Crude Price: कच्चे तेल में उबाल, कीमत 3.7% बढ़कर एक बार फिर 110 डॉलर प्रति बैरल के करीब

कच्चे तेल की कीमत में फिर से तगड़ा उछाल है। शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत मई के बाद पहली बार 110 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गई। इसकी वजह मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव है, जिससे कच्चे तेल की आपूर्ति में जल्द राहत मिलने की उम्मीदें कम हो रही हैं। रॉयटर्स के मुताबिक, ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 3.94 डॉलर (3.7 प्रतिशत) बढ़कर 109.86 डॉलर पर बंद हुआ, जो 19 मई के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड फ्यूचर्स 3.44 डॉलर (3.5 प्रतिशत) बढ़कर 101.41 डॉलर पर बंद हुआ, जो 17 सितंबर के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है।

इस सप्ताह अब तक ब्रेंट क्रूड की कीमत 4.9 प्रतिशत और WTI की कीमत 10.4 प्रतिशत चढ़ी है। ब्लूमबर्ग के मुताबिक, ईरान समर्थित हूती विद्रोही सऊदी अरब पर लगातार मिसाइल और ड्रोन से हमले कर रहे हैं। वहीं रूस और यूक्रेन एक-दूसरे के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर निशाना बना रहे हैं।

इस साल 70 प्रतिशत चढ़ा कच्चा तेल

इस साल कच्चे तेल की कीमतों में 70 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी आई है, क्योंकि मध्य पूर्व और रूस में चल रहे युद्धों के कारण आपूर्ति बाधित हुई है। फिजिकल बाजारों में भी तंगी के संकेत मिल रहे हैं; डीजल जैसे रिफाइंड उत्पादों की कीमतों में और भी तेज उछाल आया है। यूरोप में इस कमोडिटी के लिए फ्यूचर्स की कीमतें इस साल दोगुनी से भी ज्यादा हो गई हैं।

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रूस से डीजल रिलीज के समझौते पर रोक की कोशिश

शुक्रवार को अमेरिकी सांसदों ने एक बिल पेश किया, जिसका मकसद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के बीच हुए उस समझौते को रोकना है, जिसके तहत रूस से कई सौ मिलियन बैरल डीजल रिलीज किया जाना था। समझौते पर रोक का कदम ऐसे किसी भी उपाय के खिलाफ व्यापक विरोध को दर्शाता है, जिससे रूस को अपने युद्ध कोष (War Chest) को मजबूत करने का मौका मिल सके।

अगर वैश्विक बाजारों से रूसी डीजल बाहर रहता है, तो अन्य जगहों की रिफाइनरियों को मांग पूरी करने के लिए ऑयल प्रोसेसिंग बढ़ानी पड़ेगी। हालांकि, ट्रंप ने फिर दोहराया है कि रूस डीजल जारी करने के समझौते पर अमल करेगा। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ब्लैक सी के आसपास लगातार तनाव बना हुआ है। रूस की रियाजान तेल रिफाइनरी पर हाल ही में हमला हुआ है। इसके कारण वहां कामकाज रोकना पड़ा। इस हमले ने डीजल रिलीज के समझौते के पूरा होने को लेकर संदेह और बढ़ा दिया है।

Commodity Market : 7 हफ्तों के निचले स्तरों पर पहुंचे सोने-चांदी के दाम, क्रूड में फिर बड़ा उछाल

Commodity Market : कारोबारी हफ्ते की शुरुआत सोने-चांदी के लिए भारी गिरावट के साथ हुई। सोने-चांदी की कीमतें 7 हफ्तों के निचले स्तर पर पहुंच गईं और 3% से ज्यादा की गिरावट दर्ज हुई। MCX पर सोना 1.48 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के नीचे चला गया है। वहीं, MCX पर चांदी 2.27 लाख रुपए प्रति किलो के नीचे आ गई है। वहीं इंटरनेशनल मार्केट में सोना $4200 के नीचे है। जबकि इंटरनेशनल मार्केट में चांदी $62 के नीचे दिख रही है। इस बीच ब्रेंट क्रूड का भाव $107 के पार निकल गया है। महंगे क्रूड से महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है। डॉलर इंडेक्स भी 101 के ऊपर कायम है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में भी तेजी जारी। महंगाई बढ़ने पर फेड दरें बढ़ा सकता है।

वेंचुरा में कमोडिटी और CRM के हेड, एन एस रामास्वामी का कहना है कि हाल की तेजी के बाद सोने की कीमतों में भारी गिरावट आई है। इसकी वजह अमेरिका में ट्रेजरी यील्ड में तेजी और फेडरल रिजर्व द्वारा और सख्ती बरतने की बढ़ती उम्मीदें हैं। अमेरिका की 10-साल की ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 5.2% के ऊपर पहुंच गई है,जो जून 2007 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। जबकि 30-साल की यील्ड बढ़कर लगभग 5.52% हो गई है, जो 2004 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। होर्मुज जलडमरूमध्य और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव महंगाई की चिंताओं को बढ़ा रहे हैं, जिससे डॉलर इंडेक्स मज़बूत हो रहा है और बॉन्ड यील्ड बढ़ रही है। इसका असर सोने की कीमतों पर पड़ रहा है। इस बीच अमेरिका के उम्मीद से बेहतर आर्थिक आंकड़ों ने ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की उम्मीदों को मज़बूत किया है। सितंबर में कंपोजिट PMI बढ़कर 58.4 हो गई है,जो पांच साल से ज़्यादा समय में सबसे तेज़ रफ़्तार है।

इस हफ़्ते बाजार की नजर कोर PCE महंगाई के आंकड़ों (जो फ़ेड का पसंदीदा महंगाई पैमाना है) और GDP के फाइनल आंकड़ों पर रहेगी। ये दोनों बुधवार को आने वाले हैं। वहीं,नॉन-फार्म पेरोल के आंकड़े शुक्रवार को आएंगे। इस हफ्ते अमेरिका और ईरान के बीच संभावित बातचीत पर भी सबकी नजर रहेगी।

आगे सोने की चाल महंगाई की चिंता और ग्लोबल सेंट्रल बैंकों के संभावित एक्शन पर निर्भर करेंगी। फिलहाल इसका ट्रेंड थोड़ा कमजोर बना हुआ है। MCX गोल्ड दिसंबर 149,427 के आसपास ट्रेड कर रहा है। इसके लिए तत्काल रेजिस्टेंस 151,000, 153,500 और 155,500 पर है, जबकि सपोर्ट 148,000, 145,000 और 140,000 पर दिख रहा है। COMEX गोल्ड दिसंबर 4,194 डॉलर के आसपास ट्रेड कर रहा है। इसके लिए सबसे नजदीकी रेजिस्टेंस 4,260 डॉलर और 4,350 डॉलर पर है,जबकि सपोर्ट 4,130, 4,050 और 4,000 डॉलर पर दिख रहा है।

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क्रूड की चाल पर एक नजर

अमेरिका-ईरान तनाव के बीच क्रूड में फिर बड़ा उछाल देखने को मिला है। आज कच्चे तेल के दाम करीब 3% चढ़े हैं। ब्रेंट $108 के पार चला गया तो WTI $94 के ऊपर पहुंच गया है। ईरान से बातचीत की उम्मीद के बावजूद तनाव कम नहीं हुआ है। ट्रंप ने ईरान का स्ट्रेट खोलने का प्रस्ताव ठुकरा दिया है और ईरान पर ज्यादा मांग रखने का आरोप लगाया है। उधर, ईरान ने US के साथ भीषण जंग के लिए तैयार रहने की बात कही है। बाजार को सप्लाई संकट गहराने की आशंका है।

इक्विटी मार्केट पर क्या होगा असर?

मास्टर कैपिटल सर्विसेज़ में चीफ़ रिसर्च ऑफ़िसर रवि सिंह का कहना है कि बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों,जियोपॉलिटिकल तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर बनी चिंताओं की वजह से भारी गिरावट आई है। साथ ही FPI की बिकवाली और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का बढ़ना भी बाजार पर भारी पड़ रहा है।

FPI की तरफ से लगातार हो रही निकासी भारतीय इक्विटी पर बिकवाली का दबाव बढ़ा सकती है। डॉलर की मांग के कारण रुपये की कमजोरी बढ़ सकती है, आयातित महंगाई का जोखिम बढ़ा सकता है और बाजार में कुल लिक्विडिटी और निवेशकों का भरोसा घट सकता है।

बैंक,तेल मार्केटिंग कंपनियां,पेंट,टायर,एयरलाइंस और कच्चे तेल से जुड़े अन्य सेक्टर पर असर पड़ सकता है। डिफेंसिव,फार्मास्यूटिकल्स,हेल्थकेयर और FMCG सेक्टर तुलनात्मक रूप मजबूती दिखा सकते हैं।

निवेशकों को कच्चे तेल की कीमतों,ईरान-अमेरिका के बीच बन रही स्थिति,होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी खबरों,अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड,FPI फ्लो,रुपये की चाल,ग्लोबल मार्केट,घरेलू महंगाई और आने वाली कॉर्पोरेट अर्निंग्स पर नजर रखनी चाहिए।

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Market Outlook: इस हफ्ते बाजार में तेजी या गिरावट; फेड के फैसले, पश्चिम एशिया के हालात, कच्चे तेल समेत इन फैक्टर्स से होगा तय

15 सितंबर से शुरू हो रहे नए कारोबारी सप्ताह में शेयर बाजार की दिशा अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के ब्याज दर पर फैसले, भारत की महंगाई के आंकड़ों, कच्चे तेल की कीमत और पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों से तय होगी। सोमवार, 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी के अवसर पर शेयर बाजार बंद रहेंगे। बीते सप्ताह सेंसेक्स 1,733.67 अंक या 2.26 प्रतिशत टूटा। निफ्टी में 499.6 अंक या 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, रेलिगेयर ब्रोकिंग के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च) अजीत मिश्रा का कहना है कि वैश्विक स्तर पर अमेरिका-ईरान संघर्ष से जुड़े घटनाक्रम और ब्रेंट कच्चे तेल की चाल बाजार की दिशा तय करने में प्रमुख कारक बने रहेंगे। साथ ही इस सप्ताह मौद्रिक नीति पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले और ब्याज दरों के भविष्य के रुख पर उसकी टिप्पणी पर भी नजर रहेगी।

फेडरल ओपन मार्केट कमेटी की मीटिंग 15-16 सितंबर को होने वाली है। घरेलू मोर्चे पर मार्केट पार्टिसिपेंट्स की नजर अगस्त की थोक महंगाई और खुदरा महंगाई के आंकड़ों पर रहेगी। इसके अलावा बेरोजगारी और व्यापार के आंकड़े भी चर्चा में रहेंगे।

बरकरार हैं महंगाई से जुड़े जोखिम

रिसर्च एनालिस्ट फर्म HST Wealth के फाउंडर और CEO हरिसेल्वन राधाकृष्णन का कहना है कि अमेरिका में हेडलाइन खुदरा महंगाई में मासिक आधार पर 0.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। सालाना आधार पर यह 3.4 प्रतिशत पर बनी रही, जबकि कोर महंगाई पिछले महीने के मुकाबले 0.3 प्रतिशत बढ़ी, लेकिन साल-दर-साल आधार पर घटकर 2.4 प्रतिशत हो गई। अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों में यह मासिक बढ़ोतरी महंगाई से जुड़े जोखिमों को चर्चा में बनाए रखे हुए है। यह ग्लोबल बॉन्ड यील्ड और डॉलर पर दबाव बढ़ा सकती है, खासकर अगर फेडरल रिजर्व ने ज्यादा सख्त रुख अपनाया तो।

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भारत के लिए कच्चा तेल सबसे बड़ा बाहरी जोखिम

राधाकृष्णन ने आगे कहा कि भारत के लिए कच्चा तेल सबसे बड़ा बाहरी जोखिम बना हुआ है। यदि पश्चिम एशिया से कच्चे तेल की आपूर्ति में व्यवधान बढ़ता है और कीमतों में तेजी आती है, तो महंगाई का दबाव बढ़ सकता है, देश का आयात बिल बढ़ सकता है, रुपये पर दबाव आ सकता है और कंपनियों का मार्जिन घट सकता है।

पिछले हफ्ते बाजार पर काफी दबाव रहा। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया और महंगाई, वैश्विक ब्याज दरों और आर्थिक विकास को लेकर चिंता बढ़ गई। निफ्टी-50 ने लगातार 5वें हफ्ते लाल निशान में क्लोजिंग की।

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gift Nifty Trend : सेंसेक्स और निफ्टी के लिए GIFT निफ्टी से कमजोर संकेत, तेल की कीमतों में तेजी से ठंडा पड़ा जोश

GIFT Nifty Trend : सोमवार को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी के हल्की गिरावट के साथ खुलने की संभावना है। GIFT निफ्टी कमजोर शुरुआत के संकेत दे रहा है। एशियाई बाजारों में अच्छी बढ़त के बावजूद,कच्चे तेल की कीमतें 96 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने और अमेरिका-ईरान के बीच जारी तनाव के कारण निवेशक सतर्क बने हुए हैं। अमेरिका की मजबूत जॉब्स रिपोर्ट ने इस महीने फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदें भी बढ़ा दी हैं। इससे ग्लोबल इक्विटी मार्केट में अनिश्चितता और बढ़ गई है।

फिलहाल GIFT निफ्टी 47 अंक या 0.2 प्रतिशत गिरकर 23,963 पर ट्रेड कर रहा है। उधर शुक्रवार को मेटल,ऑयल एंड गैस और प्राइवेट बैंकिंग शेयरों में खरीदारी के दम पर भारतीय शेयर बाजार में लगातार चार दिनों से जारी गिरावट का सिलसिला थम गया था। कारोबारी सत्र के अंत में सेंसेक्स 362.57 अंक या 0.48 प्रतिशत बढ़कर 76,515.43 पर और निफ्टी 24.25 अंक या 0.10 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ 23,897.70 पर बंद हुआ था।

आज बाजार खुलने से पहले ग्लोबल माहौल मिला-जुला है। अमेरिका में मजबूत जॉब डेटा के बाद एशियाई शेयरों में जबरदस्त तेज़ी आई है,लेकिन इसी रिपोर्ट ने अमेरिकी फ़ेडरल रिज़र्व द्वारा ब्याज दरें और बढ़ाने की उम्मीदों को भी मज़बूत किया है। रॉयटर्स के मुताबिक बाजार अब 16 सितंबर की बैठक में फ़ेडरल रिज़र्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की 58 प्रतिशत संभावना मानकर चल रहे हैं,जबकि अक्टूबर तक ऐसा होने की संभावना 70 प्रतिशत है।

एशियाई बाज़ारों में मिला-जुला कारोबार

सोमवार को एशियाई शेयर बाजारों में तेजी है। मज़बूत अमेरिकी जॉब्स रिपोर्ट को ग्लोबल ग्रोथ के लिए अच्छा माना जा रहा है भले ही इससे ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना बढ़ गई है। वहीं,खाड़ी में अमेरिका और ईरान द्वारा जहाजों पर हमले के बाद तेल की कीमतों में हल्की बढ़त हुई। तेहरान ने कहा है कि वह आने वाले दिनों में स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ के बाहर एक प्रतिबंधित क्षेत्र की घोषणा करेगा। यह कदम अमेरिकी सेना द्वारा ईरान के तीन टैंकरों पर हमले और ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स द्वारा अमेरिकी नौसेना के दो जहाजों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागने के बाद उठाया गया है।

जापान के निक्केई में 2 प्रतिशत की रिकवरी हुई है। जबकि पिछले हफ़्ते इसमें इतनी ही गिरावट आई थी। वहीं,दक्षिण कोरिया के कोस्पी में 3 प्रतिशत का उछाल आया है। जापान को छोड़कर एशिया-पैसिफिक शेयरों के MSCI के सबसे बड़े इंडेक्स में 0.9 प्रतिशत की बढ़त हुई है।

अमेरिका के बाजारों में कमजोरी

शुक्रवार को मजबूत जॉब्स रिपोर्ट के बाद US शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुए। डाओ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 0.51 प्रतिशत गिरकर 53,413.60 पर, S&P 500 0.38 प्रतिशत गिरकर 7,718.41 पर और नैस्डैक कंपोजिट 0.29 प्रतिशत गिरकर 26,506.99 पर बंद हुए। ब्याज दरों बढ़ने की आशंका ने बाजार पर अपना असर दिखाया।

अमेरिका-ईरान के बीच तनाव बढ़ने से ब्रेंट क्रूड $96 के पार

सोमवार को खाड़ी में अमेरिका और ईरान द्वारा जहाजों पर हमले के बाद कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई। पिछले हफ्ते लगभग 10 प्रतिशत की बढ़त के बाद, ब्रेंट क्रूड 0.2 प्रतिशत बढ़कर 96.45 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट 0.4 ​​प्रतिशत बढ़कर 91.85 डॉलर प्रति बैरल पर दिख रहा है।

ईरान ने कहा है कि वह आने वाले दिनों में होर्मुज़ जलडमरूमध्य के बाहर एक प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित करेगा। यह घोषणा अमेरिकी सेना द्वारा ईरान के तीन टैंकरों पर हमला करने और ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स द्वारा अमेरिकी नौसेना के दो जहाजों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागने के बाद की गई है।

4 सितंबर को FIIs ने 3112 करोड़ रुपये के शेयर बेचे

NSE के डेटा के मुताबिक शुक्रवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने 3,111.94 करोड़ रुपये के भारतीय शेयर बेचे जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने 8,930.12 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

निफ़्टी का टेक्निकल आउटलुक

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर का मानना ​​है कि निफ़्टी के लिए 24,000-24,200 का दायरा सबसे नजदीकी रेजिस्टेंस ज़ोन बना रहेगा। जबकि 23,800 अहम सपोर्ट लेवल है। अगर निफ़्टी लगातार 24,200 के ऊपर बना रहता है,तो शॉर्ट-टर्म स्ट्रक्चर में सुधार हो सकता है। वहीं,23,800 के नीचे जाने पर इंडेक्स 23,600 के स्तर तक गिर सकता है।

 

Stock Market LIVE Updates: GIFT निफ्ट से मिल रहे सपाट शुरुआत के संकेत,अमेरिकी बाजार गिरे,एशियाई बाजारों में तेजी

 

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Market Outlook: इस हफ्ते किस ओर मुड़ेगा बाजार; पश्चिम एशिया के हालात, कच्चे तेल की कीमत समेत इन फैक्टर्स से होगा तय

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और अमेरिका के महंगाई के आंकड़े इस सप्ताह भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। इसके अलावा विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और वैश्विक बाजारों की चाल भी बाजार की दिशा को प्रभावित करेगी। पिछले सप्ताह सेंसेक्स 749.08 अंक या 0.96 प्रतिशत के नुकसान में रहा। वहीं निफ्टी 277.95 अंक या 1.14 प्रतिशत नीचे आया। शुक्रवार, 4 सितंबर को सेंसेक्स 362.57 अंक चढ़कर 76,515.43 पर और निफ्टी 24.25 अंकों की बढ़त के साथ 23,897.70 पर बंद हुआ था।

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, रेलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च) अजीत मिश्रा का कहना है, ‘‘इस सप्ताह बाजार वैश्विक मौद्रिक नीति, कच्चे तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों को लेकर संवेदनशील रह सकता है। अमेरिका के उम्मीद से बेहतर रोजगार आंकड़ों के बाद अब निवेशकों की नजर फेडरल रिजर्व की सितंबर में होने वाली मौद्रिक नीति बैठक को लेकर बदलती उम्मीदों पर रहेगी।’’

घरेलू मोर्चे पर विदेशी संस्थागत निवेशकों के रुख, रुपये की चाल, कच्चे तेल की कीमतों और घरेलू बाजार में नकदी की स्थिति पर नजर रहेगी। मिश्रा के मुताबिक, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़े घटनाक्रम भी महत्वपूर्ण रहेंगे, क्योंकि इनका भारत की महंगाई, बाहरी संतुलन और कंपनियों की प्रॉफिटेबिलिटी पर सीधा असर पड़ सकता है।

बीते सप्ताह 8 प्रतिशत महंगा हुआ ब्रेंट क्रूड

एनरिच मनी के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) पोनमुडी आर का कहना है कि पिछले सप्ताह ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत में 8 प्रतिशत से अधिक और वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) की कीमत में 9 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई। अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर चिंताओं ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में भू-राजनीतिक जोखिम बढ़ा दिया है। नए हफ्ते में भी तेल की कीमतों पर फोकस रहेगा। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की ऊंची कीमतें बाजार की धारणा पर लगातार दबाव डाल सकती हैं।

बाजार की नजर अमेरिका के आने वाले महंगाई आंकड़ों पर भी होगी। ये आंकड़े फेडरल रिजर्व की पॉलिसी और ग्लोबल मार्केट के सेंटीमेंट को लेकर उम्मीदें तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। अमेरिकी बॉन्ड पर यील्ड भी महंगाई के आंकड़ों से प्रभावित होगी।

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FPI फिर बने सेलर

भारतीय शेयर बाजार में लगातार 2 महीने बायर रहने के बाद विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) सितंबर के पहले सप्ताह में फिर से सेलर बन गए। इस दौरान उन्होंने भारतीय शेयर बाजार से 7,443 करोड़ रुपये निकाले। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और डॉलर के मजबूत होने से विदेशी निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता प्रभावित हुई है। FPI ने इससे पहले जुलाई में भारतीय शेयरों में 20,200 करोड़ रुपये और अगस्त में 30,919 करोड़ रुपये का निवेश किया था। इससे पहले मार्च से जून तक लगातार 4 महीने सेलिंग की थी।

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Market Trend : बैंक, NBFCs, ऑटो और रियल एस्टेट पर दबाव बने रहने की उम्मीद, चुनिंदा IT शेयर कर सकते हैं आउटपरफॉर्म

Market Trend : US-ईरान टेंशन,कच्चे तेल में उछाल और बढ़ती बॉन्ड यील्ड से बाजार डर गया है। निफ्टी करीब दो सौ प्वाइंट टूटकर 23850 के नीचे है। मिडकैप-स्मॉलकैप शेयरों में बिकवाली का ज्यादा प्रेशर है। हालांकि बैंक निफ्टी की रिकवरी की कोशिश हो रही है। इधर क्रूड 96 डॉलर के ऊपर है तो इंडिया VIX 4 परसेंट उछला है। आज ऑटो शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली आई है। ऑटो इंडेक्स 2 परसेंट से ज्यादा नीचे आया है। आयशर, बजाज ऑटो निफ्टी के टॉप लूजर हैं। वहीं रियल्टी, IT, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और डिफेंस में भी कमजोरी है। लेकिन चुनिंदा PSU बैंकों में खरीदारी दिख रही है।

बाजार: आज कहां हो नजर

बाजार पर अपनी राय साझा करते हुए सीएनबीसी-आवाज के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल ने कहा कि आज रेट सेंसिटिव सेक्टर्स पर काफी दबाव हो सकता है। बैंक, NBFCs, ऑटो और रियल एस्टेट पर दबाव दिख सकता है। सबसे ज्यादा दबाव गोल्ड फाइनेंस शेयरों पर रह सकता है। पिछले 2-3 दिनों से आवाज़ पर मणप्पुरम, मुथूट फाइनेंस पर निगेटिव नजरिया रहा है। हालांकि निवेशकों के लिए खरीदारी के मौके भी हैं। हिंद जिंक और बाकी मेटल शेयरों में भी काफी दबाव दिख सकता है। श्रीराम फाइनेंस, चोला फाइनेंस जैसे ऑटो फाइनेंस शेयर भी गिर सकते हैं। रियल एस्टेट और हाउसिंग फाइनेंस शेयरों में भी दबाव संभव है।

चुनिंदा IT शेयर आज Outperform कर सकते हैं। कल IT शेयरों ने अच्छी रिकवरी दिखाई है। डॉलर और कच्चे तेल का ऊपर आना और कोस्पी का नीचे आना IT के लिए एल्गो पॉजिटिव है। आखिर में, India VIX अपनी Complacency से बाहर आ रहा है। गिरते बाजार में VIX का ना बढ़ना ठीक संकेत नहीं था।

FIIs लगातार शॉर्टिंग कर रहे हैं और उनका ट्रैक रिकॉर्ड बढ़िया है। इस तरह की शॉर्टिंग वो आमतौर पर 500-1000 अंकों के लिए करते हैं। 24,600 से हम पहले ही 24,000 तक आ चुके हैं। 23,950 नहीं बचा तो 23,600-23,800 भी संभव है। 24,200 के ऊपर निकले तभी कोई शॉर्ट कवरिंग संभव है।

निफ्टी पर रणनीति

अनुज सिंघल ने कहा कि निफ्टी के लिए सबसे अहम सपोर्ट 23,950-24,000 पर है। इसके नीचे फिसले तो अगला बड़ा सपोर्ट सिर्फ 23,800 पर होगा। निफ्टी के लिए पहला रजिस्टेंस 24,100-24,150 पर और बड़ा रजिस्टेंस 24,200-24,250 पर है। 24,000-24,050 के रिजेक्शन पर बिकवाली करें। सख्त SL 24,100 पर रखें। खरीदारी तभी करें जब 23,900-23,950 को बचाए,सख्त SL 23,875 पर होना चाहिए।

बैंक निफ्टी पर रणनीति

अनुज सिंघल ने कहा कि बैंक निफ्टी कल ठीक 200 DMA पर बंद हुआ। बैंक निफ्टी में अब तक 57,000-58,000 की रेंज रही है। आज 57,000 टूटने का रिस्क रहेगा। 57,400-57,500 के रिजेक्शन पर बिकवाली करें,SL 57,600 पर रखें। खरीदारी तभी करें जब बैंक निफ्टी 57,900-58,000 को बचाए, SL 57,800 पर सेट करें।

 

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GDP Growth: जून तिमाही में 7.8% रही भारत की जीडीपी ग्रोथ, सर्विसेज सेक्टर की ग्रोथ सबसे ज्यादा

GDP Growth: इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन अच्छा रहा है। जून तिमाही में जीडीपी की ग्रोथ 7.8 फीसदी रही। यह एनालिस्ट्स और इकोनॉमिस्ट्स के अनुमान से ज्यादा है। खास बात यह है कि जून तिमाही में भारत की जीडीपी ग्रोथ तब 7.8 फीसदी रही, जब वैश्विक स्थितियां काफी चैलेंजिंग थीं।

मार्च तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 8.6 फीसदी

इस साल मार्च तिमाही में भारत में जीडीपी ग्रोथ 8.6 फीसदी थी। मिनिस्ट्री ऑफ स्टैटिस्टिक्स एंड प्रोग्राम इंप्लिमेंटेशन (MoSPI) ने 31 अगस्त को जून तिमाही के जीडीपी के डेटा जारी किए। जीडीपी की ग्रोथ अनुमान से ज्यादा रही। मनीकंट्रोल के पोल में इकोनॉमिस्ट्स ने जून तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 7.3 फीसदी रहने का अनुमान जताया था।

जून तिमाही में जीवीए 8.2 फीसदी रहा

जून तिमाही में ग्रॉस वैल्यू एडेड (GVA) 8.2 फीसदी रहा। मार्च तिमाही में यह 8.7 फीसदी था। जीवीए का मतलब इकोनॉमी में उत्पादित गुड्स और सर्विसेज की कुल वैल्यू से है। इसमें नेट इनडायरेक्ट टैक्स शामिल नहीं होता है। जून तिमाही में अर्थव्यवस्था के शानदार प्रदर्शन में सर्विसेज और इनवेस्टमेंट का बड़ा हाथ है।

पहली तिमाही में सर्विसेज सेक्टर की ग्रोथ सबसे ज्यादा

जून तिमाही में सर्विसेज का प्रदर्शन सबसे अच्छा रहा। इसकी ग्रोथ 10 फीसदी रही। एक साल पहले की समान अवधि में सर्विसेज सेक्टर की ग्रोथ 8 फीसदी थी। मैन्युफैक्चरिंग की ग्रोथ 9.2 फीसदी रही। कंस्ट्रक्शन सेक्टर की ग्रोथ 7.7 फीसदी रही। ट्रेड, होटल्स, ट्रांसपोर्ट, कम्युनिकेशन और ब्रॉडकास्टिंग से संबंधित सर्विसेज सेगमेंट की ग्रोथ 8.5 फीसदी रही।

पहली तीमाही में मध्यपूर्व में लड़ाई का असर इकोनॉमी पर

जून तिमाही का मतलब अप्रैल, मई और जून के महीनों से है। अमेरिका और ईरान के बीच 28 फरवरी को लड़ाई शुरू हुई थी। जून तिमाही में ज्यादातर समय ईरान को अमेरिकी हमले का सामना करना पड़ा। ईरान ने कई खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी हमले किए।

क्रूड ऑयल  की कीमतें काफी समय तक 100 डॉलर से ऊपर रहीं

इस दौरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से क्रूड ऑयल सहित दूसरी कमोडिटीज की सप्लाई पर काफी ज्यादा असर पड़ा। क्रूड की कीमतें आसमान में पहुंच गईं। लेकिन, सरकार के कैपिटल एक्सपेंडिचर जारी रखने से आर्थिक गतिविधियों को काफी सपोर्ट मिला।

प्राइवेट फाइनल कंजम्प्शन एक्सपेंडिचर 7.1 फीसदी बढ़ा 

जून तिमाही में प्राइवेट फाइनल कंजम्प्शन एक्सपेंडिचर 7.1 फीसदी बढ़ा। इससे परिवारों में होने वाली खपत का पता चलता है। ग्रॉस फिक्स्ड कैपिटल फॉर्मेशन 11.9 फीसदी बढ़ा, जबकि सरकार का फाइनल कंजम्प्शन एक्सपेंडिचर 4.3 फीसदी बढ़ा। जून तिमाही के जीडीपी ग्रोथ के डेटा ऐसे वक्त आए हैं, जब इनफ्लशन से जुड़े रिस्क बढ़ रहा है।

FY27 में 5 फीसदी रह सकता है रिटेल इनफ्लेशन 

पिछले हफ्ते मनीकंट्रोल के पोल में शामिल इकोनॉमिस्ट्स का यह मानना था कि FY27 में रिटेल इनफ्लेशन 5 फीसदी रह सकता है। इसकी रेंज 4.7 से 5.2 फीसदी रहने का अनुमान जताया गया। इसकी कई वजहें हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से ऑयल की कीमतें हाई लेवल पर बनी हुई हैं। देश में मानसून की बारिश एक समान नहीं रही है। इसका असर फसल उत्पादन पर पड़ेगा।

Market Outlook: इस हफ्ते कैसी रहेगी शेयर बाजार की चाल; कच्चे तेल की कीमत, पश्चिम एशिया के हालात समेत इन फैक्टर्स से होगा तय

नए शुरू हो रहे सप्ताह में भारतीय शेयर बाजार की दिशा कच्चे तेल की कीमत और अमेरिका-ईरान संघर्ष से जुड़े घटनाक्रमों जैसे प्रमुख फैक्टर्स से तय होगी। पिछले सप्ताह सेंसेक्स में 468.42 अंकों की गिरावट रही। निफ्टी 114 अंक फिसला। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, रेलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के सीनियर वाइस प्रेसिडेंड (रिसर्च) अजीत मिश्रा का कहना है कि निवेशक जैक्सन होल आर्थिक संगोष्ठी (Jackson Hole Symposium) पर करीबी नजर रखेंगे, खासकर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के प्रमुख की टिप्पणियों पर। इससे बेंचमार्क ब्याज दरों की आगे की दिशा के संकेत मिलने की उम्मीद है।

आगे कहा कि अमेरिका के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के अनुमान, ड्यूरेबल गुड्स के ऑर्डर और कंज्यूमर कॉन्फिडेंस से भी अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूती और फेडरल रिजर्व की नीतिगत दिशा के बारे में महत्वपूर्ण संकेत मिलेंगे। भारत को लेकर बात करें तो निवेशकों की नजर रुपये की चाल, विदेशी संस्थागत निवेशकों के रुख और घरेलू बाजार में नकदी की स्थिति पर रहेगी।

छाए रहेंगे 3 प्रमुख मुद्दे

ऑनलाइन ट्रेडिंग एंड वेल्थ टेक फर्म एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर का कहना है कि वैश्विक बाजारों में इस सप्ताह 3 प्रमुख मुद्दे छाए रहेंगे। इनमें अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति की दिशा, एनवीडिया के तिमाही नतीजे और अमेरिका-ईरान के बीच जारी तनाव शामिल हैं। लंबी अवधि के अमेरिकी बॉन्ड पर यील्ड में उतार-चढ़ाव के बीच जैक्सन होल संगोष्ठी में फेड के प्रमुख केविन वॉर्श के संबोधन पर करीबी नजर रहेगी। सितंबर में होने वाली पॉलिसी मीटिंग से पहले निवेशक संकेत तलाशेंगे कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक लगातार बनी हुई महंगाई के जोखिमों और श्रम बाजार के नरम पड़ने के संकेतों को कैसे तौल रहा है।

पोनमुडी ने आगे कहा कि कच्चे तेल की कीमतें भी एक बड़ा बाहरी जोखिम बनी हुई हैं। उनके मुताबिक, ‘‘अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिन का समझौता किसी स्थायी समाधान के बिना समाप्त हो गया है। इससे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक बार फिर जारी तनाव का केंद्र बन गया है और क्षेत्र में ऊर्जा की सामान्य आपूर्ति प्रभावित हुई है।’’

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FPI की गतिविधियां

नए सप्ताह में निवेशक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के रुख पर भी नजर रखेंगे। इन निवेशकों ने अगस्त में भारतीय शेयर बाजार में अपनी खरीद तेज की है। कंपनियों के बेहतर तिमाही नतीजों, रुपये की स्थिरता और बाजार की बेहतर संभावनाओं से निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है। FPI ने अगस्त में अब तक भारतीय शेयर बाजार में 23,544 करोड़ रुपये डाले हैं। इससे पहले जुलाई में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों में 20,200 करोड़ रुपये का निवेश किया था। जुलाई से पहले लगातार 4 महीने सेलिंग की थी।

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के रिसर्च हेड (वेल्थ मैनेजमेंट) सिद्धार्थ खेमका का मानना है कि निफ्टी में बीते लगातार दो सप्ताह गिरावट रही। अब भारतीय शेयर बाजार में इस सप्ताह कुछ स्थिरता आ सकती है और निकट अवधि में मामूली रिकवरी की उम्मीद है। बाजार की निगाह ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतों पर भी रहेगी, जो 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं। इसके अलावा वैश्विक घटनाक्रम भी महत्वपूर्ण रहेंगे।

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Stock Market Fall: सेंसेक्स 332 अंक गिरकर बंद; लगातार 5वें दिन लाल, निवेशकों के ₹91511 करोड़ स्वाहा

भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार, 24 जुलाई को लगातार 5वें कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुए। दिन में सेंसेक्स ने 917 अंकों की तगड़ी मार झेली और 75,474.43 के लो तक चला गया। निफ्टी भी 263 अंक तक टूटकर 23,606.30 के लो तक गया। हालांकि बाद में रिकवरी हुई। सेंसेक्स 331.62 अंकों की गिरावट के साथ 76,059.77 पर और निफ्टी 102.15 अंकों की गिरावट के साथ 23,767.45 पर बंद हुआ।

इस बीच BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 91,510.68 करोड़ रुपये घट गया। गुरुवार, 23 जुलाई को शेयर मार्केट बंद होने पर BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 4,76,60,985.926 करोड़ रुपये रहा था। शुक्रवार को मार्केट बंद होने पर यह घटकर 4,75,69,475.24 करोड़ रुपये हो गया।

NSE पर एचसीएल टेक्नोलोजिज, सिप्ला, विप्रो, आईटीसी, HDFC लाइफ इंश्योरेंस कंपनी टॉप गेनर्स रहे। वहीं इटर्नल, महिंद्रा एंड महिंद्रा, बजाज फाइनेंस, श्रीराम फाइनेंस, बजाज ऑटो टॉप लूजर्स रहे।

एक दिन पहले कैसी रही थी चाल

पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण कच्चे तेल के दाम में उछाल से गुरुवार को सेंसेक्स 363.66 अंक या 0.47 प्रतिशत टूटकर 76,391.39 पर बंद हुआ था। निफ्टी 126.65 अंक या 0.53 प्रतिशत टूटकर 23,869.60 अंक पर बंद हुआ था।

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रुपये की चाल

शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में रुपया, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 22 पैसे मजबूत होकर 96.51 पर पहुंच गया। बाद में यह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 18 पैसे मजबूत होकर 96.55 (अस्थायी) पर बंद हुआ। खबरों के मुताबिक, इसमें रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की संभावित दखलंदाजी का भी हाथ रहा, जिसके जरिए कच्चे तेल की कीमत में उछाल के बीच रुपये में और गिरावट को रोकने की कोशिश की गई। इसके अलावा कमजोर अमेरिकी डॉलर ने भी घरेलू करेंसी को कुछ सहारा दिया। रुपया गुरुवार को 20 पैसे की गिरावट के साथ 96.73 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।

एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कॉस्पी 6 प्रतिशत लुढ़क गया। जापान का निक्केई 225, चीन का एसएसई कंपोजिट और हांगकांग का हैंगसेंग भी गिरावट में हैं। अमेरिकी शेयर बाजार गुरुवार को गिरावट के साथ बंद हुए थे।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।