर संसोधित डीए के बीच का फर्क बतौर एरियर मिलेगा।

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डीए 58 से बढ़कर 60 फीसदी हो चुका है

हालांकि, जब तक सरकार लागू होने की तारीख, फिटमेंट फैक्टर, पे मैट्रिक्स और डीए ट्रांजिशन फॉर्मूला का ऐलान नहीं कर देती है, एंप्लॉयीज को इस बारे में तस्वीर साफ होने का इंतजार करना होगा। बीते 12 महीनों के एवरेज सीपीआई-आईडब्ल्यू डेटा पर डीए का कैलकुलेशन होता है। इससे पहले केंद्र सरकार ने डीए 2 फीसदी बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इससे डीए 58 फीसदी से बढ़कर 60 फीसदी हो गया।