Market Outlook: इस हफ्ते बाजार में तेजी या गिरावट; फेड के फैसले, पश्चिम एशिया के हालात, कच्चे तेल समेत इन फैक्टर्स से होगा तय

15 सितंबर से शुरू हो रहे नए कारोबारी सप्ताह में शेयर बाजार की दिशा अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के ब्याज दर पर फैसले, भारत की महंगाई के आंकड़ों, कच्चे तेल की कीमत और पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों से तय होगी। सोमवार, 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी के अवसर पर शेयर बाजार बंद रहेंगे। बीते सप्ताह सेंसेक्स 1,733.67 अंक या 2.26 प्रतिशत टूटा। निफ्टी में 499.6 अंक या 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, रेलिगेयर ब्रोकिंग के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च) अजीत मिश्रा का कहना है कि वैश्विक स्तर पर अमेरिका-ईरान संघर्ष से जुड़े घटनाक्रम और ब्रेंट कच्चे तेल की चाल बाजार की दिशा तय करने में प्रमुख कारक बने रहेंगे। साथ ही इस सप्ताह मौद्रिक नीति पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले और ब्याज दरों के भविष्य के रुख पर उसकी टिप्पणी पर भी नजर रहेगी।

फेडरल ओपन मार्केट कमेटी की मीटिंग 15-16 सितंबर को होने वाली है। घरेलू मोर्चे पर मार्केट पार्टिसिपेंट्स की नजर अगस्त की थोक महंगाई और खुदरा महंगाई के आंकड़ों पर रहेगी। इसके अलावा बेरोजगारी और व्यापार के आंकड़े भी चर्चा में रहेंगे।

बरकरार हैं महंगाई से जुड़े जोखिम

रिसर्च एनालिस्ट फर्म HST Wealth के फाउंडर और CEO हरिसेल्वन राधाकृष्णन का कहना है कि अमेरिका में हेडलाइन खुदरा महंगाई में मासिक आधार पर 0.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। सालाना आधार पर यह 3.4 प्रतिशत पर बनी रही, जबकि कोर महंगाई पिछले महीने के मुकाबले 0.3 प्रतिशत बढ़ी, लेकिन साल-दर-साल आधार पर घटकर 2.4 प्रतिशत हो गई। अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों में यह मासिक बढ़ोतरी महंगाई से जुड़े जोखिमों को चर्चा में बनाए रखे हुए है। यह ग्लोबल बॉन्ड यील्ड और डॉलर पर दबाव बढ़ा सकती है, खासकर अगर फेडरल रिजर्व ने ज्यादा सख्त रुख अपनाया तो।

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भारत के लिए कच्चा तेल सबसे बड़ा बाहरी जोखिम

राधाकृष्णन ने आगे कहा कि भारत के लिए कच्चा तेल सबसे बड़ा बाहरी जोखिम बना हुआ है। यदि पश्चिम एशिया से कच्चे तेल की आपूर्ति में व्यवधान बढ़ता है और कीमतों में तेजी आती है, तो महंगाई का दबाव बढ़ सकता है, देश का आयात बिल बढ़ सकता है, रुपये पर दबाव आ सकता है और कंपनियों का मार्जिन घट सकता है।

पिछले हफ्ते बाजार पर काफी दबाव रहा। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया और महंगाई, वैश्विक ब्याज दरों और आर्थिक विकास को लेकर चिंता बढ़ गई। निफ्टी-50 ने लगातार 5वें हफ्ते लाल निशान में क्लोजिंग की।

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Central Government Employees DA: केंद्र सरकार के एंप्लॉयीज को 7वें पे कमीशन के तहत डीए मिलेगा या 8वें के तहत?

Central Government Employees DA: आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने में अभी वक्त लगेगा। इस बीच केंद्र सरकार के एंप्लॉयीज की नजरें डीए में अगले संशोधन पर लगी हैं, जिसका समय आ चुका है। लेबर ब्यूरो की तरफ से रिलीज नए इंडस्ट्रियल वर्कर्स के लिए कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स के डेटा से पता चलता है कि इस साल मई में इंडेक्स 150.8 पर चला गया। यह अप्रैल में 149.9 था। मई तक के इनफ्लेशन के डेटा के आधार पर जुलाई से डीए में करीब 3 फीसदी वृद्धि हो सकती है।

नया पे स्केल अगले साल के अंत तक होगा लागू

आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें अगले साल के अंत तक लागू होने की उम्मीद है। हालांकि, वेतन में वृद्धि जनवरी 2026 से लागू की जा सकती है। इसका मतलब है कि एंप्लॉयीज को 18-24 महीने का एरियर मिलेगा। जुलाई 2026 के डीए का कैलकुलेशन सातवें वेतन आयोग के तहत होने की उम्मीद है। इसका मतलब है कि इस साल जनवरी से जून पीरियड का डीए का कोई एरियर बकाया नहीं रहेगा।

नए पे स्केल लागू होने के बाद डीए का एरियर मिलेगा

एंप्लॉयी यूनियन के एक सूत्र ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर बताया कि जुलाई 2026 के बाद 7वें वेतन आयोग के तहत डीए में होने वाली वृद्धि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद एरियर्स हो जाएंगी। इसका मतलब है कि अगर एंप्लॉयीज का सातवें वेतन आयोग के तहत जुलाई 2026 में डीए बढ़ता है और बाद में 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होती हैं तो सरकार को पहले से हो चुके डीए के पेमेंट और रिवाइज्ड पे स्केल पर आधारित डीए के बीच के फर्क का पेमेंट बतौर एरियर करना होगा।

साल में दो बार होता है डीए में संशोधन

एक साल में दो बार केंद्र सरकार के एंप्लॉयीज के डीए में संशोधन होता है। यह 1 जनवरी और 1 जुलाई से लागू होता है। हालांकि, इसका ऐलान कुछ महीने की देर से होता है, लेकिन एंप्लॉयी को पहले की तारीख से रिवाइज्ड डीए का पेमेंट होता है। जुलाई 2026 के डीए का ऐलान इस साल अक्तूबर में दीवाली के करीब होने की उम्मीद है। अगर डीए 3 फीसदी बढ़ता है तो एंप्लॉयीज को मिल चुके डीए और 8वें वेतन आयोग की सिफारिश के आधार पर संसोधित डीए के बीच का फर्क बतौर एरियर मिलेगा।

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डीए 58 से बढ़कर 60 फीसदी हो चुका है

हालांकि, जब तक सरकार लागू होने की तारीख, फिटमेंट फैक्टर, पे मैट्रिक्स और डीए ट्रांजिशन फॉर्मूला का ऐलान नहीं कर देती है, एंप्लॉयीज को इस बारे में तस्वीर साफ होने का इंतजार करना होगा। बीते 12 महीनों के एवरेज सीपीआई-आईडब्ल्यू डेटा पर डीए का कैलकुलेशन होता है। इससे पहले केंद्र सरकार ने डीए 2 फीसदी बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इससे डीए 58 फीसदी से बढ़कर 60 फीसदी हो गया।