Market Outlook: इस हफ्ते कैसी रहेगी शेयर बाजार की चाल; कच्चे तेल की कीमत, पश्चिम एशिया के हालात समेत इन फैक्टर्स से होगा तय

नए शुरू हो रहे सप्ताह में भारतीय शेयर बाजार की दिशा कच्चे तेल की कीमत और अमेरिका-ईरान संघर्ष से जुड़े घटनाक्रमों जैसे प्रमुख फैक्टर्स से तय होगी। पिछले सप्ताह सेंसेक्स में 468.42 अंकों की गिरावट रही। निफ्टी 114 अंक फिसला। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, रेलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के सीनियर वाइस प्रेसिडेंड (रिसर्च) अजीत मिश्रा का कहना है कि निवेशक जैक्सन होल आर्थिक संगोष्ठी (Jackson Hole Symposium) पर करीबी नजर रखेंगे, खासकर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के प्रमुख की टिप्पणियों पर। इससे बेंचमार्क ब्याज दरों की आगे की दिशा के संकेत मिलने की उम्मीद है।

आगे कहा कि अमेरिका के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के अनुमान, ड्यूरेबल गुड्स के ऑर्डर और कंज्यूमर कॉन्फिडेंस से भी अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूती और फेडरल रिजर्व की नीतिगत दिशा के बारे में महत्वपूर्ण संकेत मिलेंगे। भारत को लेकर बात करें तो निवेशकों की नजर रुपये की चाल, विदेशी संस्थागत निवेशकों के रुख और घरेलू बाजार में नकदी की स्थिति पर रहेगी।

छाए रहेंगे 3 प्रमुख मुद्दे

ऑनलाइन ट्रेडिंग एंड वेल्थ टेक फर्म एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर का कहना है कि वैश्विक बाजारों में इस सप्ताह 3 प्रमुख मुद्दे छाए रहेंगे। इनमें अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति की दिशा, एनवीडिया के तिमाही नतीजे और अमेरिका-ईरान के बीच जारी तनाव शामिल हैं। लंबी अवधि के अमेरिकी बॉन्ड पर यील्ड में उतार-चढ़ाव के बीच जैक्सन होल संगोष्ठी में फेड के प्रमुख केविन वॉर्श के संबोधन पर करीबी नजर रहेगी। सितंबर में होने वाली पॉलिसी मीटिंग से पहले निवेशक संकेत तलाशेंगे कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक लगातार बनी हुई महंगाई के जोखिमों और श्रम बाजार के नरम पड़ने के संकेतों को कैसे तौल रहा है।

पोनमुडी ने आगे कहा कि कच्चे तेल की कीमतें भी एक बड़ा बाहरी जोखिम बनी हुई हैं। उनके मुताबिक, ‘‘अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिन का समझौता किसी स्थायी समाधान के बिना समाप्त हो गया है। इससे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक बार फिर जारी तनाव का केंद्र बन गया है और क्षेत्र में ऊर्जा की सामान्य आपूर्ति प्रभावित हुई है।’’

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FPI की गतिविधियां

नए सप्ताह में निवेशक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के रुख पर भी नजर रखेंगे। इन निवेशकों ने अगस्त में भारतीय शेयर बाजार में अपनी खरीद तेज की है। कंपनियों के बेहतर तिमाही नतीजों, रुपये की स्थिरता और बाजार की बेहतर संभावनाओं से निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है। FPI ने अगस्त में अब तक भारतीय शेयर बाजार में 23,544 करोड़ रुपये डाले हैं। इससे पहले जुलाई में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों में 20,200 करोड़ रुपये का निवेश किया था। जुलाई से पहले लगातार 4 महीने सेलिंग की थी।

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के रिसर्च हेड (वेल्थ मैनेजमेंट) सिद्धार्थ खेमका का मानना है कि निफ्टी में बीते लगातार दो सप्ताह गिरावट रही। अब भारतीय शेयर बाजार में इस सप्ताह कुछ स्थिरता आ सकती है और निकट अवधि में मामूली रिकवरी की उम्मीद है। बाजार की निगाह ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतों पर भी रहेगी, जो 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं। इसके अलावा वैश्विक घटनाक्रम भी महत्वपूर्ण रहेंगे।

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‘जहाज पर हमला किया तो पुल या पावर प्लांट उड़ा देंगे’, ईरान को ट्रंप की कड़ी चेतावनी

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को धमकी दी कि अगर ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में किसी जहाज पर हमला करता है, तो अमेरिका हर बार ईरान के किसी पुल या पावर प्लांट को निशाना बनाएगा। इसमें राजधानी तेहरान में मौजूद ठिकाने भी शामिल हो सकते हैं।

ट्रंप ने यह धमकी अपने ‘ट्रुथ सोशल’ पोस्ट के जरिए दी। इससे अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ गया है, जो पहले से ही संघर्ष विराम टूटने और हाल ही में तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद बढ़ा हुआ था। बता दें कि ट्रंप को बुधवार को ही इन सैनिकों के शव मिलने वाले थे।

ट्रंप ने अपनी पोस्ट में लिखा था, “अब से, जब भी ईरान ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ में किसी जहाज पर मिसाइल, रॉकेट, ड्रोन या किसी अन्य हथियार से हमला करेगा, तो अमेरिका उसके एक पुल या पावर प्लांट पर बम गिराकर उसे नष्ट कर देगा।”

ट्रंप ने साफ तौर पर कहा कि इन लक्ष्यों में “तेहरान शहर के पास या उसके अंदर मौजूद ठिकाने” भी शामिल हैं।

गौरतलब है कि ट्रंप पहले भी ईरान के बिजली संयंत्रों, पानी की सुविधाओं और दूसरे बुनियादी ढांचों पर हमला करने की धमकी दे चुके हैं। जानकारों ने चेतावनी दी है कि ऐसे हमले अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत युद्ध अपराध की श्रेणी में आ सकते हैं।

इससे पहले बुधवार को, सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मार्को रुबियो ने ईरान पर आरोप लगाया कि वह अमेरिका के साथ समझौता करने को लेकर “गंभीर” नहीं है, साथ ही उन्होंने दोहराया कि वॉशिंगटन मध्य पूर्व में “कूटनीति के लिए प्रतिबद्ध” है।

उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने लगातार 11वीं रात ईरानी ठिकानों पर हमले किए हैं। अमेरिका का कहना है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से सुरक्षित और खुला करने की कोशिश कर रहा है। यह रास्ता वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और युद्ध के दौरान ईरान के लिए दबाव बनाने का एक बड़ा साधन बन गया है।

CENTCOM ने बताया कि उसने मिलिट्री ऑपरेशन सेंटर, ड्रोन स्टोर करने की जगहों और मिलिट्री लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले किए।

फिलीपींस में आसियान (ASEAN) विदेश मंत्रियों की बैठक में बोलते हुए, रुबियो ने कहा कि तेहरान और वॉशिंगटन के बीच एक मुख्य विवाद यह है कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में ट्रैफिक को नियंत्रित करने का “अधिकार मांगता है”, जबकि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत उसे यह अधिकार नहीं है।

रुबियो ने चेतावनी देते हुए कहा, “अगर हम मध्य पूर्व में एक ऐसी मिसाल कायम करते हैं, जहां कोई राष्ट्र किसी अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर नियंत्रण करने, शुल्क वसूलने और भुगतान न करने पर आपके जहाजों को उड़ाने का फैसला कर सकता है, तो हमने एक बहुत ही खतरनाक मिसाल कायम कर दी है, जो दुनिया के अन्य हिस्सों में, इस क्षेत्र सहित, दोहराई जाएगी।”

रुबियो ने अप्रत्यक्ष रूप से चीन की ओर इशारा करते हुए कहा कि “दुनिया के सभी क्षेत्रों में से, यह वह क्षेत्र है जहां मुझे अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में नौवहन की स्वतंत्रता के महत्व के बारे में सिखाने की आवश्यकता नहीं है।”

बाद में दिन में दिए गए अलग-अलग बयानों में, रुबियो ने कहा कि वाशिंगटन युद्ध को समाप्त करने के लिए बातचीत करने को तैयार है।

उन्होंने कहा, “अमेरिका कूटनीतिक समझौते तक पहुंचना चाहता है। अगर ईरान के साथ ऐसा कोई समझौता संभव हो, जिसमें वह कहे कि हम अब आतंकवाद को समर्थन नहीं देंगे और परमाणु हथियार या उसे बनाने के लिए जरूरी चीजों को आगे नहीं बढ़ाएंगे, तो अमेरिका इसके लिए तैयार है।”

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि “फिलहाल वे डील करने को लेकर गंभीर नहीं लगते।” उन्होंने आगे कहा कि तेहरान ने पिछले महीने हुए समझौते (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग) में कुछ वादे किए थे, “और दो हफ्ते के अंदर ही उन्हें तोड़ दिया।”

अमेरिकी नौसेना ने पहले भी साउथ चाइना सी में विवादित द्वीपों के आस-पास “फ्रीडम ऑफ नेविगेशन” (आजादी से आवाजाही) ऑपरेशन चलाए हैं। इन द्वीपों पर चीन के साथ-साथ कई दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों के भी दावे हैं, जबकि चीन अपनी “नाइन-डैश लाइन” के जरिए लगभग पूरे समुद्र पर अपना अधिकार बताता है।

यह सब ‘परमानेंट कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन’ के 2016 के उस फैसले के बावजूद हो रहा है, जिसमें कहा गया था कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत चीन के दावों का कोई आधार नहीं है। हालांकि, चीन ने इस फैसले को मानने से इनकार कर दिया है।

तेल की कीमतों में उछाल

बुधवार सुबह कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स (सितंबर डिलीवरी) 3.7% बढ़कर 94.33 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) फ्यूचर्स (सितंबर डिलीवरी) में 3.5% की तेजी आई और यह 87.28 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

बता दें कि अमेरिका और ईरान ने 17 जून को एक अंतरिम समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें सैन्य अभियानों को रोकने, होर्मुज को फिर से खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी शर्तों सहित एक स्थायी समझौते पर बातचीत के लिए 60 दिन का समय तय करने की बात कही गई थी। लेकिन इस दस्तावेज में होर्मुज के भविष्य के प्रबंधन का मुद्दा अनसुलझा ही रह गया।

ईरान ने इस बात का मतलब यह भी निकाला कि होर्मुज (स्ट्रेट) से गुजरने वाले ट्रैफिक को मैनेज करने में तेहरान की भूमिका है और शुरुआती 60 दिनों के बाद समुद्री सेवाओं के लिए शुल्क भी लिया जा सकता है, लेकिन अमेरिका का कहना था कि यह जलमार्ग बिना किसी अनिवार्य ईरानी शुल्क या प्रतिबंध के खुला रहना चाहिए।

ईरान और ओमान – जिनकी सीमाएं भी होर्मुज जलडमरूमध्य से लगती हैं – ने 23 जून को एक संयुक्त बयान में कहा कि “होर्मुज से जुड़ी सभी व्यवस्थाओं में जलडमरूमध्य के दोनों तटीय देशों की संप्रभुता और संप्रभु अधिकारों का पूरा सम्मान किया जाना चाहिए।”

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‘हॉर्मुज स्ट्रेट कब्जे में लेगा अमेरिका’, ट्रंप बोले- जहाजों से वसूलेंगे पेट्रोलिंग चार्ज; ईरान पर समझौता तोड़ने का आरोप लगाया

Trump Iran Conflict: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि अमेरिका स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) का नियंत्रण अपने हाथ में लेगा। उन्होंने ईरान पर दोनों देशों के बीच हुए अंतरिम समझौते को तोड़ने का आरोप भी लगाया। यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका और ईरान लगातार दूसरे दिन एक-दूसरे पर मिसाइल और ड्रोन हमले कर रहे हैं।

ट्रंप ने ईरान पर क्या कहा?

Fox News से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका हॉर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा करेगा। उन्होंने कहा, “हम हॉर्मुज का नियंत्रण अपने हाथ में ले रहे हैं। हम इसकी रक्षा करेंगे। हो सकता है कि भविष्य में यहां से गुजरने वाले जहाजों से सुरक्षा के बदले शुल्क भी लिया जाए।”

ट्रंप ने यह भी आरोप लगाया कि हालिया समझौते को ईरान ने तोड़ा। उनके मुताबिक, समझौता होने के बेहद करीब था, लेकिन ईरान ने बाद में ड्रोन हमला कर दिया।

दोनों देशों के बीच फिर हमले

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि उसने बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला किया। ईरान ने ओमान में रडार सिस्टम और जॉर्डन के प्रिंस हसन एयर बेस के ईंधन भंडार और गोला-बारूद डिपो को भी निशाना बनाने का दावा किया। वहीं, बहरीन, कुवैत और जॉर्डन ने कहा कि उनके एयर डिफेंस सिस्टम ने कई मिसाइलों और ड्रोन को हवा में ही मार गिराया।

दूसरी ओर, अमेरिकी सेना ने कहा कि उसने ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, तटीय रडार, मिसाइल और ड्रोन ठिकानों के साथ-साथ छोटी नौकाओं को भी निशाना बनाया। इन हमलों में लड़ाकू विमान, नौसैनिक जहाज और ड्रोन का इस्तेमाल किया गया।

हॉर्मुज स्ट्रेट पर तनाव बढ़ा

दुनिया के करीब 20% कच्चे तेल की सप्लाई हॉर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरती है। ऐसे में यहां बढ़ा तनाव पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार के लिए चिंता का विषय बन गया है।

ईरान के सरकारी मीडिया का दावा है कि उसकी नौसेना ने हॉर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे दो जहाजों पर चेतावनी के तौर पर फायरिंग की और उन्हें रोक दिया। वहीं, अमेरिका का कहना है कि उसकी सुरक्षा में इस रास्ते से व्यापारिक जहाजों की आवाजाही जारी है।

तेल की कीमतों में उछाल

तनाव बढ़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया। ब्रेंट क्रूड एक समय 5% तक चढ़ गया, जबकि बाद में इसकी बढ़त करीब 3.5% रह गई। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड में भी अच्छी तेजी देखने को मिली। निवेशकों को डर है कि अगर हॉर्मुज में संकट और गहराया, तो वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित हो सकती है।

बातचीत के दरवाजे अभी खुले

सैन्य तनाव के बीच ईरान ने कहा है कि वह कतर, पाकिस्तान और ओमान के मध्यस्थों के संपर्क में है और संघर्ष को और बढ़ने से रोकने की कोशिश जारी है। हालांकि, ईरान ने अमेरिका पर कूटनीतिक प्रयासों को कमजोर करने का आरोप लगाया है। वहीं, ट्रंप अब भी दावा कर रहे हैं कि समझौता लगभग हो चुका था, लेकिन ईरान ने उसे तोड़ दिया।

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फिर बंद कर दिया होर्मुज? ईरान ने बताई पूरी सच्चाई, लेबनान पर इजरायल के हमले से बढ़ा तनाव!

ईरान ने शुक्रवार को उन खबरों का खंडन किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद कर दिया गया है। ईरान ने कहा कि 18 जून को अमेरिका के साथ हुए युद्धविराम समझौते के तहत इस अहम जलमार्ग से कमर्शियल शिपिंग जारी है। सरकारी ब्रॉडकास्टर ‘प्रेस टीवी’ से बात करते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने इन दावों को “बेबुनियाद” और गलत बताया।

बघाई ने स्ट्रेट के बंद होने की खबरों को खारिज करते हुए कहा कि MoU पर हस्ताक्षर के बाद, तेहरान ने सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि इस जलमार्ग से जहाजों की आवाजाही “फिलहाल सामान्य रूप से चल रही है”।

दरअसल कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में ये दावा किया गया था कि ईरान की नौसेना ने अचानक एक बहुत बड़ा और चौंकाने वाला ऐलान कर दिया। ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) को दोबारा पूरी तरह बंद कर दिया है।

रिपोर्ट में कहा गया कि ईरान ने साफ कहा है कि जब तक इजरायल लेबनान से अपनी सेना नहीं हटाता और अमेरिका इस इलाके को खाली नहीं करता, तब तक यह रास्ता बंद रहेगा।

दावा- ईरान ने दी थी खुली धमकी!

इसमें बताया गया कि समुद्री रेडियो चैनलों पर ईरान के सबसे खतरनाक सैन्य संगठन इरेक्ट (IRGC – इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) ने एक बयान जारी कर अमेरिका पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया है। ईरान का कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन के बीच बुधवार को जो समझौता हुआ था, अमेरिका उसका पालन नहीं कर रहा है।

ईरानी सेना ने सख्त लहजे में चेतावनी दी, “क्योंकि लेबनान से इजरायल की वापसी, समुद्री नाकाबंदी को पूरी तरह हटाना और अमेरिकी आतंकवादी ताकतों का फारस की खाड़ी से बाहर निकलना हमारी मुख्य शर्तें थीं, इसलिए जब तक ये शर्तें पूरी नहीं होतीं, ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ बंद रहेगा। सभी जहाजों से अनुरोध है कि वे अपनी सुरक्षा के लिए इस रास्ते के पास न आएं। अगर किसी भी जहाज ने इस आदेश को मानने से इनकार किया, तो उसे सीधे निशाना बनाया जाएगा (यानी उड़ा दिया जाएगा)।”

आपको बता दें कि दुनिया का लगभग 20% (पांचवां हिस्सा) तेल और गैस का व्यापार इसी रास्ते से होता है। इसी साल 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद भी इसे बंद कर दिया गया था, जिससे दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल और गैस के दाम आसमान पर पहुंच गए थे।

लेबनान पर इजरायल के हमले से नाराज हुआ ईरान!

बताया गया कि ईरान के इस गुस्से के पीछे इजरायल का लेबनान पर किया गया ताजा हमला है। अमेरिका-ईरान डील के तहत यह माना जा रहा था कि इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच भी जंग रुक जाएगी। लेकिन कल आधी रात से इजरायल ने लेबनान के 11 शहरों पर भीषण हवाई हमले किए, जिसमें कम से कम 18 लोगों की मौत हो गई और 33 घायल हो गए।

इस बीच, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कह दिया है कि उनकी सेना “जब तक जरूरी होगा” लेबनान में ही रहेगी। वहीं, इजरायल के धुर दक्षिणपंथी मंत्री इतामार बेन ग्विर ने सोशल मीडिया पर लिख दिया कि “पूरे लेबनान को जल जाना चाहिए।” इस पर ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक्ची ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “यह किसी मामूली पागल का बयान नहीं है, बल्कि इजरायली सरकार के सुरक्षा मंत्री की सोच है। तेल अवीव (इजरायल) में बैठी यह सरकार पूरी मानवता के लिए खतरा है और इसका मकसद सिर्फ स्थायी युद्ध (Permanent War) करना है।”

अमेरिका का दावा: “हमने तो रास्ता खोल दिया था”

दूसरी तरफ, अमेरिका की सेंट्रल कमांड ने गुरुवार को ही ऐलान किया था कि उसने पिछले दो महीनों से ईरानी बंदरगाहों पर लगाई गई अपनी नाकाबंदी को आधिकारिक रूप से हटा लिया है। ऐसे में अमेरिका के लिए यह समझना मुश्किल हो रहा है कि ईरान किस अधूरी नाकाबंदी की बात कर रहा है।

यहां तक कि समुद्री जहाजों पर नजर रखने वाली एजेंसी ‘AXSMarine’ के मुताबिक, इस समझौते के तुरंत बाद गुरुवार को रिकॉर्ड 25 कमर्शियल जहाज इस रास्ते से सुरक्षित गुजरे थे, जो पिछले दो महीनों में सबसे बड़ी संख्या थी। लेकिन अब ईरान के इस नए कदम ने पूरी दुनिया को एक बार फिर महायुद्ध और भयंकर आर्थिक संकट के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है।

मोजतबा खामेनेई का बड़ा दावा, ईरान डील के लिए ‘बेताब’ ट्रंप ने हर तरह के हथकंडे अपनाए

India AI Impact Summit 2026 का चौथा दिन: जब मंच पर आमने-सामने आए धुर विरोधी; Prime Minister Narendra Modi के कहने पर भी नहीं मिलाए सैम ऑल्टमैन और डारियो अमोदेई ने हाथ

 'AI इम्पैक्ट समिट' के चौथे दिन एक दिलचस्प नजारा देखने को मिला, जिसने तकनीक की दुनिया में जारी खींचतान को कैमरे के सामने ला दिया। समिट के दौरान जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एकजुटता दिखाने के लिए मंच पर मौजूद सभी वक्ताओं से एक-दूसरे का हाथ थामकर ऊपर उठाने का आग्रह किया, तो लगभग सभी दिग्गज अधिकारियों ने इसे सहर्ष स्वीकार किया।

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लेकिन इस दौरान सिलिकॉन वैली की सबसे बड़ी प्रतिद्वंद्विता भी साफ झलक उठी। OpenAI के सैम ऑल्टमैन और Anthropic के डारियो अमोदेई एक-दूसरे के बगल में तो खड़े थे, लेकिन उन्होंने हाथ नहीं मिलाए।

दिखी प्रतिद्वंद्विता की लकीर

AI की रेस में एक-दूसरे को पछाड़ने में जुटे ये दोनों दिग्गज प्रधानमंत्री के इशारे के बावजूद अपनी मुट्ठियाँ अलग-अलग रखे नजर आए। जहाँ बाकी लोग एक-दूसरे का हाथ थामकर एकजुटता का संदेश दे रहे थे, वहीं ऑल्टमैन और अमोदेई ने दूरी बनाए रखना ही बेहतर समझा।

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ऑल्टमैन के चेहरे पर दिखी असहजता

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, इस दौरान सैम ऑल्टमैन काफी असहज नजर आ रहे थे। जब प्रधानमंत्री मोदी सभी को हाथ जोड़ने का संकेत दे रहे थे, तब ऑल्टमैन ने अन्य लोगों का अनुसरण करने के बजाय अपनी नजरें दूसरी ओर फेर लीं। तकनीक की दुनिया के दो सबसे बड़े प्रतिस्पर्धियों के बीच का यह 'कोल्ड वॉर' अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। Edited by : Sudhir Sharma